भारत में जिलों की सूची

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सांचे[संपादित करें]


दमन और दीव में दो जिले हैं:

वर्ष १९६१ तक यह केन्द्रशासित प्रदेश पुर्तगाल के अधीन था।[1]

इन नाम के शहरों हेतु देखें: दमन और दीव

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. [1] Archived 4 मार्च 2016 at the वेबैक मशीन.दमन एवं दीव - भारत सरकार के आधिकारिक जालस्थल पर

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

दादरा और नगर हवेली
દાદરા અને નગરહવેલી

भारत के मानचित्र पर दादरा और नगर हवेली દાદરા અને નગરહવેલી

भारत का केन्द्र-शासित प्रदेश
राजधानी सिलवास
सबसे बड़ा शहर सिलवास
जनसंख्या 3,43,709
 - घनत्व 700 /किमी²
क्षेत्रफल 491 किमी² 
 - ज़िले 1
राजभाषा हिन्दी, गुजराती,
मराठी[1]
गठन 11 अगस्त 1961
सरकार
 - प्रशासक प्रफुल्ल खोदा पटेल
 - उपराज्यपाल
 - मुख्यमंत्री
 - विधानमण्डल
 - भारतीय संसद लोक सभा (1 सीट)
 - उच्च न्यायालय मुंबई उच्च न्यायालय
डाक सूचक संख्या 396
वाहन अक्षर DN
आइएसओ 3166-2 IN-DN
www.dnh.nic.in


दादरा और नगर हवेली (गुजराती: દાદરા અને નગર હવેલી, मराठी: दादरा आणि नगर हवेली, पुर्तगाली : Dadrá e Nagar Aveli) भारत का एक केंद्रशासित प्रदेश हैं। यह दक्षिणी भारत में महाराष्ट्र और गुजरात के बीच स्तिथ है, हालाँकि दादरा, जो कि इस प्रदेश कि एक तालुका है, कुछ किलोमीटर दूर गुजरात में स्तिथ एक विदेशी अन्तः क्षेत्र है। सिलवासा इस प्रदेश की राजधानी है। यह क्षेत्र दमन से १० से ३० किलोमीटर दूर है। [2]

इस प्रदेश पर १७७९ तक मराठाओं का और फिर १९५४ तक पुर्तगाली साम्राज्य का साशन था। इस संघ को भारत में ११ अगस्त १९६१ में शामिल किया गया।[3] २ अगस्त को मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।[4]

दादरा और नगर घवेली प्रमुख रूप से ग्रामीण क्षेत्र है जिसमे ६२% से अधिक आदिवासी रहते है।[5] संघ राज्य क्षेत्र ४० प्रतिशत हिस्सा आरक्षित वनों से घिरा है जो नाना प्रकार के वनस्पति और पशु को निवास प्रदान करते है।[6] समुद्री तट से समीपता के कारण, गर्मियों में तापमान ज्यादा ऊपर नहीं जाता। दमनगंगा यहाँ की प्रमुख नदी है जो अरब सागर में जाकर मिलती है।

घने वन तथा अनुकूल जलवायु को देखते हुए यहाँ पर्यटन क्षेत्र को उच्‍च प्राथमिकता दी गई है। यत्रिओ के ठहरने के लिए अनेक होटल्स और रेसोर्ट्स मौजूद है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर साल तारपा उत्सव, पतंग उत्सव और विश्व पर्यटन दिवस आदि आयोजित किए जाते हैं।[3] पर्यटन स्थल होने के साथ साथ ये एक महत्वपूर्ण ओद्योगिक केंद्र भी है। प्रदेश में कुल तीन ओद्योगिक व्ययस्थापन मौजूद हैं जिनमे कुल २९० प्लाट हैं।[7]

इतिहास[संपादित करें]

दादरा और नगर हवेली का गहरा इतिहास हमलावर राजपूत राजाओं द्वारा क्षेत्र के कोली सरदारों की हार के साथ शुरू होता है। मराठों ने राजपूतों को हरा कर १८वीं सदी के मध्य में अपना शासन स्थापित किया। मराठों और पुर्तगालियों के बीच लंबे संघर्ष के बाद १७ दिसम्बर १७७९ को मराठा पेशवा माधव राव II[8][9] ने मित्रता सुनिशचित करने के खातिर इस प्रदेश के ७९ गावों को १२,००० रुपए का राजस्व क्षतिपूर्ति के तौर पर पुर्तगालियों को सौंप दिया। जनता द्वारा २ अगस्त,१९५४ को मुक्त कराने तक पुर्तगालियों ने इस प्रदेश पर शासन किया। १९५४ से १९६१ तक यह प्रदेश लगभग स्वतंत्र रूप से काम करता रहा जिसे ‘स्वतंत्र दादरा एंव नगर हवेली प्रशासन’ ने चलाया। लेकिन ११ अगस्त १९६१ को यह प्रदेश भारतीय संघ में शामिल हो गया और तब से भारत सरकार एक केंद्रशासित प्रदेश के रूप में इसका प्रशासन कर रही है। पुर्तगाल के चंगुल से इस क्षेत्र की मुक्ति के बाद से ‘वरिष्ठ पंचायत’ प्रशासन की परामर्शदात्री संस्था के रूप में कार्य कर रही थी परंतु इसे १९८९ में भंग कर दिया गया और अखिल भारतीय स्तर पर संविधान संशोधन के अनुरूप दादरा और नगर हवेली जिला पंचायत और ११ ग्राम पंचायतों की एक प्रदेश परिषद गठित कर दी गई।[3]

पुर्तगाली शासन से मुक्ति[संपादित करें]

दादर के राजा टोफ़ाइज़न (1780)

भारत की १९४७ में आजादी के बाद, पुर्तगाली प्रान्तों में सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी तथा दुसरे स्थानों के बसे भारतीयों ने गोवा, दमन, दिउ, दादरा एवं नगर हवेली के मुक्ति का विचार पाला।[10] भारत के स्वतंत्र होने से पहले से ही महात्मा गाँधी की भी यही विचारधारा थी और उन्होने ये पुष्टि भी की - "गोवा (व अन्य अस्वतंत्र इलाके) को मौजूद मुक्त राज्य (भारत) के कानूनों के विरोध में एक अलग इकाई के रूप में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।[11]

जब भारत ने २६ जनवरी १९५० को गणतंत्रता हासिल की तब फ़्रांसिसी सरकार ने भारत के पूर्वी तट पर अपनी क्षेत्रीय संपत्ति खाली करने का निर्णय लिया परन्तु पुर्तगाली सरकार ने तब भी भारत में अपने जड़ गड़ाए रखे। फलस्वरूप गोवा, दादरा, नगर हवेली तथा अन्य क्षेत्रों में स्वतंत्रता आन्दोलन और गहरा हो गया। फिर लिस्बन में एक भारतीय दूतावास खोला गया ताकि गोवा के हस्तांतरण पर चर्चा की जा सके। लेकिन पुर्तगाली सरकार ने ना ही सिर्फ गोवा की मुक्ति के बारे में बात करने से मना कर दिया बल्कि उन्होंने पहले से ही लागु दमनकारी उपायों को परिक्षेत्रों में तेज कर दिया। १९५३ मे पुर्तगाली सरकार से समझौते के लिए एक और प्रयास किया गया - इस बार उन्हें ये भी आश्वासन दिलाया गया कि परिक्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान उनके स्थानांतरण के बाद भी संरक्षित रहेगी और कानूनों व रीति रिवाजों को भी अपरिवर्तित रखा जायेगा। फिर भी वे पहले की तरह अपने हठ पर कायम बने रहे और यहां तक कि भारत द्वारा की गई पहल का जवाब देने से भी इनकार कर गए। फलस्वरूप लिस्बन में स्तिथ भारतीय दूतावास को जून १९५३ में बंद कर दिया गया।[12]

गोवा सरकार के एक बैंक कर्मचारी - अप्पासाहेब कर्मलकर ने नेशनल लिबरेशन मूवमेंट संगठन (NLMO) की बागडोर संभाली ताकि वोह पुर्तगाली-सशैत प्रदेशों को मुक्ति दिला सकें। साथ ही साथ आजाद गोमान्तक दल(विश्वनाथ लावंडे, दत्तात्रेय देशपांडे, प्रभाकर सीनरी और श्री. गोले के नेतृत्व में), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (रजा वाकणकर और नाना कजरेकर के नेतृत्व में) के स्वयंसेवक दादरा और नगर हवेली को मुक्त कराने के लिए सशस्त्र हमले की तय्यारी कर रहे थे। वाकणकर और काजरेकर ने स्थलाकृति अध्ययन और स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं, जो पुर्तगाली क्षेत्र की मुक्ति के लिए आंदोलन कर रहे थे, से परिचय के लिए १९५३ में दादरा और नगर हवेली का कई बार दौरा किया। अप्रैल, १९५४ में तीनो संगठनो ने मिलकर एक संयुक्त मोर्चा (युनाइटेड फ्रंट) निकाला और एिंल्फसटन बगीचे कि एक बैठक में, एक सशस्त्र हमले की योजना बनाई। स्वतंत्र रूप से, एक और संगठन, युनाइटेड फ्रंट ऑफ गोअन्स ने भी इसी तरह की एक योजना बनाइ।[10]

दादरा की मुक्ति[संपादित करें]

फ्रांसिस मैस्करेनहास और विमान देसी के नेतृत्व में युनाइटेड फ्रंट ऑफ गोअन्स के करीब १५ सदस्यों ने २२ जुलाई १९५४ की रात को दादरा पुलिस स्टेशन में हमला बोला। उन्होंने उप-निरीक्षक अनिसेतो रोसारियो की हत्या कर दी।[13] अगले ही दिन पुलिस चौकी पर भारतीय तिरंगा फहराया गया और दादरा को मुक्त प्रान्त घोषित कर दिया गया। जयंतीभाई देसी को दादरा के प्रशाशन हेतु पंचायत का मुखिया बना दिया गया।

नारोली की मुक्ति[संपादित करें]

२८ जुलाई १९५४ को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और आज़ाद गोमान्तक दल के स्वयंसेवक ने नारोली के पुलिस चौकी पर हमला बोला और पुर्तगाली अफसरों को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया और नारोली को आजाद किया। अगले दिन, २९ जुलाई को स्वतंत्र नारोली की ग्राम पंचायत की स्थापना हुई।[10]

सिलवासा की मुक्ति[संपादित करें]

कप्तान फिदाल्गो के नेतृत्व में अभी भी पुर्तगाली सेना ने नगर हवेली में स्तिथ सिलवासा में अड्डा जमाया हुआ था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और आज़ाद गोमान्तक दल के स्वयंसेवकों ने मौका देखते ही सिलवासा की परिधि में स्थित पिपरिया पर कब्जा जमा लिया। करीब आते देख कप्तान फिदल्गो ने स्वतंत्रता सेनानियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी परन्तु वे सिलवासा की और बढ़ चले। अपने निश्चित पराजय को देखते हुए कप्तान फिदल्गो १५० सेन्य करमचारियों के साथ सिलवासा से १५ किमी दूर खान्वेल भाग गए। २ अगस्त १९५४ को सिलवासा मुक्त घोषित कर दिया गया।[10]

कप्तान फिदाल्गो, जो नगर हवेली के अंदरूनी हिस्से में छुपे थे, को आखिरकार ११ अगस्त १९५४ में आत्मसमर्पण करना पड़ा। एक सार्वजनिक बैठक में कर्मलकर को प्रथम प्रशाशक के रूप में चुना गया।

भारत में संयोजन[संपादित करें]

स्वतंत्र होने के बावजूद, अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय द्वारा दादरा-नगर हवेली को पुर्तगाली संपत्ति के रूप में मान्यता प्राप्त थी।[14]

१९५४ से १९६१ तक, दादरा और नगर हवेली वरिष्ठ पंचायत द्वारा संचालित एक मुक्त प्रदेश रहा। १९६१ में जब भारत ने गोवा को मुक्त किया तब श्री बदलानी को एक दिन के लिए राज्य-प्रमुख बनाया गया। उन्होंने तथा भारत के प्रधान मंत्री, जवाहर लाल नेहरु, ने एक समझौते पर हस्ताक्षार किया और दादरा और नगर हवेली औपचारिक रूप से भारत में संयोजित कर दिया।

भूगोल[संपादित करें]

दादर और नागर हवेली का मानचित्र

यह केंद्र-साशित प्रदेश दो भिन्न भौगौलिक क्षेत्रों से बना है - दादरा और नगर हवेली। यह कुल ४९१ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह उत्तर-पशिम और पूर्व में वलसाड जिले से और दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में ठाणे और नाशिक जिले से घिरा हुआ है। दादरा और नगर हवेली के ज्यादातर हिस्से पहाड़ी है। इसके पूर्वी दिशा में सहयाद्री पर्वत श्रंखला है। प्रदेश के मध्य क्षेत्र में मैदान है जिसकी मिट्टी अत्यधिक उपजाऊ है। दमनगंगा नदी पश्चिमी तट से ६४ किलोमीटर दूर घाट से निकल कर, दादरा और नगर हवेली को पर करते हुए दमन में अरब सागर से जा मिलती है। इसकी तीन सहायक नदिया - पीरी, वर्ना और सकर्तोंद भी प्रदेश की जल-श्रोत हैं।[15] प्रदेश का लक्भाग ५३% हिस्से में वन है परन्तु केवल ४०% हिस्सा ही आरक्षित वन में गिना जाता है। समृद्ध जैव - विविधता इसे पक्षियों और जानवरों के लिए एक आदर्श निवास स्थान बनाता है। यह इसे पारिस्थितिकी पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है। सिलवासा वन्य जीवन के प्रति उत्साही लोगों के लिए एक उचित पर्यावरण-पर्यटन स्थल।

जलवायु[संपादित करें]

सिलवासा के तापमान और वर्षा का ग्राफ

दादरा और नगर हवेली के जलवायु अपने प्रकार में विशिष्ट है। तट के पास स्थित होने के नाते, यहाँ एक समुद्री जलवायु परिस्थितियां है। ग्रीष्म ऋतु गर्म और नम होती है। मई के महिना सबसे गरम होता है और अधिकतम तापमान 35° तक पहुँच जाता है। वर्षा दक्षिण पश्चिम मानसून हवाएं लती हैं वर्षा ऋतु जून से सितंबर तक रहती है। यहाँ साल में २००-२५० सेमी. वर्षा होती है और इसी कारण इसे पश्चिम भारत का चेरापूंजी कहाँ जाता है। सर्दियाँ काफी सुखद होती है और तापमान १४° से ३०° तक रहता है।[16][17]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (July 2012 to June 2013)" (PDF). Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, Government of India. मूल (PDF) से 8 जुलाई 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 जुलाई 2017.
  2. http://www.dnh.nic.in Archived 9 अगस्त 2019 at the वेबैक मशीन., "Dadra and Nagar Haveli government website"
  3. http://bharat.gov.in/knowindia/state_uts.php?id=33 Archived 14 मई 2012 at the वेबैक मशीन., "History of DNH"
  4. http://dnh.nic.in/leave2007.html Archived 27 नवम्बर 2007 at the वेबैक मशीन., "Public Holidays of D&N.H."
  5. "The Official Tourism Website of Department of Tourism, U.T of Dadra & Nagar Haveli, Silvassa - People of Dadra and Nagar Haveli". मूल से 19 नवंबर 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 फरवरी 2012.
  6. "Visitors guide for Daman, Diu, Dadra and Nagar Haveli" (PDF). "Government of D&N.H and Daman & Diu". पृ॰ 20. मूल (PDF) से 7 नवंबर 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 फरवरी 2012.
  7. "Dadra and Nagar Haveli - Industry". मूल से 22 नवंबर 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 फरवरी 2012.
  8. Mehta, J. L. Advanced study in the history of modern India 1707-1813 Archived 15 मई 2013 at the वेबैक मशीन.
  9. ""History and Geography of Dadra & Nagar Haveli"". मूल से 10 जुलाई 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 फरवरी 2012.
  10. P S Lele, Dadra and Nagar Haveli: past and present, Published by Usha P. Lele, 1987,
  11. "Foreign Settlement in India | Mind of Mahatma Gandhi : Complete Book Online". www.mkgandhi.org. मूल से 2 मार्च 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  12. Singh, Satyindra. Blueprint to Bluewater (PDF). The Indian Navy. मूल से 6 जुलाई 2006 को पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि 25 फरवरी 2012. |author-link1= के मान की जाँच करें (मदद)
  13. "How 18th June road got its name". News Blog. Navbharat Times. मूल से 2 जनवरी 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 फ़रवरी 2012.
  14. "International Court of Justice Reports 1960: 6" (PDF). मूल (PDF) से 20 दिसंबर 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 09 मार्च 2012. |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  15. "Dadra and Nagar Haveli - Land, Climate and transport". मूल से 12 जून 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 जून 2012.
  16. "Silvassa | Climate". मूल से 14 जून 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 जून 2012. पाठ "Weather" की उपेक्षा की गयी (मदद); पाठ "Temperature" की उपेक्षा की गयी (मदद); पाठ "Clothing" की उपेक्षा की गयी (मदद); पाठ "Best Time to Visit Silvassa" की उपेक्षा की गयी (मदद)
  17. "SILVASSA Weather, Silvassa Weather Forecast, Temperature, Festivals, Best Season:". tourism. मूल से 26 जून 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 13 जून 2012.
लक्षद्वीप
केन्द्र-शासित प्रदेश
जिला
Lakshadweep - Agatti Islands.jpg
Bangaram Island, Lakshadweep 20160325- DSC1780.jpgViringili.jpg
A beach side resort at Kadmat Island, Lakshadweep.jpg
ऊपर से दक्षिणावर्त: अगत्ती द्वीप, विरिंगिली द्वीप, कदमत द्वीप, बंगाराम द्वीप
Official logo of लक्षद्वीप
प्रतीक
Location of लक्षद्वीप
Location of लक्षद्वीप
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देशFlag of India.svg भारत
स्थापना1 नवंबर 1956
राजधानीकवरत्ती
शासन
 • प्रशासकदिनेश्वर शर्मा
 • सांसदमोहम्मद फैज़ल (राकांपा]
क्षेत्रफल
 • कुल32.62 किमी2 (12.59 वर्गमील)
क्षेत्र दर्जा36वां
जनसंख्या (2021 जनगणना)
 • कुल70,365
 • घनत्व2,200 किमी2 (5,600 वर्गमील)
भाषा[1]
 • आधिकारिक भाषामलयालम, अंग्रेजी
 • बोली जाती हैंजेसेरी, दिवेही
जातीयता
 • जातीय समूह≈83% मलयाली
≈17% माह्ल
समय मण्डलभामास (यूटीसी+5:30)
आई॰एस॰ओ॰ ३१६६ कोडIN-LD
वाहन पंजीकरणLD
जिलों की संख्या1
सबसे बड़ा शहरअन्दरोत
माविसू (2018)Green Arrow Up Darker.svg 0.750 (उच्च) • 4था
साक्षरता91.85%
वेबसाइटlakshadweep.gov.in

लक्षद्वीप (संस्कृत: लक्षद्वीप, एक लाख द्वीप), भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट से 200 से 440 किमी (120 से 270 मील) दूर लक्षद्वीप सागर में स्थित एक द्वीपसमूह है। पहले इन द्वीपों को लक्कादीव-मिनिकॉय-अमिनीदिवि द्वीप के नाम से जाना जाता था। यह द्वीपसमूह भारत का एक केंद्रशासित प्रदेश होने के साथ साथ एक जिला भी है। पूरे द्वीपसमूह को लक्षद्वीप के नाम से जाना जाता है, हालांकि भौगोलिक रूप से यह केवल द्वीपसमूह के केंद्रीय उपसमूह का नाम है। यह द्वीपसमूह भारत का सबसे छोटा केंद्रशासित प्रदेश है और इसका कुल सतही क्षेत्रफल सिर्फ 32 वर्ग किमी (12 वर्ग मील) है, जबकि अनूप क्षेत्र 4,200 वर्ग किमी (1,600 वर्ग मील), प्रादेशिक जल क्षेत्र 20,000 वर्ग किमी (7,700 वर्ग मील) और विशेष आर्थिक क्षेत्र 400,000 वर्ग किमी (150,000 वर्ग मील) में फैला है। इस क्षेत्र के कुल 10 उपखंडों साथ मिलकर एक भारतीय जिले की रचना करते हैं। कवरत्ती लक्षद्वीप की राजधानी है, और यह द्वीपसमूह केरल उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह द्वीपसमूह लक्षद्वीप-मालदीव-चागोस समूह के द्वीपों का सबसे उत्तरी भाग है, और यह द्वीप एक विशाल समुद्रमग्न पर्वतशृंखला चागोस-लक्षद्वीप प्रवाल भित्ति[2] के सबसे उपरी हिस्से हैं।

चूंकि द्वीपों पर कोई आदिवासी आबादी नहीं हैं, इसलिए विशेषज्ञ इन द्वीपों पर मानव के बसने का अलग-अलग इतिहास सुझाते हैं। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार 1500 ईसा पूर्व के आसपास इस क्षेत्र में मानव बस्तियाँ मौजूद थीं। नाविक एक लंबे समय से इन द्वीपों को जानते थे, इसका संकेत पहली शताब्दी ईस्वी से एरिथ्रियन सागर के पेरिप्लस क्षेत्र के एक अनाम संदर्भ से मिलता है। द्वीपों का उल्लेख ईसा पूर्व छठी शताब्दी की बौद्ध जातक कथाओं में भी किया गया है। सातवीं शताब्दी के आसपास मुस्लिमों के आगमन के साथ यहाँ इस्लाम का प्रादुर्भाव हुआ। मध्ययुगीन काल के दौरान, इस क्षेत्र में चोल राजवंश और कैनानोर के साम्राज्य का शासन था। कैथोलिक पुर्तगाली 1498 के आसपास यहाँ पहुंचे, लेकिन 1545 तक उन्हें यहाँ से खदेड़ दिया गया। इस क्षेत्र पर तब अरक्कल के मुस्लिम घराने का शासन था, उसके बाद टीपू सुल्तान का। 1799 में टीपू सुल्तान की मृत्यु के बाद अधिकांश क्षेत्र ब्रिटिशों के पास चले गए और उनके जाने के बाद, 1956 में केंद्र शासित प्रदेश का गठन किया गया।

समूह के सिर्फ दस द्वीपों पर मानव आबादी है। 2011 की भारतीय जनगणना के अनुसार, केंद्रशासित प्रदेश की कुल जनसंख्या 64,473 थी। अधिकांश आबादी स्थानीय मुस्लिमों की है और उनमें से भी ज्यादातर सुन्नी संप्रदाय के शाफी संप्रदाय के हैं। द्वीप समूह जातीय रूप से निकटतम भारतीय राज्य केरल के मलयाली लोगों के समान हैं। लक्षद्वीप की अधिकांश आबादी मलयालम बोलती है जबकि और मिनिकॉय द्वीप पर माही या माह्ल भाषा सबसे अधिक बोली जाती है। अगत्ती द्वीप पर एक हवाई अड्डा मौजूद है। लोगों का मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना और नारियल की खेती है, साथ ही टूना मछली का निर्यात भी किया जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

इस क्षेत्र के शुरुआती उल्लेख एरिथ्रियन सागर के पेरिप्लस के एक अनाम लेखक के लेखों में मिलते है।[3] संगम पाटिरुपट्टू में चेरों द्वारा द्वीपों के नियंत्रण के संदर्भ भी मिलते हैं। स्थानीय परंपराएं और किंवदंतियां के अनुसार इन द्वीपों पर पहली बसावत केरल के अंतिम चेरा राजा चेरामन पेरुमल की काल में हुई थी।[4] समूह में सबसे पुराने बसे हुए द्वीप अमिनी, कल्पेनी अन्दरोत, कवरत्ती और अगत्ती हैं। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि पाँचवीं और छठी शताब्दी ईस्वी के दौरान इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म प्रचलन में था। लोकप्रिय परंपरा के अनुसार, 661 ईस्वी में उबैदुल्लाह द्वारा इस्लाम को लक्षद्वीप पर लाया गया था।[5] उबैदुल्लाह की कब्र अन्दरोत द्वीप पर स्थित है। 11 वीं शताब्दी के दौरान, द्वीपसमूह पर अंतिम चोल राजाओं और उसके बाद कैनानोर के राज्य का शासन था।[6]

16 वीं शताब्दी में, ओरमुज और मालाबार तट और सीलोन के दक्षिण के बीच के समुद्र पर पुर्तगालियों का राज था। पुर्तगालियों ने 1498 की शुरुआत में द्वीपसमूह पर नियंत्रण कर लिया था, और इसका मुख्य उद्देश्य नारियल की जटा से बने माल के दोहन था, 1545 में पुर्तगालियों को द्वीप से भगा दिया गया। 17 वीं शताब्दी में, द्वीप कन्नूर के अली राजा/ अरक्कल बीवी के शासन में आ गए, जिन्होंने इन्हें कोलाथिरिस से उपहार के रूप में प्राप्त किया था। अरब यात्री इब्न-बतूता की कहानियों में द्वीपों का भी विस्तार से उल्लेख है।[7]

1787 में अमिनिदिवि समूह के द्वीप (अन्दरोत, अमिनी, कदमत, किल्तन, चेतलत, और बितरा) टीपू सुल्तान के शासन के तहत आ गए। तीसरे आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद यह ब्रिटिश नियंत्रण में चले गए और इन्हें दक्षिण केनरा से जोड़ा गया। बचे हुए द्वीपों को ब्रिटिश ने एक वार्षिक अदाएगी के बदले में काननोर के को सौंप दिया। अरक्कल परिवार के बकाया भुगतान करने में विफल रहने पर अंग्रेजों ने यह द्वीप फिर से अपने नियन्त्रण में ले लिए। ये द्वीप ब्रिटिश राज के दौरान मद्रास प्रेसीडेंसी के मालाबार जिले से जुड़े थे।[8]

स्वतन्त्र भारत[संपादित करें]

1 नवंबर 1956 को, भारतीय राज्यों के पुनर्गठन के दौरान, प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए लक्षद्वीप को मद्रास से अलग कर एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में गठित किया गया। 1 नवंबर 1973 के नया नाम अपनाने से पहले इस क्षेत्र को लक्कादीव-मिनिकॉय-अमिनीदिवि के नाम से जाना जाता था।[9]

मध्य पूर्व के लिए भारत की महत्वपूर्ण जहाज मार्गों की सुरक्षा के लिए, और सुरक्षा कारणों में द्वीपों की बढ़ती प्रासंगिकता को देखते हुए, एक भारतीय नौसेना आधार, आईएनएस द्वापरक्ष, को कवरत्ती द्वीप पर कमीशन किया गया।[10]

भूगोल[संपादित करें]

लक्षद्वीप द्वीपसमूह में बारह प्रवाल द्वीप (एटोल), तीन प्रवाल भित्ति (रीफ) और पांच जलमग्‍न बालू के तटों को मिलाकर कुल उनतालीस छोटे बड़े द्वीप हैं। प्रवाल भित्ति भी वास्तव में प्रवाल द्वीप ही हैं, हालांकि ज्यादातर जलमग्न हैं, केवल थोड़ा सा वनस्पति रहित रेतीला हिस्सा पानी के निशान से ऊपर है। जलमग्न बालू तट भी जलमग्न प्रवाल द्वीप हैं। ये द्वीप उत्‍तर में 8 अंश और 12.3 अक्षांश पर तथा पूर्व में 71 अंश और 74 अंश देशांतर पर केरल तट से लगभग 280 से 480 कि.मी. दूर अरब सागर में फैले हुए हैं।

मुख्य द्वीप कवरत्ती, अगत्ती, मिनिकॉय और अमिनी हैं। 2001 की जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र की कुल जनसंख्या 60,595 है। अगत्ती में एक हवाई अड्डा है और कोच्चि को सीधी उड़ान जाती है।

भारतीय मूँगे के द्वीप[संपादित करें]

द्वीपों के अमिनीदिवि उपसमूह (अमिनी, केल्तन, चेतलत, कदमत, बितरा, और पेरुमल पार) और द्वीपों के लक्कादिव उपसमूह (जिनमें मुख्य रूप से अंद्रोत, कल्पेनी, कवरती, पित्ती, और सुहेली पार शामिल हैं), दोनों उपसमूह जलमग्न पित्ती बालू तट के माध्यम से आपस में जुड़े हैं। 200 किलोमीटर चौड़ा नाइन डिग्री चैनल के दक्षिणी छोर पर स्थित एक अकेला प्रवाल द्वीप मिनिकॉय द्वीप के साथ मिलकर,यह सब अरब सागर में भारत के कोरल द्वीप समूह का निर्माण करते हैं। यह सभी द्वीप प्रवाल से बने हैं और इनकी झालरादार प्रवाल भित्ति इनके किनारों के बहुत करीब है।

द्वीप समूह के उत्तर में स्थित निम्न दो बालू तटों को समूह का हिस्सा नहीं माना जाता है:

द्वीप, भित्ति और बालू तट को तालिका में उत्तर से दक्षिण के क्रम में सूचीबद्ध किया गया है:

प्रवाल द्वीप/प्रवाल भित्ति/बालू तट
(वैकल्पिक नाम)
प्रकार भूमि
क्षेत्रफल
(किमी2)
अनूप
क्षेत्रफल
(किमी2)
टापुओं
की संख्या
जनसंख्या
जनगणना
2001
अवस्थिति
अमिनीदिवि द्वीपसमूह
कोरा दीव बालू तट - 339.45 - - 13°42′N 72°11′E / 13.700°N 72.183°E / 13.700; 72.183 (Cora Divh)
सेसोस्ट्रिस बालू तट बालू तट - 388.53 - - 13°08′N 72°00′E / 13.133°N 72.000°E / 13.133; 72.000 (Sesostris Bank)
मुनयाल पार
(बासास दे पेद्रो, पदुआ बालू तट)
बालू तट - 2474.33 - - 13°07′N 72°25′E / 13.117°N 72.417°E / 13.117; 72.417 (Bassas de Pedro)
बेलियापानी प्रवाल भित्ति
(चेरबनियानी प्रवाल भित्ति)
प्रवाल भित्ति 0.01 172.59 2 - 12°18′N 71°53′E / 12.300°N 71.883°E / 12.300; 71.883 (Cherbaniani Reef)
चेरियापानी प्रवाल भित्ति
(बिरमगोर प्रवाल भित्ति)
प्रवाल भित्ति 0.01 57.46 1 - 11°54′N 71°49′E / 11.900°N 71.817°E / 11.900; 71.817 (Byramgore Reef)
चेतलत द्वीप प्रवाल द्वीप 1.14 1.60 1 2,289 11°42′N 72°42′E / 11.700°N 72.700°E / 11.700; 72.700 (Chetlat Island)
बितरा द्वीप प्रवाल द्वीप 0.10 45.61 2 264 11°33′N 72°09′E / 11.550°N 72.150°E / 11.550; 72.150 (Bitrā Island)
किल्तन द्वीप प्रवाल द्वीप 2.20 1.76 1 3,664 11°29′N 73°00′E / 11.483°N 73.000°E / 11.483; 73.000 (Kiltān Island)
कदमत द्वीप (इलायची) प्रवाल द्वीप 3.20 37.50 1 5,319 11°14′N 72°47′E / 11.233°N 72.783°E / 11.233; 72.783 (Kadmat Island)
एलिकल्पेनी बालू तट बालू तट - 95.91 - - 11°12′N 73°58′E / 11.200°N 73.967°E / 11.200; 73.967 (Elikalpeni Bank)
पेरुमल पार प्रवाल भित्ति 0.01 83.02 1 - 11°10′N 72°04′E / 11.167°N 72.067°E / 11.167; 72.067 (Perumal Par)
अमिनी द्वीप 1) प्रवाल द्वीप 2.59 155.091) 1 7,340 11°06′N 72°45′E / 11.100°N 72.750°E / 11.100; 72.750 (Amini Island)
लक्कादीव द्वीपसमूह
अगत्ती द्वीप 2) प्रवाल द्वीप 2.70 4.84 1 8,000 10°50′N 73°41′E / 10.833°N 73.683°E / 10.833; 73.683 (Agatti Island)
बंगाराम द्वीप 2) प्रवाल द्वीप 2.30 4.84 1 61 10°50′N 73°41′E / 10.833°N 73.683°E / 10.833; 73.683 (Bangaram Island)
पित्ती द्वीप 1) टापू 0.01 155.09 1 - 10°50′N 72°38′E / 10.833°N 72.633°E / 10.833; 72.633 (Pitti Island)
अंद्रोत द्वीप (अन्दरोत) प्रवाल द्वीप 4.90 4.84 1 10,720 10°50′N 73°41′E / 10.833°N 73.683°E / 10.833; 73.683 (Androth Island)
कवरत्ती द्वीप प्रवाल द्वीप 4.22 4.96 1 10,113 10°33′N 72°38′E / 10.550°N 72.633°E / 10.550; 72.633 (Kavaratti Island)
कल्पेनी द्वीप प्रवाल द्वीप 2.79 25.60 7 4,319 10°05′N 73°38′E / 10.083°N 73.633°E / 10.083; 73.633 (Kalpeni Island)
सुहेली पार 3) प्रवाल द्वीप 0.57 78.76 2 - 10°05′N 72°17′E / 10.083°N 72.283°E / 10.083; 72.283 (Suheli Par)
मिनिकॉय प्रवाल द्वीप
अन्वेषक बालू तट बालू तट - 141.78 - - 08°32′N 73°17′E / 8.533°N 73.283°E / 8.533; 73.283 (Investigator Bank)
मिनिकॉय द्वीप 4) प्रवाल द्वीप 4.80 30.60 2 9,495 08°17′N 73°02′E / 8.283°N 73.033°E / 8.283; 73.033 (Minicoy Island)
विरिंगिली द्वीप 4) टापू 0.02 30.60 1 - 08°27′N 73°01′E / 8.450°N 73.017°E / 8.450; 73.017 (Viringili (Maliku Atoll))
लक्षद्वीप   32.69 4203.14 32 60,595 08°16'-13°58'N,
71°44°-74°24'E
1) अमिनी और पित्ती द्वीप पित्ती बालू तट पर स्थित है। इनका अधिकतर भाग घँसा हुआ है और अनूप क्षेत्र 155.09 किमी2है।
2) बंगाराम और अगत्ती द्वीप एक उथली जलमग्न प्रवाल भित्ति से जुड़े हैं।
3) नए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल, अन्यथा निर्जन, लेकिन 1990 की जनगणना में कुल आबादी 61।
4) मिनिकॉय द्वीप और विरिंगिली द्वीप दोनों मलिकू प्रवाल द्वीप पर हैं।

वनस्पति और जीव[संपादित करें]

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सरकार एवं प्रशासन[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "50th Report of the Commissioner for Linguistic Minorities in India" (PDF). 16 July 2014. पृ॰ 109. मूल (PDF) से 8 July 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 6 November 2016.
  2. Ashalatha, B.; Subrahmanyam, C.; Singh, R.N. (31 जुलाई 1991). "Origin and compensation of Chagos-Laccadive ridge, Indian ocean, from admittance analysis of gravity and bathymetry data". Earth and Planetary Science Letters. 105 (1–3): 47–54. डीओआइ:10.1016/0012-821X(91)90119-3. बिबकोड:1991E&PSL.105...47A.
  3. "Marine investigations in the Lakshadweep Islands, India". thefreelibrary.com. मूल से 27 सितम्बर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 अगस्त 2012.
  4. “Lakshadweep & Its People 1992-1993” Planning Department, Govt. Secretariat, Lakshadweep Administration, Kavaratti. Page: 12.
  5. "History". lakshadweep.nic.in. मूल से 14 मई 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 अगस्त 2012.
  6. "Lakshadweep". Encyclopædia Britannica, Inc. मूल से 28 फ़रवरी 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 अगस्त 2012.
  7. Forbes, Andrew D.W. (1979). "South Asia: Journal of South Asian Studies: Volume 2: Sources towards a history of the Laccadive Islands". South Asia: Journal of South Asian Studies. 2: 130–150. डीओआइ:10.1080/00856407908722989.
  8. Logan, William (1887). Malabar Manual. New Delhi: Asian Education Services. पृ॰ 2. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-206-0446-9. मूल से 12 जनवरी 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 नवम्बर 2015.
  9. "Lakshadweep" (English में). World Statesmen. मूल से 1 जुलाई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 अक्टूबर 2016.सीएस1 रखरखाव: नामालूम भाषा (link)
  10. "Navy commissions full-scale station in Lakshadweep". The Hindu. 1 मई 2012. मूल से 3 मई 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 मई 2012.