विकिपीडिया:प्रयोगस्थल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

यज्ञ का वैज्ञानिक विवेचन १

📝 धर्म प्रकाश आर्य

हमारी संस्कृति में यज्ञ को सम्पूर्ण सृष्टि का आधार कहा गया है .मानवीय क्रियाकलापों अथवा अन्य किसी कार्यों से आये प्रकृति मे असंतुलन अथवा खराबी को ठीक करने एवं उसकी संवर्धन व संरक्षण के लिए हमारे ऋषि - महर्षियों ने अपने वैदिक ज्ञान के आधार पर उस परम पिता परमेश्वर के आदेश(यज्ञ करना) को सामान्य लोगों के सामने रखा और खुद भी इस पुनीत कार्य को करते हुए इस से होने वाले लाभों को अध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या कर लोगों को अवगत कराया . हमारी संस्कृति मे हर शुभ कार्यों मे यज्ञ करने की परंपरा है चाहे वह सोलह संस्कार हो अथवा कोई पर्व हर कार्य की शुरुआत प्राय : यज्ञ द्वारा की जाती है , इन सब बातों से सहज ही पता चलता है कि यज्ञ का कितना महत्व रहा होगा और अभी भी है. परन्तु दुर्भाग्य है कि उसी ऋषियों के संतान आज उन ऋषि- महर्षियों की महत्वपूर्ण खोज "यज्ञ" पर आज बुद्धि मे आई जड़ता की वजह से कुतर्क करता है . तर्क करता तो कुछ देर बहस भी हो सकता है , कुछ अनुसंधान भी हो सकता है परन्तु कुतर्क करता है और कहता है कि यज्ञ मे डाली जाने वाली सामग्री को यदि खाया जाय तो उससे ज्यदा फायदा है , जलाना तो मूर्खता है. कुतर्की कहता कि यज्ञ मे सामग्री व घी आदि को जलाने पर कौन सी गैस बनती है, कौन सी अभिक्रीया होती है , वह कैसे वातावरण को शुद्ध करती है, लोगों के कौन से रोगों को किस प्रकार ठीक करता है आदि . बहुत दुख की बात है कि इन सारे प्रश्नों का जबाब हमारे ऋषियों ने बताये है भले ही उनकी भाषा आज की भाषा से अलग हो , उनके समय मे विभिन्न गैसों का नामकरण अलग हो , उनमे होने वाले अभिक्रियाओं का नाम अलग हो परन्तु लाभ तो वही है जो आज आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान करके बताएं फिर भी उन मूर्खों को अपने ऋषि के बातों पर विश्वास नही लेकिन प्रतिदिन बदलने वाली आधुनिक विज्ञान के वैज्ञानिकों की बात पर पुर्ण विश्वास है . अब मै सीधा शिर्षक पर आता हूं नही तो लेख बहुत विस्तार हो जाएगी . यह लेख उन पौरानिकों के लिए है जो यज्ञ से होने वाले लाभों पर कुतर्क कर बिना वजह आर्य समाज के प्रति खीझ प्रकट करता है . पता नही पौरानिकों को आर्य समाज का विरोध करना ही उद्देश्य हो गया है शायद इसिलिए यज्ञ जैसे विषय पर भी यदा-कदा व्यर्थ का प्रश्न किया करता है , जबकि यज्ञ का लाभ उसे भी मालूम है . फिर भी मै यज्ञ से होने वाले लाभों का वैज्ञानिक विवेचन करता हूं. यज्ञ मे मुख्यरुप से १८ या उसे से अधिक जड़ी-बुटियों का प्रयोग किया जाता है . जो इस प्रकार है ... बेल , नीम, देवदार, टेसू, गुग्गुल, अश्वगंधा, नारियल, लोंग, तिल, कड़वासेब, नागरमोथा, मखाना, बरगद, गूलर, पीपल, आम, चन्दन, सुगंधित पदार्थों मे मुख्य रुप से केसर, तगार, कस्तूरी, इलायची, जायफल, जावित्री, कपूर आदि, निरोगी घटक के रुप मे घी, दूध, फल, गेहूं, चावल, जौ, तिल , मूंग, चना, अरहर, मसूर आदि तथा मीठे पदार्थों मे सक्कर, सूखे, अंगूर, शहद, छुहारा आदि . इन सभी पदार्थों का कुछ खास अनुपात मे प्रयोग किया जाता है. इन सभी सामग्री का अपना महत्व है सब औषधी है जिसका विस्तृत उपयोग आयुर्वेदीक ग्रंथों मे है . इसलिए इन सभी के प्रयोग और उनसे होने वाले लाभ को मै छोड़ रहा हूं. अब मै इन सभी सामग्री को यज्ञ मे जलाने पर होने वाले लाभों को बताता हूं. 🔥 यज्ञ से उत्पन्न धुएं से खांशी , जुकाम, जलन, सूजन आदि को ठीक किया जाता हैं. 🔥मध्यकालीन युग मे प्लेग जैसी घातक बिमारी को ठीक करने हेतु यज्ञ के धुँए का प्रयोग किया जाता था . 🔥तपेदिक का रोगी यदि यक्ष्मानाशक औषधी से प्रतिदीन हवन करे तो औषधि सेवन की अपेक्षा जल्दी ठीक होते है. 🔥यज्ञ के धुएं से अनेक पौधों के रोगजनक जीवाणु जैसे - बरखोलडेरिया ग्लूमी , कटोबैक्टीरियम लैक्युमफेशियंस, स्यूडोमोनास सीरिन्जी, जैन्थोमोनास कम्पैस्ट्रिस आदि नष्ट हो जाता है. इस पर डॉ. सी. एस. नौटियाल (निदेशक सी. एस. आई. आर. - राष्ट्रिय वनस्पति अनुसंधान संस्थान लखनऊ ) व अन्य शोधकर्ताओं ने वायु प्रतिचयन यंत्र का प्रयोग कर शोध किया और उपरोक्त बात बताई. 🔥 यज्ञ के धुएं से मनुष्य मे रोग फैलाने वाले रोगजनक जीवाणुओं जैसे - कॉर्नीबैक्टीरियम यूरीलाइटिकम, कॉकूरिया रोजिया, स्टेफाइलोकोकस लैन्टस, स्टेफाइलोकोकस जाइलोसस, ऐन्टोरो बैक्टर ऐयरोजोन्स को नष्ट हो जाता है. 🔥वैज्ञानिकों के अनुसार मंत्रों द्वारा उत्पन्न ध्वनि और ऊष्मा दोनो मिलकर विद्युत - चुम्बकीय तरंगें उत्पन्न करता है जो आत्मिक इच्छाओं को लौकिक स्तर पर प्रसारित करने में मदद करती हैं. 🔥यज्ञ मे प्रयोग होने वाले सामग्री का १८०-२००°c पर दहन होने से ऊष्मीय रुप से स्थिर 3-methyl-2H-furo[2,3-C] pyron-2-one यौगिक बनता है जो बीज अंकुरण को उत्तेजित करता है और अंकुरित पौधों को सूक्ष्मजीवों के आक्रमण से बचाता है .

नोट : वैसे तो यज्ञ पांच प्रकार के हैं परन्तु इस लेख की श्रृंखला मे मै जहां भी यज्ञ शब्द का प्रयोग करुं उसका अभिप्राय आप अग्निहोत्र से लें ।

क्रमश :