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गावडापाल, बारह गॉव से बना नाम गावडापाल जहा बारह गॉव के मीणा (डामोर) एक साथ हजारो की संख्या में होली का दहन करते हैं जो पूरे जिले मे प्रसिद्ध है यहा होली का दहन दिन मे किया जाता है ताकि हजारो की भीड़ मे कोई अपराध ना हो पहले यहा रात मे होली का दहन होता था कई हत्या की घटना के बाद होली का दहन दिन मे होने लगा .यहा हनुमान जी कि पुजा के बाद होली का दहन करते है डमोर कई संख्या में गैर नृत्य करते है साथ मे तलवार धारीये आदी हथियार रखते हैं पढे लिखे लोग भी परंपरा अनुसार धोती कुर्ता पहन कर व छापा पगडी बांद कर आते हे यहा अपने दुश्मन से बदला लेने कि परंपरा है 12गॉव के गड्डा गमेती होली के सात फेरे लेता है लोगो का मानना है की यहा गामडिया हनुमान जी सभी बदला लेने वाले लोगो का गुस्सा जेलते है इसलिए हनुमान जी को पसीने के रूप मे मुर्ती से पानी बहता है जिसे झगडा होते होते रूक जाता है कहते है कभी कभी यहा तीस हजार तक की भीड़ होती जनजातिअो की होली मे अक्सर खुन बहता है