सुल्तानपुर जिला

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सुल्तानपुर ज़िला
सुल्तानपुर ज़िला
Uttar Pradesh district location map Sultanpur.svg

उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर ज़िले की अवस्थिति
राज्य उत्तर प्रदेश, Flag of India.svg भारत
प्रशासनिक प्रभाग फैजाबाद
मुख्यालय सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश
क्षेत्रफल 4,436 किमी2 (1,713 वर्ग मील)
जनसंख्या 3,790,922 (2011)
जनसंख्या घनत्व 855 /किमी2 (2,210 /वर्ग मील)
साक्षरता 71.14
लिंगानुपात 1.022
तहसील 7
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र सुल्तानपुर, अमेठी
विधानसभा में सीटें 5
प्रमुख सड़कें 56
आधिकारिक जालस्थल

उत्तर प्रदेश भारत देश का सर्वाधिक जिलों वाला राज्य है, जिसमें कुल 72 जिले हैं। आदिगंगा गोमती नदी के तट पर बसा सुल्तानपुर इसी राज्य का एक प्रमुख जिला है। यहाँ के लोग सामान्यत: वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर और लखनऊ जिलों में पढ़ाई करने जाते हैं। सुल्तानपुर जिले की स्थानीय बोलचाल की भाषा अवधी और खड़ी बोली है।

इतिहास[संपादित करें]

[1] सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश राज्य का एक ऐसा भाग है जहां अंग्रेजी शासन से पहले उदार नवाबों का राज था। पौराणिक मान्यतानुसार आज का सुल्तानपुर जिला पूर्व में गोमती नदी के तट पर मर्यादा पुरुषोत्तम "भगवान श्री राम" के पुत्र कुश द्वारा बसाया गया कुशभवनपुर नाम का नगर था। खिलजी वंश के सुल्तान ने भरों को पराजित करके इस नगर को सुल्तानपुर नाम से बसाया। यहां की भौगोलिक उपयुक्तता और स्थिति को देखते हुए अवध के नवाब सफदरजंग ने इसे अवध की राजधानी बनाने का प्रयास किया था, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सुल्तानपुर का अहम स्थान रहा है। १८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ०९ जून १८५७ को सुल्तानपुर के तत्कालीन डिप्टी-कमिश्नर की हत्या कर इसे स्वतंत्र करा लिया गया था। संग्राम को दबाने के लिए जब अंग्रेजी सेना ने कदम बढ़ाया तो चांदा के कोइरीपुर में अंग्रेजों से जमकर युद्ध हुआ था। चांदा, गभड़िया नाले के पुल, अमहट और कादू नाले पर हुआ ऐतिहासिक युद्ध उत्तर प्रदेश की फ्रीडम स्ट्रगल इन उत्तर प्रदेश नामक किताब में दर्ज तो है लेकिन आज तक उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में कुछ भी नहीं किया गया। न स्तंभ बने न शौर्य-लेख के शिलापट। यहां की रियासतों में मेहंदी हसन, राजा दियरा जैसी रियासतों का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

भूगोल[संपादित करें]

जनपद सुल्तानपुर की उत्तरी सीमा पर फ़ैज़ाबाद एवं अम्बेडकरनगर, उत्तर पश्चिम में बाराबंकी, पूरब मे जौनपुर व आजमगढ़, पश्चिम मे अमेठी व दक्षिण मे प्रतापगढ़ जिला स्थित है। जनपद मे बहने वाली नदी गोमती नदी प्राकृतिक दृष्टि से जनपद को दो भागों में बांटती है। गोमती नदी उत्तर पश्चिम के समीप इस जिले में प्रवेश करती है और टेढ़ी-मेढ़ी बहती हुई दक्षिण पूर्व द्वारिका के निकट जौनपुर मे प्रवेश करती है। इसके अतिरिक्त यहाँ गभड़िया नाला, मझुई नाला, जमुरया नाला, तथा भट गांव ककरहवा, सोभा, महोना आदि झीले हैं। जनपद की भूमि मुख्य रूप से मटियार है।

प्रशासनिक दृष्टि से जनपद सुल्तानपुर चार तहसील- सदर, जयसिंहपुर, कादीपुर और लंभुआ है व 14 विकास खंड- अखंड नगर, दोस्तपुर, करौंदी कला, कादीपुर, मोतिगरपुर, जयसिंहपुर, कुरेभार, प्रतापपुर कमैचा, लंभुआ, भदैया, दूबेपुर, धनपतगंज, कुड़वार व बल्दीराय है।

विभिन्न शहरों से दूरी[संपादित करें]

औद्योगिक क्षेत्र[संपादित करें]

  • जगदीशपुर:- यह क्षेत्र सुल्तानपुर शहर से लगभग ६० किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग सं. ५६ पर स्थित है। निहालगढ़, लखनऊ-वाराणसी मार्ग पर निकटतम रेलवे स्टेशन] है। निहालगढ़ तहसील मुसाफिरखाना से लगभग २७ कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यहाँ "भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड" BHEL नामक एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। यह एक प्रमुख उर्वरक उत्पादक क्षेत्र है। यह स्थान अपने तेल-शोधक कारखाने के लिए भी प्रसिद्ध है।

प्रमुख स्थान[संपादित करें]

  • सुंदर लाल मेमोरियल हॉल:- "सुंदर लाल मेमोरियल हॉल" सुल्तानपुर जिले के क्राइस्ट चर्च के दक्षिणी दिशा की ओर स्थित है। इसका निर्माण महारानी विक्टोरिया की याद में उनकी पहली जयन्ती पर करवाया गया था। वर्तमान समय में इसे विक्टोरिया मंजिल के नाम से जाना जाता है। लेकिन अब इस जगह पर म्युनीसिपल बोर्ड का कार्यालय है।
  • विजेथुवा महावीरन:- सुल्तानपुर स्थित विजेथुवा महावीरन भगवान हनुमान को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ पर पवनपुत्र भगवान हनुमान ने "कालनेमी" नामक दानव का वध किया था। लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए जब हनुमान संजीवनी बूटी लेने के लिए गए थे, तो रावण द्वारा भेजे गए कालनेमी दानव ने उनका रास्ता रोकने का प्रयास किया था। उस समय हनुमान जी ने कालनेमी दानव का वध इसी स्थान पर किया था।
  • धोपाप:- सुल्तानपुर जिले में स्थित धोपाप यहां के प्रमुख स्थलों में से एक है, इसे धोपाप धाम के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां पर भगवान श्रीराम ने लंकेश्वर रावण का वध करने के पश्चात महर्षि वशिष्ठ के आदेशानुसार स्नान किया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति दशहरे के दिन यहां स्नान करता है, उसके सभी पाप गोमती नदी में धुल जाते हैं। यहां एक विशाल मंदिर भी है। काफी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा के लिए आते हैं।
  • कोटव:- यह एक धार्मिक स्थल है। कोटव को कोटव धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर में भगवान शिव की सफेद संगमरमर से बनी खूबसूरत प्रतिमा स्थित है। यहां मंदिर के समीप पर ही एक खूबसूरत सरोवर स्थित है। प्रत्येक वर्ष अक्टूबर और अप्रैल माह में यहां मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान काफी संख्या में भक्त इस सरोवर में स्नान करने के लिए आते हैं।
  • लोहरामऊ:- यह जगह सुल्तानपुर शहर से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। लोहरामऊ यहां के प्रमुख स्थलों में से है। इस जगह पर देवी दुर्गा का भव्य मंदिर स्थित है।
  • कोइरीपुर:- यहां पर श्री हनुमान जी, भगवान शिव शंकर तथा प्रभु श्री राम और माता सीता के अनेकों मंदिर हैं। इन मंदिरों का निर्माण स्थानीय लोगों ने मिलकर करवाया था। पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में काफी संख्या में लोग सम्मिलित होते हैं।
  • पारिजात वृक्ष:- सुल्तानपुर शहर में गोमती नदी के तट पर उद्योग विभाग के परिसर मे यह विशाल वृक्ष उपस्थित है।
  • सतथिन शरीफ:- प्रत्येक वर्ष यहां दस दिन के उर्स का आयोजन किया जाता है। शाह अब्दुल लातिफ और उनके समकालीन बाबा मदारी शाह उस समय के प्रसिद्ध फकीर थे। यहां गोमती नदी के तट पर शाह अब्दुल लातिफ की समाधि स्थित है।

शिक्षण संस्थान[संपादित करें]

  • कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सुल्तानपुर।
  • सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, विवेकानन्द नगर (शास्त्री नगर), सुल्तानपुर।
  • गनपत सहाय परास्नातक विद्यालय, सीताकुंड, सुल्तानपुर।

प्रमुख व्यक्तित्व[संपादित करें]

सुल्तानपुर की ऐतिहासिक दुर्गापूजा[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]