झारखण्ड

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झारखण्ड
भारत का राज्य

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भारत के मानचित्र पर झारखण्ड

राजधानी राँची
सबसे बड़ा शहर जमशेदपुर
जनसंख्या 3,29,88,134
 - घनत्व 414 /किमी²
क्षेत्रफल 79,714 किमी² 
 - ज़िले 24
राजभाषा हिन्दी[1]
गठन 15 नवम्बर 2000
सरकार झारखण्ड सरकार
 - राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू
 - मुख्यमंत्री रघुवर दास (भाजपा)
 - विधानमण्डल एकसदनीय
विधान सभा (82 सीटें)
 - भारतीय संसद राज्य सभा (6 सीटें)
लोक सभा (14 सीटें)
 - उच्च न्यायालय झारखण्ड उच्च न्यायालय
डाक सूचक संख्या 81 से 83
वाहन अक्षर JH
आइएसओ 3166-2 IN-JH
www.jharkhand.gov.in/hi/

झारखण्ड यानी 'झार' या 'झाड़' जो स्थानीय रूप में वन का पर्याय है और 'खण्ड' यानी टुकड़े से मिलकर बना है। अपने नाम के अनुरुप यह मूलतः एक वन प्रदेश है जो झारखंड आंदोलन के फलस्वरूप सृजित हुआ। प्रचुर मात्रा में खनिज की उपलबध्ता के कारण इसे भारत का 'रूर' भी कहा जाता है जो जर्मनी में खनिज-प्रदेश के नाम से विख्यात है।

1930 के आसपास गठित आदिवासी महासभा ने जयपाल सिंह मुंडा की अगुआई में अलग ‘झारखंड’ का सपना देखा. पर वर्ष 2000 में केंद्र सरकार ने 15 नवम्बर (आदिवासी नायक बिरसा मुंडा के जन्मदिन) को भारत का अठ्ठाइसवाँ राज्य बना झारखण्ड भारत के नवीनतम प्रान्तों में से एक है। बिहार के दक्षिणी हिस्से को विभाजित कर झारखंड प्रदेश का सृजन किया गया था। औद्योगिक नगरी राँची इसकी राजधानी है। इस प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में धनबाद, बोकारो एवं जमशेदपुर शामिल हैं।

झारखंड की सीमाएँ उत्तर में बिहार, पश्चिम में उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़, दक्षिण में ओड़िशा और पूर्व में पश्चिम बंगाल को छूती हैं। लगभग संपूर्ण प्रदेश छोटानागपुर के पठार पर अवस्थित है। कोयल, दामोदर, खरगई और सुवर्णरेखा। स्वर्णरेखा यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं। संपूर्ण भारत में वनों के अनुपात में प्रदेश एक अग्रणी राज्य माना जाता है तथा वन्य जीवों के संरक्षण के लिये मशहूर है।

झारखंड क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों एवं धर्मों का संगम क्षेत्र कहा जा सकता है। द्रविड़, आर्य, एवं आस्ट्रो-एशियाई तत्वों के सम्मिश्रण का इससे अच्छा कोई क्षेत्र भारत में शायद ही दिखता है। इस राज्य की गतिविधियाँ मुख्य रूप से राजधानी राँची और जमशेदपुर, धनबाद तथा बोकारो जैसे औद्योगिक केन्द्रों से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।

इतिहास[संपादित करें]

झारखण्ड राज्य की मांग का इतिहास लगभग सौ साल से भी पुराना है जब 1939 इसवी के आसपास जयपाल सिंह जो भारतीय हाकी खिलाड़ी थे और जिन्होंने ओलोम्पिक खेलों में भारतीय हाकी टीम के कप्तान का भी दायित्व निभाया था, ने पहली बार तत्कालीन बिहार के दक्षिणी जिलों को मिलाकर झारखंड राज्य बनाने का विचार रखा था। लेकिन यह विचार 2 अगस्त सन 2000 में साकार हुआ जब संसद ने इस संबंध में एक बिल पारित किया और उसी साल 15 नवम्बर को झारखंड राज्य ने मूर्त रूप ग्रहण किया और भारत के 28 वें प्रांत के रूप में प्रतिष्ठापित हुआ।

इतिहासविदों का मानना है कि झारखंड की विशिष्ट भू-स्थैतिक संरचना, अलग सांस्कृतिक पहचान इत्यादि को झारखंड क्षेत्र को मगध साम्राज्य से पहले से भी एक अलग इकाई के रूप में चिन्हित किया जाता रहा। ऐतिहासिक रूप से झारखंड अनेक आदिवासी समुदायों का नैसर्गिक वास स्थल रहा है। भारतीय संविधान में जिन्हें ‘अनुसूचित जनजाति’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें मुंडा, संथाल, हो, खड़िया, उरांव, असुर, बिरजिया, पहाड़िया आदि प्रमुख आदिवासी समुदाय हैं। इन्हीं आदिवासी समुदायों ने झारखंड के जंगलों साफ कर खेती लायक जमीन बनायी और इस इलाके को इंसानों के रहने लायक बनाया। नागवंशियों, मुसलमानों, अंग्रेजों और अन्य बाहरी आबादी के आने के पूर्व झारखंड क्षेत्र में आदिवासियों की अपनी सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था थी। (देखें: मुंडा मानकी प्रथा)। बाद में मुगल सल्तनत के दौरान झारखंड को कुकरा प्रदेश के नाम से जाना जाता था। 1765 के बाद यह ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया। ब्रिटिश दासता के अधीन यहाँ काफी अत्याचार हुए और अन्य प्रदेशों से आने वाले लोगों का काफी दबदबा हो गया था। इस कालखंड में इस प्रदेश में ब्रिटिशों के खिलाफ बहुत से विद्रोह हुए जिसे आदिवासी विद्रोहों के नाम से सामूहिक रूप से जाना जाता है, इनमें से कुछ प्रमुख विद्रोह थे:-

इन सभी विद्रोहों के भारतीय ब्रिटिश सेना द्वारा फौजों की भारी तादाद से निष्फल कर दिया गया था। इसके बाद 1914 में ताना भगत के नेतृत्व में लगभग छब्बीस हजार आदिवासियों ने फिर से ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ विद्रोह किया था जिससे प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने आजादी के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ किया था।

भौगोलिक स्थिति एवं जलवायु[संपादित करें]

प्रदेश का ज्यादातर हिस्सा छोटानागपुर पठार का हिस्सा है जो कोयल, दामोदर, ब्रम्हाणी, खड़कई, एवं स्वर्णरेखा नदियों का उद्गम स्थल भी है जिनके जलक्षेत्र ज्यादातर झारखण्ड में है। प्रदेश का ज्यादातर हिस्सा वन-क्षेत्र है, जहाँ हाथियों एवं बाघों की बहुतायत है।

मिट्टी के वर्गीकरण के अनुसार, प्रदेश की ज्यादातर भूमि चट्टानों एवं पत्थरों के अपरदन से बनी है। जिन्हें इस प्रकार उप-विभाजित किया जा सकता है:-

  1. लाल मिट्टी, जो ज्यादातर दामोदचर घाटी, एवं राजमहल क्षेत्रों में पायी जाती है।
  2. माइका युक्त मिट्टी, जो कोडरमा, झुमरी तिलैया, बड़कागाँव, एवं मंदार पर्वत के आसपास के क्षेत्रों में पायी जाती है।
  3. बलुई मिट्टी, ज्यादातर हजारीबाग एवं धनबाद क्षेत्रों की भूमि में पायी जाती है।
  4. काली मिट्टी, राजमहल क्षेत्र में
  5. लैटेराइट मिट्टी, जो राँची के पश्चिमी हिस्से, पलामू, संथाल परगना के कुछ क्षेत्र एवं पश्चिमी एवं पूर्वी सिंहभूम में पायी जाती है।

वानस्पतिकी एवं जैविकी[संपादित करें]

झारखंड वानस्पतिक एवं जैविक विविधताओं का भंडार कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। प्रदेश के अभयारण्य एवं वनस्पति उद्यान इसकी बानगी सही मायनों में पेश करते हैं। बेतला राष्ट्रीय अभयारण्य (पलामू), जो डाल्टेनगंज से 25 किमी की दूरी पर स्थित है, लगभग 250 वर्ग किमी में फैला हुआ है। विविध वन्य जीव यथा बाघ, हाथी, भैंसे सांभर, सैकड़ों तरह के जंगली सूअर एवं 20 फुट लंबा अजगर चित्तीदार हिरणों के झुंड, चीतल एवं अन्य स्तनधारी प्राणी इस पार्क की शोभा बढ़ाते हैं। इस पार्क को 1974 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत सुरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया था।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

झारखण्ड की आबादी लगभग 26.90 मिलियन है जिसमें 13.86 मिलियन पुरुष एवं 13.04 मिलियन स्त्री हैं। यहाँ का लिंगानुपात 941 स्त्री प्रति 1000 पुरुष है। यहाँ की आबादी में 28% अनुसूचित जनजाति, 12% अनुसूचित जाति शामिल हैं। प्रतिवर्ग किलोमीटर जनसंख्या का घनत्व लगभग 274 है परंतु इसमें काफी विविधता है क्योंकि राज्य में कहीं कहीं काफी सघन आबादी है तो कहीं वन प्रदेश होने की वजह से घनत्व काफी कम है। गुमला जिले में जहाँ यह मात्र 148 व्यक्ति/वर्ग किमी है तो धनबाद जिले में 1167 व्यक्ति/वर्ग किमी है। [1]

पुरातन काल से ही यह प्रदेश आदिवासी जनजातियों का गृहक्षेत्र रहा है। किसी किसी जिले में तो जनजातिय आबादी ही बहुसंख्यक आबादी है। झारखंड में 33 जनजातिय समूहों का निवास है जिसमें असुर, बैगा, बंजारा, भथुड़ी, बेदिया, बिंझिया, माहली, बिरहोर, बिरिजिया, चेरो, चिक-बराईक, गोंड, गोराईत, हो, करमाली, खैरवार, खोंड, किसान, कोरा, कोरवा, लोहरा, मलपहाड़िया, मुंडा,खड़िया ओरांव, पहाड़िया, सांथाल, सौरिया-पहाड़िया, सावर, भूमिज, कोल एवम कंवर शामिल हैं।

वर्तमान झारखण्ड का भौगोलिक क्षेत्र दक्षिणी बिहार का हिस्सा था। जमशेदपुर, धनबाद एवं राँची जैसे औद्योगिक एवं खनन क्षेत्रों की वजह से पिछले कई दशकों में पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार एवं छत्तीसगढ़ से लोग इस प्रदेश में आते रहे हैं। यद्यपि झारखंड में गरीबी पिछले कुछ सालों 2% की दर से कम हुई है लेकिन भारतीय मानक के अनुसार यह अभी भी काफी पिछड़े क्षेत्रों में गिना जा सकता है।

राज्य की बहुसंख्यक आबादी हिन्दू धर्म (लगभग 81%) मानती है। दूसरे स्थान पर (13.8%) इस्लाम धर्म है एवं राज्य की लगभग 4.1% आबादी ईसाइयत को मानती है। राज्य में अन्य बहुत से धर्मों की मौजूदगी भी है परंतु ये काफी कम हैं।

अर्थतंत्र[संपादित करें]

झारखण्ड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खनिज और वन संपदा से निर्देशित है। लोहा, कोयला, माइका, बाक्साइट, फायर-क्ले, ग्रेफाइट, कायनाइट, सेलीमाइट, चूना पत्थर, युरेनियम और दूसरी खनिज संपदाओं की प्रचुरता की वजह से यहाँ उद्योग-धंधों का जाल बिछा है। खनिज उत्पादों के खनन से झारखंड को सालाना तीस हजार करोड़ रुपये की आय होती है। झारखंड न केवल अपने उद्योग-धंधों में इसका इस्तेमाल करता है बल्कि दूसरे राज्यों को भी इसकी पूर्ति करता है। 2000 में बिहार से विभाजन के पश्चात झारखंड का जीडीपी 2004 में चौदह बिलियन डालर आंका गया था।

उद्योग-धंधे[संपादित करें]

झारखण्ड में भारत के कुछ सर्वाधिक औद्योगिकृत स्थान यथा - जमशेदपुर, राँची, बोकारो एवं धनबाद इत्यादि स्थित हैं। झारखंड के उद्योगों में कुछ प्रमुख हैं :

सरकार एवं राजनीति[संपादित करें]

झारखण्ड के मुखिया यहाँ के राज्यपाल हैं जो राष्ट्रपति द्वार नियुक्त किए जाते हैं परंतु वास्तविक कार्यकारी शक्तियाँ मुख्यमंत्री के हाथों में केन्द्रित होती है जो अपनी सहायता के लिए एक मंत्रीमंडल का भी गठन करता है। राज्य का प्रशासनिक मुखिया राज्य का मुख्य सचिव होता है जो प्रशासनिक सेवा द्वारा चुनकर आते हैं। न्यायिक व्यस्था का प्रमुख राँची स्थित उच्च न्यायलय के प्रमुख न्यायधीश होता है। झारखण्ड भारत के उन तेरह राज्यों में शामिल है जो नक्सलवाद की समस्या से बुरी तरह जूझ रहा है। अभी हाल ही में 5 मार्च 2007 को चौदहवीं लोकसभा से जमशेदपुर के सांसद सुनील महतो, की नक्सवादी उग्रवादियों द्वारा गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। [2]

प्रशासनिक जिला इकाइयाँ[संपादित करें]

राज्य का निर्माण होने के समय झारखण्ड में 18 जिले थे जो पहले दक्षिण बिहार का हिस्सा हुआ करते थे। इनमें से कुछ जिलों को पुनर्गठित करके छह नये जिले सृजित किए गये :- लातेहार, सराईकेला खरसाँवा जामताड़ा साहिबगंज खूँटी एवं रामगढ़। वर्तमान में राज्य में चौबीस जिले हैं झारखंड के जिले:

जिले[संपादित करें]

झारखंड में 24 जिले हैं जो इस प्रकार हैं:-

कोडरमा जिला, गढवा जिला, गिरीडीह जिला, गुमला जिला, चतरा जिला, जामताड़ा जिला, दुमका जिला, देवघर जिला, गोड्डा जिला, धनबाद जिला, पलामू जिला, पश्चिमी सिंहभूम जिला (मुख्यालय:चाईबासा), पूर्वी सिंहभूम जिला (मुख्यालय: जमशेदपुर), बोकारो जिला, पाकुड़ जिला, राँची जिला, लातेहार जिला, लोहरदग्गा जिला, सराइकेला खरसावाँ जिला, साहिबगंज जिला, सिमडेगा जिला, हजारीबाग जिला, खूंटी जिला और रामगढ़ जिला, चास

यह भी देखें:झारखंड का जिलेवार मानचित्र

यातायात[संपादित करें]

झारखण्ड की राजधानी राँची संपूर्ण देश से सड़क एवं रेल मार्ग द्वारा काफी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग 2, 27, 33 इस राज्य से होकर गुजरती है। इस प्रदेश का दूसरा प्रमुख शहर टाटानगर (जमशेदपुर) दिल्ली कोलकाता मुख्य रेलमार्ग पर बसा हुआ है जो राँची से 120 किलोमीटर दक्षिण में बसा है। राज्य का में एकमात्र अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा राँची का बिरसा मुंडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई-अड्डा है जो देश के प्रमुख शहरों; मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और पटना से जुड़ा है। इंडियन एयरलाइन्स और एयर सहारा की नियमित उड़ानें आपको इस शहर से हवाई-मार्ग द्वारा जोड़ती हैं। सबसे नजदीकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कोलकाता का नेताजी सुभाषचंद्र बोस हवाई अड्डा है।

पर्व-त्यौहार[संपादित करें]

पारंपरिक आदिवासी नृत्य

झारखण्ड आदिवासी बहुल राज्य है। इसलिए यहां की संस्कृति में आदिम जीवन का रंग-गंध यहां के सभी पर्व-त्योहारों में बिखरा पड़ा है। हालांकि अंग्रेजी शासन के बाद से ही यहां बाहरी समुदायों की बढ़ती हुई भारी आबादी के कारण, हिन्दू, मुस्लिम एवं अन्य धर्मावलंबियों की सांस्कृतिक छटा भी देखने को मिलते हैं। फिर भी आदिवासी पर्व-त्योहारों की बात ही कुछ और है। आदिवासियों का सबसे बड़ा त्योहार सरहुल है जो मुख्यतः बसंतोत्सव है जो मार्च-अप्रैल महीने में मनाया जाता है। इसके अलावा कुछ प्रमुख अन्य त्योहार इस प्रकार हैं:-

झारखण्ड के लोकनृत्य[संपादित करें]

पाइका छऊ, जदुर, नाचनी, नटुआ, अगनी, चौकारा, जामदा, घटवारी, मतहा

शिक्षा संस्थान[संपादित करें]

झारखण्ड की शिक्षा संस्थाओं में कुछ अत्यंत प्रमुख शिक्षा संस्थान शामिल हैं। जनजातिय प्रदेश होने के बावज़ूद यहां कई नामी सरकारी एवं निजी कॉलेज हैं जो कला, विज्ञान, अभियांत्रिकी, मेडिसिन, कानून और मैनेजमेंट में उच्च स्तर की शिक्षा देने के लिये विख्यात हैं।

झारखण्ड की कुछ प्रमुख शिक्षा संस्थायें हैं :

विश्वविद्यालय

अन्य प्रमुख संस्थान

झारखण्ड के पर्यटन स्थल[संपादित करें]

मुख्य लेख - झारखंड के पर्यटन स्थल

विभूतियाँ[संपादित करें]

संचार एवं समाचार माध्यम[संपादित करें]

राँची एक्सप्रेस एवं प्रभात खबर जैसे हिन्दी समाचारपत्र राज्य की राजधानी राँची से प्रकाशित होनेवाले प्रमुख समाचारपत्र हैं जो राज्य के सभी हिस्सों में उपलब्ध होते हैं। हिन्दी, बांग्ला एवं अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाले देश के अन्य प्रमुख समाचारपत्र भी बड़े शहरों में आसानी से मिल जाते हैं। इसके अतिरिक्त दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक हिन्दुस्तान, खबर मन्त्र, आई नेक्स्ट उदितवाणी, चमकता आईना, उत्कल मेल,स्कैनर इंडिया,इंडियन गार्ड तथा आवाज जैसे हिन्दी समाचारपत्र भी प्रदेश के बहुत से हिस्सों में काफी पढ़े जाते हैं। इलेक्ट्रानिक मीडिया की बात करें तो झारखंड को केंद्र बनाकर खबरों का प्रसारण ई टीवी बिहार-झारखंड, सहारा समय बिहार-झारखंड, मौर्य टीवी, साधना न्यूज, न्यूज 11 आदि चैनल करते हैं। रांची में राष्ट्रीय समाचार चैनलों के ब्यूरो कार्यालय कार्यरत हैं।

जोहार दिसुम खबर झारखंडी भाषाओं में प्रकाशित होने वाला पहला पाक्षिक अखबार है। इसमें झारखंड की 10 आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषाओं तथा हिन्दी सहित 11 भाषाओं में खबरें छपती हैं। जोहार सहिया राज्य का एकमात्र झारखंडी मासिक पत्रिका है जो झारखंड की सबसे लोकप्रिय भाषा नागपुरी में प्रकाशित होती है। इसके अलावा झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा और गोतिया झारखंड की आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाली महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाएं हैं।

राँची और जमशेदपुर में लगभग पांच रेडियो प्रसारण केन्द्र हैं और आकाशवाणी की पहुँच प्रदेश के हर हिस्से में है। दूरदर्शन का राष्ट्रीय प्रसारण भी प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में पहुँच रखता है। झारखंड के बड़े शहरों में लगभग हर टेलिविजन चैनल उपग्रह एवं केबल के माध्यम से सुलभता से उपलब्ध है।

लैंडलाइन टेलीफोन की उपलब्धता प्रदेश में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल), टाटा टेलीसर्विसेज (टाटा इंडिकाम) एवं रिलायंस इन्फोकाम द्वारा हर हिस्से में की जाती है। मोबाइल सेवा प्रदाताओं में बीएसएनएल, एयरसेल, आइडिया, वोदाफोन रिलायंस[uninor] एवं एयरटेल प्रमुख हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (July 2012 to June 2013)" (PDF). Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, Government of India. अभिगमन तिथि 12 जुलाई 2017.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]