झारखंड का इतिहास

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इतिहास की शुरुआत[संपादित करें]

झारखंड के कुछ स्थानों में जीवाश्म के कुछ अंश उन कलाकृतियों की ओर इशारा करते हैं जिससे यह पता चलता है कि छोटानागपुर क्षेत्र में होमो इरेकटस से होमो सिपियंस जाति में बदलाव को दर्शाता है। यहाँ पत्थर और अन्य उपकरण [1], सभ्यताओं के प्रारंभिक वर्षों से 3000 से अधिक वर्ष पहले के हैं। 6 या 7 वीं शताब्दी ई.पू. के -- महाकाव्य महाभारत युग के " कीकट " प्रदेश का उल्लेख ऋग्वेद में है जो पारसनाथ की पहाड़ियों में गिरिडीह जिले में, झारखंड में है।

यहाँ का समृद्ध, सभ्य अस्तित्व, मानव समाज और उनके सांस्कृतिक तरीके, गुफाओं में जीवित रहने के तरीके, स्मारक, चट्टानी कला में आश्रयों (पेट्रोग्राफ) के रहस्य जानना तो अभी तक शेष है।

क्या दीवार की गुफा पर डायनासोर है ? या फिर एक विशाल हाथी का पीछा शुरुआती दौर में पुरुषों द्वारा किया जा रहा है ? क्या एक प्रागैतिहासिक वृक्ष लाखों साल से पत्थर में स्थिर है ? हाँ, झारखंड के कुछ भागों में गुफा चित्र, 'पत्थर की कला' और 'शैलवर्णना' और भूवैज्ञानिक समय बीतने का भी संकेत है। प्राचीन सभ्यता में हड़प्पा की मौजूदगी का भी प्रमाण है।

झारखंड के कई जिलों में इस तरह के साईट और अवशेष हैं।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]