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रघुनाथ महतो

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रघुनाथ महतो
Raghunath Mahato
21 मार्च 1738 से 5 अप्रैल 1778

जन्मस्थल : घुंटियाडीह, नीमडीह, बंगाल, (अब झारखण्ड)
मृत्युस्थल: सिल्ली, ब्रिटिश भारत, (अब झारखण्ड)
आन्दोलन: चुआड़ विद्रोह
राष्ट्रीयता: भारतीय

रघुनाथ महतो (21 मार्च 1738 - 5 अप्रैल 1778) एक भारतीय क्रांतिकारी थे, जिन्होने 1769-78 में अंग्रेजों के विरुद्ध चुआड़ विद्रोह का नेतृत्व किया था। चुआड़ विद्रोह, छोटानागपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ पहला विद्रोह था।[1][2][3][4][5][6][7]

रघुनाथ महतो का जन्म 21 मार्च 1738 ई को वर्तमान सराइकेला खरसावाँ जिले के नीमडीह प्रखंड के घुंटियाडीह गांव में हुआ था।[8][4][5] उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जो विद्रोह किया था, उसे चुआड़ विद्रोह के नाम से जाना जाता है। उन्होंने "अपना गांव, अपना राज; दूर भगाओ विदेशी राज" का नारा दिया था।[5][4] अंग्रेजों ने अपने पिट्ठू जमींदारों से पूछा ये लोग कौन हैं, तो उन्होंने इन विद्रोहियों को नीचा दिखाने के लिए उन्हें ‘चुआड़’ (लुटेरा, नीच व उत्पाती) कहकर संबोधित किया। जो सभ्य समाज के असभ्य लोगों को संदर्भित करता है।[9][10][11] विद्रोह करने वालों में महतो,[12][13][14][15][16] भूमिज, बाउरी और अन्य समुदाय शामिल थे। प्रथम चुआड़ विद्रोह की अवधि 1767 से 1783 ईस्वी तक थी।[17][18][19] 5 अप्रैल 1778 ई को रघुनाथ महतो अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए शहीद हो गए।[20][4][5]

सन्दर्भ

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  1. Mahalik, Dr Satyapriya; Kumar, Mr Bhawesh (2023-09-01). Freedom Fighters of Jharkhand. Shashwat Publication. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-19517-33-6.
  2. Singh, Kumar Suresh (2008). People of India: Bihar, including Jharkhand (2 pts) (अंग्रेज़ी में). Anthropological Survey of India. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7046-303-0.
  3. Pandey, Binay Kumar (2022-03-19). Jharkhand Ke Veer Shaheed. Prabhat Prakashan. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-5562-010-1.
  4. झारखंड। लेखकः डाॅ अनुज कुमार धान एवं मंजू ज्योत्स्ना। प्रकाशकः प्रकाशन विभाग सूचना और प्रसारण मंत्रालय। भारत सरकार। प्रकाश कालः 2008। पृष्ठाः 113।
  5. रघुनाथ महतोः विद्रोही "दी ग्रेट"। (चुहाड़ विद्रोह का संक्षिप्त वृत्तांत)। लेखकः डाॅ शशी भूषण महतो एवं रतन कुमार महतो। प्रकाशकः आदिवासी कुड़मी समाज, राँची। प्रकाश कालः 2010। पृष्ठाः 1-12।
  6. Luhar, Sahdev (2023-02-25). Folklore Studies in India: Critical Regional Responses (अंग्रेज़ी में). N. S. Patel (Autonomous) Arts College, Anand. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-955008-4-0.
  7. Singh, Kumar Suresh (1992). People of India: West Bengal (अंग्रेज़ी में). Anthropological Survey of India. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7046-300-9.
  8. Mahto, Shailendra (2021-01-01). Jharkhand Mein Vidroh Ka Itihas. Prabhat Prakashan. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-90366-63-7.
  9. Das, Basantakumar (1980). Svādhīnatā saṃgrāme Medinīpura (Bengali में). Medinīpura Svādhīnatā Saṃgrāma Itihāsa Samiti.
  10. Bhadra, Gautama (1983). Mughalayuge kr̥shi-arthanīti o kr̥shaka-bidroha (Bengali में). Subarṇarekhā.
  11. Dev, Ashu Tosh (1976). Śabdabodha abhidhāna: Śabdābhidhāna o sāiklopidiẏā. - 5th rev. 2nd enl. ed (Bengali में). Deba Sāhitya Kuṭīra.
  12. Burman, B. K. Roy (1994). Tribes in Perspective (अंग्रेज़ी में). Mittal Publications. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7099-535-7.
  13. Mishra, Asha; Paty, Chittaranjan Kumar (2010). Tribal Movements in Jharkhand, 1857-2007 (अंग्रेज़ी में). Concept Publishing Company. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-8069-686-2.
  14. "Adivasi Resistance in Early Colonial India (Comprising the Chuar Rebellion of 1799 By J.C. Price and Relevant Midnapore District Collectorate Records from the Eighteenth Century) | Exotic India Art". www.exoticindiaart.com (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2022-12-07.
  15. Bayley, H.V. (1902). Memoranda of Midnapore. Calcutta. पपृ॰ 10–12.
  16. Das, Narendranath (1956). History of Midnapore. 1. Midnapore. पपृ॰ 20–21.
  17. Chatterjee, Gouripada (1986). Midnapore, the Forerunner of India's Freedom Struggle (अंग्रेज़ी में). Mittal Publications.
  18. Majumdar, Anindita (2006). British Forest Policy and Tribal Community in Bengal, 1880-1947 (अंग्रेज़ी में). Readers Service. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-87891-58-1.
  19. Chatterjee, Gouripada (1987). History of Bagree-Rajya (Garhbeta): With Special Reference to Its Anti-British Role, from Late 18th Century Till the Present Times (अंग्रेज़ी में). Mittal Publications. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7099-014-7.
  20. "अमर शहीद रघुनाथ महतो का इतिहास बयां करते हैं गड़े पत्थर". Dainik Jagran. अभिगमन तिथि 2022-12-22.

इन्हें भी देखें

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