राजस्थान

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राजस्थान
राजस्थान
—  राज्य  —
राजस्थान राज्य
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राजस्थान:
हवामहल, जयपुर
राजस्थान विधानसभा
रेतीले धोरे और पुष्कर मेले में गुब्बारे
रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान में बाघ
उम्मेद भवन पैलेस, जोधपुर
राजस्थान की आधिकारिक मुहर
Seal
भारतीय मानचित्र में राजस्थान की स्थिति
निर्देशांक (जयपुर): 26°34′22″N 73°50′21″E / 26.57268°N 73.83902°E / 26.57268; 73.83902Erioll world.svgनिर्देशांक: 26°34′22″N 73°50′21″E / 26.57268°N 73.83902°E / 26.57268; 73.83902
देश भारत
स्थापित 26 जनवरी 1950
राजधानी जयपुर
सबसे बड़ा शहर जयपुर
ज़िले कुल 33
शासन
 • मुख्यमंत्री राजस्थान
 • राजस्थान विधानसभा यूनिकेमरल (200 सीटें)
 • Parliamentary
 चुनाव
25
 • उच्च न्यायालय राजस्थान उच्च न्यायालय
क्षेत्र
 • कुल 3,42,239
क्षेत्र दर्जा 1st
जनसंख्या (2016)[1]
 • कुल 74
 • दर्जा 7वां
समय मण्डल IST (यूटीसी +05:30)
आईएसओ ३१६६ कुट IN-RJ
HDI Green Arrow Up Darker.svg 0.434 (low)
एचडीआई रैंक 17th (2007-08)[2]
आधिकारिक भाषा हिन्दी[3]
साक्षरता 67% (35th)
वैकल्पिक भाषाएं राजस्थानी और अंग्रेजी
जालस्थल rajasthan.gov.in

राजस्थान भारत का एक प्रान्त है। यहाँ की राजधानी जयपुर है।

राजस्थान भारत गणराज्य का क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा राज्य है। इसके पश्चिम में पाकिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में गुजरात, दक्षिण-पूर्व में मध्यप्रदेश, उत्तर में पंजाब (भारत), उत्तर-पूर्व में उत्तरप्रदेश और हरियाणा है। राज्य का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग कि॰मी॰ (1,32,139 वर्ग मील) है। जीडीपी के दर से यह नवे (9) नंबर पे आता है उत्तर प्रदेश और बिहार भी जीडीपी दर में इससे कही आगे है शिक्षा दर में भी यह राज्य अपने पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब गुजरात से बहुत पिछड़ा है

जयपुर राज्य की राजधानी है। भौगोलिक विशेषताओं में पश्चिम में थार मरुस्थल और घग्गर नदी का अंतिम छोर है। विश्व की पुरातन श्रेणियों में प्रमुख अरावली श्रेणी राजस्थान की एक मात्र पर्वत श्रेणी है, जो कि पर्यटन का केन्द्र है, माउंट आबू और विश्वविख्यात दिलवाड़ा मंदिर सम्मिलित करती है। पूर्वी राजस्थान में दो बाघ अभयारण्य, रणथम्भौर एवं सरिस्का हैं और भरतपुर के समीप केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है, जो सुदूर साइबेरिया से आने वाले सारसों और बड़ी संख्या में स्थानीय प्रजाति के अनेकानेक पक्षियों के संरक्षित-आवास के रूप में विकसित किया गया है।

इतिहास[संपादित करें]

प्राचीन काल में राजस्थान[संपादित करें]

मीणा राजा आमेर (जयपुर) सहित राजस्थान के प्रमुख भागों के प्रारंभिक शासक थे। प्राचीन समय में राजस्थान मे मीना वंश के राजाओ का शासन था। संस्कृत में मत्स्य राज्य का ऋग्वेद में उल्लेख किया गया था। बाद में भील और मीना, (विदेशी लोगों) जो स्य्न्थिअन्, हेप्थलिते या अन्य मध्य एशियाई गुटों के साथ आये थे, मिश्रित हुए। मीणा राजा अम्बर (जयपुर राज) सहित राजस्थान के प्रमुख भागों के प्रारंभिक शासक थे। १२वीं सदी तक राजस्थान के भाग पर गुर्जरों का राज्य रहा है। गुजरात तथा राजस्थान का अधिकांश भाग गुर्जरत्रा (गुर्जरों से रक्षित देश) के नाम से जाना जाता था।[4][5][6] गुर्जर प्रतिहारों ने ३०० साल तक पूरे उत्तरी-भारत को अरब आक्रान्ताओं से बचाया था। इस कारण इन्हें राष्ट्र रक्षक वीर गुर्जर भी कहा जाता है![7] बाद में जब राजपूत जाति ने इस राज्य के विविध भागों पर अपना कब्जा जमा लिया तो उन भागों का नामकरण अपने-अपने वंश, क्षेत्र की प्रमुख बोली अथवा स्थान के अनुरूप कर दिया। ये राज्य थे- उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़, (जालोर) सिरोही, कोटा, बूंदी, जयपुर, अलवर, भरतपुर, करौली, झालावाड़ और टोंक.[8] ब्रिटिशकाल में राजस्थान 'राजपूताना' नाम से जाना जाता था। राजा महाराणा प्रताप अपनी असधारण राज्यभक्ति और शौर्य के लिये जाने जाते हैं। इन राज्यों के नामों के साथ-साथ इनके कुछ भू-भागों को स्थानीय एवं भौगोलिक विशेषताओं के परिचायक नामों से भी पुकारा जाता रहा है। पर तथ्य यह है कि राजस्थान के अधिकांश तत्कालीन क्षेत्रों के नाम वहां बोली जाने वाली प्रमुखतम बोलियों पर ही रखे गए थे। उदाहरणार्थ ढ़ूंढ़ाडी-बोली के इलाकों को ढ़ूंढ़ाड़ (जयपुर) कहते हैं। 'मेवाती' बोली वाले निकटवर्ती भू-भाग अलवर को 'मेवात', उदयपुर क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली'मेवाड़ी' के कारण उदयपुर को मेवाड़, ब्रजभाषा-बाहुल्य क्षेत्र को 'ब्रज', 'मारवाड़ी' बोली के कारण बीकानेर-जोधपुर इलाके को 'मारवाड़' और 'वागडी' बोली पर ही डूंगरपुर-बांसवाडा अदि को 'वागड' कहा जाता रहा है। डूंगरपुर तथा उदयपुर के दक्षिणी भाग में प्राचीन ५६ गांवों के समूह को ""छप्पन"" नाम से जानते हैं। माही नदी के तटीय भू-भाग को 'कोयल' तथा अजमेर के पास वाले कुछ पठारी भाग को 'उपरमाल' की संज्ञा दी गई है।[9][10]

राजस्थान का एकीकरण[संपादित करें]

राजस्थान भारत का एक महत्वपूर्ण प्रांत है। यह 30 मार्च 1949 को भारत का एक ऐसा प्रांत बना, जिसमें तत्कालीन राजपूताना की ताकतवर रियासतें विलीन हुईं। भरतपुर के जाट शासक ने भी अपनी रियासत के विलय राजस्थान में किया था। राजस्थान शब्द का अर्थ है: 'राजाओं का स्थान' क्योंकि यहां गुर्जर, राजपूत, मौर्य, जाट आदि ने पहले राज किया था। भारत के संवैधानिक-इतिहास में राजस्थान का निर्माण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। ब्रिटिश शासकों द्वारा भारत को आजाद करने की घोषणा करने के बाद जब सत्ता-हस्तांतरण की कार्यवाही शुरू की, तभी लग गया था कि आजाद भारत का राजस्थान प्रांत बनना और राजपूताना के तत्कालीन हिस्से का भारत में विलय एक दूभर कार्य साबित हो सकता है। आजादी की घोषणा के साथ ही राजपूताना के देशी रियासतों के मुखियाओं में स्वतंत्र राज्य में भी अपनी सत्ता बरकरार रखने की होड़ सी मच गयी थी, उस समय वर्तमान राजस्थान की भौगालिक स्थिति के नजरिये से देखें तो राजपूताना के इस भूभाग में कुल बाईस देशी रियासतें थी। इनमें एक रियासत अजमेर-मेरवाडा प्रांत को छोड़ कर शेष देशी रियासतों पर देशी राजा महाराजाओं का ही राज था। अजमेर-मेरवाडा प्रांत पर ब्रिटिश शासकों का कब्जा था; इस कारण यह तो सीघे ही स्वतंत्र भारत में आ जाती, मगर शेष इक्कीस रियासतों का विलय होना यानि एकीकरण कर 'राजस्थान' नामक प्रांत बनाया जाना था। सत्ता की होड़ के चलते यह बड़ा ही दूभर लग रहा था, क्योंकि इन देशी रियासतों के शासक अपनी रियासतों के स्वतंत्र भारत में विलय को दूसरी प्राथमिकता के रूप में देख रहे थे। उनकी मांग थी कि वे सालों से खुद अपने राज्यों का शासन चलाते आ रहे हैं, उन्हें इसका दीर्घकालीन अनुभव है, इस कारण उनकी रियासत को 'स्वतंत्र राज्य' का दर्जा दे दिया जाए। करीब एक दशक की ऊहापोह के बीच 18 मार्च 1948 को शुरू हुई राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया कुल सात चरणों में एक नवंबर 1956 को पूरी हुई। इसमें भारत सरकार के तत्कालीन देशी रियासत और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल और उनके सचिव वी॰ पी॰ मेनन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। इनकी सूझबूझ से ही राजस्थान के वर्तमान स्वरुप का निर्माण हो सका। राजस्थान मे कुल 21 राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं।

भूगोल एवं राजस्थान का क्लिक करने योग्य मानचित्र[संपादित करें]

राजस्थान की आकृति लगभग पतङ्गाकार है। राज्य २३ ३ से ३० १२ अक्षांश और ६९ ३० से ७८ १७ देशान्तर के बीच स्थित है। इसके उत्तर में पाकिस्तान, पंजाब और हरियाणा, दक्षिण में मध्यप्रदेश और गुजरात, पूर्व में उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश एवं पश्चिम में पाकिस्तान हैं।

सिरोही से अलवर की ओर जाती हुई ४८० कि॰मी॰ लम्बी अरावली पर्वत श्रृंखला प्राकृतिक दृष्टि से राज्य को दो भागों में विभाजित करती है। राजस्थान का पूर्वी सम्भाग शुरु से ही उपजाऊ रहा है। इस भाग में वर्षा का औसत ५० से.मी. से ९० से.मी. तक है। राजस्थान के निर्माण के पश्चात् चम्बल और माही नदी पर बड़े-बड़े बांध और विद्युत गृह बने हैं, जिनसे राजस्थान को सिंचाई और बिजली की सुविधाएं उपलब्ध हुई है। अन्य नदियों पर भी मध्यम श्रेणी के बांध बने हैं, जिनसे हजारों हैक्टर सिंचाई होती है। इस भाग में ताम्बा, जस्ता, अभ्रक, पन्ना, घीया पत्थर और अन्य खनिज पदार्थों के विशाल भण्डार पाये जाते हैं।

राज्य का पश्चिमी भाग देश के सबसे बड़े रेगिस्तान " थार" या 'थारपाकर' का भाग है। इस भाग में वर्षा का औसत १२ से.मी. से ३० से.मी. तक है। इस भाग में लूनी, बांड़ी आदि नदियां हैं, जो वर्षा के कुछ दिनों को छोड़कर प्राय: सूखी रहती हैं। देश की स्वतंत्रता से पूर्व बीकानेर राज्य गंगानहर द्वारा पंजाब की नदियों से पानी प्राप्त करता था। स्वतंत्रता के बाद राजस्थान इण्डस बेसिन से रावी और व्यास नदियों से ५२.६ प्रतिशत पानी का भागीदार बन गया। उक्त नदियों का पानी राजस्थान में लाने के लिए सन् १९५८ में 'राजस्थान नहर' (अब इंदिरा गांधी नहर) की विशाल परियोजना शुरु की गई। जोधपुर, बीकानेर, चूरू एवं बाड़मेर जिलों के नगर और कई गांवों को नहर से विभिन्न लिफ्ट परियोजनाओं से पहुंचाये गये पीने का पानी उपलब्ध होगा। इस प्रकार राजस्थान के रेगिस्तान का एक बड़ा भाग अन्तत: शस्य श्यामला भूमि में बदल जायेगा। सूरतगढ़ जैसे कई इलाको में यह नजारा देखा जा सकता है।

गंगा बेसिन की नदियों पर बनाई जाने वाली जल-विद्युत योजनाओं में भी राजस्थान भी भागीदार है। इसे इस समय भाखरा-नांगल और अन्य योजनाओं के कृषि एवं औद्योगिक विकास में भरपूर सहायता मिलती है। राजस्थान नहर परियोजना के अलावा इस भाग में जवाई नदी पर निर्मित एक बांध है, जिससे न केवल विस्तृत क्षेत्र में सिंचाई होती है, वरन् जोधपुर नगर को पेयजल भी प्राप्त होता है। यह सम्भाग अभी तक औद्योगिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। पर उम्मीद है, इस क्षेत्र में ज्यो-ज्यों बिजली और पानी की सुविधाएं बढ़ती जायेंगी औद्योगिक विकास भी गति पकड़ लेगा। इस बाग में लिग्नाइट, फुलर्सअर्थ, टंगस्टन, बैण्टोनाइट, जिप्सम, संगमरमर आदि खनिज प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। जैसलमेर क्षेत्र में कच्चा तेल मिलने की अच्छी सम्भावनाएं हैं। हाल ही की खुदाई से पता चला है कि इस क्षेत्र में उच्च किस्म की प्राकृतिक गैस भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। अब वह दिन दूर नहीं, जबकि राजस्थान का यह भाग भी समृद्धिशाली बन जाएगा।

राज्य का क्षेत्रफल ३.४२ लाख वर्ग कि.मी है जो भारत के कुल क्षेत्रफल का १०.४० प्रतिशत है। यह भारत का सबसे बड़ा राज्य है। वर्ष १९९६-९७ में राज्य में गांवों की संख्या ३७८८९ और नगरों तथा कस्बों की संख्या २२२ थी। राज्य में ३३ जिला परिषदें, २३५ पंचायत समितियां और ९१२५ ग्राम पंचायतें हैं। नगर निगम ४ और सभी श्रेणी की नगरपालिकाएं १८० हैं।

सन् १९९१ की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या ४.३९ करोड़ थी। जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग कि॰मी॰ १२६ है। इसमें पुरुषों की संख्या २.३० करोड़ और महिलाओं की संख्या २.०९ करोड़ थी। राज्य में दशक वृद्धि दर २८.४४ प्रतिशत थी, जबकि भारत में यह औसत दर २३.५६ प्रतिशत थी। राज्य में साक्षरता ३८.८१ प्रतिशत थी। जबकि भारत की साक्षरता तो केवल २०.८ प्रतिशत थी जो देश के अन्य राज्यों में सबसे कम थी (?????)। राज्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति राज्य की कुल जनसंख्या का क्रमश: १७.२९ प्रतिशत और १२.४४ प्रतिशत है।

राजस्थान की जलवायु[संपादित करें]

राजस्थान की जलवायु शुष्क से उप-आर्द्र मानसूनी जलवायु है। अरावली के पश्चिम में न्यून वर्षा, उच्च दैनिक एवं वार्षिक तापान्तर, निम्न आर्द्रता तथा तीव्र हवाओं युक्त शुष्क जलवायु है। दूसरी ओर अरावली के पूर्व में अर्धशुष्क एवं उप-आर्द्र जलवायु है। अक्षांशीय स्थिति, समुद्र से दूरी, समुद्र ताल से से ऊंचाई, अरावली पर्वत श्रेणियों की स्थिति एवं दिशा, वनस्पति आवरण आदि सभी यहाँ की जलवायु को प्रभावित करते हैं।

शिक्षण संस्थान[संपादित करें]

  1. राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर
  2. राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय
  3. राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय
  4. जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर
  5. मोदी प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान संस्थान, लक्ष्मणगढ़,सीकर जिला (मानद विश्‍वविद्यालय)
  6. वनस्थली विद्यापीठ (मानद विश्‍वविद्यालय), उदयपुर
  7. राजस्थान विद्यापीठ (मानद विश्‍वविद्यालय), उदयपुर
  8. बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी (मानद विश्‍वविद्यालय),
  9. आई. आई. एस. विश्‍वविद्यालय (मानद विश्‍वविद्यालय)
  10. जैन विश्‍व भारती विश्‍वविद्यालय (मानद विश्‍वविद्यालय) लाडनूं
  11. एलएनएम सूचना प्रौद्योगिकी संस्‍थान (मानद विश्‍वविद्यालय)
  12. मालवीय राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (मानद विश्‍वविद्यालय) जयपुर
  13. मोहन लाल सुखाडिया विश्‍वविद्यालयउदयपुर
  14. राष्‍ट्रीय विधि विश्‍वविद्यालय, जोधपुर
  15. राजस्‍थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर
  16. राजस्‍थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय
  17. राजस्‍थान संस्‍कृत विश्वविद्यालय जयपुर
  18. बीकानेर विश्वविद्यालय, बीकानेर
  19. कोटा विश्वविद्यालयकोटा
  20. महावीर कोटा खुला विश्वविद्यालय कोटा

राजस्थान की महत्वपूर्ण कला-संस्कृति इकाइयां[संपादित करें]

मुख्य लेख : राजस्थान की महत्वपूर्ण कला-संस्कृति इकाइयां

राजस्थानी कलाकार

राजस्थान के प्रसिद्ध स्थल[संपादित करें]

जयपुर[संपादित करें]

  1. जयपुर [11] इसके भव्य किलों, महलों और सुंदर झीलों के लिए प्रसिद्ध है, जो विश्वभर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
  2. चन्द्रमहल (सिटी पैलेस) महाराजा जयसिंह (द्वितीय) द्वारा बनवाया गया था और मुगल औऱ राजस्थानी स्थापत्य का एक संयोजन है।
  3. महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने हवामहल 1799 ई. में बनवाया जिसके वास्तुकार लालचन्द उस्ता थे।
  4. आमेर दुर्ग में महलों, विशाल कक्षों, स्तंभदार दर्शक-दीर्घाओं, बगीचों और मंदिरों सहित कई भवन-समूह हैं।
  5. आमेर महल मुगल औऱ हिन्दू स्थापत्य शैलियों के मिश्रण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  6. एल्बर्ट हॉल नामक म्यूजियम 1876 में, प्रिंस ऑफ वेल्स के जयपुर आगमन पर सवाई रामसिंह द्वारा बनवाया गया था और 1886 में जनता के लिए खोला गया।
  7. गवर्नमेण्ट सेन्ट्रल म्यूजियम में हाथीदांत कृतियों, वस्त्रों, आभूषणों, नक्काशीदार काष्ठ कृतियों, लघुचित्रों, संगमरमर प्रतिमाओं, शस्त्रों औऱ हथियारों का समृद्ध संग्रह है।
  8. सवाई जयसिंह (द्वितीय) ने अपनी सिसोदिया रानी के निवास के लिए 'सिसोदिया रानी का बाग' भी बनवाया।
  9. जलमहल, शाही बत्तख-शिकार के लिए बनाया गया मानसागरझील के बीच स्थित एक सुंदर महल है।
  10. 'कनक वृंदावन' अपने प्राचीन गोविन्देव विग्रह के लिए प्रसिद्ध जयपुर में एक लोकप्रिय मंदिर-समूह है।
  11. जयपुर के बाजार जीवंत हैं और दुकानें रंग बिरंगे सामानों से भरी है, जिसमें हथकरघा-उत्पाद, बहुमूल्य रत्नाभूषण, वस्त्र, मीनाकारी-सामान, राजस्थानी चित्र आदि शामिल हैं।
  12. जयपुर संगमरमर की प्रतिमाओं, ब्लू पॉटरी औऱ राजस्थानी जूतियों के लिए भी प्रसिद्ध है।
  13. जयपुर के प्रमुख बाजार, जहां से आप कुछ उपयोगी सामान खरीद सकते हैं, जौहरी बाजार, बापू बाजार, नेहरू बाजार, चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया बाजार और एम.आई. रोड़ हैं।
  14. राजस्थान राज्य परिवहन निगम (RSRTC) की उत्तर भारत के सभी प्रसुख गंतव्यों के लिए बस सेवाएं हैं।
  15. जयपुर के निकट विराट नगर (पुराना नाम बैराठ) जहाँ पांडवों ने अज्ञातवास किया था, में पञ्चखंड पर्वत पर वज्रांग मंदिर नामक एक अनोखा देवालय है जहाँ हनुमान जी की बिना बन्दर की मुखाकृति और बिना पूंछ वाली मूर्ति स्थापित है जिसकी स्थापना अमर स्वतंत्रता सेनानी, यशस्वी लेखक महात्मा रामचन्द्र वीर ने की थी।


भरतपुर[संपादित करें]

  1. ‘पूर्वी राजस्थान का द्वार’ भरतपुर, भारत के पर्यटन मानचित्र में अपना महत्व रखता है।
  2. भारत के वर्तमान मानचित्र में एक प्रमुख पर्यटक गंतव्य, भरतपुर पांचवी सदी ईसा पूर्व से कई अवस्थाओं से गुजर चुका है।
  3. 18 वीं सदी का घना पक्षी अभयारण्य , जो केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी जाना जाता है।
  4. लोहागढ़ आयरन फोर्ट के रूप में भी जाना जाता है, लोहागढ़ भरतपुर के प्रमुख ऐतिहासिक आकर्षणों में से एक है।
  5. भरतपुर संग्रहालय राजस्थान के विगत शाही वैभव के साथ शौर्यपूर्ण अतीत के साक्षात्कार का एक प्रमुख स्रोत है।
  6. एक सुंदर बगीचा, नेहरू पार्क, जो भरतपुर संग्रहालय के पास है।
  7. डीग जलमहल एक आकर्षक राजमहल है, जो भरतपुर के जाट शासकों ने बनवाया था।

जोधपुर[संपादित करें]

  1. राठौड़ों के रूप में प्रसिद्ध एक वंश के प्रमुख, राव जोधा ने जिस जोधपुर की सन 1459 में स्थापना की थी, राजस्थान के पश्चिमी भाग में केन्द्र में स्थित राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और दर्शनीय महलों, दुर्गों औऱ मंदिरों के कारण एक लोकप्रिय पर्यटक गंतव्य है।
  2. शहर की अर्थव्यस्था में हथकरघा, वस्त्र उद्योग और धातु आधारित उद्योगों का योगदान है।
  3. मेहरानगढ़ दुर्ग, 125 मीटर ऊंचा औऱ 5 किमी के क्षेत्रफल में फैला हुआ, भारत के बड़े दुर्गों में से एक है जिसमें कई सुसज्जित महल जैसे मोती महल, फूल महल, शीश महल स्थित हैं। अन्दर संग्रहालय में भी लघुचित्रों, संगीत वाद्य यंत्रों, पोशाकों, शस्त्रागार आदि का एक समृद्ध संग्रह है।

सवाई माधोपुर[संपादित करें]

# सवाई माधोपुर शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह प्रथम ने 1765 ईस्वी में की थी और इन्हीं के नाम पर 15 मई, 1949 ई. को सवाई माधोपुर जिला बनाया गया। मीणा बाहुल्य इस जिले का ऐतिहासिकता के तोर पर काफी महत्व है।

  1. राजस्थान राज्य का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान इसी जिले में स्थित है, जिसे रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है। इस उद्यान के कारण सवाई माधोपुर को 'टाइगर सिटी' के नाम से भी राजस्थान में पहचान मिली हुई है।
  2. सवाई माधोपुर जिले में चौहान वंश का ऐतिहासिक रणथंभोर दुर्ग विश्व धरोहर में शामिल है, अपनी प्राकृतिक बनावट व सुरक्षात्मक दृष्टि से अभेद्य यह दुर्ग विश्व में अनूठा है। इस दुर्ग का सबसे प्रसिद्ध शासक महाराजा हम्मीर देव चौहान राजस्थान के इतिहास में अपने हठ के कारण काफी प्रसिद्ध रहा है।

उद्योग[संपादित करें]

सूती वस्त्र उद्योग[संपादित करें]

राजस्थान में सबसे पहले १८८९ में द कृष्णा मिल्स लिमिटेड की स्थापना देशभक्त सेठ दामोदर दास ने ब्यावर नगर में की थी । यह राजस्थान की पहली सूती वस्त्र मिल थी ।

चीनी उद्योग[संपादित करें]

राजस्थान में सर्वप्रथम चित्तौड़गढ़ ज़िले में भोपालसागर नगर में चीनी मिल द मेवाड़ सुगर मिल्स के नाम से सन् १९३२ में प्रारम्भ की गई । दूसरा कारखाना सन् १९३७ में श्रीगंगानगर में द श्रीगंगानगर सुगर मिल्स के नाम से स्थापित हुआ । इसमें मिल में शक्कर बनाने का कार्य १९४६ में प्रारम्भ हुआ । १९५६ में इस चीनी मिल को राज्य सरकार ने अधिगृहीत कर लिया तथा यह सार्वजनिक क्षेत्र में आ गई ।

१९६५ में बूंदी ज़िले के केशोरायपाटन में चीनी मिल सहकारी क्षेत्र में स्थापित की गई ।

सन् १९७६ में उदयपुर में चीनी मिल निजी क्षेत्र में स्थापित की गई ।

चुकन्दर से चीनी बनाने के लिए श्रीगंगनगर सुगर मिल्स लिमिटेड में एक योजना १९६८ में आरम्भ की गई थी ।

सीमेन्ट उद्योग[संपादित करें]

सीमेन्ट उद्योग की दृष्टि से 'राजस्थान का पूरे भारत में प्रथम स्थान है । यहां पर सर्वप्रथम १९०४ में समुद्री सीपियों से सीमेन्ट बनाने का प्रयास किया गया था । १९१५ ई. राजस्थान में लाखेरी ,बूंदी में क्लिक निक्सन कम्पनी द्वारा सर्वप्रथम एक सीमेन्ट संयंत्र स्थापित किया गया । १९१७ में इस कारखाने में सीमेन्ट बनाने का कार्य प्रारम्भ किया गया ।

काँच उद्योग[संपादित करें]

राजस्थान में काँच प्राप्ति के मुख्य स्थल जयपुर ,बीकानेर ,बूंदी तथा धौलपुर ज़िले है जहां उपयुक्त रूप से काँच की प्राप्ति होती है । द हाई टेक्निकल प्रीसीजन ग्लास वर्क्स सार्वजनिक क्षेत्र में धौलपुर में राजस्थान सरकार का उपक्रम है जो श्रीगंगानगर सुगर मिल्स के अधीन है । काँच उद्योग के मामले में राजस्थान उत्तर प्रदेश के बाद दुसरे स्थान पर है ।

ऊन उद्योग[संपादित करें]

संपूर्ण भारतवर्ष में ४२% ऊन राजस्थान से उत्पादित होती है । इस कारण राजस्थान भर में कई ऊन उद्योग की मिलें विद्यमान है जिसमें स्टेट वूलन मिल्स (बीकानेर ) ,जोधपुर ऊन फैक्ट्री ,विदेशी आयात - निर्यात संस्था , कोटा इत्यादि है ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Rajasthan Profile". Census of India. http://censusindia.gov.in/2011census/censusinfodashboard/stock/profiles/en/IND008_Rajasthan.pdf. 
  2. India Human Development Report 2011:Towards Social Inclusion – IHDR_Summary.pdf (PDF)
  3. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; Language नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  4. Ramesh Chandra Majumdar (1977). "The History and Culture of the Indian People: The classical age". Bharatiya Vidya Bhavan. प॰ 153. 
  5. Mulatanasi?ha Verma (1984). "Desa, videsa me? Gurjara kya hai? tatha kya thhe?": Gurjara itihasa. Akhila Bharatiya Gurjara Samaja Sudharan Sabha. 
  6. Surjan Singh Shekhavat (1989). "Sekhavati pradesh ka pracheena itihaas". Sri Shardula Education ?ras?a. प॰ 94. 
  7. John Keay (2001). India: a history. Grove Press. प॰ 95. ISBN 0-8021-3797-0, ISBN 978-0-8021-3797-5. http://books.google.co.in/books?id=3aeQqmcXBhoC&pg=PA195&dq. 
  8. इम्पीरियल गजैटियर
  9. गोपीनाथ शर्मा / 'Social Life in Medivial Rajasthan' / पृष्ठ ३
  10. http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/rj185.htm राजस्थान : एक परिचय, डॉ॰ कैलाश कुमार मिश्र
  11. http://hindi.mapsofindia.com/rajasthan/jaipur/places-of-interest/ जयपुर के दर्शनीय स्थल

यह भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]