सवाई माधोपुर

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सवाई माधोपुर
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य राजस्थान
ज़िला सवाई माधोपुर
महापौर
सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया
जनसंख्या 121,106 (2011 तक )

Erioll world.svgनिर्देशांक: 26°06′N 76°12′E / 26.1°N 76.20°E / 26.1; 76.20

सवाई माधोपुर भारत के राजस्थान का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। यह जिला रणथम्‍भौर राष्‍ट्रीय उद्यान के लिए जाना जाता है, जो बाघों के लिए प्रसिद्ध है। सवाई माधोपुर जिले में निम्‍न तहसीलें हैं- गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, चौथ का बरवाड़ा, बौंली, मलारना डूंगर, वजीरपुर, बामनवास और खण्डार. गंगापुर सिटी जिले का सबसे बडा शहर और उपकेन्‍द्र है | रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के लिए प्रसिद्ध सवाई माधोपुर राजस्थान का प्रमुख शहर है। इस शहर की स्थापना सवाई माधो सिंह प्रथम ने की थी जो जयपुर के महाराजा थे। 18वीं शताब्दी में महाराजा सवाई माधो सिंह द्वारा इस शहर की स्थापना करने के बाद उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम सवाई माधोपुर पड़ा। यह स्थान केवल राष्ट्रीय उद्यान के लिए ही नहीं बल्कि अपने मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। सवाई माधोपुर में हर मंदिर के साथ कोई-न-कोई कहानी जुड़ी हुई है। ख़ूबसूरत वास्तुशिल्प से सजे ये मंदिर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचते हैं।

पर्यटन स्थल[संपादित करें]

रणथम्भौर दुर्ग का नौलखा द्वार

सवाई माधोपुर का इतिहास रणथंभौर दुर्ग के आस-पास घूमता है। विंध्य और अरावली से घिर रणथंभौर क़िले के बारे में अभी तक सही-सही पता नहीं चल पाया है कि इसका निर्माण कब हुआ था। इस क़िले की ताकत और दुर्गम रास्ता इसे शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता था, विशेष रूप से दिल्ली और आगरा के शासक यहाँ पहुंचने में असमर्थ लगते थे। क़िले के प्रमुख शासक राव हम्मीर चौहान थे जिन्होंने 1296 के आसपास यहाँ शासन किया। क़िले का सुंदर वास्तुशिल्प, तालाब और झील इसके निर्माण के कला प्रेम और ज्ञान को दर्शाते हैं। क़िले का प्रत्येक हिस्सा भारतीय संस्कृति और दर्शन का प्रतीक है। क़िले के अंदर ऐतिहासिक महत्व के अनेक स्थान हैं जैसे :- गणेश मंदिर, जैन मंदिर, बादल महल, जँवरा-भँवरा अन्नागार, दिल्ली दरवाजा, हम्मीर महल, हम्मीर कचहरी, तोरण द्वार, महादेव छत्री, सामतों की हवेली, 32 खंबों वाली छतरी, मस्जिद आदि । सवाई माधोपुर जिले का रणथंभोर दुर्ग भारत के महत्वपूर्ण दुर्गों में से एक है । यह दुर्ग सघन जंगलों और सात पहाड़ियों के बीच चंबल नदी एवं बनास नदी से घिरा हुआ अभेद्य दुर्ग है । अरावली पर्वत श़ृंखला एवं विन्ध्याचल पर्वत श़ृंखला के मिलान बिंदु पर बना हुआ रणथम्भौर दुर्ग विश्व विरासत शामिल है । कंबोडिया के नामपेन्ह शहर में यूनेस्को की विरासत संबंधी वैश्विक समिति की 36 वीं बैठक में दिनांक 21 जून 2013 शुक्रवार को भारत का पहाड़ी दुर्ग रणथम्भौर का चयन किया गया वही इस दुर्ग के विश्व विरासत में शामिल होने के घटनाक्रम को विश्व में लाइव देखा गया और सराहा गया ।

राष्ट्रीय उद्यान[संपादित करें]

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान का सबसे लम्बा टाइगर (टी-२४)

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान सवाई माधोपुर का प्रमुख पर्यटक स्थल है। यह उद्यान देश के बेहतरीन बाघ आरक्षित क्षेत्रों में से एक है। 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला। 392 वर्ग किमी. में फैला यह उद्यान अरावली और विंध्य की पहाड़ियों में फैला है। यहाँ स्थित तीन झीलों के पास इन बाघों के दिखाई देने की अधिक संभावना रहती है। बाघ के अलावा यहाँ चीते भी रहते हैं। यह चीते उद्यान के बाहरी हिस्से में अधिक पाए जाते हैं। इन्हें देखने के लिए कचीदा घाटी सबसे उपयुक्त जगह है। बाघ और चीतों के अलावा सांभर, चीतल, जंगली सूअर, चिंकारा, हिरन, सियार, तेंदुए, जंगली बिल्ली और लोमड़ी भी पाई जाती है। जानवरों के अलावा पक्षियों की लगभग 264 प्रजातियाँ यहाँ देखी जा सकती हैं। सर्दियों में अनेक प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं। यहाँ जीप सफारी का भी आनंद उठाया जा सकता है।

त्रिनेत्र गणेश मंदिर[संपादित करें]

गणेश मंदिर सवाई माधोपुर का प्रमुख आकर्षण है। देश के हर हिस्से से हज़ारों लोग सुख समृद्धि के इस देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं । यह मंदिर सवाई माधोपुर से 12 किलोमीटर दूर विश्व विख्यात रणथंभोर दुर्ग के अंदर बना हुआ है । 5वीं शदी में बना हुआ यह भारत के सबसे प्राचीन गणेश मंदिरों में से एक है । त्रिनेत्र गणेश के नाम से प्रसिद्ध भगवान गणेश जन जन की आस्था के केंद्र है ।

श्री चौथ माता जी का मंदिर[संपादित करें]

चौथ माता जी का मंदिर सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर की दूरी पर चौथ का बरवाड़ा कस्बे में स्थित है । चौथ भवानी माता का मंदिर राजपूताना शैली में सफेद संगमरमर से निर्मित है । इस मंदिर की स्थापना महाराज भीमसिंह चौहान ने संवत 1451 में बरवाड़ा गाँव में अरावली पर्वत श़ृंखला के शक्तिगिरि पर्वत पर 1100 फुट ऊँचाई पर की थी । यह मंदिर राजस्थान के सर्वाधिक लोकप्रिय व सुप्रसिद्ध ग्यारह मंदिरों में से एक है । नवरात्रि के समय व वर्षभर की चार बड़ी चतुर्थीयों ( करवा चौथ, वैशाखी चौथ, भाद्रपद चतुर्थी एवं माघ चतुर्थी ) पर माता जी के विशाल मेले भरते हैं, जिनमें लाखों की तादाद में देश भर से दर्शनार्थी माता जी दर्शन हेतु पधारते है ।

अमरेश्वर महादेव मंदिर[संपादित करें]

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के रास्ते में ख़ूबसूरत पहाड़ियों के बीच पवित्र अमरेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यह स्थान सवाई माधोपुर का प्रमुख पिकनिक स्पॉट भी है । अमरेशवर महादेव का मंदिर पहाड़ के ऊपर स्थित है । पास में सीता राम जी मंदिर बना हुआ है ।

खंडार क़िला[संपादित करें]

मध्यकाल में बना तारागढ़ का खंडार क़िला सवाई माधोपुर से 47 किमी. दूर है। इस क़िले के निर्माण को लेकर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तय है कि 12वीं शताब्दी में यह क़िला अपनी उन्नति के चरम पर था। इस क़िले का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुशैली में किया गया है। इसकी भौगोलिक स्थित कुछ ऐसी है कि दुश्मन के लिए इस पर आक्रमण करना कठिन होता था। इसलिए इस क़िले को अजेय क़िला भी कहा जाता था।[1] इस दुर्ग के नीचे एक अत्यंत प्राचीन भवगवान शिव का मंदिर है जो कि इस किले के निर्माण के समय का ही है इसका आकार अर्ध चंद्र कार है इस किले के ऊपर एक प्राचीन मां जयंती का मंदिर है। इस किले के ऊपर कई कुंड है एवं कई मंदिर है।

यातायात और परिवहन[संपादित करें]

रेल मार्ग[संपादित करें]

सवाई माधोपुर में रेलवे स्टेशन है जो राजस्थान के प्रमुख शहरों जयपुर एवं कोटा से जुड़ा हुआ है । सवाई माधोपुर जंक्शन दिल्ली-कोटा-मुम्बई रेलवे मार्ग पर प्रमुख जंक्शन प्वाइंट है । यहाँ से जयपुर के लिए रेलवे लाइन जाती है । भारत के प्रमुख शहरों से सवाई माधोपुर जुड़ा हुआ है । यहाँ पर सभी एक्सप्रेस गाड़ियों का ठहराव होता है । सवाई माधोपुर जिले के अंतर्गत प्रमुख रेलवे स्टेशनों में :-

सड़क मार्ग[संपादित करें]

राष्ट्रीय राजमार्ग 11 और 12 के रास्ते सवाई माधोपुर पहुंचा जा सकता है।

सवाई माधोपुर आसपास[संपादित करें]