मीन भगवान का मन्दिर, राजस्थान

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भारत के राजस्थान प्रांत में भगवान मीनेष अर्थात मत्स्यावतार को समर्पित यह मंदिर सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा कस्बें में स्थित है। चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के मीणा समाज के सहयोग से बना यह भव्य मंदिर साधारण नहीं बल्कि तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस है। भगवान मीनेष के इस मंदिर का 108 फीट ऊँचा गुम्बद लोगों का मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। [1] आम-तौर पर सरसों की तूड़ी को अनुपयोगी समझकर जला दिया जाता है, लेकिन सवाई माधोपुर जिले में चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के मीणा समाज ने इस सरसों की तूड़ी को बेचकर इसका उपयोग मंदिर निर्माण कार्य में किया। [2] प्रथम बार इस क्षेत्र के मीणा समाज के लोगों ने सरसों की तूड़ी बेचकर 7 करोड़ रुपये इकट्ठे किये और मीणा समाज के ग्रामीणों की मुहिम रंग लाई और मंदिर का निर्माण शुरू हो गया। चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के मीणों ने धीरे धीरे मंदिर को बनाना शुरू किया और आज यह मंदिर इतना आलीशान बन गया कि मंदिर को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित हो जाता है। यह मंदिर पूरी तरह से कम्प्यूटराइज्ड तो है ही साथ ही साथ सीसीटीवी कैमरों से लैस ये मंदिर लोगों का प्रमुख आस्था केन्द्र भी बन गया है। यह मंदिर मीणा जनजाति का राजस्थान में सबसे सुंदर, सबसे बड़ा एवं आधुनिक सुविधाओं से लैस भगवान मीनेष का प्रमुख मंदिर है, जो अब तक का सबसे विशाल मीन मंदिर माना जाता है, चौथ का बरवाड़ा में स्थित ये मंदिर मीणा जनजाति की एकता व अखंडता का जीता-जागता उदाहरण है। सवाई माधोपुर जिले में मीणा महापंचायतों की रूपरेखा इसी मंदिर से तय की जाती है।

मंदिर[संपादित करें]

मंदिर की धार्मिक दृष्टिकोण[संपादित करें]

यह मंदिर मीणा समाज की धार्मिक आस्था का प्रमुख मंदिर है। राजस्थान में पायी जाने वाली जनजातियों में सर्वाधिक संख्या मीणा जनजाति की है। यह जनजाति मुख्य रूप से राजस्थान के सवाई माधोपुर, जयपुर, दौसा, करौली एवं उदयपुर जिलों में निवास करती है। राजस्थान की कुल मीणा जनसंख्या का लगभग 51.19 प्रतिशत सवाई माधोपुर, जयपुर व उदयपुर जिलों में रहती है। मीणा का शाब्दिक अर्थ मत्स्य या मछली होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मीणा जनजाति का संबंध भगवान मत्स्यावतार से है, जो कि विष्णु भगवान का प्रथम अवतार है। इस जनजाति को 24 खापों में विभाजित किया गया है। मीणा जनजाति के बहिभाट को 'जागा' कहा जाता है। मीणा जनजाति के बहिभाट (जागा) के अनुसार यह जनजाति 13 पाल 32 तड़ तथा 5200 गोत्रों में विभाजित है। राजस्थान के चौथ का बरवाड़ा में स्थित भगवान मत्स्यावतार का मंदिर इसी जनजाति की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। जमींदार वर्ग के मीणों द्वारा निर्मित यह मंदिर सन 2013 में बनकर तैयार हुआ जिसकी शुरुआत सात करोड़ के बजट से रखी गई जो वर्तमान में करोड़ों में तब्दील हो गई और दिनों दिन मंदिर का विकास प्रगतिशील पथ पर बढ़ता जा रहा है। करोड़ों रुपयों की लागत से बना हुआ यह मंदिर चौथ माता सरोवर के किनारे पर बना हुआ है, जिसकी रूपरेखा अमृतसर के स्वर्ण मंदिर जैसी रखी गई है। मीणा जनजाति में परंपरागत जनजातीय पंचायत होती है और इनका परंपरागत नेता पटेल कहलाता है। यही बीड़ा चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के मीणा समाज के पंच-पटेलों ने उठाया और इसका उदाहरण है चौथ का बरवाड़ा स्थित मीन भगवान का भव्य मंदिर. मीणा जनजाति में पितृवंशीय परम्परा पाई जाती है। मीणा जनजाति के लोग हिन्दू धर्मावलंबी होते हैं जो कि भगवान शिव एवं दुर्गा की सर्वाधिक पूजा करते हैं।

१००८ कुडात्मक महायज्ञ[संपादित करें]

इस मंदिर के उद्घाटन के समय श्री श्री १००८ नित्यानंद जी महाराज के निर्देशन में १००८ विष्णु महाकोटि महायज्ञ की रूपरेखा तैयार की गई। मीणा समाज के प्रमुख पंच-पटेलों व नित्यानंद जी महाराज के की देखरेख में महायज्ञ का कार्य 13 फरवरी 2013 से शुरू किया गया जो कि 18 जून 2014 तक चला। 14 फरवरी 2014 को महायज्ञ का झंडारोहण किया गया एवं 08 जून 2014 से यज्ञ शुरू हुआ जो 18 जून 2014 की शाम सम्पन हुआ। इस महायज्ञ की रसोई का सभी खर्च चौथ का बरवाड़ा तहसील की ग्राम पंचायतों ने खुशी खुशी उठाया।

मंदिर की संरचना[संपादित करें]

मंदिर का मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

मंदिर चित्र गैलरी[संपादित करें]

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मीणा समाज का योगदान[संपादित करें]

इस मंदिर में चौथ का बरवाड़ा तहसील की ग्राम पंचायतों का विशेष योगदान रहा है जिनके नाम इस प्रकार है : ग्राम पंचायत चौथ का बरवाड़ा, ग्राम पंचायत झोंपड़ा, ग्राम पंचायत आदलवाड़ा, ग्राम पंचायत भेडोला, ग्राम पंचायत बलरिया, ग्राम पंचायत बिनजारी, ग्राम पंचायत भगवतगढ़, ग्राम पंचायत डिडायच, ग्राम पंचायत ईसरदा, ग्राम पंचायत जौंला, ग्राम पंचायत महापुरा, ग्राम पंचायत पाँवडेरा, ग्राम पंचायत रजवाना, ग्राम पंचायत सारसोप, ग्राम पंचायत शिवाड़, ग्राम पंचायत टापूर एवं प्रमुख ग्राम पंचायत भैडोला.

मीणा समाज की धर्मशाला[संपादित करें]

व्यवस्थाएँ[संपादित करें]

चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र[संपादित करें]

चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के मीणा बाहुल्य गाँव[संपादित करें]

चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र में मीणा जनजाति का सबसे बड़ा गाँव झोंपड़ा आता है, वैसे चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र में मीणागुर्जर समाज ही सर्वाधिक है। मीणा समाज के प्रमुख गाँवों में झोंपड़ा, सारसोप, बगीना, डिडायच, बलरियाँ ,गरड़वास, आदलवाड़ा, जौंला, क्यावड़, महापुरा, बंदेडियाँ, गिरधरपुरा, जगमोंदा, बोरदा, नयागांव, सिरोही गाँव, शेरसिंहपुरा, भैडोला, पीपल्या आदि है।

वही चौथ का बरवाड़ा तहसील के बाहर आस-पास के मीणा गाँवों में डेकवा, बंधा, लोरवाड़ा, बिलोपा, उखलाना, बिलोता, जीनापुर, सिणोली, मैनपुरा, पीपलवाड़ा, गुड़लाचंदन आदि गाँव स्थित है। मीन भगवान का अलवर में भव्य मंदिर वना है,शुभनगर करौली में भी मंदिर है।

मीन भगवान के अन्य मंदिर[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 22 दिसंबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 13 दिसंबर 2015.
  2.  मीन भगवान मन्दिर सवाई माधोपुर