जोधपुर

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जोधपुर
—  महानगर  —
उपनाम: मारवाड़, सूर्य नगरी, नील नगरी, थार का द्वार
जोधपुर is located in राजस्थान
जोधपुर
निर्देशांक : 26°17′N 73°01′E / 26.28°N 73.02°E / 26.28; 73.02Erioll world.svgनिर्देशांक: 26°17′N 73°01′E / 26.28°N 73.02°E / 26.28; 73.02
Country Flag of भारत भारत
राज्य राजस्थान
जिला जोधपुर[1]
स्थापित 1459
संस्थापक मण्डौर के राव जोधा
Named for राव जोधा
शासन
 • महापौर, नगर निगम घनश्याम ओझा
 • कलेक्टर एवं जिलाध्यक्ष डॉ० प्रीतम बी यशवंत, भा.प्र.से
 • मण्डलायुक्त हेमन्त गेरा, भा.प्र.सेवा
 • पुलिस उपायुक्त, जोधपुर अशोक राठौर, भा.पु.सेवा
क्षेत्र
 • कुल 112.40
ऊँचाई 231
आबादी (Jan 2015)[2]
 • कुल 1
 • दर्जा ४५वां
 • घनत्व <
भाषाएं
 • आधिकारिक हिन्दी , मारवाड़ी
समय मण्डल IST (यूटीसी +5:30)
पिन 342001
वाहन पंजीकरण RJ 19
जालस्थल jodhpur.rajasthan.gov.in

जोधपुर (/ˈɒdpʊər/ ) भारत के राज्य राजस्थान क दूसरा सबसे बड़ा नगर है। इसकी जनसंख्या १० लाख के पार हो जाने के बाद इसे राजस्थान का दूसरा "महानगर " घोषित कर दिया गया था। यह यहां के ऐतिहासिक रजवाड़े मारवाड़ की इसी नाम की राजधानी भी हुआ करता था। जोधपुर थार के रेगिस्तान के बीच अपने ढेरों शानदार महलों, दुर्गों और मन्दिरों वाला प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी रहा है।

वर्ष पर्यन्त चमकते सूर्य वाले मौसम के कारण इसे "सूर्य नगरी" भी कहा जाता रहा है। यहां स्थित मेहरानगड़ दुर्ग को घेरे हुए हजारों नीले मकानों के कारण इसे "नीली नगरी" के नाम से भी जाना जाता था। यहां के पुराने शहर का अधिकांश भाग इस दुर्ग को घेरे हुए बसा है, जिसकी प्रहरी दीवार में कई द्वार बने हुए हैं,[3] हालांकि पिछले कुछ दशकों में इस दीवार के बाहर भी नगर का वृहत प्रसार हुआ है। जोधपुर की भौगोलिक स्थिति राजस्थान के भौगोलिक केन्द्र के निकट ही है, जिसके कारण ये नगर पर्यटकों के लिये राज्य भर में भ्रमण के लिये उपयुक्त आधार केन्द्र का कार्य करता है।

वर्ष २०१४ के विश्व के अति विशेष आवास स्थानों (मोस्ट एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी प्लेसेज़ ऑफ़ द वर्ल्ड) की सूची में प्रथम स्थान पाया था। [4] एक तमिल फ़िल्म, I, जो कि अब तक की भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फ़िल्मशोगी, की शूटिंग भी यहां हुई थी।[5]

नगर परिचय[संपादित करें]

बल्यू सिटी के नाम से प्रसिद्ध जोधपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे छितर के पत्थरो से होती है, पन्द्रहवी शताब्दी का विशालकाय मेहरानगढ़ किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से 125 मीटर ऊंचाई पर विधमान है। आठ द्वारों व अनगिनत बुजों से युक्त यह शहर दस किलोमीटर लंबी ऊंची दीवार से घिरा है।

सोलहवीं शताब्दी का मुख्य व्यापार केन्द्र, किलों का शहर जोधपुर, अब राजस्थान का दूसरा विशालतम शहर है। पूरे शहर में बिखरे वैभवशाली महल, किले और मंदिर, एक तरफ जहाँ ऐतिहासिक गौरव को जीवंत करते हैं वही दूसरी ओर उत्कृष्ट हस्तकलाएँ, लोक नृत्य, संगीत और प्रफुल्ल लोग शहर में रंगीन समां बाँध देते हैं।

जीवन शैली[संपादित करें]

जोध्पुर शहर के लोग बहुत मिलन्सार होते है, ये सदेव दुस्रो कि मदद के लिये ततपर रह्ते है, उलझी हुई घुमावदार गलियाँ पटरियों पर लगी दुकानों से घिरी हैं। कलात्मक रूप से बनी हुई रंगबिरंगी पोशाकें पहने हुए लोगों को देखकर प्रतीत होता हैं कि जोधपुर की जीवनशैली असाधारण रूप से सम्मोहित करने वाली है। औरते घेरदार लहंगा और आगे व पीछे के हिस्सों को ढकने वाली तीन चौथाई लंबाई की बांह वाली नितम्ब स्थल तक की जैकेट पहनती हैं। पुरूषों द्वारा पहनी हुई रंगीन पगड़ियाँ शहर में ओर भी रंग बिखेर देती हैं। आमतौर से पहने जाने वाली ढ़ीली ढ़ाली और कसी, घुड़सवारी की पैंट जोधपुरी ने यहीं से अपना नाम पाया। जोधपुर के कपदो मै जोधपुरी कोट पुरे भारत मे प्रसिध है, यह के मुख्य मन्त्रि श्री अशोक गह्लोत ने इसे एक अलग पह्चान दिलाई है।

शिक्षा क्षेत्र[संपादित करें]

राजस्थान में जोधपुर शिक्षा के क्षेत्र मे बहुत आगे है। दुर दुर से विद्यार्थी यहाँ पढ़ने के लिये आते है। जोधपुर को सीए कि खान कह जाता है। पूरे [[भारत मे सबसे ज्यादा सीए यहीं से निकलते है। शिक्षा के लिये यहाँ पर विकल्प मौजूद है। यहाँ विश्व प्रसिद्ध आइआइटी, नेशनल लो युनिवर्सिटी, एम्स, काजरि, आफरि, आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय स्थित है।

हस्तशिल्प[संपादित करें]

उत्कृष्ट हस्तशिल्पों के समृद्ध संग्रह का रंगीन प्रगर्शन देख कर जोधपुर के बाजारों में खरीददारी करना एक उत्साहपूर्ण अनुभव है। बंधेज का कपड़ा, कशीदाकारी की हुई चमड़े, ऊँट की खाल, मखमल आदि की जूतियाँ, आकर्षक रेशम की दरियाँ, मकराना के संगमरमर से बने स्मृतिचिन्ह, उपयोगी व सजावटी वस्तुओं की विस्तृत किस्में आदि इन बाजारों में पाई जाती हैं।

अनगिनत त्यौहारों, समृद्ध अतीत और शाही राज्य की संस्कृति का उत्सव मनाते हैं। वर्षा में एक बार विशाल पैमाने पर मारवाड़ समारोह मनाया जाता है।

गुरुओ के तलाब मे हनुमान सिन्ह राजपुरोहित द्वारा रजपुति, अम्रेला वेश सुन्दर बनाये जाते है जो सब से बधिया ओर फेस्नेबल होते है = उप्लब्धिया == जोधपुर को राजस्थान कि न्यायिक राज्धानि कहा जाता है, राजस्थान का उच्च न्यालय यहि स्थित है। आज यह शहर किसि भी क्षैत्र पिछे नहि है क्योकि यहा सभी केन्द्रिय एव राज्य विभाग उप्लब्ध है, यहा पुरे विश्व से जङ्ने के लिये अन्तराश्ट्रिय हवाइ अडडा भी मौजुद है, चर्चा मे रह् ने वलि थार एक्ष्प्रेस्स रेल गाङी ओर पेलेस ओन व्हिल जैसी शाही रेल गाङीया यही से शुरु होती है। पुरे राज्स्थान के प्रसिध विभाग जैसे मौसम विभाग, नार्कोटिक विभाग्, सी बी आइ, कस्टम्, वस्त्र मन्त्रालय आदि मौजुद है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

मेहरानगढ़ का किला[संपादित करें]

मेहरानगढ़ का किला पहाड़ी के बिल्‍कुल ऊपर बसे होने के कारण राजस्‍थान के सबसे खूबसूरत किलाओं में से एक है। इस किला के सौंदर्य को श्रृंखलाबद्ध रूप से बने द्वार और भी बढ़ाते हैं। इन्‍हीं द्वारों में से एक है-जयपोल। इसका निर्माण राजा मानसिंह ने 1806 ईस्‍वी में किया था। दूसरे द्वार का नाम है-विजयद्वार। इसका निर्माण राजा अजीत सिंह ने मुगलों पर विजय के उपलक्ष्‍य में किया था। किले के अंदर में भी पर्यटकों को देखने हेतु कई महत्‍वपूर्ण इमारतें हैं। जैसे मोती महल, सुख महल, फूलमहल आदि-आदि।

125 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित पांच किलोमीटर लंबा भव्य किला बहुत ही प्रभावशाली और विकट इमारतों में से एक है। बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार किवाड़, जालीदार खिड़कियाँ और प्रेरित करने वाले नाम हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना। इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह निहित है। इसके अतिरिक्त पालकियाँ, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का आश्चर्यजनक संग्रह भी है।

जसवंत थड़ा[संपादित करें]

यह पूरी तरह से मार्बल निर्मित है। इसका निर्माण 1899 में राजा जसवंत सिंह (द्वितीय) और उनके सैनिकों की याद में किया गया था। इसकी कलाकृति आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की याद में सफेद संगमरमर से ईसवी सन् 1899 में निर्मित यह शाही स्मारकों का समूह है। मुख्य स्मारक के अंदर जोधपुर के विभिन्न शासकों के चित्र हैं।

उम्‍मैद महल[संपादित करें]

महाराजा उम्‍मैद सिंह ने इस महल का निर्माण सन 1943 में किया था। मार्बल और बालूका पत्‍थर से बने इस महल का दृश्‍य पर्यटकों को खासतौर पर लुभाता है। इस महल के संग्रहालय में पुरातन युग की घडियां और पेंटिंग्‍स भी संरक्षित हैं। यही एक ऐसा बीसवीं सदी का महल है जो बाढ़ राहत परियोजना के अंतर्गत निर्मित हुआ। जिसके कारण बाढ़ से पीड़ित जनता को रोजगार प्राप्त हुआ। यह महल सोलह वर्ष में बनकर तैयार हुआ। बलुआ पत्थर से बना यह अतिसमृद्ध भवन अभी पूर्व शासकों का लिवास स्थान है जिस्के एक हिस्से में होटल चलता है और बाकी के हिस्से में संग्राहालय।

गिरडीकोट और सरदार मार्केट[संपादित करें]

छोटी छोटी दुकानों वाली, संकरी गलियों में छितरा रंगीन बाजार शहर के बीचों बीच है और हस्तशिल्प की विस्तृत किस्मों की वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है तथा खरीददारों का मनपस्द स्थल है।

राजकीय संग्राहलय[संपादित करें]

इस संग्राहलय में चित्रों, मूर्तियों व प्राचीन हथियारों का उत्कृष्ट समावेश है।

अरना झरना मरु संग्रहालय[संपादित करें]

संग्रहालय का जालघर

उत्सव व मेले[संपादित करें]

जोधपुर मे सभी पर्वो को धुमधाम से मनाया जाता है, यहा का बेतमार मेला ओर कागा का शीतला माता मेला बहुत प्रसिध है लोग दुर दुर से ये मेला देखने आते है। राज्स्थान के लोक देवता बाबा रामदेव का मसुरिया मेला भी प्रसिध है।

निकटवर्ती स्थल[संपादित करें]

बालसंमद झील[संपादित करें]

यह जोधपुर से ५ कि॰मी॰ दूर है। इस सुंदर झील का निर्माण ईसवीं सन् 1159 में हुआ था। झील के किनारे खड़ा भव्य ग्रीष्मकालीन महल खूबसूरत बगीचों से घिरा हुआ है। भ्रमण करने के लिए यह एक रमणीय स्थल है।

मंडोर गार्डन[संपादित करें]

यह शहर से 8 किलोमीटर की दूरी पर है। मारवाड़ की प्राचीन राजधानी में जोधपुर के शासकों के स्मारक हैं। हॉल ऑफ हीरों में चट्टान से दीवार में तराशी हुई पन्द्रह आकृतियां हैं जो हिन्दु देवी-देवतीओं का प्रतिनिधित्व करती है। अपने ऊची चट्टानी चबूतरों के साथ, अपने आकर्षक बगीचों के कारण यह प्रचलित पिकनिक स्थल बन गया है।[2][3]

महामंदिर[संपादित करें]

(9 किलोमीटर) - इसका निर्मीण ईसवीं सन् 1812 में हुआ था। यह अपने 84 नक्काशीदार खंभों के कारण असाधारण है।

कायलाना झील[संपादित करें]

(11 किलोमीटर) - यह खूबसूरत झील एक आदर्श पिकनिक स्थल है। नौकयाना सुविधा उपलब्ध है।

ओसियां[संपादित करें]

(58 किलोमीटर) - जोधपुर-बीकानेर राजमार्ग की दूसरी दिशा पर रेगिस्तान में यह मरूद्यान स्थित है। इस प्राचीन नगर-क्षैत्र की यात्रा के दौरान बीच-बीच में पड़ते हुए रेगिस्तानी विस्तार व छोटे-छोटे गांव अतीत के लहराते हुए भू-भागों में ले जाते है।

ओसियां में सुंदर तराशे हुए जैन व ब्राहाणों के मंदिर है। इनमें से सबसे असाधारण हैं आरंभ का सूर्य मंदिर और बाद के काली मंदिर, सच्चीय माता मंदिर और भगवान महावीर का मुख्य मंदिर।

ढावा[संपादित करें]

(45 किलोमीटर) - एक वन्य प्राणी उद्यान जिसमें भारतीय मृग सबसे अधिक संख्या में है। इसे स्थानीय लोग धवा के नाम से भी उच्चारित करते है।

नागौर[संपादित करें]

(135 किलोमीटर) - यह भित्ति चित्रों से युक्त एक शानदार किला है। हर वर्ष जनवरी-फरवरी में एक सप्ताह तक चलने वाले पशु मेले का स्थल भी है।

रोहट किला[संपादित करें]

(40 किलोमीटर) - अब हैरिटेज होटल है, यह किला देखने योग्य है।

लूनी किला[संपादित करें]

(20 किलोमीटर) - किले को अब हैरिटेज होटल में परिवर्तित कर दिया गया है। किला व उसके आसपास का वातावरण दर्शनीय है।

खरीददारी[संपादित करें]

जोधपुर के मोची गली से चमड़े का जूता, रंगीन कपड़ा, टाई, पॉलिश किया हुआ घरेलू सजावटी सामान आदि की खरीददारी की जा सकती है। जोधपूर् के मिर्च्हीबदे बाहर् के देशो मे निर्य्यात किये जाते है।

भोजन[संपादित करें]

यहां खासतौर पर दूध निर्मित खाद्य पदार्थों का ज्‍यादा प्रयोग होता है। जैसे मावा का लड्डू, क्रीम युक्‍त लस्‍सी, मावा कचौड़ी, और दूध फिरनी आदि-आदि। यहा का मिर्ची-बडा और प्याज कि कचौड़ी बहुत ही प्रसिध है। भोजन में प्राय यहां बाजरे का आटा से बनी रोटियां, जिन्हें सोगरा कह्ते हैं प्रमुखता से खाया जाता रहा है। सोगरा किसी भी चटनी, साग आदि के साथ खाया जाता है। जो खाने में स्वादिष्ट होता है। इसी प्रकार छाछ और प्याज भी इसके साथ खाया जाता है।

उत्‍सव[संपादित करें]

मारवाड़ उत्‍सव, नागौर का प्रसिद्ध पशु मेला, कागा में शीतलामाता का उत्‍सव और पीपर का गंगुआर मेला। यह कुछ महत्‍वपूर्ण उत्‍सव है जो जोधपुर में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। यहा पर सावन माह की बडी तीज ओर बेतमार मेला विश्व् प्रसिध है। जोधपुर में गण्गौर पूजन का भी विशेष मह्त्व है और इसी उत्सव पर पुराने शहर में गण्गौर की झांकियां भी निकाली जाती हैं। धिंगा गवर इसके बाद आने वाला एक आयोजन है- इस दिन महिलाऐं शहर के परकोटे में तरह तरह के स्वांग रच कर रात को बाहर निकलती हैं और पुरुषों को बैंत से मारती हैं अपने प्रकार का एक अनोखा त्योहार है।

प्रमुख व्यक्ति[संपादित करें]

यह भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]