जोधपुर

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
जोधपुर
Jodhpur
सूर्यनगरी ,जोधाणा
—  महानगर  —
मेहरानगढ़ दुर्ग ,जोधपुर
जोधपुर is located in राजस्थान
जोधपुर
निर्देशांक : 26°17′N 73°01′E / 26.28°N 73.02°E / 26.28; 73.02निर्देशांक: 26°17′N 73°01′E / 26.28°N 73.02°E / 26.28; 73.02
देश भारत भारत
राज्य राजस्थान
जिला जोधपुर[1]
बसे हुए १४५९
संस्थापक मण्डोर के राव जोधा
समान नाम का राव जोधा
शासन
 • मेयर ,महानगर पालिका कॉर्पोरेशन घनश्याम ओझा
 • कलेक्टर और डीएम बिष्णु चरण मलिक , आईएएस
 • प्रभागीय कमिश्नर
 • जोधपुर के पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ , भा.पु.से.
क्षेत्र[2]
 • महानगर 78.6
 • नगर 289.5
ऊँचाई 231
जनसंख्या (२०११)[3]
 • महानगर 1
 • दर्जा ४४वां
 • घनत्व <
 • नगरीय 1
भाषाएं
 • आधिकारिक हिन्दी, मारवाड़ी
समय मण्डल आईएसटी (यूटीसी +५:३०)
पिन ३४२००१
वाहन पंजीकरण आरजे १९
जालस्थल jodhpur.rajasthan.gov.in


जोधपुर (/ˈɒdpʊər/ ) भारत के राज्य राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा नगर है। इसकी जनसंख्या १० लाख के पार हो जाने के बाद इसे राजस्थान का दूसरा "महानगर " घोषित कर दिया गया था। यह यहां के ऐतिहासिक रजवाड़े मारवाड़ की इसी नाम की राजधानी भी हुआ करता था। जोधपुर थार के रेगिस्तान के बीच अपने ढेरों शानदार महलों, दुर्गों और मन्दिरों वाला प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है।

वर्ष पर्यन्त चमकते सूर्य वाले मौसम के कारण इसे "सूर्य नगरी" भी कहा जाता है। यहां स्थित मेहरानगढ़ दुर्ग को घेरे हुए हजारों नीले मकानों के कारण इसे "नीली नगरी" के नाम से भी जाना जाता था। यहां के पुराने शहर का अधिकांश भाग इस दुर्ग को घेरे हुए बसा है, जिसकी प्रहरी दीवार में कई द्वार बने हुए हैं,[4] हालांकि पिछले कुछ दशकों में इस दीवार के बाहर भी नगर का वृहत प्रसार हुआ है। जोधपुर की भौगोलिक स्थिति राजस्थान के भौगोलिक केन्द्र के निकट ही है, जिसके कारण ये नगर पर्यटकों के लिये राज्य भर में भ्रमण के लिये उपयुक्त आधार केन्द्र का कार्य करता है।

वर्ष २०१४ के विश्व के अति विशेष आवास स्थानों (मोस्ट एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी प्लेसेज़ ऑफ़ द वर्ल्ड) की सूची में प्रथम स्थान पाया था। [5] एक तमिल फ़िल्म, आई, जो कि अब तक की भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फ़िल्मशोगी, की शूटिंग भी यहां हुई थी।[6]

नगर परिचय[संपादित करें]

सूर्य नगरी के नाम से प्रसिद्ध जोधपुर शहर की पहचान यहां के महलों और पुराने घरों में लगे छितर के पत्थरों से होती है, पन्द्रहवी शताब्दी का विशालकाय मेहरानगढ़ दुर्ग , पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से १२५ मीटर ऊंचाई पर विद्यमान है। आठ द्वारों व अनगिनत बुजों से युक्त यह शहर दस किलोमीटर लंबी ऊंची दीवार से घिरा है।

सोलहवीं शताब्दी का मुख्य व्यापार केन्द्र, किलों का शहर जोधपुर, अब राजस्थान का दूसरा विशालतम शहर है। पूरे शहर में बिखरे वैभवशाली महल ,किले और मंदिर , एक तरफ जहां ऐतिहासिक गौरव को जीवंत करते हैं वही दूसरी ओर उत्कृष्ट हस्तकलाएं लोक नृत्य , संगीत और प्रफुल्ल लोग शहर में रंगीन समां बांध देते हैं।

जीवन शैली[संपादित करें]

जोधपुर शहर के लोग बहुत मिलनसार होते है, ये सदैव दुसरों की मदद के लिये ततपर रहते है, उलझी हुई घुमावदार गलियाँ पटरियों पर लगी दुकानों से घिरी हैं। कलात्मक रूप से बनी हुई रंगबिरंगी पोशाकें पहने हुए लोगों को देखकर प्रतीत होता हैं कि जोधपुर की जीवनशैली असाधारण रूप से सम्मोहित करने वाली है। औरतें घेरदार लहंगा और आगे व पीछे के हिस्सों को ढकने वाली तीन चौथाई लंबाई की बांह वाली नितम्ब स्थल तक की जैकेट पहनती हैं। पुरूषों द्वारा पहनी हुई रंगीन पगड़ियाँ शहर में ओर भी रंग बिखेर देती हैं। आमतौर से पहने जाने वाली ढ़ीली ढ़ाली और कसी, घुड़सवारी की पैंट जोधपुरी ने यहीं से अपना नाम पाया। जोधपुर के कपदो मैं जोधपुरी कोट पुरे भारत मे प्रसिद्ध है, यह के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने इसे एक अलग पहचान दिलाई है।

शिक्षा क्षेत्र[संपादित करें]

राजस्थान में जोधपुर शिक्षा के क्षेत्र मे बहुत आगे हैं। दुर दुर से विद्यार्थी यहाँ पढ़ने के लिये आते है। जोधपुर को सीए कि खान कहा जाता है। पूरे भारत मे सबसे ज्यादा सीए यहीं से निकलते है। शिक्षा के लिये यहां पर विकल्प मौजूद है। यहाँ विश्व प्रसिद्ध आईआईटी , नेशनल लो युनिवर्सिटी, एम्स, काजरी , आफरी आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय स्थित है। इनके अलावा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय हैं। तथा साथ ही बालिकाओं के लिए भी कॉलेज है। जोधपुर में लगभग हर गांव में विद्यालय है।

हस्तशिल्प[संपादित करें]

उत्कृष्ट हस्तशिल्पों के समृद्ध संग्रह का रंगीन प्रगर्शन देख कर जोधपुर के बाजारों में खरीददारी करना एक उत्साहपूर्ण अनुभव है। बंधेज का कपड़ा , कशीदाकारी की हुई चमड़े, ऊँट की खाल, मखमल आदि की जूतियां आकर्षक रेशम की दरियां मकराना के संगमरमर से बने स्मृतिचिन्ह, उपयोगी व सजावटी वस्तुओं की विस्तृत किस्में आदि इन बाजारों में पाई जाती हैं।

अनगिनत त्योहारों , समृद्ध अतीत और शाही राज्य की संस्कृति का उत्सव मनाते हैं। वर्षा में एक बार विशाल पैमाने पर मारवाड़ समारोह भी मनाया जाता है।

उपलब्धियां[संपादित करें]

जोधपुर को राजस्थान की न्यायिक राजधानी कहा जाता है, राजस्थान का उच्च न्यायालय भी जोधपुर में ही स्थित है। जोधपुर पुरे विश्व से जुड़ने के लिये अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी मौजुद है। पुरे राजस्थान के प्रसिद्ध विभाग जैसे मौसम विभाग , नार्कोटिक विभाग सी बी आइ, कस्टम ,वस्त्र मन्त्रालय आदि मौजूद है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

जोधपुर का विहंगम दृष्य

मेहरानगढ़ का किला[संपादित करें]

मेहरानगढ़ दुर्ग पहाड़ी के बिल्‍कुल ऊपर बसे होने के कारण राजस्‍थान के सबसे खूबसूरत किलों में से एक है। इस किले के सौंदर्य को श्रृंखलाबद्ध रूप से बने द्वार और भी बढ़ाते हैं। इन्‍हीं द्वारों में से एक है-जयपोल इसका निर्माण राजा मानसिंह ने १८०६ ईस्वी में किया था। दूसरे द्वार का नाम है-विजयद्वार इसका निर्माण राजा अजीत सिंह ने मुगलों पर विजय के उपलक्ष्‍य में किया था। किले के अंदर में भी पर्यटकों को देखने हेतु कई महत्‍वपूर्ण इमारतें हैं। जैसे मोती महल, सुख महल, फूलमहल आदि-आदि।

१२५ मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित पांच किलोमीटर लंबा भव्य किला बहुत ही प्रभावशाली और विकट इमारतों में से एक है। बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार किवाड़, जालीदार खिड़कियाँ और प्रेरित करने वाले नाम हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना। इन महलों में भारतीय राजवंशो के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह निहित है। इसके अतिरिक्त पालकियाँ, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का आश्चर्यजनक संग्रह भी है।

जसवंत थड़ा[संपादित करें]

यह पूरी तरह से मार्बल निर्मित है। इसका निर्माण 1899 में राजा जसवंत सिंह (द्वितीय) और उनके सैनिकों की याद में किया गया था। इसकी कलाकृति आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की याद में सफेद संगमरमर से ईसवी सन् 1899 में निर्मित यह शाही स्मारकों का समूह है। मुख्य स्मारक के अंदर जोधपुर के विभिन्न शासकों के चित्र हैं।

उम्‍मैद महल[संपादित करें]

महाराजा उम्‍मैद सिंह ने इस महल का निर्माण सन 1943 में किया था। मार्बल और बालूका पत्‍थर से बने इस महल का दृश्‍य पर्यटकों को खासतौर पर लुभाता है। इस महल के संग्रहालय में पुरातन युग की घडियां और पेंटिंग्‍स भी संरक्षित हैं। यही एक ऐसा बीसवीं सदी का महल है जो बाढ़ राहत परियोजना के अंतर्गत निर्मित हुआ। जिसके कारण बाढ़ से पीड़ित जनता को रोजगार प्राप्त हुआ। यह महल सोलह वर्ष में बनकर तैयार हुआ। बलुआ पत्थर से बना यह अतिसमृद्ध भवन अभी पूर्व शासकों का लिवास स्थान है जिस्के एक हिस्से में होटल चलता है और बाकी के हिस्से में संग्राहालय।

गिरडीकोट और सरदार मार्केट[संपादित करें]

छोटी छोटी दुकानों वाली, संकरी गलियों में छितरा रंगीन बाजार शहर के बीचों बीच है और हस्तशिल्प की विस्तृत किस्मों की वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है तथा खरीददारों का मनपस्द स्थल है।

राजकीय संग्राहलय[संपादित करें]

इस संग्राहलय में चित्रों, मूर्तियों व प्राचीन हथियारों का उत्कृष्ट समावेश है।

अरना झरना मरु संग्रहालय[संपादित करें]

संग्रहालय का जालघर

उत्सव व मेले[संपादित करें]

जोधपुर मे सभी पर्वों को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, यहां का बेतमार मेला और कागा का शीतला माता मेला बहुत प्रसिद्ध है लोग दूर - दूर से ये मेला देखने आते है। राजस्थान के लोक देवता रामसापीर का मसुरिया मेला भी काफी प्रसिद्ध है।

निकटवर्ती स्थल[संपादित करें]

बालसंमद झील[संपादित करें]

यह जोधपुर से ५ कि॰मी॰ दूर है। इस सुंदर झील का निर्माण ईसवीं सन् 1159 में हुआ था। झील के किनारे खड़ा भव्य ग्रीष्मकालीन महल खूबसूरत बगीचों से घिरा हुआ है। भ्रमण करने के लिए यह एक रमणीय स्थल है।

मंडोर गार्डन[संपादित करें]

यह शहर से ०८ किलोमीटर की दूरी पर है। मारवाड़ की प्राचीन राजधानी में जोधपुर के शासकों के स्मारक हैं। हॉल ऑफ हीरों में चट्टान से दीवार में तराशी हुई पन्द्रह आकृतियां हैं जो हिन्दु देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करती है। अपने ऊँची चट्टानी चबूतरों के साथ, अपने आकर्षक बगीचों के कारण यह प्रचलित पिकनिक स्थल भी बन गया है।

महामंदिर[संपादित करें]

इसका निर्माण ईसवीं सन १८१२ में किया था। यह अपने ८४ नक्काशीदार खंभों के कारण असाधारण है।

कायलाना झील[संपादित करें]

कायलाना झील जो कि जोधपुर की एक प्रसिद्ध झील है। यह खूबसूरत झील एक आदर्श पिकनिक स्थल है। झील मुख्य शहर से ११ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

ओसियां[संपादित करें]

ओसियां जोधपुर जिले का एक प्राचीन क्षेत्र है तथा वर्तमान में एक तहसील के रूप में विस्तृत है। यह जोधपुर - बीकानेर राजमार्ग की दूसरी दिशा पर रेगिस्तान में बसा हुआ है। इस प्राचीन क्षेत्र की यात्रा के दौरान बीच - बीच में पड़ते हुए रेगिस्तानी विस्तार व छोटे-छोटे गांव अतीत के लहराते हुए भू-भागों में ले जाते है। ओसियां में सुंदर तराशे हुए जैनब्राह्मणों के ऐतिहासिक मन्दिर है। इनमें से सबसे असाधारण हैं आरंभ का सूर्य मंदिर और बाद के काली मंदिर, सच्चियाय माता मन्दिर [7]और भगवान महावीर मन्दिर भी स्थित है। यह काफी प्राचीन नगर है पूर्व में इसका नाम उपकेश था।

धवा[संपादित करें]

धवा जो कि एक वन्य प्राणी उद्यान है जो जोधपुर से ४६ किलोमीटर दूर स्थित है जिसमें भारतीय मृग सबसे अधिक संख्या में है। इसे स्थानीय लोग धवा के नाम से भी उच्चारित करते है। यह एक बिश्नोई बाहुल्य इलाका है।

नागौर[संपादित करें]

(135 किलोमीटर) - यह भित्ति चित्रों से युक्त एक शानदार किला है। हर वर्ष जनवरी-फरवरी में एक सप्ताह तक चलने वाले पशु मेले का स्थल भी है।

रोहट किला[संपादित करें]

(40 किलोमीटर) - अब हैरिटेज होटल है, यह किला देखने योग्य है।

लूनी किला[संपादित करें]

(20 किलोमीटर) - किले को अब हैरिटेज होटल में परिवर्तित कर दिया गया है। किला व उसके आसपास का वातावरण दर्शनीय है।

खरीददारी[संपादित करें]

जोधपुर के मोची गली से चमड़े का जूता, रंगीन कपड़ा, टाई, पॉलिश किया हुआ घरेलू सजावटी सामान आदि की खरीददारी की जा सकती है। जोधपूर् के मिर्चीबड़े बाहर के देशो मे निर्यात किये जाते है।

भोजन[संपादित करें]

यहां खासतौर पर दूध निर्मित खाद्य पदार्थों का ज्‍यादा प्रयोग होता है। जैसे मावा का लड्डू, क्रीम युक्‍त लस्‍सी, मावा कचौरी, और दूध फिरनी आदि-आदि। यहा का मिर्ची-बडा और प्याज कि कचौरी बहुत ही प्रसिद्ध है। भोजन में प्राय यहां बाजरे का आटे से बनी रोटियां, जिन्हें सोगरा कह्ते हैं, प्रमुखता से खाया जाता है। सोगरा किसी भी चटनी, साग आदि के साथ खाया जाता है। जो खाने में स्वादिष्ट होता है। इसी प्रकार छाछ और प्याज भी इसके साथ खाया जाता है।

उत्‍सव[संपादित करें]

मारवाड़ उत्‍सव, नागौर का प्रसिद्ध पशु मेला, कागा में शीतलामाता का उत्‍सव और पीपाड़ का गंगुआर मेला। यह कुछ महत्‍वपूर्ण उत्‍सव है जो जोधपुर में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाते है। यहा पर सावन माह की बड़ी तीज और बेतमार मेला विश्व् प्रसिद्ध है। जोधपुर में गणगौर पूजन का भी विशेष मह्त्व है और इसी उत्सव पर पुराने शहर में गणगौर की झांकियां भी निकाली जाती हैं। धिंगा गवर इसके बाद आने वाला एक आयोजन है- इस दिन महिलाऐं शहर के परकोटे में तरह तरह के स्वांग रच कर रात को बाहर निकलती हैं और पुरुषों को बैंत से मारती हैं अपने प्रकार का एक अनोखा त्योहार है।

प्रमुख व्यक्ति[संपादित करें]

परिवहन[संपादित करें]

शहर को अच्छी तरह से स्थापित रेल, सड़क और वायु इसे देश के अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने के हवा नेटवर्क है।

जोधपुर रेलवे स्टेशन जोधपुर रेलवे स्टेशन उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर) के संभागीय मुख्यालय है। यह अच्छी तरह से अलवर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरू, तिरुवनंतपुरम, पुणे, कोटा, कानपुर, बरेली, हैदराबाद, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल, धनबाद, पटना, गुवाहाटी, नागपुर, लखनऊ जैसे प्रमुख भारतीय शहरों के लिए रेलवे के साथ जुड़ा हुआ है , ग्वालियर, जयपुर आदि मुख्य जोधपुर स्टेशन (जू) भीड़ कम करने के लिए, उपनगरीय स्टेशन भगत की कोठी (BGKT) यात्री गाड़ियों के लिए दूसरा मुख्य स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में 106 गाड़ियों पर दोनों स्टेशनों के लिए कार्य करता है। जोधपुर रेलवे स्टेशन से होने वाले महत्वपूर्ण ट्रेनों में से कुछ के लिए जोधपुर से रणथंभौर एक्सप्रेस (इंदौर को जोधपुर), मंडोर एक्सप्रेस (दिल्ली के लिए जोधपुर), Suryanagri एक्सप्रेस (मुंबई के लिए जोधपुर), मरूधर एक्सप्रेस (लखनऊ जोधपुर), हावड़ा सुपरफास्ट (हैं- हावड़ा) आदि

लक्जरी ट्रेन सेवा-सच भव्यता और राजस्थान की रॉयल संपन्नता सामना करने के लिए, लक्जरी पहियों और रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स पर पैलेस गाड़ियों आरटीडीसी और भारतीय रेल द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे हैं। जोधपुर ट्रेनों की दोनों के स्थलों में से एक है। हाल ही में जोधपुर में मेट्रो ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए एक योजना शहर के यातायात भीड़ कम करने के लिए प्रस्तावित किया गया था। हालांकि, इस प्रस्ताव को अभी भी अपने अनुमोदन के लिए राज्य सरकार के पास लंबित है।

जोधपुर के आसपास के उपनगरीय स्टेशनों[संपादित करें]

  1. Raikabagh पैलेस जंक्शन
  2. भगत की कोठी रेलवे स्टेशन
  3. Mahamandir रेलवे स्टेशन
  4. Basani रेलवे स्टेशन
  5. जोधपुर कैंट रेलवे स्टेशन
  6. Mandor रेलवे स्टेशन
  7. Banar रेलवे स्टेशन
  8. Salawas रेलवे स्टेशन

जोधपुर एयरपोर्ट[संपादित करें]

जोधपुर एयरपोर्ट राजस्थान के प्रमुख हवाई अड्डों में से एक है। यह मुख्य रूप से नागरिक हवाई यातायात के लिए अनुमति देने के लिए एक नागरिक बाड़े के साथ एक सैन्य एयरबेस है। जोधपुर की रणनीतिक स्थिति के कारण, इस हवाई अड्डे के भारतीय वायु सेना के लिए सबसे महत्वपूर्ण लोगों में से एक के रूप में माना जाता है।

वर्तमान में, वहाँ शहर एयर इंडिया और जेट एयरवेज और स्पाइसजेट द्वारा संचालित करने के लिए दिल्ली, मुंबई, उदयपुर, जयपुर और बेंगलूर से दैनिक उड़ानें हैं। हवाई अड्डे की लंबे समय से प्रतीक्षित विस्तार के लिए बिल और बुनियादी औपचारिकताओं जून 2016 में सभी संबंधित अधिकारियों से मंजूरी दे दी थी शुरुआत फ़रवरी 2016 पोस्ट विस्तार दो चरणों में हवाई अड्डे के विस्तार के लिए रास्ता साफ, यह उम्मीद है कि वहां सुबह और शाम को शहर से अधिक विमान सेवाओं के लिए और शहर इधर-उधर आने वाले के अलावा वर्तमान में उपलब्ध की तुलना में अधिक शहरों के लिए उड़ानों के लिए किया जाएगा।

रोड[संपादित करें]

जोधपुर राज्य के भीतर शहरों में राजस्थान के सभी प्रमुख शहरों और दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, उज्जैन, आगरा आदि के अलावा डीलक्स और एक्सप्रेस बस सेवा से जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, राजस्थान रोडवेज दिल्ली के लिए वोल्वो और मर्सिडीज बेंज बस सेवा प्रदान करता है , अहमदाबाद, जयपुर, उदयपुर और जैसलमेर हाल ही में, बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) लो फ्लोर और सेमी लो फ्लोर प्रमुख मार्गों पर चलने वाली बसों के साथ शहर में शुरू की है। जोधपुर में तीन राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ और दस राज्य राजमार्गों के साथ राजस्थान राज्य राजमार्ग नेटवर्क के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजर जोधपुर:

एनएच 62, अंबाला-कैथल-हिसार-फतेहपुर-जोधपुर-पाली, कुल लंबाई 690 किलोमीटर = एनएच 112, जंक्शन एनएच 14 बार जैतारण-Bilara-Kaparda-जोधपुर-KalyanpurPachpadra-Baloootra-Tilwara-खेर-BagundiDhudhwa-Madhasar-कवास जोड़ने और बाड़मेर के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग 15 के साथ अपने जंक्शन पर समाप्त, कुल लंबाई = 343 किमी के निकट के साथ एनएच 114, जंक्शन एनएच 65 के साथ जोधपुर के पास से जोड़ने बालेसर - Dechhu और एनएच 15 पोखरण के पास के साथ अपने जंक्शन पर समाप्त, कुल लंबाई = 180 किमी

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Jodhpur.nic.in". http://jodhpur.nic.in/dp1.htm. 
  2. "Jodhpur District Census 2011 Handbook: VILLAGE AND TOWN WISE PRIMARY CENSUS ABSTRACT (PCA)" (PDF). Censusofindia.gov.in. p. 33. http://www.censusindia.gov.in/2011census/dchb/0815_PART_B_DCHB_JODHPUR.pdf. अभिगमन तिथि: 19 April 2016. 
  3. "Census of India : Provisional Population Totals Paper 1 of 2011 : Rajasthan". http://www.censusindia.gov.in/2011-prov-results/prov_data_products__rajasthan.html. 
  4. Gopal, Madan (1990). K.S. Gautam. ed. India through the ages. Publication Division, Ministry of Information and Broadcasting, भारत सरकार. प॰ 178. 
  5. dailymail.co.uk/travel/article-2562228/Lonely-Planet-reveals-10-extraordinary-places-stay-2014.html
  6. [1]
  7. http://www.shriosiyamataji.org/shriosiyamatajihistory.html Sachiyay Mata Temple Osian] अभिगमन तिथि : ०७ मई २०१६

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]