हैदराबाद

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यह लेख भारत के एक नगर के बारे में है, अन्य के लिये देखें हैदराबाद (बहुविकल्पी)
हैदराबाद
హైదరాబాద్
حیدرآباد
—  नगर  —
Skyline of हैदराबाद
हैदराबाद is located in भारत
हैदराबाद
निर्देशांक : 17°22′N 78°29′E / 17.37°N 78.48°E / 17.37; 78.48निर्देशांक: 17°22′N 78°29′E / 17.37°N 78.48°E / 17.37; 78.48
देश भारत
राज्य तेलंगाना
ज़िला हैदराबाद
रंगारेड्डी
मेदक
जनसंख्या (2011)[1]
 • नगर 67,31,790
 • महानगर 77,49,334
समय मण्डल आइएसटी (यूटीसी +5:30)
जालस्थल ghmc.gov.in

हैदराबाद (तेलुगु: హైదరాబాదు,उर्दु: حیدر آباد) भारत के राज्य तेलंगाना तथा आन्ध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी है, जो दक्कन के पठार पर मूसी नदी के किनारे स्थित है। प्राचीन काल के दस्तावेजों के अनुसार इसे भाग्यनगर के नाम से जाना जाता था। आज भी यह प्राचीन नाम अत्यन्त ही लोकप्रिय है। कहा जाता है कि किसी समय में इस ख़ूबसूरत शहर को क़ुतुबशाही परम्परा के पाँचवें शासक मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने अपनी प्रेमिका भागमती को उपहार स्वरूप भेंट किया था, उस समय यह शहर भागनगर के नाम से जाना जाता था। भागनगर समय के साथ हैदराबाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसे 'निज़ामों का शहर' तथा 'मोतियों का शहर' भी कहा जाता है।

यह भारत के सर्वाधिक विकसित नगरों मे से एक है और भारत में सूचना प्रौधोगिकी एवं जैव प्रौद्यौगिकी का केन्द्र बनता जा रहा है। हुसैन सागर से विभाजित, हैदराबाद और सिकंदराबाद जुड़वां शहर हैं। हुसैन सागर का निर्माण सन १५६२ में इब्राहीम कुतुब शाह के शासन काल में हुआ था और यह एक मानव निर्मित झील है। चारमीनार, इस क्षेत्र में प्लेग महामारी के अंत की यादगार के तौर पर मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने १५९१ में, शहर के बीचों बीच बनवाया था। गोलकुंडा के क़ुतुबशाही सुल्तानों द्वारा बसाया गया यह शहर ख़ूबसूरत इमारतों, निज़ामी शानो-शौक़त और लजीज खाने के कारण मशहूर है और भारत के मानचित्र पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अलग अहमियत रखता है। निज़ामों के इस शहर में आज भी हिन्दू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द्र से एक-दूसरे के साथ रहकर उनकी खुशियों में शरीक होते हैं। अपने उन्नत इतिहास, संस्कृति, उत्तर तथा दक्षिण भारत के स्थापत्य के मौलिक संगम, तथा अपनी बहुभाषी संस्कृति के लिये भौगोलिक तथा सांस्कृतिक दोनों रूपों में जाना जाता है। यह वह स्थान रहा है जहां हिन्दू और मुसलमान शांतिपूर्वक शताब्दियों से साथ साथ रह रहे हैं।

निजामी ठाठ-बाट के इस शहर का मुख्य आकर्षण चारमीनार, हुसैन सागर झील, बिड़ला मंदिर, सालारजंग संग्रहालय आदि है, जो देश-विदेश इस शहर को एक अलग पहचान देते हैं। यह भारतीय महानगर बंगलौर से 574 किलोमीटर दक्षिण में, मुंबई से 750 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में तथा चेन्नई से 700 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। किसी समय नवाबी परम्परा के इस शहर में शाही हवेलियाँ और निज़ामों की संस्कृति के बीच हीरे जवाहरात का रंग उभर कर सामने आया तो कभी स्वादिष्ट नवाबी भोजन का स्वाद। इस शहर के ऐतिहासिक गोलकुंडा दुर्ग की प्रसिद्धि पार-द्वार तक पहुँची और इसे उत्तर भारत और दक्षिणांचल के बीच संवाद का अवसर सालाजार संग्रहालय तथा चारमीनार ने प्रदान किया है। वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार इस महानगर की जनसंख्या ६८ लाख से अधिक है।

स्थापना[संपादित करें]

गोलकोंडा का पुराना क़िला राज्य की राजधानी के लिए अपर्याप्त सिद्ध हुआ और इसलिए लगभग 1591 में क़ुतुबशाही वंश में पाँचवें, मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने पुराने गोलकोंडा से कुछ मील दूर मूसा नदी के किनारे हैदराबाद नामक नया नगर बनाया।

चार खुली मेहराबों और चार मीनारों वाली भारतीय-अरबी शैली की भव्य वास्तुशिल्पीय रचना चारमीनार, क़ुतुबशाही काल की सर्वोच्च उपलब्धि मानी जाती है। यह वह केंद्र है, जिसके आसपास बनाई गई मक्का मस्जिद 10 हज़ार लोगो को समाहित कर सकती है। हैदराबाद अपने सौंदर्य और समृद्धि के लिए जाना जाता है। चारमीनार के बगल में लाड-बाजार, गुलजार हौज, मशहूर विक्रय केंद्र है। चारमीनार के एक तरफ भाग्यलक्ष्मी का प्रसिद्ध मंदिर है।

नामकरण[संपादित करें]

हैदरबाद नाम के पीछे कई धारणायें हैं। एक प्रसिद्ध धारणा है कि इस शहर को बसाने के बाद मुहम्मद कुली कुतुब शाह एक स्थानीय बंजारा लड़की भागमती से प्रेम कर बैठा था, लड़की से शादी के बाद उसने इस शहर का नाम भाग्यनगरम् रखा। इस्लाम स्वीकार करने के बाद, भागमती का नाम हैदर महल हुआ - और शहर का भी नया नाम हैदराबाद ("हैदर का बसाया गया शहर") [2]

इतिहास[संपादित करें]

अपने लजीज मुगलई भोजन के साथ-साथ हैदराबाद निजामी तहजीब के कारण भी दुनिया भर में मशहूर है। स्वादप्रेमियों के लिए तो हैदराबाद जन्नत के समान है। यहाँ की लजीज बिरयानी और पाया की खूशबू दूर-दूर से पर्यटकों को हैदराबाद खींच लाती है।

वेब दुनिया हिन्दी[3]

सुल्तान कुली कुतुब मुल्क, गोलकुंडा सल्तनत के शासक परिवार, "कुतुब शाही" राजवंश का संस्थापक था। १५१२ मे स्वतंत्र सल्तनत बनने से पहले यह राजवंश बहमनी सल्तनत के आधीन था। १५९१ में इस राजवंश के एक शासक मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने मूसी नदी के तट पर हैदराबाद शहर की स्थापना की, यह स्थान परिवर्तन, पुराने मुख्यालय गोलकोण्डा में राजवंश को हो रही पानी की कमी के कारण करना पडा। कहा जाता है कि, इससे पहले कि प्लेग की महामारी उसकी नये बसाये शहर में फ़ैल पाती, उस पर काबू पाया जा सका, इसलिये उसने, सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुये, उसी साल, चारमीनार बनवाने का भी आदेश दिया।

१६वीम शताब्दी और शुरुआती १७वीं शताब्दी में, जैसे जैसे कुतुब शाही राजवंश की शक्ति और सत्ता बढती गयी, हैदराबाद हीरों के व्यापार का केंन्द्र बनता गया। महारानी एलीजाबेथ के राजमुकुट में जड़ा विश्व में सर्वाधिक प्रसिद्ध कोह-ए-नूर, गोलकुंड़ा की हीरों की खानें से ही निकला है। कुतुब शाही राजवंश ने हैदराबाद में हिन्दुस्तानी-फारसी और हिन्दुस्तानी-इस्लामी साहित्य के विकास में भी सहयोग किया। कुछ सुल्तान स्थानीय तेलगू संस्कृति के संरक्षक भी माने जाते हैं। १६वीं शताब्दी में शहर गोल्कुंडा की जनसंख्या के बसने के लियेबढा और फ़लतः कुतुब शाही शासकों की राजधानी बन गया। हैदराबाद अपने बागों और सुखद मौसम के लिये जाना जाने लगा।

१६८७ में, मुगल शासक ऒरंगजेब ने हैदराबाद पर अधिकार कर लिया। इस कम समय के मुगल शासन के दॊरान, हैदराबाद का सॊभाग्य क्षय होने लगा। जल्द ही, मुगल शासक के द्वारा नियुक्त शहर के सूबेदार ने अधिक स्वायत्ता पा ली। १७२४ में असफ़ जाह प्रथम, जिसे मुगल सम्राट ने "निजाम-ए-मुल्क" का खिताब दिया था, ने एक विरोधी अधिकारी को हैदराबाद पर अधिकार स्थापित करने में हरा दिया। इस तरह आसफ़ जाह राजवंश का प्रारंभ हुआ, जिसने हैदराबाद पर भारत की अंग्रेजों से स्वतंत्रता के एक साल बाद तक शासन किया। आसफ़ जाह के उत्तराधिकारीयों ने हैदराबाद पर राज्य किया, वे निजाम कहलाये। इन सात निजामों के राज्य में हैदराबाद सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों भांति विकसित हुआ। हैदराबाद राज्य की आधिकारिक राजधानी बन गया और पुरानी राजधानी गोलकुंडा छोंड़ दी गयी। बड़े बड़े जलाशय जैसे कि निजाम सागर, तुंगबाद्र, ओसमान सागर, हिमायत सागर और भी कई बनाये गये। नगार्जुन सागर के लिये सर्वे भी इसी समय शुरु किया गया, जिसे भारत सरकार ने १९६९ में पूरा किया।

जब १९४७ में भारत स्वतन्त्र हुआ, ब्रितिश शासन से हुयी शर्तों के तहत हैदराबाद ने; जिसका प्रतिनिधित्व मुख्य मन्त्री, मंत्रिमण्डल और 'निजाम' कर रहे थे, स्वतन्त्र होने को चुना, एक मुक्त शासक की भान्ति या ब्रिटिश साम्राज्य की रियासत की भान्ति भारत ने हैदराबाद पर आर्थिक नाकाबन्दी लगा दी | परिणामतः हैरदराबाद राज्य को एक विराम समझॉता करना पडा | भारत की स्वतन्त्रता के करीब एक साल बाद, १७ सितम्बर १९४८ के दिन निजाम ने अधिमिलन प्रपत्र पर हस्ताक्षर किये | १ नवम्बर १९५६ को भारत का भाषायी आधार पर पुर्नसंगठन किया गया | हैदराबाद राज्य के प्रदेश नये बने आन्ध्र प्रदेश, मुंबई (बाद मे महाराष्ट्र) और कर्नाटक राज्यों मे तेलुगुभाषी लोगं के अनुसार बांट दिये गये | इस तरह हैदराबाद नये बने राज्य आन्ध्र प्रदेश की राजधानी बना |[3]

भूगोल और पर्यावरण[संपादित करें]

हैदराबाद शहर दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य मे स्थित है | यह देक्कन क्षेत्र मे है जो, समुद्र तट से ५४१ मीटर, ६२५किमी क्षेत्र ऊपर स्थित है |

हुसैन् सागर् झील

मूल हैदराबाद शहर मूसी नदी के किनारे स्थापित हुआ था। इसे अब ऐतिहासिक पुराना शहर कहा जाता है, जहां चारमीनार, मक्का मस्जिद आदि बने हैं, वह नदी के दक्षिणी किनारे पर बसा है। नगर का केन्द्र नदी के उत्तर में स्थानांतरित हो गया है। यहां कई सरकारी इमारतें व मुख्य स्थल बने हैं, खासकर हुसैन सागर झील के दक्षिण में। इस नगर की त्वरित प्रगति साथ जुड़े सिकंदराबाद व अन्य पड़ोसी क्षेत्रों सहित हुई है, जिससे यह महानगरों की श्रेणी में आ गया है। यहां का मौसम इस प्रकार से है:

  • ग्रीष्म काल (मई): औसत अधिकतम तापमान: 40 डिग्री से० औसत न्यूनतम : 25 डिग्री से०
  • हेमन्त काल (दिसंबर): औसत अधिकतम तापमान 28 डिग्री से०, औसत न्यूनतम: 13 डिग्री से०
  • अधिकतम अंकित : 45.6 शिग्री से०, न्यूनतम अंकित:6.1 डिग्री से०
  • वार्षिक वर्षा: 79 से.मी.
  • भुगर्भीय प्रणाली: आर्कियन
  • मृदा: लाल बलुआ, साथ ही काली कॉटन मृदा के क्षेत्र भि हैं।
  • निकटवर्ती भूभाग: पथरीला/पहाड़ी (हैदराबाद के निकटवर्ती क्षेत्र अपनी संदर पाषाण बनावट के लिये प्रसिद्ध हैं।)
  • जलवायु: उष्णकटिबन्धीय नम एवं शुष्क

चिकित्सकीय पर्यटन[संपादित करें]

यदि किसी को कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, तो हैदराबाद, उभरता हुआ सर्वश्रेष्ठ स्थानों में से एक है, उपचार हेतु। नगर पहले ही औषधि का केन्द्र है, जहां औषधियों का कई करोड़ का व्यापार है। यहां कई सस्ते व अच्छे अस्पताल भी हैं।

नागरिक प्रशासन[संपादित करें]

नगर का प्रशासन ग्रेटर हैदराबद नगरमहापालिका द्वारा संचालित है। [4] इस पालिका के अध्यक्ष यहां के महापौर हैं, जिन्हें कई कार्यपालक क्षमताएं निहित हैं। पालिका की मुख्य क्षमता नगरमहापालिका आयुक्त, एक आइ ए एस के पास है, जो आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त होता है।

हैदराबाद एक सौ 50 म्युनिसिपल वार्ड्स में बंटा हुआ है। प्रत्येक वार्ड का एक कॉर्पोरेटर होता है, जो पालिका के चुनावों में चयनित होता है। हैदराबाद में एक जिला है, जो जिला मैजिस्ट्रेट के अधीन आता है। इन्हें कलेक्टर भी कहा जाता है। कलेक्टर संपत्ति आंकड़ों व राजस्व संग्रहण का प्रभारी होता है। यही नगर में होने वाले चुनावों की प्रक्रिया का निरीक्षण भी करता है। महानगरीय क्षेत्र में रंगारेड्डी जिला भी आता है, जो पूर्व हैदराबाद में से काट कर बना था।

अन्य महानगरों की भांति, यहां भी एक पुलिस आयुक्त, आई पी एस होता है। हैदराबाद पुलिस राज्य गृह मंत्रालय के अधीन आती है। हैदराबाद में पाँच पुलिस मंडल हैं, प्रत्येक का एक पुलिस उपायुक्त है। यहां की यातायात पुलिस भी हैदराबाद पुलिस के अधीन, अर्ध-स्वायत्तता प्राप्त संस्था है।

यहां एक राज्य उच्च न्यायालय है। इसके साथ ही दो निचले न्यायालय भी हैं। ये हैं: स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट: नागरिक (दीवानी) मामलों हेतु, व सैशन कोर्ट: आपराधिक (फौजदारी) मामलों हेतु।

हैदराबाद में दो लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं: हैदराबाद एवं सिकंदराबाद। साथ ही शहर के कई भाग, दो अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के भी भाग हैं। यहां तेरह विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।

आधिकारिक रूप से भारत सरकार हैदराबाद को महानगर मानती है।

अर्थ व्यवस्था[संपादित करें]

हैदराबाद आंध्र प्रदेश की वित्तीय एवं आर्थिक राजधानी भी है। यह शहर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद, कर एवं राजस्व का सर्वाधिक अंशदाता है। 1990 के दशक से इस शहर का आर्थिक प्रारूप बदल कर, एक प्राथमिक सेवा नगर से बहु-सेवा वर्णक्रम स्वरूप हो गया है, जिसमें व्यापार, यातायात, वाणिज्य, भण्डारण, संचार, इत्यादि सभी सम्मिलित हैं। सेवा उद्योग मुख्य अंशदाता है, जिसमें शहरी श्रमशक्ति कुल शक्ति का 90% है।

हैदराबाद को मोतीयों का नगर भी कहा जाता है। और सूचना प्रौद्योगिकी में तो इसने बंगलौर को भी पछाड़ दिया है। मोतिओं का बाजार चार मीनार के पास स्थित है। मोतिओं से बने आभूषण चारकमान बाज़ार से या अन्य मुख्य बाज़ारों से भी लिये जा सकते हैं। चाँदी के उत्पाद (बर्तन व मूर्तियां, इत्यादि), साड़ियां, निर्माल एवं कलमकारी पेंटिंग्स व कलाकृतियां, अनुपम बिदरी हस्तकला की वस्तुएं, लाख की रत्न जड़ित चूड़ियाँ, रेशमी व सूती हथकरघा वस्त्र यहां बनते हैं, व इनका व्यापार सदियों से चला आ रहा है।

आंध्र प्रदेश को पूर्व हैदराबाद राज्य से कई बड़े शिक्षण संस्थान, अनुसंधान प्रयोगशालाएं, अनेकों निजी एवं सार्वजनिक संस्थान मिले हैं। मूल शोध हेतु अवसंरचना सुविधाएं यहां देश की सर्वश्रेष्ठ हैं, जिसके कारण ही एक बड़ी संख्या में शिक्षित लोग देश भर से यहां आकर बसे हुए हैं।

हैदराबाद औषधीय उद्योग का भी एक प्रमुख केन्द्र है, जहां डॉ० रेड्डीज़ लैब, मैट्रिक्स लैबोरेटरीज़, हैटरो ड्रग्स लि०, डाइविस लैब्स औरोबिन्दो फार्मा लि० तथा विमता लैब्स जैसी बड़ी कम्पनियां स्थापित हैं। जीनोम वैली एवं नैनोटैक्नोलॉजी पार्क, जैसी परियोजनाओं द्वारा, जैव प्रौद्योगिकी की अत्यधिक संरचनाएं यहां स्थापित होने की भरपूर आशा है।[5]

हैदराबाद में भी, भारत के कई अन्य शहरों की ही भांति, भू-संपदा व्यापार (रियल एस्टेट) भी खूब पनपा है। इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी को धन्यवाद है, जिसके कारण यहां की प्रगति कुछ ही वर्षों में चहुमुखी हो गयी है। शहर में कई बड़े शॉपिंग मॉल भी बने हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग[संपादित करें]

हैदराबाद शहर, अपनी सूचना प्रौद्योगिकी एवं आई टी एनेबल्ड सेवाएं, औषधि, मनोरंजन उद्योग (फिल्म) के लिये प्रसिद्ध है। कई कॉल सेंटर, बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बी पी ओ) कम्पनियां, जो सूचना प्रौद्योगिकी व अन्य तकनीकी सेवाओं से संबंधित हैं, यहां 1990 के दशक में स्थापित की गयीं, जिन्होंने इसे भारत क्के कॉल सेंटर सेटप शहरों में से एक बनाया।

एक उप-शहर भी बसाया गया है- हाईटेक सिटी, जहां कई सू.प्रौ, एवं आई टी ई एस कम्पनियों ने अपने प्रचालन आरम्भ किये। सूचना प्रौ. के इस त्वरित विस्तार की कारण कभी-कभी इस शहर को साइबराबाद भि कहा गया है। साथ ही इसे बंगलौर के बाद द्वितीय साइबर वैली भी कह जाता है।[6] इस शहर में डिजिटल मूलसंरचना में काफी निवेश हुआ है। इस निवेश से कई बड़ी कंपनियों ने अपने परिसर भी बसाये हैं। कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने अपने केन्द्र शहर में खोले हैं। ऐसे मुख्य केन्द्र माधापुर व गाचीबावली में अधिक हैं।

हैदराबाद विश्व की फॉर्चून 500 कम्पनियों को भी आकर्षित कर यहां निवेश करा चुका है। इंटलेक्ट इंकॉ, की सेमिइंडिया में अच्छी डिल होने के बाद से हैदराबाद एक वैश्विक शहर बन गया है। यहीं पर भारत की प्रथम फैब सिटी, जिसमें सिलिकॉन चिप उत्पादन सुविधा हो, 3 बिलियन डॉलर के ए॰ एम॰ डी॰-सेमीइंडिया कॉनसॉर्शियम के निवेश से स्थापित हो रही है[7]

भू सम्पदा[संपादित करें]

यहां के शहरीकरण, व लोगों के छोटे शहरों को व्यवसाय के लिये छोड़कर यहां बसने से, यहां की जनसंख्या में एक बड़ी वृद्धि हुई है। इसी का परिणाम है ग्रेटर हैदराबाद, जिसमें पड़ोसी गाँव भी शामिल हैं। इनके साथ ही यहां एक मुद्रिका मार्ग, बाहरी मुद्रिका मार्ग, कई सेतु व नीःशुल्क-पथ भी हैं। इस कारण कई बाहरी क्षेत्र अपनी सीमाएं खोते जा रहे हैं, व भू संपदा के भाव ऊंचे उठते जा रहे हैं। साथ ही यहां अनेकों गगन चुंबी अट्टालिकाएं उठतीं जा रहीं हैं।

आवागमन[संपादित करें]

एम एम टी एस नैकलेस रोड मैट्रो स्टेशन

सड़क[संपादित करें]

हैदराबाद शेष भारत से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। मुख्य राजमार्ग हैं:- एन एच 7, एन ए 9 एवं एन एच 202 (आंध्र प्रदॆश सड़क राज्य परिवन निगम) आदि।[8] 1932 में निज़ाम राज्य रेल-सड़क यातायात प्रभाग की इकाई के रूप में स्थापित हुआ था, जिसमें आरंभिक 27 बसें थीं, जो अब बढ़कर 19,000 का आंकड़ा पार कर चुकी है। यहां एशिया का तीसरा सबसे बड़ा बसों का बेड़ा है। इसमें 72 बस प्लेटफॉर्म हैं, जहां इतनी ही बसें एक ही समय में यात्रियों को चढ़ा सकतीं हैं। इसका आधिकारिक नाम है महत्मा गाँधी बस स्टेशन, जिसे स्थानीय लोग इमलीवन बस स्टेशन कहते हैं। राज्य परिवहन निगम पॉइंट से पॉइंट बस सेवा प्रदान करता है, जो सभी मुख्य नगरों को जोड़ती है। शहर में निगम की 4000 से अधिक बसें दौड़तीं हैं।[9] पीले रंग का ऑटोरिक्शा, जिसे ऑटो कहा जाता है, अधिकतर प्रयुक्त टैसी सेवा है। हाल ही में कार व मोटरसाइकिल टैसी सेवाएं भी आरंभ हुईं हैं।

रेल सेवा[संपादित करें]

यहां लाइट रेल यातायात प्रणाली है, जिसे मल्टी मॉडल टआंस्पोर्ट सिस्टम (एम एम टी एस) कहते हैं। यह रेल व सड़क यातायात को जोड़ता है। दक्षिण मध्य रेलवे का मुख्यालय सिकंदराबाद में स्थित है। तीन मुख्य रेलवे स्टेशन हैं:- सिकंदराबाद जंक्शन, हैदराबाद डेकन रेलवे स्टेशन (या नामपल्ली) और काचिगुडा रेलवे स्टेशन।

वायु सेवा[संपादित करें]

पहले बेगमपेट हवाई अड्डा अन्तर्देशीय व अन्तर्राजीय विमान सेवा देता था। एक नया विमानक्षेत्र राजीव गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा शम्साबाद में बन चुका है। पहले सभी बड़े शहरों की भांति यहां वयु यातायात संकुलन समस्या होती थी, परंतु नया हवाई अड्डा बन जाने से वह दूर हो चुकी है। यहां ट्रैफिक संकुलन की समस्या सड़कों पर बहुत दिखायी देती है। यह ऑटो, कार, इत्यादि की अत्यधिक संख्या के कारण होती है। इससे निबटाने के लिये अनेकों सेतु, फ्लाईओवर निर्माण हुए, परंतु यह वैसी की वैसी बनी हुई है। आंध्र प्रदेश सरकार ने इससे निबटने के लिये दिल्लीकोलकाता की भांति ही यहां भी मैट्रो ट्रेन शुरु करने की मंजूरी दे दी है।[10] इसके पूर्ण हो जाने पर आशा है, कि यह समस्या काफी हद तक सुलझ जाये गी।

जनसांख्यकी[संपादित करें]

2006 में नगर की जनसंख्या 36 लाख आकलित की गयी थी जबकि बृहत्तर महानगरीय क्षेत्र की जनसंख्या 61 लाख से अधिक आकलित की गयी है। धार्मिक तथा सांस्कृतिक रूप से यह शहर हिन्दू, मुस्लिमईसाइयों से जुड़ा हुआ है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं- तेलुगु, हिन्दी, उर्दू व दक्कनी। यहाँ जनजातीय मूल के लोगों की भी खासी जनसंख्या है, जो कि काम की तलाश में यहाँ आव्रजित हुए हैं। यहाँ बनजारे भी मिलते हैं, जो अपनी एक भिन्न संस्कृति व भाषा वाले हैं। उनकी भाषा को Gorboli कहा जाता है, जो यूरोप में रोमा लोगों द्वारा बोली जाने वाली रोमा भाषा से निकट संबंध रखती है। तेलुगु, हिन्दी व दक्कनी मूल जनसंख्या की स्थानीय भाषाएँ हैं। व्यापार में पर्याप्त मात्रा में अंग्रेज़ी भी बोली जाती है। भारत के विभिन्न भागों के लोगों ने हैदराबाद को अपना गृहनगर बनाया है।

संस्कृति[संपादित करें]

बिरला मंदिर, हैदराबाद

हैदराबाद अनेक विभिन्न संस्कृतियों व परंपराओं का मिलन-स्थल है। ऐतिहासिक रूप से यह वह शहर रहा है, जहाँ उत्तर व दक्षिण भारत की भिन्न सांस्कृतिक व भाषिक परंपराएँ मिश्रित होती हैं। अतः यह दक्षिण का द्वार या उत्तर का द्वार कहा जाता है। यहाँ दक्षिण भारतीय संस्कृति के बीच हैदराबाद की मुस्लिम संस्कृति भी अंतर्विष्ट है।

यह एक अनुपम विश्वबन्धु नगर (कॉस्मोपॉलिटन) है, जहाँ ईसाइयत, हिन्दू धर्म, इस्लाम, जैनधर्म व जरथुष्ट्र धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। हैदराबादियों ने अपनी खुद की एक भिन्न संस्कृति विकसित कर ली है, जिसमें प्राचीन तेलुगु लोगों की हिन्दू परंपराओं तथा सदियों पुरानी इस्लामी परंपराओं का मिश्रण है। तेलुगु, उर्दू व हिन्दी यहाँ की प्रमुख भाषाएँ हैं (यद्यपि बाद की दो अपने मानक स्वरूप में नहीं पायी जातीं और दक्कनी बोली की ओर अग्रसर रहती हैं)। यहाँ बोली जाने वाली तेलुगु भाषा में अनेक उर्दू शब्द भी मिल सकते हैं। तथा यहाँ बोली जाने वाली उर्दू भी मराठी व तेलुगु से प्रभावित है, जिससे एक बोली बनी है जिसे हैदराबादी उर्दू या दक्कनी कहा जाता है। यहाँ का प्रसिद्ध उस्मानिया विश्वविद्यालय भारत का पहला उर्दू माध्यम विश्वविद्यालय है। यहाँ की एक बड़ी जनसंख्या अंग्रेजी बोलने में भी कुशल है।

हैदराबाद की लगभग सभी संस्कृतियों की महिलाएँ या तो परंपरागत भारतीय परिधान साड़ी पहनती हैं, या सलवार कमीज़ (विशेषकर युवतर जनसंख्या)। मुस्लिम महिलाओं का एक बड़ा भाग बुरका या हिजाब पहनता है। पुरुष प्रायः आज का सुविधा का परिधान पैंट-शर्ट पहनते हैं, परंतु लुंगी व शर्ट, धोती कुर्ता (दोनों हिन्दू) तथा कुर्ता पाजामा (प्रायः मुस्लिम) भी बहुत पहना जाता है।

प्रमुख व्यंजन[संपादित करें]

मसालेदार भारतीय खाद्य युक्त तीन बर्तन
हैदराबादी बिरयानी (बाईं ओर) और अन्य व्यंजन

अपने लजीज मुगलई भोजन के साथ-साथ हैदराबाद निजामी तहजीब के कारण भी दुनिया भर में मशहूर है। स्वादप्रेमियों के लिए तो हैदराबाद जन्नत के समान है। यहाँ की लजीज बिरयानी और पाया की खूशबू दूर-दूर से पर्यटकों को हैदराबाद खींच लाती है। इस पर हैदराबाद के नवाबी आदर-सत्कार व खान-पान को देखकर आपको भी लगेगा कि वाकई में आप किसी निजाम के शहर में आ गए हैं। हैदराबादी व्यंजन में परंपरागत आंध्र और तेलंगाना व्यंजन पर व्यापक इस्लामी प्रभाव है। हैदराबादी व्यंजनों के यहां कई रेस्त्रां हैं। शहर के सभी होटलों में एक या इससे ज्यादा रेस्त्रां हैं जो लोकप्रिय है। बावर्ची, पाराडाइड, हैदराबाद हाउस हैदराबादी व्यंजनों को उपलब्ध कराने वाले कुछ मशहूर रेस्त्रां हैं।

हैदराबाद का सबसे प्रमुख व्यंजन हैदराबादी बिरयानी है. अन्य व्यंजनों में ख़ुबानी, फेनी, पाया नाहरी और हलीम (रमजान के महीने का प्रमुख मांसाहारी व्यंजन)।

भारतीय मिठाई की दुकानें घी की मिठाइयों के लिए मशहूर हैं। पुल्ला रेड्डी मिठाइयां शुद्ध घी की मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है। नामपल्ली का कराची बेकरी फल बिस्कुटों, ओस्मानिया बिस्कुट और दिलखुश के लिए मशहूर हैं। पुराने शहर के अजीज बाग पैलेस में रहने वाला परिवार बादाम की जैली बनाता है।

शिक्षा और शोधकार्य[संपादित करें]

आरंभ में हैदराबाद में मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध दो महाविद्यालय थे। लेकिन 1918 में निज़ाम ने उस्मानिया विश्वाविद्यालय की स्थापना की और अब यह भारत के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक है। हैदराबाद विश्वविद्यालयों की स्थापना 1974 में हुई। एक कृषि विश्वविद्यालय और कई ग़ैर सरकारी संस्थान, जैसे अमेरिकन स्टडीज़ रिसर्च सेंटर और जर्मन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ओरिएंटल रिसर्च भी हैं।

हैदराबाद में सार्वजनिक व निजी सांस्कृतिक संगठन बड़ी संख्या में हैं, जैसे राज्य द्वारा सहायता प्राप्त नाट्य, साहित्य व ललित कला अकादमियाँ। सार्वजनिक सभागृह रबींद्र भारती नृत्य व संगीत महोत्सवों के लिए मंच प्रदान करता है और सालारजंग संग्रहालय में दुर्लभ वस्तुओं का संगृह है, जिनमें संगेयशब, आभूषण, चित्र और फ़र्नीचर शामिल हैं।

क्षेत्रीय केन्द्र[संपादित करें]

हैदराबाद क्षेत्रीय केन्द्र की स्थापना जनवरी, 1987 में की गई थी। दो उत्तरी तटीय ज़िले श्रीकाकुलम और विजयनगरम को छोड़कर यह क्षेत्रीय केन्द्र पूरे आंध्र प्रदेश को समाहित करता है। इस क्षेत्रीय केन्द्र का औपचारिक उद्घाटन इग्नू के संस्थापक वी. सी प्रोफ़ेसर जी. रामा रेड्डी द्वारा 2 फ़रवरी 1987 को किया गया था। कुछ ही वर्षों में इसने 60 अध्ययन केन्द्रों की स्थापना की और 120 से ज़्यादा कार्यक्रम अध्ययन केन्द्रों में उपलब्ध कराने लगा।

हिन्दी संस्थान[संपादित करें]

हैदराबाद केंद्र की स्थापना वर्ष 1976 में हुई। शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत यह केंद्र स्कूलों/कॉलेजों एवं स्वैच्छिक हिन्दी संस्थाओं के हिन्दी अध्यापकों के लिए 1 से 4 सप्ताह के लघु अवधीय नवीकरण कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिसमें हिन्दी अध्यापकों को हिन्दी के वर्तमान परिवेश के अंतर्गत भाषाशिक्षण की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान कराया जाता है। वर्तमान में हैदराबाद केंद्र का कार्यक्षेत्र आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र एवं केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी एवं अण्डमान निकोबार द्वीप समूह हैं। हैदराबाद केंद्र पर हिन्दी शिक्षण पारंगत पाठ्यक्रम भी संचालित किया जाता है।

सालारजंग संग्रहालय

मीडिया[संपादित करें]

हैदराबाद ऑप्टिकल फाइबर केबल के एक बड़े नेटवर्क द्वारा कवर किया जाता है। शहर के टेलीफोन प्रणाली चार लैंडलाइन कंपनियों द्वारा सेवित है, यथा: बीएसएनएल, टाटा इंडिकॉम, रिलायंस और एयरटेल। कई कंपनियों के द्वारा ब्रॉडबैंड इंटरनेट का उपयोग प्रदान किया जाता है। शहर में प्रसारित एफएम रेडियो चैनल क्रमश: रेडियो मिर्ची, आकाशवाणी इंद्रधनुष एफएम, विविध भारती, आकाशवाणी, रेडियो सिटी, बिग एफएम, एस एफएम और एयर ज्ञानवाणी एफएम आदि है। राज्य के स्वामित्व वाली दूरदर्शन दो स्थलीय टेलीविजन चैनलों और हैदराबाद से एक उपग्रह टेलीविजन चैनल प्रसारित करता है। साथ ही सन नेटवर्क के मिथुन, तेजा के अलावा मां टीवी, ईटीवी उर्दू, ईटीवी (भारत) सहित हैदराबाद से प्रसारित कई कई अन्य निजी क्षेत्रीय टेलीविजन चैनलों में प्रमुख है राज नेटवर्क का वीसा, ज़ी टीवी का ज़ी तेलुगु, सन नेटवर्क का मिथुन संगीत, मिथुन समाचार चैनल, टी वी 5, आप तक आदि है।

हैदराबाद से अंग्रेजी, तेलुगू और उर्दू भाषाओं में कई अखबारों और पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है। तेलुगु दैनिक समाचार पत्रों में प्रमुख है एनाडु, वार्ता, आंध्र ज्योति, प्रजाशक्ति, आंध्र भूमि और आंध्र प्रभा। यहाँ से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों में प्रमुख हैं डेक्कन क्रॉनिकल, बिजनेस स्टैंडर्ड, हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडियन एक्सप्रेस आदि। जबकि यहाँ से प्रकाशित प्रमुख उर्दू दैनिक समाचार पत्रों में सियासत दैनिक, मुंसिफ दैनिक, एत्तेमाद उर्दू दैनिक, रहनुमाई, डेक्कन और दैनिक मिलाप आदि। इन प्रमुख समाचार पत्रों के अलावा, वहाँ से कई प्रमुख पत्रिकाएँ प्रकाशित होती है, जिसमें प्रमुख है- चंदामामा, वनिता, विपुला, चतुरा, नव्या, आंध्र प्रभा, आंध्र ज्योति, स्वाति आदि तथा फिल्मी पत्रिकाओं में ज्योति चित्रा संतोषम, सुपरहिट, चित्रांजलि, सितारा आदि शामिल हैं।

हैदराबाद तेलुगू फिल्म उद्योग की मातृभूमि है। सरधी स्टूडियो, अन्नपूर्णा स्टूडियो, रामानायिडु स्टूडियो, रामकृष्ण स्टूडियो, पदमालया स्टूडियो, रामोजी फिल्म सिटी इस शहर का उल्लेखनीय फिल्म स्टूडियो हैं।

सिनेमा[संपादित करें]

हैदराबाद भारत के दूसरे सबसे बड़े चलचित्र उद्योग का गृह भी है:- तेलुगु सिनेमा। यहां प्रतिवर्ष सैंकडों फिल्में बनायीं जातीं हैं। .

खेलकूद[संपादित करें]

इन्डोर स्टेडियम

हैदराबाद में अन्य खेलों की तुलना में क्रिकेट सर्वाधिक लोकप्रिय खेल हैं। क्रिकेट के साथ-साथ हॉकी की भी लोकप्रियता यहाँ कम नही है। 2005 में प्रीमियर हॉकी लीग में हैदराबाद सुल्तान्स विजयी हुये थे। हैदराबाद को हाल ही में एक नया क्रिकेट स्टेडियम विशाखा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम मिला है, जिसका नाम परिवर्तित करके राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम रखा गया है। इन्डोर खेलों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यहाँ एक इन्डोर स्टेडियम भी बनाया गया है। वर्ष 2002 में 'राष्ट्रीय खेल' के मेजबान के रूप में इस शहर का चयन किया गया था और देश में विश्व स्तरीय स्टेडियम हेतु पहल की गई थी। बाद में इस स्टेडियम को 2003 में आयोजित एफ्रो एशियाई खेलों की मेजबानी का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय मानक के कई बड़े और विविध स्टेडियम हैं। इंडियन प्रीमियर लीग में शहर की टीम हैं सनराइजर्स हैदराबाद

हैदराबाद के प्रसिद्ध खिलाड़ी[संपादित करें]

2012 में बैटिंग करती हुई मिताली राज
टेनिस स्टार सानिया मिर्जा
  1. अब्बास अली बेग , पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  2. सी. के. नायडू, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  3. आबिद अली, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  4. अबू टायेब याह्या मोहम्मद , जूनियर टेबल टेनिस खिलाड़ी
  5. अरशद अकी, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  6. गगन नारंग, विश्व स्तर के निशानेबाज
  7. ग़ुलाम अहमद , पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान
  8. मीर कासिम अली , पूर्व भारतीय टेबल टेनिस चैंपियन
  9. मिताली राज, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी
  10. मोहम्मद अजहरुद्दीन, पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान
  11. नंदानूरी मुकेश कुमार , ओलंपियन और पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी
  12. पुलेला गोपीचंद, बैडमिंटन खिलाड़ी
  13. पी॰ कृष्णा मूर्ति, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  14. साइना नेहवाल, बैडमिंटन खिलाड़ी
  15. सानिया मिर्ज़ा, टेनिस खिलाड़ी
  16. शिव लाल यादव , पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी और क्रिकेट टीम के चयनकर्ता
  17. सैयद मोहम्मद हादी , ओलंपिक टेनिस खिलाड़ी
  18. वी वी एस लक्ष्मण, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  19. वेंकटपति राजू, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  20. कोनेरु हम्पी, अंतर्राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी

स्टेडियम[संपादित करें]

हैदराबाद शहर में बनाया गया प्रारंभिक स्टेडियम लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम है, जो पूर्व में फतेह मैदान के रूप में जाना जाता था और यह हाल तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का संचालन करता रहा है। इस मैदान पर पहला क्रिकेट मैच 19 नवम्बर 1955 को खेला गया था। उप्पल में राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के साथ अब इस मैदान पर क्रिकेट मैच आयोजित किए जाने की संभावना नहीं है।

आकर्षण[संपादित करें]

चार मीनार हैदराबाद के सबसे प्रमुख एवं लोकप्रिय आकर्षणों में से है
एन टी आर बाग
  • चार मीनार – नगर का मुख्य चिन्ह, जिसमें चार भव्य मीनारें हैं। शहर के बीचोंबीच बनी इस भव्य इमारत का निर्माण कुली कुतुब शाही नवाब ने कराया था। यह कहा जाता है कि हैदराबाद में प्लेग जैसी भयानक महामारी पर विजय पाने की खुशी में नवाब ने चारमीनार का निर्माण कराया था। चारमीनार से लगा हुआ ही एक प्रसिद्ध चूड़ी बाजार है, जहाँ आपको अनगिनत वैरायटियों की सुंदर चूडि़याँ देखने को मिल जाएगी।
  • फलकनुमा महल – नवाब विकार-अल-उमरा द्वारा बनवाया हुआ, स्थापत्यकला का अनोख उदाहरण।
  • गोलकुंडा किला – शहर के किनारे स्थित, गोलकुंडा का किला, भारत के प्रसिद्ध व भव्य किलों में से एक है।
  • चौमहला महल- यह आसफ जाही वंश का स्थान था, जहां निज़ाम अपने शाही आगन्तुकों का सत्कार किया करते थे। 1750 में निज़ाम सलाबत जंग ने इसे बनवाया था, जो इस्फहान शहर के शाह महल की तर्ज़ पर बना है। यहां एक महलों का समूह है, जो दरबार हॉल के रूप में प्रयुक्त होते थे।
  • सलारजंग संग्रहालय – यह पुरातन वस्तुओं का एक व्यक्ति संग्रह वाला सबसे बड़ा संग्रहालय है। कई शताब्दियों के संग्रह यहां मिलते हैं।
  • मक्का मस्जिद – यह पत्थर की बनी है, व चारमीनार के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह अपने आकार, स्थापत्य एवं निर्माण में अद्वितीय है।
  • बिडला मंदिर (हैदराबाद, आंध्र प्रदेश) – यह हिन्दू मंदिर, नगर में एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है, जहां से नगर का नज़ारा दिखाई देता है, व पूरे नगर से यह दिखाई देता है। यह श्वेत संगमर्मर का बना है।
  • बिडला तारामंडल – नगर के बीच में नौबत पहाड पर स्थित, तारामंडल खगोल विज्ञान को नगर का नमन है।
  • चिलकुर बालाजी – श्री वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित यह मंदिर मेहंदीपटनम से 23 कि॰मी॰ दूर है। इसे वीसा-बालाजी भी कहते हैं, क्योंकि लोगों की यह मान्यता है, कि अमरीकी वीज़ा का इंटरव्यू इनकी कृपा से सकारात्मक परिणाम देता है।
  • नेहरू प्राणी संग्रहालय- हैदराबाद के इस प्राणी संग्रहालय की विशेषता है इसकी लॉयन सफारी तथा सफेद शेर, इसके अलावा यहाँ आपको अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया के भी कई वन्य प्राणी देखने को मिल जाएँगे। कई एकड़ में फैले इस प्राणी संग्रहालय में आप अपने वाहन से भी घूम सकते हैं।
  • हैदराबाद की बुद्ध प्रतिमा – यह हुसैन सागर नामक कृत्रिम झील हैदराबाद को सिकंदराबाद से अलग करती है। इसके अंदर, बीच में गौतम बुद्ध की एक 18 मी. ऊंची प्रतिमा स्थापित है। इस द्वीप पर जिस पत्थर पर यह बनी है, उसे स्थानीय लोग जिब्राल्टर का पत्थर कहते हैं।
  • लाद बाजार - यहाँ चूड़ी बाज़ार है, जो चार मीनार के पश्चिम में है।
  • कमल सरोवर - जुबली हिल्स पर स्थित, तालाब के चारों ओर बना एक सुंदर बगीचा है, जिसे एक इतालवी अभिकल्पक द्वारा बनाया हुआ बताया जाता है। यह वर्तमान में हैदराबाद नगरपालिक निगम द्वारा अनुरक्षित है। यह कुछ दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों का घर भी है।
  • कुतुब शाही मकबरे - कुतुबशाही वंश के शासकों के मकबरे यहैँ स्थित हैं, यह गोलकोंडा किले के निकट शाइकपेट में है।
  • पैगाह मकबरा-पैगाह मकबरा का संबंध पैगाह के शाही परिवार से है, जिसे शम्स उल उमराही परिवार के नाम से भी जाना जाता है। हैदराबाद के उपनगर पीसाल बंदा में स्थित इस मकबरे को मकबरा शम्स उल उमरा के नाम से भी जाना जाता है। इस मकबरे के निर्माण का काम 1787 में नवाब तेगजंग बहादुर ने शुरू करवाया था और फिर बाद में इसके निर्माण कार्य में उनके बेटे आमिर ए कबीर प्रथम ने हाथ बंटाया।
  • संघी मंदिर - भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित एक मंदिर है।
  • स्नो वर्ल्ड - यह एक मनोरंजन पार्क है, जो कि इस उष्णकटिबंधीय शहर में लोगों बहुत कम तापमान व हिम का अनुभव देता है।
  • वर्गल सरस्वती देवी मंदिर - यह हैदराबाद से 50 किलोमीटर दूरी पर मेडचल महामार्ग पर स्थित मंदिर है। यह एक बड़ी शिला पर स्थित है। इस मार्ग पर आरटीसी बसें उपलब्ध हैं।
  • माधापुर - हैदराबाद के अनेक सूचना-प्रौद्योगिकी तथा सूचना-प्रौद्योगिकी-समर्थीकृत-सेवाओं संबधित कार्यालयों का स्थान।
  • रामोजी फिल्म सिटी संसार का सबसे बड़ा समाकलित फ़िल्म स्टूडियो सम्मिश्र है जो लगभग 2000 एकड़ में फैला है। यह एशिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन एवं मनोरंजन केंद्रों में से एक है। 1996 में उद्घाटित। यह हैदराबाद से 25 किलोमीटर दूर विजयनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-9) पर स्थित है।

हैदराबाद (सुइनी / हाउ-डीएआरएबीएडी / एचवाई-डीएआर-एए-बैड; प्रायः / दक्षिण भारत राज्य तेलंगाना की राजधानी और आंध्र प्रदेश की एक स्वतंत्र राजधानी है। [ए] 650 वर्ग किलोमीटर (250 वर्ग मील) के साथ मुसी नदी के किनारे, इसकी लगभग 6.7 मिलियन आबादी और लगभग 7.75 मिलियन की महानगरीय आबादी है, जिससे यह चौथा सबसे अधिक आबादी वाला शहर और भारत में छठी सबसे अधिक आबादी वाला शहरी ढांचे बना। 542 मीटर (1,778 फीट) की औसत ऊंचाई पर, अधिकतर हैदराबाद, कृत्रिम झीलों के आसपास पहाड़ी इलाकों पर स्थित है, जिसमें हुसैन सागर शामिल हैं - शहर के केंद्र के उत्तर-नगर की स्थापना-उत्तर देते हुए।

15 9 0 में मुहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा स्थापित, लगभग 100 साल पहले मुगलों ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था, कुतुब शाही राजवंश के शासनकाल में बने रहे। 1724 में, मुगल वासीराय आसिफ याह ने अपनी संप्रभुता की घोषणा की और अपने स्वयं के वंश को बनाया, जिसे हैदराबाद के निजाम के रूप में जाना जाता है। निजाम के शासन ब्रिटिश राज के दौरान एक रियासत बन गए, और 150 साल तक अपनी राजधानी के रूप में सेवा करने वाले शहर में बने रहे। 1 9 48 में इसे भारतीय संघ में लाया जाने के बाद शहर हैदराबाद राज्य की राजधानी के रूप में जारी रहा, और राज्यों पुनर्गठन अधिनियम, 1 9 56 के बाद आंध्र प्रदेश की राजधानी बन गई। 1 9 56 से, शहर में राष्ट्रपति निलयम का शीतकालीन कार्यालय रहा है। भारत के राष्ट्रपति। 2014 में, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के नवगठित राज्य दो राज्यों की संयुक्त राजधानी बन गए, 2025 तक समाप्त होने वाली संक्रमणकालीन व्यवस्था।

कुतुब शाही और निजाम शासन के अवशेष आज दिखाई देते हैं; मोहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा किए गए चारमीनार-हैदराबाद का प्रतीक बनने के लिए आ गया है। गोलकुंडा किला एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मुगलई संस्कृति का प्रभाव क्षेत्र की विशिष्ट व्यंजनों में भी स्पष्ट है, जिसमें हैदराबादई बिरयानी और हैदराबादई हलेम शामिल हैं। कुतुब शाहिस और निजाम ने हैदराबाद को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया, दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पत्रों के पुरुषों को आकर्षित किया। 1 9वीं सदी के मध्य में मुगल साम्राज्य की गिरावट के साथ हैदराबाद भारत में संस्कृति का सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, शेष भारतीय उपमहाद्वीप से शहर में आने वाले कलाकारों के साथ। शहर में स्थित तेलुगू फिल्म उद्योग देश के दूसरे सबसे बड़े गति चित्रों का निर्माता है।

हैदराबाद को मोती और हीरा व्यापार केंद्र के रूप में ऐतिहासिक रूप से जाना जाता था, और इसे मोती शहर भी कहा जाता है। शहर के कई पारंपरिक बाजार खुले हैं, जिसमें लाड बाज़ार, बेगम बाजार और सुल्तान बाज़ार शामिल हैं। 20 वीं शताब्दी के दौरान औद्योगिकीकरण ने प्रमुख भारतीय विनिर्माण, अनुसंधान और वित्तीय संस्थानों को आकर्षित किया, जिनमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट और सेंटर फॉर सेल्युलर और आण्विक जीवविज्ञान शामिल थे। सूचना प्रौद्योगिकी को समर्पित विशेष आर्थिक क्षेत्र ने हैदराबाद से परिचालन स्थापित करने के लिए भारत और दुनिया भर से कंपनियों को प्रोत्साहित किया है। 1 99 0 के दशक में फार्मास्यूटिकल और जैव प्रौद्योगिकी उद्योगों के उद्भव के कारण भारत के "जेनोम घाटी" के रूप में क्षेत्र के नामकरण का नेतृत्व हुआ। यूएस $ 74 बिलियन का उत्पादन करने के साथ, हैदराबाद भारत के सकल घरेलू उत्पाद का पांचवां सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।

विषय वस्तु [छिपाएं] 1 इतिहास 1.1 toponymy 1.2 प्रारंभिक और मध्यकालीन इतिहास 1.3 आधुनिक इतिहास 2 भूगोल 2.1 जलवायु 2.2 संरक्षण 3 प्रशासन 3.1 सामान्य पूंजी स्थिति 3.2 स्थानीय सरकार 3.3 उपयोगिता सेवाएं 3.4 प्रदूषण नियंत्रण 3.5 हेल्थकेयर 4 जनसांख्यिकी 4.1 भाषा और धर्म 4.2 मलिन बस्तियों 5 सिटीस्केप 5.1 पड़ोस 5.2 लैंडमार्क्स 6 अर्थव्यवस्था 7 संस्कृति 7.1 साहित्य 7.2 संगीत और फिल्म 7.3 कला और हस्तशिल्प 7.4 भोजन 8 मीडिया 9 शिक्षा 10 खेल 11 परिवहन 12 भी देखें 13 नोट्स 14 सन्दर्भ 15 ग्रंथ सूची 16 आगे पढ़ने 17 बाहरी लिंक इतिहास [संपादित करें] मुख्य लेख: हैदराबाद का इतिहास Toponymy [संपादित करें] ऑक्सफोर्ड कंसिस डिक्शनरी ऑफ वर्ल्ड प्लेस नाम्स, हैदराबाद के लेखक जॉन एवरेट-हीथ के अनुसार, हेडर (शेर) और आबाद (शहर) से हैदराबाद का अर्थ है "हैदर शहर का शहर" या "शेर शहर"। इसे खलीफा अली इब्न अबी तालिब का सम्मान करने के लिए नामित किया गया था, जिसे लड़ाई में शेर की तरह वीरता के कारण हेडर के नाम से भी जाना जाता था। [1] इस्लामिक वास्तुकला के एक विद्वान एंड्रयू पीटरसन कहते हैं कि शहर को मूलतः बागानगर (शहर के बागान) कहा जाता है। [2] एक लोकप्रिय सिद्धांत से पता चलता है कि शहर के संस्थापक मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने एक स्थानीय नाच (लड़की) के साथ भगवती के बाद "भाग्यनगर" या "भावनगर" का नाम दिया, जिसके साथ वह प्यार में गिर पड़ा था। उसने इस्लाम धर्म को बदल दिया और शीर्षक हैदर महल को अपना लिया। शहर को उनके सम्मान में हैदराबाद का नाम दिया गया था। [3]

जर्मन यात्री हाइनरिच वॉन पोसेर के अनुसार, जिसका हाईडेलबर्ग विश्वविद्यालय के गीता धरमपाल-फ्रिक द्वारा अनुवाद किया गया था, शहर के दो नाम थे: "3 दिसंबर 1622 को हम बगनेगर या हाडेरबाट शहर में पहुंचे राजा सुल्तान मेहेमेट कली कंटोग शाह और राज्य की राजधानी "। [4] फ्रांसीसी यात्री जीन डे थेवनॉट ने 1666-1667 में डेक्कन क्षेत्र का दौरा किया, शहर को अपनी किताब टी में दर्शाता है

हैदराबाद (उच्चारण हाडडेराबा: डी) भारत में तेलंगाना राज्य की राजधानी है। 6.8 मिलियन से अधिक, राज्य में किसी भी शहर की सबसे बड़ी जनसंख्या है [1] हैदराबाद विकास प्राथमिकताओं की शर्तों के तहत ए -1 शहर है। [2] इसे मोती [3] या निज शहर का शहर भी कहा जाता है। [4] हैदराबाद के लोगों को हैदराबाद कहा जाता है

हैदराबाद की स्थापना 15 9 1 ईसवी में सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने की थी। यह मूसी नदी के तट पर स्थापित की गई थी।

यह शहर रामोजी फिल्म सिटी का घर है, जिसकी भूमि 2,000 एकड़ (8.1 किमी 2; 3.1 वर्ग मील) से अधिक है। यहां फिल्म इंडस्ट्री को टॉलीवुड कहा जाता है। [5]

विषय वस्तु [छिपाएं] 1 इतिहास 2 भूगोल 2.1 जलवायु 2.2 जनसंख्या 3 संस्कृति 3.1 वास्तुकला 4 भाषा 5 सन्दर्भ इतिहास [परिवर्तन | स्रोत बदलें]

हैदराबाद, भारत में गोलकुंडा किला के पास मुहम्मद कुली कुतुब शाह की कब्र पुरातत्वविदों ने हैदराबाद में आयरन आयु साइटों को 2,500 साल पुराना पाया है। ये साइट हेथनगर और रामोजी फिल्म सिटी के पास पाए गए हैं, [6] और दफन और उपकरण हैं। [6] कुतुब शाही राजाओं ने हैदराबाद पर शासन किया और बाद में निजाम ने शासक को हराया और एक नए राजा बन गए और शहर भर में अस्पतालों और कॉलेजों के निर्माण के विभिन्न तरीकों से शहर की मदद की। [7] [8] मुहम्मद कुली कुतुब शाह कुतुब शाही शासक थे जिन्होंने चारमीनार का निर्माण एक मस्जिद के रूप में करने का आदेश दिया था। [9] नारब अब्दुल हसन शाह, जो लोकप्रिय तौर पर तनिशा के रूप में जाना जाता है, हैदराबाद के अंतिम कुतुब शाही शासक था और औरंगजेब ने इसे 1687 में पकड़ा था। [10] असफ जाह को औरंगजेब द्वारा हैदराबाद के राज्यपाल घोषित किया गया था। [11] इसी तरह असफ़ जली राजवंश की शुरूआत हुई जो 1 9 48 तक हैदराबाद पर शासन कर रही थी। [12]

भारत के सहयोग से हैदराबाद 1 9 47 में एक रियासत बन गया। लेकिन जल्द ही निजाम को भारत संघ के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर करना पड़ा ताकि हैदराबाद भारत का हिस्सा बन जाए। [13] 1 नवंबर, 1 9 56 को, हैदराबाद प्रांत को भाषा के आधार पर कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में विभाजित किया गया था। तो, हैदराबाद तेलगु भाषी समुदाय में आया और इस प्रकार आंध्र प्रदेश की राजधानी बन गया। [14]

शहर में आईटी के क्षेत्र में अब जेएनटीयू (जवाहरलाल नेहरू के तकनीकी संस्थान) सहित 4 आईटी कॉलेजों के साथ विकसित किया गया है। [15] अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और रियल एस्टेट का उदय हैदराबाद के विकास पर एक बड़ा असर है। [16]

भूगोल [परिवर्तन | स्रोत बदलें]

मक्का मस्जिद हैदराबाद दक्कन पठार में स्थित है, समुद्र तल से 500 मीटर ऊपर [17] और अधिकांश क्षेत्र चट्टानी है। [18] धान मुख्य फसल उगती है और अन्य फसलों में बंगाल ग्राम, मूंगफली, गन्ना और सूरजमुखी शामिल हैं। 15 9 15 में मुसा के तट पर हैदराबाद पाया गया था। आज यह क्षेत्र पुराने शहर के नाम से जाना जाता है जहां मक्का मस्जिद और हुसैन सागर झील मौजूद हैं। [1 9] इस क्षेत्र में कई सरकारी भवन हैं और यह क्षेत्र बहुत पुराना है। [20] हाल के समय से, हैदराबाद सिकंदराबाद के साथ विलय कर दिया गया है। इसने इसके आसपास के कई गांवों के साथ एक बड़े, एकजुट और आबादी वाले शहर का नेतृत्व किया है। [21]

जलवायु [परिवर्तन | स्रोत बदलें] हैदराबाद में एक गर्म, गीला और शुष्क जलवायु है मानसून या बरसात का मौसम देर से अक्टूबर से लेकर अक्टूबर तक है। [22] [23] [24] औसतन औसतन 32 इंच बारिश शहर पर पड़ती है। सबसे ऊंचा तापमान 2 जून 1 9 66 को 51.5 डिग्री सेल्सियस (113.9 डिग्री फ़ारेनहाइट) दर्ज किया गया था। सबसे कम दर्ज तापमान 8 जनवरी 1 9 46 को 1.1 डिग्री सेल्सियस (43 डिग्री फ़ारेनहाइट) था। [25] [26] यह शाम और सुबह में कूलर है क्योंकि शहर समुद्र के स्तर से ऊपर है। [26]

जनसंख्या [परिवर्तन | स्रोत बदलें] शहर की आबादी 40 लाख से अधिक है। [27] हिन्दू बहुमत का निर्माण करते हैं [28] जबकि मुस्लिम आबादी का 40% है। तेलंगाना में हैदराबाद का मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा है। [2 9] मुसलमान मुख्य रूप से पुराने शहर में और आस-पास स्थित हैं। शहर में ईसाइयों की संख्या बहुत कम है प्रसिद्ध चर्चों में एबड्स और सिकंदराबाद में सेंट जोसेफ कैथेड्रल जैसे लोग शामिल हैं। [30]

संस्कृति [परिवर्तन | स्रोत बदलें] वास्तुकला [परिवर्तन | स्रोत बदलें] Charminar वास्तव में एक मस्जिद के रूप में स्थापित किया गया है और बाद में पुरातात्विक विभाग द्वारा एक स्मारक में बदल दिया। चारमीनार लंबे समय से हैदराबाद का प्रतीक रहा है। इसका अर्थ है "चार मीनार" जमीन से 48.7 मीटर की ऊंचाई तक टावरों की वृद्धि हुई है। भवन की ऊपरी मंजिलों में 45 प्रार्थना स्थान के साथ एक मस्जिद है।

गोलकुंडा किला कुतुब शाही साम्राज्य की राजधानी थी 16 वीं शताब्दी में, यह एक व्यस्त हीरा व्यापार का केंद्र था। किले की बाहरी दीवार लगभग 10 किमी है।

मक्का मस्जिद शहर में सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है। मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने 1617 में इसे निर्माण करना शुरू कर दिया था। मुगल सम्राट औरंगजेब ने 16 9 4 में यह इमारत समाप्त कर दी थी। मस्जिद ग्रेनाइट से बना है। मस्जिद का मुख्य हॉल 75 फीट ऊंचे, 220 फीट चौड़ा और 180 फुट लंबा है। दस हजार भक्त एक ही समय में अंदर फिट हो सकते हैं। प्रवेश मेहराब ग्रेनाइट के एकल स्लैब से बने होते हैं। ऐसा माना जाता है कि मुहम्मद कुली में मक्का से आए पृथ्वी से बने ईंटें थीं उन्होंने मस्जिद के केंद्रीय आर्च का इस्तेमाल किया। यह मस्जिद का नाम बताता है।

चौमहल्ला पैलेस असफ़ जाही राजवंश की राजधानी थी। निजाम ने आधिकारिक मेहमानों और शाही आगंतुक का मनोरंजन किया सिकंदराबाद (इस ध्वनि के बारे में सुनो (सहायता · जानकारी), जिसे कभी-कभी सिखदार-बुरा-बुरा कहा जाता है), जिसे लोकप्रिय रूप से हैदराबाद के जुड़वां शहर के रूप में जाना जाता है, तेलंगाना राज्य में स्थित है। सिकंदर जेह के नाम पर, असफ जाही वंश के तीसरे निजाम, सिकंदराबाद की स्थापना ब्रिटिश कैंटनमेंट के रूप में 1806 में हुई थी। यद्यपि हैदराबाद और सिकंदराबाद को एक साथ जुड़वां शहर कहा जाता है, उनके पास अलग-अलग इतिहास और संस्कृतियां हैं, सिकंदराबाद के पास 1 9 48 तक ब्रिटिश शासन के तहत सीधे विकसित हुआ है और हैदराबाद निजाम की रियासत की राजधानी है। [2]

हुसैन सागर झील द्वारा भौगोलिक रूप से हैदराबाद से विभाजित किया गया, सिकंदराबाद अब एक अलग नगरपालिका इकाई नहीं है और हैदराबाद की जीएचएमसी नगरपालिका का हिस्सा बन गया है। दोनों शहरों को सामूहिक रूप से हैदराबाद के रूप में जाना जाता है और साथ ही भारत में छठे सबसे बड़े महानगर बनते हैं। भारत में सबसे बड़ी छावनीओं में से एक होने के नाते, सिकंदराबाद में सेना और वायु सेना के कर्मियों की बड़ी उपस्थिति है। [3] [4]

विषय वस्तु [छिपाएं] 1 इतिहास 2 भूगोल 3 जलवायु 4 जनसांख्यिकी 5 संस्कृति 6 अर्थव्यवस्था 7 प्रशासन 8 मीडिया 9 मनोरंजन 10 खेल 11 परिवहन 12 शिक्षा 13 उल्लेखनीय व्यक्ति 14 भी देखें 15 सन्दर्भ 16 बाहरी लिंक इतिहास [संपादित करें] यह भी देखें: हैदराबाद का इतिहास

सिकंदराबाद के 200 साल मना बैनर

जेम्स स्ट्रीट लगभग 1880, सिकंदराबाद में एक महत्वपूर्ण शॉपिंग जिले सिकंदराबाद के आसपास के वर्तमान क्षेत्र चालुक्य राजवंश द्वारा 624 सीई से 1075 सीई तक शासित था। [5] 11 वीं शताब्दी में चालुक्य साम्राज्य के चार भागों में विघटन के बाद, वर्तमान दिन हैदराबाद और सिकंदराबाद के आसपास के क्षेत्रों काकातिया वंश (1158-1310) के नियंत्रण में आए, जिनकी सीट वारंगल में थी, 148 किमी (92 मील) ) आधुनिक हैदराबाद के पूर्वोत्तर। [6] सिकंदरबाद के आसपास के इलाकों ने विभिन्न शासकों और 18 वीं शताब्दी के बीच हाथ बदल दिया, क्षेत्र निजाम के हैदराबाद का हिस्सा था। [7] [8]

आधुनिक सिकंदराबाद को एक ब्रिटिश छावनी के रूप में स्थापित किया गया था, जब निजाम असफ जाह द्वितीय ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों हार गया था। तब हुसैन सागर के उत्तर-पूर्व गांव उलवुल गांव के मैदान के खुले क्षेत्रों में तंबू में छा गए ब्रिटिश सैनिकों के समर्थन को हासिल करने के लिए उन्हें सब्सिडी एलायंस [17] [9] की 17 9 8 संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था। झील जो सिकंदराबाद को अपने जुड़वा शहर हैदराबाद से अलग करती है। बाद में, 1803 में, निजाम सिकंदर जेह, हैदराबाद के तीसरे निजाम, ने उल्लाव को खुद के बाद सिकंदराबाद के रूप में नामित किया। [9] निजाम ने हुसैन सागर की भूमि पर ब्रिटिश छावनी स्थापित करने के लिए आवंटित करने के आदेश के बाद 1806 में शहर का गठन किया गया था। [11] जुड़वां शहर मानव निर्मित हुसैन सागर झील से अलग हैं, जो कि 16 वीं शताब्दी में कुतुब शाही राजवंश के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। हैदराबाद के विपरीत, सिकंदराबाद की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी थी। [12] सिकंदराबाद को आयातित सामानों पर सीमा शुल्क से छूट दी गई थी, जिससे व्यापार बहुत फायदेमंद था। रेजिमेंटल बाज़ार और जनरल बाजार जैसे कई नए बाजार बनाए गए थे। 1857 के सिपाही विद्रोह के बाद, ट्रिमंगलर में सात मीटर ऊंची दीवार का निर्माण शुरू हुआ और 1867 में पूरा हुआ। [12] सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन भारत में सबसे बड़ा एक है जो दक्षिण मध्य रेलवे का क्षेत्रीय मुख्यालय भी 1874 में स्थापित किया गया था। राजा एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल, जिसे अब गांधी अस्पताल के रूप में जाना जाता है, को 1851 में स्थापित किया गया था। एक सिविल जेल (अब एक विरासत भवन मोंडा मार्केट के पास पुराना जेल परिसर भी स्थापित किया गया था। [13] मूल रूप से 1860 में हैदराबाद में ब्रिटिश निवास के देश के घर के रूप में निर्माण किया गया था, रेसीडेंसी हाउस को अब राष्ट्रपति निलयम के नाम से जाना जाता है, जो भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक पीछे हटने के लिए जाना जाता है। [14]


1 9 12 में सिकंदराबाद में जेम्स स्ट्रीट पर पहली कार शोरूम खोला गया था, सी। 1950

ट्रिमिगलेरी एंट्रेंचमेंट जहां ब्रिटिश सैनिकों को तैनात किया गया था द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री सर विंस्टन चर्चिल, 18 9 0 के दशक के दौरान सिकंदराबाद में ब्रिटिश सेना में एक उपलक्ष्य के रूप में तैनात किया गया था। [15] सर रोनाल्ड रॉस ने सिकंदराबाद शहर में मलेरिया के कारण अपना प्रारंभिक शोध किया। [16] मूल इमारत को आज सर रोनाल्ड रॉस संस्थान कहा जाता है और वह मंत्री रोड पर स्थित है।

1 9 45 में सिकंदराबाद नगर पालिका का गठन पहली बार हुआ था। बाद में 1 9 50 में, हैदराबाद नगर पालिका के साथ, इसे हैदराबाद निगम अधिनियम, 1 9 50 के तहत सिकंदराबाद नगर निगम में अपग्रेड किया गया था। 1 9 60 में हैदराबाद नगर निगम अधिनियम 1 9 5 में, सिकंदराबाद नगर निगम हैदराबाद निगम एक एकल नगर निगम बनाने के लिए। [17] आज सिकंदराबाद हैदराबाद जिले का हिस्सा है। सिकंदराबाद ने 2006 में अपने गठन के दो सौ साल मनाए

स्वतंत्रता के बाद, सिकंदराबाद छावनी बोर्ड भारतीय सशस्त्र बलों के अधिकार क्षेत्र में आया था। नतीजतन, बड़ी सैन्य इकाइयों की स्थापना की गई थी। सिकंदराबाद में लोकप्रिय पड़ोस स्वर्ग सर्किल, त्रिमुगली, जवाहरनगर कॉलोनी, मैरेडपल्ली, जीरा, जनरल बाजार, सीताफलम हैदराबाद स्टॉक एक्सचेंज (एचएसई) 1 9 41 में भारत में स्थित एक स्टॉक एक्सचेंज था। सेबी द्वारा 2007 में एक्सचेंज को भंग कर दिया गया था और जनवरी 2013 से, एचएसई को नियमित रूप से नियमित ब्रोकिंग या कॉर्पोरेट इकाई के रूप में कार्य करने की अनुमति दी गई थी। [1]

विषय वस्तु [छिपाएं] 1 इतिहास 1.1 संचालन 2 स्टॉक एक्सचेंज का दोहराना 3 भी देखें 4 सन्दर्भ 5 बाहरी लिंक इतिहास [संपादित करें] नवंबर 1 9 41 में, कुछ प्रमुख बैंकरों और दलालों ने शेयर और स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन का गठन किया। 1 9 42 में, वित्त मंत्री श्री गुलाब मोहम्मद ने स्टॉक एक्सचेंज के नियमों और विनियमों के गठन के उद्देश्य से एक समिति बनाई। हैदराबाद स्टॉक एक्सचेंज के अध्यक्ष और संस्थापक सदस्य श्री पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास ने हैदराबाद कंपनी अधिनियम के तहत 14 नवम्बर 1 9 43 को एक्सचेंज का उद्घाटन समारोह किया। श्री कमल यार जंग बहादुर विनिमय के पहले राष्ट्रपति थे। एचएसई हैदराबाद सिक्योरिटीज अनुबंध अधिनियम के तहत काम शुरू कर रहा था। निजाम की सरकार गारंटी के आधार पर सीमित है। यह प्रीमियर स्टॉक एक्सचेंज, अहमदाबाद, बम्बई, कलकत्ता, मद्रास और बेंगलोर स्टॉक एक्सचेंज के बाद, सिक्योरिटीज अनुबंध अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त 6 वां स्टॉक एक्सचेंज था। सभी डिलिवरी हर सोमवार या अगले कार्य दिवस पूरा हो गए थे।

एचएसई को पहली बार 29 सितंबर 1 9 58 को भारत सरकार ने मान्यता दी थी क्योंकि प्रतिभूति विनियमन अधिनियम हैदराबाद और सिकंदराबाद के दो शहरों से उस तारीख तक लागू किया गया था। व्यापारिक गतिविधियों में पर्याप्त वृद्धि और विनिमय द्वारा प्रदान की जाने वाली महिलाओं के लिए, 29 सितंबर 1 9 83 से विनिमय के साथ स्थायी मान्यता प्रदान की गई।

संचालन [संपादित करें] हैदराबाद स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड ने कोति, हैदराबाद क्षेत्र में एक किराए की इमारत में एक छोटे से रास्ते में अपना परिचालन शुरू किया। यह 1 9 87 में बैंक स्ट्रीट में अय्यंगार प्लाजा में स्थानांतरित हो गया। सितंबर 1 9 8 9 में, भारत के उपराष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने हिमायतनगर, हैदराबाद में स्टॉक एक्सचेंज की अपनी बिल्डिंग का उद्घाटन किया। बाद में, सभी व्यापारिक सदस्यों को एक छत के नीचे लाने के लिए विनिमय ने 6-3-654 / ए पर स्थित बड़े परिसर का अधिग्रहण किया; सोमाजुगुडा, हैदराबाद - छः मंजिला इमारत और 486,842 वर्ग फुट (45,22 9 .1 मी 2) (70,857 वर्ग फुट (6,582.8 एम 2) के तहखाने सहित) का एक निर्माण क्षेत्र के साथ 82।

स्टॉक एक्सचेंज की मान्यता [संपादित करें] सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने 29 अगस्त 2005 को हैदराबाद स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड (कॉरपोरेटिज़ेशन एंड डिम्यूटिलाइज़ेशन) योजना, 2005 को अधिसूचित किया था। हैदराबाद स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड इसकी इक्विटी शेयर पूंजी का 51% 28 अगस्त, 2007 को या इससे पहले शेयरधारकों के शेयरधारक के अलावा अन्य सार्वजनिक। परिणामस्वरूप, प्रतिभूति अनुबंध नियम अधिनियम, 1 9 56 (एससीआरए) की धारा 5 (2) के संदर्भ में, एचएसई को दी गई मान्यता 29 अगस्त, सेबी द्वारा अस्वीकृत होने के बाद, कंपनी का नाम बदलकर "हैदराबाद सिक्योरिटीज एंड एंटरप्राइजेज लिमिटेड" कर दिया गया है।

एक्सचेंज के सदस्यों की संख्या 1 9 43 में 55 थी और 1 99 3 में 117 थी और बढ़कर 300 हो गई और 869 सूचीबद्ध कंपनियों ने 31 मार्च 2000 को 1 9, 128.85 रूपए की पूंजी का भुगतान किया। व्यापार का कारोबार भी काफी हद तक बढ़ाकर रु। 1 999 -2000 में 1236.51 करोड़ एक्सचेंज के पास बहुत आसान निपटान प्रणाली थी। सरकारी शहर कालेज, हैदराबाद में स्थित अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट कॉलेज है। इसे 2004 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन, उस्मानिया यूनिवर्सिटी द्वारा स्वायत्तता से सम्मानित किया गया था और एनएएसी द्वारा ए ग्रेड के साथ 2012 में पुन: मान्यता प्राप्त हुई थी। यह तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा स्वामित्व और वित्त पोषित है। परिसर हैदराबाद, भारत में विरासत संरचनाओं में से एक है। [1] [2]

विषय वस्तु [छिपाएं] 1 इतिहास 2 पाठ्यक्रम और नाम के परिवर्तन 3 प्रत्यायन 4 सुविधाएं 5 वास्तुकला 6 लोकप्रिय मीडिया 7 उल्लेखनीय पूर्व छात्र 7.1 केंद्रीय मंत्री 7.2 मुख्यमंत्रियों 7.3 भारतीय क्रिकेटर 8 सन्दर्भ 9 यह भी देखें इतिहास [संपादित करें] निजाम महबूब अली खान, हैदराबाद के असफ जाह छठे ने 1865 के शुरूआती मदरसा दार-उल-उलूम नाम पर पहला शहर विद्यालय स्थापित किया, बाद में निजाम उस्मान अली खान, असफ जाह सातवीं, इसे एक सिटी हाई स्कूल में परिवर्तित कर दिया। विद्यालय 1 9 21 में वर्तमान भव्य इमारत में स्थानांतरित हो गया। उस्मान के साथ उच्च विद्यालय की शिक्षा के तहत 1 9 21 में 30 छात्रों के साथ उस्मानिया विश्वविद्यालय के इंटरमीडिएट वर्ग (एफए) को शिक्षा के माध्यम के रूप में पेश किया गया। 1 9 2 9 में, स्कूल को एक कॉलेज में अपग्रेड किया गया और उसे सिटी कॉलेज नाम दिया गया, यह उस्मानिया विश्वविद्यालय का एक घटक कॉलेज बन गया। [1]

पाठ्यक्रम और नाम के परिवर्तन [संपादित करें] 1 9 56 में उस्मानिया विश्वविद्यालय में इंटरमीडिएट कोर्स (एफए) के उन्मूलन के बाद, प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स (पीयूसी) शुरू किया गया था। 1 9 62 में बैचलर ऑफ साइंस पाठ्यक्रम पेश किए गए थे और संस्थान को सिटी साइंस कॉलेज नामित किया गया था। सिटी कॉलेज को 1 9 65 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से सरकार ने अधिग्रहण कर लिया था और इसका नाम बदलकर गवर्नमेंट सिटी साइंस कॉलेज रखा गया था। 1 9 67 में, बी.ए. और बी.कॉम पाठ्यक्रम जोड़ा गया और कॉलेज सरकारी सिटी कॉलेज बने। [3]

कॉलेज बीएससी, बीए, और बीकॉम सहित 22 स्नातक कार्यक्रम पेश करता है। 2001 में क्रमशः जैव प्रौद्योगिकी और गणित में मास्टर ऑफ साइंस कार्यक्रमों की शुरुआत के साथ कॉलेज को पोस्ट ग्रेजुएट सेंटर के रूप में उन्नत किया गया था। [1] एमएससी भौतिकी 2015 से शुरू हुई।

प्रत्यायन [संपादित करें] कॉलेज को पहली बार एएएसी द्वारा 2004 में 'ए' ग्रेड से मान्यता प्राप्त हुई थी। 2012 में फिर से एनएएसी द्वारा 'ए' ग्रेड के साथ पुनः मान्यता प्राप्त हुई। कॉलेज 2014 से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, उस्मानिया विश्वविद्यालय और तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा स्वायत्तता के साथ प्रदान किया गया है। इस कॉलेज को शैक्षणिक वर्ष 2014-15 से सीबीसीएस शुरू किया गया है। रुसा स्कीम के तहत 4 अन्य सरकारी कॉलेजों (सरकारी डिग्री कॉलेज, महिलाओं, बेगमम, आईपी डिग्री कॉलेज, राष्ट्रवादी, जीडीसी खैरताबाद और जीडीसी हुसैनीलायम) को शामिल करने के साथ अब कॉलेज को क्लस्टर विश्वविद्यालय की स्थिति में अपग्रेड किया गया है। सुविधाएं [संपादित करें] केंद्रीय पुस्तकालय जिसमें दुर्लभ किताबें, केंद्रीय कम्प्यूटिंग और इंटरनेट सुविधाएं हैं। [4] क्रिकेट / फुटबॉल स्टेडियम, एनसीसी और एनएसएस स्वास्थ्य केंद्र, शिकायत निवारण कक्ष, करियर मार्गदर्शन कक्ष। [4] ओपन यूनिवर्सिटी सेंटर, सभागार और सेमिनार हॉल कला जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला का राज्य। [4] वास्तुकला [संपादित करें] सरकारी शहर महाविद्यालय, वास्तुशिल्प रूप से शानदार और भव्य, निजाम, उस्मान अली खान, पूर्व हैदराबाद राज्य के असफ जेह सात के शासन के दौरान 1 9 1 9 में स्थापित किया गया था। परिसर 16 एकड़ में फैला हुआ है और यह इमारत खुले मैदान (अब कुली कुतुब शाह स्टेडियम) का सामना करते हुए इंडो-इस्लामिक शैली में मुशी नदी के तट पर और तेलंगाना उच्च न्यायालय कॉलेज के निकट है। [4] तेलंगाना सरकार द्वारा कॉलेज भवन को विरासत स्मारक के रूप में घोषित किया गया है। [5]

लोकप्रिय मीडिया [संपादित करें] गणेश (फिल्म), नागा, तेरे नाम, लड़कों (2003 की फिल्म), वेनेला, वेदम (फिल्म) आदि जैसी कई फिल्मों में कॉलेज परिसर का चित्रण किया गया।

उल्लेखनीय पूर्व छात्र [संपादित करें] केंद्रीय मंत्री [संपादित करें] शिवराज पाटिल पी। शिव शंकर मुख्य मंत्री [संपादित करें] श्री एस बी चव्हाण श्री वीरेन्द्र पाटिल मारारी चेन्ना रेड्डी भारतीय क्रिकेटर [संपादित करें] अरशद अयूब [6]

झील के तट पर स्थित साथ इमारतों का एक दृश्य
हुसैन सागर झील के किनारे बसे हैदराबाद का व्यापक दृश्य

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.census2011.co.in/city.php
  2. International Telugu Institute (तेलुगु: Antarjātīya Telugu Saṃstha). Telugu Vāṇi. pp. 12. 
  3. शर्मा, गायत्री. "निजामों का शहर - हैदराबाद". http://hindi.webdunia.com/entertainment/tourism/deshvidesh/0901/03/1090103078_1.htm. अभिगमन तिथि: 8 अगस्त 2014. 
  4. "GHMC comes into existence". द हिन्दू. http://www.hindu.com/2007/04/17/stories/2007041719080100.htm. अभिगमन तिथि: 2007-04-17. 
  5. "The Genome Valley, Hyderabad". http://www.iciciknowledgepark.com/icicikp/iciciinnerfiles/genomevalley.htm. अभिगमन तिथि: 2006-03-06. 
  6. "Report on IT exports of India". http://finance.indiainfo.com/news/2005/05/11/1105it-exports.html. अभिगमन तिथि: 2006-03-05. 
  7. "Foundation Laid for Fab City". Cyberabad Times. http://www.cyberabadtimes.net/2006/06/fab-city-foundation-day-070606.asp. अभिगमन तिथि: 2006-03-05. 
  8. APSRTC official web site "APSRTC". http://apsrtc.gov.in APSRTC official web site. अभिगमन तिथि: 2006-08-29. 
  9. Information about APSRTC "AP State Road Transport Corporation". http://www.aponline.gov.in/apportal/departments/departments.asp?dep=30&org=199&category=about Information about APSRTC. अभिगमन तिथि: 2006-08-29. 
  10. "Hyderabad Growth Corridor - Outer ring road". http://www.ourmch.com/. अभिगमन तिथि: 2006-08-29. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]