हैदराबाद

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यह लेख भारत के एक नगर के बारे में है, अन्य के लिये देखें हैदराबाद (बहुविकल्पी)
हैदराबाद
హైదరాబాద్
حیدرآباد
शहर
Skyline of हैदराबाद
देशभारत
राज्यतेलंगाना
ज़िलाहैदराबाद
रंगारेड्डी
मेदक
जनसंख्या (2011)[1]
 • शहर67,31,790
 • महानगर77,49,334
समय मण्डलआइएसटी (यूटीसी+5:30)
वेबसाइटwww.ghmc.gov.in

हैदराबाद (तेलुगु: హైదరాబాదు,उर्दू: حیدر آباد) भारत के राज्य तेलंगाना कि राजधानी है, जो दक्कन के पठार पर मूसी नदी के किनारे स्थित है। कहा जाता है कि किसी समय में इस ख़ूबसूरत शहर को क़ुतुबशाही परम्परा के पाँचवें शासक मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने अपनी प्रेमिका भागमती को उपहार स्वरूप भेंट किया था। हैदराबाद को 'निज़ाम का शहर' तथा 'मोतियों का शहर' भी कहा जाता है।

यह भारत के सर्वाधिक विकसित नगरों में से एक है और भारत में सूचना प्रौधोगिकी एवं जैव प्रौद्यौगिकी का केन्द्र बनता जा रहा है।[2] हुसैन सागर से विभाजित, हैदराबाद और सिकंदराबाद जुड़वां शहर हैं। हुसैन सागर का निर्माण सन १५६२ में इब्राहीम कुतुब शाह के शासन काल में हुआ था और यह एक मानव निर्मित झील है। चारमीनार, इस क्षेत्र में प्लेग महामारी के अंत की यादगार के तौर पर मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने १५९१ में, शहर के बीचों बीच बनवाया था। गोलकुंडा के क़ुतुबशाही सुल्तानों द्वारा बसाया गया यह शहर ख़ूबसूरत इमारतों, निज़ामी शानो-शौक़त और लजीज खाने के कारण मशहूर है और भारत के मानचित्र पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अलग अहमियत रखता है। निज़ामोन के इस शहर में आज भी हिन्दू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द्र से एक-दूसरे के साथ रहकर उनकी खुशियों में शरीक होते हैं। अपने उन्नत इतिहास, संस्कृति, उत्तर तथा दक्षिण भारत के स्थापत्य के मौलिक संगम, तथा अपनी बहुभाषी संस्कृति के लिये भौगोलिक तथा सांस्कृतिक दोनों रूपों में जाना जाता है। यह वह स्थान रहा है जहां हिन्दू और मुसलमान शांतिपूर्वक शताब्दियों से साथ साथ रह रहे हैं।

निजामी ठाठ-बाट के इस शहर का मुख्य आकर्षण चारमीनार, हुसैन सागर झील, बिड़ला मंदिर, सालार जंग संग्रहालय आदि है, जो देश-विदेश इस शहर को एक अलग पहचान देते हैं। यह भारतीय महानगर बंगलौर से 574 किलोमीटर दक्षिण में, मुंबई से 750 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में तथा चेन्नई से 700 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। किसी समय नवाबी परम्परा के इस शहर में शाही हवेलियाँ और निज़ामों की संस्कृति के बीच हीरे जवाहरात का रंग उभर कर सामने आया तो कभी स्वादिष्ट नवाबी भोजन का स्वाद। इस शहर के ऐतिहासिक गोलकुंडा दुर्ग की प्रसिद्धि पार-द्वार तक पहुँची और इसे उत्तर भारत और दक्षिणांचल के बीच संवाद का अवसर सालाजार संग्रहालय तथा चारमीनार ने प्रदान किया है। भारत की जनगणना २०११ के अनुसार इस महानगर की जनसंख्या ६८ लाख से अधिक है।

स्थापना[संपादित करें]

गोलकोंडा का पुराना क़िला राज्य की राजधानी के लिए अपर्याप्त सिद्ध हुआ और इसलिए लगभग 1591 में क़ुतुबशाही वंश में पाँचवें, मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने पुराने गोलकोंडा से कुछ मील दूर "मूसा नदी" {जो आज मूसी नदी के नाम से जाना जाता है} के किनारे हैदराबाद नामक नया नगर बनाया।

चार खुली मेहराबों और चार मीनारों वाली भारतीय-अरबी शैली की भव्य वास्तुशिल्पीय रचना चारमीनार, क़ुतुबशाही काल की सर्वोच्च उपलब्धि मानी जाती है। यह वह केंद्र है, जिसके आसपास बनाई गई मक्का मस्जिद 10 हज़ार लोगो को समाहित कर सकती है। हैदराबाद अपने सौंदर्य और समृद्धि के लिए जाना जाता है। चारमीनार के बगल में लाड-बाजार, गुलजार हौज, मशहूर विक्रय केंद्र है।

नामकरण[संपादित करें]

हैदरबाद नाम के पीछे कई धारणायें हैं। एक प्रसिद्ध धारणा है कि इस शहर को बसाने के बाद मुहम्मद कुली कुतुब शाह एक स्थानीय बंजारा लड़की भागमती से प्रेम कर बैठा। लड़की से विवाह के बाद इस्लाम स्वीकार किया और उसका नया नाम हैदर महल रखा - और शहर का भी नया नाम हैदराबाद (अर्थात : "हैदर का बसाया गया शहर") [3]

इतिहास[संपादित करें]

अपने लजीज मुगलई भोजन के साथ-साथ हैदराबाद निजामी तहजीब के कारण भी दुनिया भर में मशहूर है। स्वादप्रेमियों के लिए तो हैदराबाद जन्नत के समान है। यहाँ की लजीज बिरयानी और पाया की खूशबू दूर-दूर से पर्यटकों को हैदराबाद खींच लाती है।

वेब दुनिया हिन्दी[4]

गोलकुंडा सल्तनत के शासक परिवार, "कुतुब शाही" राजवंश का संस्थापक मुहम्मद क़ुली क़ुतुब शाह था। १५१२ में स्वतंत्र सल्तनत बनने से पहले यह राजवंश बहमनी सल्तनत के आधीन था। १५९१ में इस राजवंश के एक शासक मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने मूसी नदी के तट पर हैदराबाद शहर की स्थापना की।[5] यह स्थान परिवर्तन, पुराने मुख्यालय गोलकोण्डा में राजवंश को हो रही पानी की कमी के कारण करना पडा। कहा जाता है कि, इससे पहले कि प्लेग की महामारी उसकी नये बसाये शहर में फैल पाती, उस पर काबू पाया जा सका, इसलिये उसने उसी साल, चारमीनार बनवाने का भी आदेश दिया।

१६वीं शताब्दी और शुरुआती १७वीं शताब्दी में, जैसे जैसे कुतुब शाही राजवंश की शक्ति और सत्ता बढ़ती गई, हैदराबाद हीरों के व्यापार का केंद्र बनता गया। महारानी एलीजाबेथ के राजमुकुट में जड़ा विश्व में सर्वाधिक प्रसिद्ध कोह-ए-नूर, गोलकुंडा की हीरों की खानें से ही निकला है। कुतुब शाही राजवंश ने हैदराबाद में हिन्दुस्तानी - फ़ारसी और हिन्दुस्तानी-इस्लामी साहित्य के विकास में भी सहयोग किया। कुछ सुल्तान स्थानीय तेलगू संस्कृति के संरक्षक भी माने जाते हैं। १६वीं शताब्दी में शहर गोलकुंडा की जनसंख्या के बसने के लिये बढ़ा और फलतः कुतुब शाही शासकों की राजधानी बन गया। हैदराबाद अपने बागों और सुखद मौसम के लिये जाना जाने लगा।

१६८७ में, मुगल शासक औरंगजेब ने हैदराबाद पर अधिकार कर लिया। इस कम समय के मुगल शासन के दौरान, हैदराबाद का सौभाग्य क्षय होने लगा। जल्द ही, मुगल शासक के द्वारा नियुक्त शहर के सूबेदार ने अधिक स्वायत्ता पा ली।

१७२४ में असफ़ जाह प्रथम, जिसे मुगल सम्राट ने "निज़ाम-उल-मुल्क" का खिताब दिया था, ने एक विरोधी अधिकारी को हैदराबाद पर अधिकार स्थापित करने में हरा दिया। इस तरह आसफ़ जाह राजवंश का प्रारंभ हुआ, जिसने हैदराबाद पर भारत की अंग्रेजों से स्वतंत्रता के एक साल बाद तक शासन किया। आसफ़ जाह के उत्तराधिकारीयों ने हैदराबाद पर राज्य किया, वे निज़ाम कहलाते थे। इन सात निजामों के राज्य में हैदराबाद सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों भांति विकसित हुआ। हैदराबाद राज्य की आधिकारिक राजधानी बन गया और पुरानी राजधानी गोलकुंडा छोड़ दी गयी। बड़े बड़े जलाशय जैसे कि निज़ाम सागर, तुंगबाद्र, ओसमान सागर, हिमायत सागर और भी कई बनाये गये। नागार्जुन सागर के लिये सर्वे भी इसी समय शुरु किया गया, जिसे भारत सरकार ने १९६९ में पूरा किया। हैदराबाद के लगभग सभी प्रमुख सार्वजनिक इमारतों और संस्थानों, जैसे उस्मानिया जनरल अस्पताल, हैदराबाद उच्च न्यायालय, जुबली हॉल, गवर्नमेंट निज़ामिआ जनरल हॉस्पिटल, मोजाम जाही बाजार, कचिगुडा रेलवे स्टेशन, असफिया लाइब्रेरी (राज्य केंद्रीय पुस्तकालय), निज़ाम शुगर फैक्ट्री, टाउन हॉल (असेंबली हॉल), हैदराबाद संग्रहालय अब राज्य संग्रहालय के रूप में जाना जाता है और कई अन्य स्मारक इस शासनकाल के दौरान बनाए गए थे।[6][7]

जब १९४७ में भारत स्वतंत्र हुआ, ब्रिटिश शासन से हुई शर्तों के तहत हैदराबाद ने; जिसका प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल और 'निज़ाम' कर रहे थे, स्वतंत्र होने को चुना, एक मुक्त शासक की भाँति या ब्रिटिश साम्राज्य की रियासत की भाँति भारत ने हैदराबाद पर आर्थिक नाकाबंदी लगा दी।[8] परिणामतः हैरदराबाद राज्य को एक विराम समझौता करना पड़ा | भारत की स्वतंत्रता के करीब एक साल बाद, १७ सितम्बर १९४८ के दिन निज़ाम ने अधिमिलन प्रपत्र पर हस्ताक्षर किये। १ नवम्बर १९५६ को भारत का भाषायी आधार पर पुर्नसंगठन किया गया। हैदराबाद स्टेट के प्रदेश नये बने आन्ध्र प्रदेश, मुंबई (बाद में महाराष्ट्र) और कर्नाटक राज्यों में तेलुगुभाषी लोगों के अनुसार बाँट दिये गये। इस तरह हैदराबाद नए बने राज्य आंध्र प्रदेश की राजधानी बना। [4]

भूगोल और पर्यावरण[संपादित करें]

हैदराबाद शहर दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य में स्थित है। यह देक्कन क्षेत्र में है जो, समुद्र तट से ५४१ मीटर, ६२५किमी क्षेत्र ऊपर स्थित है।

हुसैन सागर झील

मूल हैदराबाद शहर मूसी नदी के किनारे स्थापित हुआ था। इसे अब ऐतिहासिक पुराना शहर कहा जाता है, जहां चारमीनार, मक्का मस्जिद आदि बने हैं, वह नदी के दक्षिणी किनारे पर बसा है। नगर का केन्द्र नदी के उत्तर में स्थानांतरित हो गया है। यहां कई सरकारी इमारतें व मुख्य स्थल बने हैं, खासकर हुसैन सागर झील के दक्षिण में। इस नगर की त्वरित प्रगति साथ जुड़े सिकंदराबाद व अन्य पड़ोसी क्षेत्रों सहित हुई है, जिससे यह महानगरों की श्रेणी में आ गया है। यहां का मौसम इस प्रकार से है:

  • ग्रीष्म काल (मई): औसत अधिकतम तापमान: 40 डिग्री से० औसत न्यूनतम : 25 डिग्री से०
  • हेमन्त काल (दिसंबर): औसत अधिकतम तापमान 28 डिग्री से०, औसत न्यूनतम: 13 डिग्री से०
  • अधिकतम अंकित : 45.6 शिग्री से०, न्यूनतम अंकित:6.1 डिग्री से०
  • वार्षिक वर्षा: 79 से.मी.
  • भुगर्भीय प्रणाली: आर्कियन
  • मृदा: लाल बलुआ, साथ ही काली कॉटन मृदा के क्षेत्र भि हैं।
  • निकटवर्ती भूभाग: पथरीला/पहाड़ी (हैदराबाद के निकटवर्ती क्षेत्र अपनी संदर पाषाण बनावट के लिये प्रसिद्ध हैं।)
  • जलवायु: उष्णकटिबन्धीय नम एवं शुष्क

स्वास्थ्य पर्यटन[संपादित करें]

यदि किसी को कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, तो हैदराबाद, उभरता हुआ सर्वश्रेष्ठ स्थानों में से एक है, उपचार हेतु। नगर पहले ही औषधि का केन्द्र है, जहां औषधियों का कई करोड़ का व्यापार है। यहां कई सस्ते व अच्छे अस्पताल भी हैं।

नागरिक प्रशासन[संपादित करें]

नगर का प्रशासन ग्रेटर हैदराबद नगरमहापालिका द्वारा संचालित है। [9] इस पालिका के अध्यक्ष यहां के महापौर हैं, जिन्हें कई कार्यपालक क्षमताएं निहित हैं। पालिका की मुख्य क्षमता नगरमहापालिका आयुक्त, एक आइ ए एस के पास है, जो आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त होता है।

हैदराबाद एक सौ 50 म्युनिसिपल वार्ड्स में बंटा हुआ है। प्रत्येक वार्ड का एक कॉर्पोरेटर होता है, जो पालिका के चुनावों में चयनित होता है। हैदराबाद में एक जिला है, जो जिला मैजिस्ट्रेट के अधीन आता है। इन्हें कलेक्टर भी कहा जाता है। कलेक्टर संपत्ति आंकड़ों व राजस्व संग्रहण का प्रभारी होता है। यही नगर में होने वाले चुनावों की प्रक्रिया का निरीक्षण भी करता है। महानगरीय क्षेत्र में रंगारेड्डी जिला भी आता है, जो पूर्व हैदराबाद में से काट कर बना था।

अन्य महानगरों की भांति, यहां भी एक पुलिस आयुक्त, आई पी एस होता है। हैदराबाद पुलिस राज्य गृह मंत्रालय के अधीन आती है। हैदराबाद में पाँच पुलिस मंडल हैं, प्रत्येक का एक पुलिस उपायुक्त है। यहां की यातायात पुलिस भी हैदराबाद पुलिस के अधीन, अर्ध-स्वायत्तता प्राप्त संस्था है।

यहां एक राज्य उच्च न्यायालय है। इसके साथ ही दो निचले न्यायालय भी हैं। ये हैं: स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट: नागरिक (दीवानी) मामलों हेतु, व सैशन कोर्ट: आपराधिक (फौजदारी) मामलों हेतु।

हैदराबाद में दो लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं: हैदराबाद एवं सिकंदराबाद। साथ ही शहर के कई भाग, दो अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के भी भाग हैं। यहां तेरह विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।

आधिकारिक रूप से भारत सरकार हैदराबाद को महानगर मानती है।

अर्थ व्यवस्था[संपादित करें]

हाईटेक सिटी, हैदराबाद का प्रमुख टॉउनशिप क्षेत्र

हैदराबाद आंध्र प्रदेश की वित्तीय एवं आर्थिक राजधानी भी है। यह शहर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद, कर एवं राजस्व का सर्वाधिक अंशदाता है। 1990 के दशक से इस शहर का आर्थिक प्रारूप बदल कर, एक प्राथमिक सेवा नगर से बहु-सेवा वर्णक्रम स्वरूप हो गया है, जिसमें व्यापार, यातायात, वाणिज्य, भण्डारण, संचार, इत्यादि सभी सम्मिलित हैं। सेवा उद्योग मुख्य अंशदाता है, जिसमें शहरी श्रमशक्ति कुल शक्ति का 90% है।

हैदराबाद को मोतीयों का नगर भी कहा जाता है। और सूचना प्रौद्योगिकी में तो इसने बंगलौर को भी पछाड़ दिया है। मोतिओं का बाजार चार मीनार के पास स्थित है। मोतिओं से बने आभूषण चारकमान बाज़ार से या अन्य मुख्य बाज़ारों से भी लिये जा सकते हैं। चाँदी के उत्पाद (बर्तन व मूर्तियां, इत्यादि), साड़ियां, निर्माल एवं कलमकारी पेंटिंग्स व कलाकृतियां, अनुपम बिदरी हस्तकला की वस्तुएं, लाख की रत्न जड़ित चूड़ियाँ, रेशमी व सूती हथकरघा वस्त्र यहां बनते हैं, व इनका व्यापार सदियों से चला आ रहा है।

आंध्र प्रदेश को पूर्व हैदराबाद राज्य से कई बड़े शिक्षण संस्थान, अनुसंधान प्रयोगशालाएं, अनेकों निजी एवं सार्वजनिक संस्थान मिले हैं। मूल शोध हेतु अवसंरचना सुविधाएं यहां देश की सर्वश्रेष्ठ हैं, जिसके कारण ही एक बड़ी संख्या में शिक्षित लोग देश भर से यहां आकर बसे हुए हैं।

हैदराबाद औषधीय उद्योग का भी एक प्रमुख केन्द्र है, जहां डॉ० रेड्डीज़ लैब, मैट्रिक्स लैबोरेटरीज़, हैटरो ड्रग्स लि०, डाइविस लैब्स औरोबिन्दो फार्मा लि० तथा विमता लैब्स जैसी बड़ी कम्पनियां स्थापित हैं। जीनोम वैली एवं नैनोटैक्नोलॉजी पार्क, जैसी परियोजनाओं द्वारा, जैव प्रौद्योगिकी की अत्यधिक संरचनाएं यहां स्थापित होने की भरपूर आशा है।[10]

हैदराबाद में भी, भारत के कई अन्य शहरों की ही भांति, भू-संपदा व्यापार (रियल एस्टेट) भी खूब पनपा है। इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी को धन्यवाद है, जिसके कारण यहां की प्रगति कुछ ही वर्षों में चहुमुखी हो गयी है। शहर में कई बड़े शॉपिंग मॉल भी बने हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग[संपादित करें]

हैदराबाद शहर, अपनी सूचना प्रौद्योगिकी एवं आई टी एनेबल्ड सेवाएं, औषधि, मनोरंजन उद्योग (फिल्म) के लिये प्रसिद्ध है। कई कॉल सेंटर, बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बी पी ओ) कम्पनियां, जो सूचना प्रौद्योगिकी व अन्य तकनीकी सेवाओं से संबंधित हैं, यहां 1990 के दशक में स्थापित की गयीं, जिन्होंने इसे भारत क्के कॉल सेंटर सेटप शहरों में से एक बनाया।

एक उप-शहर भी बसाया गया है- हाईटेक सिटी, जहां कई सू.प्रौ, एवं आई टी ई एस कम्पनियों ने अपने प्रचालन आरम्भ किये। सूचना प्रौ. के इस त्वरित विस्तार की कारण कभी-कभी इस शहर को साइबराबाद भि कहा गया है। साथ ही इसे बंगलौर के बाद द्वितीय साइबर वैली भी कह जाता है।[11] इस शहर में डिजिटल मूलसंरचना में काफी निवेश हुआ है। इस निवेश से कई बड़ी कंपनियों ने अपने परिसर भी बसाये हैं। कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने अपने केन्द्र शहर में खोले हैं। ऐसे मुख्य केन्द्र माधापुर व गाचीबावली में अधिक हैं।

हैदराबाद विश्व की फॉर्चून 500 कम्पनियों को भी आकर्षित कर यहां निवेश करा चुका है। इंटलेक्ट इंकॉ, की सेमिइंडिया में अच्छी डिल होने के बाद से हैदराबाद एक वैश्विक शहर बन गया है। यहीं पर भारत की प्रथम फैब सिटी, जिसमें सिलिकॉन चिप उत्पादन सुविधा हो, 3 बिलियन डॉलर के ए॰ एम॰ डी॰-सेमीइंडिया कॉनसॉर्शियम के निवेश से स्थापित हो रही है[12]

मौजूदा आईटी खिलाड़ियों की बदौलत धमाकेदार कदम देश के शीर्ष आईटी गंतव्य के लिए बेंगलुरु को कड़ी टक्कर देते हुए हैदराबाद एक नए आईटी हब के रूप में उभरा है।

2018-19 के वित्तीय वर्ष में, हैदराबाद से आईटी उत्पादों के निर्यात ने INR की नई उच्च 1.09 लाख करोड़ (415.82 बिलियन) को छू लिया, जो 17 प्रतिशत बढ़ रहा है, जो देश की नौ प्रतिशत विकास दर से लगभग दोगुना है।

जबकि आईटी उद्योग द्वारा वाणिज्यिक स्थान की अवशोषण दर बेंगलुरु की तुलना में काफी कम है, शहर का आईटी क्षेत्र उचित बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता, कुशल श्रमशक्ति, बड़ी संख्या में तकनीकी शिक्षा संस्थानों की उपस्थिति और एक सक्रिय स्थानीय लोगों द्वारा निरंतर बढ़ रहा है। सरकार।

शीर्ष आईटी केंद्र हैदराबाद में

HITEC शहर

हैदराबाद सूचना प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सिटी (HITEC) 151 एकड़ में फैला हुआ है। शहर में कई आईटी पार्क जैसे L & T Infocity, Vanenburg IT Park, Mindspace, Cyberabad SEZ, DLF IT SEZ, TCS सिनर्जी पार्क और कई प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के निर्मित-से-सूट परिसर शामिल हैं।

संबंधित सेवाएं

प्रोफेशनल-Service

हैदराबाद शहर के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित हैदराबाद का एक प्रमुख आईटी उपनगर है। यह Microsoft, Amazon, Deloitte, Accenture, TCS, Wipro, और Infosys जैसे प्रमुख नामों का घर है।

आईटी निवेश के लिए प्रोत् प्रोत्साहन

TALENGANA सरकार राज्य में आईटी और आईटी सक्षम सेवाओं (आईटीईएस) उद्योग में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए और विशेष रूप से उभरती हुई प्रौद्योगिकियों और आरएंडडी के लिए एक संशोधित आईटी नीति तैयार करने की प्रक्रिया में है।

वर्तमान में, सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क योजना के तहत पंजीकृत कंपनियां लाभ उठा सकती हैं:

100 प्रतिशत विदेशी इक्विटी;

कॉर्पोरेट आयकर में 90 प्रतिशत तक की छूट;

शुल्क मुक्त आयात;

समर्पित डेटा संचार लिंक तक पहुंच; तथा

एक ही बिंदु पर कस्टम बॉन्डिंग और निर्यात प्रमाणन।

हैदराबाद के प्रोत्साहन

तेलंगाना की राज्य सरकार ने हैदराबाद में आईटी उद्योग के विकास और विकास का समर्थन करने के लिए बहुत कुछ किया है। यह भूमि आवंटन के लिए समर्थन प्रदान करता है और एकल कार्यालय की स्थापना करता है, निरंतर बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करता है, एक समृद्ध प्रतिभा पूल तक पहुंच बनाता है, और आईटी उद्योग को आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करता है।

उद्योग में कंपनियों के लिए उपलब्ध कुछ सामान्य प्रोत्साहन में शामिल हैं:

सरकारी भूमि के आवंटन में सहायता;

रेट्रोफ़िटिंग लागत के 10 प्रतिशत तक की प्रतिपूर्ति या INR 10 लाख (US $ 14,517), जो भी कम हो, आईटी कंपनियों को रेट्रोफ़िटिंग अध्ययन करने और ऊर्जा दक्षता उपकरण लागू करने के लिए;

आईटी उद्योग और संचार प्रौद्योगिकी उद्योग कंपनियों द्वारा स्टांप ड्यूटी, हस्तांतरण शुल्क और पंजीकरण शुल्क का 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, पहले लेनदेन पर लीज डीड, और दूसरे लेनदेन पर बिक्री या लीज डीड पर 50 प्रतिशत (पंजीकरण लागत का प्रतिपूर्ति) मेगा परियोजनाओं के लिए लागू नहीं है); तथा

तेलंगाना में अपना मुख्यालय रखने वाली कंपनियों को पेटेंट दाखिल करने की लागत का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, INR 2 लाख (US $ 2,903) की सीमा के अधीन है।

मेगा परियोजनाओं, स्टार्ट-अप कंपनियों, एसएमई और मिड-स्केल कंपनियों, आईटी उत्पाद या आर एंड डी कंपनियों, इंजीनियरिंग सेवाओं की पेशकश करने वाली कंपनियों, महिला उद्यमियों और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन उपलब्ध हैं।

हैदराबाद आईटी नए उच्च स्तर पर निर्यात करता है

2018-19 में 1.09 लाख करोड़ रुपये पर, 17% पर क्षेत्र की वृद्धि देश के 9 प्रतिशत से लगभग दोगुनी है

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By AuthorTelanganaToday | बिजनेस ब्यूरो | प्रकाशित: 16 जुलाई 2019 12:08 amUpdated: 16 वीं जुलाई 2019 1:12 पूर्वाह्न

हैदराबाद: हैदराबाद से आईटी निर्यात 2018-19 के लिए 1.09 लाख करोड़ रुपये के नए उच्च स्तर को छू गया, जो 17 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जो देश की नौ प्रतिशत विकास दर से लगभग दोगुना है।

पिछले वर्ष 4.85 लाख के मुकाबले इस क्षेत्र में लगभग 5.5 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। निर्मित अप्रत्यक्ष रोजगार चार से पांच गुना होगा। उद्योग के नेताओं ने कहा कि परिपक्व पारिस्थितिकी तंत्र और यहां मौजूद बुनियादी ढांचे को सक्षम करने के कारण शहर इसी तरह के विकास के रुझान का प्रदर्शन करना जारी रखेगा।


सोमवार को यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, हैदराबाद सॉफ्टवेयर एंटरप्राइजेज एसोसिएशन (HySEA) के अध्यक्ष मुरली बोलु और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया हैदराबाद के निदेशक राम प्रसाद ने कहा कि हैदराबाद में आईटी कर्मचारियों की संख्या लगभग चार वर्षों में 10 लाख को छूने की संभावना है।

“2019 की पहली छमाही में, लगभग 38.5 लाख वर्ग फुट वाणिज्यिक स्थान को अवशोषित किया गया है। अंतरिक्ष का एक बड़ा हिस्सा आईटी, आईटीईएस और स्टार्टअप द्वारा लिया गया है। विभिन्न अनुमान बताते हैं कि लगभग पाँच वर्षों में लगभग 50 मिलियन वर्ग फुट का व्यावसायिक स्थान उपलब्ध होगा। यह कंपनियों की प्रतिबद्धताओं पर आधारित है। इसका मतलब है कि पांच लाख लोगों के लिए अतिरिक्त रोजगार की संभावना है। '' उन्होंने कहा कि मौजूदा 5.5 लाख रोजगार पांच साल में दोगुना हो सकता है।

वहनीय वृद्धि

“हैदराबाद में अब एक सेट उद्योग है और यह वर्तमान गति या इससे भी अधिक तक बढ़ेगा। बुनियादी ढांचे की उपस्थिति, कुशल जनशक्ति की उपलब्धता, बड़ी संख्या में तकनीकी शिक्षा संस्थानों की उपस्थिति और एक सक्रिय सरकार उद्योग के लिए महत्वपूर्ण ड्राइवर हैं, ”अनुकूल कारकों को बताते हुए एसटीपीआई के राम प्रसाद ने कहा।

उद्योग ने 2018-19 के दौरान लगभग 65,000 नए रोजगार जोड़े हैं। हालांकि, सेक्टर में डबल डिजिट एट्रिशन देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, 'इंडस्ट्री में अट्रैक्शन लगभग 20 फीसदी हो सकता है। यह हैदराबाद के लिए अद्वितीय नहीं है और इसी तरह के आंकड़े देश के बाकी हिस्सों के लिए भी दिखाई देते हैं। हालांकि, इस आशय का अर्थ है कि लोग नई नौकरियों को खोजने में सक्षम हैं, ”मुरली ने कहा।

नए प्रमुख क्षेत्र

मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और ब्लॉकचेन प्रमुख क्षेत्र होंगे जो नई नौकरियां पैदा करेंगे। "आईटी पेशेवरों को काम पर प्रासंगिक होने के लिए लगातार नए कौशल सीखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए," उन्होंने कहा। HySEA, अपने सदस्यों और संस्थानों के साथ कौशल अंतर को पाटने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि कौशल अंतर व्यापक है और यह फ्रेशर्स के लिए प्रशिक्षण अवधि को कम करने के लिए पाठ्यक्रम को संशोधित करने का है। पहले इसमें लगभग एक साल का समय लगता था

ट्रेन चलाने के लिए लेकिन अब यह छह महीने के आसपास है और इसे और नीचे लाने की गुंजाइश है।

फ्रेशर्स की औसत सैलरी 3.5 लाख रुपये आंकी गई है। यह अतिरिक्त कौशल से लैस लोगों के लिए 6 लाख रुपये से 6.5 लाख रुपये तक जाता है।

एक आईटी और सॉफ्टवेयर हब के रूप में हैदराबाद ने भी बैंगलोर बनाम हैदराबाद को बड़ी संख्या में प्रश्न किया है। Microsoft, Google, Facebook और Amazon से हम कई वैश्विक सॉफ्टवेयर दिग्गजों को मोतियों के शहर में विशाल परिसरों की स्थापना करते हुए देखते हैं। 1998 में साइबर टावरों के नाम से एक एकल बहु मंजिला इमारत के रूप में जो शुरू हुआ वह अब HITEC शहर के नाम से 250 एकड़ में फैला है।

इस पोस्ट में, हम दोनों शहरों के बीच प्रतिद्वंद्विता के बारे में बात करते हैं, जहां उनमें से प्रत्येक के पास एक बढ़त है। तो ... क्या हैदराबाद आईटी रेस में बैंगलोर को हरा सकता है? चलो पता करते हैं!

वर्तमान

अब तक, बैंगलोर 2016 में कुल निर्यात का 31 प्रतिशत के करीब सॉफ्टवेयर निर्यात क्षेत्र में निर्विवाद नेता बना हुआ है। हैदराबाद की हिस्सेदारी मामूली 13 प्रतिशत है। हालांकि, उसी वर्ष हैदराबाद के आईटी क्षेत्र ने 15,000 कर्मचारियों को अपने कर्मचारियों के साथ जोड़ा, जो कि आईटी मंत्री के अनुसार केटीआर देश में सबसे अधिक था। लेकिन अकेले इसके उत्पादन के विशाल आकार के साथ यह माना जा सकता है कि बैंगलोर हैदराबाद से बहुत आगे है।

बैंगलोर की शुरुआत

बैंगलोर बनाम हैदराबाद

यह बैंगलोर बनाम हैदराबाद प्रश्न का विश्लेषण करने से पहले विचार करने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है। जबकि हैदराबाद में अधिकांश संरचित आईटी अर्थव्यवस्था 90 के दशक के अंत और 2000 की शुरुआत में आई।

इलेक्ट्रॉनिक्स शहर के निर्माण के साथ, बैंगलोर ने 70 के दशक के अंत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर के खेल में प्रवेश किया। 1985 में कुछ साल बाद टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स बैंगलोर में इसका मुख्यालय स्थापित करने वाली पहली कंपनी बन गई और कई अन्य बड़े नामों का अनुसरण किया गया।

एमएनसी हब बनाम स्टार्टअप चुंबक

हब शुरू करो

हैदराबाद ने माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक, अमेज़ॅन, उबेर और कई अन्य लोगों को शहर में विशाल कार्यालय स्थापित करने के लिए आकर्षित किया है। वास्तव में, संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर माइक्रोसॉफ्ट का सबसे बड़ा कार्यालय हैदराबाद में स्थित है। जब Google ने भारत में एक कार्यालय खोलने का फैसला किया, तो हैदराबाद उनकी पहली पसंद थी (इसके बारे में यहां पढ़ें)। दूसरी ओर बैंगलोर में हाउसिंग कॉरपोरेट दिग्गजों के साथ-साथ स्टार्टअप्स के लिए भी ख्याति है।

फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और प्रैक्टो स्टार्टअप्स के उदाहरण हैं जिन्होंने बैंगलोर में मुख्यालय को चुना। यहां तक ​​कि बिट्स-पिलानी हैदराबाद कैंपस के पूर्व छात्रों द्वारा स्थापित एक कंपनी रेडबस का मुख्यालय बंगलौर में है। संक्षेप में, जबकि हैदराबाद सफल रहा है मैं बड़े व्हेल को आकर्षित कर रहा हूं, बैंगलोर सफल भारतीय स्टार्टअप के लिए एक स्वस्थ केंद्र बन गया है।

बैंगलोर बनाम हैदराबाद? बैंगलोर जीत गई।

वर्क फोर्स पूल

हैदराबाद में कार्य बल

चूंकि कर्मचारियों को स्थानांतरित करना एक महंगा मामला हो सकता है, इसलिए एक मजबूत स्थानीय प्रतिभा पूल को बहुत मदद मिलती है। यहीं पर हैदराबाद की बढ़त है। आईआईटी, आईआईआईटी, बिट्स, एनआईटी वारंगल, उस्मानिया विश्वविद्यालय, जेएनटीयू कुकटपल्ली, वासवी और सीबीआईटी जैसे प्रमुख प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ और शहर के करीब स्थित, कभी भी गुणवत्ता वाले कर्मचारियों की कमी नहीं है। बैंगलोर बनाम हैदराबाद? हैदराबाद जीतता है।

आउटसोर्स बनाम स्रोत

आउटसोर्सिंग

परंपरागत रूप से, बैंगलोर भारत की आउटसोर्सिंग राजधानी रही है। वास्तव में इसे दुनिया की आउटसोर्सिंग राजधानी के रूप में भी संदर्भित किया गया है!।

दूसरी ओर हैदराबाद में आउटसोर्स और इनसोर्स्ड दोनों परियोजनाओं का मिश्रण है। लेकिन फिर, हैदराबाद में आउटसोर्सिंग उद्योग बहुत कम है, जो कि आउटसोर्सिंग बैंगलोर के साथ है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस में आसानी

हैदराबाद का बुनियादी ढांचा

यहीं पर हैदराबाद ने बैंगलोर पर बढ़त बना ली है। 2016 में, बैंगलोर व्यापार करने के मामले में 13 वें स्थान पर आया, जहां हैदराबाद ने पहले स्थान पर कब्जा कर लिया था। बैंगलोर इसके ट्रैफिक जाम और महंगे रियल एस्टेट के लिए भी प्रसिद्ध है। हैदराबाद के अपेक्षाकृत युवा आईटी सेक्टर में बेहतर नियोजित सड़कें हैं और रहने की कम लागत प्रदान करती है। हाल ही में एक कम हिट हुई थी जब 2016 के मॉनसून के दौरान बैंगलोर में लोग बाढ़ में सड़कों पर मछली पकड़ते हुए देखे गए थे।

इसके विपरीत, हैदराबाद कई नीतियों को लागू करने में सफल रहा है जिन्होंने व्यवसाय को संचालित करने और नए कार्यालयों को स्थापित करने के लिए आसान बना दिया है। बहुत अधिक कर वृद्धि और प्रोत्साहन ने हाल की वृद्धि को बढ़ावा दिया है। बैंगलोर बनाम हैदराबाद? हैदराबाद जीतता है।

जलवायु

हैदराबाद का मौसम

इस मोर्चे पर पक्ष लेना मुश्किल है क्योंकि दोनों शहर अपने अनुकूल जलवायु चरम तापमान परिवर्तन से रहित हैं। हालाँकि, हैदराबाद में ग्रीष्मकाल बैंगलोर की तुलना में अधिक गर्म हो सकता है ... ताकि बैंगलोर के पक्ष में तराजू को दबाया जा सके। फिर, यह व्यक्तिगत पसंद और पसंद पर बहुत अधिक निर्भर करता है इसलिए टिप्पणी करना मुश्किल है। बैंगलोर बनाम हैदराबाद? दुविधा में पड़ा हुआ

खाना

बिरयानी, क़ुबानी और शेरवानी! बहुत कम लोग इस तथ्य के खिलाफ तर्क दे सकते हैं कि हैदराबाद देश में सबसे स्वादिष्ट भोजन प्रदान करता है। मोर्चे पर बिरयानी के साथ, हयाबादी भोजन नाश्ते में चावल / थाली / मंडी में नाश्ते में खिचड़ी / डोसा / पराठा से बहुत विविधता प्रदान करता है। पानी-पुरी से लेकर शावरमा और जलेबी की स्नैक्स रेंज भी बहुत कुछ पेश करती है। और अधिकांश अन्य महानगरों की तुलना में हैदराबाद अत्यधिक सस्ती भोजन प्रदान करता है।

दूसरी ओर, बैंगलोर का भोजन मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय है और कई क्वॉरंस के अनुसार, गैर-कन्नड़ भोजन प्राप्त करना मुश्किल है जो स्वादिष्ट और सस्ती दोनों है। बैंगलोर बनाम हैदराबाद? हैदराबाद जीतता है।

तेलंगाना में सॉफ्टवेयर उद्योग

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साइबर टावर्स, हाइटेक सिटी, हैदराबाद।

भारत के तेलंगाना राज्य में भारत में सॉफ्टवेयर निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जबकि अधिकांश उद्योग हैदराबाद में केंद्रित हैं, अन्य शहर भी राज्य में महत्वपूर्ण आईटी गंतव्य बन रहे हैं। हैदराबाद में, व्यापार का मध्य क्षेत्र हाइटेक सिटी में होता है, जो मदपुर उपनगर में है। HITEC सिटी के विकास ने कई आईटी और आईटीईएस कंपनियों को शहर में परिचालन स्थापित करने के लिए प्रेरित किया, और अपने शहर को "साइबराबाद" कहने के लिए नागरिक बूस्टर का नेतृत्व किया है। तेलंगाना में डिजिटल बुनियादी ढांचे में व्यापक निवेश हुए हैं। [उद्धरण वांछित]

वित्त वर्ष 2016-17 में हैदराबाद से आईटी निर्यात देश में वित्तीय वर्ष 2017-18 में 2 93,442 करोड़ के स्तर पर रहा, जो पिछले वर्ष के $ 85,470 करोड़ ($ 13 बिलियन, 14% सीएजीआर) से बेहतर था [1] [2] यह 2020 तक to 1.2 लाख करोड़ है।

अंतर्वस्तु

1 सिटी सिटी

2 तेलंगाना आईटी नीति

3 उल्लेखनीय लोग

4 यह भी देखें

5 सन्दर्भ

HITEC सिटी

रहेजा माइंडस्पेस में क्वालकॉम बिल्डिंग

आईटी उद्योग को एक बड़ा धक्का लगा, नीति निर्माता एपीआईआईसी के साथ लार्सन एंड टुब्रो की स्थापना करके, हैदराबाद सूचना प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सिटी या केवल हिटेक सिटी नामक एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाया। इसने हैदराबाद में सॉफ्टवेयर और आईटी के युग की शुरुआत की।

तेलंगाना आईटी नीति

हैदराबाद में इस सॉफ्टवेयर उद्योग की शुरुआत 1990 के दशक के आरंभ में भारत के अन्य प्रमुख शहरों के समानांतर की गई थी। वर्तमान तेलंगाना के मुख्यमंत्री, के। चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने तेलंगाना आईटी नीति 2016 बनाई। हालांकि, इससे पहले HITEC सिटी को साइबराबाद (रंगारेड्डी जिला) में बनाया गया था। हाइटेक सिटी की नींव 1991 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन। जनार्दन रेड्डी ने रखी थी।

तेलंगाना, भारत की राजधानी हैदराबाद, पारंपरिक विनिर्माण, ज्ञान क्षेत्र और पर्यटन पर आधारित है। [१] 1990 के दशक में शुरू, शहर का आर्थिक पैटर्न मुख्य रूप से सर्विस हब से बदलकर अधिक विविधता वाली अर्थव्यवस्था में बदल गया, [2] लेकिन सेवा उद्योग का एक बड़ा योगदान है। [३] 2006 तक, हैदराबाद के सबसे बड़े नियोक्ता क्रमशः 113,000 और 85,000 कर्मचारियों के साथ आंध्र प्रदेश और भारत की सरकारें हैं। [4]

शहर में Inorbit मॉल

1591 में अपनी स्थापना के बाद से, हैदराबाद दुनिया के एकमात्र हीरा बाजार के रूप में अपनी स्थिति सहित कई क्षेत्रों में एक वैश्विक व्यापार केंद्र रहा है। शहर आधारित हस्तशिल्प मध्य पूर्व और पश्चिमी देशों में बेचे गए थे। 1930 के दशक में निज़ाम के शासन के दौरान, औद्योगिक विकास एक विविध औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के साथ शुरू हुआ, जो पारंपरिक विनिर्माण के समानांतर बढ़ता गया।

1930 और 1940 के दशक में, शहर आधारित उद्योगों ने औद्योगिक निर्माण के लिए पश्चिमी दुनिया से प्रौद्योगिकी का आयात करना शुरू किया। रेलवे की शुरुआत के साथ, शहर बंबई (मुंबई), मद्रास (अब चेन्नई), कलकत्ता (अब कोलकाता) और कराची (अब पाकिस्तान में) के बंदरगाह शहरों से अच्छी तरह से जुड़ गया। [५] [६] 1950 और 1960 के दशक के दौरान, अधिकांश भारतीय प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम-भेल, एनएमडीसी, एचएमटी, बीईएल, आईडीपीएल, ईसीआईएल, डीआरडीओ और एचएएल- हैदराबाद में स्थापित किए गए थे, जो एक पारंपरिक विनिर्माण से महानगरीय औद्योगिक शहर के आर्थिक पैटर्न को बदल रहे थे। सेवा क्षेत्र। [sector]

हैदराबाद तेलंगाना की राजधानी है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (सकल घरेलू उत्पाद और राज्य कर) में शहर का सबसे बड़ा योगदान है। [Tel] 2011 में, हैदराबाद ने ,000 700,000 मिलियन (US $ 10 बिलियन) का राजस्व उत्पन्न किया और राज्य के कर राजस्व का एक तिहाई योगदान दिया। [9] 2008 में, GDP (PPP) US $ 60bn थी, जो भारत में शहर का चौथा और दुनिया में 93 वाँ स्थान रखती थी। [10] [3] हैदराबाद और उसके उपनगरों में भारत के शहरों के बीच विशेष आर्थिक क्षेत्रों की संख्या सबसे अधिक है। [११]

1970 के दशक में, दक्षिण-मध्य भारत में रणनीतिक स्थान के कारण शहर में फार्मास्यूटिकल और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग स्थापित किए गए थे, जिसके लिए इसे दक्षिण-मध्य भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है। [7] [१२] [१३] 1990 के दशक के बाद से, शहर के आर्थिक पैटर्न ने इसे मुख्य रूप से सर्विस हब से बदलकर आईटी उद्यमों, और बायोटेक, बीमा और वित्तीय संस्थानों, और सहायक संस्थानों में एक मजबूत रोजगार आधार के रूप में बदल दिया है। व्यापार और वाणिज्य, परिवहन, भंडारण, संचार, अचल संपत्ति और खुदरा जैसी गतिविधियाँ, जो आईटी उद्योगों की तुलना में तीन गुना अधिक लोगों को रोजगार देती हैं। 90% कार्यबल के साथ इस क्षेत्र में सेवा उद्योग का दबदबा बना हुआ है। [१३] [१४] 2005 तक, कामकाजी उम्र के हर 1000 लोगों में से 770 पुरुष और 190 महिलाएँ कार्यरत हैं। [15]

4 सूचना प्रौद्योगिकी

4.1 सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (ITIR)

सूचना प्रौद्योगिकी

इसे भी देखें: तेलंगाना में सॉफ्टवेयर उद्योग

माइक्रोसॉफ्ट आर एंड डी कैम्पस, हैदराबाद

ओरेकल कैंपस, HITEC सिटी, हैदराबाद

हैदराबाद सूचना प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्रों में से एक है, जिसके लिए इसे साइबराबाद (साइबर सिटी) के रूप में जाना जाता है। [३ [] [३ ९] शहर के IT सेक्टर में IT- सक्षम सेवाएँ, व्यवसाय प्रक्रिया आउटसोर्सिंग, मनोरंजन उद्योग, [39] और वित्तीय सेवाएँ शामिल हैं। [४०] २०० Hyderabad-०९ के दौरान, हैदराबाद का आईटी निर्यात ४. [बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, [२४] और २२% नैस्कॉम की कुल सदस्यता हैदराबाद की है। [११] हैदराबाद में एचटीईसी सिटी नामक संबंधित तकनीकी ढांचे के साथ एक टाउनशिप के विकास ने वैश्विक और विशेष रूप से यूएस-आधारित कंपनियों को अपना संचालन स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। [३ship] डेलोइट, फ्रैंकलिन टेम्पलटन इन्वेस्टमेंट्स, जीई कैपिटल, एक्सेंचर, एचएसबीसी, बैंक ऑफ अमेरिका, एबीएन एमरो, एस एंड पी कैपिटल आईक्यू, अर्न्स्ट एंड यंग, ​​केपीएमजी, कैपजेमिनी, जेनपैक्ट शहर में कार्यालयों के साथ कुछ वित्तीय सेवा कंपनियां हैं। [40]

हैदराबाद में स्थित प्रमुख बहुराष्ट्रीय आईटी फर्मों में Microsoft (अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा आर एंड डी परिसर), Google, थॉटवर्क्स, सीए टेक्नोलॉजीज, Amazon.com, IBM, Motorola, Samsung, Agilent, Automatic Data Processing, Oracle Corporation, Yahoo! Dell हैं। , टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स, हेवलेट-पैकर्ड, वर्चुसा, केविल, फेसबुक और अन्य। [४०] [४१] शहर में विकास केंद्रों वाली प्रमुख भारतीय फर्मों में टेक महिंद्रा, इंफोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, पोलारिस और अन्य हैं। [40] मुख्य क्षेत्र जहां इस तरह के आईटी और आईटीईएस परिसर स्थापित किए गए हैं, वे हैं मधापुर, गचीबोवली, कोंडापुर और उप्पल। [42] Apple ने हैदराबाद में एक नया कार्यालय खोलने की घोषणा की जो अपने मानचित्र उत्पाद के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा। [४३]

सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (ITIR)

सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (ITIR), हैदराबाद एक आगामी आईटी निवेश क्षेत्र है जिसे भारत सरकार और तेलंगाना सरकार द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है। [४४] केंद्र सरकार ने हैदराबाद और उसके आसपास 50,000 एकड़ में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर विनिर्माण के विकास के लिए स्व-एकीकृत एकीकृत ज्ञान समूहों के विकास के लिए सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (आईटीआईआर) के लिए 8 सितंबर 2012 को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। [45] ] यह परियोजना चीन में शेन्ज़ेन एसईजेड की तर्ज पर बनाई गई है, जिसका उद्देश्य आईटी, आईटीईएस और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में 2.19 ट्रिलियन ($ 44 बिलियन) का निवेश आकर्षित करना और 1.5 मिलियन लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करना है।

मेगा परियोजना के तहत, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), औद्योगिक पार्क, मुक्त व्यापार क्षेत्र, वेयरहाउसिंग जोन और निर्यात उन्मुख इकाइयां शहर के आसपास के तीन गलियारों में आएंगी, जिसमें माधापुर, गाचीबोवली, उप्पल, ममीदीपल्ली, रविर्याल, आदिबटला शामिल हैं। और महेश्वरम, और पोचराम। सरकार ने 2.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत पर आईटीआईआर के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित करने का प्रस्ताव दिया।

20 सितंबर, 2013 को केंद्र सरकार ने ITIR परियोजना के लिए आधिकारिक स्वीकृति दी [46]

अप्रैल 2016 में, केंद्र सरकार ने तेलंगाना राज्य सरकार को सूचित किया कि वह पूरी योजना को संशोधित करेगी। सूत्रों के अनुसार, अनुमानित निवेश में 3 लाख करोड़ रुपये की देरी और लगभग 60 लाख नौकरियों का सृजन हो सकता है। संशोधित योजना की आवश्यकता पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है

3-4 वर्षों में तेलंगाना में आईटी कर्मचारियों की संख्या दोगुनी होकर 10 लाख हो गई है

हमारे ब्यूरो हैदराबाद | 15 जुलाई, 2019 को अपडेट किया गया 15 जुलाई, 2019 को प्रकाशित किया गया

आईटी कर्मचारी (फाइल फोटो)।

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1 अगस्त को नवाचार शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए HYSEA

तेलंगाना में सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी-सक्षम सेवाएं चालू वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है।

हैदराबाद में आईटी कर्मचारियों की कुल संख्या अगले 3-4 वर्षों में दोगुनी होकर 10 लाख हो जाएगी क्योंकि शहर 50 मिलियन वर्ग फुट का कार्यालय स्थान जोड़ रहा है।

“राज्य ने 178 प्रतिशत की विकास दर के साथ 2018-19 में IT 1.08 लाख करोड़ का आईटी निर्यात हासिल किया है। यह राष्ट्रीय औसत से दोगुना है। हैदराबाद सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (HYSEA) के अध्यक्ष मुरली बोलू ने कहा कि हम इस साल भी इसे जारी रखने की उम्मीद करते हैं। "प्रतिभा की उपलब्धता और सस्ती अचल संपत्ति की कीमतों ने विकास में योगदान दिया," उन्होंने कहा।

“हैदराबाद ने पिछले साल 65,000 आईटी / आईटीईएस कर्मचारियों को जोड़ा है। और क्षेत्र के कर्मचारियों की कुल संख्या वर्तमान 5.5 लाख कर्मचारियों से दोगुनी होकर 10 लाख हो जाएगी।

Reskilling

नैसकॉम की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 40 प्रतिशत, यानी देश के कुल 40 लाख आईटी कर्मचारियों में से लगभग 16 लाख कर्मचारियों को रिस्किलिंग की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा, "उद्योग की जरूरतों और शैक्षणिक संस्थानों से आपूर्ति के बीच एक अंतर है।"

HYSEA की वार्षिक बैठक

एसोसिएशन 1 अगस्त को वार्षिक HYSEA इनोवेशन समिट 2019 के 27 वें संस्करण का आयोजन करेगा। थीम इवेंट: नेक्स्टजेन बिजनेस्स: पावर्ड बाय फ्यूचर टेक्नोलॉजीज ’है।

आईटी उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 120 स्टार्ट-अप और 1,000 शीर्ष अधिकारी HYSEA के प्रमुख कार्यक्रम में भाग लेंगे।

एसोसिएशन केपीएमजी, सीबीआरई और राज्य सरकार के सहयोग से as हैदराबाद को एक आकर्षक गंतव्य के रूप में एक रिपोर्ट जारी करेगा। ध्यान उन पहलुओं पर होगा जो शहर को निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं।

हैदराबाद: आईटी मंत्री के टी रामा राव ने आज कहा कि हैदराबाद आईटी निर्यात में बेंगलुरु को पीछे छोड़ रहा है क्योंकि सरकार आईटी कंपनियों का बड़े पैमाने पर समर्थन करती है।

सचिव जेम्स रंजन के साथ, मंत्री ने शुक्रवार को यहां रायदुर्गम में एक नई सॉफ्टवेयर कंपनी एमफैसिस का उद्घाटन किया। केटीआर ने कंपनी और उन लोगों के लिए कहा जो कैंपस इंटरव्यू आयोजित करके स्थानीय युवाओं को नौकरी प्रदान करते हैं।

    नॉलेज सिटी स्काईव्यू टावर्स में स्थित नया कार्यालय, अपने परिसर में लगभग 10,000 लोगों को नौकरी प्रदान करता है। मंत्री ने शहर में अपने व्यापार के लिए Mphasis की सराहना की, जो शीर्ष-प्रतिष्ठित कंपनियों, विश्व स्तरीय आईटी, व्यवसायों के लिए विख्यात है। उन्होंने यह भी कहा कि हैदराबाद ने आईटी क्षेत्र में 17% की वृद्धि हासिल की है जबकि बेंगलुरु ने 7 से 9 प्रतिशत हासिल किया है।

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राज्य सरकार ने परेशानी मुक्त अनुमति, भूमि, निवेश के साथ आने वाली कंपनियों को सुविधाएं और स्थानीय लोगों को रोजगार और रोजगार प्रदान करती है, केटीआर ने कहा। उन्होंने थंडरसॉफ्ट आईटी कंपनी की सालगिरह में भी भाग लिया, जिसमें 850 नौकरियां देने का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि चीन की कंपनियां तेलंगाना राज्य में निवेश के साथ दुकानें स्थापित करने के लिए भी दिलचस्पी दिखा रही हैं।

आईटी मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आईटी, आईटीईएस और अन्य व्यवसायों के लिए एक बड़ा धक्का देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने तेलंगाना राज्य की वृद्धि का हिस्सा बनने और निवेश करने के लिए नई कंपनियों का स्वागत किया।

हैदराबाद यह पहली बार ₹ 1 लाख करोड़ का आंकड़ा पार किया गया था - 2017-18 में आईटी निर्यात at 93,442 करोड़ था। राज्य के आईटी क्षेत्र में रोजगार पिछले वित्त वर्ष के 5,43,033 को छूने के लिए 14.2% बढ़ा। 2017-18 में, रोजगार संख्या 4,75,308 थी।

पूर्व आईटी मंत्री के टी रामाराव ने ट्वीट किया, “2018-19 हैदराबाद आईटी क्षेत्र के प्रदर्शन से प्रसन्न। आईटी विभाग के मेहनती और प्रतिभावान टीम के प्रति मेरी प्रशंसा @jayesh_ranjan Garu (sic) के नेतृत्व में है। ”

“मुझे यह भी याद दिलाना है कि हमने उस लक्ष्य को लगभग प्राप्त कर लिया है, जिसे हमने 5 वर्षों में आईटी निर्यात को दोगुना करने के लिए निर्धारित किया था - 2013-14 में from 56 हजार करोड़ प्लस से 9 1,09,219 करोड़। आगे और ऊपर, ”उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा।

आईटी सचिव जयेश रंजन ने कहा, “हमारी विकास की कहानी का एक प्रशंसनीय हिस्सा यह है कि मौजूदा कंपनियां भारी विस्तार कर रही हैं। यह हैदराबाद और तेलंगाना में मिलने वाले मूल्य प्रस्ताव का एक मजबूत समर्थन है। ”

वृद्धि पर, उन्होंने कहा कि यह श्री राव थे जिन्होंने अगले पांच वर्षों में आईटी निर्यात को दोगुना करने के लिए विभाग के सामने एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था। "मुझे खुशी है कि हम उस चुनौती को वास्तविकता बनाने में सक्षम हैं।"

हैदराबाद  का आईटी निर्यात प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से आगे है। इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर निर्यात संवर्धन परिषद ने 2018-19 में देश के आईटी निर्यात में 8-10% की वृद्धि का अनुमान लगाया।

भू सम्पदा[संपादित करें]

यहां के शहरीकरण, व लोगों के छोटे शहरों को व्यवसाय के लिये छोड़कर यहां बसने से, यहां की जनसंख्या में एक बड़ी वृद्धि हुई है। इसी का परिणाम है ग्रेटर हैदराबाद, जिसमें पड़ोसी गाँव भी शामिल हैं। इनके साथ ही यहां एक मुद्रिका मार्ग, बाहरी मुद्रिका मार्ग, कई सेतु व नीःशुल्क-पथ भी हैं। इस कारण कई बाहरी क्षेत्र अपनी सीमाएं खोते जा रहे हैं, व भू संपदा के भाव ऊंचे उठते जा रहे हैं। साथ ही यहां अनेकों गगन चुंबी अट्टालिकाएं उठतीं जा रहीं हैं।

आवागमन[संपादित करें]

एम एम टी एस नैकलेस रोड मैट्रो स्टेशन

सड़क[संपादित करें]

हैदराबाद शेष भारत से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। मुख्य राजमार्ग हैं:- एन एच 7, एन ए 9 एवं एन एच 202 (आंध्र प्रदॆश सड़क राज्य परिवन निगम) आदि।[13] 1932 में निज़ाम राज्य रेल-सड़क यातायात प्रभाग की इकाई के रूप में स्थापित हुआ था, जिसमें आरंभिक 27 बसें थीं, जो अब बढ़कर 19,000 का आंकड़ा पार कर चुकी है। यहां एशिया का तीसरा सबसे बड़ा बसों का बेड़ा है। इसमें 72 बस प्लेटफॉर्म हैं, जहां इतनी ही बसें एक ही समय में यात्रियों को चढ़ा सकतीं हैं। इसका आधिकारिक नाम है महत्मा गाँधी बस स्टेशन, जिसे स्थानीय लोग इमलीवन बस स्टेशन कहते हैं। राज्य परिवहन निगम पॉइंट से पॉइंट बस सेवा प्रदान करता है, जो सभी मुख्य नगरों को जोड़ती है। शहर में निगम की 4000 से अधिक बसें दौड़तीं हैं।[14] पीले रंग का ऑटोरिक्शा, जिसे ऑटो कहा जाता है, अधिकतर प्रयुक्त टैसी सेवा है। हाल ही में कार व मोटरसाइकिल टैसी सेवाएं भी आरंभ हुईं हैं।

रेल सेवा[संपादित करें]

हैदराबाद मेट्रो सार्वजनिक परिवहन के लोकप्रिय तरीके के रूप में उभरा है

यहां लाइट रेल यातायात प्रणाली है, जिसे मल्टी मॉडल टआंस्पोर्ट सिस्टम (एम एम टी एस) कहते हैं। यह रेल व सड़क यातायात को जोड़ता है। दक्षिण मध्य रेलवे का मुख्यालय सिकंदराबाद में स्थित है। तीन मुख्य रेलवे स्टेशन हैं:- सिकंदराबाद जंक्शन, हैदराबाद डेकन रेलवे स्टेशन (या नामपल्ली) और काचिगुडा रेलवे स्टेशन। नवंबर 2017 के बाद से हैदराबाद मेट्रो, एक नई तेजी से पारगमन प्रणाली शुरू हुई।

2012 तक, शहर में 3.5 मिलियन से अधिक वाहन चल रहे हैं, जिनमें से 74% दोपहिया वाहन, 15% कारें और 3% तीन-पहिया हैं। शेष 8% में बसों, माल वाहन और टैक्सी शामिल हैं। अपेक्षाकृत कम सड़क कवरेज के साथ वाहनों की बड़ी संख्या-सड़कों पर कुल शहर क्षेत्र का केवल 9 .5% हिस्सा है : 79-ने व्यापक यातायात की भीड़ का नेतृत्व किया है, खासकर जब से 80% यात्रियों और 60% माल ढुलाई जाती है सड़क से। : 3 इनर रिंग रोड, बाहरी रिंग रोड, हैदराबाद एलिवेटेड एक्सप्रेसवे, भारत का सबसे लंबा फ्लाईओवर, और विभिन्न इंटरचेंज, ओवरपास और अंडरपास को भीड़ को कम करने के लिए बनाया गया था। शहर के भीतर अधिकतम गति सीमा दोपहिया वाहनों और कारों के लिए 50 किमी / घंटा (31 मील प्रति घंटे), ऑटो रिक्शा के लिए 35 किमी / घंटा (22 मील प्रति घंटे) और हल्के वाणिज्यिक वाहनों और बसों के लिए 40 किमी / घंटा (25 मील प्रति घंटे) है।

वायु सेवा[संपादित करें]

पहले बेगमपेट हवाई अड्डा अन्तर्देशीय व अन्तर्राजीय विमान सेवा देता था। एक नया विमानक्षेत्र राजीव गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा शम्साबाद में बन चुका है। पहले सभी बड़े शहरों की भांति यहां वयु यातायात संकुलन समस्या होती थी, परंतु नया हवाई अड्डा बन जाने से वह दूर हो चुकी है। यहां ट्रैफिक संकुलन की समस्या सड़कों पर बहुत दिखायी देती है। यह ऑटो, कार, इत्यादि की अत्यधिक संख्या के कारण होती है। इससे निबटाने के लिये अनेकों सेतु, फ्लाईओवर निर्माण हुए, परंतु यह वैसी की वैसी बनी हुई है। आंध्र प्रदेश सरकार ने इससे निबटने के लिये दिल्लीकोलकाता की भांति ही यहां भी मैट्रो ट्रेन शुरु करने की मंजूरी दे दी है।[15] इसके पूर्ण हो जाने पर आशा है, कि यह समस्या काफी हद तक सुलझ जाये गी।

जनसांख्यकी[संपादित करें]

Buildings along the lake shoreline
हुसैन सागर झील के किनारे बसे हैदराबाद का व्यापक दृश्य
Hyderabad population 
गणना वर्षजनसंख्या
195110,85,722
196111,18,5533.0%
197117,96,00060.6%
198125,46,00041.8%
199130,59,26220.2%
200136,37,48318.9%
201168,09,97087.2%
Sources:[16][17][18]

जब जीएचएमसी 2007 में बनाया गया था, तो नगरपालिका के कब्जे वाला क्षेत्र 175 किमी 2 (68 वर्ग मील) से बढ़कर 650 किमी 2 (250 वर्ग मील) हो गया था। नतीजतन, जनसंख्या में 87% की वृद्धि हुई, 2001 की जनगणना में 3,637,483 से, 2011 की जनगणना में 6,809,970 तक, जिनमें से 24% भारत में कहीं और से प्रवासी हैं, : 2 हैदराबाद देश का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। 2011 तक, जनसंख्या घनत्व 18,480 / km2 (47,900 / वर्ग मील) है। [106] उसी 2011 की जनगणना में, हैदराबाद अर्बन एग्रीग्लोमेशन की आबादी 9,700,000 थी, जो इसे देश का छठा सबसे अधिक आबादी वाला शहरी समूह बना रहा था।[19]

2006 में नगर की जनसंख्या 36 लाख आकलित की गयी थी जबकि बृहत्तर महानगरीय क्षेत्र की जनसंख्या 61 लाख से अधिक आकलित की गयी है। धार्मिक तथा सांस्कृतिक रूप से यह शहर हिन्दू, मुस्लिमईसाइयों से जुड़ा हुआ है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं- तेलुगु, हिन्दी, उर्दू व दक्कनी। यहाँ जनजातीय मूल के लोगों की भी खासी जनसंख्या है, जो कि काम की तलाश में यहाँ आव्रजित हुए हैं। यहाँ बनजारे भी मिलते हैं, जो अपनी एक भिन्न संस्कृति व भाषा वाले हैं। उनकी भाषा को Gorboli कहा जाता है, जो यूरोप में रोमा लोगों द्वारा बोली जाने वाली रोमा भाषा से निकट संबंध रखती है। तेलुगु, हिन्दी व दक्कनी मूल जनसंख्या की स्थानीय भाषाएँ हैं। व्यापार में पर्याप्त मात्रा में अंग्रेज़ी भी बोली जाती है। भारत के विभिन्न भागों के लोगों ने हैदराबाद को अपना गृहनगर बनाया है।

भाषा और धर्म[संपादित करें]

ग्रेटर हैदराबाद में धर्म (2011)
हिंदू
  
64.93%
मुसलमान
  
30.13%
ईसाई
  
2.75%
अन्य
  
2.19%

"हैदराबादी" के रूप में संदर्भित, हैदराबाद के निवासी मुख्य रूप से तेलुगु और उर्दू बोलने वाले लोग हैं, जिनमें अल्पसंख्यक बंगाली, गुजराती (मेमन सहित), कन्नड़ (नावाथी सहित), मलयालम, मराठी, मारवाड़ी, ओडिया, पंजाबी, सिंधी, तमिल और उत्तर हैं। परदेशी समुदाय। हैदराबाद उर्दू की एक अनूठी बोली का घर है, जिसे हैदराबादी उर्दू कहा जाता है, जो एक प्रकार की दखिनी है, और अधिकांश हैदराबादी मुसलमानों की मातृभाषा है, एक अद्वितीय समुदाय, जो हैदराबाद के इतिहास, भाषा, व्यंजन और संस्कृति का बहुत अधिक सम्मान करता है, और विभिन्न राजवंश जिन्होंने पहले शासन किया था।

हिंदू बहुसंख्यक हैं। मुसलमान बहुत बड़े अल्पसंख्यक हैं, और पूरे शहर में मौजूद हैं और पुराने शहर में और उसके आसपास हैं। यहां ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय और प्रतिष्ठित मंदिर, मस्जिद और चर्च भी देखे जा सकते हैं।[20] भारत की जनगणना २०११ के अनुसार, ग्रेटर हैदराबाद का धार्मिक मेकअप था: हिंदू (64.9%), मुस्लिम (30.1%), ईसाई (2.8%), जैन (0.3%), सिख (0.3%) और बौद्ध (0.1%) ); 1.5% किसी भी धर्म का वर्णन नहीं करता है।[21]

संस्कृति[संपादित करें]

हैदराबाद अनेक विभिन्न संस्कृतियों व परंपराओं का मिलन-स्थल है। ऐतिहासिक रूप से यह वह शहर रहा है, जहाँ उत्तर व दक्षिण भारत की भिन्न सांस्कृतिक व भाषिक परंपराएँ मिश्रित होती हैं। अतः यह दक्षिण का द्वार या उत्तर का द्वार कहा जाता है। यहाँ दक्षिण भारतीय संस्कृति के बीच हैदराबाद की मुस्लिम संस्कृति भी अंतर्विष्ट है।

यह एक अनुपम विश्वबन्धु नगर (कॉस्मोपॉलिटन) है, जहाँ ईसाइयत, हिन्दू धर्म, इस्लाम, जैनधर्म व जरथुष्ट्र धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। हैदराबादियों ने अपनी खुद की एक भिन्न संस्कृति विकसित कर ली है, जिसमें प्राचीन तेलुगु लोगों की हिन्दू परंपराओं तथा सदियों पुरानी इस्लामी परंपराओं का मिश्रण है। तेलुगु, उर्दू व हिन्दी यहाँ की प्रमुख भाषाएँ हैं (यद्यपि बाद की दो अपने मानक स्वरूप में नहीं पायी जातीं और दक्कनी बोली की ओर अग्रसर रहती हैं)। यहाँ बोली जाने वाली तेलुगु भाषा में अनेक उर्दू शब्द भी मिल सकते हैं। तथा यहाँ बोली जाने वाली उर्दू भी मराठी व तेलुगु से प्रभावित है, जिससे एक बोली बनी है जिसे हैदराबादी उर्दू या दक्कनी कहा जाता है। यहाँ का प्रसिद्ध उस्मानिया विश्वविद्यालय भारत का पहला उर्दू माध्यम विश्वविद्यालय है। यहाँ की एक बड़ी जनसंख्या अंग्रेजी बोलने में भी कुशल है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

हैदराबाद की लगभग सभी संस्कृतियों की महिलाएँ या तो परंपरागत भारतीय परिधान साड़ी पहनती हैं, या सलवार कमीज़ (विशेषकर युवतर जनसंख्या)। मुस्लिम महिलाओं का एक बड़ा भाग बुरका या हिजाब पहनता है। पुरुष प्रायः आज का सुविधा का परिधान पैंट-शर्ट पहनते हैं, परंतु लुंगी व शर्ट, धोती कुर्ता (दोनों हिन्दू) तथा कुर्ता पाजामा (प्रायः मुस्लिम) भी बहुत पहना जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

प्रमुख व्यंजन[संपादित करें]

अपने लजीज मुगलई भोजन के साथ-साथ हैदराबाद निजामी तहजीब के कारण भी दुनिया भर में मशहूर है। स्वादप्रेमियों के लिए तो हैदराबाद जन्नत के समान है। यहाँ की लजीज बिरयानी और पाया की खूशबू दूर-दूर से पर्यटकों को हैदराबाद खींच लाती है। इस पर हैदराबाद के नवाबी आदर-सत्कार व खान-पान को देखकर आपको भी लगेगा कि वाकई में आप किसी निजाम के शहर में आ गए हैं। हैदराबादी व्यंजन में परंपरागत आंध्र और तेलंगाना व्यंजन पर व्यापक इस्लामी प्रभाव है। हैदराबादी व्यंजनों के यहां कई रेस्त्रां हैं। शहर के सभी होटलों में एक या इससे ज्यादा रेस्त्रां हैं जो लोकप्रिय है। बावर्ची, पाराडाइड, हैदराबाद हाउस हैदराबादी व्यंजनों को उपलब्ध कराने वाले कुछ मशहूर रेस्त्रां हैं।

हैदराबाद का सबसे प्रमुख व्यंजन हैदराबादी बिरयानी है। अन्य व्यंजनों में ख़ुबानी का मीठा, फेनी, पाया नाहरी और हलीम (रमजान के महीने का प्रमुख मांसाहारी व्यंजन)।

भारतीय मिठाई की दुकानें घी की मिठाइयों के लिए मशहूर हैं। पुल्ला रेड्डी मिठाइयां शुद्ध घी की मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है। नामपल्ली का कराची बेकरी फल बिस्कुटों, ओस्मानिया बिस्कुट और दिलखुश के लिए मशहूर हैं। पुराने शहर के अजीज बाग पैलेस में रहने वाला परिवार बादाम की जैली बनाता है।

शिक्षा और शोधकार्य[संपादित करें]

आरंभ में हैदराबाद में मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध दो महाविद्यालय थे। लेकिन 1918 में निज़ाम ने उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना की और अब यह भारत के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक है। हैदराबाद विश्वविद्यालयों की स्थापना 1974 में हुई। एक कृषि विश्वविद्यालय और कई ग़ैर सरकारी संस्थान, जैसे अमेरिकन स्टडीज़ रिसर्च सेंटर और जर्मन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ओरिएंटल रिसर्च भी हैं।

हैदराबाद में सार्वजनिक व निजी सांस्कृतिक संगठन बड़ी संख्या में हैं, जैसे राज्य द्वारा सहायता प्राप्त नाट्य, साहित्य व ललित कला अकादमियाँ। सार्वजनिक सभागृह रबींद्र भारती नृत्य व संगीत महोत्सवों के लिए मंच प्रदान करता है और सालार जंग संग्रहालय में दुर्लभ वस्तुओं का संगृह है, जिनमें संगेयशब, आभूषण, चित्र और फ़र्नीचर शामिल हैं।

क्षेत्रीय केन्द्र[संपादित करें]

हैदराबाद क्षेत्रीय केन्द्र की स्थापना जनवरी, 1987 में की गई थी। दो उत्तरी तटीय ज़िले श्रीकाकुलम और विजयनगरम को छोड़कर यह क्षेत्रीय केन्द्र पूरे आंध्र प्रदेश को समाहित करता है। इस क्षेत्रीय केन्द्र का औपचारिक उद्घाटन इग्नू के संस्थापक वी. सी प्रोफ़ेसर जी. रामा रेड्डी द्वारा 2 फ़रवरी 1987 को किया गया था। कुछ ही वर्षों में इसने 60 अध्ययन केन्द्रों की स्थापना की और 120 से ज़्यादा कार्यक्रम अध्ययन केन्द्रों में उपलब्ध कराने लगा।

हिन्दी संस्थान[संपादित करें]

हैदराबाद केंद्र की स्थापना वर्ष 1976 में हुई। शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत यह केंद्र स्कूलों/कॉलेजों एवं स्वैच्छिक हिन्दी संस्थाओं के हिन्दी अध्यापकों के लिए 1 से 4 सप्ताह के लघु अवधीय नवीकरण कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिसमें हिन्दी अध्यापकों को हिन्दी के वर्तमान परिवेश के अंतर्गत भाषाशिक्षण की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान कराया जाता है। वर्तमान में हैदराबाद केंद्र का कार्यक्षेत्र आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र एवं केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी एवं अण्डमान निकोबार द्वीप समूह हैं। हैदराबाद केंद्र पर हिन्दी शिक्षण पारंगत पाठ्यक्रम भी संचालित किया जाता है।

मीडिया[संपादित करें]

हैदराबाद ऑप्टिकल फाइबर केबल के एक बड़े नेटवर्क द्वारा कवर किया जाता है। शहर के टेलीफोन प्रणाली चार लैंडलाइन कंपनियों द्वारा सेवित है, यथा: बीएसएनएल, टाटा इंडिकॉम, रिलायंस और एयरटेल। कई कंपनियों के द्वारा ब्रॉडबैंड इंटरनेट का उपयोग प्रदान किया जाता है। शहर में प्रसारित एफएम रेडियो चैनल क्रमश: रेडियो मिर्ची, आकाशवाणी इंद्रधनुष एफएम, विविध भारती, आकाशवाणी, रेडियो सिटी, बिग एफएम, एस एफएम और एयर ज्ञानवाणी एफएम आदि है। राज्य के स्वामित्व वाली दूरदर्शन दो स्थलीय टेलीविजन चैनलों और हैदराबाद से एक उपग्रह टेलीविजन चैनल प्रसारित करता है। साथ ही सन नेटवर्क के मिथुन, तेजा के अलावा मां टीवी, ईटीवी उर्दू, ईटीवी (भारत) सहित हैदराबाद से प्रसारित कई कई अन्य निजी क्षेत्रीय टेलीविजन चैनलों में प्रमुख है राज नेटवर्क का वीसा, ज़ी टीवी का ज़ी तेलुगु, सन नेटवर्क का मिथुन संगीत, मिथुन समाचार चैनल, टी वी 5, आप तक आदि है।

हैदराबाद से अंग्रेजी, तेलुगू और उर्दू भाषाओं में कई अखबारों और पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है। तेलुगु दैनिक समाचार पत्रों में प्रमुख है एनाडु, वार्ता, आंध्र ज्योति, प्रजाशक्ति, आंध्र भूमि और आंध्र प्रभा। यहाँ से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों में प्रमुख हैं डेक्कन क्रॉनिकल, बिजनेस स्टैंडर्ड, हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडियन एक्सप्रेस आदि। जबकि यहाँ से प्रकाशित प्रमुख उर्दू दैनिक समाचार पत्रों में सियासत दैनिक, मुंसिफ दैनिक, एत्तेमाद उर्दू दैनिक, रहनुमाई, डेक्कन और दैनिक मिलाप आदि। इन प्रमुख समाचार पत्रों के अलावा, वहाँ से कई प्रमुख पत्रिकाएँ प्रकाशित होती है, जिसमें प्रमुख है- चंदामामा, वनिता, विपुला, चतुरा, नव्या, आंध्र प्रभा, आंध्र ज्योति, स्वाति आदि तथा फिल्मी पत्रिकाओं में ज्योति चित्रा संतोषम, सुपरहिट, चित्रांजलि, सितारा आदि शामिल हैं।

हैदराबाद तेलुगू फिल्म उद्योग की मातृभूमि है। सरधी स्टूडियो, अन्नपूर्णा स्टूडियो, रामानायिडु स्टूडियो, रामकृष्ण स्टूडियो, पदमालया स्टूडियो, रामोजी फिल्म सिटी इस शहर का उल्लेखनीय फिल्म स्टूडियो हैं।

सिनेमा[संपादित करें]

हैदराबाद भारत के दूसरे सबसे बड़े चलचित्र उद्योग का गृह भी है:- तेलुगु सिनेमा। यहां प्रतिवर्ष सैंकडों फिल्में बनायीं जातीं हैं।

खेलकूद[संपादित करें]

इन्डोर स्टेडियम

हैदराबाद में अन्य खेलों की तुलना में क्रिकेट सर्वाधिक लोकप्रिय खेल हैं। क्रिकेट के साथ-साथ हॉकी की भी लोकप्रियता यहाँ कम नहीं है। 2005 में प्रीमियर हॉकी लीग में हैदराबाद सुल्तान्स विजयी हुये थे। हैदराबाद को हाल ही में एक नया क्रिकेट स्टेडियम विशाखा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम मिला है, जिसका नाम परिवर्तित करके राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम रखा गया है। इन्डोर खेलों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यहाँ एक इन्डोर स्टेडियम भी बनाया गया है। वर्ष 2002 में 'राष्ट्रीय खेल' के मेजबान के रूप में इस शहर का चयन किया गया था और देश में विश्व स्तरीय स्टेडियम हेतु पहल की गई थी। बाद में इस स्टेडियम को 2003 में आयोजित एफ्रो एशियाई खेलों की मेजबानी का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय मानक के कई बड़े और विविध स्टेडियम हैं। इंडियन प्रीमियर लीग में शहर की टीम हैं सनराइजर्स हैदराबाद

हैदराबाद के प्रसिद्ध खिलाड़ी[संपादित करें]

2012 में बैटिंग करती हुई मिताली राज
टेनिस स्टार सानिया मिर्जा
  1. अब्बास अली बेग , पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  2. सी. के. नायडू, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  3. आबिद अली, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  4. अबू तय्यब यह्या मोहम्मद, जूनियर टेबल टेनिस खिलाड़ी
  5. अरशद अय्यूब, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  6. गगन नारंग, विश्व स्तर के निशानेबाज
  7. ग़ुलाम अहमद , पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान
  8. मीर कासिम अली , पूर्व भारतीय टेबल टेनिस चैंपियन
  9. मिताली राज, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी
  10. मोहम्मद अजहरुद्दीन, पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान
  11. नंदानूरी मुकेश कुमार, ओलंपियन और पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी
  12. पुलेला गोपीचंद, बैडमिंटन खिलाड़ी
  13. पी॰ कृष्णा मूर्ति, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  14. साइना नेहवाल, बैडमिंटन खिलाड़ी
  15. सानिया मिर्ज़ा, टेनिस खिलाड़ी
  16. शिव लाल यादव, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी और क्रिकेट टीम के चयनकर्ता
  17. सैयद मोहम्मद हादी, ओलंपिक टेनिस खिलाड़ी
  18. वी वी एस लक्ष्मण, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  19. वेंकटपति राजू, पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
  20. कोनेरु हम्पी, अंतर्राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी

स्टेडियम[संपादित करें]

हैदराबाद शहर में बनाया गया प्रारंभिक स्टेडियम लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम है, जो पूर्व में फतेह मैदान के रूप में जाना जाता था और यह हाल तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का संचालन करता रहा है। इस मैदान पर पहला क्रिकेट मैच 19 नवम्बर 1955 को खेला गया था। उप्पल में राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के साथ अब इस मैदान पर क्रिकेट मैच आयोजित किए जाने की संभावना नहीं है।

आकर्षण[संपादित करें]

चार मीनार हैदराबाद के सबसे प्रमुख एवं लोकप्रिय आकर्षणों में से है
एन टी आर बाग
  • चार मीनार – नगर का मुख्य चिन्ह, जिसमें चार भव्य मीनारें हैं।[22] शहर के बीचोंबीच बनी इस भव्य इमारत का निर्माण कुली कुतुब शाही नवाब ने कराया था। यह कहा जाता है कि हैदराबाद में प्लेग जैसी भयानक महामारी पर विजय पाने की खुशी में नवाब ने चारमीनार का निर्माण कराया था। चारमीनार से लगा हुआ ही एक प्रसिद्ध चूड़ी बाजार है, जहाँ आपको अनगिनत वैरायटियों की सुंदर चूडि़याँ देखने को मिल जाएगी।
  • फलकनुमा पैलेस – नवाब विकार-अल-उमरा द्वारा बनवाया हुआ, स्थापत्यकला का अनोख उदाहरण।
  • गोलकुंडा किला – शहर के किनारे स्थित, गोलकुंडा का किला, भारत के प्रसिद्ध व भव्य किलों में से एक है।
  • चौमोहल्ला पैलेस- यह आसफ जाही वंश का स्थान था, जहां निज़ाम अपने शाही आगन्तुकों का सत्कार किया करते थे। 1750 में निज़ाम सलाबत जंग ने इसे बनवाया था, जो इस्फहान शहर के शाह महल की तर्ज़ पर बना है। यहां एक महलों का समूह है, जो दरबार हॉल के रूप में प्रयुक्त होते थे।
  • सलारजंग संग्रहालय – यह पुरातन वस्तुओं का एक व्यक्ति संग्रह वाला सबसे बड़ा संग्रहालय है। कई शताब्दियों के संग्रह यहां मिलते हैं।
  • मक्का मस्जिद – यह पत्थर की बनी है, व चारमीनार के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह अपने आकार, स्थापत्य एवं निर्माण में अद्वितीय है।
  • बिडला मंदिर (हैदराबाद, तेलंगाना) – यह हिन्दू मंदिर, नगर में एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है, जहां से नगर का नज़ारा दिखाई देता है, व पूरे नगर से यह दिखाई देता है। यह श्वेत संगमर्मर का बना है।
  • बिडला तारामंडल – नगर के बीच में नौबत पहाड पर स्थित, तारामंडल खगोल विज्ञान को नगर का नमन है।
  • चिलकुर बालाजी – श्री वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित यह मंदिर मेहंदीपटनम से 23 कि॰मी॰ दूर है। इसे वीसा-बालाजी भी कहते हैं, क्योंकि लोगों की यह मान्यता है, कि अमरीकी वीज़ा का इंटरव्यू इनकी कृपा से सकारात्मक परिणाम देता है।
  • नेहरू प्राणी संग्रहालय- हैदराबाद के इस प्राणी संग्रहालय की विशेषता है इसकी लॉयन सफारी तथा सफेद शेर, इसके अलावा यहाँ आपको अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया के भी कई वन्य प्राणी देखने को मिल जाएँगे। कई एकड़ में फैले इस प्राणी संग्रहालय में आप अपने वाहन से भी घूम सकते हैं।
  • हैदराबाद की बुद्ध प्रतिमा – यह हुसैन सागर नामक कृत्रिम झील हैदराबाद को सिकंदराबाद से अलग करती है। इसके अंदर, बीच में गौतम बुद्ध की एक 18 मी. ऊंची प्रतिमा स्थापित है। इस द्वीप पर जिस पत्थर पर यह बनी है, उसे स्थानीय लोग जिब्राल्टर का पत्थर कहते हैं।
  • लाड बाजार - यहाँ चूड़ी बाज़ार है, जो चार मीनार के पश्चिम में है।
  • कमल सरोवर - जुबली हिल्स पर स्थित, तालाब के चारों ओर बना एक सुंदर बगीचा है, जिसे एक इतालवी अभिकल्पक द्वारा बनाया हुआ बताया जाता है। यह वर्तमान में हैदराबाद नगरपालिक निगम द्वारा अनुरक्षित है। यह कुछ दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों का घर भी है।
  • पुरानी हवेली - निज़ाम का आधिकारिक निवास।
  • क़ुतुब शाही मक़बरे - कुतुबशाही वंश के शासकों के मकबरे यहैँ स्थित हैं, यह गोलकोंडा किले के निकट शाइकपेट में है।
  • पैगाह मक़बरे - पैगाह मकबरा का संबंध पैगाह के शाही परिवार से है, जिसे शम्स उल उमराही परिवार के नाम से भी जाना जाता है। हैदराबाद के उपनगर पीसाल बंदा में स्थित इस मकबरे को मकबरा शम्स उल उमरा के नाम से भी जाना जाता है। इस मकबरे के निर्माण का काम 1787 में नवाब तेगजंग बहादुर ने शुरू करवाया था और फिर बाद में इसके निर्माण कार्य में उनके बेटे आमिर ए कबीर प्रथम ने हाथ बंटाया।
  • संघी मंदिर - भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित एक मंदिर है।
  • स्नो वर्ल्ड - यह एक मनोरंजन पार्क है, जो कि इस उष्णकटिबंधीय शहर में लोगों बहुत कम तापमान व हिम का अनुभव देता है।
  • वर्गल सरस्वती देवी मंदिर - यह हैदराबाद से 50 किलोमीटर दूरी पर मेडचल महामार्ग पर स्थित मंदिर है। यह एक बड़ी शिला पर स्थित है। इस मार्ग पर आरटीसी बसें उपलब्ध हैं।
  • माधापुर - हैदराबाद के अनेक सूचना-प्रौद्योगिकी तथा सूचना-प्रौद्योगिकी-समर्थीकृत-सेवाओं संबधित कार्यालयों का स्थान।
  • रामोजी फिल्म सिटी संसार का सबसे बड़ा समाकलित फ़िल्म स्टूडियो सम्मिश्र है जो लगभग 2000 एकड़ में फैला है। यह एशिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन एवं मनोरंजन केंद्रों में से एक है। 1996 में उद्घाटित। यह हैदराबाद से 25 किलोमीटर दूर विजयनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-9) पर स्थित है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

a tower along the market
अन्य ऐतिहासिक संरचनाओं और बाज़ारों के साथ चारमीनार का शाम का नज़ारा।

सन्दर्भ[संपादित करें]

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  2. "On Business in Hyderabad? Where to Eat, Drink, and Extend Your Stay".
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  8. "कैसे बना हैदराबाद भारत का हिस्सा!".
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बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]