जबलपुर

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{{Infobox Indian Jurisdiction |

| नगर का नाम   = जबलपुर
| प्रकार       = नगर
| latd = 23.15
| longd=79.97
| प्रदेश      = मध्य प्रदेश
| जिला      = जबलपुर जिला
| शासक पद = महापौर
| शासक का नाम = [[वर्तमान में कोई नही प्रशासक का शासन

][कृपया उद्धरण जोड़ें]

| शासक पद 2 = नगर पालिका अध्यक्ष
| शासक का नाम 2 = सुमित्रा बाल्मीकी[कृपया उद्धरण जोड़ें]
| ऊँचाई      = 
| जनगणना का वर्ष = 
| जनगणना स्तर  = 
| जनसंख्या   = 1,444,667
| घनत्व    = 3390
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| पिनकोड    = 482 xxx
| वाहन रेजिस्ट्रेशन कोड = MP-20
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| वेबसाइट = http://www.jabalpur.nic.in
| प्रमुख समाचार पत्र = पलपल इंडिया डॉट कॉम, पत्रिका, जबलपुर एक्सप्रेस, दैनिक भास्कर, नव भारत, हिंदी एक्सप्रेस, यश भारत, राज एक्सप्रेस, जय लोक, जनपक्ष, सी टाइमेस, त्रिपुरी टाइम्स,  
| skyline = Jabalpur udit.jpg
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| टिप्पणियाँ   = |

}}. शंकर साह की धरती,

जबलपुर भारत के [मध्यप्रदेश राज्य का एक शहर है।

यहाँ पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तथा राज्य न्यायिक अकादमी जहाँ मध्यप्रदेश राज्य के समस्त न्यायधीशों की ट्रेनिंग होती है। 
तथा राज्य विज्ञान संस्थान है। 

इसे मध्यप्रदेश की 'संस्कारधानी' तथा जबलपुर को मध्यप्रदेश की न्यायिक राजधानी भी कहा जाता है।

थलसेना की छावनी के अलावा यहाँ भारतीय आयुध निर्माणियों के कारखाने तथा पश्चिम-मध्य रेलवे का मुख्यालय भी है।

सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए गौतम आईएएस अकैडमी प्रथम नंबर पर है

इतिहास[संपादित करें]

जबलपुर के इतिहास को हम दो भागों में विभक्त करते हैं

प्रथम भाग जबलपुर का प्राचीन इतिहास

द्वितीय भाग जबलपुर का आधुनिक इतिहास मध्य काल से अब तक

जबलपुर का प्राचीन इतिहास

पुराणों और किंवदंतियों के अनुसार इस शहर का नाम पहले जबालिपुरम् था, क्योंकि इसका सम्बंध महर्षि जबालि से जोड़ा जाता है। जिनके बारे में कहा जाता है कि वह यहीं निवास करते थे। जबलपुर का संबंध महाभारत काल में मिलता है। यह नगर 16 महाजनपदों के आदि स्वरूप से संबंधित है। महर्षि भ्रुगू का इस क्षेत्र में तपोस्थली को भेड़ाघाट का नाम दिया है ।

जबलपुर का आधुनिक इतिहास मध्य काल से अब तक

महाजनपद काल में त्रिपुरी राज्य की मौजूदगी जबलपुर नगर के पास स्थित तेवर नामक स्थान पर है। साथ ही त्रिपुर सुंदरी मंदिर 64 योगिनी जैसे स्थापत्य इस क्षेत्र की विशेषताएं हैं।

1781 के बाद ही मराठों के मुख्यालय के रूप में चुने जाने पर इस नगर की सत्ता बढ़ी, बाद में यह सागर और नर्मदा क्षेत्रों के ब्रिटिश कमीशन का मुख्यालय बन गया। यहाँ 1864 में नगरपालिका का गठन हुआ था।

एक पहाड़ी पर मदन महल का किला स्थित है, जो लगभग 1100 ई. में राजा मदन सिंह द्वारा बनवाया गया एक पुराना गोंड किला है जिसका निर्माण सामरिक उद्देश्य से किया गया था. इसमें आवासीय व्यवस्था नहीं थी । इसके ठीक पश्चिम में गढ़ है, जो 14वीं शताब्दी के चार स्वतंत्र गोंड राज्यों का प्रमुख नगर था। भेड़ाघाट, ग्वारीघाट और जबलपुर से प्राप्त जीवाश्मों से संकेत मिलता है कि यह प्रागैतिहासिक काल के पुरापाषाण युग के मनुष्य का निवास स्थान था। मदन महल, नगर में स्थित कई ताल और गोंड राजाओं द्वारा बनवाए गए कई मंदिर इस स्थान की प्राचीन महिमा की जानकारी देते हैं। इस क्षेत्र में कई बौद्ध, हिन्दू और जैन भग्नावशेष भी हैं। कहते है कि जबलपुर में स्थ‍ित ५२ प्राचीन ताल तलेैयों ने यहाँ की पहचान को बढाया, इनमें से अब कुछ ही तालाब शेष बचे हैं परन्तु उन प्राचीन ताल तलैयों के नाम अभी तक प्रचलित हैं। जिनमें से कुछ निम्न हैं; अधारताल, रानीताल, चेरीताल, हनुमानताल, फूटाताल, मढाताल, हाथीताल, सूपाताल, देवताल, कोलाताल, बघाताल, ठाकुरताल, गुलौआ ताल, माढोताल, मठाताल, सुआताल, खम्बताल, गोकलपुर तालाब, शाहीतालाब, महानद्दा तालाब, उखरी तालाब, कदम तलैया, भानतलैया, श्रीनाथ की तलैया, तिलकभूमि तलैया, बैनीसिंह की तलैया, तीनतलैया, लोको तलैया, ककरैया तलैया, जूडीतलैया, गंगासागर, संग्रामसागर। जबलपुर भेड़ाघाट मार्ग पर स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर, हथियागढ़ संस्कृत के कवि राजशेखर से सम्बंधित है ।

जबलपुर में जगहें - धुआंधार फ़ॉल्स ,जबलपुर हार्ट ,हनुमानताल एवं मदन महल।

भौगोलिक स्थिति[संपादित करें]

विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित यह नगर पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। जबलपुर भारत के प्रमुख शहरों दिल्ली हैदराबाद अहमदाबाद पुणे कोलकाता तथा मुंबई से हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

जनसंख्या[संपादित करें]

2011 की जनगणना के अनुसार जबलपुर नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या 14,44,667 है, जबलपुर छावनी क्षेत्र की जनसंख्या 102,482 और जबलपुर ज़िले की कुल जनसंख्या 24,63,289 है।

उद्योग और व्यापार[संपादित करें]

यह नगर सामरिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है, यहाँ तोपगाड़ी बनाने का केंद्रीय कारख़ाना शस्त्र निर्माण कारख़ाना और एक शस्त्रागार स्थित है। यहाँ के प्रमुख उद्योगों में खाद्य प्रसंस्करण, आरा मिल और विभिन्न निर्माण शामिल हैं। रेडीमेड वस्त्र उत्पादन जबलपुर रेडीमेड वस्त्र उद्योग - सलवार-सूट , शर्ट, का प्रमुख उत्पादक केंद्र बन गया है।

कृषि तथा खनिज[संपादित करें]

इसके आसपास के क्षेत्रों में नर्मदा नदी घाटी के पश्चिमी छोर पर स्थित एक अत्यधिक उपजाऊ, गेहूँ की खेती वाला इलाक़ा हवेली शामिल है। चावल, ज्वार चना और तिलहन आसपास के क्षेत्रों की अन्य महत्त्वपूर्ण फ़सलें हैं। यहाँ लौह अयस्क, चूना-पत्थर बॉक्साइट, चिकनी मिट्टी, अग्निसह मिट्टी, शैलखड़ी, फ़ेल्सपार, मैंगनीज और गेरू का व्यापक पैमाने पर खनन होता है।

शिक्षा[संपादित करें]

इस शहर के विश्वविद्यालय निम्न हैं-

  • शासकीय महाकोशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय स्वशासी
  • जबलपुर कृषि महाविद्यालय
चिकित्सा महाविद्यालय
आभियांत्रिकी महाविद्यालय
जबलपुर अभियांत्रिकी महाविद्यालय
  • जबलपुर अभियांत्रिकी महाविद्यालय
  • तक्षशिला इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
  • लक्ष्मी नारायण प्रौद्योगिकी महाविद्यालय
  • पी.डी.पी.एम. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, अभिकल्पन एवं विनिर्माण संस्थान
  • हितकारिणी प्रौद्योगिकी व अभियांत्रिकी महाविद्यालय
  • श्री राम प्रौद्योगिकी संस्थान - [एसआरआईटी]
संगीत कला
  • भातखंडे संगीत कला महाविद्यालय
  • संभागीय बालभवन
  • शासकीय ललित कला महाविद्यालय

प्रसिद्ध स्थल[संपादित करें]

भेड़ाघाट
हनुमान ताल बड़ा जैन मन्दिर
मदन महल


मंदिर[संपादित करें]

  • त्रिपुर सुन्दरी मन्दिर
  • बाजना मठ: बाजना मठ, रेलवे स्टेशन से करीब ८ कि॰मी॰ की दूरी पर मेडीकल कालेज से, तिलवारा घाट रोड पर स्तिथ है, इस मन्दिर में "श्री बाबा बटुक भैरवनाथ जी"* विराजमान हैं। प्रति शनिवार को इस मन्दिर में भक्तों की इतनी भीड होती है कि मन्दिर के अन्दर उनके द्वारा जलाई गयी अगरबत्तीयों से निकले धुएं के कारण कुछ भी दिखायी नहीं देता। कुछ लोग इस मन्दिर को तान्त्रिक मन्दिर मानते हैं।
  • गुप्तेश्वर मन्दिर
  • पच-मठा
  • रामलला हनुमानजी मंदिर ग्वारीघाट
  • छोटे महावीर मंदिर
  • शनि मंदिर तिलवारा
  • बूढी खेरमाई
  • कचनार सिटी - शिव जी की विशाल मूर्ति

घाट[संपादित करें]

  • भेड़ाघाट
  • तिलवारा घाट
  • जिलहरी घाट
  • ग्वारीघाट
  • उमा घाट
  • खारी घाट
  • लम्हेटा घाट
  • सिध्दघाट
  • दरोगा घाट
  • सरस्वती घाट
  • झांसीघाट
  • गौरैयाघाट
  • घाट पिंडरई
  • भि‍टौली घाट इसे भटौलीघाट नाम से जानते हैं
  • जमतरा घाट
  • नन्द‍िकेश्वर घाट

प्रसिद्ध व्यक्ति[संपादित करें]

जबलपुर के व्यौहार महल की सीढ़ियों पर गांधीजी को चढ़ाने में सहायता करते हुए व्यौहार राजेन्द्र सिंह

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]