पहाड़गढ़

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मुरैना के निकट, पहाडगढ़ से 12 मील की दूरी पर 86 गुफाओं की श्रृंखला देखी जा सकती है। इन गुफाओं को भोपाल की भीमबेटका गुफाओं का समकालीन माना जाता है। सभ्यता के प्रारंभ में लोग इन गुफाओं में आश्रय लेते थे। गुफाओं में पुरूष, महिला, चिड़िया, पशु, शिकार और नृत्य से संबंधित अनेक चित्र देखे जा सकते हैं। यह चित्र बताते हैं कि प्रागैतिहासिक काल में भी मनुष्य की कला चंबल घाटी में जीवंत थी। पहाड़गढ में जन्में ग्वालियर में केंद्र सरकार के कर्मचारी श्री पंकज डिघर्रा जी बताते हैं कि ये "लिखी छाछ" की गुफाएं हैं ये आसन नदी के किनारे बनी हैं जिनका करीब 2000 साल पुराना इतिहास है