मध्य प्रदेश

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मध्य प्रदेश भारत का एक राज्य है, इसकी राजधानी भोपाल है। मध्य प्रदेश १ नवंबर, २००० तक क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य था। इस दिन एवं मध्यप्रदेश के कई नगर उस से हटा कर छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी। मध्य प्रदेश की सीमाऐं पांच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात, तथा उत्तर-पश्चिम में राजस्थान है।


वर्तमान मध्य प्रदेश में शामिल क्षेत्र में प्राचीन अवंती महाजनपद का क्षेत्र शामिल है, जिसकी राजधानी उज्जैन (जिसे अवंतिका भी कहा जाता है) छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भारतीय शहरीकरण की दूसरी लहर के दौरान एक प्रमुख शहर के रूप में उठी। इसके बाद, इस क्षेत्र पर भारत के प्रमुख राजवंशों का शासन था। 18 वीं शताब्दी की शुरुआत में, इस क्षेत्र को कई छोटे राज्यों में विभाजित किया गया था, जिसे ब्रितिट द्वारा कब्जा कर लिया गया था और केंद्रीय प्रांतों और बेरार और केंद्रीय भारत एजेंसी में शामिल किया गया था। भारत की आजादी के बाद, मध्य प्रदेश राज्य को अपनी राजधानी के रूप में नागपुर के साथ बनाया गया था: इस राज्य में आज के मध्य प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों और आज के महाराष्ट्र के पूर्वोत्तर भाग शामिल हैं। 1 9 56 में, इस राज्य को पुनर्गठित किया गया था और इसके भागों को मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल के राज्यों के साथ मिलाकर मध्य प्रदेश राज्य बनाया गया था, मराठी भाषा बोलने वाले विदर्भ क्षेत्र को हटा दिया गया और उसके बाद बंबई राज्य में विलय हुआ। यह राज्य 2000 तक क्षेत्र में सबसे बड़ा था, जब इसके दक्षिणी छत्तीसगढ़ क्षेत्र को एक अलग राज्य बनाया गया था।. हाल के वर्षों में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की विकास दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर हो गया है।

खनिज संसाधनों से समृद्ध, मध्य प्रदेश हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है। अपने क्षेत्र की 30% से अधिक वन क्षेत्र के अधीन है। इसके पर्यटन उद्योग में काफी वृद्धि हुई है। राज्य में वर्ष 2010-11 राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार जीत लिया

इतिहास[संपादित करें]

नर्मदा घाटी में हथोनोरा में पाए गए होमो ईटेन्टस के पृथक अवशेष से संकेत मिलता है कि मध्य प्रदेश शायद मध्य प्लेइस्तोसिन युग में बसे हुए थे। [7] बाद में मेसोलिथिक अवधि के लिए चित्रित मिट्टी के बर्तन भमीबेटका रॉक आश्रयों में पाए गए हैं। [8] राज्य के पश्चिमी भाग में कायाथि कल्चर (2100-1800 ईसा पूर्व) और मालवा संस्कृति (1700-1500 ईसा पूर्व) से संबंधित कोलकोलिथिक साइटें मिली हैं।


600 ईसा पूर्व में भारतीय शहरीकरण की दूसरी लहर के दौरान क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उज्जैन शहर उभर गया। यह अवंती राज्य की राजधानी के रूप में सेवा की। प्राचीन महाकाव्यों में वर्णित अन्य राज्य -,मालवा करुशा, दशरणा और निशाद - को मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों के साथ भी पहचाना गया है


चंद्रगुप्त मौर्य ने उत्तर भारत को 320 ईसा पूर्व के समीप बनाया और मौर्य साम्राज्य की स्थापना की, जिसमें आधुनिक मध्यप्रदेश शामिल था। अशोक ने सबसे बड़ा मौर्य शासकों को दृढ़ नियंत्रण के अधीन क्षेत्र में लाया। मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद, 1 से तीसरे शताब्दी के दौरान शासकों, कुशनास, सातवाहन और कई स्थानीय राजवंशों के बीच इस क्षेत्र का चुनाव हुआ था। । हेलीडोरोरस, शुंग राजा भगवत के अदालत में ग्रीक राजदूत ने विदिशा के निकट हेलियोडोरस स्तंभ खड़ा किया।


उज्जैन पहली सदी बीसीई से पश्चिमी भारत के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र के रूप में उभरा, जो गंगा मैदान और भारत के अरब सागर बंदरगाहों के बीच व्यापार मार्गों पर स्थित है। उत्तरी दक्कन के सातवाहन वंश और वेस्टर्न सतराप के शक राजवंश 1 से 3 शताब्दी के मध्य मध्य प्रदेश के नियंत्रण के लिए लड़े थे।

सतावहाना राजा गौतमपुत्र सातकर्णी ने दूसरी शताब्दी सी में साकरुलरों पर एक कुचल हार का सामना किया और मालवा और गुजरात के हिस्सों पर विजय प्राप्त की। [10]

इसके बाद, क्षेत्र 4 व 5 वीं शताब्दी में गुप्ता साम्राज्य के नियंत्रण में आया और उनके दक्षिणी पड़ोसी, वाकाटक का था। धार जिले के कुक्षी तहसील में बाग कवियों में चट्टानों वाले मंदिर, क्षेत्र में गुप्त राजवंश की उपस्थिति का प्रमाण देते हैं, जो कि 487 सीई वर्ष के बड़वानी शिलालेख की गवाही का समर्थन करता है। [11] हेफ़थलाइट्स या व्हाइट हंट के हमलों ने गुप्त साम्राज्य के पतन के बारे में बताया, जो छोटे राज्यों में टूट गया था। 528 में मालावेडे के राजा यशोधरन ने हंस को अपने विस्तार का अंत कर दिया था। बाद में, हर्ष (सी। 5 9 -647) ने राज्य के उत्तरी भागों पर शासन किया। माल्वा पर दक्षिण भारतीय राष्ट्रकुटा वंश ने 8 वीं सदी के उत्तरार्ध से 10 वीं सदी तक शासन किया था। [12] जब राष्ट्रकूट वंश के दक्षिण भारतीय सम्राट गोविंदा तृतीय ने माल्वा को एक्सपर्ट कर दिया था, तब उन्होंने अपने अधीनस्थों में से एक के परिवार की स्थापना की, जिसके नाम परमार का नाम लिया गया। [13]

मध्यकाल की अवधि में माल्वा के परामार और बुंदेलखंड के चंदेल सहित गुर्जर्लक्लास का उदय हुआ। चांदले ने खजुराहो में भव्य हिंदू-जैन मंदिरों का निर्माण किया, जो मध्य भारत में हिंदू मंदिर वास्तुकला की परिणति का प्रतिनिधित्व करता है। इस समय गुर्जर-प्रतिहार वंश ने उत्तरी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी दमन किया था। ग्वालियर में वास्तुकला मूल्य के कुछ स्मारकों को भी छोड़ दिया माल्व जैसे मध्य प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों को कई बार दक्षिण भारतीय पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य ने आक्रमण किया, जिसने मालवा के परमरा राज्य पर अपना शासन लगाया। [14] परमरा राजा भोज (सी। 1010-1060) एक प्रसिद्ध पेंलीमथ था। छोटे-छोटे राज्य राज्य के गोंडवाना और महाकोशल क्षेत्रों में उभरे। 13 वीं शताब्दी में उत्तरी मध्य प्रदेश को तुर्की दिल्ली सल्तनत द्वारा कब्जा कर लिया गया था। 14 वीं शताब्दी के अंत में दिल्ली सल्तनत के पतन के बाद, स्वतंत्र क्षेत्रीय राज्य फिर से उभरे, ग्वालियर के तमारा गुर्जर साम्राज्य और माल्वा के मुस्लिम सल्तनत सहित, मंडु में अपनी राजधानी के साथ। 1531 में गुजरात के सल्तनत द्वारा मालवा सल्तनत पर कब्जा कर लिया गया था। 1540 के दशक में, राज्य के अधिकांश हिस्सों में शेर शाह सूरी पर गिर पड़ा, और बाद में हिंदू राजा हेमू को हेमू, जिन्होंने पहले सूरी राजवंश के जनरल के रूप में सेवा की थी, 1553-56 के दौरान ग्वालियर किला से संचालित थे और दिल्ली के शासक बनकर विक्रमादित्य राजा के रूप में बंगाल से गुजराते हुए लगातार 22 युद्ध जीतने और दिल्ली की लड़ाई में अकबर की सेना को हराया 7 अक्टूबर 1556 को। हालांकि, उन्होंने औपचारिक कोरोनेशन के बाद दिल्ली को अपनी राजधानी के रूप में चुना और ग्वालियर को छोड़ दिया। 1556 में पानीपत की दूसरी लड़ाई में अकबर द्वारा हेमू की हार के बाद, अधिकांश मध्य प्रदेश मुगल शासन के अधीन आया। गोंडवाना और महाकोशल, गोंड राजाओं के नियंत्रण में रहे, जिन्होंने मुगल वर्चस्व को स्वीकार किया लेकिन आभासी स्वायत्तता का आनंद लिया।

1707 में सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगलों का नियंत्रण काफी कमजोर हो गया। 1720 और 1760 के बीच, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों पर मराठस्थ नियंत्रण था, जिसके परिणामस्वरूप पुणे के पेशवाओं के नाममात्र नियंत्रण के तहत अर्ध-स्वायत्त राज्यों की स्थापना हुई थी। मालवा के बहुत अधिक, पुअर्स ने देवास और धरते पर शासन किया, नागपुर के भोसले प्रभुत्व-गोंडवाना क्षेत्र में प्रभुता करते थे, जबकि ग्वालियर के विद्यालयों ने राज्य के उत्तरी हिस्सों को नियंत्रित किया था। इस क्षेत्र के सबसे उल्लेखनीय मराठा शासक महादजी शिंदे, अहिल्याबाई होलकर और यशवंतराव होलकर थे। इनके अलावा, भोपाल, ओरछा और रीवा सहित कई अन्य छोटे राज्य भी थे। भोपाल राज्य, जिसने मराठों और हैदराबाद के निजाम दोनों को श्रद्धांजलि अर्पित की, मुगल सेना में एक पूर्व जनरल, दोस्त मोहम्मद खान ने स्थापित किया था।

तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद, ब्रिटिश क्षेत्र पूरे क्षेत्र का नियंत्रण इस क्षेत्र में सभी संप्रभु राज्य सेंट्रल इंडिया एजेंसी द्वारा शासित ब्रिटिश भारत के राज्यों के रूप में ज्ञात हैं। महाकोशल क्षेत्र ब्रिटिश प्रांत बन गया: सागर और नेर्बुद्गा क्षेत्र 1861 में, ब्रिटिशों ने नागपुर प्रांत को सियोगोर और नेरबुद्दा प्रदेशों के साथ मध्य प्रांत बनाने के लिए विलय कर दिया। 1857 के विद्रोह के दौरान, राज्य के उत्तरी हिस्सों में विद्रोह हुआ, तात्या टोपे जैसे नेताओं के नेतृत्व में। हालांकि, इन्हें अंग्रेजों और उनके प्रति वफादार राजकुमारों द्वारा कुचल दिया गया था। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राज्य में ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों और विरोध प्रदर्शन हुए। [15] चंद्रशेखर आज़ाद, बी आर अंबेडकर, शंकर दयाल शर्मा और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कई उल्लेखनीय नेताओं का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ था।

भारत की आजादी के बाद, मध्य प्रदेश 1 9 50 में पूर्व ब्रिटिश केंद्रीय प्रांतों और बेरार और मक्रेई और छत्तीसगढ़ के राज्यों से बनाया गया था, राज्य की राजधानी के रूप में नागपुर के साथ। मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल के नए राज्यों को केंद्रीय भारत एजेंसी से बनाया गया था। 1 9 56 में, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्य मध्य प्रदेश में विलय कर दिए गए थे, और मराठी भाषी दक्षिणी क्षेत्र विदर्भ, जिसमें नागपुर शामिल था, को बॉम्बे राज्य में सौंप दिया गया था। जबलपुर को राज्य की राजधानी चुना गया था, लेकिन आखिरी समय में, कुछ राजनीतिक दबाव के कारण, भोपाल को राज्य की राजधानी बनाया गया था। [16] [17] नवंबर 2000 में, मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत राज्य के दक्षिणी भाग छत्तीसगढ़ के नए राज्य का निर्माण करने के लिए अलग हो गए थे।

विवरण[संपादित करें]

भारत की संस्कृति में मध्यप्रदेश जगमगाते दीपक के समान है, जिसकी रोशनी की सर्वथा अलग प्रभा और प्रभाव है। यह विभिन्न संस्कृतियों की अनेकता में एकता का जैसे आकर्षक गुलदस्ता है, मध्यप्रदेश, जिसे प्रकृति ने राष्ट्र की वेदी पर जैसे अपने हाथों से सजाकर रख दिया है, जिसका सतरंगी सौन्दर्य और मनमोहक सुगन्ध चारों ओर फैल रहे हैं। यहाँ के जनपदों की आबोहवा में कला, साहित्य और संस्कृति की मधुमयी सुवास तैरती रहती है। यहाँ के लोक समूहों और जनजाति समूहों में प्रतिदिन नृत्य, संगीत, गीत की रसधारा सहज रूप से फूटती रहती है। यहाँ का हर दिन पर्व की तरह आता है और जीवन में आनन्द रस घोलकर स्मृति के रूप में चला जाता है। इस प्रदेश के तुंग-उतुंग शैल शिखर विन्ध्य-सतपुड़ा, मैकल-कैमूर की उपत्यिकाओं के अन्तर से गूँजते अनेक पौराणिक आख्यान और नर्मदा, सोन, सिन्ध, चम्बल, बेतवा, केन, धसान, तवा, ताप्ती, शिप्रा, काली सिंध आदि सर-सरिताओं के उद्गम और मिलन की मिथकथाओं से फूटती सहस्त्र धाराएँ यहाँ के जीवन को आप्लावित ही नहीं करतीं, बल्कि परितृप्त भी करती हैं।


संस्कृति संगम[संपादित करें]

मध्यप्रदेश में पाँच लोक संस्कृतियों का समावेशी संसार है। ये पाँच साँस्कृतिक क्षेत्र है-

  1. निमाड़
  2. मालवा
  3. बुन्देलखण्ड
  4. बघेलखण्ड
  5. ग्वालियर (चंबल)

प्रत्येक सांस्कृतिक क्षेत्र या भू-भाग का एक अलग जीवंत लोकजीवन, साहित्य, संस्कृति, इतिहास, कला, बोली और परिवेश है। मध्यप्रदेश लोक-संस्कृति के मर्मज्ञ विद्वान श्री वसन्त निरगुणे लिखते हैं- "संस्कृति किसी एक अकेले का दाय नहीं होती, उसमें पूरे समूह का सक्रिय सामूहिक दायित्व होता है। सांस्कृतिक अंचल (या क्षेत्र) की इयत्त्ता इसी भाव भूमि पर खड़ी होती है। जीवन शैली, कला, साहित्य और वाचिक परम्परा मिलकर किसी अंचल की सांस्कृतिक पहचान बनाती है।"

मध्यप्रदेश की संस्कृति विविधवर्णी है। गुजरात, महाराष्ट्र अथवा उड़ीसा की तरह इस प्रदेश को किसी भाषाई संस्कृति में नहीं पहचाना जाता। मध्यप्रदेश विभिन्न लोक और जनजातीय संस्कृतियों का समागम है। यहाँ कोई एक लोक संस्कृति नहीं है। यहाँ एक तरफ़ पाँच लोक संस्कृतियों का समावेशी संसार है, तो दूसरी ओर अनेक जनजातियों की आदिम संस्कृति का विस्तृत फलक पसरा है।

निष्कर्षत: मध्यप्रदेश पाँच सांस्कृतिक क्षेत्र निमाड़, मालवा, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड और ग्वालियर और धार-झाबुआ, मंडला-बालाघाट, छिन्दवाड़ा, होशंगाबाद्, खण्डवा-बुरहानपुर, बैतूल, रीवा-सीधी, शहडोल आदि जनजातीय क्षेत्रों में विभक्त है।

निमाड़[संपादित करें]

निमाड़ मध्यप्रदेश के पश्चिमी अंचल में स्थित है। अगर इसके भौगोलिक सीमाओं पर एक दृष्टि डालें तो यह पता चला है कि निमाड़ के एक ओर विन्ध्य की उतुंग शैल श्रृंखला और दूसरी तरफ़ सतपुड़ा की सात उपत्यिकाएँ हैं, जबकि मध्य में है नर्मदा की अजस्त्र जलधारा। पौराणिक काल में निमाड़ अनूप जनपद कहलाता था। बाद में इसे निमाड़ की संज्ञा दी गयी। फिर इसे पूर्वी और पश्चिमी निमाड़ के रूप में जाना जाने लगा।

मालवा[संपादित करें]

मालवा महाकवि कालिदास की धरती है। यहाँ की धरती हरी-भरी, धन-धान्य से भरपूर रही है। यहाँ के लोगों ने कभी भी अकाल को नहीं देखा। विन्ध्याचल के पठार पर प्रसरित मालवा की भूमि सस्य, श्यामल, सुन्दर और उर्वर तो है ही, यहाँ की धरती पश्चिम भारत की सबसे अधिक स्वर्णमयी और गौरवमयी भूमि रही है।

बुंदेलखंड[संपादित करें]

एक प्रचलित अवधारणा के अनुसार "वह क्षेत्र जो उत्तर में यमुना, दक्षिण में विंध्य प्लेटों की श्रेणियों, उत्तर-पश्चिम में चंबल और दक्षिण पूर्व में पन्ना, अजमगढ़ श्रेणियों से घिरा हुआ है, बुंदेलखंड के नाम से जाना जाता है। इसमें उत्तर प्रदेश के चार जिले- जालौन, झाँसी, हमीरपुर और बाँदा तथा मध्यप्रेदश के पांच जिले- सागर, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना के अलावा उत्तर-पश्चिम में चंबल नदी तक प्रसरित विस्तृत प्रदेश का नाम था।" कनिंघम ने "बुंदेलखंड के अधिकतम विस्तार के समय इसमें गंगा और यमुना का समस्त दक्षिणी प्रदेश जो पश्चिम में बेतवा नदी से पूर्व में चन्देरी और सागर के जिलों सहित विंध्यवासिनी देवी के मन्दिर तक तथा दक्षिण में नर्मदा नदी के मुहाने के निकट बिल्हारी तक प्रसरित था", माना है।

बघेलखण्ड[संपादित करें]

बघेलखण्ड की धरती का सम्बन्ध अति प्राचीन भारतीय संस्कृति से रहा है। यह भू-भाग रामायणकाल में कोसल प्रान्त के अन्तर्गत था। महाभारत के काल में विराटनगर बघेलखण्ड की भूमि पर था, जो आजकल सोहागपुर के नाम से जाना जाता है। भगवान राम की वनगमन यात्रा इसी क्षेत्र से हुई थी। यहाँ के लोगों में शिव, शाक्त और वैष्णव सम्प्रदाय की परम्परा विद्यमान है। यहाँ नाथपंथी योगियो का खासा प्रभाव है। कबीर पंथ का प्रभाव भी सर्वाधिक है। महात्मा कबीरदास के अनुयायी धर्मदास बाँदवगढ़ के निवासी थी।

ग्वालियर[संपादित करें]

ग्वालियर किले का ग्वालियर-गेट नामक द्वार -- किले के अंदर से लिया गया चित्र

मध्यप्रदेश का चंबल क्षेत्र भारत का वह मध्य भाग है, जहाँ भारतीय इतिहास की अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियां घटित हुई हैं। इस क्षेत्र का सांस्कृतिक-आर्थिक केंद्र ग्वालियर शहर है। सांस्कृतिक रूप से भी यहाँ अनेक संस्कृतियों का आवागमन और संगम हुआ है। राजनीतिक घटनाओं का भी यह क्षेत्र हर समय केन्द्र रहा है। १८५७ का पहला स्वतंत्रता संग्राम झाँसी की वीरांगना रानी महारानी लक्ष्मीबाई ने इसी भूमि पर लड़ा था। सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र ग्वालियर अंचल संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, चित्रकला अथवा लोकचित्र कला हो या फिर साहित्य, लोक साहित्य की कोई विधा हो, ग्वालियर अंचल में एक विशिष्ट संस्कृति के साथ नवजीवन पाती रही है। ग्वालियर क्षेत्र की यही सांस्कृतिक हलचल उसकी पहचान और प्रतिष्ठा बनाने में सक्षम रही है।


भूगोल[संपादित करें]

भारत में अवस्थिति[संपादित करें]

जैसा की नाम से ही प्रतीत होता हैं यह भारत के बीचो-बीच, अक्षांश -21°6' उत्तरीअक्षांश से 26°30'उत्तरीअक्षांश देशांतर -74°9' पूर्वीदेशांतर से 82°48' पूर्वीदेशांतर में स्थित हैं राज्य, नर्मदा नदी के चारो और फैला हुआ है, जोकी  विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला के बीच पूरब से  पश्चिम की और बहती हैं, जोकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच पारंपरिक सीमा का काम करती हैं।

राज्य, दक्षिण में महाराष्ट्र से, पश्चिम में गुजरात से घिरा हुआ है, जबकि इसके उत्तर-पश्चिम में राजस्थान, पूर्वोत्तर पर उत्तर प्रदेश और पूर्व में छत्तीसगढ़ स्थित हैं।

मध्य प्रदेश में सबसे ऊँची चोटी, धूपगढ़ की है जिसकी ऊंचाई 1,350 मीटर (4,429 फुट) हैं।

जलवायु[संपादित करें]

मध्य प्रदेश में उपोष्णकटिबंधीय जलवायु है। अधिकांश उत्तर भारत की तरह, यहाँ ग्रीष्म ऋतू (अप्रैल-जून), के बाद मानसून की वर्षा (जुलाई-सितंबर) और फिर अपेक्षाकृत शुष्क शरदऋतु आती है। यहाँ औसत वर्षा 1371 मिमी (54.0 इंच) होती है। इसके दक्षिण-पूर्वी जिलों में भारी वर्षा होती है, कुछ स्थानों में तो 2,150 मिमी (84.6 इंच) तक बारिश होती हैं, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी जिलों में 1,000 मिमी (39.4 में) या कम बारिश होती हैं।

पर्यावरण[संपादित करें]

2011 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में दर्ज वनक्षेत्र 94,689 km2 (36,560 वर्ग मील) हैं जोकि राज्य के कुल क्षेत्र का 30.72% हैं, और भारत में स्थित कुल वनक्षेत्र का 12.30% है। मध्य प्रदेश सरकार ने इन क्षेत्र को "आरक्षित वन" (65.3%), "संरक्षित वन" (32.84%) और "उपलब्ध वन" (0.18%) में वर्गीकृत किया गया है। वन राज्य के उत्तरी और पश्चिमी भागों में कम घना है ,जहा राज्य के प्रमुख शहर हैं,

राज्य में पाये जाने वाले मिट्टी के प्रमुख प्रकार हैं:

    • काली मिट्टी, सबसे मुख्य रूप से मालवा क्षेत्र, महाकौशल में और दक्षिणी बुंदेलखंड में
    • लाल और पीली मिट्टी, बघेलखण्ड क्षेत्र में
    • जलोढ़ मिट्टी, उत्तरी मध्य प्रदेश में
    • लेटराइट मिट्टी, हाइलैंड क्षेत्रों में
    • मिश्रित मिट्टी, ग्वालियर और चंबल संभाग के कुछ हिस्सों में

वनस्पति और जीव[संपादित करें]

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सफ़ेद-शेर (रीवा)
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घड़ियाल (केन-अभयारण्य)

चूँकि प्रदेश में सबसे अधिक वनक्षेत्र हैं इसीलिए यहाँ बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, सतपुड़ा राष्ट्रीय अभ्यारण्य, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान, माधव राष्ट्रीय उद्यान, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान, पन्ना राष्ट्रीय उद्यान, और पेंच राष्ट्रीय उद्यान सहित 09 राष्ट्रीय उद्यान उपस्थित हैं इसके अलावा यह कई प्राकृतिक संरक्षण उपस्थित हैं जिनमे अमरकंटक, बाग गुफाएं, बालाघाट, बोरी प्राकृतिक रिजर्व, केन घड़ियाल, घाटीगांव, कुनो पालपुर, नरवर, चंबल, कुकड़ेश्वर, नरसिंहगढ़, नोरा देही, पचमढ़ी, पनपथा, शिकारगंज, पातालकोट और तामिया सम्मलित हैं सतपुड़ा रेंज में पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व, अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान भारत में उपस्थित 18 बायोस्फीयर में से तीन हैं।

कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना, और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान बाघ परियोजना क्षेत्रों के रूप में काम करते हैं। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को, घड़ियाल और मगर, नदी डॉल्फिन, ऊदबिलाव और कई प्रकार के कछुओ के  संरक्षण के लिए जाना जाता है।

सागौन और साल राज्य के जंगलों में बहुतायत में पाया जाता हैं।

नदियां[संपादित करें]

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की सबसे प्रमुख और लंबी नदी है। यह दरार घाटी के माध्यम से पश्चिम की ओर बहती है, इसके उत्तरी किनारे में विंध्य के विशाल पर्वतमाला , जबकि दक्षिण में सतपुड़ा के पहाड़ों की रेंज हैं। इसकी सहायक नदियों में बंजार, तवा, मचना, शक्कर, देनवा और सोनभद्र नदियां आदि शामिल हैं।ताप्ती नदी भी नर्मदा के समानांतर, दरार घाटी के माध्यम से बहती है। नर्मदा-ताप्ती सिस्टम, राज्य की प्रमुख नदियों में से हैं और मध्य प्रदेश की लगभग एक चौथाई भूमि क्षेत्र को जल प्रदान करती हैं।

बाकी की नदियां चंबल, शिप्रा, कालीसिंध, पार्वती, कुनो, सिंध, बेतवा, धसान और केन, जोकि पुर्व की और बहती हैं, यमुना नदी में जाके मिलती हैं शिप्रा नदी जिसके किनारे प्राचीन शहर उज्जैन बसा हुआ हैं हिंदू धर्म के सबसे पवित्र नदियों में से एक है। यहाँ हर 12 साल में सिंहस्थ कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। इन नदियों द्वारा बहा के लाई गई भूमि कृषि समृद्ध होती हैं। गंगा बेसिन के पूर्वी भाग में सोन, टोंस और रिहंद नदिया हैं। सोन , जो अमरकंटक के पास मैकल पहाड़ो से निकलती है, दक्षिणी से गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है जोकि हिमालय से ही नहीं निकलती है। सोन और उसकी सहायक नदियों, गंगा में मानसून का अथाह जल प्रवाहित करती हैं

छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, महानदी बेसिन का बड़ा हिस्सा अब छत्तीसगढ़ में प्रवाहित होता है। वर्तमान में, अनूपपुर जिले में हसदेव के पास नदी का केवल 154 km2 बेसिन क्षेत्र ही मध्य प्रदेश में बहता है।वैनगंगा, वर्धा, पेंच, कान्हां नदियां, गोदावरी नदी प्रणाली में विशाल मात्रा में पानी का निर्वहन करती हैं। यहाँ कई महत्वपूर्ण राज्य के विकास में सिंचाई परियोजनाएं कार्यत हैं, जिसमे गोदावरी नदी घाटी सिंचाई परियोजना भी शामिल है।

परिक्षेत्र[संपादित करें]

मध्यप्रदेश को निम्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है:

शहर[संपादित करें]

  • जिले

मध्य प्रदेश राज्य में कुल 51 जिले हैं,


जनसांख्यिकी[संपादित करें]

जनसंख्या[संपादित करें]

वर्ष 2011 की जनगणना के अन्तिम आकडोँ के अनुसार मध्य प्रदेश की कुल जनसँख्या 72,626,809 है[2] जिसमे 3,76,11,370(51.8%) पुरुष एँव 3,49,84,645(48.2%) महिलाएँ है मध्यप्रदेश का लिगाँनुपात 930 है। मध्य प्रदेश की जनसंख्या, में कई समुदाय, जातीय समूह और जनजातिया आते हैं जिनमे यहाँ के मूल निवासी आदिवासि और हाल ही में अन्य राज्यों से आये प्रवासी भी शामिल है। राज्य की आबादी में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक बड़े हिस्से का गठन करते हैं। मध्यप्रदेश के आदिवासी समूहों में मुख्य रूप से गोंड, भील, बैगा, कोरकू, भड़िया (या भरिया), हल्बा, कौल, मरिया, मालतो और सहरिया आते हैं। धार, झाबुआ, मंडला और डिंडौरी जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी की है। खरगोन, छिंदवाड़ा, सिवनी, सीधी, सिंगरौली और शहडोल जिलों में 30-50 प्रतिशत आबादी जनजातियों की है। 2001 की जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या 12233000 थी, जोकि कुल जनसंख्या का 20.27% हैं। यहाँ 46 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजाति हैं और उनमें से तीन को "विशेष आदिम जनजातीय समूहों" का दर्जा प्राप्त हैं।[3]

विभिन्न भाषाई, सांस्कृतिक और भौगोलिक वातावरण और अन्य जटिलताओं के कारण मध्य प्रदेश के आदिवासी, बड़े पैमाने पर विकास की मुख्य धारा से कटा हुआ है। मध्य प्रदेश, मानव विकास सूचकांक के निम्न स्तर 0.375 (2011) पर हैं, जोकि राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे है।[4] इंडिया स्टेट हंगर इंडेक्स (2008) के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुपोषण की स्थिति, 'बेहद खतरनाक' हैं और इसका स्थान इथोपिया और चाड के बीच है।[5] राज्य की कन्या भ्रूण हत्या की स्थिति में भी, भारत में सबसे खराब प्रदर्शन है।[6] राज्य का प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीडीपी)(2010-11), देश के सबसे कम में चौथा स्थान पर है।[7] प्रदेश, भारत के राज्य हंगर इंडेक्स पर भी सबसे कम रैंकिंग वाले राज्य में से है।

मध्य प्रदेश कुपोषण के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक है। हाल ही के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार, पन्ना जिले में 43.1 प्रतिशत बच्चे कुपोषित, 24.7 प्रतिशत क्षीण और 40.3 प्रतिशत कम वजन वाले बच्चों की श्रेणी में आते है।[8] इसी तरह का मामला ग्रामीण छतरपुर में भी हैं जहां 44.4 प्रतिशत बच्चे कुपोषित, 17.8 प्रतिशत क्षीण और 41.2 प्रतिशत कम वजन के हैं।

शिक्षा[संपादित करें]

thumb|right|200px|भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM), इंदौर

भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM), ग्वालियर

2011 की जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश की साक्षरता दर 70.60% थी, जिसमे पुरुष साक्षरता 80.5% और महिला साक्षरता 60.0% थी। वर्ष 2017 के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 114,418 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय, 3,851 उच्च विद्यालय और 4,765 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हैं।[9] राज्य में 208 इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर कॉलेजों, 208 प्रबंधन संस्थानों और 12 मेडिकल कॉलेज हैं।

राज्य में भारत के कई प्रमुख शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान है जिनमे भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) इंदौर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT) इंदौर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIMS) भोपाल, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल, भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM) ग्वालियर, आईआईएफएम भोपाल, नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल शामिल हैं राज्य में एक पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर) भी हैं जिसके तीन संस्थान जबलपुर, महू और रीवा में है। प्रदेश की पहली निजी विश्वविद्यालय "जेपी अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गुना" एनएच 3 पर खूबसूरत कैंपस के साथ बना हुआ हैं। जोकि एनआईआरएफ (NIRF) के शीर्ष 100 में 86 वें स्थान पर है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT), इंदौर

यहाँ 500 डिग्री कॉलेज हैं, जोकि राज्य के ही विश्वविद्यालयों से सम्बंधित हैं। जिनमें जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश चिकित्सा विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय (भोपाल), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (भोपाल), अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (रीवा), बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय (भोपाल), देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (इंदौर), रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (जबलपुर), विक्रम विश्वविद्यालय (उज्जैन), जीवाजी विश्वविद्यालय (ग्वालियर), डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय (सागर विश्वविद्यालय), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (अमरकंटक, अनूपपुर) और पत्रकारिता और संचार के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (भोपाल) आदि शामिल हैं।

वर्ष 1970 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्री-मेडिकल टेस्ट बोर्ड के लिये व्यावसायिक परीक्षा मंडल गठन किया गया। कुछ वर्ष के बाद 1981 में, प्री-इंजीनियरिंग बोर्ड का गठन किया गया था। फिर उसके बाद, वर्ष 1982 में इन बोर्डों दोनों को समामेलित कर मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (M.P.P.E.B.) जिसे व्यापम के रूप में भी जाना जाता है का गठन किया गया।[10]

भाषा[संपादित करें]

राज्य की आधिकारिक भाषा हिंदी है। इसके अलावा कई इलाको में उर्दू और मराठी भाषियों की अच्छी खासी आबादी हैं। क्युकी ये क्षेत्र कभी मराठा राज्य के अन्तर्गत आते थे, बल्कि प्रदेश में महाराष्ट्र के बाहर मराठी लोगों की सबसे ज्यादा आबादी हैं। यहाँ कई क्षेत्रीय बोलिया भी बोली जाती हैं, जोकि कुछ लोगों के अनुसार हिन्दी ही से निकल कर बनी हुई हैं जबकि कुछ के अनुसार ये अलग या अन्य भाषा से संबंधित हैं। इन बोलियों के अलावा मालवा में मालवी, निमाड़ में निमाड़ी, बुंदेलखंड में बुंदेली, और बघेलखंड और दक्षिण पूर्व में बघेली बोली जाती हैं। इन में से हर एक बोली एक दूसरे से बहुत अलग है। यहाँ की अन्य भाषाओं में तेलुगू, भिलोड़ी (भीली), गोंडी, कोरकू, कळतो (नहली), और निहाली (नाहली) आदि शामिल हैं, जोकि आदिवासी समूहों द्वारा बोली जाती हैं।

धर्म[संपादित करें]

2011 की जनगणना के अनुसार, प्रदेश में 90.9% लोग हिंदू धर्म को मानते हैं, जबकि अन्य में मुस्लिम (6.6%), जैन (0.8%), ईसाई (0.3%), बौद्ध (0.3%), और सिखों (0.2%) आदि आते है। प्रदेश के कई शहर अपनी धार्मिक आस्था के केंद्र के लिए जाने जाते रहे हैं। जिनमे से सबसे प्रमुख उज्जैन शहर हैं, जोकि भारत के सबसे प्राचीन शहरो में से एक हैं। यहाँ 12 ज्योतिर्लिंग में से एक महाकालेश्वर मंदिर दुनिया भर में प्रशिद्ध हैं। शहर में बहने वाली शिप्रा नदी के किनारे प्रशिद्ध कुम्भ मेला लगता है। इसके अलावा नर्मदा नदी के तट पर बसा ओम्कारेश्वर भी 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। हिन्दू धर्म के अलावा अन्य धर्मो के कई धार्मिक केंद्र प्रदेश में उपस्थित हैं। भोपाल का ताज-उल-मस्जिद भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में एक है। वही साँची में स्थित स्तूप, बोद्ध धर्म के लिए केंद्र हैं।

संस्कृति[संपादित करें]

मध्य प्रदेश के तीन स्थलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, जिनमे खजुराहो (1986): जगदम्बी देवी मंदिर रीवा सहित, सांची बौद्ध स्मारक (1989) और भीमबेटका की रॉक शेल्टर (2003) शामिल हैं। अन्य वास्तुशिल्पीय दृष्टि से या प्राकृतिक स्थलों में अजयगढ़, अमरकंटक, असीरगढ़, बांधवगढ़, बावनगजा, भोपाल, विदिशा, चंदेरी, चित्रकूट, धार, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, बुरहानपुर, महेश्वर, मंडलेश्वर, मांडू, ओंकारेश्वर, ओरछा, पचमढ़ी, शिवपुरी, सोनागिरि मण्डला और उज्जैन शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में अपनी शास्त्रीय और लोक संगीत के लिए विख्यात है। विख्यात हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत घरानों में मध्य प्रदेश के मैहर घराने, ग्वालियर घराने और सेनिया घराने शामिल हैं। मध्यकालीन भारत के सबसे विख्यात दो गायक, तानसेन और बैजू बावरा, वर्तमान मध्य प्रदेश के ग्वालियर के पास पैदा हुए थे। प्रशिद्ध ध्रुपद कलाकार अमीनुद्दीन डागर (इंदौर), गुंदेचा ब्रदर्स (उज्जैन) और उदय भवालकर (उज्जैन) भी वर्तमान के मध्य प्रदेश में पैदा हुए थे।[11] पार्श्व गायक किशोर कुमार (खंडवा) और लता मंगेशकर (इंदौर) का जन्मस्थान भी मध्य प्रदेश में स्थित हैं। स्थानीय लोक गायन की शैलियों में फाग, भर्तहरि, संजा गीत, भोपा, कालबेलिया, भट्ट/भांड/चरन, वसदेवा, विदेसिया, कलगी तुर्रा, निर्गुनिया, आल्हा, पंडवानी गायन और गरबा गरबि गोवालं शामिल हैं।

प्रदेश के प्रमुख लोक नृत्य में बधाई, राई, सायरा, जावरा, शेर, अखाड़ा, शैतान, बरेदी, कर्म, काठी, आग, सैला, मौनी, धीमराई, कनारा, भगोरिया, दशेरा, ददरिया, दुलदुल घोड़ी, लहगी घोड़ी, फेफरिया मांडल्या, डंडा, एडीए-खड़ा, दादेल, मटकी, बिरहा, अहिराई, परधौनी, विल्मा, दादर और कलस शामिल हैं।

अर्थव्यवस्था[संपादित करें]

मध्य प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2014-15 के लिए 84.27 बिलियन डॉलर था।[12] प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2013-14 में $871,45 था, और देश के अंतिम से छठे स्थान पर हैं।[13] 1999 और 2008 के बीच राज्य की सालाना वृद्धि दर बहुत कम (3.5%) थी।[14] इसके बाद राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में काफी सुधार हुआ है, और 2010-11 और 2011-12 के दौरान 8% एवं 12% क्रमशः बढ़ गया।[15]

राज्य में कृषिप्रधान अर्थव्यवस्था है। मध्य प्रदेश की प्रमुख फसलों में गेहूं, सोयाबीन, चना, गन्ना, चावल, मक्का, कपास, राइ, सरसों और अरहर शामिल हैं। प्रदेश में इंदौर, सोयबीन की मंडी के लिए देश भर का केंद्र हैं। लघु वनोपज (एमएफपी) जैसे की तेंदू, जिसके पत्ते का बीड़ी बनाने में इस्तेमाल किया जाता हैं, साल बीज, सागौन बीज, और लाख आदि भी राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए योगदान देते हैं।

मध्य प्रदेश में 5 विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) है: जिनमे 3 आईटी/आईटीईएस (इंदौर, ग्वालियर), 1 खनिज आधारित (जबलपुर) और 1 कृषि आधारित (जबलपुर) शामिल हैं। अक्टूबर 2011 में, 14 सेज प्रस्तावित किया गए, जिनमे से 10 आईटी/ आईटीईएस आधारित थे। इंदौर, राज्य का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है। इसके राज्य के केंद्र में स्थित होने के कारण, यहाँ कई उपभोक्ता वस्तु कंपनियों ने अपनी विनिर्माण केंद्रों की स्थापना की है।.[16]

राज्य में भारत का हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है। अन्य प्रमुख खनिज भंडार में कोयला, कालबेड मीथेन, मैंगनीज और डोलोमाइट शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में 6 आयुध कारखाने, जिनमें से 4 जबलपुर (वाहन निर्माणी, ग्रे आयरन फाउंड्री, गन कैरिज फैक्टरी, आयुध निर्माणी खमरिया) में स्थित है, बाकि एक-एक कटनी और इटारसी में हैं। ये कारखाने आयुध कारखाना बोर्ड द्वारा चलाए जाते हैं जिनमे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाता हैं।

मध्य प्रदेश, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 में उत्कृष्ट कार्य के लिए 10वे राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीत चुका हैं। राज्य में पर्यटन उद्योग भी जोर-शोर से बढ़ रहा है, वन्यजीव पर्यटन और कई संख्या में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थानों की उपस्थिति इनका मुख्य कारण हैं। सांची और खजुराहो में विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। प्रमुख शहरों के अलावा अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में भेड़ाघाट, भीमबेटका, भोजपुर, महेश्वर, मांडू, ओरछा, पचमढ़ी, कान्हा और उज्जैन शामिल हैं।

अवसंरचना[संपादित करें]

ऊर्जा[संपादित करें]

राज्य की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 13880 मेगावॉट (31 मार्च 2015) है। सभी राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश बिजली उत्पादन में सबसे ज्यादा वार्षिक वृद्धि (46.18%) दर्ज की हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भारत के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र योजना बनाई गई हैं। संयंत्र की बिजली उत्पादन की क्षमता 700 मेगावाट होगी, तथा इसे लगाने हेतु 4,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। [17]

परिवहन[संपादित करें]

मध्य प्रदेश में बस और ट्रेन सेवाएं चारो तरफ फैली हुई हैं। प्रदेश की 99,043 किमी लंबी सड़क नेटवर्क में 20 राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल है। प्रदेश में 4948 किलोमीटर लंबी रेल नेटवर्क का जाल फैला हुआ हैं, जबलपुर को भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य रेलवे का मुख्यालय बनाया गया है। मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे भी राज्य के कुछ हिस्सों को कवर करते हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश के अधिकांश क्षेत्र पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल के अंर्तगत आते है, जिनमे इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, खंडवा, नीमच और बैरागढ़ भोपाल आदि शहर शामिल हैं। राज्य में 20 प्रमुख रेलवे जंक्शन है। प्रमुख अंतर-राज्यीय बस टर्मिनल भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में स्थित हैं। प्रतिदिन 2000 से भी अधिक बसों का संचालन इन चार शहरों से होता हैं। शहर के अंदर की आवागमन हेतु, ज्यादातर बसों, निजी ऑटो रिक्शा और टैक्सियों का उपयोग होता है। देश के बीचो-बीच होने के कारण राज्य के पास कोई समुद्र तट नहीं है। अधिकांश समुद्री व्यापार, पड़ोसी राज्यों में कांडला और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (न्हावा शेवा) के माध्यम से होता है जोकि सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से प्रदेश से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं।

संचार माध्यम[संपादित करें]

सरकार और राजनीति[संपादित करें]

इन्हें भी देखें: मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्रियों की सूची एवं मध्य प्रदेश के राज्यपालों की सूची

मध्य प्रदेश में विधान सभा की 230 सीट है। राज्य से भारत की संसद को 40 सदस्य भेजे जाते है: जिनमे 29 लोकसभा (निचले सदन) और 11 राज्यसभा के लिए (उच्च सदन) के लिए चुने जाते हैं। राज्य के संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता हैं, जोकि भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। राज्य का कार्यकारी प्रमुख मुख्यमंत्री होता हैं, जोकि विधानसभा निर्वाचित सदस्यो का नेता होता हैं। वर्तमान 2016 में, राज्य के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली (अतिरिक्त प्रभार) तथा मुख्यमंत्री, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शिवराज सिंह चौहान है। राज्य की प्रमुख राजनीतिक दलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हैं। कई पड़ोसी राज्यों के विपरीत, यहाँ छोटे या क्षेत्रीय दलों को विधानसभा चुनावों में ज्यादा सफलता नहीं मिली है। नवंबर 2013 में राज्य के चुनावों में भाजपा ने 165 सीटों में जीत हासिल कर पूर्ण बहुमत साबित किया, कांग्रेस 58 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष पर जा बैठी। 4 सीटों के साथ बहुजन समाज पार्टी, राज्य में तीसरे स्थान पर हैं वही अन्य ने 3 सीटें जीती है।

शासन प्रबंध[संपादित करें]

इन्हें भी देखें: मध्य प्रदेश के शहरों की सूची

मध्य प्रदेश 51 जिलों, जो 10 संभागो में बटा है, से मिल कर बना हुआ है। 2013 तक, राज्य में 51 जिला पंचायत, 313 जनपद पंचायत/ब्लॉक, और 23,043 ग्राम पंचायत है। राज्य में नगर पालिकाओं में, 16 नगर निगम, 100 नगर पालिका और 238 नगर पंचायत शामिल हैं।

खेल[संपादित करें]

वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने मलखम्ब को राज्य के खेल के रूप में घोषित किया गया। क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, साइकिल चलाना, तैराकी, बैडमिंटन और टेबल टेनिस राज्य में लोकप्रिय खेल हैं। खो-खो, गिल्ली-डंडा, सितोलिया(पिट्ठू), कंचे और लंगड़ी जैसे पारंपरिक खेल ग्रामीण क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय हैं। स्नूकर, जिसका आविष्कार ब्रिटिश सेना के अधिकारियों द्वारा जबलपुर में किया हुआ माना जाता है, कई अंग्रेजी बोलने वाले और राष्ट्रमंडल देशों में लोकप्रिय है।

क्रिकेट मध्य प्रदेश में सबसे लोकप्रिय खेल है। यहाँ राज्य में तीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम नेहरू स्टेडियम (इंदौर), रूपसिंह स्टेडियम (ग्वालियर) और होल्कर क्रिकेट स्टेडियम (इंदौर) हैं। मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम का रणजी ट्राफी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1998-99 में किया गया था, जब चंद्रकांत पंडित के नेतृत्व वाली टीम उपविजेता के रूप में रही। इसके पूर्ववर्ती, इंदौर के होल्कर क्रिकेट टीम, रणजी ट्राफी में चार बार जीत हासिल कर चुकी हैं।

भोपाल का ऐशबाग स्टेडियम विश्व हॉकी सीरीज की टीम भोपाल बादशाह का घरेलू मैदान है। राज्य में एक फुटबॉल भी टीम है जोकि संतोष ट्राफी में भाग लेता रहता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (July 2012 to June 2013)" (PDF). Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, Government of India. http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf. अभिगमन तिथि: 12 जुलाई 2017. 
  2. मध्य प्रदेश जनसंख्या
  3. Scheduled Castes & Scheduled Tribe Welfare Department, Government of Madhya Pradesh
  4. Madhya Pradesh: Economic and Human Development Indicators, UNDP (2011)
  5. "Hunger in India states 'alarming'". BBC. 14 October 2008. http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/7669152.stm. अभिगमन तिथि: 12 May 2010. 
  6. "Yet again, Madhya Pradesh tops in cases of feticide - The Times of India". http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-07-03/india/32522980_1_cases-mukesh-sinha-executive-director-ncrb. 
  7. Gross State Domestic Product (GSDP) at Current Prices (as on 15-03-2012), Planning Commission of India. Archived 16 May 2012 at the Wayback Machine.
  8. http://malnourishedkids.blogspot.com/2012/10/malnutrition-in-madhya-pradesh-overview.html
  9. http://www.educationportal.mp.gov.in/Public/Schools/ssrs/State_School_Block.aspx?MP=1
  10. "मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल, भोपाल". http://www.vyapam.nic.in. 
  11. Simon Broughton; Mark Ellingham; Richard Trillo (2000). World Music: Latin and North America, Caribbean, India, Asia and Pacific. Rough Guides. पृ. 91–. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-85828-636-5. https://books.google.com/books?id=QzX8THIgRjUC&pg=PA91. अभिगमन तिथि: 13 September 2012. 
  12. http://www.ibef.org/states/madhya-pradesh-presentation
  13. "Per Capita Net State Domestic Product at Current Prices". http://planningcommission.nic.in/data/datatable/data_2312/DatabookDec2014%20160.pdf. 
  14. A special report on India: Ruled by Lakshmi 11 Dec 2008 from The Economist print edition
  15. Lemuel Lall (29 June 2012). "Madhya Pradesh's GDP goes up to 12 per cent". The Times of India. http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-06-29/india/32471751_1_growth-rate-agriculture-growth-negative-growth. अभिगमन तिथि: 10 September 2012. 
  16. Madhya Pradesh: India Brand Equity Foundation
  17. http://www.thehindu.com/news/national/indias-largest-solar-power-plant-planned-in-rewa-district-madhya-pradesh/article6267409.ece

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]