दमोह ज़िला

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दमोह ज़िला
Damoh district
मानचित्र जिसमें दमोह ज़िला Damoh district हाइलाइटेड है
सूचना
राजधानी : दमोह
क्षेत्रफल : 7,306 किमी²
जनसंख्या(2011):
 • घनत्व :
12,63,703
 170/किमी²
उपविभागों के नाम: तहसील
उपविभागों की संख्या: 7
मुख्य भाषा(एँ): हिन्दी


दमोह ज़िला भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय दमोह है।[1][2]

इतिहास[संपादित करें]

दमोह नाम रानी दमयंती के नाम पर रखा गया है दमोह का महत्व 14वीं शताब्दी से रहा है जब खिलजी ने क्षेत्रीय प्रशासनिक केंद्र को चंदेरी के बटियागढ़ से दमोवा (दमोह) स्थानातंरित किया। दमोह मराठा गर्वनर की सीट थी। ब्रिटिश काल के बाद यह मध्य प्रांत का भाग हो गया। इसके बाद 16 सौ ईसवी में गोंड वंश के महाराजा संग्राम शाह मरावी के 52 गढ़ों में शामिल था। जिसे उनकी पुत्र बधू महारानी दुर्गावती ने गोंड़वाना साम्राज्य का राजपाट चलाया। बाद में महारानी दुर्गावती की लड़ाई अकबर के सेनापति आसफखां से हुई थी जिसमें 15 बार युद्ध किया और 16वे युद्ध में आसफ खा से परास्त हो गए और यह गोंड़वाना की क्षति के साथ 24 जून सन 1664 में वीरगति को प्राप्त हुई। तथा 1867 में इसे म्यूसिपालिटी बना दिया गया था। यहां आयल मिल, हैण्डलूम तथा धातु के बर्तन, बीडी-सिगरेट, सीमेंट तथा सोने-चांदी के जेवर आदि बनाए जाते हैं। दमोह के आसपास बड़ी संख्या में पान के बाग भी है। यहां से इसका निर्यात भी होता है। यहां पर नागपंचमी पर वार्षिक मेला आयोजित होता है तथा जनवरी में जटाशंकर मेले का भी आयोजन होता है। यहां पर पशु बाजार लगता है तथा कई छोटे उद्योग भी है। साथ ही हथकरघा और मिट्टी के बर्तन भी बनाए जाते हैं। दमोह जिला 2816 वर्ग कि॰मी॰ क्षेत्र में उत्तर से दक्षिण तक फैला है। साथ ही चारों ओर पहाड़ियों (भाऩरेर ऋणी) तथा जंगल से घिरा हुआ है। जिले की अधिकांश भूमि उपजाऊ है। जिले में मु्ख्यतः दो नदियां सुनार और बैरमा बहती हैं। जिले में मुख्यतः नदियों से ही सिंचाई की जाती हैं।

विकास[संपादित करें]

  • 1861: मध्य प्रांत का गठन हुआ।
  • 1861: दमोह पूर्ण जिला बना।
  • 1867:दमोह जिले की जनसंख्या 2,62,600
  • 1867: जबलपुर और इलाहाबाद के बीच रेलवे लाइन पूरी हुई।
  • 1896-1897: दमोह जिले में सूखा और अकाल पड़ा।
  • 1898: 1899 दमोह-कटनी को रेल मार्ग से जोड़ा गया।
  • 1900: जिले में आंशिक अकाल पड़ा।
  • 1923: सेठ गोविंद को चार हिन्दी नाटक लिखने पर जेल जाना पड़ा।
  • 1933: महात्मा गांधी ने दमोह की यात्रा की।
  • 1946: 18 जुलाई को सागर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
  • 1947: देश आजाद हुआ। मध्य प्रांत की जगह मध्य प्रदेश का गठन हुआ।
  • 1960-1991: दमोह जिले की जनसंख्या 8,98,125 हो गई।
  • 2001: दमोह जिले की जनसंख्या 10,81,909 हो गई।
  • 2017 रेल स्वच्छता सर्वे में भारत में 9वा नम्बर लगा है और मध्यप्रदेश में 3st पर है।

दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

दमोह से ३० किलोमीटर दूर हटा नगर मैं प्राचीन चंडी मंदिर है यहाँ पर अद्यासक्ति माँ दुर्गा चंडी रूप मैं विराजमान है और यहाँ भक्तो की आस्था का केंद्र है। इसका इतिहास ज्ञात नहीं है कि कब और किसके द्वारा निर्माण कराया गया पर इसकी स्थापना आर्यो द्वारा देवी उपासना की आगे बढ़ने क लिए की गयी थी। जवेरा के नोहटा मैं पुरातन मंदिर खजराहो जिले मैं मिलते है इनका निर्माण चंदेल राजाओं के द्वारा हुआ अभी कुछ समय से यहाँ पर भी नोहटा महोत्सव मनाया जाने लगा है जिससे पर्यटन को बढावा दिया जाये। दमोह मैं बूंदा बहु मंदिर है जो काफी पुराना है। इसके अलावा बतियागढ़ का किला, हटा का किला, दमोह का किला, नोहटा का मंदिर है। कुण्डलपुर और निसई जी सूखा का मंदिर जैन बंधुओं हेतु प्रसिद्ध है। यहाँ पर कई सारे मन्दिर है, जो की पुराने और पूज्यनीय है।यहा दमोह से 17 किलो मीटर् कि दुरी पर बदक्पुर में शिव जी का प्राचीन मंदिर है।

तहसिले[संपादित करें]

शिक्षा[संपादित करें]

दमोह जिला शिक्षा के क्षेत्र में पहले कम साक्षर रहा है। परंतु वर्तमान समय में शिक्षा का प्रसार बढ़ रहा है।

  • कमला नेहरू महिला महाविधालय
  • ज्ञानचंद श्रीवास्तव शासकीय स्नातकोत्तर महाविधालय
  • डॉ विजयलाल महाविधालय
  • ओजस्विनी महाविधालय
  • पॉलिटेक्निक महाविधालय
  • लॉ महाविधालय

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]