मराठा

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मराठा

Maratha Soldier.jpg

मराठा सैनिक का शिल्प, जेम्स फोर्ब्स, 1813 के अनुसार
धर्म Om.svg हिन्दू धर्म
भाषा मराठी
वासित राज्य बहुसंख्यक: महाराष्ट्र
अल्पसंख्यक: गोआ, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, छत्तीसगढ और मध्य प्रदेशतमिलनाडू,हरियाणा, गुजरात,राजस्थान

मराठा (पुरातन रूप से मरहट्टा या मारहट्टा के रूप में लिप्यंतरित) भारत में जातियों का एक समूह मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में रहता है। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के मुताबिक , "मराठा, भारत के इतिहास के बहादुर लोग हैं, इतिहास में प्रचलित हैं और हिंदू धर्म के विजेता हैं।" वे मुख्यतः भारतीय राज्य महाराष्ट्र में रहते हैं। ब्रिटिश राज काल के एक अप्रशिक्षित नृवंशविद वैज्ञानिक रॉबर्ट वाणे रसेल, जो वैदिक साहित्य पर बड़े पैमाने पर अपने शोध का आधार था, ने लिखा कि मराठों को 96 विभिन्न कुलों में विभाजित किया जाता है, जिसे 96 कुलि मराठों या 'शाहनु कुले', के रूप में जाना जाता है, जो की क्षत्रिय मराठा है , में शाहन्नौ का मतलब है 96। सूचियों का सामान्य निकाय अक्सर एक-दूसरे के साथ महान विचरण होता है।

इतिहास[संपादित करें]

शब्द "मराठा" मूल रुप से ९६ कुल के लोगो के लिये प्रयोग कियाँ है . 17 वीं शताब्दी में, यह डेक्कन सल्तनत की सेनाओं (और बाद में शिवाजी ) की सेनाओं में सेवा करने वाले सैनिकों के लिए एक पद के रूप में उभरा। शिवाजी महाराज के पिता शहाजी राजे सहित कई मराठा योद्धा, मूल रूप से उन सेनाओं में काम करते थे। मध्य 1660 के दशक तक, शिवाजी महाराज ने एक स्वतंत्र मराठा राज्य स्थापित किया था। ] उनकी मृत्यु के बाद, उनके पुत्र सांभाजीमहाराज  राजा बने और 27 साल के युद्ध में औरंगजेब को पराजित किया। इसे आगे बढ़ाकर पेशवाओं सहित मराठा संघ द्वारा एक विशाल साम्राज्य में विस्तारित किया गया, जो मध्य भारत से दक्षिण में पेशावर (आधुनिक पाकिस्तान में) उत्तर में अफगानिस्तान सीमा पर, और पूर्व में बंगाल के लिए अभियान के साथ। 1 9वीं शताब्दी तक, साम्राज्य मराठा प्रमुखों जैसे कि बड़ौदा के गायकवाड़ , इंदौर के होलकर , ग्वालियर की सिंधियां , धार और देवास के पवार , और नागपुर के भोसले द्वारा नियंत्रित अलग-अलग राज्यों का एक संघाध्यक्ष बन गया था। तीसरा एंग्लो-मराठा युद्ध (1817-1818) में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा अपनी हार तक भारत में कमान संभाली जाने वाली प्रमुख शक्ति बनेगी।

1 9वीं शताब्दी तक, ब्रिटिश प्रशासनिक रिकॉर्डों में मराठा शब्द की कई व्याख्याएं थीं। 1882 के ठाणे जिला गैजेटियर में, विभिन्न जातियों में कुलीन परतों को निरूपित करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया गया था: उदाहरण के लिए, कृषि जाति में "मराठा-कृषि", कोली जाति के भीतर "मराठा-कोली" और इसी तरह [5] पुणे जिले में , कुणबी और मराठा शब्द मराठा-कुनबी जाति परिसर को जन्म दे, का पर्याय बन गया था। 1882 के पुणे जिला गैजेटियर ने कुनबीस को दो वर्गों में विभाजित किया: मराठों और अन्य कुनबिस 1 9 01 की जनगणना में मराठा-कुनबी जाति परिसर के भीतर तीन समूहों को सूचीबद्ध किया गया था: "मराठों को उचित", "मराठा कुणबी" और " कोंकणी मराठा"। कुणबी वर्ग में कृषि मजदूर और सैनिक शामिल थे। ऊपरी-वर्ग "मराठों को उचित" (9 6 कुलाे वाले ) ने क्षत्रिय के दर्जा के साथ राजपूत वंश का दावा किया, और शासकों, अधिकारियों और जमींदारों को शामिल किया। राजपूत वंश का दावा करने वाले कुछ मराठा परिवारों में भोंसले, शिसोदे ( सिसोडिया ),चव्हाण ( चौहान ), और पवार ( पंवार तथा परमार से ) , राठोड़ ( राठौड ), जाधव ( जादौन ) , परिहार ( प्रतिहार ) , सकपाळ ( शंखपाळ ) जैसे तथा कई और कुल भी शामिल हैं।

९६ कुली मराठो के ४० कुल राजपुतो से मिलते है | और शहाणौ कुल के मराठे राजपुतो की ही एक शाखा है बस उत्तर मे क्षत्रिय " राजपुत्र "राजपुत बन गये और दख्खन मे आकर क्षत्रिय महारथी से महारठ्ठी , महारठ्ठी से महारठ्ठा मराठा बन गऐ|

 वर्णसंकर ना हो इसलिये  दक्खनी  क्षत्रियो के ९६ कबिलो ने  ( जिनमे सामंत सरदार सैनिक या राजा थे ) ने एकत्रित आकर परस्पर रोटी बेटी व्यवहार किये और  ९६ कुल बनगये | कुछ  मराठोके उपनाम जगह गांव  , कार्य , या पद के अनुसार लगाऐ गये | ( उदा. पाटिल , देशमुख  )  परंतु गोत्र और वंश के अनुसार आज भी मराठो ने अपनी पहचान महाराष्ट्र मे शासक क्षत्रिय  के रुप  मे बनाई रखी है | 

महाराष्ट्र की जनसंख्या मे मराठो की आबादी १५% है । मराठो का लष्करी इतिहास गौरवशाली रहा है । । शिवाजी महाराज की सेना मे मराठो की संख्या सर्वाधीक थी । मराठो के लष्करी सामर्थ और रणकुशलता जान कर अंग्रेजो ने मराठो की लष्करी जंगी पलटन बनाई , छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना से लेकर मराठा साम्राज्य के समय तक और मराठा लाईट इंन्फंट्री से लेकर आज तक मराठा समाज ने देश के लिये लष्करी सेवा दियी है और कई युद्धो मे अपनी लष्करी कुशलता का लोहा शत्रुओ को मनवाया है । और सेना के कई मेडल और शौर्य पद मराठा रेजिमेंट के नाम है । और आज तक मराठो का भारत के मराठा रेजिमेंट मे मराठोंं का योगदान लक्षणीय है ।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]