पेँच नदी

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पेंच नदी
Pench
River
[[Image: |256px|none| Pench river before Chhindwara (Jhilmili) |]]
Pench river before Chhindwara (Jhilmili)
देश Flag of भारत भारत
उपनदियाँ
 - दाएँ कुलबेहरा नदी
शहर परासिया, छिँदवाडा, चौरईखास
स्रोत जामई,जुन्नारदेव
 - स्थान छिंदवाड़ा जिला, मध्यप्रदेश
 - ऊँचाई 1,048 मी. (3,438 फीट)
 - निर्देशांक 22°18′N 78°35′E / 22.300°N 78.583°E / 22.300; 78.583

पेंच नदी भारत में मध्यप्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिला की तहसील जुन्नारदेव से लगे सतपुड़ा पर्वत श्रेणी के दक्षिण पठार से इसका उद्गम होता है दक्षिण - पूर्वी सीमा पर इसमें तीव्र मोड़ आता है और यह दक्षिण की ओर मुड़ जाती हैँ। नदी का बहाव तेज होने के कारण बरसात के समय यह नदी उग्र रूप धारण कर लेती हैँ जिससे यह एक बडी नदीयो के समान इसकी भव्यता देखते ही बनती है कुलबेहरा नदी इसकी सहायक नदी हैँ। पेंच नदी परासिया, छिंदवाडा, माचागोरा बाँध से होते हुए झिलमीली, चाँद पहुचती है चाँद से कुछ किलोमीटर की दूरी पर कुलबेहरा नदी पेंच नदी से मिल जाती हैँ इन दोनो नदीयो के संगम से पेंच नदी का आकार ओर बड़ जाता हैँ आगे यह नदी सिवनी जिला के पेंच राष्ट्रीय उद्यान से होते हुए महाराष्ट्र नागपुर के तोतलाडोह बाँध से होते हुये यह नदी कन्हान नदी में मिल जाती है कन्हान, पेंच तथा बावनथडी वैनगंगा नदी की सहायक नदी है। यह नदी आगे जाकर गोदावरी नदी मे मिल जाती हैँ। इस प्रकार इस नदी पर 2 बाँध बने हुये हैँ।

माचागोरा बाँध (पेंच व्यपवर्तन परियोजना)[संपादित करें]

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिला में चौरई तहसील के माचागोरा गाँव मे जल संसाधन विभाग के पेंच व्यपवर्तन परियोजना के अन्तर्गत यह बाँध गांव माचागोरा में बनाया गया है साथ ही 2 पावर प्लांट से 1320 मेगावाट की बिजली भी बनेगी जिसे आदानी ग्रुप ने पहले ही अधिग्रहण कर चुका हैँ पेंच नदी पर निर्मित यह बाँध 15 जून 2016 से बाँध पर पानी का भराव शुरू हो चुका हैँ इस बाँध पर 8 गेट लगे हुए हैँ 41 मीटर ऊँचा यह बाँध 2017 में दायी तट मुख्य नहर ओर बायी तट मुख्य नहरो के माध्यम से खेतो तक पानी पहुचेगा। पेंच डायवर्सन प्रोजेक्ट Pench Diversion Project के नाम से इसे जाना जाता हैँ।

तोतलाडोह बाँध[संपादित करें]

यह बाँध महाराष्ट्र राज्य के नागपुर पर स्थित है इस बाँध से नागपुर में 70% पानी पीने के लिए सप्लाई किया जाता है यह बाँध नागपुर की लाइफ लाईन हैँ। इस बाँध से आस पास का क्षेत्र पूर्ण रूप से सिँचित हैँ। थर्मल पावर प्लांट के माध्यम से यह बिजली बनती हैँ।