कालिदास अकादमी, उज्जैन

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कालिदास अकादमी संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से उज्जैन में सन् 1978 में स्थापित हुई।महाकवि कालिदास ने नाम पर बनी यह अकादमी शास्त्रीय साहित्य, शास्त्रीय रंगमंच एवं विभिन्न कला-परम्पराओं के गहन अध्ययन, शोध, अनुशीलन, प्रकाशन एवं प्रयोग के सक्रिय केन्द्र के रूप में कार्यरत है।संस्कृत अकादमी का भी इसमें विलय[1] हो चुका है।

रामटेक स्थित कालिदास स्मारक

उद्देश्य[संपादित करें]

  • कालिदास-साहित्य का विश्लेषण एवं आन्तरानुशासनिक कोणों से शोध एवं अनुशीलन तथा विभिन्न कला-माध्यमों पर उसके समग्र प्रभाव का आकलन।
  • कालिदास तथा संस्कृत की अन्य प्राचीन एवं महत्वपूर्ण कृतियों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद तथा प्रकाशन।
  • देश-विदेश में कालिदास, नाट्यशास्त्र एवं प्राचीन पाण्डुलिपियों का संकलन, संरक्षण, सम्पादन एवं प्रकाशन।
  • शोध-छात्रों के अनुरूप विशाल ग्रन्थालय का विकास।
  • कालिदास-साहित्य, नाट्यशास्त्र एवं अन्य प्राचीन शास्त्रों के विश्व की अन्य भाषाओं में उपलब्ध अनुवादों का संकलन।
  • शास्त्रीय रंगमंच के विकास एवं प्रयोग के साथ ही रंगकर्मियों के उपयोग के लिए नाट्यशास्त्र व अन्य संस्कृत नाटकों के सम्पादित संस्करणों का हिन्दी-अंग्रेजी अनुवाद व प्रकाशन।
  • टेप, वीडियो सीडी/डीवीडी, फिल्म व छायाचित्र के द्वारा महत्वपूर्ण कलारूपों का डाक्यूमेंटेशन।
  • शास्त्रीय कलागत पारम्परिक एवं वंशानुगत समग्र मौखिक परम्पराओं का संकलन, संवर्धन, सम्पोषण, प्रयोग-डाक्यूमेंटेशन एवं मोनोग्राफ का प्रकाशन।
  • ललितकला, पारम्परिक रंगमंच, लोककला, संगीत, चित्र एवं मूर्तिकला-प्रदर्शनी आदि का आयोजन।
  • प्राचीन शास्त्रों के गुरु-शिष्य परम्परा के अनुसार अध्ययन व मनन हेतु आचार्यकुल का विकास।
  • भरतमुनि के नाट्यशास्त्र के अनुरूप प्रामाणिक संस्कृत-नाट्य-मण्डप का निर्माण प्रस्तावित, मुक्ताकाशी रंगमंच का विकास।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. कालिदास संस्कृत अकादमी में संस्कृत अकादमी के विलय होने पर कार्यक्रमों में भारी वृद्धि