दमोह

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दमोह
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्य प्रदेश
महापौर
जनसंख्या १०८३९४९ (२००१ तक )
आधिकारिक जालस्थल: damoh.nic.in

निर्देशांक: 23°53′N 79°27′E / 23.88°N 79.45°E / 23.88; 79.45 दमोह भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक शहर है। यह सागर संभाग का एक जिला और बुंदेलखंड अंचल का शहर है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के राजा नल की पत्नी दमयंती के नाम पर ही इसका नाम दमोह पड़ा। अकबर के साम्राज्य में यह मालवा सूबे का हिस्सा था। दमोह के अधिकतर प्राचीन मंदिरों को मुग़लों ने नष्ट कर दिया तथा इनकी सामग्री एक क़िले के निर्माण में प्रयुक्त की गई। इस नगर में शिव, पार्वती एवं विष्णु की मूर्तियों सहित कई प्राचीन प्रतिमाएँ हैं। दमोह में दो पुरानी मस्जिदें, कई घाट और जलाशय हैं। दमोह का 14 वीं सदी में मुसलमानों के प्रभाव से महत्त्व बढ़ा और यह मराठा प्रशासकों का केन्द्र भी रहा। ऐतिहासिक नगर दमोह के आस-पास का इलाका पुरातत्त्व की दृष्टि से समृद्ध है, जहाँ छित्ता एवं रोंड जैसे प्राचीन स्थल हैं।जिले को जानिये जिले का प्रोफाइल जिले का मेप कलेक्टर के कार्यकाल जिला पंचायत एन.आई.सी.जिला केंद्र मायसेम सीमेंट रेलवे समय सारणी हमसे संपर्क करें सिटीजन ऑनलाइन आवेंदन/ एस.एम.एस. अलर्ट/ स्टेटस अपडेट्स सूचना का अधिकार ग्रामोदय (GoI) एम.पी.कोड सी.एम.हेल्पलाइन जन शिकायत निवारण ई-उपार्जन समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन ई-स्कॉलरशिप (MP Govt.) हिन्दी यूनिकोड फॉण्ट का उपयोग कैसे करें| .....More

अन्य जानकारी म.प्र.राज्य अ.ज.जा.आयोग के 16वां प्रतिवेदन वर्ष 2011-12 में ग्रामीण विद्युतीकरण योजना की जानकारी| पुरातत्व विभाग के अंतर्गत जिले के महत्वपूर्ण स्थल| आपदा प्रबंधन आदिम जाति कल्याण कार्य गैर वन पड़त भूमि का विवरण सेवा क्षेत्र योजना सामाजिक - आर्थिक एवं जाति जनगणना २०११ अंतर्गत दावे आपत्तियों हेतु विहित प्रपत्र (ग्रामीण क्षेत्र) वोटर एजूटमेंट सामग्री ECI-UND (Voter Awareness/SVEEP)

Visitor No.




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दमोह जिले में आपका स्वागत दमोह मध्यप्रदेश का एक जिला है, जो कि भारत के मध्य में स्थित है। यह प्रदेश के उत्तर पूर्वी भाग में स्थित है और भौगोलिक रुप से 23 डिग्री 09' उत्तर देशांतर एवं 79 डिग्री 03' पूर्व देशांतर पर स्थित है। जिला पश्चिम में सागर, दक्षिण में नरसिंहपुर एवं जबलपुर, उत्तर में छतरपुर तथा पूर्व में पन्ना और कटनी से घिरा है।

शिक्षा[संपादित करें]

विद्यालय[संपादित करें]

  • केन्द्रीय विद्यालय
  • महाऋषि विद्या मन्दिर
  • शास. उत्कृष्टता हा. से. स्कूल
  • मिशन उ. मा. वि.
  • सरस्वती उ.मा. वि

महाविद्यालय[संपादित करें]

  • सरकारी पीजी महाविद्यालय

शास. कमला नेहरू कालेज गुरू रामदास कालेज टाइम्स कालेज ला कालेज विजय लाल कालेज ओजस्विनी कालेज

देखने योग्य[संपादित करें]

  • गिरि दर्शन
  • बंदकपुर शिव मन्दिर
  • पुरातत्व संग्रहालय
  • प्रसिध्द हनुमान मन्दिर (भौंरासा) दमोह से 18 कि.मी. दूर यह गाव यहा के हनुमान मन्दिर व यहा के सन्त श्री दद्दा जी के कारन प्रसिद्ध है
  • हनुमान गड़ी मन्दिर
  • बूंदा बहू मन्दिर
  • बड़ी देवी मन्दिर
  • प्रसिद्ध लक्ष्मण कुटी मन्दिर
  • प्रसिद्ध बुन्देली महोत्सव (14 दिन)
  • मढ़कोले मंदिर ( तीन नदियों - कोपरा, व्यारमा, सुनार का संगम ) बहुत मन मोहक है।
  • जैन मन्दिर कुन्डलपुर यह मन्दिर विश्व के जैन समुदाय का आस्था का स्थल है


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पर्यटन

पुरातत्व विभाग के अंतर्गत जिले के महत्वपूर्ण स्थल बांदकपुर : बांदकपुर मध्यप्रदेश में दमोह जिले में एक छोटा सा शहर है, लेकिन यह भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिर- जागेश्वर नाथ मंदिर के लिए जाना जाता है। बसंत पंचमी और शिवरात्रि पर हर साल बड़े मेले का आयोजन होता है। सोमवती अमावस्या पर बहुत भीड़ होती है | मंदिर के विशाल प्रांगण में मुख्य मंदिर के अलावा राधा-कृष्ण, देवी दुर्गा, काल भैरव, भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, देवी नर्मदा आदि के मंदिर स्थित है|

कनेक्टिविटी: • सड़क मार्ग - यह अच्छी तरह से सभी दिशाओं से सड़कों से जुड़ा हुआ है। यह दमोह से 14 किमी दूर है। बसों और अन्य सार्वजनिक वाहनों की नियमित सेवा दमोह से उपलब्ध हैं। • एयरपोर्ट - निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर बांदकपुर से लगभग 133 किलोमीटर की दूरी पर है। • रेल -हालांकि बांदकपुर में एक रेल स्टेशन है, पैसेंजर ट्रेनों के अलावा कुछ एक्सप्रेस ट्रेन भी रुकती है ।


कुण्डलपुर : कुण्डलपुर भारत में जैन धर्म के लिए एक ऐतिहासिक तीर्थ स्थल है। यह मध्य प्रदेश के दमोह जिले में दमोह शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुंडलगिरी में है। कुण्डलपुर में बैठे (पद्मासन) आसन में बड़े बाबा (आदिनाथ) की एक प्रतिमा है। कनेक्टिविटी: • सड़क मार्ग - यह सभी दिशाओं से सड़कों से जुड़ा हुआ है। कुण्डलपुर के आस-पास के शहर हटा दमोह, सागर, छतरपुर, जबलपुर से नियमित बस सेवा है| • एयरपोर्ट - कुण्डलपुर से लगभग 155 किलोमीटर की दूरी पर निकटतम हवाई अड्डा, जबलपुर है। • रेल - कुण्डलपुर तक पहुँचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन से 37 किलोमीटर की दूरी पर दमोह रेलवे स्टेशन है।

जटाशंकर  : दमोह शहर की परिसीमा में स्थित जटाशंकर मंदिर एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति विजराजमान हैं जो कि हिन्दु धर्म में विनाषक है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ जटाशंकर अपनी प्राकृतिक सौन्दर्य के लिये भी प्रसिद्ध है। यहाँ लोग शान्ति और प्राकृतिक वातावरण का आनंद उठाने आते है। साथ ही अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु मंदिर में पूजा अर्चना करते है। मंदिर और जटाशंकर पहाड़ी का पुरातात्विक महत्तव है।


नोहलेश्वर मंदिर : यह शिव मंदिर नोहटा गांव से 01 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। शिव को यहाँ महादेव एवं नोहलेश्वर के नाम से जाना जाता है। इसका निर्माण 950-1000 ई.वी के आस पास हुआ था। कुछ लोग के अनुसार इस मंदिर के निर्माण का काम चालुक्य वंष के कलचुरी राजा अवनी वर्मा की रानी ने कराया था। 10 वीं शताब्दी के कलचुरी साम्राज्य की स्थापत्य कला का एक बेजोड़ एंव महत्तवपूर्ण नमूना है नोहलेश्वर मंदिर। यह एक ऊचें चबूतरे पर बना है। इसमें पंचरथ, गर्भगृह, अन्तराल, मण्डप एवं मुख मण्डप आदि भाग है।


गिरीदर्शन  : यह स्थान दमोह से जबलपुर राष्ट्रीय मार्ग पर स्थित हैं जो कि जबेरा से 05 कि.मी. एंव सिंग्रामपुर से 07 कि.मी. कि दूरी पर हरे-भरे जगंलो से घिरी पहाड़ी पर स्थित है। यह दो मंजिला रेस्ट हाऊस कम वाच टावर वन विभाग के द्वारा निर्मित है। यह स्थाप्तय कला का बेजोड़ नमूना है। मेन रोड से एक सकरी गली टेंक के किनारे से होती हुई रेस्ट हाऊस तक पहुचती है। यहाँ ठहरने के लिए रिजर्वेशन दमोह के डी.एफ.ओ ऑफिस से करवाया जा सकता हैं। यहाँ की छोटी पहाड़ी के रास्ते हरियाली और सुन्दर दृश्य देखे जा सकते है तथा ऊपर से उगते और ढलते सूरज के दृश्य आने वालो को बहुत लुभाते है। ये दृश्य रेस्ट हाऊस की छत से देखे जा सकते है। रात के समय यहाँ जंगली जानवर भी दिखाई देते है।


सिंगोरगढ़ का किला : सिंग्रामुपर से करीब 06 कि.मी दूर ऐतिहासिक महत्व वाला सिंगोरगढ़ का किला स्थित है। यहाँ प्राचीन काल में एक सम्यता थी। राजा बाने बसोर ने एक बड़ा और मजबूत किला बनवाया था। और राजा गावे ने लम्बे समय तक यहाँ राज किया। 15 वीं शताब्दी के अंत में राजा दलपत शाह और उनकी रानी दुर्गावती यहाँ रहते थे। राजा दलपत शाह की मौत के बाद रानी ने अकबर की सेना के सेनापति आसिफ खान से युद्ध किया था। यहाँ एक तलाब भी है। जो कमल के फूलो से भरा है। यह एक आदर्श पिकनिक स्पॉट है।


निदान कुण्ड : भैंसाघाट रेस्ट हाऊस से करीब 1/2 कि.मी. दूर भैसा गांव से एक सड़क इस जलप्रपात के लिए जाती है। मुख्य सड़क से 01 कि.मी. से एक जलधारा 100 फिट की ऊचांई से काली चट्टान से नीचे गिरती है। इसे निदान कुण्ड कहते है। जुलाई से अगस्त माह में इस जलप्रपात में पानी बहुतायत से होता है। अतः सामने से इसका नजारा अद्भुत होता है। सितम्बर एंव अक्ट