चंदेरी

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चंदेरी
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्य प्रदेश
सा
जनसंख्या २८,३१३ (२००१) (2001 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 456 मीटर (1,496 फी॰)

निर्देशांक: 24°43′N 78°08′E / 24.72°N 78.13°E / 24.72; 78.13

चंदेरी का विहंगम दृष्य

मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में स्थित चंदेरी एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक नगर है। मालवा और बुन्देलखंड की सीमा पर बसा यह नगर शिवपुरी से १२७ किलोमीटर, ललितपुर से ३७ किलोमीटर और ईसागढ़ से लगभग ४५ किलोमीटर की दूरी पर है। बेतवा नदी के पास बसा चंदेरी पहाड़ी, झीलों और वनों से घिरा एक शांत नगर है, जहां सुकून से कुछ समय गुजारने के लिए लोग आते हैं। खंगार जाति और मालवा के सुल्तानों द्वारा बनवाई गई अनेक इमारतें यहां देखी जा सकती है। इस ऐतिहासिक नगर का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। ११वीं शताब्दी में यह नगर एक महत्वपूर्ण सैनिक केंद्र था और प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी यहीं से होकर जाते थे। वर्तमान में बुन्देलखंडी शैली में बनी हस्तनिर्मित साड़ियों के लिए चन्देरी काफी चर्चित है। चंदेरी आज ईतनी विख्यात हो गई है, कि यहां पर कई वोलीबुड़ फिल्मों की शुटिंग हो चुकी है,,,अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने अभी 2018 में एक फिल्म की शुटिंग की हैं।

इतिहास[संपादित करें]

चंदेरी को चित्तौड़ के राणा सांगा ने सुलतान महमूद खिलजी से जीतकर अपने अधिकार में कर लिया था। लगभग सन् १५२७ में मेदिनी राय नाम के एक राजपूत सरदार ने, जब अवध को छोड़ सभी प्रदेशों पर मुगल शासक बाबर का प्रभुत्व स्थापित हो चुका था, चंदेरी में अपनी शक्ति स्थापित की। फिर मुगलो को हराकर पूरनमल जाट ने इसे जीता।शेरशाह सूरी ने पूरणमल जाट के समय चंदेरी के दुर्ग ओर आक्रमण किया था लेकिन शेरशाह सूरी इस दुर्ग को जीत पाने में असमर्थ सिद्ध हुआ तो शेरशाह सूरी ने धोखे से संधि वार्ता के बहाने छल से पूरणमल जाट की हत्या कर दी और अंत में शेरशाह ने आक्रमण किया।शेरशाह सूरी ने कत्लेआम की आज्ञा दी और भयंकर मारकाट के बाद किले को जीत लिया

राजा पूरणमल जाट का इतिहास[संपादित करें]

राजा पूरणमल जाट मुगल काल और सूरी वंश के समय मे चंदेरी के शासक थे। राजा पूरणमल के पूर्वजो की जड़े गुप्त वंश(धारण गोत्र) के जाटों में जाकर मिलती है। चंदेरी का प्राचीन नाम चंद्रनगर था। गुप्त वंश के राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने यहां पर किले का निर्माण करवाया था।उन्ही(चंद्रगुप्त विक्रमादित्य) के नाम से यह जगह चंद्रनगर( चंद्रपुर) नाम से जानी गई थी। चंद्रनगर से अपभ्रंश होकर यह नगर चंदेरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ । गुप्त वंशी जाट चंदेरी के शासक होने के कारण चंदेरी के नाम परचंदेरी(चंदेरिया/चंदेलिया) नाम से प्रसिद्ध है|गुप्त वंश की चंदेरी(चंदेरिया/चंदेलिया) शाखा के जाट मध्यप्रदेश, राजस्थान,पंजाब में निवास करते है।चंदेरी किले के निर्माण पर कुछ दूसरे वंश भी दावा प्रस्तुत करते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा प्रामाणिक दावा गुप्त वंश के जाट राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य का ही सिद्ध होता है चंदेरी के गुप्त वंश के पश्चात यह किला मालवा के जाट महाराजा यशोधर्मन के अधिकार में रहा था। यशोधर्मन के पश्चात चंदेरी का किला अलाउद्दीन ख़िलजी ,तुगलक वंश ,लोधी वंश , और मालवा के सुल्तान महमूद ख़िलजी के अधीन रहा था । 1527 ईस्वी में मैदिनी राय खंगार ने मालवा के सुल्तान के समय चंदेरी पर कब्ज़ा कर लिया था। लेकिन 1528 ईस्वी में बाबर ने मेदिनीराय खंगार को हराकर चंदेरी किले को जीत लिया था। बाबार के समय मुगलिया अत्याचार से जब चंदेरी की जनता त्राहि त्राहि कर रही थी उस समय एक जाट यौद्धा पूरणमल चंदेरी का उद्धारक बनके उभरा था। मुगल सेना और पूरणमल जाट के मध्य 1529 ईस्वी में भयंकर युद्ध हुआ जिसमें मुगलो ने जाटों के आगे युद्ध भूमि में घुटने टेक दिए इस तरह अविजित मुगलो ने प्रथम बार मध्य भारत मे हार का स्वाद चखा था। भारत भूमि के पुत्र पूरणमल जाट ने मुगलो की रक्त सरिता में स्नान कर, भारत माता की आत्मा को तृप्त किया था। चंदेरी के किले पर चंद्रगुप्त के वंशज राजा पूरणमल जाट का अधिकार हो गया था। जाटों ने चंदेरी का चौमुखी विकास किया था। चंदेरी के दुर्ग को सुरक्षित अभेद किले के रूप में परिवर्तित करने के लिए किले में नवीन निर्माण किए गए थे। पूरणमल जाट ने मुगलो के सेनायनक(पठान) को जिस जगह काटा था आज वो खूनी दरवाजा कहलाता है। बाद में चुन चुनकर मुगल तुर्को को इस ही जगह (खूनी दरवाजे) पर मौत के घाट उतारा गया था। तब से इसी खुनी दरवाजे पर शत्रु के रक्त का अभिषेक किया जाता है।अर्थात शत्रुओ को खूनी दरवाजे पर मृत्यु दंड दिया जाता था। दिल्ली के अफगान सुल्तान शेरशाह सूरी ने 1542 ईसवी के अंत मे चंदेरी पर आक्रमण किया था। बाबर के समय शेरशाह सूरी ने चंदेरी के 1528 ईस्वी के युद्ध मे एक सैनिक के रूप में भाग लिया था। शेरशाह ने सोचा कि पल भर में चंदेरी को जीत लेगा लेकिन भविष्य में शेरशाह का सामना उन जाट वीरो से होने वाला था जिन्होंने रण भूमि में वीरगति या विजय को अपना लक्ष्य बना रखा था।शीघ्र ही शेरशाह को पता चल गया कि उसका पाला सवा शेरो से पड़ गया है। चार महीने तक लाख प्रयत्न करने के बाद भी शेरशाह को युद्ध क्षेत्र में सिर्फ नाकामी हाथ लगी थी। रणक्षेत्र में हर बार विजयश्री का सेहरा जाट राजा पूरणमल के सिर पर ही बंधा था। जाटों ने अपनी युद्ध कौशलता वीरता,साहस के दम पर अफगानों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था जब युद्ध क्षेत्र में विजय की कोई भी आश शेष नही बची थी । तब अफगानी लोमड़ी शेरशाह ने छल कपट का सहारा लिया शेरशाह ने अपना शांति दूत चंदेरी के राजा पूरणमल जाट के पास भेजा दूत ने शेरशाह का संदेश राजा को सुनाते हुए बताया कि शेरशाह आपकी वीरता का मुरीद हो गया है अतः वो ऐसे वीर यौद्धा से युद्ध की जगह मित्रता (संधि) करना चाहता है। जाट राजा कुरान की सौगंध के साथ भेजे इस संदेश पर विश्वास करते हुए किले से बाहर आकर संधि वार्ता करने के लिए शेरशाह के कैम्प में आ गया था। लेकिन शेरशाह ने मित्रता की आड़ में निहत्थे राजा की पीठ में खंजर घोप कर उसकी हत्या कर दी जब यह खबर किले में पहुँची तो जाट महिलाओं और बच्चो को गुप्त रास्ते से सुरक्षित क्षेत्रो में भेज दिया गया था आज वो जाट लोग चंदेरी से आने के कारण चंदेरी(चंदेरिया/,चंदेलिया) ,गोत्र के जाट कहलाते हैं। किले में शेष बचे सैनिकों और वीरांगनाओ ने कायर की तरह मरने के बजाए युद्ध भूमि में प्राणों का बलिदान देना अपना सनातन धर्म समझा इसके बाद भयंकर कत्ले आम हुआ था।एक और भारतीय राजा अफगानों की छल का शिकार हुआ था।इसी के साथ भारत के एक स्वर्णिम अध्याय का दुःखद अंत हुआ

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

24°43′12″N 78°07′48″E / 24.72000°N 78.13000°E / 24.72000; 78.13000

चन्देरी किला[संपादित करें]

चन्देरी दुर्ग

यह किला चन्देरी का सबसे प्रमुख आकर्षण है। बुन्देला राजपूत राजाओं द्वारा बनवाया गया यह विशाल किला उनकी स्थापत्य कला की जीवंत मिशाल है। किले के मुख्य द्वार को खूनी दरवाजा कहा जाता है। यह किला पहाड़ी की एक चोटी पर बना हुआ है। यह पहाड़ी की चोटी नगर से 71 मीटर ऊपर है। यह मुगावली से ३८ किलोमीटर मीटर दूर है। २०१८ की बालीवुड फिल्म स्त्री के बहुत से दृश्यों की शूटिंग यहीं पर हुई है ।

कोशक महल[संपादित करें]

इस महल को 1445 ई. में मालवा के महमूद खिलजी ने बनवाया था। यह महल चार बराबर हिस्सों में बंटा हुआ है। कहा जाता है कि सुल्तान इस महल को सात खंड का बनवाना चाहता था लेकिन मात्र ३ खंड का ही बनवा सका। महल के हर खंड में बॉलकनी, खिड़कियों की कतारें और छत की गई शानदार नक्कासियां हैं।

परमेश्वर ताल[संपादित करें]

इस खूबसूरत ताल को बुन्देला राजपूत राजाओं ने बनवाया था। ताल के निकट ही एक मंदिर बना हुआ है। राजपूत राजाओं के तीन स्मारक भी यहां देखे जा सकते हैं। चन्देरी नगर के उत्तर पश्चिम में लगभग आधे मील की दूरी पर यह ताल स्थित है।

ईसागढ़[संपादित करें]

चन्देरी से लगभग ४५ किलोमीटर दूर ईसागढ़ तहसील के कडवाया गांव में अनेक खूबसूरत मंदिर बने हुए हैं। इन मंदिरों में एक मंदिर दसवीं शताब्दी में कच्चापगहटा शैली में बना है। मंदिर का गर्भगृह, अंतराल और मंडप मुख्य आकर्षण है। चंदल मठ यहां का अन्य लोकप्रिय और प्राचीन मंदिर है। इस गांव में एक क्षतिग्रस्त बौद्ध मठ भी देखा जा सकता है।

बूढ़ी चन्देरी[संपादित करें]

ओल्ड चन्देरी सिटी को बूढ़ी नाम से जाना जाता है। 9वीं और 10वीं शताब्दी में बने जैन मंदिर यहां के मुख्य आकर्षण हैं। जिन्हें देखने हेतु हर साल बड़ी संख्या में जैन धर्म के अनुयायी आते हैं।

शहजादी का रोजा[संपादित करें]

यह स्मारक कुछ अनजान राजकुमारियों को समर्पित है। स्मारक के अंदरूनी हिस्से में शानदार सजावट की गई है। स्मारक की संरचना ज्यामिती से प्रभावित है।

जामा मस्जिद[संपादित करें]

चन्देरी में बनी जामा मस्जिद मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी मस्जिदों में एक है। मस्जिद के उठे हुए गुंबद और लंबी वीथिका काफी सुंदर हैं।

देवगढ़ किला[संपादित करें]

चन्देरी से 25 किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व में देवगढ़ किला स्थित है। किले के भीतर 9वीं और 10 वीं शताब्दी में बने जैन मंदिरों का समूह है जिसमें प्राचीन काल की कुछ मूर्तियां देखी जा सकती हैं। किले के निकट ही 5वीं शताब्दी का विष्णु दशावतार मंदिर बना हुआ है, जो अपनी सुंदर मूर्तियों और नक्कासीदार स्तंभों के लिए जाना जाता है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग-

ग्वालियर चन्देरी का निकटतम एयरपोर्ट है, जो लगभग 227 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चन्देरी पहुंचने के लिए यहां से बसों और टैक्सियों की व्यवस्था है।

रेल मार्ग-

अशोक नगर और ललितपुर निकटतम रेलवे स्टेशन हैं। यहां से नियमित अंतराल में बसें चन्देरी के लिए चलती हैं।

सड़क मार्ग-

राज्य के अधिकांश हिस्सों से सड़क मार्ग के द्वारा चन्देरी पहुंचा जा सकता है। झांसी, ग्वालियर, टीकमगढ़ आदि शहरों से नियमित बसों की सुविधा चन्देरी के लिए उपलब्ध है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

चंदेरी अशोकनगर जिले की एक तेहसील जो बहुत ही सुंदर ऐतिहासिक नगरी हैैं। -दुर्गेेेश दांगी बदरबास

  • Hunter, William Wilson, James Sutherland Cotton, Richard Burn, William Stevenson Meyer, eds. (1909).
  • Imperial Gazetteer of India, vol. 9. Oxford, Clarendon Press.