राजपूत

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राजपूत

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इलस्ट्रेटेड लंदन समाचार से, 1876 राजस्थान के राजपूतों का उत्कीर्णन
धर्म हिन्दू, इस्लाम और सिख धर्म
भाषा हिन्द-आर्य भाषाएँ
वासित राज्य भारतीय उपमहाद्वीप, मुख्यतः उत्तर भारत, सौराष्ट्र (गुजरात)

राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल है, जो कि राजपुत्र का अपभ्रंश है। राजस्थान में राजपूतों के अनेक वंश हैं। राजस्थान को ब्रिटिशकाल मे राजपूताना भी कहा गया है। पुराने समय में आर्य जाति में केवल चार वर्णों की व्यवस्था थी, किन्तु बाद में इन वर्णों के अंतर्गत अनेक जातियाँ बन गईं। क्षत्रिय वर्ण की अनेक जातियों और उनमें समाहित कई देशों की विदेशी जातियों को कालांतर में राजपूत जाति कहा जाने लगा। कवि चंदबरदाई के कथनानुसार राजपूतों की 36 जातियाँ थी। उस समय में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत सूर्यवंश और चंद्रवंश के राजघरानों का बहुत विस्तार हुआ। राजपूतों में मेवाड़ के महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान का नाम सबसे ऊंचा है।

शीर्षक[संपादित करें]

राजपूतों की उत्पत्ति[संपादित करें]

राजपूत वंश की उत्पत्ति के विषय में विद्धानों के दो मत प्रचलित हैं- एक का मानना है कि राजपूतों की उत्पत्ति विदेशी है, जबकि दूसरे का मानना है कि राजपूतों की उत्पत्ति भारतीय है। 12वीं शताब्दी के बाद के उत्तर भारत के इतिहास को टॉड ने 'राजपूत काल' भी कहा है। कुछ इतिहासकारों ने प्राचीन काल एवं मध्य काल को 'संधि काल' भी कहा है। इस काल के महत्वपूर्ण राजपूत वंशों में राष्ट्रकूट वंश, दहिया वन्श, डांगी वंश, चालुक्य वंश, चौहान वंश,कटहरिय़ा वंश, चन्देल वंश, सैनी, परमार वंश एवं गहड़वाल वंश आदि आते हैं।राजपूत सुध्ध रूप से १००% भारतीय है ,इन्हें राम और कृष्ण के वंस से माना गया है ! , हर्षवर्धन की मृत्यु के उपरान्त जिन महान शक्तियों का उदय हुआ था, उनमें अधिकांश राजपूत वर्ग के अन्तर्गत ही आते थे।ऐजेन्ट टोड ने 12वीं शताब्दी के उत्तर भारत के इतिहास को 'राजपूत काल' भी कहा है। कुछ इतिहासकारों ने प्राचीन काल एवं मध्य काल को 'संधि काल' भी कहा है। इस काल के महत्त्वपूर्ण राजपूत वंशों में राष्ट्रकूट वंश, चालुक्य वंश, चौहान वंश, चंदेल वंश, परमार वंश एवं गहड़वाल वंश आदि आते हैं।

विदेशी उत्पत्ति के समर्थकों में महत्वपूर्ण स्थान 'कर्नल जेम्स टॉड' का है। वे राजपूतों को विदेशी सीथियन जाति की सन्तान मानते हैं। तर्क के समर्थन में टॉड ने दोनों जातियों (राजपूत एवं सीथियन) की सामाजिक एवं धार्मिक स्थिति की समानता की बात कही है। उनके अनुसार दोनों में रहन-सहन, वेश-भूषा की समानता, मांसाहार का प्रचलन, रथ के द्वारा युद्ध को संचालित करना, याज्ञिक अनुष्ठानों का प्रचलन, अस्त्र-शस्त्र की पूजा का प्रचलन आदि से यह प्रतीत होता है कि राजपूत सीथियन के ही वंशज थे।

विलियम क्रुक ने 'कर्नल जेम्स टॉड' के मत का समर्थन किया है। 'वी.ए. स्मिथ' के अनुसार शक तथा कुषाण जैसी विदेशी जातियां भारत आकर यहां के समाज में पूर्णतः घुल-मिल गयीं। इन देशी एवं विदेशी जातियों के मिश्रण से ही राजपूतों की उत्पत्ति हुई।

भारतीय इतिहासकारों में 'ईश्वरी प्रसाद' एवं 'डी.आर. भंडारकर' ने भारतीय समाज में विदेशी मूल के लोगों के सम्मिलित होने को ही राजपूतों की उत्पत्ति का कारण माना है। भण्डारकर, कनिंघम आदि ने इन्हे विदेशी बताया है। । इन तमाम विद्वानों के तर्को के आधार पर निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि, यद्यपि राजपूत क्षत्रियों के वंशज थे, फिर भी उनमें विदेशी रक्त का मिश्रण अवश्य था। अतः वे न तो पूर्णतः विदेशी थे, न तो पूर्णत भारतीय।


सूर्य वन्श की शाखायें:-

१. कछवाह २. राठौड ३. मौर्य ४. सिकरवार ५. सिसोदिया ६.गहलोत ७.गौर ८.गहलबार ९.रेकबार १०. बडगूजर 11.बिष्ट 12.कलहश 13. कटहरिय़ा

चन्द्र वंश की शाखायें:-

1.जादौन 2 भाटी ३ मकवाना [झाला] 5.तन्वर 6 चन्देल 7 .छोंकर 8 होंड 9 पुण्डीर 10.कटैरिया 11´दहिया 12. वैस

अग्नि वन्श की शाखायें:-'

१.परिहार २.सोलंकी ३.चौहान ४.परमार/ पंवार

ऋषिवंश की बारह शाखायें:-

१.सेंगर२.दीक्षित३.दायमा४.गौतम५.अनवार (राजा जनक के वंशज)६.विसेन७.करछुल८.हय९.अबकू तबकू १०.कठोक्स ११.द्लेला १२.बुन्देला चौहान वंश की चौबीस शाखायें:-

१.हाडा २.खींची ३.सोनीगारा ४.पाविया ५.पुरबिया ६.संचौरा ७.मेलवाल८. भदौरिया ९.निर्वाण १०.मलानी ११.धुरा १२.मडरेवा १३.सनीखेची १४.वारेछा १५.पसेरिया १६.बालेछा १७.रूसिया १८.चांदा१९.निकूम २०.भावर २१.छछेरिया २२.उजवानिया २३.देवडा २४.बनकर

राजपूत जातियो की सूची[संपादित करें]

क्रमांक नाम गोत्र वंश स्थान और जिला
1 सूर्यवंशी कश्यप सूर्य बुलन्दशहर आगरा मेरठ अलीगढ
2 कलहश आग्निश कलहशवंशी, सूर्यवंशी प्राचीन राजपूताना और बस्ती बलिया उत्तर प्रदेश, राजस्थान
3 गुहिलवन्शी सिसोदिया बैजपायन्,काश्यप सूर्य महाराणा उदयपुर स्टेट
4 कछवाहा मानव्य् सूर्य महाराजा जयपुर और ग्वालियर राज्य
5 राठोड कश्यप, सूर्य जोधपुर बीकानेर और पूर्व और मालवा
6 सोमवंशी अत्रैय चन्द प्रतापगढ और जिला हरदोई
7 यदुवंशी अत्रैय चन्द राजकरौली राजपूताने में
8 भाटी अत्रय जादौन महारजा ज���सलमेर राजपूताना
9 जाडेचा अत्रय यदुवंशी महाराजा कच्छ भुज
10 जादवा अत्रय जादौन शाखा अवा. कोटला ऊमरगढ आगरा
11 तन्वर व्याघ्र चन्द पाटन के राव तंवरघार जिला ग्वालियर
12 कटियार व्याघ्र तोंवर धरमपुर का राज और हरदोई
13 पालीवार व्याघ्र तोंवर गोरखपुर
14 परिहार कौशल्य सूर्य मंडोर (जोधपुर) एवं मध्यप्रदेश
15 तखी कौशल्य सूर्य, परिहार पंजाब कांगडा जालंधर जम्मू में
16 पंवार वशिष्ठ सूर्य मालवा मेवाड धौलपुर पूर्व मे बलिया
17 सोलंकी भारद्वाज चन्द्र राजपूताना मालवा सोरों जिला एटा
18 चौहान वत्स सूर्य राजपूताना पूर्व और सर्वत्र
19 बिष्ट भारद्वाज सूर्यवंशी प्राचीन में राजपूताना, यू.पी.
20 गुहिलवन्शी गहलोत बैजपायण सूर्य मथुरा कानपुर और पूर्वी जिले
21 हाडा वत्स चौहान कोटा बूंदी और हाडौती देश
22 खींची वत्स चौहान खींचीवाडा मालवा ग्वालियर
23 भदौरिया वत्स अग्निवंश नौगंवां पारना आगरा इटावा गालियर भिन्ड और भदावर स्टेट
24 देवडा वत्स चौहान राजपूताना सिरोही राज
25 शम्भरी वत्स चौहान नीमराणा रानी का रायपुर पंजाब
26 बच्छगोत्री वत्स चौहान प्रतापगढ सुल्तानपुर
27 राजकुमार वत्स चौहान दियरा कुडवार फ़तेहपुर जिला
28 पवैया वत्स चौहान ग्वालियर
29 गौर,गौड भारद्वाज सूर्य शिवगढ रायबरेली कानपुर लखनऊ
30 वैस भारद्वाज चन्द्र उन्नाव रायबरेली मैनपुरी पूर्व में
31 गेहरवार कश्यप सूर्य माडा हरदोई उन्नाव बांदा पूर्व
32 सेंगर गौतम ब्रह्मक्षत्रिय जगम्बनपुर भरेह इटावा जालौन
33 कनपुरिया भारद्वाज ब्रह्मक्षत्रिय पूर्व में राजाअवध के जिलों में हैं
34 बिसैन वत्स ब्रह्मक्षत्रिय गोरखपुर बलिया सलेमपुर देवरिया गोंडा प्रतापगढ में हैं
35 निकुम्भ वशिष्ठ सूर्य गोरखपुर आजमगढ हरदोई जौनपुर
36 सिरसेत भारद्वाज सूर्य गाजीपुर बस्ती गोरखपुर
37 च्चाराणा दहिया चन्द जालोर, सिरोही केर्, घटयालि, साचोर, गढ बावतरा,
38 कटहरिया वशिष्ठ या भारद्वाज सूर्य नाहिल पुवाय़ाँ खुटार बरेली बंदायूं मुरादाबाद शहाजहांपुर
39 वाच्छिल अत्रयवच्छिल चन्द्र मथुरा बुलन्दशहर शाहजहांपुर
40 बढगूजर वशिष्ठ सूर्य अनूपशहर एटा अलीगढ मैनपुरी मुरादाबाद हिसार गुडगांव जयपुर
41 मकवाना ॥ झाला मरीच कश्यप चन्द्र धागधरा मेवाड झालावाड कोटा हिनोतिया मालवा
42 गौतम गौतम ब्रह्मक्षत्रिय राजा अर्गल फ़तेहपुर
43 रैकवार भारद्वाज सूर्य बहरायच सीतापुर बाराबंकी
44 करचुल हैहय कृष्णात्रेय चन्द्र बलिया फ़ैजाबाद अवध
45 चन्देल चान्द्रायन चन्द्रवंशी गिद्धौर कानपुर फ़र्रुखाबाद बुन्देलखंड पंजाब गुजरात
46 जनवार कौशल्य सोलंकी शाखा बलरामपुर अवध के जिलों में
47 बहरेलिया भारद्वाज वैस की गोद सिसोदिया रायबरेली बाराबंकी
48 दीत्तत कश्यप सूर्यवंश की शाखा उन्नाव बस्ती प्रतापगढ जौनपुर रायबरेली बांदा
49 सिलार शौनिक चन्द्र सूरत राजपूतानी
50 सिकरवार सांकृत सूर्य ग्वालियर आगरा और उत्तरप्रदेश में
51 सुरवार गर्ग सूर्य कठियावाड में
52 सुर्वैया वशिष्ठ यदुवंश काठियावाड
53 मौर्य गौतम सूर्य बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान
54 टांक (तत्तक) शौनिक नागवंश मैनपुरी और पंजाब
55 गुप्त गार्ग्य चन्द्र अब इस वंश का पता नही है
56 कौशिक कौशिक चन्द्र बलिया आजमगढ गोरखपुर
57 भृगुवंशी भार्गव चन्द्र वनारस बलिया आजमगढ गोरखपुर
58 गर्गवंशी गर्ग ब्रह्मक्षत्रिय नृसिंहपुर सुल्तानपुर , मार्टींनगँज आजमगढ
59 पडियारिया, देवल,सांकृतसाम ब्रह्मक्षत्रिय राजपूताना
60 ननवग कौशल्य चन्द्र जौनपुर जिला
61 वनाफ़र पाराशर,कश्यप चन्द्र बुन्देलखन्ड बांदा वनारस
62 जैसवार कश्यप यदुवंशी मिर्जापुर एटा मैनपुरी
63 नैय्दु वैक्ला सूर्य दक्षिण मद्रास तमिलनाडु अन्ध्र कर्नाटक में
64 निमवंशी कश्यप सूर्य संयुक्त प्रांत
65 वैनवंशी वैन्य सोमवंशी मिर्जापुर
66 दाहिमा गार्गेय ब्रह्मक्षत्रिय काठियावाड राजपूताना
67 पुण्डीर कपिल ब्रह्मक्षत्रिय पंजाब गुजरात रींवा यू.पी.
68 तुलवा आत्रेय चन्द्र राजाविजयनगर
69 कटोच कश्यप ब्रह्मक्षत्रिय राजानादौन कोटकांगडा
70 चावडा,पंवार,चोहान,वर्तमान कुमावत वशिष्ठ पंवार की शाखा मलवा रतलाम उज्जैन गुजरात मेवाड
71 अहवन वशिष्ठ चावडा,कुमावत खेरी हरदोई सीतापुर बारांबंकी
72 डौडिया वशिष्ठ चौहान शाखा गुजरात मेवाड बुलंदशहर मुरादाबाद बांदा गल्वा पंजाब
73 गोहिल बैजबापेण गहलोत शाखा काठियावाड
74 बुन्देला कश्यप गहरवारशाखा बुन्देलखंड के रजवाडे
75 काठी कश्यप गहरवारशाखा काठियावाड झांसी बांदा
76 जोहिया पाराशर चन्द्र पंजाब देश मे
77 गढावंशी कांवायन चन्द्र गढावाडी के लिंगपट्टम में
78 मौखरी अत्रय चन्द्र प्राचीन राजवंश था
79 लिच्छिवी कश्यप सूर्य प्राचीन राजवंश था
80 बाकाटक विष्णुवर्धन सूर्य अब पता नहीं चलता है
81 पाल कश्यप सूर्य यह वंश सम्पूर्ण भारत में बिखर गया है
82 सैन अत्रय ब्रह्मक्षत्रिय यह वंश भी भारत में बिखर गया है
83 कदम्ब मान्डग्य ब्रह्मक्षत्रिय दक्षिण महाराष्ट्र मे हैं
84 पोलच भारद्वाज ब्रह्मक्षत्रिय दक्षिण में मराठा के पास में है
85 बाणवंश कश्यप असुरवंश श्री लंका और दक्षिण भारत में,कैन्या जावा में
86 काकुतीय भारद्वाज चन्द्र,प्राचीन सूर्य था अब पता नही मिलता है
87 सुणग वंश भारद्वाज चन्द्र,पाचीन सूर्य था अब पता नही मिलता है
88 दहिया कश्यप राठौड शाखा मारवाड में जोधपुर
89 जेठवा कश्यप हनुमानवंशी राजधूमली काठियावाड
90 मोहिल वत्स चौहान शाखा महाराष्ट्र मे है
91 बल्ला भारद्वाज सूर्य काठियावाड मे मिलते हैं
92 डाबी वशिष्ठ यदुवंश राजस्थान
93 खरवड वशिष्ठ यदुवंश मेवाड उदयपुर
94 सुकेत भारद्वाज गौड की शाखा पंजाब में पहाडी राजा
95 पांड्य अत्रय चन्द अब इस वंश का पता नहीं
96 पठानिया पाराशर वनाफ़रशाखा पठानकोट राजा पंजाब
97 बमटेला शांडल्य विसेन शाखा हरदोई फ़र्रुखाबाद
98 बारहगैया वत्स चौहान गाजीपुर
99 भैंसोलिया वत्स चौहान भैंसोल गाग सुल्तानपुर
100 चन्दोसिया भारद्वाज वैस सुल्तानपुर
101 चौपटखम्ब कश्यप ब्रह्मक्षत्रिय जौनपुर
102 धाकरे भारद्वाज(भृगु) ब्रह्मक्षत्रिय आगरा मथुरा मैनपुरी इटावा हरदोई बुलन्दशहर
103 धन्वस्त यमदाग्नि ब्रह्मक्षत्रिय जौनपुर आजमगढ वनारस
104 धेकाहा कश्यप पंवार की शाखा भोजपुर शाहाबाद
105 दोबर(दोनवर) वत्स या कश्यप ब्रह्मक्षत्रिय गाजीपुर बलिया आजमगढ गोरखपुर
106 हरद्वार भार्गव चन्द्र शाखा आजमगढ
107 जायस कश्यप राठौड की शाखा रायबरेली मथुरा
108 जरोलिया व्याघ्रपद चन्द्र बुलन्दशहर
109 जसावत मानव्य कछवाह शाखा मथुरा आगरा
110 जोतियाना(भुटियाना) कश्यप कछवाह शाखा मुजफ़्फ़रनगर मेरठ
109 घोडेवाहा मानव्य कछवाह शाखा लुधियाना होशियारपुर जालन्धर
110 कछनिया शान्डिल्य ब्रह्मक्षत्रिय अवध के जिलों में
111 काकन भृगु ब्रह्मक्षत्रिय गाजीपुर आजमगढ
112 कासिब कश्यप कछवाह शाखा शाहजहांपुर
113 किनवार कश्यप सेंगर की शाखा पूर्व बंगाल और बिहार में
114 बरहिया गौतम सेंगर की शाखा पूर्व बंगाल और बिहार
115 लौतमिया भारद्वाज बढगूजर शाखा बलिया गाजी पुर शाहाबाद
116 मौनस मानव्य कछवाह शाखा मिर्जापुर प्रयाग जौनपुर
117 नगबक मानव्य कछवाह शाखा जौनपुर आजमगढ मिर्जापुर
118 पलवार व्याघ्र सोमवंशी शाखा आजमगढ फ़ैजाबाद गोरखपुर
119 रायजादे पाराशर चन्द्र की शाखा पूर्व अवध में
120 सिंहेल कश्यप सूर्य आजमगढ परगना मोहम्दाबाद
121 तरकड कश्यप दीक्षित शाखा आगरा मथुरा
122 तिसहिया कौशल्य परिहार इलाहाबाद परगना हंडिया
123 तिरोता कश्यप तंवर की शाखा आरा शाहाबाद भोजपुर
124 उदमतिया वत्स ब्रह्मक्षत्रिय आजमगढ गोरखपुर
125 भाले वशिष्ठ पंवार अलीगढ
126 भालेसुल्तान भारद्वाज वैस की शाखा रायबरेली लखनऊ उन्नाव
127 जैवार व्याघ्र तंवर की शाखा दतिया झांसी बुन्देलखंड
128 सरगैयां व्याघ्र सोमवंश हमीरपुर बुन्देलखण्ड
129 किसनातिल अत्रय तोमरशाखा दतिया बुन्देलखंड
130 टडैया भारद्वाज सोलंकीशाखा झांसी ललितपुर बुन्देलखंड
131 खागर अत्रय यदुवंश शाखा जालौन हमीरपुर झांसी
132 पिपरिया भारद्वाज गौडों की शाखा बुन्देलखंड
133 सिरसवार अत्रय चन्द्र शाखा बुन्देलखंड
134 खींचर वत्स चौहान शाखा फ़तेहपुर में असौंथड राज्य
135 खाती कश्यप दीक्षित शाखा बुन्देलखंड,(राजस्थान में कम संख्या होने के कारण इन्हे बढई गिना जाने लगा)
136 आहडिया बैजवापेण गहलोत आजमगढ
137 उदावत बैजवापेण गहलोत आजमगढ
138 उजैने वशिष्ठ पंवार आरा डुमरिया
139 अमेठिया भारद्वाज गौड अमेठी लखनऊ सीतापुर
140 दुर्गवंशी कश्यप दीक्षित राजा जौनपुर राजाबाजार
141 बिलखरिया कश्यप दीक्षित प्रतापगढ उमरी राजा
142 डोगरा कश्यप सूर्य कश्मीर राज्य,हिमाचल प्रदेश और बलिया
143 निर्वाण वत्स चौहान राजपूताना (राजस्थान)
144 जाटू व्याघ्र तोमर राजस्थान,हिसार पंजाब
145 नरौनी मानव्य कछवाहा बलिया आरा
146 भनवग भारद्वाज कनपुरिया जौनपुर
147 गिदवरिया वशिष्ठ पंवार बिहार मुंगेर भागलपुर
148 बघेल कश्यप सूर्य रीवा राज्य में बघेलखंड
149 कटारिया भारद्वाज सोलंकी झांसी मालवा बुन्देलखंड
150 रजवार वत्स चौहान पूर्व मे बुन्देलखंड
151 द्वार व्याघ्र तोमर जालौन झांसी हमीरपुर
152 इन्दौरिया व्याघ्र तोमर आगरा मथुरा बुलन्दशहर
153 संथवार/सैंथवार-मल्ल(सिंहतवार) वत्स, कश्यप, भारद्वाज,... सूर्य वंश, चन्द्र वंश, नाग वंश (पूर्वज-शाक्य-बौद्ध युगीन प्राचीन क्षत्रिय) गोरखपुर, कुशीनगर (प्राचीन राजवंश था)
154 जांगडा वत्स चौहान बुलन्दशहर पूर्व में झांसी
155 हैहैय्वन्श् नारायण् सूर्य प्राचीन राज वंश,बलिया
156 निकुम्भ बशिस्थ सूर्य जोनपुर, केरक���, अकबपुर
157 वाणा कश्यप् सूर्य ढांक,तणाजा,वलभिपुर,वणा
158 राठोड शान्डिल्य सूर्य सीतामढ़ी(बिहार),हाजीपुर,मारवाड़
159 छोकर अत्रय यदुवंश अलीगढ मथुरा बुलन्दशहर
160 सवनेर व्याघ्रपदी सोमवंश-शाखाचन्द्रवंश (तंवर,तोमर की शाखा) निमाड़ (खंडवा,खरगोन,बडवानी,हरदा जिला )
161 बिष्ट शान्डिल्य सूर्यवंशी प्राचीन राजपूताना और यू.पी

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