सिसोदिया (राजपूत)

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सांसी सिसोदिया राजपूतों की कुलदेवी (बाणमाता)

सांसीसिसोदिया' गुहिल वंश की उपशाखा है जिसका राजस्थान के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। राहप जो कि चित्तौड़ के गुहिल वंश के राजा के पुत्र थे, शिशोदा ग्राम में आकर बसे, जिस से उनके वंशज सिसोदिया कहलाये ।[1][2]

सांसी सिसोदिया सूर्यवंशी राजपूत हैं।[3]

राहप ने मंडोर के राणा मोकल परिहार को पराजित कर उसका विरद छीना था, तब से राहप और उसके वंशजों की उपाधी राणा हुई। [4]

1303 में जब अलाहुद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला किया तब चित्तौड़ के शासक रावल रत्न सिंह के नेतृत्व मे राजपूतों ने शाका किया और उनकी पत्नी महारानी पद्मिनी भटियानी के नेतृत्व में महिलाओं ने जौहर किया और अपने स्वाभिमान की रक्षा की । इस घटना के कई सालों बाद राणा हमीर सिंह ने वापस चित्तौड़ पर विजय प्राप्त की , इस तरह गुहिल वंश की उपशाखा सिसोदिया का मेवाड़ पर शासन स्थापित हुआ



वंश – सूर्यवंशी,गुहिलवंश,(सांसी)सिसोदिया गोत्र – वैजवापायन

प्रवर – कच्छ, भुज, मेंष

वेद – यजुर्वेद

शाखा – वाजसनेयी

गुरु – द्लोचन(वशिष्ठ)

ऋषि – हरित

कुलदेवी – बाण माता

कुल देवता – श्री सूर्य नारायण

इष्ट देव – श्री एकलिंगजी

वॄक्ष – खेजड़ी

नदी – सरयू

झंडा – सूर्य युक्त

पुरोहित – पालीवाल

भाट – बागड़ेचा

चारण – सोदा बारहठ

ढोल – मेगजीत

तलवार – अश्वपाल

बंदूक – सिंघल

कटार – दल भंजन

नगारा – बेरीसाल

पक्षी – नील कंठ

निशान – पंच रंगा

निर्वाण – रणजीत

घोड़ा – श्याम कर्ण

तालाब – भोडाला

विरद – चुण्डावत, सारंगदेवोत

घाट – सोरम

ठिकाना – भिंडर

चिन्ह – सूर्य

शाखाए – 24

द्लोचन(वशिष्ठ)

हरित

माता

नारायण

एकलिंगजी

युक्त

पालीवाल

बागड़ेचा

बारहठ

मेगजीत

भंजन

बेरीसाल

कंठ

रंगा

रणजीत

कर्ण

भोडाला


[5]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. रामप्रसाद व्यास (1974). महाराणा राजसिंह. राजस्थान हिंदी ग्रन्थ अकादमी. पृ॰ 9.
  2. Rima Hooja (2006). A history of Rajasthan. Rupa. पपृ॰ 328–329. OCLC 80362053. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788129108906.
  3. Williams, Joanna; Tsuruta, Kaz; Culture, Asian Art Museum--Chong-Moon Lee Center for Asian Art and (2007-01-10). Kingdom of the sun: Indian court and village art from the Princely State of Mewar (अंग्रेज़ी में). Asian Art Museum - Chong-Moon Lee Center for Asian Art and Culture. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-939117-39-0. मूल से 11 अक्तूबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 मई 2020.
  4. रामप्रसाद व्यास (1974). महाराणा राजसिंह. राजस्थान हिंदी ग्रन्थ अकादमी. पृ॰ 9.
  5. Rima Hooja (2006). A history of Rajasthan. Rupa. पपृ॰ 328–329. OCLC 80362053. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788129108906.