गहलोत

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गहलोत जाट/गहलोत राजपूतों का वंश है[1]। गहलोत राजपूतों ने मेवाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, शाहपुरा, भावनगर, पलिताना, लाठी और वाला सहित कई साम्राज्यों पर शासन किया।।[2] नाम की विविधताओं में गहलोत, गुहिला, गोहिल या गुहिलोत शामिल हैं। एक मार्शल कौम है सौर्य इनका लक्षण है विश्वसनीयता इनके जींश मे पाया जाता है, किसी को धोखा देना जानते ही नहीं, बड़े धार्मिक और कट्टर देश भक्त, धर्म के लिए कुछ भी कर सकते हैं ऐसा इनका जीवन स्वभाव इधर इस समाज मे बड़े-बड़े उद्दमी, प्रशासनिक अधिकारी भी पाये जाते हैं इनके कुल देवता 'महराज चौहरमल' माने जाते हैं, इस समाज की कुछ पूजा आज भी जीवंत है जैसे आग पर चलना, खौलते हुए दूध मे हाथ डालकर चलाना और इश्वर मे विस्वास ऐसा कि आज तक कुछ नहीं हुआ इस पूजा की बड़ी महिमा व मान्यता है जो आज भी जीवंत है।

विष्णु पाद मंदिर रक्षार्थ[संपादित करें]

वास्तविकता यह है कि यह वंश हिन्दू धर्म कि रक्षा हेतु "राणा लाखा" के नेतृत्व मे गयाजी (विष्णु पाद) मंदिर रक्षा हेतु राजस्थान से चलकर 'गोहिल वंश' के क्षत्रिय बड़ी संख्या मे बिहार आये उस समय इस्लामिक सत्ता थी जो हिंसा हत्या बलात्कार मे विस्वास करती थी, मंदिरों व मूर्तियों को तोड़ना ही इनका धर्म था, इस्लाम के अंदर तो मानवता नाम कि कोई चीज न थी न आज है, उन्होने बड़ी वीरता के साथ इस धर्म भूमि और मंदिरों की रक्षा मे अपना जीवन बिता दिया यहीं के होकर रह गए, समय काल परिस्थितियाँ बदलीं जो रक्षक थे वे पददलित हो गए मुगलों की बर्बर सत्ता आ गयी हिंदुओं की बहन बेटियाँ सुरक्षित नहीं, सभी को यह पता है की हिन्दू धर्म मे बिबाह दिन में और मंदिरों मे होता था लेकिन इस्लामिक सत्ता ने सब कुछ तहस- नहस कर दिया, मंदिरों पर हमले होने के साथ वहाँ विवाह बंद हो गया जो बिबाह दिन मे होता था वह अपनी सुरक्षा हेतु घर के अंदर होने लगा, जो बिबाह बिना दहेज व खर्चे के होता था अब सुरक्षा हेतु बड़ी संख्या मे बारात के नाम पर लोग आने लगे और बिबाह रात्री मे होने लगी ।


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. डॉ॰ ओमपाल तुगानिया: जाट समुदाय के प्रमुख आधार बिन्दु, आगरा, २००४
  2. विद्या प्रकाश त्यागी (2009). Martial races of undivided India [अविभाजित भारत की योद्धा जातियाँ] (अंग्रेज़ी में). ज्ञान बुक्स प्राइवेट लिमिटेड. पृ॰ 71. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788178357751.