वार्ता:राजपूत

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लेखन संबंधी नीतियाँ

शीर्षक[संपादित करें]

पृष्ठ के विश्रृंखल होने के साथ साथ शीर्षक भी अप्रासंगिक है। क्षत्रिय शीर्षक अधिक प्रासंगिक होगा। --अजीत कुमार तिवारी 10:28, 7 जून 2012 (UTC)

सहमत हू तिवारी जी तथा पाठ्य सामग्री के साक्ष्य स्रोतो का भी पूर्णतया अभाव दिख रहा है। जातियो पर आधारित वेबसायट्स का समावेश विकिपीडिया के नियमो के खिलाफ है क्योकि लेखन की दृष्टि से इन्हे विश्वसनीय स्रोत नही माना जा सकता है।--महेन सिंह 11:22, 4 जुलाई 2015 (UTC)

राजपूतो के बारे मे लिखने के लिये तो यह काफी कम है। राजपूतो की ३६ उपजातियो के विषय मे जानकारी नही प्रदान की गयी। तलवार पर तिलक लगाने वाली इस बहादुर जाती के विषय मे थोडी और जानकारी प्रदान करे।--Tripal Singh Chauhan (वार्ता) 17:29, 13 जनवरी 2016 (UTC)

माफ करें चौहान साहब, विकिपीडिया पर आपके द्वारा सुझाई गयी तर्ज़ पर कुछ भी लिखना नीतियों के खिलाफ व पक्षपात या प्रचारक समझा जाता है, यहाँ सिर्फ निस्पक्ष व संदर्भित जानकारी ही दी जानी है। फिर भी आपसे अनुरोध है कि कृपया विश्वसनीय स्रोतों से अवगत कराये, राजपूत वीरों या किसी भी जाति के माँ भारती के वीर सपूतों पर हमें भी गर्व है। हमें कुछ भी विस्वसनीय जानकारी देने मे अति प्रसन्नता होगी। सुझाव के लिए धन्यवाद।--☆★म॰ प्र॰ सिंह (✉✉) 18:30, 14 जनवरी 2016 (UTC)

इस सन्दर्भ की विश्वसनीयता पर चर्चा चाहता हूँ[संपादित करें]

राजपूतों की उत्पत्ति से सम्बन्धित इस सन्दर्भ [1] पर चर्चा चाहता हूँ। यह मत प्रथम दृष्ट्या एक बड़ी शरारत जैसा दिखता है। इसके अलावा इस मत का कहीं और उल्लेख या चर्चा नहीं है (मुझे तो नहीं मिली)। इस पुस्तक के रचनाकार के बारे में कुछ पता नहीं है कि वह इतिहास का कितना ज्ञान रखता है। इस पुस्तक को पढ़ने से तो यही लगता है कि राजपूतों की उत्पत्ति से सम्बन्धित मत बिना किसी सन्दर्भ को उद्धृत किए अपने मन से बना डाला है। इस पुस्तक में भारतीय पात्रों और स्थानों के नाम देखिए। लगता है कि लेखक का भारत से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। विक्रमादित्य को 'विक्रमाजीत' लिख दिया है। (इसके अलावा भी दस-बीस नहीं हजारों नाम उटपटांग हैं।) --अनुनाद सिंह (वार्ता) 14:20, 6 अप्रैल 2020 (UTC)

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "History of the rise of the Mahomedan power in India, till the year A.D. 1612: to which is added an account of the conquest, by the kings of Hydrabad, of those parts of the Madras provinces denominated the Ceded districts and northern Circars : with copious notes, Volume 1". Spottiswoode, 1829. पृ॰ xiv. अभिगमन तिथि 29 Sep 2009.