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चीतल

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चीतल
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: जंतु
संघ: रज्जुकी
वर्ग: स्तनपायी
गण: द्विखुरीयगण
कुल: सर्विडी
उपकुल: सर्विनी
वंश: ऍक्सिस
जाति: ए. ऍक्सिस
द्विपद नाम
ऍक्सिस ऍक्सिस
(अर्क्सलॅबॅन, १७७७)
उप-जाति

ऍक्सिस ऍक्सिस ऍक्सिस
ऍक्सिस ऍक्सिस सीलॉनॅनसिस

चीतल के आवासीय क्षेत्र

चीतल, या चीतल मृग, या चित्तिदार हिरन हिरन के कुल का एक प्राणी है, जो कि श्री लंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, भारत में पाया जाता है। पाकिस्तान के भी कुछ इलाकों में भी बहुत कम पाया जाता है। अपनी प्रजाति का यह एकमात्र जीवित प्राणी है।
चीतल के अन्य सामान्य नाम भारतीय चित्तीदार हिरण (या बस चित्तीदार हिरण) और एक्सिस हिरण हैं।

चीतल की खोपड़ी का रेखाचित्र

चीतल की त्वचा का रंग हल्का लाल-भूरे रंग का होता है और उसमें सफ़ेद धब्बे होते हैं। पेट और अंदरुनी टांगों का रंग सफ़ेद होता है। चीतल के सींग, जो कि अमूमन तीन शाखाओं वाले होते हैं, पाश्चात्य वाद्ययंत्र लायर की तरह घुमावदार होते हैं और ७५ से.मी. तक लंबे हो सकते हैं और जिन्हें यह हर साल गिरा देता है। अपने निकटतम रिशतेदार पाढ़ा की तुलना में चीतल की कद-काठी दौड़ने के लिए अधिक विकसित है। इसके शरीर की बनावट अधिक विकसित होती है। इसके सींग की शाखाएँ क्रमशः छोटी होती चलती हैं तथा खोपड़ी के कर्णछिद्र छोटे होते हैं। इसका क़द कंधे तक ९० से.मी. होता है और वज़न ८५ कि. तक होता है, हालांकि नर मादा से थोड़ा बड़ा होता है। इसका जीवनकाल ८-१४ साल का होता है।जीवित हिरण के रिश्ते"। वेम्मर में, सीएम (सं.)। गर्भाशय ग्रीवा का जीवविज्ञान और प्रबंधन । वाशिंगटन, डीसी: स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन प्रेस

चीतल का आवास भारत में ८-३०° उत्तर अक्षांश में, तथा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश तथा श्रीलंका में पाया जाता है।[2] इसके आवास की पश्चिमी सीमा पूर्वी राजस्थान और गुजरात हैं। उत्तरी सीमा है हिमालय के गिरिपीठ (foothills) का भाभर-तराई का वह क्षेत्र (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, नेपाल, उत्तरी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, भूटान के वन क्षेत्र तथा पश्चिमी असम) जो समुद्र सतह से १,१०० मी. कम पड़ता है।[1]पूर्वी सीमा पश्चिमी असम[3][4] तथा पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के सुन्दरवन हैं।[1]दक्षिणी सीमा श्रीलंका है। चीतल भारतीय प्रायद्वीप के अन्य वन क्षेत्रों में यदा-कदा पाया जाता है।[5] बांग्लादेश में अब यह केवल सुन्दरवन में ही पाया जाता है क्योंकि यह मध्य, उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व क्षेत्रों से विलुप्त हो गया है। चीतल जीव संकट में है [1]

चित्र दीर्घा

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सन्दर्भ

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  1. Duckworth, J.W., Kumar, N.S., Anwarul Islam, Md., Hem Sagar Baral & Timmins, R.J. (2008). Axis axis. 2008 संकटग्रस्त प्रजातियों की IUCN लाल सूची. IUCN 2008. Retrieved on 8 अप्रैल 2009. Database entry includes a brief justification of why this species is of least concern.
  2. Grubb, P. 2005. Artiodactyla. In: D. E. Wilson and D. M. Reeder (eds), Mammal Species of the World. A Taxonomic and Geographic Reference (3rd ed), pp. 637-722. Johns Hopkins University Press, Baltimore, USA.
  3. Gee, E.P. (1964). The wild life of India, Collins, London
  4. Choudhury, A.U. (1994). Checklist of the mammals of Assam. Gibbon Books, Guwahati, India. 59pp.
  5. Sankar, K. and Acharya, B. 2004. Chital (Axis axis (Erxleben, 1777)). ENVIS Bulletin (Wildlife Institute of India, Dehra Dun) 7: 171–180.

बाहरी कड़ियाँ

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