मुरैना ज़िला

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मुरैना
—  जिला  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्य प्रदेश
मुख्यालय मुरैना
आधिकारिक जालस्थल: www.morena.mp.gov.in

निर्देशांक: 26°18′N 78°00′E / 26.30°N 78.00°E / 26.30; 78.00 मुरैना मध्य प्रदेश राज्य का एक जिला है। इसका मुख्यालय मुरैना में है। जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 50 प्रतिशत भाग खेती योग्य है। जिले का 42.94 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित हैं। नहर इस क्षेत्र की सिंचाई का मुख्य साधन है। जिले की मुख्य फसल गेहूँ है। सरसों का उत्पादन भी जिले में प्रचुर मात्रा में होता है। खरीफ की मुख्य फसल बाजरा है। यह जिला कच्ची घानी के सरसों के तेल के लिये पूरे मध्य प्रदेश में जाना जाता है।

इस जिले में पानी की आपूर्ति चम्बल, कुँवारी, आसन और शंक नदियों द्वारा होती है। चम्बल नदी का उद्गम इन्दौर जिले से हुआ है। यह नदी राजस्थानी इलाके से लगती हुई उत्तर-पश्चिमी सीमा में बहती है।

इतिहास[संपादित करें]

चम्बल नदी के बीहड़ो से घिरा यह भू-पटल जिसे हम आज मुरैना नाम से जानते है असल मे कभी "पेंच' नाम से विख्यात था और यह पेंच नाम यहां पर लगी सरसों के तेल मील के कारण ग्रामीणों द्वारा दिया गया आम नाम था। समय के साथ साथ जब यहां पर मील में मजदूरों की संख्या बढ़ने लगी तो उन लोगों ने पास ही अपने घर बनाने प्रारम्भ कर दिए जो कुछ ही दिनों बाद उस मील के निकटतम गाँव (मुरैना गांव)तक विस्तृत हो गया। अंततः मुरैना जिले के मुख्यालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मुरैना गांव ने वर्तमान शहर को नाम दिया "मुरैना" जिसका अर्थ होता है मोरों का रैना (वास-स्थल) बस्तुतः हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर यहां आज भी हर मुंडेर पर दिख ही जायेगा।

मुरैना (म०प्र०) में बरबई गाँव के पार्क में लगी राम प्रसाद बिस्मिल की प्रतिमा

सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी राम प्रसाद 'बिस्मिल' के दादा जी नारायण लाल का पैतृक गाँव बरबई तत्कालीन ग्वालियर राज्य में चम्बल नदी के बीहड़ों में स्थित तोमरधार क्षेत्र (वर्तमान मध्य प्रदेश) के मुरैना जिले में आज भी है। बरबई ग्राम-वासी बड़े ही बागी प्रकृति के व्यक्ति थे जो आये दिन अँग्रेजों व अँग्रेजी आधिपत्य वाले ग्राम-वासियों को तंग करते थे। पारिवारिक कलह के कारण नारायण लाल ने अपनी पत्नी विचित्रा देवी व दोनों पुत्रों - मुरलीधर एवं कल्याणमल सहित अपना पैतृक गाँव छोड़ दिया। उनके गाँव छोडने के बाद बरबई में केवल उनके दो भाई - अमान सिंह व समान सिंह ही रह गये जिनके वंशज कोक सिंह आज भी उसी गाँव में रहते हैं। केवल इतना परिवर्तन अवश्य हुआ है कि बरबई गाँव के एक पार्क में राम प्रसाद बिस्मिल की एक भव्य प्रतिमा मध्य प्रदेश सरकार ने स्थापित कर दी है।

जौरा[संपादित करें]

यह मुरैना जिले का एक नगर है। यह आगरा से 120 किमी दक्षिण तथा ग्वालियर से 70 किमी दूर उत्तर मध्य रेलवे पर स्थित है। करोली सरदारों द्वारा बनवाए गए प्राचीन दुर्ग के ध्वंसावशेष यहाँ हैं। यहाँ राजकीय कार्यालय, विद्यालय, औषधालय, डाकघर, सराय, नगरपालिका, सार्वजनिक निर्माण विभाग के भवन तथा थाना भी

जौनारा- यह ग्राम जौरा सहर से सोन नदी कि ओर है , गाँगोलीहार- गाँव जौरा तहसील में आता है इस गाँव में भगवान के अवतार में संत रतिदास जी महाराज ने जन्म लिया। जिन्होंने भगवान की आज्ञा से चमत्कार दिखाए। संत रतिदास जी महाराज का भव्य मंदिर आज भी गाँगोलीहार गाँव मे बना हुआ है। और बाबा की कृपा आज भी बरसती है। श्यामसुंदर त्यागी शिक्षक गाँगोलीहार

मुख्य उद्योग[संपादित करें]

  • मुरैना मंडल सहकारी शक्कर कारखाना कैलारस
  • पुंज लयाड लिमिटेड कैलारस
  • राज्य परिवहन तिलहन सहकारी संघ आयल केक
  • के.एस. आयल्स लिमिटेड, सालवेंट आयल, डी आयल केक
  • जे.के. इंडस्ट्रीज (टायर प्लांट) लिमिटेड, आटोमोबाइल नायलोन एंड रेडियल टायर

संग्रहालय[संपादित करें]

  • शिवा मूर्ति संग्रहालय
  • जैन चित्रशाला
  • शक्त वीथिका
  • विविधि वीथिका
  • धातु प्रतिमा फोटो और चित्रशाला
  • अलोपीशंकर मन्दिर कैलारस
  • माता बैहरारादेवी मन्दिर कैलारस
  • पं रामप्रसाद बिस्मिल संग्रालय मुरैना
  • परसुराम मंदिर मुरैना

शैक्षणिक संस्थायें[संपादित करें]

  • राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अम्बाह रोड, मुरैना
  • राजकीय कन्या महाविद्यालय, मुरैना
  • जी० एल० एस० महाविद्यालय, बानमोर, मुरैना
  • अम्बाह पी० जी० कालेज, अम्बाह, मुरैना
  • राजकीय महाविद्यालय, पोरसा, मुरैना
  • राजकीय महाविद्यालय, जौरा, मुरैना
  • राजकीय नेहरू महाविद्यालय, सबलगढ़, मुरैना
  • आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय, कैलारस, मुरैना
  • शिवशंकर महाविद्यालय, सुमावली, मुरैना
  • ऋषि गालव महाविद्यालय, मुरैना
  • श्री वैष्णव प्रबन्धन महाविद्यालय, मुरैना
  • शासकीय उत्कृष्ट उमा० विद्यालय

पयर्टन स्थल[संपादित करें]

  • मीतावली नूराबाद मुगल कालीन स्मारक
  • सबलगढ़ किला
  • राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
  • सिहोनिया (कछवाहा राज्य की राजधानी)
  • पहाड़गढ़ (गुफा चित्रकारी)
  • कुटवार लिखीछाज पदावली (गुप्त कालीन)
  • नारेश्वर- नोरार
  • ककनमठ : सिहोनिया का प्रसिद्ध शिव मन्दिर
  • नूराबाद गाँव में सांक नदी पर बना हुआ मुग़ल कालीन पुल
  • श्री बजरंग बैकुंठ आश्रम गांव खेरिया मे स्थिति है

यह सूरदास बाबा की तपो भूमि है

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]