कोच्चि

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कोच्चि
കൊച്ചി
कोचीन
—  महानगर  —
ऊपर से दक्षिणावर्त: मैरीन ड्राइव स्काईलाइन, चीनी मत्स्यजाल- दोर्ट कोच्चि, कोच्चि मैरीना, मैरीन ड्राइव- नवीन विस्तार, इन्फ़ो पार्क
कोच्चि की आधिकारिक मुहर
Seal
उपनाम: अरब सागर की रानी[1][2]
कोच्चि is located in केरल
कोच्चि
निर्देशांक : 9°58′N 76°17′E / 9.97°N 76.28°E / 9.97; 76.28Erioll world.svgनिर्देशांक: 9°58′N 76°17′E / 9.97°N 76.28°E / 9.97; 76.28
राष्ट्र भारत
State केरल
जिला एर्नाकुलम
शासन
 • सभा कोच्चि नगर निगम
 • महापौर टोनी चैमनी (भा.रा.काँग्रेस)
 • पुलिस आयुक्त एम आर अजीत कुमार, आईपीएस
क्षेत्र[3]
 • महानगर 94.88
 • नगर 732.84
ऊँचाई 0
जनसंख्या (2012)[4]
 • महानगर 612
 • घनत्व 6,340
 • नगरीय[5] 2
भाषाएं
 • आधिकारिक मलयालम, अंग्रेज़ी
समय मण्डल IST (यूटीसी +5:30)
पिन 682 XXX
दूरभाष कूट 91-(0)484-XXX XXXX
वाहन पंजीकरण KL-7,KL-39,KL-41,KL-42,KL-43,KL-63
तटरेखा 48 किलोमीटर (30 मील)
लिंग अनुपात 1.028 /
साक्षरता 98.5%
नई दिल्ली से दूरी 2,594 किलोमीटर (1,612 मील) NE (भूमि)
मुंबई से दूरी 1,384 किलोमीटर (860 मील) NW (भूमि)
बंगलुरु से दूरी 539 किलोमीटर (335 मील) N (भूमि)
जलवायु Am (कोप्पन)
वर्षा 3,228.3 मिलीमीटर (127.10 इंच)
जालस्थल corporationofcochin.net

कोच्चि ([koˈtʃːi ] ( सुनें)), जिसे कोचीन भी कहा जाता था, लक्षद्वीप सागर के दक्षिण-पश्चिम तटरेखा पर स्थित एक बड़ा बंदरगाह शहर है, जो भारतीय राज्य केरल के एर्नाकुलम जिले का एक भाग है। कोच्चि को काफ़ी समय से प्रायः एर्नाकुलम भी कहा जाता है, जिसका अर्थ नगर का मुख्यभूमि भाग इंगित करता है। कोच्चि नगर निगम के अधीनस्थ (जनसंख्या ६,०१,५७४) ये राज्य का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला शहर है। ये कोच्चि महानगरीय क्षेत्र के विस्तार सहित (जनसंख्या २१ लाख) केरल राज्य का सबसे बड़ा शहरी आबादी क्षेत्र है। कोच्चि नगर ग्रेटर कोच्चि क्षेत्र का ही एक भाग है, [6][7] और इसे भारत सरकार द्वारा द्वितीय दर्जे वाला शहर वर्गीकृत किया गया है। नगर की देख-रेख व अनुरक्षण दायित्त्व १९६७ में स्थापित हुआ कोच्चि नगर निगम देखता है। इसके अलावा पूरे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का भार ग्रेटर कोचीन डवलपमेंट अथॉरिटी[8] (GCDA) एवं गोश्री आईलैण्ड डवलपमेंट अथॉरिटी (GIDA) पर है।

कोच्चि १४वीं शताब्दी से ही भारत की पश्चिमी तटरेखा का मसालों का व्यापार केन्द्र रहा है और इसे अरब सागर की रानी के नाम से जाना जाता था। १५०३ में यहां पुर्तगालियों का आधिपत्य हुआ और यह उपनिवेशीय भारत की प्रथम यूरोपीय कालोनी बना और १५३० में गोवा के चुने जाने तक ये पुर्तगालियों का यहां का प्रधान शक्ति केन्द्र रहा था।क्कालांतर में कोच्चि राज्य के रजवाड़े में परिवर्तित होने के क्साथ ही ये डच एवं ब्रिटिश के नियन्त्रण में आ गया। आज केरल में कुल अन्तर्देशीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन संख्या में प्रथम स्थान बनाये हुए है। [9][10] नीलसन कम्पनी के आउटलुक ट्रैवलर पत्रिका के लिये किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार कोच्चि आज भी भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटक आकर्षणों में छठवें स्थान पर बना हुआ है।[11] मैकिन्से ग्लोबल संस्थान द्वारा किये गए एक शोध के अनुसार, कोच्चि २०२५ तक के विश्व के सकल घरेलु उत्पाद में ५०% योगदान देने वाले ४४० उभरते हुए शहरों में से एक था। [12]

भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसैनिक कमान का केन्द्र तथा भारतीय तटरक्षक का राज्य मुख्यालय भी इसी शहर में स्थित है,[13][14] जिसमें एयर स्क्वैड्रन ७४७ नाम की एक वायु टुकड़ी भी जुड़ी है।[15] नगर के वाणिज्यिक सागरीय गतिविधियों से सम्बन्धित सुविधाओं में कोच्चि बंदरगाह, अन्तर्राष्ट्रीय कण्टेनर ट्रांस्शिपमेण्ट टर्मिनल, कोचीन शिपयार्ड, कोच्चि रिफ़ाइनरीज़ का अपतटीय (ऑफ़शोर) सिंगल बॉय मूरिंग (एस.पी.एम),[16][17] एवं कोच्चि मैरीना भी हैं। कोच्चि में ही कोचीन विनिमय एक्स्चेंज, इंटरनेशनल पॅपर एक्स्चेंज भी स्थित हैं, तथा हिन्दुस्ताण मशीन टूल्स (एच.एम.टी), सायबर सिटी, एवं किन्फ़्रा हाई-टेक पाक एवं बड़ी रासायनिक निर्माणियां जैसे फ़र्टिलाइज़र्स एण्ड कैमिकल्स त्रावणकौर (फ़ैक्ट), त्रावणकौर कोचीन कैमिकल्स (टीसीसी), इण्डियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (आई.आर.ई.एल), हिन्दुस्तान ऑर्गैनिक कैमिकल्स लिमिटेड (एच.ओ.सी.एल) [18] कोच्चि रिफ़ाइनरीज़ के साथ साथ ही कई विद्युत कंपनियां जैसे टी.ई.एल.के[19] एवं औद्योगिक पार्क भी बने हैं जिनमें कोचीन एपेशल इकॉनोमिक ज़ोन एवं इन्फ़ोपार्क कोच्चि प्रमुख हैं। कोच्चि में ही प्रमुख राज्य न्यायपीठ केरल एवं लक्षद्वीप उच्च न्यायालय एवं कोचीन युनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी भी स्थापित हैं। इसी नगर में केरल का नेशनल लॉ स्कूल, नेशनल युनिवर्सिटी ऑफ़ एडवांस्ड लीगल स्टडीज़ को भी स्थान मिला है।

व्युत्पत्ति[संपादित करें]

प्राचीन विदेशी घुमन्तु७ओं तथा व्यापारीगणों द्वारा कोच्चि को विभिन्न नामों से इंगित किया गया है जैसे Cocym, Cochym, कोचीन, एवं Kochi आदि।[20] कोचीन यहूदी समुदाय द्वारा इसे कोचिन (Kogin/קוגין) भी बोला जाता था, जैसा कि सायनागोग की मुहर में भी दिखाई देता है[21] और ये मुहर अभी भी उस समुदाय के पास रखी है। "कोच्चि" नां का उद्गम एक मलयालम शब्द कोचु आझी से प्रतीत होता है, जिसका अर्थ है एक छोटी खादई या झील या लैगून। एक अन्य धारणा के अनुसार कोच्चि का उद्गम कॅची से है जिसका अर्थ है बंदरगाह।[22] इतालवी अन्वेषकों निकोलो कॉण्टी (१५वीं शताब्दी) तथा फ़्रा पाओलीन (१७वीं शताब्दी) के अनुसार कोच्ची शब्द का उद्गम इसी नाम की एक छोटी नदी से है जो बैकवाटर्स को सागर से जोड़ती थी।[कृपया उद्धरण जोड़ें] पहले पुर्तगालियों के आगमन और फ़िर ब्रिटिश आगमन से कोचीन नाम को लगभग आधिकारिक पदवी मिल गई थी। १९९६ में नगर को अपने मूल मलयालम नाम के एक निकटवर्त्ती आंग्लीकृत रूप कोच्चि मिला। इस नाम को कोचीन नगर निगम ने अमान्य कर अस्वीकार कर दिया और निगम अभी तक "कोचीन" नाम ही चला रहा है।

इतिहास[संपादित करें]

पैरादेसी सायनागोग शिलालेख
इन्हें भी देखें: कोचीन का राज्य

कोची भारतीय मसाला व्यापार का केन्द्र कई शताब्दियों से रहा है, जिसकी जानकारी यवनों (प्राचीन यूनानियों एवं रोमवासियों) के साथ साथ यहूदियों, सीरियाइयों, अरबों तथा चीनियों को प्राचीन काल से ही थी। [23] कोची का महत्त्व १३४१ में पेरियार नदी में आयी बाढ़ के कारण कोदुंगलूर (क्रैंगनोर) के निकटस्थ मुज़िरिस बंदरगाह के नष्ट होने के बाद से बहुत बढ़ गया था। [24] कोची के सबसे पुराने ज्ञात उल्लेख चीनी यात्री मा हुआन की एडमिरल ज़ेंग हे के अधीन की गई उनकी १५वीं शताब्दी की यात्राओं के वर्णन में मिलता है।[25] १४४० में यहां आये इतालवी यात्री निक्कोलो दा कॉण्टी ने भी कोची शहर का उल्लेख अपने वृत्तान्तों में किया है। [26]

इतिहासविदों के अनुसार कोची राज्य का मूल राज्य १२वीं शताब्दी में चेर वंश के पतन उपरांत ही यहां अस्तित्त्व में आगया था। [22] इस राज्य का अधिकार वंशानुगत था और इन्हें स्थानीय लोगों द्वारा पेरम्पदप्पु शासक कहा गया था। कोची की मुख्यभूमि १८वीं शताब्दी तक इस राज्य या रजवाड़ेकी राजधानी बनी रही तथा कोची का राजा ही वर्तमान कोच्चि नगर क्षेत्र तथा निकटवर्त्ती क्षेत्रों पर अधिकार रखता था। हालांकि बाद के काफ़ी समय से राज्य में विदेशी आधिपत्य रहा एवं राजा को केवल नाममात्र का अधिकार प्राप्त रहा था। पुर्तगाली अन्वेषक पैड्रो अल्वरेज़ कैब्राल ने भारत में प्रथम यूरोपीय उपनिवेश १५०० में कोची में बसाया।[27][28] १५०३ से १६६३ तक, फ़ोर्ट कोच्चि (फ़ोर्ट ईमैन्युअल) पुर्तगाली साम्राज्य के अधीन रहा। ये पुर्तगाली आधिक्पत्य-काल सेंट थोमस ईसाइयों एवं कोचीन यहूदियों के लिये बेहद विपत्ति काल रहा, क्योंकि तत्कालीन पुर्तगाल-अधीन भारत में साम्राज्य आधिपत्य विवाद आदि बढ़ रहे थे। कोची में प्रथम पुर्तगाली अन्वेषक वास्को डा गामा की कब्र भी बनी हुई है, जिसने भारत की खोज हेतुप्रथम सफ़ल अभियान किया था। उसे सेंट फ़्रांसिस गिरजाघर में दफ़नाया गया था। बाद में उसके अवशेष १५३९ में पुर्तगाल लौटा दिये गए।[29] पुर्तगाली शासन के बाद यहा डच शासन आया, जिन्हों ने यहां के स्थानी कालीकट के ज़मोरिन के साथ संधि कर कोची पर आक्रमण किया व अधिकार कर लिया था। १७७३ में मैसूर राज्य के शासक हैदर अली द्वारा अपने राज्य के मालाबार क्षेत्र में विस्तार के अन्तर्गत्त कोची पर अधिकार कर उसे मैसूर के अधीन कर लिया गया था। इस समय तक कोची की वंशानुगत प्रधानमंत्री पालियथ अचान भी पदच्युत हो गए।

इसी बीच डच लोगों ने यूनाइटेड डच प्रोविन्स पर युद्ध की आशंका के चलते, १८१४ की आंग्र-डच संधि कर ली, जिसके अन्तर्गत्त कोची को बांग्का द्वीप के बदले संयुक्त राजशाही के अधीन दे दिया गया। वैसे इस संधि के पूर्व में भी यहां ब्रिटिश उपस्थिति के साक्ष्य मिलते हैं।[30]

१८६६ में फ़ोर्ट कोच्चि नगर पालिका बन गया, और इसका प्रथम म्युनिसिपल काउन्सिल ईटिंग कान्टेस्ट १८८३ में आयोजित हुआ। १८९६ में कोचीन के महाराजा ने एर्णाकुलम एवं मट्टनशेरी में दो अन्य परिषदों के गठन कर स्थानीय प्रशासन का आरम्भ किया। १९०७ में मद्रास प्रेसिडेन्सी के तत्कालीन राज्यपाल (गवर्नर) सर अर्थर लॉली, उनके भ्राता बेल्बी लॉली, मद्रास गवर्नर (१८९१-९६) कोचीन एवं त्रावणकौर के आधिकारिक भ्रमण पर निकले और २५ जनवरी से १४ फ़रवरी तक यहां का भ्रमण किया। २६ जनवरी को कोचीन के राजा ने इनसे भेंट की व इनके सम्मान में एर्णाकुलम में रात्रिभोज का आयोजन किया।[31][32][33][34]

१९२५ में आम जनता के दबाव के कारण कोची विधान सभा का गठन किया गया।

सेंट फ़्रांसिस गिरजा घर, कोची १५०३ में बना, भारत का प्राचीनतम यूरोपीय गिरजाघर है।[35]

२०वीं शताब्दी के आरंभ तक बंदरगाह पर व्यापार व आवागमन काफ़ी हद तक बढ़ गया, जिसके चलते इसके विकास की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। १९२० में एक हार्बर इंजीनियर रॉबर्ट ब्रिस्टो को तत्कालीन मद्रास प्रेसिडेन्सी के गवर्नर लॉर्ड विलिंग्डन के आदेश पर बुलाया गया। २१ वर्ष के बाद कोचीन बंदरगाह प्रायद्वीप का सुरक्षिततम बंदरगाह बन गया, जहां जहाज नवनिर्मित हार्बर बना था और भाप की क्रेन स्थापित थीं।[36]

१९४७ में ब्रिटिश राज से भारत के स्वतंत्र होने पर, कोचीन प्रथम रजवाडआ था जिसने स्वेच्छा से भारतीय संघ में बने रहने का चुनाव किया। [22] १९४९ में कोचीन एवं त्रावणकौर के विलय उपरांत त्रावणकोर-कोचीन राज्य अस्तित्त्व में आया। तब त्रावणकोर का राजा त्रावणकोर-कोचीन संघ का राजप्रमुख बना और १९५६ तक रहा। त्रावणकोर-कोचीन को तब मद्रास राज्य के मालाबार जिले में विलय कर दिया गया। और अन्ततः भारत सरकार के राज्य पुनर्गठन अधिनियम १९५६ में एक नये राज्य क जन्म हुआ  — केरल — जिसमें त्रावणकोर-कोचीन (सिवाय चार दक्षिणी तालुल के, जो तमिल नाडु में विलय किये गए), मालाबार जिला के साथ साथ कसरगोड एवं दक्षिण कन्नड़ जिले सम्मिलित थे। [37] ९ जुलाई, १९६० को मट्टनशेरी ने एक प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजा— जिसमें तत्कालीन फ़ोर्ट कोची, मट्टनशेरी एवं एर्णाकुलम की नगरपालिका क्षेत्रों को विलय कर एक नगर निगम की स्थापना की जाने का निवेदन था। सरकार ने प्रस्तावित विलय की संभावनाएं तलाशने हेतु एक आयोग का गठन किया। इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर केरल विधान सभा ने नगर निगम की स्थापना की स्वीकृति दे दी। केरल राज्य की स्थापना के ठीक एक वर्ष बाद, १ नवंबर, १९६७ को, कोचीन नगर निगम की स्थापना की गई। यह विलय एर्णाकुलम, मट्टनशेरी, एवं फ़ोर्ट कोची की नगर पालिकाओं के बीच हुआ था। इनके अलावा इस नगर निगम में विलिंग्डन द्वीप, चार पंचायतें (पाल्लुरुती, वेन्नल, वयत्तिल एवं एडपल्ली) तथा दो छोटे द्वीप गुण्डु एवं रमणतुरुत भी शामिल थे। कोची एवं एर्णाकुलम जिलों को १ अप्रैल, १९५८ को तत्कालीन त्रावणकोर-कोची-म्लाबार रजवाड़ों से काट कर निकाला गया था। जिले का अधिकांश भाग कोची राज्य से ही लिया गया था। [38]

शहर के आर्थिक विकास ने भारत सरकार द्वारा १९९० के दशक के आरम्भ में लाये गए आर्थिक सुधारों के बाद से तेज गति पकड़ी। वर्ष २००० आने तक सेवा क्षेत्र ने भी इस आर्थिक प्रगति को भरपूर बल दिया। सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित विभिन्न पार्कों की स्थापना के साथ साथ अन्य जहाजपत्तन एवं बंदरगाह आधारित अवसंरचना विकास के चलते नगर में अचल-सम्पत्ति व्यापार को बड़ी हवा दी। बाद के वर्षों में कोच्चि ने त्वरित व्यावसायीकरण अनुभव किया और परिणामस्वरूप ये नगर आज केरल राज्य के बड़े वाणिज्यिक केन्द्र के रूप में विकसित हो चुका है। [39]

भूगोल एवं जलवायु[संपादित करें]

भूगोल[संपादित करें]

कुडन्नूर सेतु से तेवर का एक दृश्य

कोच्चि की भौगोलिक स्थिति भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट 9°58′N 76°13′E / 9.967°N 76.217°E / 9.967; 76.217 निर्देशांक पर है, और इसका क्षेत्रफ़ल 94.88 वर्ग किलोमीटर (36.63 वर्ग मील) है। नगर में यहां के प्रसिद्ध बैकवॉटर्स हैं, और प्रायदीप के उत्तरी छोर तक जाते हैं। इसके पश्चिम में लक्षद्वीप सागर है तथा पूर्वी ओर शेष मुख्यभूमि का शहरी विस्तार है। यहां का अधिकांश क्षेत्र समुद्र सतह (की ऊंचाई) पर ही बना है और इसकी तटरेखा ४८ किमी है।[22]

कोच्चि शहर की वर्तमान नगरपालिका सीमाओं में उत्तर-पूर्वी ओर मुख्यभूमि एर्णाकुलम, फ़ोर्ट कोची तथा एडापल्ली, कलामशेरी एवं कक्कनाड के उपनगरीय क्षेत्र; दक्षिण-पूर्व में तिरुपुनितरा हैं एवं वेम्बनाड झील में निकटस्थ द्वीपसमूह भी है। इसके अधिकांश द्वीप अति लघु आकार के हैं और इनका क्षेत्रफ़ल ६ किमी2 से लेकर 1 किमी2 से भी कम (1,500 से लेकर २५० एकड़ से कम तक)।[कृपया उद्धरण जोड़ें] राज्य सरकार एवं जीसीडीए की योजना है कि कोच्चि महानगरीय क्षेत्र की सीमा में स्थित माला एवं कोडंगलूर को त्रिशूर जिले में, अंगमाली, पेरंबवूर, पिरावुम एवं कोलनशेरी को एर्णाकुलम जिले में, तालयोलपेरंबु एवं वाइकोम को कोट्टयम एवं चेरतला को अलापुझा जिले में जोड़ दिये जाएं। इस तरह नवनिर्मित महानगरीय क्षेत्र को नवगठित कोच्चि मेट्रोपॉलिटन रीजनल डवलपमेण्ट अथॉरिटी (कोच्चि महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण) के अधीन दे दिया जायेगा।[40][41] हालांकि द हिन्दु की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार को इस विषय में अभी कोई पक्का निर्णय लेना बाकी है।[42]

यहां की मृदा में एल्यूवियम, टेरी की भूरी बालू, आदि के कण मिलते हैं। हाइड्रोमॉर्फ़िक क्षारीय मृदाएं भी बैकवाटर्स की निकटस्थ भूमि में मिलती हैं।[22]

यहां मिलने वाले प्रधान पाषाण आर्केइयन-बेसिक डाइक, चार्नोकाइट्स एवं ग्निसेज़ प्रकार के हैं। एक पारिस्थितिकी संवेदन क्षेत्र मंगलवनम पक्षी अभयारण्य नगर के केन्द्रीय भाग में स्थित है। इसमें मैन्ग्रोव की ढेरों प्रजातियां मिलती हैं तथा बड़ी संख्य़ा में प्रवासी पक्षियों की आवास-भूमि है।

कोच्चि की जल आपूर्ति अधिकांशतः भूमिगत जल एवं जिले में बहने वाली दो नदियों, पेरियार एवं मुवत्तपुझा पर ही निर्भर हैं। पेरियार नदी नगर के उत्तरी भाग की आपूर्ति करती है तथा मुवत्तपुझा नदी जेएननुर्म परियोजना के अन्तर्गत्त पश्चिमी कोच्ची, पूर्वी कोच्चि एवं चेरतल ताल्लुक के भागों की आपूर्ति जापान वॉटर प्रोजेक्ट स्कीम के अन्तर्गत्त करती है।

जलवायु[संपादित करें]

कोप्पन जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, कोच्चि में उष्णकटिबन्धीय मॉनसून जलवायु (Am) है। कोच्चि का भूमध्यरेखा से सामीप्य तथा इसकी तटीय स्थिति के परिणामस्वरूप यहां मौसमी तापमान में थोड़ा ही परिवर्तन होता है, एवं उच्च स्तर की आर्द्रता भी रहती है। यहां वार्षिक तापमान 23 और 31 °से (73 और 88 °फ़ै) के बीच रहता है एवं अंकित अधिकतम तापमान 36.5 °से (97.7 °फ़ै), एवं न्यूनतम तापमान 16.3 °से (61.3 °फ़ै) है।[43] पश्चिमी घाट के हवाई ओर स्थित होने के कारण जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून कोच्चि में तेज वर्षा लाता है। अक्तूबर से दिसम्बर पर्यन्त, कोच्चि में उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण हल्की वर्षा होती यहां की सालाना वर्षा 2,978.0 मिमी (117.24 इंच) है तथा सालाना औसत वर्षा के १२५ दिन होते हैं।[44]

कोच्चि (१९७१-२०००) के लिए मौसम जानकारी
महीना जनवरी फ़रवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितम्बर अक्तूबर नवम्बर दिसम्बर वर्ष
अंकित अधिक °C (°F) 36.4
(97.5)
35.7
(96.3)
36.0
(96.8)
36.5
(97.7)
35.2
(95.4)
34.2
(93.6)
33.1
(91.6)
32.5
(90.5)
34.2
(93.6)
34.6
(94.3)
35.6
(96.1)
34.8
(94.6)
36.5
(97.7)
औसत अधिकतम °C (°F) 31.7
(89.1)
31.9
(89.4)
32.5
(90.5)
32.9
(91.2)
32.3
(90.1)
30.1
(86.2)
29.3
(84.7)
29.3
(84.7)
30.0
(86)
30.6
(87.1)
31.2
(88.2)
31.8
(89.2)
31.1
(88)
औसत न्यूनतम °C (°F) 22.6
(72.7)
24.0
(75.2)
25.3
(77.5)
25.9
(78.6)
25.7
(78.3)
24.1
(75.4)
23.7
(74.7)
23.9
(75)
24.2
(75.6)
24.1
(75.4)
24.0
(75.2)
23.1
(73.6)
24.2
(75.6)
अंकित न्यून. °C (°F) 16.5
(61.7)
16.3
(61.3)
21.6
(70.9)
21.3
(70.3)
21.1
(70)
20.4
(68.7)
17.6
(63.7)
20.6
(69.1)
21.1
(70)
19.2
(66.6)
19.2
(66.6)
17.7
(63.9)
16.3
(61.3)
बर्फ़/वर्षा mm (इंच) 23.3
(0.917)
25.9
(1.02)
30.8
(1.213)
94.8
(3.732)
282.8
(11.134)
705.8
(27.787)
593.6
(23.37)
403.1
(15.87)
279.6
(11.008)
320.3
(12.61)
174.9
(6.886)
43.2
(1.701)
2,978.0
(117.244)
स्रोत: भारतीय मौसम विभाग (२०१० तक के अंकित अधिकतम एवं न्यूनतम)[43][44]

नागर प्रशासन[संपादित करें]

कोच्चि नगर अधिकारी
महापौर टोनी चाम्मिनी
उप-महापौर भद्र सतीश
पुलिस आयुक्त एम आर अजीत कुमार
केरल उच्च-न्यायालय का एक कार्यशील दिवस
एर्णाकुलम टाउन हॉल

नगर प्रशसन कोच्चि नगर निगम के अधीन है, जिसकी ब्गडोर मह्पौर के हाथ में रहती है। प्रशासनिक उद्देश्य से नगर क्षेत्र को ७४ वार्ड्स में बांटा हुआ है,[45] जहां प्रत्येक वार्ड से निगम परिषद के सदस्य चुन कर पांछ वर्ष के लिये आते हैं। पहले कोचीन क्षेत्र में फ़ोर्ट कोची, मट्टनशेरी, एवं एर्णाकुलम इस क्षेत्र की तीन नगरपालिकाएं हुआ करती थीं, जिन्हें बाद में विलय कर कोचीन नगर निगम की स्थापना की गई। निगम का मुख्यालय एर्णाकुलम में है तथा मण्डलीय कार्यालय पाल्लरुति, इडपल्ली, वडुथल एवं वयतिल्ला में स्थित हैं। नगर का सामान्य प्रशासन क्र्मिक विभाग परिषद स्टैंडिंग समिति अनुभाग द्वारा देखा जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] अन्य विभागों में नगर योजना, स्वास्थ्य, अभियांत्रिकी, कर एवं लेखा विभाग आते हैं। [22] नगर में अपशिष्ट निपटान और सीवेज प्रबंधन के लिये भी निगम ही उत्तरदायी है। नगर में दैनिक अपशिष्ट लगभग ६०० टन होता है[कृपया उद्धरण जोड़ें] जिसक एक बड़ा भाग ब्रह्मपुरम सॉएल्ड वेस्ट प्लांट द्वारा कार्बनिक खाद में बदल दिया जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] पेय जल की आपूर्ति पेरियार नदी से केरल जल प्राधिकरण (केरल वॉटर अथॉरिटी) द्वारा कोची वॉटर वर्क्स विभाग के सहयोग से की जाती है। [46] नगर की विद्युत आपूर्ति केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड द्वारा की जाती है}। ग्रेटर कोचीन क्षेत्र के विकास के उत्थान एवं उस पर नियंत्रण रखने का कार्य ग्रेटर कोचीन डवलपमेण्ट अथॉरिटी (जीसीडीए तथा गोश्री आईलैण्ड डवलपमेण्ट अथॉरिटी (जीआईडीए) द्वारा किया जाता है। दोनों ही सरकारी संस्थाएं हैं तथा नगर के अवसंरचना विकास में कार्यशील हैं।

विधि एवं व्यवस्था[संपादित करें]

कोच्चि में ही राज्य का केरल उच्च न्यायालय भी स्थित है। राज्य की विधि व्यवस्था केरल सिटी पोलीस की देखरेख में रहती है। इस संस्था के सर्वोत्तम अधिकारी पुलिस आयुक्त हैं, जो एक भारतीय पुलिस सेवा (आई.पी.एस) अधिकारी होते हैं। नगर को व्यवस्था हेतु पांच भागों में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक का एक सर्किल अधिकारी होता है। सामान्य व्याय व्यवस्था के अतिरिक्त पोलीस सेवा यातायात पोलीस, नार्कोटिक्स प्रकोष्ठ, रॉएट हॉर्स, सशस्त्र रिज़र्व कैम्प्स, जिला अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो तथा महिला पोलीस स्टेशन भी चलाती है। [47] यहां केरल सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत १९ पुलिस स्टेशन हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]। इनके अलावा केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की एक भ्रष्टाचार विरोधी शाखा भी नगर में स्थित है। केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तीन स्क्वैड्रन्स नगर की विभिन्न राज्य व केन्द्र सरकारी भारी उद्योगों, विमानक्षेत्र एवं बंदरगाह क्षेत्रों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराते हैं। अन्य प्रमुख केन्द्र सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय अन्वेषण एजेन्सी, डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यु इन्टेलिजेन्स, भारतीय कस्टम्स विभाग नगर में एक प्रमुख बंदरगाः होने के कारण स्थित हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी), कोच्ची के आंकड़ों के अनुसार भारतीय पैनल कोड के अन्तर्गत्त अपराधों में २००९ के मुकाबले २०१० में 193.7 % बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। पूरे राज्य में अपराध दर 424.1 के मुकाबले 1,897.8 दर्ज की गई है।[48] हालांकि कोच्चि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या व अपहरण जैसे बड़े अपराधों में नगर में राज्य के अन्य शहरों की अपेक्षा कमी अंकित की गई है। [49][50]वर्षाकाल में तमिल नाडु राज्य के तिरुनेलवेली के निकटवर्ती तिरुट्टु ग्राम (चोरों का गांव) से बड़ी संख्या में योजनाबद्ध तरीके बड़ी संख्या में चोरों के समूह नगर में आते हैं व चोरियां करते हैं।[51] हाल के समय में केरल पुलिस ने कोच्चि के विभिन्न आवासी संघों (रेज़िडेन्ट एसोसियेशन्स) की सहायता से इन चोरियों की रोकथाम हेतु प्रयास तेज किये हैं।[52] इस गांव के चोरों के उत्पातों से प्रभावित होकर फ़िल्म निर्देशक जॉन एन्टोनी ने एक मलयालम फ़िल्म 'तिरुट्टु ग्रामम ' का निर्माण अभिनेता मम्मूटी के साथ किया है। इस फ़िल्म में मम्मूटी ने एक अभ्यस्त लुटेरे चोर की भूमिका की है। [53]

अर्थ व्यवस्था[संपादित करें]

चित्र:Cochinshipyard.jpg
कोचीन शिपयार्ड

कोच्ची को केरल राज्य की वाणिज्यिक राजधानी माना जाता रहा है।[54] कोच्ची में ही कोचीन स्टॉक एक्स्चेंज भी स्थापित है, जो कि केरल का एकमात्र स्टॉक एक्स्चेंज है। भारत का चौथा सबसे बड़ा निजी-सेक्टर का बैंक यहीं अल्युवा में स्थित है। एक बड़ा ऑनलाइन ट्रेडिंग केन्द्र होने के कारण ही यहां सेबी ने अपना स्थानीय कार्यालय भी खोला है। [55]

विद्युत, ताजा जल, लम्बी तटरेखा, बैकवाटर्स, अच्छी बैंकिंग सुविधाओं, एक बड़े बंदरगाह की उपस्थिति, कण्टेनर ट्रांस-शिपमेंट टर्मिनल एवं एक अन्तर्राष्ट्रीय हवाई हब ऐसे कुछ कारक हैं जिन्होंने नगर की एवं निकटवर्ती इलाकों की औद्योगिक प्रगति में त्वरण का कार्य किया है। [39] हाल के वर्षों में नगर ने भारी निवेश अनुभव किया है; जिसके चलते कोच्चि भारत के तेजी से प्रगति करते द्वितीय वर्ग महानगरों में गिना जाने लगा है।[56][57] कोच्चि महानगरीय क्षेत्र से उपजा राजस्व राज्य की आय में भारी योगदान देता है।[58][59] यह जिला राज्य के सकल घरेलु उत्पाद का सर्वाधिक, १४.४७% योगदान देता है। [60] निर्माण एवं विनिर्माण से ३७%, व्यापार, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी मिलाकर और २०% योगदान देते हैं। यहां के प्रधान व्यापारों में निर्माण, विनिर्माण, जहाज-निर्माण, सीफ़ूड एवं मसालों का निर्यात, परिवहन एवं जहाजरानी, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, चिकित्सा सेवाएं एवं बैंकिंग हैं। कोच्ची को विश्व बैंक द्वारा संसार के प्रधान औद्योगिक नगरों में वरीयता क्रम से १८वां स्थान दिया गया है। हालांकि २००९ के एक रैंकिंग ऑफ़ ईज़ टू स्टार्ट अ विज़नेस (व्यापार आरम्भ करने में सहायक) नगरों की भारत में १७ वरीय शहरों में कोच्चि को अंतिम द्वितीय कठिनतम नगर अर्थात १७ में से १६वां का स्थान प्राप्त हुआ था। यह स्थान कोलकाता से ऊपर था, जो १७वें स्थान पर था। [61]

केरल के अधिकांश क्षेत्रों की भांति जी, कोच्चि में भी अप्रवासी भारतीय परिवारगणों द्वारा भेजे गए पैसे ही परिवार की आय-स्रोत हैं।[62] नगर केन्द्र से 17 कि.मी (11 मील) की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित एलूर केरल राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, जहां 250 से अधिक उद्योग एवं निर्माणियां स्थापित हैं। इन इकाइयों में विभिन्न प्रकार के मदों, जैसे रसायन, पेट्रोरसायन उत्पाद, कीटनाशक, रेयर अर्थ धातु-उत्पाद, उर्वरक, जस्ता एवं क्रोमियम यौगिक एवं चर्म उत्पादों का निर्माण/ उत्पादन होता है। [63] केरल की सबसे पुरानी उर्वरक एवं रसायन उत्पादन निर्माणी फ़र्टिलाइज़र्स एण्ड कॅमिकल्स त्रावणकोर लि. (FACT) भी कोच्चि में ही स्थित है। [64] दक्षिण भारत की सबसे बड़ी तेल-शोधन सुविधा अम्बलामुगळ में बी.पी.सी.एल की कोच्चि रिफ़ाइनरीज़ में उपलब्ध है। पेट्रोनेट इण्डिया ने अब तक ऊर्जा एवं ईंधन की आवश्यकता के लिये प्राकृतिक गैस के आयात एवं भण्डारण हेतु कोच्चि एल.एन.जी टर्मिनल का निर्माण कार्य लगभग पूरा ही कर लिया है।[65] इनके सिवाय नगर में विभिन्न केन्द्र सरकारी कार्यालय जैसे कोकोनट डवलपमेण्ट बोर्ड, क्वायर बोर्ड ऑफ़ इण्डिया तथा मैरीन प्रोडक्ट्स एक्स्पोर्ट डवलपमेण्ट अथॉरिटी (MPEDA) के मुख्यालय भी स्थित हैं।

कोच्चि रिफ़ायनरीज़ की ऑफ़शोर कोच्चि स्थित एस.पी.एम सुविधा।

नगर केन्द्र से 19.9 किमी दूर स्थित कलामश्शेरी केरल का औद्योगिक केन्द्र कहा जा सकता है। यहां बड़ी औद्योगिक निर्माणियां जैसे फ़र्टिलाईज़र एण्ड कैमिकल्स त्रावणकोर (फ़ैक्ट), एच.एम.टी, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग जैसे इन्फ़ोपार्क, किन्फ़्रा हाईटेक पार्क आदि भी शहर के उपशहरी क्षेत्र में स्थित हैं। नीरा डवलपमेण्ट सेण्टर का मुख्यालय भी कलामश्शेरी में ही स्थित है। इसके अलावा यहां कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भी स्थित है।

केरल के अन्य स्थानों की ही भांति यहां की स्थानीय अर्थ-व्यवस्था में पर्यटन का भी विशेष योगदान है। कोच्चि जहाम स्थित है, वह एर्णाकुलम जिला केरल में भ्रमण करने वाले कुल स्थानीय पर्यटकों की संख्या के अनुसार प्रथम स्थान पर है,[10] और इस प्रकार से नगर की अर्थ-व्यवस्था में इसका योगदान गहरा है। फ़ोर्ट कोच्चि स्थित पर्यटक एन्क्लेव परिसर एवं अन्य पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक स्मारकों तथा इमारतों, संग्रहालयों, आदि के साथ–साथ वेम्बनाड झील तथा बैकवाटर्स जैसे प्राकृतिक आकर्षणों के कारण नगर ढेरों पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। स्थानीय निवासियों के लिये नगर में बड़ी संख्या में स्थित अस्पतालों एवं चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से रोज़गार का प्रधान स्रोत उपलब्ध होता है। कोच्चि बंदरगाह अन्तर्राष्ट्रीय जलयात्रियों के लिये नियमित रूप से उपयोग होने वाला बड़ा केन्द्र है।[66] नगर में देश की प्रथम मैरीना सुविधा उपलब्ध होने से[67] कोच्चि मरीना बड़ी संख्या में यॉट-चालकों का आकर्षण बना रहता है। कोच्चि की अर्थ-व्यवस्था में एक बड़ा योगदान यहां की तेजी से फ़लती-फ़ूलती रियल-एस्टेट उद्योग का भी है। यहां बहुत से छोटे-बड़े रिअल-एस्टेट व्यापारियों ने खूब कमाया है और ऊंचे लक्ष्य प्राप्त किये हैं।

भारती नौसेना की दक्षिण नवल कमान का मुख्यालय कोच्चि नगर में स्थित है। यह भारतीय नौसेना का प्राथमिक प्रशिक्षण केन्द्र है।[68] कोचीन शिपयार्ड का नगर में बड़ा आर्थिक योगदान है।[69][70] तोप्पुमपाडी स्थित मछली-पकड़ने के तट पर छोटे तौर पर ये व्यवसाय चालू है तथा स्थानीय एवं आयात बाजार हेतु मत्स्य आपूर्ति करता है। कोच्चि के वर्ष पर्यन्त चलने वाले हार्बर की क्षमताओं का अधिक उपयोग करने हेतु एक अन्तर्राष्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनल तथा कई मैरीनाज़ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। [71][72]

कोच्चि मरीना भारत का प्रथम और अभी तक एकमात्र मरीना है।

The Kochi Marina is the first, and currently only marina in India]]

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

डच महल[संपादित करें]

यह महल मूल रूप से पुर्तगालियों द्वारा बनवाया गया और कोचीन के राजा वीर केरला वर्मा को भेंट किया गया था। बाद में डच का इस पर अधिकार हो गया। उन्होंने 1663 में किले की मरम्मत कराई और किले को नया रूप दिया। इस किले में कोचीन के कई राजाओं का राज्याभिषेक हुआ था। इस किले में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों से संबंधित पेंटिंग्‍स बनी हुई है। महाल

बोलघाट्टी महल[संपादित करें]

इस महल को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। डच लोगों द्वारा बनवाया गया यह महल बोलघट्टी द्वीप पर स्थित है। इस महल को अब एक लक्जरी होटल में तब्दील कर दिया गया है। बोलघट्टी में एक गोल्फ कोर्स भी है। यहां पर लोग पिकनिक मनाने भी आते है।

हिल महल[संपादित करें]

19वीं शताब्दी में कोच्चि के राजा द्वारा यह महल बनवाया गया था। अब इसे केरला पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है। संग्रहालय में चित्रकारी, नक्काशी और राजकीय वंश से संबंधित वस्तुओं को रखा गया हैं।

बेशन बंगला[संपादित करें]

इन्डो-युरोपियन शैली में बना यह बंगला 1667 ई. में बनवाया गया था। डच किले के स्ट्रोमबर्ग बेशन में स्थित होने के कारण इसका नाम बेशन बंगला पड़ा। इसकी छत में टाइलें लगी हुईं हैं और बरांमदा लकड़ी का बना हुआ है।

मरीन ड्राइव[संपादित करें]

कोच्चि के समुद्र तट के किनारे बना यह सड़क पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी बहुत भाता है। यहां से समुद्र का नजारा बेहद आकर्षक लगता है। 140 मीटर लंबे इस सड़क को बेहद खूबसूरत ढंग से सजाया गया है। रेड कारपेट अल्ट्रा टाइल से बनी इस सड़क को शानमुगम रोड के नाम से भी जाना जाता है। मरीन ड्राइव के आसपास का इलाका बेहद खूबसूरत है। यहां हमेशा फिल्‍म की शुटिंग भी होती रहती है।

चेराई बीच[संपादित करें]

कोच्चि से 25 किमी दूर चेराई बीच की सुंदरता देखते ही बनती है। नारियल और खजूर के पेड़ों के अलावा पारंपरिक केरला के मकान इस बीच की खूबसूरती में चार चांद लगाते है। यहां डोल्फिन मछलियों को देखा जा सकता है।

सेन्ट फ्रान्सिस चर्च (संत फ्रान्सिस गिरिजाघर)[संपादित करें]

1503 ई. में बना यह चर्च भारत का सबसे पुराना यूरोपियन चर्च है। प्रोटेस्टेंट डच द्वारा इसे 1779 में पुन:स्थापित किया गया। 1795 में अंग्रेजों ने इसे एंजलिकन चर्च में तब्दील कर दिया। कहा जाता है कि वास्को डि गामा को इस चर्च में दफनाया गया था। बाद में उसके अवशेष को पुर्तगाल ले जाया गया था।

ऐतिहासिक संग्रहालय[संपादित करें]

इडापल्ली में स्थित इस संग्रहालय में केरल के इतिहास को मूर्ति के माध्यम से दर्शाया गया है। संग्रहालय के बाहर परशुराम की प्रतिमा है। उसे देखकर लगता है जैसे वह आगंतुकों का अभिनंदन कर रही हो। कहा जाता है कि परशुराम ने ही केरल की स्थापना की थी।

पल्लिपुरम किला[संपादित करें]

यह किला यूरोपियन की प्राचीनतम स्मारकों में एक है। इसे 1503 में पुर्तगालियों ने बनवाया था। डच ने 1661 में इस किले पर अधिकार कर लिया और त्रावनकोर के राज्य को 1789 में बेच दिया था।

परीक्षित थंपुरान संग्रहालय[संपादित करें]

इस संग्रहालय में 19वीं शताब्दी की पेंटिंग, प्राचीन मुद्राएं, पत्थरों की मूर्तियां, पेंटिंग की प्रतिलिपियां, प्लास्टर ऑफ पेरिस आदि को रखा गया है। कोचीन के शाही परिवारों से जुड़ी अनेक वस्तुएं भी आपको यहां देखने को मिल जाएगीं।

कांजिरामट्टम मस्जिद[संपादित करें]

कोच्चि से 30 किमी की दूरी पर यह पवित्र मस्जिद स्थित है। कहा जाता है कि मुस्लिम संत शेख फरीद की कब्रगाह पर इसका निर्माण हुआ है। जनवरी में यहां चंदनाकूदम पर्व आयोजित किया जाता है।

कालाडी[संपादित करें]

यह स्थान आठवीं शताब्दी के महान भारतीय दार्शनिक आदि‍ शंकराचार्य की जन्मभूमि है। शंकराचार्य की याद में यहां दो मंदिर बनाए गए हैं। एक मंदिर दक्षिणामूर्ति और दूसरा देवी शारदा को समर्पित है।

गम्यता[संपादित करें]

वायुमार्ग-

कोचीन का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत के प्रमुख शहरों से सीधा जुड़ा हुआ है। इंडियन एयरवेज और जेट एयरवेज की फ्लाइट से कोच्चि पहुंचा जा सकता है।

रेलमार्ग-

एरनाकुलम में दो रेलवे स्टेशन हैं। एक उत्तर और दूसरा दक्षिण में। यहां से कोच्चि जाने के लिए बस या टैक्सी की सेवाएं ली जा सकती हैं। एरनाकुलम भारत के अनेक शहरों से रेलगाड़ियों के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग-

कोच्चि सड़क मार्ग से अनेक पर्यटन केन्द्रों और शहरों से जुड़ा हुआ है। बैंगलोर से कोच्चि की दूरी 565 किमी, कोयंबटूर से 223 किमी, गोवा से 848 किमी, मद्रास से 694 किमी और मैसूर से 470 किमी है। राज्य परिवहन निगम की बसें कोच्चि के लिए नियमित रूप से चलती हैं।

प्रसिद्ध वस्तुएं[संपादित करें]

कोच्चि और उसके आसपास के क्षेत्रों से अनेक यादगार और लोकप्रिय वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। मट्टनचेरी, जिव स्ट्रीट और एम जी रोड़ खरीददारी के लिए प्रसिद्ध हैं। मट्टनचेरी से मसाले, चाय, काफी और स्मारिकाएं खरीदी जा सकती हैं। इसके साथ ही मुखोटे, पीतल की आकृतियां और लकड़ियों से बने श्रृंगार के बक्से खरीदे जा सकते हैं। यहां से प्राचीन काल के बर्तन भी खरीदे जा सकते हैं। मालाबार में मसालों की दुकानों से ताजे मसालों की खरीददारी की जा सकती है।

भ्रमण समय[संपादित करें]

सितंबर से मई की अवधि कोच्चि के पर्यटन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

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