इलाहाबाद

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इलाहाबाद
प्रयाग
नया यमुना सेतु, इलाहाबाद
नया यमुना सेतु, इलाहाबाद
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला इलाहाबाद
महापौर अभिलाषा गुप्ता
जनसंख्या 12,15,348[1] (2008 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 98 मीटर (322 फी॰)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 25°27′N 81°51′E / 25.45, 81.85 इलाहाबाद उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित एक नगर एवं इलाहाबाद जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। इसका प्राचीन नाम प्रयाग है। इसे 'तीर्थराज' (तीर्थों का राजा) भी कहते हैं। हिन्दू मान्यता अनुसार, यहां सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ किया था। यही सबसे बड़े हिन्दू सम्मेलन महाकुंभ की चार स्थलियों में से एक है, शेष तीन हरिद्वार, उज्जैन एवं नासिक हैं। हिन्दू धर्मग्रन्थों में वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है। यहीं सरस्वती नदी गुप्त रूप से संगम में मिलती है, अतः ये त्रिवेणी संगम कहलाता है, जहां प्रत्येक बारह वर्ष में कुंभ मेला लगता है।[2]

इलाहाबाद में कई महत्त्वपूर्ण राज्य सरकार के कार्यालय स्थित हैं, जैसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रधान महालेखाधिकारी (एजी ऑफ़िस), उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग (पी.एस.सी), राज्य पुलिस मुख्यालय, उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय।

भारत सरकार द्वारा इलाहाबाद को जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना के लिये मिशन शहर के रूप में चुना गया है।[3]


नामकरण[संपादित करें]

शहर का वर्तमान नाम अकबर द्वारा १५८३ में रखा गया था। हिन्दी नाम इलाहाबाद का अर्थ अरबी शब्द इलाह (अकबर द्वारा चलाये गए नये धर्म दीन-ए-इलाही के संदर्भ से, अल्लाह के लिये) एवं फारसी से आबाद (अर्थात बसाया हुआ) – यानि 'ईश्वर द्वारा बसाया गया', या 'ईश्वर का शहर' है।

इतिहास[संपादित करें]

कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की आनंद भवन, इलाहाबाद में बैठक में महात्मा गांधी, उनके बायीं ओर वल्लभभाई पटेल एवं विजयलक्ष्मी पंडित उनके दायीं ओर, जनवरी, १९४०

प्राचीन काल में शहर को प्रयाग (बहु-यज्ञ स्थल) के नाम से जाना जाता था। ऐसा इसलिये क्योंकि सृष्टि कार्य पूर्ण होने पर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने प्रथम यज्ञ यहीं किया था, व उसके बाद यहां अनगिनत यज्ञ हुए। भारतवासियों के लिये प्रयाग एवं वर्तमान कौशाम्बी जिले के कुछ भाग यहां के महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। यह क्षेत्र पूर्व से मौर एवं गुप्त साम्राज्य के अंश एवं पश्चिम से कुशान साम्राज्य का अंश रहा है। बाद में ये कन्नौज साम्राज्य में आया। १५२६ में मुगल साम्राज्य के भारत पर पुनराक्रमण के बाद से इलाहाबाद मुगलों के अधीन आया। अकबर ने यहां संगम के घाट पर एक वृहत दुर्ग निर्माण करवाया था। शहर में मराठों के आक्रमण भी होते रहे थे। इसके बाद अंग्रेजों के अधिकार में आ गया। १७६५ में इलाहाबाद के किले में थल-सेना के गैरीसन दुर्ग की स्थापना की थी। १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इलाहाबाद भी सक्रिय रहा।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन यहां दरभंगा किले के विशाल मैदान में १८८८ एवं पुनः १८९२ में हुआ था। [4][5]

१९३१ में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने ब्रिटिश पुलिस से घिर जाने पर स्वयं को गोली मार कर अपनी न पकड़े जाने की प्रतिज्ञा को सत्य किया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में नेहरु परिवार के पारिवारिक आवास आनन्द भवन एवं स्वराज भवन यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों के केन्द्र रहे थे। यहां से हजारों सत्याग्रहियों को जेल भेजा गया था। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु इलाहाबाद निवासी ही थे।


स्वतंत्रता आन्दोलन में भूमिका[संपादित करें]

भारत के स्वतत्रता आन्दोलन में भी इलाहाबाद की एक अहम् भूमिका रही। राष्ट्रीय नवजागरण का उदय इलाहाबाद की भूमि पर हुआ तो गाँधी युग में यह नगर प्रेरणा केन्द्र बना। 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' के संगठन और उन्नयन में भी इस नगर का योगदान रहा है। सन 1857 के विद्रोह का नेतृत्व यहाँ पर लियाक़त अली ख़ाँ ने किया था। कांग्रेस पार्टी के तीन अधिवेशन यहाँ पर 1888, 1892 और 1910 में क्रमशः जार्ज यूल, व्योमेश चन्द्र बनर्जी और सर विलियम बेडरबर्न की अध्यक्षता में हुए। महारानी विक्टोरिया का 1 नवम्बर, 1858 का प्रसिद्ध घोषणा पत्र यहीं अवस्थित 'मिण्टो पार्क'[5] में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड केनिंग द्वारा पढ़ा गया था। नेहरू परिवार का पैतृक आवास ' स्वराज भवन' और 'आनन्द भवन' यहीं पर है। नेहरू-गाँधी परिवार से जुडे़ होने के कारण इलाहाबाद ने देश को प्रथम प्रधानमंत्री भी दिया। क्रांतिकारियों की शरणस्थली उदारवादी व समाजवादी नेताओं के साथ-साथ इलाहाबाद क्रांतिकारियों की भी शरणस्थली रहा है। चंद्रशेखर आज़ाद ने यहीं पर अल्फ्रेड पार्क में 27 फ़रवरी, 1931 को अंग्रेज़ों से लोहा लेते हुए ब्रिटिश पुलिस अध्यक्ष नॉट बाबर और पुलिस अधिकारी विशेश्वर सिंह को घायल कर कई पुलिसजनों को मार गिराया औरं अंततः ख़ुद को गोली मारकर आजीवन आज़ाद रहने की कसम पूरी की। 1919 के रौलेट एक्ट को सरकार द्वारा वापस न लेने पर जून, 1920 में इलाहाबाद में एक सर्वदलीय सम्मेलन हुआ, जिसमें स्कूल, कॉलेजों और अदालतों के बहिष्कार के कार्यक्रम की घोषणा हुई, इस प्रकार प्रथम असहयोग आंदोलन और ख़िलाफ़त आंदोलन की नींव भी इलाहाबाद में ही रखी गयी थी।

भूगोल[संपादित करें]

इलाहाबाद के निकटवर्ती क्षेत्र

इलाहाबाद की भौगोलिक स्थिति 25°27′N 81°50′E / 25.45, 81.84 उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में ९८ मीटर (३२२ फ़ीट) पर गंगा और यमुना नदियों के संगम पर स्थित है। यह क्षेत्र प्राचीन वत्स देश कहलाता था। इसके दक्षिण-पूर्व में बुंदेलखंड क्षेत्र है, उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में अवध क्षेत्र एवं इसके पश्चिम में निचला दोआब क्षेत्र। इलाहाबाद भौगोलिक एवं संस्कृतिक दृष्टि, दोनों से ही महत्त्वपूर्ण रहा है। गंगा-जमुनी दोआब क्षेत्र के खास भाग में स्थित ये यमुना नदी का अंतिम पड़ाव है। दोनों नदियों के बीच की दोआब भूमि शेष दोआब क्षेत्र की भांति ही उपजाउ किंतु कम नमी वाली है, जो गेहूं की खेती के लिये उपयुक्त होती है। जिले के गैर-दोआबी क्षेत्र, जो दक्षिणी एवं पूर्वी ओर स्थित हैं, निकटवर्ती बुंदेलखंड एवं बघेलखंड के समान शुष्क एवं पथरीले हैं। भारत की नाभि जबलपुर से निकलने वाली भारतीय अक्षांश रेखा जबलपुर से 343 कि.मी. (213 मील) उत्तर में इलाहाबाद से निकलती है।

इलाहाबाद का पुनर्संगठन[संपादित करें]

इलाहाबाद मंडल एवं जिले में वर्ष २००० में बड़े बदलाव हुए। इलाहाबाद मंडल के इटावा एवं फर्रुखाबाद जिले आगरा मंडल के अधीन कर दिये गए, जबकि कानपुर देहात को कानपुर जिले में से काटकर एक नया कानपुर मंडल सजित कर दिया गया। पश्चिमी इलाहाबाद के भागों को काटकर नया कौशांबी जिला बनाया गया। अब इलाहाबाद मंडल में इलाहाबाद, कौशांबी एवं प्रतापगढ़ एवं फतेहपुर जिले हैं।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

2013 की जनगणना के अनुसार इलाहाबाद शहर की वर्तमान जनसंख्या 1,342,229 है। ये भारत में जनसंख्या के अनुसार 32वें स्थान पर आता है।इलाहाबाद जिला 2013 की जनगणना के अनुसार 6010249 जो उत्तर प्रदेश का सबसे जनसँख्या वाला जिला हैँ । [6] इलाहाबाद का क्षेत्रफल लगभग 70 कि.मी. (27 वर्ग मील)[7] है और ये [[समुद्र की सतह से ऊंचाई|सागर सतह से 98 मी. (320 फुट) ऊंचाई पर स्थित है।

हिन्दी-भाषी इलाहाबाद की बोली अवधी है, हालांकि अधिकांश शहरी क्षेत्र में खड़ी बोली ही बोली जाती है। जिले के पूर्वी गैर-दोआबी क्षेत्र में प्रायः बघेली बोली का चलन है।

इलाहाबाद में सभी प्रधान धर्म के लोग निवास करते हैं। यहां हिन्दू कुल जनसंख्या का ८५% और मुस्लिम ११% हैं। इनके अलावा सिख, ईसाई एवं बौद्ध लोगों की भी छोटी संख्या है।

जलवायु[संपादित करें]

इलाहाबाद
जलवायु सारणी (व्याख्या)
मा जू जु सि दि
 
 
19
 
24
9
 
 
16
 
27
11
 
 
9
 
34
17
 
 
6
 
39
23
 
 
10
 
42
27
 
 
85
 
40
29
 
 
300
 
34
26
 
 
308
 
33
26
 
 
190
 
33
25
 
 
40
 
33
21
 
 
12
 
30
14
 
 
3
 
25
9
औसत अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान (°से.)
कुल वर्षा (मि.मी)
स्रोत: IMD

इलाहाबाद में तीन प्रमुख ऋतुएं आती हैं: ग्रीष्म ऋतु, शीत ऋतु एवं वर्षा ऋतु। ग्रीष्मकाल अप्रैल से जून तक चलता है, जिसमें अधिकतम तापमान ४०°से. (१०४ °फै.) से ४५ °से. (११३ °फै.) तक जाता है। मानसून काल आरंभिक जुलाई से सितंबर के अंत तक चलती है। इसके बाद शीतकाल दिसंबर से फरवरी तक रहता है। तापमान यदाकदा ही शून्य तक पहुंचता है। अधिकतम तापमान लगभग २२ °से. (७२ ° फा.) एवं न्यूनतम तापमान १०° से. (५०° फा.) तक पहुंचता है। इलाहाबाद में जनवरी माह में घना कोहरा रहता है, जिसके कारण यातायात एवं यात्राओं में अत्यधिक विलंब भी हो जाते हैं। किंतु यहां हिमपात कभी नहीं होता है।

न्यूनतम अंकित तापमान, -२ °से. (२८.४ °फै.) एवं अधिकतम ४८ °से. (११८ °फै.) ४८ °से.[8] तक पहुंचा है।

नागर प्रशासन[संपादित करें]

इलाहाबाद नगर निगम, राज्य के प्राचीनतम नगर निगमों में से एक है। निगम १८६४ में अस्तित्त्व में आया था[7], जब तत्कालीन भारत सरकार द्वारा लखनऊ म्युनिसिपल अधिनियम पास किया गया था। नगर के म्युनिसिपल क्षेत्र को कुल ८० वार्डों में विभाजित किया गया है व प्रत्येक वार्ड से एक सदस्य (कार्पोरेटर) चुनकर नगर परिषद का गठन किया जाता है। [9]. ये कॉर्पोरेटर शहर के महापौर को चुनते हैं। राज्य सरकार द्वारा चुने गए मुख्य कार्यपालक को इलाहाबाद का आयुक्त (कमिश्नर) नियुक्त किया जाटा है।

शहर[संपादित करें]

इलाहाबाद गंगा-यमुना नदियों के संगम पर स्थित है। ये एक भू-स्थित प्रायद्वीप रूप में देखा जा सकता है जिसे तीन ओर से नदियों ने घेर रखा है एवं मात्र एक ओर ही मुख्य भूमि से जुड़ा है। इस कारण ही शहर के भीतर व बाहर बढ़ते यातायात परिवहन हेतु अनेक सेतुओं द्वारा गंगा व यमुना नदियों के पार जाते हैं।

इलाहाबाद का शहरी क्षेत्र तीन भागों एं वर्गीकृत किया जा सकता है: चौक , कटरा पुराना शहर जो शहर का आर्थिक केन्द्र रहा है। यह शहर का सबसे घना क्षेत्र है, जहां भीड़-भाड़ वाली सड़कें यातायात व बाजारों का कां देती हैं। नया शहर जो सिविल लाइंस क्षेत्र के निकट स्थित है; ब्रिटिश काल में स्थापित किया गया था। यह भली-भांति सुनियोजित क्षेत्र ग्रिड-आयरन रोड पैटर्न पर बना है, जिसमें अतिरिक्त कर्णरेखीय सड़कें इसे दक्ष बनाती हैं। यह अपेक्षाकृत कम घनत्व वाला क्षेत्र हैजिसके मार्गों पर वृक्षों की कतारें हैं। यहां प्रधान शैक्षिक संस्थान, उच्च न्यायालय, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग कार्यालय, अन्य कार्यालय, उद्यान एवं छावनी क्षेत्र हैं। यहां आधुनिक शॉपिंग मॉल एवं मल्टीप्लेक्स बने हैं, जिनमें निम्नलिखित मुख्य हैं-

अन्य पाँच माँल पर काम चल रहा हैं। बाहरी क्षेत्र में शहर से गुजरने वाले मुख्य राजमार्गों पर स्थापित सैटेलाइट टाउन हैं। इनमें गंगा-पार (ट्रांस-गैन्जेस) एवं यमुना पार (ट्रांस-यमुना) क्षेत्र आते हैं। विभिन्न रियल-एस्टेट बिल्डर इलाहाबाद में निवेश कर रहे हैं, जिनमें ओमेक्स लि. प्रमुख हैं। नैनी सैटेलाइट टाउन में १५३५ एकड़ की हाई-टेक सिटी बन रही है।

अस्पताल[संपादित करें]

इलाहाबाद शहर में कई बडे सरकारी अस्पताल हैं

  • स्वरुप रानी नेहरु अस्पताल,
  • मोतीलाल नेहरु अस्पताल
  • कमला नेहरु अस्पताल
  • फीनिक्स हॉस्पिटल,
  • जीवन ज्योति अस्पताल
  • नाजरथ अस्पताल,
  • सिटी अस्पताल,
  • भोला अस्पताल,
  • पार्वती अस्पताल,
  • कमला मेमोरियल अस्पताल,
  • उत्तर मध्य रेलवे अस्पताल,
  • तेजबहादूर सप्रू अस्पताल,
  • वातसल्य अस्पताल,
  • अमभोला अस्पताल,
  • अल्का अस्पताल,
  • चिल्ड्रेन अस्पताल,

होटल[संपादित करें]

इलाहाबाद में सभी वर्गों के लिए हेतु बडे होटल ,धर्मशालाएँ व गेस्ट हाउस इत्यादि हैं । इनमे से कुछ प्रमुख होटल का विवरण दिया जा रहा है ।

  • होटल कान्हाश्याम
  • इलाहाबाद रीजेन्सी होटल
  • हर्ष होटल
  • ग्रैण्ड कान्टीनेन्टल होटल
  • सम्राट होटल
  • मिलऩ होटल
  • एन सी कान्टीनेन्टल होटल
  • एन सी होटल
  • यात्रिक होटल
  • सूर्या होटल
  • कोको होटल
  • फिनारे होटल
  • कल्पतरु होटल
  • कोहिनूर होटल
  • प्रसीडेन्सी होटल
  • रेजीना होटल
  • प्रयाग होटल
  • काशी होटल
  • संगम होटल
  • कामधेनु होटल

ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

यहाँ कई क्रीड़ा परिसर हैं, जिनका उपयोग व्यावसायिक एवं अव्यवसायी खिलाड़ी करते रहे हैं। इनमें मदन मोहन मालवीय क्रिकेट स्टेडियम, मेयो हॉल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स एवं बॉयज़ हाई स्कूल एवं कॉलिज जिम्नेज़ियम हैं। जॉर्जटाउन में एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का तरणताल परिसर भी है। झालवा (इलाहाबाद पश्चिम) में नेशनल स्पोर्ट्स एकैडमी है, जहां विश्व स्तर के जिमनास्ट अभ्यासरत रहते हैं। अकादमी को आगामी राष्ट्रमंडल खेलों के लिये भारतीय जिमनास्ट हेतु आधिकारिक ध्वजधारक चुना गया है।

संगम


इलाहाबाद किला

मध्यकालीन इतिहासकार बदायूनी के अनुसार 1575 मे सम्राट अकबर ने प्रयाग की यात्रा की और एक शाही शहर इलाहाबाद की स्थापना की 1583 मे अकबर ने इलाहाबाद मे गंगा और यमुना के संगम पर एक किले का निर्माण प्रारम्म करवाया । यह किला चार भागो मे बनवाया गया ।पहले हिस्से में 12 भवन एवं कुछ बगीचे बनवाये गयें। दूसरे हिस्से में बेगमोँ और शहजादियों के लिऐ महलो का निर्माण करवाया गया । तीसरा हिस्सा शाही परिवार के दूर के रिश्तेदारों और नैकरों के लिऐ बनवाया गया और चौथा हिस्सा सैनिको के लिये बनवाया गया ।इस किले में 93 महर, 3 झरोखा,25 दरवाजें, 277 इमारतें ,176 कोठियाँ 77 तहखानें व 20 अस्तबल और 5 कुएं हैं ।

उल्टा किला यह किला झूसी में स्थित है।

स्वराज भवन

स्वराज भवन इलाहाबाद में स्थित एक ऐतिहासिक भवन एवं संग्रहालय है। इसका मूल नाम 'आनन्द भवन' था। इस ऐतिहासिक भवन का निर्माण मोतीलाल नेहरू ने करवाया था। 1930 में उन्होंने इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। इसके बाद यहां कांग्रेस कमेटी का मुख्यालय बनाया गया। भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का जन्म यहीं पर हुआ था। आज इसे संग्रहालय का रूप दे दिया गया है। परिचय 1899 में मोतीलाल नेहरु ने चर्च लेन नामक मोहल्ले मेँ एक अव्यवस्थित इमारत खरीदी । जब इस बंगले मेँ नेहरु परिवार रहने के लिये आया तब इसका नाम आनन्द भवन रखा गया । पुरानी इमारत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सौँप दी गयी । 1931 मेँ पं मोतीलाल नेहरु की गूजरने के बाद उनके पुत्र जवाहर लाल नेहरु ने एक ट्रस्ट बना कर स्वाराज भवन भारतीय जनता के ज्ञान के विकास स्वास्थ्य एंव सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिये समर्पित कर दिया ।इस इमारत के एक हिस्से मेँ अस्पताल जो की आज कमाला नेहरु के नाम से जाना जाता हैं ।और शेष अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के उपयोग के लिये था ।1948 से 1974 तक इस ईमारत का उपयोग बच्चोँ की शैक्षणिक गतिविधियोँ विकाय के लिये किया जता रहा और इसमेँ एक बाल भवन कि स्थापना कि गयी । बाल भवन मेँ शैक्षिक यथा संगित विग्यान खेल आदि के विषय मेँ बच्चोँ को सिखाया जता था ।1974 मेँ स्वंगीय प्रधानमत्री इंदिरा गाँधी ने जवाहर लाल मेमोरियल फण्ड बना कर यह इमारत 20 वर्ष के लियेँ उसे पट्टे पर दे दिया । और उस इमारत मेँ बाल भवन चलता रहा ।किन्तु अब बाल भवन को स्वाराज भवन के ठीक बगल मेँ स्थित एक अन्य मकान स्थापित कर दिया गया ।और स्वाराज भवन को एक सग्रहालय के रुप मेँ विकसित कर दिया गया । स्वाराज भवन एक बडा भवन हैँ । और भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दिनोँ का एक जीता जागता धरोहर हैँ । यही वह स्थान हैँ जहा पं जवाहरलाल नेहरु ने अपना बचपन बिताया । यहीँ से वो राजनिति कि प्रारम्भिक शिक्षा लेने के बाद मेँ भारतीय स्वाधिनता संग्राम मेँ शामिल हुये ।जवाहरलाल नेहरु ने 1916 मेँ अपने वैवाहिक जीवन का शुभ आरम्भ इसी भवन से किया ।इसके अतिरिक्त यह राजनिति गतविधियोँ का एक मंच भी रहा । 1917 मेँ उत्तर प्रदेश होम रुम लीन के अध्यक्ष मोतीलाल नेहरु एवं महामंत्री जवाहरलाल नेहरु थे । 19 नवम्बर 1919 को इंदिरा गाँधी का जन्म भी इसी भवन मेँ हुआ । 1920 मेँ आल इंडिया खिलाफत इसी भवन मेँ बनायी गयी । भारत का संविधान लिखने के लिये चुनी गयी आल पार्टी का सम्मेलन भी इसी स्वाराज भवन मेँ हुआ था ।

आनन्द भवन, इलाहाबाद

मोतीलाल नेहरु ने इसकी नींव 1926 रखी। वास्तुकला की द्ष्टि से यह भवन अपने आप मे अनोखा है। यह दो मंजिली इमारत है आनन्द भवन भारतीय स्वाधीनता संघर्ष की एक ऐतिहासिक यादगार हैं और ब्रिटिश शासन के विरोध में किये गये अनेक विरोधों, कांग्रेस के अधिवेशनों एवं राष्टीय नेताओँ के अनेक सम्मेलनों से इसका सम्बन्ध रहा है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय[संपादित करें]

'यह मूल रूप से भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम 1861 के सद्र दीवानी अदालत जगह से आगरा में 17 मार्च 1866 को उत्तरी - पश्चिमी प्रांतों के लिए न्यायाधिकरण के उच्च न्यायालय के रूप में स्थापित किया गया था. सर वाल्टर मॉर्गन, बैरिस्टर पर कानून उत्तर - पश्चिमी प्रदेशों के उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया. स्थान 1869 में इलाहाबाद में स्थानांतरित किया गया और नाम तदनुसार 11 से मार्च 1919 महकमा के उच्च न्यायालय इलाहाबाद में बदल गया था. 2 नवम्बर 1925 को, अवध न्यायिक आयुक्त के न्यायालय लखनऊ में अवध चीफ कोर्ट ने अवध सिविल न्यायालय अधिनियम 1925 की गवर्नर जनरल की मंजूरी के साथ संयुक्त प्रांत विधानमंडल द्वारा अधिनियमित द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था. 25 फरवरी, 1948 को, उत्तर प्रदेश विधान सभा में राज्यपाल का अनुरोध गवर्नर जनरल के लिए विधानसभा के प्रभाव है कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद में महकमा और अवध बुज्मुख्य न्यायालय के समामेलित हो अनुरोध सबमिट संकल्प पारित कर दिया. नतीजतन, अवध के मुख्य न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के साथ समामेलित किया गया था. जब उत्तरांचल के राज्य उत्तर प्रदेश के बाहर 2000 में बना था, इस उच्च न्यायालय उत्तरांचल में पड़ने वाले जिलों पर अधिकार क्षेत्र रह गए हैं. इलाहाबाद उच्च न्यायालय लोहा मुंडी, आगरा, भारत के खान साहब निजामुद्दीन द्वारा बनाया गया था. उन्होंने यह भी उच्च न्यायालय के लिए पानी के फव्वारे का दान दिया. अम्बुज उपाध्याय के वी चेनल्

पातालपुरी मन्दिर

किले के अन्दर यह मंदिर भूगर्भ में स्थित हैं । और अछयवट इस मन्दिर के अन्दर ही हैं । यह मंदिर अत्यन्त ही प्राचिन हैं । ऐसा विश्वास किया जाता हैँ । कि भगवान राम ने इस मन्दिर कि यात्रा की थी ।

रानी महल

अकबर की राजपूत पत्नी जोधाबाई का महर जो रानी महल के नाम से जाना जाता हैं । यह महल किले मे स्थित हैं ।

आल सेण्ट्स कैथैड्रिल

शहर के सिविल लाइन मे स्थित यह चर्च पत्थर गिरजाघर के नाम से प्रसिद्द है। इस चर्च को देखने से प्रतित होता हैं । कि मानोँ हम किसी रोमन साम्राज्य का राजगृह देख रहे हैं । 1879 मेँ बन कर तैयार हुये इस चर्च का नक्शा सुप्रसिद्ध अंग्रेज वास्तुविद विलियन इमरसन ने बनवाया था । यह चर्च चौराहे के बीचो-बीच स्थित हैं ।

इलाहाबाद में स्थित एक ऐतिहासिक भवन एवं संग्रहालय

दर्शनीय धार्मिक स्थल[संपादित करें]

संगम

इलाहाबाद गंगा यमुना और सरस्वती के संगम पर स्थित हैं ।चूकि यहाँ तीन नदियाँ आकर मिलती हैं ।अत: इस स्थान को त्रिवेणी के नाम से भी संबोधित किया जाता हैं । संगम का द्रश्य अत्यन्त मनोरम हैं । स्वेत गंगा और हरित यमुना अपने मिलने के स्थान पर स्पष्ट भेद बनाए रखती हैं अर्थात मात्र द्रिष्टिपात करने से ही यह बताया जा सकता हैं । कि यह गंगा नदी हैं और यह यमुना । हिमालय की गोद से निकल कर प्रयाग तक आते आते गंगा गुम्फिद नदी मे बदल जाती हैं परन्तु यमुना के मिलने के उपरान्त इनमे पुन: अथाह जल हो जाता हैं ।

हनुमान मंदिर

संगम के निकट स्थित यह एक अद्भुत एवं अपने प्रकार का अनोखा मन्दिर हैं इस मन्दिर मे हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा हैं। और उनके दर्शनार्थ लोगोँ को सीढियोँ से उतर कर नीचे जाना पडता हैं । यह प्रतिमा अत्यन्त विशाल एवं भव्य हैं । ऐसा विश्वास किया जाता हैं कि अंग्रजी शासन ने इस मंदिर को यहाँ से हटवाने के आदेश दिये किन्तु जैसे जैसे मूर्ति को हटाने के लिये खुदाई की जाने लगी वैसे वैसे मुर्ति बाहर आने के बजाय अन्दर धसती गयी । यही कारण हैं कि यह मंदिर गड्ढे में हैं ।

शंकर विमान मण्डपम्

गंगा के तट पर स्थित यह एक आधुनिक मन्दिर हैं । यह मन्दिर चार मंजिलोँ का हैं ।इस मन्दिर की कुल ऊँचाई लगभग 40 मीटर अर्थात 130 फिट हैं । इसकी प्रत्येक मंजिल पर अलग अलग देवताओँ का वास स्थान हैं ।

हनुमत् निकेतन

यह मन्दिर सिविल लाइन में स्थित हैं यह एक आधुनिक मन्दिर हैं । जो मुख्य रुप से हनुमान जी को समर्पित हैं ।

सरस्वती कूप

किले के भीतर स्थित इस पवित्र कू के विषय में विश्वास किया जाता हैं । कि यही अद्रश्य सरस्वती नदी का स्त्रोत हैं ।

समुद्र कूप

गंगा पार स्थित झूँसी मे समुद्र कूप स्थित है । यह कूप उल्टा किला के अन्दर स्थित है । यह बहूत उचे टिले पर है । माना जाता है । कि इस कूप मे समुद्र का स्रोत है । इस कूप का पानी खारा हैं ।

मनकामेश्वर मन्दिर

यमुना के तट पर स्थित इस मन्दिर का धार्मिक महत्व अत्यधिक हैं । इस मन्दिर से चबूतरे से यमुना का नजारा अत्यन्त ही मनोहर हैं ।इस मन्दिर की विशेषता यहाँ प्रतिदिन लोने वाला श्र्रगांर एवं भगवान शिव की दिव्य आरती हैं ।

शिवकुटी

गंगा नदी के किनार स्थित शिवकुटी भगवान शिव को समर्पित है।

भारद्वाज आश्रम, इलाहाबाद

आनन्द भवन के सामने स्थित एक मन्दिर हैं । यही भगवान राम के वन गमन काल में महर्षि भारद्वाज का आश्रम हुआ करता था । यह आश्रम संत भारद्वाज से संबंधित है। और जब इसी संगम से आगे बडकर गंगा शिवजी की नगरी काशी मे पहुँचती हैं तो यह जल से लभालब भरी रहती हैं ।यमुना यमुनोत्री की निर्मल धारा लेकर मथुरा मेँ क्रिष्ण की लीलाओँ को रुप देकर और आगरे मे ताजमहल को नहला कर प्रयाग मेँ गंगा मे विलिन हो जाती हैं ।प्रत्येक वर्ष के जनवरी फरवरी मेँ इसकी महत्ता कई गुना बड जाती हैं । इस मेले मे करोडोँ लोग संगम के पावन जल मेँ डुबकी लगा कर पुण्य के भागीदार बनते हैं । कल्पवासी संगम के तट पर टेन्ट के बने घरोँ मेँ निवास करते हैं । भारद्वाज आश्रम कोलोनगंज इलाके में स्थित है ।यहाँ ऋषि भारद्वाज ने भार्द्वाजेश्वर महादेव का शिवलिंग स्थापित किया था, और इसके अलावा यहाँ सैकड़ों मूर्तियांहैं उनमें से महत्वपूर्ण हैं: राम लक्ष्मण, महिषासुर मर्दिनी , सूर्य, शेषनाग, नर वराह । महर्षि भारद्वाज आयुर्वेद के पहले संरक्षक थे । भगवान राम ऋषि भारद्वाज के आश्रम में उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आये थे । आश्रम कहाँ था यह अनुसंधान का एक मामला है, लेकिन वर्तमान में यह आनंद भवन के पास है । यहाँ भी भारद्वाज, याज्ञवल्क्य और अन्य संतों, देवी - देवताओं की प्रतिमा और शिव मंदिर है । भारद्वाज वाल्मीकि के एक शिष्य थे । यहाँ पहले एक विशाल मंदिर भी था और पहाड़ के ऊपर एक भरतकुंड था । नाग वासुकी मंदिर यह मंदिर संगम के उत्तर में गंगा तट पर दारागंज के उत्तरी कोने में स्थित है । यहाँ नाग राज, गणेश, पार्वती और भीष्म पितामाह की एक मूर्ति हैं ।परिसर में एक शिव मंदिर है।नाग- पंचमी के दिन एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है। मनकामेश्वर मंदिर यह मिंटो पार्क के पास यमुना नदी के किनारे किले के पश्चिम में स्थित है । यहाँ एक काले पत्थर की शिवलिंग और गणेश और नंदी की प्रतिमाएं हैं । हनुमान की भव्य प्रतिमा और मंदिर के पास एक प्राचीन पीपल का पेड़ है । यह प्राचीन शिव मंदिर इलाहाबाद के बर्रा तहसील से 40 किमी दक्षिण पश्चिम में स्थित है । शिवलिंग सुरम्य वातावरण के बीच एक ८० फुट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थापित है । कहा जाता है कि शिवलिंग ३.५ फुट भूमिगत है और यह भगवान राम द्वारा स्थापित किया गया था । यहाँ कई विशाल बरगद के पेड़ और मूर्तियाँ हैं

अन्य दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

जवाहर प्लेनेटेरियम, इलाहाबाद

आनंद भवन के बगल में स्थित इस प्लेनेटेरियम में खगोलीय और वैज्ञानिक जानकारी हासिल करने के लिए जाया जा सकता है। और यह प्लेनेटेरियम 3 डी है ।

इलाहाबान संग्रहालय

कम्पनी बाग के अन्दर सन् 1931 में एक सग्रहालय का निर्माण करवाया गया था । इस सग्रहालय मे भारत के प्राचीन इतिहास से सम्बन्धित अनेक वस्तुएँ रखीँ हुयीं हैं । इन वस्तुओँ मेँ कौशाम्बी के अनेक अवशेष संग्रहीत है । कौशाम्बी मेँ प्राप्त बुद्ध की मुर्तियाँ भी इसमेँ संरक्षित हैँ । इस संग्रहालय मेँ प्राचीन सिक्के का एक अनमोल खजाना हैं । पंचमार्क सिक्के ताबे के सिक्के कुषाणोँ तथा गुप्त शासकोँ द्रारा प्राप्त सिक्कोँ के अतिरिक्त यहा कुछ मुगलकालीन सिक्के भी हैँ । यहाँ मुगलकाल अनेक पेँटिँग देखने को हैँ ।इसके अतिरिक्त यहा पर एक रुसी चित्रकार द्रारा निर्मित अत्यन्त सुन्दर पेँटिँग भी रखी हुयी हैँ । इलाहाबाद से सम्बन्धित कुछ लेखकोँ यथा महादेवी वर्मा रामकुमार वर्मा आदि के कुछ हस्तलिखित अभिलेख भी इस संग्रहालय मेँ हैँ । इस सबसे बडकर यहाँ पर महान स्वाधिनता संग्राम सेनानी चन्द्रशेखर आजाद की वह पिस्तौल भी रखी हैँ । जिससे उन्होने अंग्रज सिपाहियोँ का मुकाबला किया था ।

पब्लिक लाइब्रेरी, इलाहाबाद

कम्पनी बाग के अन्दर एक पब्लिक लाइब्रेरी स्थिय है। इसकी इमारत अंग्रजी शासन के समय की है। एवं बडी शानदार है।यह लाइब्रेरी उत्तर प्रदेश की सबसे बडी और सबसे प्राचीन लाइब्रेरी हैं । इसकी इमारत बडी शानदार हैँ । प्रवेश द्रार के ठीक सामने के कोरीडोरा मेँ बढे खम्भोँ पर बहुत ही सुन्दर रोमन नक्कासी हैँ ।

घण्टाघर यह घंटाघर चौक मेँ स्थित हैँ ।

मायो मेमोरियल हाल


लाल चर्च


जोसेफ चर्च


त्रिवेणी पुष्प

अरैल यमुना के तट स्थित यह एक भव्य स्थल हैं। यह सबसे सुन्दर स्थान हैं। यहाँ पर कई एतिहासिक चीजे आपको देखने को मिलेगा । जैसे रामजन्मभूमि, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गौतम बुद्ध, बहुत सी मन्दिर हैँ । यहा पर एक बहुत बडा गुम्बज ( मिनार ) देखने को मिलेगा ।

अरैल

10 किमी यमुना पार अरैल एक प्रमुख धार्मिक केन्द्र हैँ । जिसका प्राचिन नाम अलर्कपुरी था ।

देखने योग्य स्थल बहुत है । जैसे-

  • त्रिवेणी पुष्प
  • पुष्प विहार
  • सोमेश्वर नाथ मन्दिर
  • श्री बाला त्रिपुर सुन्दरी मन्दिर
  • चक्रमाधव मन्दिर
  • आदिवेणी माधव मन्दिर
  • नृसिंह मन्दिर
  • महर्षि महेश योगी आश्रम मन्दिर
  • वल्लभाचार्य जी की बैठक
  • फलाहारी बाबा आश्रम मन्दिर
  • सच्चा बाबा आश्रम

आदि देखने योग्य स्थान है । यहाँ सडक मार्ग या नाव द्रारा जाया जा सकता है ।

घाट[संपादित करें]

इलाहाबाद में पक्के घाट हैं। जो क्रमश: हैं ।

यमुना के तट स्थित यह एक नवनिर्मित रमणीय स्थल हैं। तीन ओर से सीढियाँ यमुना के हरे जल तक उतर कर जाती हैं । और उपर एक पार्क हैं जो सदैव हरी घास से ढका रहता हैं । यहा पर बोँटिग करने की भी सुविधा हैं ।यहाँ से नाव द्रारा संगम पहुचने का भी मार्ग हैं ।

  • अरैल घाट

यह इलाहाबाद का सबसे बडा घाट है और यह सबसे आधुनिक घाट हैं ।यह एक भव्य स्थान हैं और टहलने का सबसे अच्छा स्थान हैं । यह एक दशर्नीय स्थल हैं । यहा पर बोँटिग करने की भी सुविधा हैं यहा पर स्नानार्थियों के लिये सिटिंग प्लाजा भी हैं ।

  • संगम घाट
  • बलुआ घाट
  • बरगद घाट
  • बोट क्लब घाट
  • रसूलाबाद घाट
  • छतनाग घाट
  • शंकर घाट
  • दशाश्वमेघ घाट
  • गऊ घाट
  • किला घाट
  • नेहरु घाट

इनके अतिरिक्त सौ से अधिक कच्चे घाट हैं।

कुंभ मेला[संपादित करें]

इलाहाबाद में लगने वाला कुंभ मेला शहर के आकर्षण का सबसे बड़ा केन्द्र है। अनगिनत श्रद्धालु इस मेले में आते हैं। यहा मेला एक वर्ष माघ मेला तीन वर्ष छः वर्ष अर्द्धकुम्भ और बारह वर्ष महाकुंभ लगता है। भारत में यह धार्मिक मेला चार जगहों पर लगता है। यह जगह नाशिक, इलाहाबाद, उज्जैन और हरिद्वार में हैं। इलाहाबाद में लगने वाला कुंभ का मेला सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इस मेले में हर बार विशाल संख्या में भक्त आते हैं। यहाँ पर जनवरी फरवरी मेँ विश्व का सबसे बडा शहर कहा जाता हैँ । यहा कि जनसख्या करीब दस करोड मेँ होती हैँ ।

इस मेले में आए लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करते हैं। अर्थात गंगा यमुना सरस्वती नदी हैँ । यह माना जाता है कि इस पवित्र नदी में स्नान करने से आत्मा की शुद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा प्रत्येक वर्ष आने वाले शिवरात्रि के त्योहार को भी यहां बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हजारों की संख्या में आए तीर्थयात्री इस पर्व को भी पूरे उमंग और उत्साह के साथ मनाते हैं। इस त्योहार में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए राज्य सरकार कुछ विशेष प्रकार का प्रबंध करती है। यहां दर्शन करने आए तीर्थयात्रियों के रहने के लिए बहुत से होटल गेस्ट हाउस और धर्मशाला की सुविधा मुहैया कराई जाती है। यहां स्थित घाट बहुत ही साफ और सुंदर है। त्योहारों के समय यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।

पार्क[संपादित करें]

अंग्रेजों द्वारा शहर के बीचोँ बीच बसाया गया यह एक अनोखा बाग हैं । शायद हा किसी शहर के बीचों बीच इतना बडा पार्क मिले । इसकी विशालता का अनुमान लगाया जा सकता हैं कि इस बाग के अन्दर एक स्टेडियम, एक म्यूजियम,एक पुस्तकालय ,तीन नसरियाँ, एक विश्वविघालय और प्रयाग संगीत समिति भी स्थित हैं

कम्पनी बाग के बीचो बीच सफेद संगमरमर का बना एक स्मारक हैं । इस मेमोरियल के आस पास के नितान्त सुन्दर पार्क है जो सदैव हरी घास से ढका रहता है।

सफेद पत्थर के इस मैमोरियल पार्क में सरस्वती घाट के निकट सबसे ऊंचे शिखर पर चार सिंहों के निशान हैं।

यह एक आधुनिक पार्क हैं। यह पार्क मैक्फरसन झील के आस पास के स्थान का सौँदर्यीकरण करके बनाया गया हैं। यहा पर बोँटिक करने की सुविधा हैं।

यह पार्क भी एक भ्रमण करने योग्य स्थान हैं। इसे बडे ही सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया गया हैं ।

चन्द्रशेखर पार्क के पास स्थित हैं। इसमे पत्थर का एक बडा हाथी बच्चोँ के मुख्य आकर्षण का केन्द्र हैं। यह स्थान बच्चोँ के घुमने के लिये हैं ।


इलाहाबाद शहर के पश्चिम छोर इलाहाबाद रेलवे स्टेसन के पास स्थित खुसरो बाग मुगलकालीन इतिहास की एक अमिट धरोहर हैँ । यह 17 बीधे के विशाल क्षेत्र मेँ फैला हुआ हैँ । यह चारोँ मोटे मोटे दिवारो से घीरा हैँ । इसके चारोँ ओर एक एक दरवाजे हैँ । जहागीर ने इसे अपना आरामगाह बनाया था । जहागीर के पुत्र खुसरो के नाम पर ही इसका नाम खुसरो बाग पडा । इस बाग मेँ तीन मकबरे हैँ । पहला मकबरा शहजादा खुसरो का हैँ । इसका मकबरा खुसरो की राजपूत माक शाँह बेगम के लिये बनाया गया था । खुसरो बाग के अन्दर जाने का मुख्य द्रार अति विशाल हैँ । इसमेँ अनेकोँ घोडोँ की नाली लागी हुयी हैँ । ऐसी मान्यता हैँ कि अपने मालिक की और अपने मालिक कि जान बचायी थी तभी से लोग बाग के अन्दर बने मकबरे मेँ मन्नत मानते हैँ । और कार्य के पूरा होने पर इसी दरवाजे मेँ धोडे के नाल लगवा देते हैँ । खुसरो बाग मेँ अमरुद के कई बगीचे हैँ । यहाँ के अमरुदोँ को विदेश मेँ निर्यात किया जाता हैँ । साथ ही वर्तमान मेँ यहाँ पौधशाला हैँ । जिससेँ हजारोँ पौधोँ की बिक्री की जाती हैँ ।






शिक्षा[संपादित करें]

इलाहाबाद प्राचीन काल से ही शैक्षणिक नगर के रुप मे प्रसिद्ध है। इलाहाबाद केवल गंगा और यमुना जैसी दो पवित्र नदियो का ही संगम नही, अपितु आध्यात्म के साथ शिक्षा का भी संगम है, जैहा भारत के सभी राज्यो से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते है। इलाहाबाद विश्व्विद्यालय इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जँहा से अनेकानेक विद्वान ने शिक्षा ग्रहण कर देश व समाज के अनेक भागो मे अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया । इलाहाबाद विश्वविद्यालय को पूर्व का आक्सफोर्ड ("Oxford of the East") भी कहा जाता है । इलाहाबाद मे कई विश्व्विद्यालय, शिक्षा परिषद, ईन्जीनिरिंग कालेज, मेडिकल कालेज तथा मुक्त विश्व्विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र मे उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे है। इलाहाबाद मे स्थापित विश्व्विद्यालय के नाम इस प्रकार निम्नलिखित है-


1)-इलाहाबाद विश्व्विद्यालय


2)-उत्तर प्रदेश राजषिँ टण्डन मुक्त विश्व्विद्यालय


3)-इलाहाबाद एग्रीकल्चर संस्थान (मानित विश्व्विद्यालय)-(AAI-DU)


4)- नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय,


जमुनीपुर कोटवा इलाहाबाद मे स्थापित ईन्जीनिरिंग कालेज के नाम इस प्रकार निम्नलिखित है-


१)-मोतीलाल नेहरु नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी (MNNIT)


२)-इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इन्फारमेशन टेक्नालाजी,इलाहाबाद (IIIT-A)


३)-हरीश चन्द्र एटामिक एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (HRI)


४)-बिरला इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी (BIT- Mesra)-(विस्तार पटल)


५)-उपर्यक्त के अतिरिक्त अन्य ईन्जीनिरिंग कालेज

BBS,

UCER,

SPMIT,

SNIT


IERT

आदि है।

इलाहाबाद मे स्थापित मेडिकल कालेज का नाम इस प्रकार निम्नलिखित है-


१)-मोतीलाल नेहरु मेडिकल कालेज इसके अतिरिक्त इलाहाबाद मे हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग संगीत समिति आदि अनेक विख्यात कला संस्थान है। इलाहाबाद विस्तार में

उद्योग[संपादित करें]

इलाहाबाद में शीशा और तार कारखाने काफी हैं। यहां केमुख्य औद्योगिक क्षेत्र हैं नैनी और फूलपुर, जहां कई सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों की इकाइयां, कार्यालय और निर्माणियां स्थापित हैं। इनमें अरेवा टी एण्ड डी इण्डिया (बहुराष्ट्रीय अरेवा समूह का एक प्रभाग), भारत पंप्स एण्ड कंप्रेसर्स लि. यानी बीपीसीएल) जिसे जल्दी ही मिनिरत्न घोषित किया जाने वाला है, इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज (आई.टी.आई), रिलायंस इंडस्ट्रीज़-इलाहाबाद निर्माण प्रखंड, हिन्दुस्तान केबल्स, त्रिवेणी स्ट्रक्चरल्स लि. (टी.एस.एल. भारत यंत्र निगम की एक गौण इकाई), शीशा कारखाना, इत्यादि। बैद्यनाथ की नैनी में एक निर्माणी स्थापित है, जिनमें कई कुटीर उद्योग जैसे रसायन, पॉलीयेस्टर, ऊनी वस्त्र, नल, पाईप्स, टॉर्च, कागज, घी, माचिस, साबुन, चीनी, साइकिल एवं पर्फ़्यूम आदि निर्माण होते हैं। इंडीयन फार्मर्स फर्टिलाइजर्स को-ऑपरेटिव इफको फूलपुर क्षेत्र में स्थापित है। यहाम इफको की दो इकाइयां हैं, जिनमें विश्व का सबसे बड़ा नैफ्था आधारित खाद निर्माण परिसर स्थापित है। इलाहाबाद में पॉल्ट्री और कांच उद्योग भी बढ़ता हुआ है। राहत इंडस्ट्रीज़ का नूरानी तेल, काफी अच्छा और पुराना दर्दनिवारक तैल है, जिसकी निर्माणी नैनी में स्थापित है। तीन विद्युत परियोजनाएं मेजा, बारा और कर्चना तहसीलों में जेपी समूह एवं नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन द्वारा तैयार की जा रही हैं।

क्रीडा[संपादित करें]

इलाहाबाद का भारतीय जिम्नास्टिक्स में प्रमुख स्थान है। यहां की टीम सार्क और एशियाई देशों में अग्रणी रही है। झालवा में खेलगांव पब्लिक स्कूल जिम्नास्टिक्स का प्रशिक्षण उपलब्ध कराटा है। यहां के जिम्नास्ट्स को ३३वें ट्यूलिट पीटर स्मारक कप-२००७, हंगरी में २ स्वर्ण पदक मिले हैं। हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का जन्म भी इलाहाबाद में ही २९ अगस्त, १९०६ को हुआ था। उन्होंने तीन लगातार ऑलंपिक खेलों में एम्स्टर्डैम (१९२८), लॉस एंजिलिस (१९३२) और बर्लिन (१९३६) में तीन स्वर्ण पदक प्राप्त किये थे। मोहम्मद कैफ, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी यहीं के हैं। अभिन्न श्याम गुप्ता भी एक उभरते हुए बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिन्होंने २००२ में राष्ट्रीय पदक प्राप्त किया था।

परिवहन[संपादित करें]

रज्जु-आधारित चार-लेन का सेतु इलाहाबाद में यमुना नदी पर भारत के सबसे बड़े निर्माणों में से एक हैं।
वायुमार्ग

वायु सेवा का विकास इलाहाबाद मे पर्याप्त रुप से नहीँ होँ पाया हैं। फिर भी यहाँ के बम्हरौली हवाई अड्डे से दिल्ली एवं कलकत्ता के लिये उडाने हैं । निकटवर्ती ब्ड़े विमानक्षेत्रों में वाराणसी विमानक्षेत्र 142 कि.मी. (88 मील)) एवं लखनऊ (अमौसी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र 210 कि.मी. (130 मील) हैं।

जलमार्ग

इलाहाबाद में जलमार्ग का विकास अभी अपनी प्रारम्भिक अवस्था में हैं 22 अक्टूबर 1986 ई, राष्ट्रिय जलमार्ग एक , जो कि इलाहाबाद से हल्दिया ( पं बंगाल ) 1620 KM तक हैं।

सड़क

इलाहाबाद दिल्ली-कोलकाता मार्ग के बीच स्थित है। स्वर्ण चतुर्भुज के मार्गों में से एक, राष्ट्रीय राजमार्ग २ दिल्ली और कोलकाता के लिये उपयुक्त है।

राष्ट्रीय राजमार्ग ९६ राष्ट्रीय राजमार्ग २८ से फैजाबाद से जोड़ता है।

राष्ट्रीय राजमार्ग 24B लखनऊ से जोडता हैं

राष्ट्रीय राजमार्ग 76 झाँसी से जोडता हैं ।

राष्ट्रीय राजमार्ग 76E यह मार्ग मिर्जापुर जिला से जोडता हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग २७ 93 कि.मी. (58 मील) लंबा है और इसे मध्य प्रदेश में मंगवान में राष्ट्रीय राजमार्ग ७ से जोड़ता है।

विश्व बैंक द्वारा वित्त-पोषित ८४.७ कि.मी. लंबा बायपास मार्ग इलाहाबाद एक्सप्रेसवे हाइवे है। [10] इसके द्वारा न केवल राजमार्गों का यातायात ही सुलभ होगा, बल्कि शहर के हृदय से गुजरने वाला यातायात भी हल्का होगा। अन्य कई राज्य-राजमार्ग शहर को देश के अन्य भागों से जोड़ते हैं।

इलाहाबाद से कुछ महत्वपूर्ण स्थलो की दूरी इस प्रकार हैं -

अयोध्या -- 167 किमी,

चित्रकूट -- 167 किमी,

आगरा -- 433 किमी,

अहमदाबाद -- 1207 किमी,

दिल्ली -- 643 किमी,

भोपाल -- 680 किमी,

मुम्बई -- 1444 किमी,

कोलकाता -- 799 किमी,

हैदराबाद -- 1080 किमी,

जयपुर -- 673 किमी,

झांसी -- 375 किमी,

लखनऊ -- 204 किमी,

वाराणसी -- 120 किमी,

कानपुर -- 202 किमी,

बस अड्डे[संपादित करें]

इलाहाबाद में राज्य परिवन निगम के तीन डिपो (बस-अड्डे) हैं

1. लीडर रोड (बस अड्डा)-

यहाँ से कानपुर, आगरा व दिल्ली हेतु बसे उपलब्ध हैं।

2. सिविल लाईन्स (बस अड्डा)-

यहाँ से लखनऊ फैजाबाद गोरखपुर आदि के लिये बसे उपलब्ध हैं।

3. जीरो रोड (बस अड्डा)-

यहाँ से रिवा सतना खजुराहो आदि के लिये बसे उपलब्ध हैं। और झूसी डिपोँ ,नैनी डिपोँ फाफामऊ डिपोँ बस स्टैँड सिविल लाइंस और जीरो रोड पर जो विभिन्न मार्गों पर बस-सेवा सुलभ कराते हैं। दोनों नदियों पर बड़ी संख्या में बने सेतु शहर को अपने उपनगरों जैसे नैनी, झूसी फाफामउ आदि से जोड़ते हैं। नया आठ-लेन नियंत्रित एक्स्प्रेसवे- गंगा एक्स्प्रेसवे इलाहाबाद से गुजरना प्रस्तावित है।[11] इलाहाबाद जिले में एक नयी ८-लेन मुद्रिका मार्ग सड़क भी प्रतावित है। स्थानीय यातायात हेतु नगर बस सेवा, ऑटोरिक्शा, रिक्शॉ एवं टेम्पो उपलब्ध हैं। इनमें से सबसे सुविधाजनक साधन साइकिल रिक्शा है।

रेलसेवा

भारतीय रेल द्वारा जुड़ा हुआ, इलाहाबाद जंक्शन उत्तर मध्य रेलवे का मुख्यालय है। ये अन्य प्रधान शहरों जैसे कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, लखनऊ, छपरा, पटना, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, बंगलुरु एवं जयपुर से भली भांति जुड़ा हुआ है।

शहर में 11 रेलवे-स्टेशन हैं:











इलाहाबाद के उल्लेखनीय व्यक्ति[संपादित करें]

भारत के १४ प्रधानमंत्रियों में से ७ का इलाहाबाद से घनिष्ट संबंध रहा है:

मोती लाल नेहरु,

जवाहर लाल नेहरु,

लालबहादुर शास्त्री,

इंदिरा गांधी,

राजीव गांधी,

गुलजारी लाल नंदा एवं

विश्वनाथ प्रताप सिंह;

ये या तो यहां जन्में हैं, या इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़े हैं या इलाहाबाद निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए हैं।[12]

चित्रदीर्घा[संपादित करें]

Allahabad Junction

संदर्भ[संपादित करें]

13. " माँ गंगा " - Allahabad (संगम नगरी - प्रयाग )

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

महत्वपुर्ण स्थल[संपादित करें]