ब्रह्मा

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ब्रह्मा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। ये हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं ब्रह्मा, विष्णु,महेश में एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। आदिकाल में सृष्टि रचना के पूर्व संसार अंधकारमय था। सनातन परमब्रह्म्र परमात्मा ने सगुण रूप से सृष्टि की रचना की एवं समस्त ब्रम्हाण्ड का निर्माण हुआ । स्थूल सृष्टि कर रचना पंच महाभूतों यथा आकाश, वायु, अग्नि, जल, एवं पृथ्वी से हुई । विराट पुरूष नारायण भगवान के संकल्प से ब्रम्हा जी की उत्पत्ति हुई । पुराणों के अनुसार क्षीर सागर में भगवान विष्णु के नाभि कमल से ब्रम्हा जी प्रकट हुए।

उन्हें जीव जगत की रचना करने का आदेश हुआ । घोर तपस्या के पश्चात उन्होनें ब्रम्हाण्ड की रचना की । पुराणों के अनुसार ब्रम्हाके मानस पुत्रों में मन से मारीचि, नेत्र से अत्री, मुख से अंगीरस, कान से पुलत्स्य, नाभि से पुलह, हाथ से कृतु, त्वचा से भृगु, प्राण से वशिष्ट , अन्गुष्ट से दक्ष , छाया से कन्दर्भ, गोंद से नारद, इच्छा से सनक, सनन्दन, सनातन, सनतकुमार, शरीर से स्वंभू मनु, ध्यान से चित्रगुप्त इत्यादि का जन्म हुआ था | पुराणों में ब्रम्हा पुत्रों कों “ ब्रम्ह आत्मा वै जायते पुत्र”: ही कहा गया है | ब्रम्हा ने पहले जिन चार पुत्रों सनक, सनंदन, सनातन, सनत कुमार का सृजन किया उनकी सृष्टि रचना में कोई रूचि न होने से वें सब ब्रम्ह तत्व जानने में मगन रहते थे | अत: इन वीतराग पुत्रों के निरपेक्ष ब्यवहार से ब्रम्हा जी कों महान क्रोध हुआ जिससे प्रचंड ज्योति का जन्म हुआ | उस क्रोध से ब्रम्हा जी के मस्तक से अर्धनारीश्वर रूद्र उत्पन्न हुआ | जिस रूप कों ब्रम्हा जी द्वारा स्त्री और पुरुष दो भागों में बिभक्त किया गया जिसमे पुरुष का नाम “का” और स्त्री का नाम “या” रखा गया | इसी रूद्र रूप से प्रजापत्य काल में ब्रम्हा जी द्वारा स्वयम्भू मनु और शतरूपा कों प्रगट किया गया | जिनसे प्रियव्रत, उत्तानपाद, प्रसूति और आकूति का जन्म हुआ | जिसमे आकुती का विवाह रूचि से और प्रसूति का विवाह दक्ष से किया गया | दक्ष ने प्रसूति से २४ कन्याओं कों जन्म दिया जिनके नाम क्रमश: श्रद्धा, लक्ष्मी, पुष्टि, धूति, तुष्टि, मेघा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा, वपु, शांति, रिद्धि और कीर्ति हैं जिनमे इन तेरह का विवाह धर्म से किया गया | बाकी कन्याओं में भृगु का ख्याति से और शिव का सती से विवाह हुआ, मरीची का सम्भूति से, अंगिरा का स्मृति से, पुलस्त्य का प्रीति से, पुलह का क्षमा से, कृति का सन्नति से, अत्री का अनुसुइया से, बशिष्ट का उर्जा से, वह्वा का स्वाहा से, तथा पितरों का स्वधा से विवाह किया गया जिनसे सारी सृष्टि विकसित हई है |