देवनागरी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
देवनागरी में लिखी ऋग्वेद की पाण्डुलिपि

देवनागरी एक लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कई विदेशी भाषाएं लिखीं जाती हैं। देवनागरी बायें से दायें लिखी जाती है, इसकी पहचान एक क्षैतिज रेखा से है जिसे 'शिरिरेखा' कहते हैं। संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी, डोगरी, नेपाली, नेपाल भाषा (तथा अन्य नेपाली उपभाषाएँ), तामाङ भाषा, गढ़वाली, बोडो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, मैथिली, संथाली आदि भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थितियों में गुजराती, पंजाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमानी और उर्दू भाषाएं भी देवनागरी में लिखी जाती हैं।

MarathiShilalekhYear1109Found AtParalMaharashtraIndia.jpg
मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया की एक ट्राम पर देवनागरी लिपि

अनुक्रम

परिचय[संपादित करें]

अधिकतर भाषाओं की तरह देवनागरी भी बायें से दायें लिखी जाती है। प्रत्येक शब्द के ऊपर एक रेखा खिंची होती है (कुछ वर्णों के ऊपर रेखा नहीं होती है) इसे शिरोरे़खा कहते हैं। इसका विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। यह एक ध्वन्यात्मक लिपि है जो प्रचलित लिपियों (रोमन, अरबी, चीनी आदि) में सबसे अधिक वैज्ञानिक है। इससे वैज्ञानिक और व्यापक लिपि शायद केवल आइपीए लिपि है। भारत की कई लिपियाँ देवनागरी से बहुत अधिक मिलती-जुलती हैं, जैसे- बांग्ला, गुजराती, गुरुमुखी आदि। कम्प्यूटर प्रोग्रामों की सहायता से भारतीय लिपियों को परस्पर परिवर्तन बहुत आसान हो गया है।

वाराणसी में देवनागरी लिपि में लिखे विज्ञापन

भारतीय भाषाओं के किसी भी शब्द या ध्वनि को देवनागरी लिपि में ज्यों का त्यों लिखा जा सकता है और फिर लिखे पाठ को लगभग 'हू-ब-हू' उच्चारण किया जा सकता है, जो कि रोमन लिपि और अन्य कई लिपियों में सम्भव नहीं है, जब तक कि उनका विशेष मानकीकरण न किया जाये, जैसे आइट्रांस या आइएएसटी

मुम्बई के सार्वजनिक यातायात के टिकट पर देवनागरी

इसमें कुल ५२ अक्षर हैं, जिसमें १४ स्वर और ३८ व्यंजन हैं। अक्षरों की क्रम व्यवस्था (विन्यास) भी बहुत ही वैज्ञानिक है। स्वर-व्यंजन, कोमल-कठोर, अल्पप्राण-महाप्राण, अनुनासिक्य-अन्तस्थ-उष्म इत्यादि वर्गीकरण भी वैज्ञानिक हैं। एक मत के अनुसार देवनगर (काशी) मे प्रचलन के कारण इसका नाम देवनागरी पड़ा।

भारत तथा एशिया की अनेक लिपियों के संकेत देवनागरी से अलग हैं पर उच्चारण व वर्ण-क्रम आदि देवनागरी के ही समान हैं, क्योंकि वे सभी ब्राह्मी लिपि से उत्पन्न हुई हैं (उर्दू को छोडकर)। इसलिए इन लिपियों को परस्पर आसानी से लिप्यन्तरित किया जा सकता है। देवनागरी लेखन की दृष्टि से सरल, सौन्दर्य की दृष्टि से सुन्दर और वाचन की दृष्टि से सुपाठ्य है।

भारतीय अंकों को उनकी वैज्ञानिकता के कारण विश्व ने सहर्ष स्वीकार कर लिया है।

'देवनागरी' शब्द की व्युत्पत्ति[संपादित करें]

देवनागरी या नागरी नाम का प्रयोग "क्यों" प्रारंभ हुआ और इसका व्युत्पत्तिपरक प्रवृत्तिनिमित्त क्या था- यह अब तक पूर्णत: निश्चित नहीं है।

(क) 'नागर' अपभ्रंश या गुजराती "नागर" ब्राह्मणों से उसका संबंध बताया गया है। पर दृढ़ प्रमाण के अभाव में यह मत संदिग्ध है।

(ख) दक्षिण में इसका प्राचीन नाम "नंदिनागरी" था। हो सकता है "नंदिनागर" कोई स्थानसूचक हो और इस लिपि का उससे कुछ संबंध रहा हो।

(ग) यह भी हो सकता है कि "नागर" जन इसमें लिखा करते थे, अत: "नागरी" अभिधान पड़ा और जब संस्कृत के ग्रंथ भी इसमें लिखे जाने लगे तब "देवनागरी" भी कहा गया।

(घ) सांकेतिक चिह्नों या देवताओं की उपासना में प्रयुक्त त्रिकोण, चक्र आदि संकेतचिह्नों को "देवनागर" कहते थे। कालांतर में नाम के प्रथमाक्षरों का उनसे बोध होने लगा और जिस लिपि में उनको स्थान मिला- वह "देवनागरी" या नागरी कही गई। इन सब पक्षों के मूल में कल्पना का प्राधान्य है, निश्चयात्मक प्रमाण अनुपलब्ध हैं।

इतिहास[संपादित करें]

भारत देवनागरी लिपि की क्षमता से शताब्दियों से परिचित रहा है।

डॉ॰ द्वारिका प्रसाद सक्सेना के अनुसार सर्वप्रथम देवनागरी लिपि का प्रयोग गुजरात के नरेश जयभट्ट (700-800 ई.) के शिलालेख में मिलता है। आठवीं शताब्दी में चित्रकूट, नवीं में बड़ौदा के ध्रुवराज भी अपने राज्यादेशों में इस लिपि का उपयोग किया करते थे।

758 ई का राष्ट्रकूट राजा दन्तिदुर्ग का सामगढ़ ताम्रपट मिलता है जिस पर देवनागरी अंकित है। शिलाहारवंश के गंण्डरादित्य के उत्कीर्ण लेख की लिपि देवनागरी है। इसका समय ग्यारहवीं शताब्दी हैं इसी समय के चोलराजा राजेन्द्र के सिक्के मिले हैं जिन पर देवनागरी लिपि अंकित है। राष्ट्रकूट राजा इंद्रराज (दसवीं शती) के लेख में भी देवनागरी का व्यवहार किया है। प्रतीहार राजा महेंद्रपाल (891-907) का दानपत्र भी देवनागरी लिपि में है।

कनिंघम की पुस्तक में सबसे प्राचीन मुसलमानों सिक्के के रूप में महमूद गजनबी द्वारा चलाये गए चांदी के सिक्के का वर्णन है जिस पर देवनागरी लिपि में संस्कृत अंकित है। मुहम्मद विनसाम (1192-1205) के सिक्कों पर लक्ष्मी की मूर्ति के साथ देवनागरी लिपि का व्यवहार हुआ है। शमशुद्दीन इल्तुतमिश (1210-1235) के सिक्कों पर भी देवनागरी अंकित है। सानुद्दीन फिरोजशाह प्रथम, जलालुद्दीन रजिया, बहराम शाह, अलालुद्दीन मरूदशाह, नसीरुद्दीन महमूद, मुईजुद्दीन, गयासुद्दीन बलवन, मुईजुद्दीन कैकूबाद, जलालुद्दीन हीरो सानी, अलाउद्दीन महमद शाह आदि ने अपने सिक्कों पर देवनागरी अक्षर अंकित किये हैं। अकबर के सिक्कों पर देवनागरी में ‘राम‘ सिया का नाम अंकित है। गयासुद्दीन तुगलक, शेरशाह सूरी, इस्लाम शाह, मुहम्मद आदिलशाह, गयासुद्दीन इब्ज, ग्यासुद्दीन सानी आदि ने भी इसी परम्परा का पालन किया।

भाषाविज्ञान की दृष्टि से देवनागरी[संपादित करें]

भाषावैज्ञानिक दृष्टि से देवनागरी लिपि अक्षरात्मक (सिलेबिक) लिपि मानी जाती है। लिपि के विकाससोपानों की दृष्टि से "चित्रात्मक", "भावात्मक" और "भावचित्रात्मक" लिपियों के अनंतर "अक्षरात्मक" स्तर की लिपियों का विकास माना जाता है। पाश्चात्य और अनेक भारतीय भाषाविज्ञानविज्ञों के मत से लिपि की अक्षरात्मक अवस्था के बाद अल्फाबेटिक (वर्णात्मक) अवस्था का विकास हुआ। सबसे विकसित अवस्था मानी गई है ध्वन्यात्मक (फोनेटिक) लिपि की। "देवनागरी" को अक्षरात्मक इसलिए कहा जाता है कि इसके वर्ण- अक्षर (सिलेबिल) हैं- स्वर भी और व्यंजन भी। "क", "ख" आदि व्यंजन सस्वर हैं- अकारयुक्त हैं। वे केवल ध्वनियाँ नहीं हैं अपितु सस्वर अक्षर हैं। अत: ग्रीक, रोमन आदि वर्णमालाएँ हैं। परंतु यहाँ यह ध्यान रखने की बात है कि भारत की "ब्राह्मी" या "भारती" वर्णमाला की ध्वनियों में व्यंजनों का "पाणिनि" ने वर्णसमाम्नाय के 14 सूत्रों में जो स्वरूप परिचय दिया है- उसके विषय में "पतंजलि" (द्वितीय शती ई.पू.) ने यह स्पष्ट बता दिया है कि व्यंजनों में संनियोजित "अकार" स्वर का उपयोग केवल उच्चारण के उद्देश्य से है। वह तत्वत: वर्ण का अंग नहीं है। इस दृष्टि से विचार करते हुए कहा जा सकता है कि इस लिपि की वर्णमाला तत्वत: ध्वन्यात्मक है, अक्षरात्मक नहीं।

देवनागरी वर्णमाला[संपादित करें]

देवनागरी की वर्णमाला में १२ स्वर और ३४ व्यंजन हैं। शून्य या एक या अधिक व्यंजनों और एक स्वर के मेल से एक अक्षर बनता है।

स्वर[संपादित करें]

निम्नलिखित स्वर आधुनिक हिन्दी (खड़ी बोली) के लिये दिये गये हैं। संस्कृत में इनके उच्चारण थोड़े अलग होते हैं।

वर्णाक्षर “प” के साथ मात्रा IPA उच्चारण "प्" के साथ उच्चारण IAST समतुल्य हिन्दी में वर्णन
/ ə / / pə / a बीच का मध्य प्रसृत स्वर
पा / α: / / pα: / ā दीर्घ विवृत पश्व प्रसृत स्वर
पि / i / / pi / i ह्रस्व संवृत अग्र प्रसृत स्वर
पी / i: / / pi: / ī दीर्घ संवृत अग्र प्रसृत स्वर
पु / u / / pu / u ह्रस्व संवृत पश्व वर्तुल स्वर
पू / u: / / pu: / ū दीर्घ संवृत पश्व वर्तुल स्वर
पे / e: / / pe: / e दीर्घ अर्धसंवृत अग्र प्रसृत स्वर
पै / æ: / / pæ: / ai दीर्घ लगभग-विवृत अग्र प्रसृत स्वर
पो / ο: / / pο: / o दीर्घ अर्धसंवृत पश्व वर्तुल स्वर
पौ / ɔ: / / pɔ: / au दीर्घ अर्धविवृत पश्व वर्तुल स्वर
<कुछ भी नही> <कुछ भी नही> / ɛ / / pɛ / <कुछ भी नहीं> ह्रस्व अर्धविवृत अग्र प्रसृत स्वर

संस्कृत में दो स्वरों का युग्म होता है और "अ-इ" या "आ-इ" की तरह बोला जाता है। इसी तरह "अ-उ" या "आ-उ" की तरह बोला जाता है।

इसके अलावा हिन्दी और संस्कृत में ये वर्णाक्षर भी स्वर माने जाते हैं :

  • -- आधुनिक हिन्दी में "रि" की तरह
  • -- केवल संस्कृत में
  • -- केवल संस्कृत में
  • -- केवल संस्कृत में
  • अं -- आधे न्, म्, ङ्, ञ्, ण् के लिये या स्वर का नासिकीकरण करने के लिये
  • अँ -- स्वर का नासिकीकरण करने के लिये
  • अः -- अघोष "ह्" (निःश्वास) के लिये
  • और -- अर्धचंद्र इसका उपयोग अंग्रेजी शब्दों का हिंदी मे परिपूर्ण उच्चारण तथा लेखन करने के लिये किया जाता है।

व्यंजन[संपादित करें]

जब किसी स्वर प्रयोग नहीं हो, तो वहाँ पर 'अ' (अर्थात श्वा का स्वर) माना जाता है। स्वर के न होने को हलन्त्‌ अथवा विराम से दर्शाया जाता है। जैसे कि क्‌ ख्‌ ग्‌ घ्‌।

स्पर्श (Plosives)
अल्पप्राण
अघोष
महाप्राण
अघोष
अल्पप्राण
घोष
महाप्राण
घोष
नासिक्य
कण्ठ्य / kə /
/ khə /
/ gə /
/ gɦə /
/ ŋə /
तालव्य / cə / या / tʃə /
/ chə / या /tʃhə/
/ ɟə / या / dʒə /
/ ɟɦə / या / dʒɦə /
/ ɲə /
मूर्धन्य / ʈə /
/ ʈhə /
/ ɖə /
/ ɖɦə /
/ ɳə /
दन्त्य / t̪ə /
/ t̪hə /
/ d̪ə /
/ d̪ɦə /
/ nə /
ओष्ठ्य / pə /
/ phə /
/ bə /
/ bɦə /
/ mə /
स्पर्शरहित (Non-Plosives)
तालव्य मूर्धन्य दन्त्य/
वर्त्स्य
कण्ठोष्ठ्य/
काकल्य
अन्तस्थ / jə /
/ rə /
/ lə /
/ ʋə /
ऊष्म/
संघर्षी
/ ʃə /
/ ʂə /
/ sə /
/ ɦə / या / hə /
नोट करें -
  • इनमें से (मूर्धन्य पार्विक अन्तस्थ) एक अतिरिक्त व्यंजन है जिसका प्रयोग हिन्दी में नहीं होता है। मराठी और वैदिक संस्कृत में सभी का प्रयोग किया जाता है।
  • संस्कृत में का उच्चारण ऐसे होता था : जीभ की नोक को मूर्धा (मुँह की छत) की ओर उठाकर जैसी आवाज़ करना। शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनि शाखा में कुछ वाक़्यात में का उच्चारण की तरह करना मान्य था। आधुनिक हिन्दी में का उच्चारण पूरी तरह की तरह होता है।
  • हिन्दी में का उच्चारण ज़्यादातर ड़ँ की तरह होता है, यानि कि जीभ मुँह की छत को एक ज़ोरदार ठोकर मारती है। हिन्दी में क्षणिक और क्शड़िंक में कोई फ़र्क नहीं। पर संस्कृत में ण का उच्चारण की तरह बिना ठोकर मारे होता था, अन्तर केवल इतना कि जीभ के समय मुँह की छत को छूती है।

नुक़्ता वाले व्यंजन[संपादित करें]

हिन्दी भाषा में मुख्यत: अरबी और फ़ारसी भाषाओं से आये शब्दों को देवनागरी में लिखने के लिये कुछ वर्णों के नीचे नुक्ता (बिन्दु) लगे वर्णों का प्रयोग किया जाता है (जैसे क़, ज़ आदि)। किन्तु हिन्दी में भी अधिकांश लोग नुक्तों का प्रयोग नहीं करते। इसके अलावा संस्कृत, मराठी, नेपाली एवं अन्य भाषाओं को देवनागरी में लिखने में भी नुक्तों का प्रयोग नहीं किया जाता है।

वर्णाक्षर (IPA उच्चारण) उदाहरण वर्णन अंग्रेज़ी में वर्णन ग़लत उच्चारण
क़ (/ q /) क़त्ल अघोष अलिजिह्वीय स्पर्श Voiceless uvular stop क (/ k /)
ख़ (/ x or χ /) ख़ास अघोष अलिजिह्वीय या कण्ठ्य संघर्षी Voiceless uvular or velar fricative ख (/ kh /)
ग़ (/ ɣ or ʁ /) ग़ैर घोष अलिजिह्वीय या कण्ठ्य संघर्षी Voiced uvular or velar fricative ग (/ g /)
फ़ (/ f /) फ़र्क अघोष दन्त्यौष्ठ्य संघर्षी Voiceless labio-dental fricative फ (/ ph /)
ज़ (/ z /) ज़ालिम घोष वर्त्स्य संघर्षी Voiced alveolar fricative ज (/ dʒ /)
झ़ (/ ʒ /) टेलेवीझ़न घोष तालव्य संघर्षी Voiced palatal fricative ज (/ dʒ /)
थ़ (/ θ /) अथ़्रू अघोष दन्त्य संघर्षी Voiceless dental fricative थ (/ t̪h /)
ड़ (/ ɽ /) पेड़ अल्पप्राण मूर्धन्य उत्क्षिप्त Unaspirated retroflex flap -
ढ़ (/ ɽh /) पढ़ना महाप्राण मूर्धन्य उत्क्षिप्त Aspirated retroflex flap -

थ़ का प्रयोग मुख्यतः पहाड़ी भाषाओँ में होता है जैसे की डोगरी (की उत्तरी उपभाषाओं) में "आंसू" के लिए शब्द है "अथ़्रू"। हिन्दी में ड़ और ढ़ व्यंजन फ़ारसी या अरबी से नहीं लिये गये हैं, न ही ये संस्कृत में पाये जाये हैं। असल में ये संस्कृत के साधारण और के बदले हुए रूप हैं।

विराम-चिह्न, वैदिक चिह्न आदि[संपादित करें]

प्रतीक नाम कार्य
डण्डा / खड़ी पाई / पूर्ण विराम वाक्य का अन्त बताने के लिये
दोहरा डण्डा
  संक्षिप्तीकरण के लिये, जैसे म॰ क॰ गाँधी
प्रणव , ओम हिन्दू धर्म का शुभ शब्द
प॑ उदात्त उच्चारण बताने के लिये वैदिक संस्कृत के कुछ ग्रन्थों में प्रयुक्त
प॒ अनुदात्त उच्चारण बताने के लिये वैदिक संस्कृत के कुछ ग्रन्थों में प्रयुक्त

देवनागरी अंक[संपादित करें]

देवनागरी अंक निम्न रूप में लिखे जाते हैं :


देवनागरी संयुक्ताक्षर[संपादित करें]

देवनागरी लिपि में दो व्यंजन का संयुक्ताक्षर निम्न रुप में लिखा जाता है :

क्क क्ख क्ग क्घ क्ङ क्च क्छ क्ज क्झ क्ञ क्ट क्ठ क्ड क्ढ क्ण क्त क्थ क्द क्ध क्न क्प क्फ क्ब क्भ क्म क्य क्र क्ल क्व क्श क्ष क्स क्ह क्ळ
ख्क ख्ख ख्ग ख्घ ख्ङ ख्च ख्छ ख्ज ख्झ ख्ञ ख्ट ख्ठ ख्ड ख्ढ ख्ण ख्त ख्थ ख्द ख्ध ख्न ख्प ख्फ ख्ब ख्भ ख्म ख्य ख्र ख्ल ख्व ख्श ख्ष ख्स ख्ह ख्ळ
ग्क ग्ख ग्ग ग्घ ग्ङ ग्च ग्छ ग्ज ग्झ ग्ञ ग्ट ग्ठ ग्ड ग्ढ ग्ण ग्त ग्थ ग्द ग्ध ग्न ग्प ग्फ ग्ब ग्भ ग्म ग्य ग्र ग्ल ग्व ग्श ग्ष ग्स ग्ह ग्ळ
घ्क घ्ख घ्ग घ्घ घ्ङ घ्च घ्छ घ्ज घ्झ घ्ञ घ्ट घ्ठ घ्ड घ्ढ घ्ण घ्त घ्थ घ्द घ्ध घ्न घ्प घ्फ घ्ब घ्भ घ्म घ्य घ्र घ्ल घ्व घ्श घ्ष घ्स घ्ह घ्ळ
ङ्क ङ्ख ङ्ग ङ्घ ङ्ङ ङ्च ङ्छ ङ्ज ङ्झ ङ्ञ ङ्ट ङ्ठ ङ्ड ङ्ढ ङ्ण ङ्त ङ्थ ङ्द ङ्ध ङ्न ङ्प ङ्फ ङ्ब ङ्भ ङ्म ङ्य ङ्र ङ्ल ङ्व ङ्श ङ्ष ङ्स ङ्ह ङ्ळ
च्क च्ख च्ग च्घ च्ङ च्च च्छ च्ज च्झ च्ञ च्ट च्ठ च्ड च्ढ च्ण च्त च्थ च्द च्ध च्न च्प च्फ च्ब च्भ च्म च्य च्र च्ल च्व च्श च्ष च्स च्ह च्ळ
छ्क छ्ख छ्ग छ्घ छ्ङ छ्च छ्छ छ्ज छ्झ छ्ञ छ्ट छ्ठ छ्ड छ्ढ छ्ण छ्त छ्थ छ्द छ्ध छ्न छ्प छ्फ छ्ब छ्भ छ्म छ्य छ्र छ्ल छ्व छ्श छ्ष छ्स छ्ह छ्ळ
ज्क ज्ख ज्ग ज्घ ज्ङ ज्च ज्छ ज्ज ज्झ ज्ञ ज्ट ज्ठ ज्ड ज्ढ ज्ण ज्त ज्थ ज्द ज्ध ज्न ज्प ज्फ ज्ब ज्भ ज्म ज्य ज्र ज्ल ज्व ज्श ज्ष ज्स ज्ह ज्ळ
झ्क झ्ख झ्ग झ्घ झ्ङ झ्च झ्छ झ्ज झ्झ झ्ञ झ्ट झ्ठ झ्ड झ्ढ झ्ण झ्त झ्थ झ्द झ्ध झ्न झ्प झ्फ झ्ब झ्भ झ्म झ्य झ्र झ्ल झ्व झ्श झ्ष झ्स झ्ह झ्ळ
ञ्क ञ्ख ञ्ग ञ्घ ञ्ङ ञ्च ञ्छ ञ्ज ञ्झ ञ्ञ ञ्ट ञ्ठ ञ्ड ञ्ढ ञ्ण ञ्त ञ्थ ञ्द ञ्ध ञ्न ञ्प ञ्फ ञ्ब ञ्भ ञ्म ञ्य ञ्र ञ्ल ञ्व ञ्श ञ्ष ञ्स ञ्ह ञ्ळ
ट्क ट्ख ट्ग ट्घ ट्ङ ट्च ट्छ ट्ज ट्झ ट्ञ ट्ट ट्ठ ट्ड ट्ढ ट्ण ट्त ट्थ ट्द ट्ध ट्न ट्प ट्फ ट्ब ट्भ ट्म ट्य ट्र ट्ल ट्व ट्श ट्ष ट्स ट्ह ट्ळ
ठ्क ठ्ख ठ्ग ठ्घ ठ्ङ ठ्च ठ्छ ठ्ज ठ्झ ठ्ञ ठ्ट ठ्ठ ठ्ड ठ्ढ ठ्ण ठ्त ठ्थ ठ्द ठ्ध ठ्न ठ्प ठ्फ ठ्ब ठ्भ ठ्म ठ्य ठ्र ठ्ल ठ्व ठ्श ठ्ष ठ्स ठ्ह ठ्ळ
ड्क ड्ख ड्ग ड्घ ड्ङ ड्च ड्छ ड्ज ड्झ ड्ञ ड्ट ड्ठ ड्ड ड्ढ ड्ण ड्त ड्थ ड्द ड्ध ड्न ड्प ड्फ ड्ब ड्भ ड्म ड्य ड्र ड्ल ड्व ड्श ड्ष ड्स ड्ह ड्ळ
ढ्क ढ्ख ढ्ग ढ्घ ढ्ङ ढ्च ढ्छ ढ्ज ढ्झ ढ्ञ ढ्ट ढ्ठ ढ्ड ढ्ढ ढ्ण ढ्त ढ्थ ढ्द ढ्ध ढ्न ढ्प ढ्फ ढ्ब ढ्भ ढ्म ढ्य ढ्र ढ्ल ढ्व ढ्श ढ्ष ढ्स ढ्ह ढ्ळ
ण्क ण्ख ण्ग ण्घ ण्ङ ण्च ण्छ ण्ज ण्झ ण्ञ ण्ट ण्ठ ण्ड ण्ढ ण्ण ण्त ण्थ ण्द ण्ध ण्न ण्प ण्फ ण्ब ण्भ ण्म ण्य ण्र ण्ल ण्व ण्श ण्ष ण्स ण्ह ण्ळ
त्क त्ख त्ग त्घ त्ङ त्च त्छ त्ज त्झ त्ञ त्ट त्ठ त्ड त्ढ त्ण त्त त्थ त्द त्ध त्न त्प त्फ त्ब त्भ त्म त्य त्र त्ल त्व त्श त्ष त्स त्ह त्ळ
थ्क थ्ख थ्ग थ्घ थ्ङ थ्च थ्छ थ्ज थ्झ थ्ञ थ्ट थ्ठ थ्ड थ्ढ थ्ण थ्त थ्थ थ्द थ्ध थ्न थ्प थ्फ थ्ब थ्भ थ्म थ्य थ्र थ्ल थ्व थ्श थ्ष थ्स थ्ह थ्ळ
द्क द्ख द्ग द्घ द्ङ द्च द्छ द्ज द्झ द्ञ द्ट द्ठ द्ड द्ढ द्ण द्त द्थ द्द द्ध द्न द्प द्फ द्ब द्भ द्म द्य द्र द्ल द्व द्श द्ष द्स द्ह द्ळ
ध्क ध्ख ध्ग ध्घ ध्ङ ध्च ध्छ ध्ज ध्झ ध्ञ ध्ट ध्ठ ध्ड ध्ढ ध्ण ध्त ध्थ ध्द ध्ध ध्न ध्प ध्फ ध्ब ध्भ ध्म ध्य ध्र ध्ल ध्व ध्श ध्ष ध्स ध्ह ध्ळ
न्क न्ख न्ग न्घ न्ङ न्च न्छ न्ज न्झ न्ञ न्ट न्ठ न्ड न्ढ न्ण न्त न्थ न्द न्ध न्न न्प न्फ न्ब न्भ न्म न्य न्र न्ल न्व न्श न्ष न्स न्ह न्ळ
प्क प्ख प्ग प्घ प्ङ प्च प्छ प्ज प्झ प्ञ प्ट प्ठ प्ड प्ढ प्ण प्त प्थ प्द प्ध प्न प्प प्फ प्ब प्भ प्म प्य प्र प्ल प्व प्श प्ष प्स प्ह प्ळ
फ्क फ्ख फ्ग फ्घ फ्ङ फ्च फ्छ फ्ज फ्झ फ्ञ फ्ट फ्ठ फ्ड फ्ढ फ्ण फ्त फ्थ फ्द फ्ध फ्न फ्प फ्फ फ्ब फ्भ फ्म फ्य फ्र फ्ल फ्व फ्श फ्ष फ्स फ्ह फ्ळ
ब्क ब्ख ब्ग ब्घ ब्ङ ब्च ब्छ ब्ज ब्झ ब्ञ ब्ट ब्ठ ब्ड ब्ढ ब्ण ब्त ब्थ ब्द ब्ध ब्न ब्प ब्फ ब्ब ब्भ ब्म ब्य ब्र ब्ल ब्व ब्श ब्ष ब्स ब्ह ब्ळ
भ्क भ्ख भ्ग भ्घ भ्ङ भ्च भ्छ भ्ज भ्झ भ्ञ भ्ट भ्ठ भ्ड भ्ढ भ्ण भ्त भ्थ भ्द भ्ध भ्न भ्प भ्फ भ्ब भ्भ भ्म भ्य भ्र भ्ल भ्व भ्श भ्ष भ्स भ्ह भ्ळ
म्क म्ख म्ग म्घ म्ङ म्च म्छ म्ज म्झ म्ञ म्ट म्ठ म्ड म्ढ म्ण म्त म्थ म्द म्ध म्न म्प म्फ म्ब म्भ म्म म्य म्र म्ल म्व म्श म्ष म्स म्ह म्ळ
य्क य्ख य्ग य्घ य्ङ य्च य्छ य्ज य्झ य्ञ य्ट य्ठ य्ड य्ढ य्ण य्त य्थ य्द य्ध य्न य्प य्फ य्ब य्भ य्म य्य य्र य्ल य्व य्श य्ष य्स य्ह य्ळ
र्क र्ख र्ग र्घ र्ङ र्च र्छ र्ज र्झ र्ञ र्ट र्ठ र्ड र्ढ र्ण र्त र्थ र्द र्ध र्न र्प र्फ र्ब र्भ र्म र्य र्र र्ल र्व र्श र्ष र्स र्ह र्ळ
ल्क ल्ख ल्ग ल्घ ल्ङ ल्च ल्छ ल्ज ल्झ ल्ञ ल्ट ल्ठ ल्ड ल्ढ ल्ण ल्त ल्थ ल्द ल्ध ल्न ल्प ल्फ ल्ब ल्भ ल्म ल्य ल्र ल्ल ल्व ल्श ल्ष ल्स ल्ह ल्ळ
व्क व्ख व्ग व्घ व्ङ व्च व्छ व्ज व्झ व्ञ व्ट व्ठ व्ड व्ढ व्ण व्त व्थ व्द व्ध व्न व्प व्फ व्ब व्भ व्म व्य व्र व्ल व्व व्श व्ष व्स व्ह व्ळ
श्क श्ख श्ग श्घ श्ङ श्च श्छ श्ज श्झ श्ञ श्ट श्ठ श्ड श्ढ श्ण श्त श्थ श्द श्ध श्न श्प श्फ श्ब श्भ श्म श्य श्र श्ल श्व श्श श्ष श्स श्ह श्ळ
ष्क ष्ख ष्ग ष्घ ष्ङ ष्च ष्छ ष्ज ष्झ ष्ञ ष्ट ष्ठ ष्ड ष्ढ ष्ण ष्त ष्थ ष्द ष्ध ष्न ष्प ष्फ ष्ब ष्भ ष्म ष्य ष्र ष्ल ष्व ष्श ष्ष ष्स ष्ह ष्ळ
स्क स्ख स्ग स्घ स्ङ स्च स्छ स्ज स्झ स्ञ स्ट स्ठ स्ड स्ढ स्ण स्त स्थ स्द स्ध स्न स्प स्फ स्ब स्भ स्म स्य स्र स्ल स्व स्श स्ष स्स स्ह स्ळ
ह्क ह्ख ह्ग ह्घ ह्ङ ह्च ह्छ ह्ज ह्झ ह्ञ ह्ट ह्ठ ह्ड ह्ढ ह्ण ह्त ह्थ ह्द ह्ध ह्न ह्प ह्फ ह्ब ह्भ ह्म ह्य ह्र ह्ल ह्व ह्श ह्ष ह्स ह्ह ह्ळ
ळ्क ळ्ख ळ्ग ळ्घ ळ्ङ ळ्च ळ्छ ळ्ज ळ्झ ळ्ञ ळ्ट ळ्ठ ळ्ड ळ्ढ ळ्ण ळ्त ळ्थ ळ्द ळ्ध ळ्न ळ्प ळ्फ ळ्ब ळ्भ ळ्म ळ्य ळ्र ळ्ल ळ्व ळ्श ळ्ष ळ्स ळ्ह ळ्ळ

निम्दोनलिख्त दो या दो से ज्यादा व्यंजन का संयुक्ताक्षर के कुछ उदाहरण हैं :

व्यंजन संयुक्ताक्षर
क् क्क क्क्त क्क्ण क्क्न क्क्म क्क्य क्क्र क्क्ष क्ख क्ग क्घ क्ङ क्च क्च्क क्च्ङ क्च्च क्च्ञ क्च्ड क्च्न क्च्ब क्च्म क्च्य क्च्र क्च्ल क्च्व क्छ क्ज क्ज्ञ क्झ क्ञ क्ञ्न क्ञ्ब क्ञ्म क्ञ्य क्ञ्र क्ञ्ल क्ञ्व क्ट क्ठ क्ड क्ढ क्ण क्त क्त्च क्त्च्य क्त्ज क्त्ज क्त्ज्ञ क्त्ञ क्त्ञ्म क्त्ञ्य क्त्त क्त्त्म क्त्त्य क्त्न क्त्न्म क्त्न्य क्त्न क्त्न्म क्त्न्य क्त्ब क्त्ब्म क्त्ब्य क्त्म क्त्य क्त्र क्त्र्म क्त्य क्त्ल क्त्ल्म क्त्ल्य क्त्व क्त्व्म क्त्व्य क्थ क्द क्ध क्न क्न्म क्न्य क्न्र क्प क्फ क्ब क्ब्न क्ब्म क्ब्य क्भ क्म क्म्च क्म्ज क्म्ज्ञ क्म्ञ क्म्न क्म्ब क्म्र क्म्ल क्म्व क्य क्य्र क्र क्र्क क्र्ङ क्र्च क्र्ज क्र्ज्ञ क्र्ञ क्र्ड क्र्न क्र्ब क्र्म क्र्य क्र्ल क्र्व क्ल क्ल्म क्ल्य क्ळ क्व क्व्न क्व्म क्व्य क्व्र क्श क्ष क्ष्क क्ष्क्ष क्ष्ख क्ष्ग क्ष्घ क्ष्ङ क्ष्च क्ष्छ क्ष्ज क्ष्ज्ञ क्ष्झ क्ष्ञ क्ष्ञ्न क्ष्ञ्र क्ष्ट क्ष्ठ क्ष्ड क्ष्ढ क्ष्ण क्ष्त क्ष्थ क्ष्द क्ष्ध क्ष्न क्ष्प क्ष्फ क्ष्ब क्ष्भ क्ष्म क्ष्य क्ष्र क्ष्ल क्ष्ळ क्ष्व क्ष्श क्ष्ष क्ष्स क्ष्ह क्स क्ह
ख् ख्क ख्क्ष ख्ख ख्ग ख्घ ख्ञ ख्च ख्छ ख्ज ख्ज्ञ ख्झ ख्ञ ख्ञ्न ख्ञ्र ख्ट ख्ठ ख्ड ख्ढ ख्ण ख्त ख्थ ख्द ख्ध ख्न ख्प ख्फ ख्ब ख्ब्न ख्ब्र ख्भ ख्म ख्य ख्र ख्ल ख्ळ ख्व ख्व्न ख्व्र ख्श ख्ष ख्स ख्ह
ग् ग्क ग्क्ष ग्ख ग्ग ग्घ ग्ङ ग्च ग्छ ग्ज ग्ज्ञ ग्झ ग्ञ ग्ट ग्ठ ग्ड ग्ढ ग्ण ग्त ग्थ ग्द ग्ध ग्न ग्प ग्फ ग्ब ग्भ ग्म ग्य ग्र ग्ल ग्ळ ग्व ग्श ग्ष ग्स ग्ह
घ् घ्क घ्क्ष घ्ख घ्घ घ्ङ घ्च घ्छ घ्ज घ्ज्ञ घ्झ घ्ञ घ्ञ्न घ्ञ्ब घ्ञ्र घ्ञ्ल घ्ट घ्ठ घ्ड घ्ढ घ्ण घ्त घ्थ घ्द घ्ध घ्न घ्प घ्फ घ्ब घ्भ घ्म घ्य घ्र घ्ल घ्ळ घ्व घ्श घ्ष घ्स घ्ह
ङ् ङ्क ङ्क्क ङ्क्क्ष ङ्क्च ङ्छ ङ्क्ञ ङ्क्ट ङ्क्ठ ङ्क्ण ङ्क्त ङ्क्त्य ङ्क्त्र ङ्क्त्र्य ङ्क्त्व ङ्क्त्व्य ङ्क्थ ङ्क्न ङ्क्प ङ्क्फ ङ्क्ब ङ्क्म ङ्क्य ङ्क्र ङ्क्र्य ङ्क्व ङ्क्व्य ङ्क्श ङ्क्ष ङ्क्ष्क ङ्क्ष्ट ङ्क्ष्ठ ङ्क्ष्ण ङ्क्ष्त ङ्क्ष्थ ङ्क्ष्न ङ्क्ष्प ङ्क्ष्फ ङ्क्ष्म ङ्क्ष्य ङ्क्ष्र ङ्क्ष्र्य ङ्क्ष्ल ङ्क्ष्व ङ्क्ष्व्य ङ्क्ष्ष ङ्क्स ङ्ख ङ्ख्ण ङ्ख्न ङ्ख्म ङ्ख्य ङ्ख्र ङ्ख्र्य ङ्ख्ल ङ्ख्व ङ्ग ङ्ग्ग ङ्ग्घ ङ्ग्घ्य ङ्ग्घ्र ङ्ग्ङ ङ्ग्ज ङ्ग्ज्ञ ङ्ग्ञ ङ्ग्ड ङ्ग्ढ ङ्ग्ण ङ्ग्द ङ्ग्ध ङ्ग्न ङ्ग्ब ङ्ग्भ ङ्ग्म ङ्ग्य ङ्ग्र ङ्ग्र्य ङ्ग्ल ङ्ग्व ङ्ग्व्य ङ्ग्ह ङ्घ ङ्घ्ञ ङ्घ्ण ङ्घ्न ङ्घ्ब ङ्घ्म ङ्घ्य ङ्घ्र ङ्घ्र्य ङ्घ्ल ङ्घ्व ङ्ङ ङ्ङ्य ङ्ङ्र ङ्ङ्र्य ङ्ङ्व ङ्च ङ्च्क ङ्च्ङ ङ्च्च ङ्च्छ ङ्च्ञ ङ्च्ट ङ्च्ठ ङ्च्ण ङ्च्त ङ्च्थ ङ्च्न ङ्च्प ङ्च्फ ङ्च्ब ङ्च्म ङ्च्य ङ्च्र ङ्च्र्य ङ्च्ल ङ्च्व ङ्च्व्य ङ्च्श ङ्च्ष ङ्च्स ङ्छ ङ्छ्य ङ्छ्र ङ्छ्र्य ङ्छ्व ङ्ज ङ्ज्ग ङ्ज्घ ङ्ज्ङ ङ्ज्ज ङ्ज्ज्ञ ङ्ज्झ ङ्ज्ञ ङ्ज्ञ्य ङ्ज्ञ्र ङ्ज्ञ्व ङ्ज्ड ङ्ज्ढ ङ्ज्ण ङ्ज्द ङ्ज्ध ङ्ज्न ङ्ज्ब ङ्ज्भ ङ्ज्म ङ्ज्य ङ्ज्र ङ्ज्र्य ङ्ज्ल ङ्ज्व ङ्ज्श ङ्ज्ष ङ्ज्स ङ्ज्ह ङ्झ ङ्झ्य ङ्झ्र ङ्झ्र्य ङ्ञ ङ्ञ्क ङ्ञ्ख ङ्ञ्ग ङ्ञ्घ ङ्ञ्ङ ङ्ञ्च ङ्ञ्छ ङ्ञ्ज ङ्ञ्ज्ञ ङ्ञ्झ ङ्ञ्ञ ङ्ञ्ट ङ्ञ्ठ ङ्ञ्ड ङ्ञ्ढ ङ्ञ्ण ङ्ञ्त ङ्ञ्थ ङ्ञ्द ङ्ञ्ध ङ्ञ्न ङ्ञ्प ङ्ञ्फ ङ्ञ्ब ङ्ञ्भ ङ्ञ्म ङ्ञ्य ङ्ञ्र ङ्ञ्र्य ङ्ञ्ल ङ्ञ्व ङ्ञ्श ङ्ञ्ष ङ्ञ्स ङ्ञ्ह ङ्ट ङ्ट्य ङ्ट्र ङ्ट्र्य ङ्ट्व ङ्ठ ङ्ठ्य ङ्ठ्र ङ्ठ्र्य ङ्ठ्व ङ्ड ङ्ड्य ङ्ड्र ङ्ड्र्य ङ्ड्व ङ्ढ ङ्ढ्य ङ्ढ्र ङ्ढ्र्य ङ्ढ्व ङ्ण ङ्ण्क्ष ङ्ण्ञ ङ्ण्ट ङ्ण्ठ ङ्ण्ड ङ्ण्ढ ङ्ण्ण ङ्ण्न ङ्ण्म ङ्ण्य ङ्ण्र ङ्ण्र्य ङ्ण्ल ङ्ण्व ङ्ण्ष ङ्त ङ्त्क ङ्त्क्ष ङ्त्ख ङ्त्ङ ङ्त्च ङ्त्छ ङ्त्ट ङ्त्ठ ङ्त्त ङ्त्थ ङ्त्न ङ्त्प ङ्त्फ ङ्त्म ङ्त्य ङ्त्र ङ्त्र्य ङ्त्ल ङ्त्व ङ्त्व्य ङ्त्श ङ्त्ष ङ्त्स ङ्थ ङ्थ्न ङ्थ्ब ङ्थ्य ङ्थ्र ङ्थ्र्य ङ्थ्व ङ्द ङ्द्ग ङ्द्घ ङ्द्द ङ्द्ध ङ्द्न ङ्द्ब ङ्द्भ ङ्द्म ङ्द्य ङ्द्र ङ्द्र्य ङ्द्व ङ्द्व्य ङ्ध ङ्ध्न ङ्ध्ब ङ्ध्म ङ्ध्य ङ्ध्र ङ्ध्र्य ङ्ध्ल ङ्ध्व ङ्न ङ्न्क ङ्न्क्ष ङ्न्ख ङ्न्ग ङ्न्घ ङ्न्ङ ङ्न्च ङ्न्छ ङ्न्ज ङ्न्ज्ञ ङ्न्झ ङ्न्ञ ङ्न्ट ङ्न्ठ ङ्न्ड ङ्न्ढ ङ्न्ण ङ्न्त ङ्न्थ ङ्न्द ङ्न्ध ङ्न्न ङ्न्प ङ्न्फ ङ्न्ब ङ्न्भ ङ्न्म ङ्न्य ङ्न्र ङ्न्र्य ङ्न्ल ङ्न्व ङ्न्व्य ङ्न्श ङ्न्ष ङ्न्स ङ्न्ह ङ्प ङ्प्क ङ्प्ङ ङ्प्च ङ्प्ट ङ्प्ठ ङ्प्त ङ्प्न ङ्प्म ङ्प्य ङ्प्र ङ्प्र्य ङ्प्ल ङ्प्व ङ्प्व्य ङ्फ ङ्फ्म ङ्फ्य ङ्फ्र ङ्फ्र्य ङ्फ्व ङ्फ्व्य ङ्ब ङ्ब्ग ङ्ब्घ ङ्ब्ङ ङ्ब्ज ङ्ब्ज्ञ ङ्ब्झ ङ्ब्ञ ङ्ब्ड ङ्ब्ढ ङ्ब्ण ङ्ब्द ङ्ब्ध ङ्ब्न ङ्ब्ब ङ्ब्भ ङ्ब्म ङ्ब्र ङ्ब्र्य ङ्ब्व ङ्ब्ल ङ्ब्श ङ्ब्ष ङ्ब्स ङ्ब्ह ङ्भ ङ्भ्ण ङ्भ्न ङ्भ्ब ङ्भ्म ङ्भ्य ङ्भ्र ङ्भ्र्य ङ्भ्ल ङ्भ्व ङ्भ्व्य ङ्म ङ्म्ज ङ्म्ज्ञ ङ्म्ञ ङ्म्न ङ्म्ब ङ्म्म ङ्म्य ङ्म्र ङ्म्र्य ङ्म्ल ङ्म्व ङ्य ङ्य्न ङ्य्य ङ्य्र ङ्य्र्य ङ्य्व ङ्र ङ्र्म ङ्र्य ङ्र्व ङ्ल ङ्ल्म ङ्ल्य ङ्ल्र ङ्ल्र्य ङ्ल्व ङ्ळ ङ्व ङ्व्ग ङ्व्घ ङ्व्ङ ङ्व्ज ङ्व्ज्ञ ङ्व्झ ङ्व्ञ ङ्व्ड ङ्व्ढ ङ्व्ण ङ्व्द ङ्व्ध ङ्व्न ङ्व्ब ङ्व्भ ङ्व्म ङ्व्य ङ्व्र ङ्व्र्य ङ्व्ल ङ्व्व ङ्व्श ङ्व्ष ङ्व्स ङ्व्ब ङ्श ङ्श्क ङ्श्क्ष ङ्श्ङ ङ्श्च ङ्श्छ ङ्श्ञ ङ्श्ट ङ्श्ठ ङ्श्ण ङ्श्त ङ्श्थ ङ्श्न ङ्श्प ङ्श्फ ङ्श्म ङ्श्र ङ्श्र्य ङ्श्ल ङ्श्व ङ्श्श ङ्श्ष ङ्ष ङ्ष्क ङ्ष्ङ ङ्ष्च ङ्ष्ट ङ्ष्ठ ङ्ष्त ङ्ष्न ङ्ष्म ङ्ष्य ङ्ष्र ङ्ष्र्य ङ्ष्ल ङ्ष्व ङ्ष्व्य ङ्स ङ्स्क ङ्स्क्ष ङ्स्च ङ्स्छ ङ्स्ट ङ्स्ठ ङ्स्ण ङ्स्त ङ्स्थ ङ्स्न ङ्स्प ङ्स्फ ङ्स्ब ङ्स्म ङ्स्य ङ्स्र ङ्स्र्य ङ्स्ल ङ्स्व ङ्स्स ङ्ह ङ्ह्ण ङ्ह्न ङ्ह्ब ङ्ह्म ङ्ह्य ङ्ह्र ङ्ह्र्य ङ्ह्ल ङ्ह्व
च् च्क च्क्च च्क्ज च्क्ञ च्क्त च्क्न च्क्म च्क्य च्क्र च्क्ल च्क्ष च्ख च्ग च्घ च्ङ च्च च्च्क च्च्ङ च्च्च च्च्ञ च्च्न च्च्ब च्च्म च्च्र च्च्ल च्च्व च्च्श च्छ च्ज च्ज्ञ च्झ च्ञ च्ञ्न च्ञ्ब च्ञ्र च्ञ्ल च्ञ्व च्ट च्ठ च्ड च्ढ च्ण च्त च्थ च्द च्ध च्न च्प च्फ च्ब च्ब्न च्ब्र च्भ च्म च्य च्र च्र्क च्र्ङ च्र्च च्र्ज च्र्ज्ञ च्र्ञ च्र्ड च्र्न च्र्ब च्र्ल च्र्व च्ल च्ळ च्व च्व्न च्व्र च्श च्ष च्स च्ह
छ् छ्क छ्क्ष छ्ख छ्ग छ्घ छ्ङ छ्ङ्य छ्ङ्र छ्ङ्व छ्च छ्छ छ्छ्य छ्छ्र छ्छ्व छ्ज छ्ज्ञ छ्झ छ्ञ छ्ञ्न छ्ञ्र छ्ट छ्ट्य छ्ट्र छ्ट्व छ्ठ छ्ड छ्ड्य छ्ड्र छ्ड्व छ्ढ छ्ढ्य छ्ढ्र छ्ढ्व छ्ण छ्ण्य छ्ण्र छ्ण्व छ्त छ्त्य छ्त्र छ्त्व छ्थ छ्द छ्ध छ्न छ्न्य छ्न्र छ्न छ्प छ्प्य छ्प्र छ्फ छ्ब छ्ब्न छ्ब्य छ्ब्र छ्ब्ल छ्भ छ्म छ्म्च छ्म्ज छ्म्ज्ञ छ्म्ञ छ्म्न छ्म्ब छ्म्म छ्म्र छ्म्ल छ्म्व छ्य छ्य्न छ्य्र छ्र छ्र्म छ्र्य छ्र्व छ्ल छ्ल्म छ्ल्य छ्ल्र छ्ळ छ्व छ्व्न छ्व्य छ्व्र छ्व्ल छ्श छ्श्च छ्श्ञ छ्श्न छ्श्म छ्श्य छ्श्र छ्श्ल छ्श्व छ्श्श छ्ष छ्ष्य छ्ष्र छ्स छ्स्य छ्स्र छ्ह
ज् ज्क ज्क्ष ज्ख ज्ग ज्घ ज्ङ ज्च ज्छ ज्ज ज्ज्ञ ज्ज्न ज्ज्ब ज्ज्भ ज्ज्म ज्ज्र ज्ज्ल ज्ज्व ज्ज्श ज्झ ज्ञ ज्ञ्क ज्ञ्क्ष ज्ञ्ख ज्ञ्ग ज्ञ्घ ज्ञ्ङ ज्ञ्च ज्ञ्छ ज्ञ्ज ज्ञ्ज्ञ ज्ञ्झ ज्ञ्ञ ज्ञ्ञ्न ज्ञ्ञ्ब ज्ञ्ञ्र ज्ञ्ञ्ल ज्ञ्ञ्व ज्ञ्ट ज्ञ्ठ ज्ञ्ड ज्ञ्ढ ज्ञ्ण ज्ञ्त ज्ञ्थ ज्ञ्द ज्ञ्ध ज्ञ्न ज्ञ्प ज्ञ्फ ज्ञ्ब ज्ञ्भ ज्ञ्म ज्ञ्य ज्ञ्र ज्ञ्र्च ज्ञ्र्ज ज्ञ्र्ज्ञ ज्ञ्र्ञ ज्ञ्र्न ज्ञ्ल ज्ञ्ळ ज्ञ्व ज्ञ्श ज्ञ्ष ज्ञ्स ज्ञ्ह ज्ट ज्ठ ज्ड ज्ढ ज्ण ज्त ज्थ ज्द ज्ध ज्न ज्प ज्फ ज्ब ज्ब्न ज्ब्र ज्भ ज्म ज्य ज्र ज्र्ज ज्र्ज्ञ ज्र्ञ ज्र्न ज्र्ल ज्ल ज्ळ ज्व ज्व्न ज्व्र ज्श ज्ष ज्स ज्ह
झ् झ्क झ्क्ष झ्ख झ्ग झ्घ झ्ङ झ्ज झ्ज्ञ झ्झ झ्ञ झ्ञ्न झ्ञ्र झ्ट झ्ठ झ्ड झ्ढ झ्ण झ्त झ्थ झ्द झ्ध झ्न झ्प झ्फ झ्ब झ्भ झ्म झ्य झ्र झ्ल झ्ळ झ्व झ्श झ्ष झ्स झ्ह
ञ् ञ्क ञ्क्त ञ्क्र ञ्क्ष ञ्ख ञ्ग ञ्घ ञ्ङ ञ्च ञ्च्क ञ्च्ङ ञ्च्च ञ्च्ञ ञ्च्न ञ्च्ब ञ्च्भ ञ्च्म ञ्च्य ञ्च्र ञ्च्ल ञ्च्व ञ्च्श ञ्छ ञ्ज ञ्ज्ञ ञ्ज्न ञ्ज्ब ञ्ज्भ ञ्ज्म ञ्ज्र ञ्ज्ल ञ्ज्व ञ्ज्श ञ्झ ञ्ञ ञ्ञ्न ञ्ञ्ब ञ्ञ्र ञ्ञ्ल ञ्ञ्व ञ्ट ञ्ठ ञ्ड ञ्ढ ञ्ण ञ्त ञ्थ ञ्द ञ्ध ञ्न ञ्प ञ्फ ञ्ब ञ्भ ञ्म ञ्य ञ्र ञ्र्च ञ्र्ज ञ्र्ज्ञ ञ्र्ञ ञ्र्न ञ्ल ञ्ळ ञ्व ञ्श ञ्ष ञ्स ञ्ह
ट् ट्क ट्क्क ट्क्च ट्क्छ ट्क्ञ ट्क्ट ट्क्ठ ट्क्ण ट्क्त ट्क्थ ट्क्न ट्क्प ट्क्फ ट्क्ब ट्क्म ट्क्य ट्क्र ट्क्र्य ट्क्ल ट्क्व ट्क्य ट्क्श ट्क्ष ट्क्ष्क ट्क्ष्ट ट्क्ष्ठ ट्क्ष्ण ट्क्ष्त ट्क्ष्थ ट्क्ष्न ट्क्ष्प ट्क्ष्फ ट्क्ष्म ट्क्ष्य ट्क्ष्र ट्क्ष्ल ट्क्ष्व ट्क्ष्ष ट्क्स ट्ख ट्ग ट्घ ट्ङ ट्ङ्य ट्ङ्र ट्ङ्व ट्च ट्च्क ट्च्ङ ट्च्च ट्च्छ ट्च्ञ ट्च्ट ट्च्ठ ट्च्ण ट्च्त ट्च्थ ट्च्न ट्च्प ट्च्फ ट्च्ब ट्च्म ट्च्य ट्च्र ट्च्र्य ट्च्ल ट्च्व ट्च्श ट्च्ष ट्च्स ट्छ ट्छ्य ट्छ्र ट्छ्व ट्ज ट्ज्ञ ट्झ ट्ञ ट्ञ्क ट्ञ्ख ट्ञ्ङ ट्ञ्च ट्ञ्छ ट्ञ्ञ ट्ञ्ट ट्ञ्ठ ट्ञ्ण ट्ञ्त ट्ञ्थ ट्ञ्न ट्ञ्प ट्ञ्फ ट्ञ्ब ट्ञ्म ट्ञ्य ट्ञ्र ट्ञ्र्य ट्ञ्ल ट्ञ्व ट्ञ्श ट्ञ्ष ट्ञ्स ट्ट ट्ट्य ट्ट्र ट्ट्व ट्ठ ट्ठ्य ट्ठ्र ट्ठ्व ट्ड ट्ड्य ट्ड्र ट्ड्व ट्ढ ट्ढ्य ट्ढ्र ट्ढ्व ट्ण ट्ण्ञ ट्ण्ट ट्ण्ठ ट्ण्ण ट्ण्न ट्ण्म ट्ण्र ट्ण्र्य ट्ण्ल ट्ण्व ट्त ट्त्क ट्त्ख ट्त्ङ ट्त्च ट्त्छ ट्त्ट ट्त्ठ ट्त्ण ट्त्त ट्त्थ ट्त्न ट्त्प ट्त्फ ट्त्ब ट्त्म ट्त्य ट्त्र ट्त्र्य ट्त्ल ट्त्व ट्त्व्य ट्त्श ट्त्ष ट्त्स ट्थ ट्थ्न ट्थ्ब ट्थ्य ट्थ्र ट्थ्र्य ट्थ्व ट्द ट्ध ट्न ट्न्क ट्न्ख ट्न्ङ ट्न्च ट्न्छ ट्न्ट ट्न्ठ ट्न्ण ट्न्त ट्न्थ ट्न्न ट्न्प ट्न्फ ट्न्म ट्न्य ट्न्र ट्न्र्य ट्न्ल ट्न्व ट्न्व्य ट्न्श ट्न्ष ट्न्स ट्प ट्प्क ट्प्ङ ट्प्ट ट्प्ठ ट्प्त ट्प्न ट्प्म ट्प्य ट्प्र ट्प्र्य ट्प्व ट्फ ट्फ्न ट्फ्म ट्फ्य ट्फ्र ट्फ्र्य ट्फ्व ट्फ्व्य ट्ब ट्ब्न ट्ब्य ट्ब्र ट्ब्ल ट्भ ट्म ट्म्च ट्म्ज ट्म्ज्ञ ट्म्ञ ट्म्न ट्म्ब ट्म्म ट्म्य ट्म्र ट्म्र्य ट्म्ल ट्म्व ट्य ट्य्न ट्य्र ट्य्र्य ट्र ट्र्म ट्र्य ट्र्व ट्ल ट्ल्म ट्ल्य ट्ल्र ट्ल्र्य ट्ळ ट्व ट्व्न ट्व्य ट्व्र ट्व्र्य ट्व्ल ट्श ट्श्क ट्श्ङ ट्श्च ट्श्छ ट्श्ञ ट्श्ट ट्श्ठ ट्श्ण ट्श्त ट्श्थ ट्श्न ट्श्व ट्श्प ट्श्फ ट्श्म ट्श्य ट्श्र ट्श्र्य ट्श्ल ट्श्व ट्श्व्य ट्श्श ट्श्ष ट्ष ट्ष्क ट्ष्ङ ट्ष्ट ट्ष्ठ ट्ष्त ट्ष्न ट्ष्म ट्ष्य ट्ष्र ट्ष्र्य ट्ष्व ट्स ट्स्क ट्स्क्ष ट्स्च ट्स्छ ट्स्ट ट्स्ठ ट्स्ण ट्स्त ट्स्थ ट्स्न ट्स्प ट्स्फ ट्स्ब ट्स्म ट्स्य ट्स्र ट्स्र्य ट्स्ल ट्स्व ट्स्स ट्ह ट्ह्य ट्ह्र
ठ् ठ्क ठ्क्ष ठ्ख ठ्ग ठ्घ ठ्ङ ठ्ङ्य ठ्ङ्र ठ्ङ्व ठ्च ठ्छ ठ्ज ठ्ज्ञ ठ्झ ठ्ञ ठ्ञ्न ठ्ञ्र ठ्ट ठ्ट्य ठ्ट्र ठ्ट्व ठ्ठ ठ्ठ्य ठ्ठ्र ठ्ठ्व ठ्ड ठ्ड्य ठ्ड्र ठ्ड्व ठ्ढ ठ्ढ्य ठ्ढ्र ठ्ढ्व ठ्ण ठ्ण्य ठ्ण्र ठ्ण्व ठ्त ठ्थ ठ्द ठ्ध ठ्न ठ्न्न ठ्न्य ठ्न्र ठ्न्व ठ्प ठ्प्य ठ्प्र ठ्फ ठ्ब ठ्ब्न ठ्ब्य ठ्ब्र ठ्ब्ल ठ्भ ठ्म ठ्म्च ठ्म्ज ठ्म्ज्ञ ठ्म्ञ ठ्म्न ठ्म्ब ठ्म्म ठ्म्य ठ्म्र ठ्म्ल ठ्म्व ठ्य ठ्य्न ठ्य्र ठ्र ठ्र्म ठ्र्य ठ्र्व ठ्ल ठ्ल्म ठ्ल्य ठ्ल्र ठ्ळ ठ्व ठ्व्न ठ्व्य ठ्व्र ठ्व्ल ठ्श ठ्श्र ठ्ष ठ्ष्य ठ्ष्र ठ्स ठ्स्य ठ्स्र ठ्ह ठ्ह्य ठ्ह्र
ड् ड्क ड्क्ष ड्ख ड्ग ड्ग्ग ड्ग्घ ड्ग्ङ ड्ग्ज ड्ग्ज्ञ ड्ग्ञ ड्ग्ड ड्ग्ढ ड्ग्ण ड्ग्द ड्ग्ध ड्ग्न ड्ग्ब ड्ग्भ ड्ग्म ड्ग्य ड्ग्र ड्ग्ल ड्ग्व ड्ग्व्य ड्ग्ह ड्घ ड्घ्ञ ड्घ्ण ड्घ्न ड्घ्ब ड्घ्म ड्घ्य ड्घ्र ड्घ्र्य ड्घ्ल ड्घ्व ड्ङ ड्ङ्य ड्ङ्र ड्ङ्व ड्च ड्छ ड्ज ड्ज्ग ड्ज्घ ड्ज्ङ ड्ज्ज ड्ज्ज्ञ ड्ज्झ ड्ज्ञ ड्ज्ञ्य ड्ज्ञ्र ड्ज्ञ्व ड्ज्ड ड्ज्ढ ड्ज्ण ड्ज्द ड्ज्ध ड्ज्न ड्ज्ब ड्ज्भ ड्ज्म ड्ज्य ड्ज्र ड्ज्र्य ड्ज्ल ड्ज्व ड्ज्श ड्ज्ष ड्ज्स ड्ज्ह ड्झ ड्झ्य ड्झ्र ड्झ्र्य ड्ञ ड्ञ्क ड्ञ्ख ड्ञ्ग ड्ञ्घ ड्ञ्ङ ड्ञ्च ड्ञ्छ ड्ञ्ज ड्ञ्ज्ञ ड्ञ्झ ड्ञ्ञ ड्ञ्ट ड्ञ्ठ ड्ञ्ड ड्ञ्ढ ड्ञ्ण ड्ञ्त ड्ञ्थ ड्ञ्द ड्ञ्ध ड्ञ्न ड्ञ्प ड्ञ्फ ड्ञ्ब ड्ञ्भ ड्ञ्म ड्ञ्य ड्ञ्र ड्ञ्र्य ड्ञ्ल ड्ञ्व ड्ञ्श ड्ञ्ष ड्ञ्स ड्ञ्ह ड्ट ड्ट्य ड्ट्र ड्ट्व ड्ठ ड्ठ्य ड्ठ्र ड्ठ्व ड्ड ड्ड्य ड्ड्र ड्ड्व ड्ढ ड्ढ्य ड्ढ्र ड्ढ्व ड्ण ड्ण्ज्ञ ड्ण्ञ ड्ण्ड ड्ण्ढ ड्ण्ण ड्ण्न ड्ण्म ड्ण्य ड्ण्र ड्ण्र्य ड्ण्ल ड्ण्व ड्ण्ष ड्त ड्त्ब ड्त्य ड्त्र ड्त्व ड्थ ड्द ड्द्ग ड्द्घ ड्द्द ड्द्ध ड्द्न ड्द्ब ड्द्भ ड्द्म ड्द्य ड्द्र ड्द्र्य ड्द्व ड्द्व्य ड्ध ड्ध्न ड्ध्ब ड्ध्म ड्ध्य ड्ध्र ड्ध्र्य ड्ध्ल ड्ध्व ड्न ड्न्क ड्न्ख ड्न्ग ड्न्घ ड्न्ङ ड्न्च ड्न्छ ड्न्ज ड्न्ज्ञ ड्न्झ ड्न्ञ ड्न्ट ड्न्ठ ड्न्ड ड्न्ढ ड्न्ण ड्न्त ड्न्थ ड्न्द ड्न्ध ड्न्न ड्न्प ड्न्फ ड्न्ब ड्न्भ ड्न्म ड्न्य ड्न्र ड्न्र्य ड्न्ल ड्न्व ड्न्व्य ड्न्श ड्न्ष ड्न्स ड्न्ह ड्प ड्प्य ड्प्र ड्प्व ड्फ ड्ब ड्ब्ग ड्ब्घ ड्ब्ङ ड्ब्ज ड्ब्ज्ञ ड्ब्झ ड्ब्ञ ड्ब्ड ड्ब्ढ ड्ब्ण ड्ब्द ड्ब्ध ड्ब्न ड्ब्ब ड्ब्भ ड्ब्म ड्ब्य ड्ब्र ड्ब्र्य ड्ब्ल ड्ब्व ड्ब्श ड्ब्ष ड्ब्स ड्ब्ह ड्भ ड्भ्न ड्भ्ब ड्भ्म ड्भ्य ड्भ्र ड्भ्र्य ड्भ्ल ड्भ्व ड्भ्व्य ड्म ड्म्च ड्म्ज ड्म्ज्ञ ड्म्ञ ड्म्न ड्म्ब ड्म्म ड्म्य ड्म्र ड्म्र्य ड्म्ल ड्म्व ड्य ड्य्न ड्य्य ड्य्र ड्य्र्य ड्य्व ड्र ड्र्म ड्र्य ड्र्व ड्ल ड्ल्म ड्ल्य ड्ल्र ड्ल्र्य ड्ल्व ड्ळ ड्व ड्व्ग ड्व्घ ड्व्ङ ड्व्ज ड्व्ज्ञ ड्व्झ ड्व्ञ ड्व्ड ड्व्ढ ड्व्ण ड्व्द ड्व्ध ड्व्न ड्व्ब ड्व्भ ड्व्म ड्व्य ड्व्र ड्व्र्य ड्व्ल ड्व्व ड्व्श ड्व्ष ड्व्स ड्व्ह ड्श ड्श्ञ ड्श्ण ड्श्न ड्श्म ड्श्य ड्श्र ड्श्ल ड्श्व ड्ष ड्ष्य ड्ष्र ड्ष्व ड्स ड्स्य ड्स्र ड्ह ड्ह्ण ड्ह्न ड्ह्ब ड्ह्म ड्ह्य ड्ह्र ड्ह्र ड्ह्र्य ड्ह्ल ड्ह्व
ढ् ढ्क ढ्क्ष ढ्ख ढ्ग ढ्घ ढ्ङ ढ्ङ्य ढ्ङ्र ढ्ङ्व ढ्च ढ्छ ढ्ज ढ्ज्ञ ढ्झ ढ्ञ ढ्ञ्न ढ्ञ्र ढ्ट ढ्ट्य ढ्ट्र ढ्ट्व ढ्ठ ढ्ठ्य ढ्ठ्र ढ्ठ्व ढ्ड ढ्ड्य ढ्ड्र ढ्ड्व ढ्ढ ढ्ढ्य ढ्ढ्र ढ्ढ्व ढ्ण ढ्ण्य ढ्ण्र ढ्ण्व ढ्त ढ्थ ढ्द ढ्ध ढ्न ढ्न्न ढ्न्य ढ्न्र ढ्न्व ढ्प ढ्प्य ढ्प्र ढ्फ ढ्ब ढ्ब्न ढ्ब्य ढ्ब्र ढ्ब्ल ढ्भ ढ्म ढ्म्च ढ्म्ज ढ्म्ज्ञ ढ्म्ञ ढ्म्न ढ्म्ब ढ्म्म ढ्म्य ढ्म्र ढ्म्ल ढ्म्व ढ्य ढ्य्न ढ्य्र ढ्र ढ्र्म ढ्र्य ढ्र्व ढ्ल ढ्ल्म ढ्ल्य ढ्ल्र ढ्ळ ढ्व ढ्व्न ढ्व्य ढ्व्र ढ्व्ल ढ्श ढ्श्य ढ्श्र ढ्ष ढ्ष्य ढ्ष्र ढ्स ढ्स्य ढ्स्र ढ्ह ढ्ह्य ढ्ह्र
ण् ण्क ण्क्ष ण्ख ण्ग ण्घ ण्ङ ण्च ण्छ ण्ज ण्ज्ञ ण्झ ण्ञ ण्ट ण्ठ ण्ड ण्ढ ण्ण ण्त ण्थ ण्द ण्ध ण्न ण्प ण्फ ण्ब ण्भ ण्म ण्र ण्ल ण्ळ ण्व ण्श ण्ष ण्स ण्ह
त् त्क त्क्ज त्क्ञ त्क्त त्क्र त्क्ष त्ख त्ग त्घ त्ङ त्च त्च्क त्च्न त्च्ब त्च्भ त्च्म त्च्य त्च्र त्च्व त्च्श त्छ त्ज त्ज्ञ त्झ त्ञ त्ञ्न त्ञ्ब त्ञ्र त्ञ्व त्ट त्ठ त्ड त्ढ त्ण त्त त्त्च त्त्ज त्त्ज्ञ त्त्त्त त्त्न त्त्ब त्त्र त्त्ल त्त्व त्थ त्द त्ध त्न त्प त्फ त्ब त्भ त्म त्य त्र त्ल त्ळ त्व त्श त्ष त्स त्ह
थ् थ्क थ्क्ष थ्ख थ्ग थ्घ थ्ङ थ्च थ्छ थ्ज थ्ज्ञ थ्झ थ्ञ थ्ञ्न थ्ञ्र थ्ट थ्ठ थ्ड थ्ढ थ्ण थ्त थ्थ थ्द थ्ध थ्न थ्प थ्फ थ्ब थ्भ थ्म थ्य थ्र थ्ल थ्ळ थ्व थ्श थ्ष थ्स थ्ह
द् द्क द्क्ष द्ख द्ग द्ग्ञ द्ग्ण द्ग्न द्ग्न्य द्ग्ब द्ग्म द्ग्य द्ग्र द्ग्र्य द्ग्ल द्ग्व द्ग्व्य द्ग्ह द्घ द्घ्ञ द्घ्ण द्घ्न द्घ्न्य द्घ्ब द्घ्म द्घ्य द्घ्र द्घ्र्य द्घ्ल द्घ्व द्घ्व्य द्ङ द्ङ्य द्ङ्र द्ङ्व द्च द्छ द्ज द्ज्ग द्ज्घ द्ज्ङ द्ज्ज द्ज्झ द्ज्ञ द्ज्ड द्ज्ढ द्ज्ण द्ज्द द्ज्ध द्ज्न द्ज्ब द्ज्भ द्ज्म द्ज्य द्ज्र द्ज्ल द्ज्व द्ज्ह द्झ द्ञ द्ट द्ट्य द्ट्र द्ट्व द्ठ द्ठ्य द्ठ्र द्ठ्व द्ड द्ड्य द्ड्र द्ड्व द्ढ द्ढ्य द्ढ्र द्ढ्व द्ण द्ण्य द्ण्र द्त द्त्य द्त्र द्थ द्द द्द्ग द्द्घ द्द्ध द्द्न द्द्न्य द्द्ब द्द्भ द्द्म द्द्य द्द्र द्द्र्य द्द्ल द्द्व द्द्व्य द्ध द्ध्न द्ध्न्य द्ध्ब द्ध्म द्ध्य द्ध्म द्ध्र्य द्ध्ल द्ध्व द्ध्व्य द्न द्न्ग द्न्घ द्न्ङ द्न्द द्न्ध द्न्न द्न्ब द्न्भ द्न्म द्न्य द्न्र द्न्र्य द्न्ल द्न्व द्न्व्य द्प द्प्र द्फ द्ब द्ब्न द्ब्न्य द्ब्म द्ब्य द्ब्र द्ब्र्य द्ब्ल द्भ द्भ्न द्भ्ब द्भ्म द्भ्य द्भ्र द्भ्र्य द्भ्ल द्भ्व द्भ्व्य द्म द्म्च द्म्ज द्म्ज्ञ द्म्ञ द्म्न द्म्ब द्म्र द्म्ल द्म्व द्य द्य्न द्य्र द्र द्र्ब द्र्म द्र्य द्र्व द्र्व्य द्ल द्ळ द्व द्व्न द्व्न्य द्व्म द्व्य द्व्र द्व्र्य द्व्ल द्श द्ष द्ष्र द्स द्ह द्ह्य द्ह्र
ध् ध्क ध्क्ष ध्ख ध्ग ध्घ ध्ङ ध्च ध्छ ध्ज ध्ज्ञ ध्झ ध्ञ ध्ञ्न ध्ञ्ब ध्ञ्र ध्ञ्ल ध्ञ्व ध्ट ध्ठ ध्ड ध्ढ ध्ण ध्त ध्थ ध्द ध्ध ध्न ध्प ध्फ ध्ब ध्भ ध्म ध्य ध्र ध्ल ध्ळ ध्व ध्श ध्ष ध्स ध्ह
न् न्क न्क्ज न्क्ञ न्क्त न्क्र न्क्ष न्ख न्ग न्घ न्ङ न्च न्च्क न्च्न न्च्ब न्च्भ न्च्म न्च्य न्च्र न्च्व न्च्श न्छ न्ज न्ज्ञ न्ज्न न्ज्ब न्ज्भ न्ज्म न्ज्र न्ज्ल न्ज्व न्ज्श न्झ न्ञ न्ञ्न न्ञ्ब न्ञ्र न्ञ्ल न्ञ्व न्ट न्ठ न्ड न्ढ न्ण न्त न्त्च न्त्ज्ञ न्त्ञ न्त्त न्त्न न्त्ब न्त्र न्त्ल न्त्व न्थ न्द न्ध न्न न्प न्फ न्ब न्भ न्म न्य न्र न्र्च न्र्ज न्र्ज्ञ न्र्ञ न्र्न न्ल न्ळ न्व न्श न्ष न्स न्ह
प् प्क प्क्च प्क्ज प्क्ञ प्क्त प्क्र प्क्ष प्ख प्ग प्घ प्ङ प्च प्च्क प्च्न प्च्ब प्च्य प्च्र प्च्व प्च्श प्छ प्ज प्ज्ञ प्झ प्ञ प्ञ्न प्ञ्ब प्ञ्र प्ञ्ल प्ञ्व प्ट प्ट्क प्ट्च प्ट्छ प्ट्ञ प्ट्ट प्ट्ठ प्ट्ण प्ट्त प्ट्न प्ट्प प्ट्फ प्ट्ब प्ट्म प्ट्य प्ट्र प्ट्ल प्ट्व प्ट्ष प्ठ प्ठ्क प्ठ्च प्ठ्छ प्ठ्ञ प्ठ्ट प्ठ्ठ प्ठ्ण प्ठ्त प्ठ्न प्ठ्प प्ठ्फ प्ठ्ब प्ठ्म प्ठ्य प्ठ्र प्ठ्ल प्ठ्व प्ठ्ष प्ड प्ढ प्ढ्य प्ढ्र प्ढ्व प्ण प्त प्त्त प्त्न प्त्व प्त्र प्त्व प्थ प्द प्ध प्न प्प प्फ प्ब प्भ प्म प्र प्य प्ल प्ळ प्श प्ष प्स प्ह
फ् फ्क फ्क्ष फ्ख फ्ग फ्घ फ्ङ फ्च फ्छ फ्ज फ्ज्ञ फ्झ फ्ञ फ्ञ्न फ्ञ्ब फ्ञ्र फ्ञ्ल फ्ञ्व फ्ट फ्ठ फ्ड फ्ढ फ्ण फ्त फ्थ फ्द फ्ध फ्न फ्न्म फ्न्य फ्न्र फ्प फ्फ फ्ब फ्ब्न फ्ब्म फ्ब्य फ्ब्र फ्भ फ्म फ्म्च फ्म्ज फ्म्ज्ञ फ्म्ञ फ्म्न फ्म्ल फ्म्व फ्य फ्य्न फ्य्र फ्य्ल फ्र फ्र्क फ्र्ङ फ्र्च फ्र्ज फ्र्ज्ञ फ्र्ञ फ्र्ड फ्र्न फ्र्ब फ्र्म फ्र्य फ्र्ल फ्र्व फ्ल फ्ल्म फ्ल्य फ्ळ फ्व फ्व्न फ्व्म फ्व्य फ्व्र फ्श फ्ष फ्स फ्ह
ब् ब्क ब्क्ष ब्ख ब्ग ब्घ ब्ङ ब्च ब्ज ब्ज्ञ ब्ज्न ब्ज्ब ब्ज्र ब्ज्व ब्ज्श ब्झ ब्ञ ब्ञ्न ब्ञ्र ब्ट ब्ठ ब्ड ब्ढ ब्ण ब्त ब्थ ब्द ब्ध ब्न ब्प ब्फ ब्ब ब्ब्न ब्ब्र ब्भ ब्म ब्य ब्र ब्र्च ब्र्ज ब्र्ज्ञ ब्र्ञ ब्र्न ब्र्ब ब्ल ब्ळ ब्व ब्व्न ब्व्र ब्श ब्ष ब्स ब्ह
भ् भ्क भ्क्ष भ्ख भ्ग भ्घ भ्ङ भ्च भ्छ भ्ज भ्झ भ्ञ भ्ञ्न भ्ञ्ब भ्ञ्र भ्ञ्ल भ्ञ्व भ्ट भ्ठ भ्ड भ्ढ भ्ण भ्त भ्थ भ्द भ्ध भ्न भ्प भ्फ भ्ब भ्भ भ्म भ्य भ्र भ्ल भ्ळ भ्व भ्श भ्ष भ्स भ्ह
म् म्क म्क्ज म्क्ञ म्क्त म्क्र म्क्ष म्ख म्ग म्घ म्ङ म्च म्च्क म्च्न म्च्ब म्च्भ म्च्म म्च्य म्च्र म्च्व म्च्श म्छ म्ज म्ज्ञ म्ज्न म्ज्ब म्ज्र म्ज्व म्ज्श म्झ म्ञ म्ञ्न म्ञ्र म्ञ्ल म्ञ्व म्ट म्ठ म्ड म्ढ म्ण म्त म्थ म्द म्ध म्न म्प म्फ म्ब म्भ म्म म्य म्र म्ल म्ळ म्व म्श म्ष म्स म्ह
य् य्क य्क्ष य्ख य्ग य्घ य्ङ य्च य्छ य्ज य्ज्ञ य्झ य्ञ य्ञ्न य्ञ्ब य्ञ्र य्ञ्ल य्ञ्व य्ट य्ठ य्ड य्ढ य्ण य्त य्थ य्द य्ध य्न य्प य्फ य्ब य्भ य्म य्य य्र य्ल य्ळ य्व य्श य्ष य्स य्ह
र् र्क र्क्ष र्ख र्ग र्घ र्ङ र्च र्छ र्ज र्ज्ञ र्झ र्ञ र्ट र्ठ र्ड र्ढ र्ण र्त र्थ र्द र्ध र्न र्प र्फ र्ब र्भ र्म र्य र्र र्ल र्ळ र्व र्श र्ष र्स र्ह
ल् ल्क ल्क्ज ल्क्ञ ल्क्त ल्क्र ल्क्ष ल्ख ल्ग ल्घ ल्ङ ल्च ल्च्क ल्च्न ल्च्ब ल्च्भ ल्च्म ल्च्य ल्च्र ल्च्व ल्च्श ल्छ ल्ज ल्ज्ञ ल्ज्न ल्ज्ब ल्ज्भ ल्ज्म ल्ज्र ल्ज्ल ल्ज्व ल्ज्श ल्झ ल्ञ ल्ञ्न ल्ञ्ब ल्ञ्र ल्ञ्ल ल्ञ्व ल्ट ल्ठ ल्ड ल्ढ ल्ण ल्त ल्थ ल्द ल्ध ल्न ल्प ल्फ ल्ब ल्भ ल्म ल्य ल्र ल्ल ल्ळ ल्व ल्श ल्ष ल्स ल्ह
ळ् ळ्क ळ्क्ष ळ्ख ळ्ग ळ्घ ळ्ङ ळ्च ळ्छ ळ्ज ळ्ज्ञ ळ्झ ळ्ञ ळ्ट ळ्ठ ळ्ड ळ्ढ ळ्ण ळ्प ळ्फ ळ्ब ळ्भ ळ्म ळ्य ळ्र ळ्ल ळ्ळ ळ्व ळ्श ळ्ष ळ्स ळ्ह
व् व्क वव्क्ष व्ख व्ग व्घ व्ङ व्च व्छ व्ज व्ज्ञ व्ज्न व्ज्ब व्ज्र व्ज्व व्ज्श व्झ व्ञ व्ञ्न व्ञ्र व्ट व्ठ व्ड व्ढ व्ण व्त व्थ व्द व्ध व्न व्प व्फ व्ब व्ब्न व्ब्र व्भ व्म व्य व्र व्र्च व्र्ज व्र्ज्ञ व्र्ञ व्र्न व्र्ब व्र्व व्ल व्ळ व्व व्श व्ष व्स व्ह
श् श्क श्क्ष श्ख श्ग श्घ श्ङ श्च श्च्क श्च्ङ श्च्च श्च्ञ श्च्न श्च्ब श्च्भ श्च्म श्च्य श्च्र श्च्ल श्च्व श्च्श श्छ श्ज श्ज्ञ श्झ श्ञ श्ञ्न श्ञ्ब श्ञ्र श्ञ्ल श्ञ्व श्ट श्ठ श्ड श्ढ श्ण श्त श्थ श्द श्ध श्न श्प श्फ शब श्भ श्म श्र श्ल श्ळ श्व श्व्न श्व्र श्श श्ष श्स श्ह
ष् ष्क ष्क्ज ष्क्ञ ष्क्त ष्क्र ष्क्ष ष्ख ष्ग ष्घ ष्ङ ष्च ष्छ ष्ज ष्ज्ञ ष्झ ष्ञ ष्ञ्न ष्ञ्ब ष्ञ्र ष्ञ्ल ष्ञ्व ष्ट ष्ट्क ष्ट्च ष्ट्छ ष्ट्ञ ष्ट्ट ष्ट्ठ ष्ट्ण ष्ट्त ष्ट्न ष्ट्प ष्ट्फ ष्ट्ब ष्ट्म ष्ट्य ष्ट्र ष्ट्ल ष्ट्व ष्ट्ष ष्ठ ष्ठ्क ष्ठ्च ष्ठ्छ ष्ठ्ञ ष्ठ्ट ष्ठ्ठ ष्ठ्ण ष्ठ्त ष्ठ्न ष्ठ्प ष्ठ्फ ष्ठ्ब ष्ठ्म ष्ठ्य ष्ठ्र ष्ठ्ल ष्ठ्व ष्ठ्ष ष्ड ष्ढ ष्ढ्य ष्ढ्र ष्ढ्व ष्ण ष्त ष्त्त ष्त्न ष्त्ब ष्त्र ष्त्व ष्थ ष्द ष्ध ष्न ष्प ष्फ ष्ब ष्भ ष्म ष्य ष्र ष्ल ष्ळ ष्व ष्श ष्ष ष्स ष्ह
स् स्क स्क्ज स्क्ञ स्क्त स्क्र स्क्ष स्ख स्ग स्घ स्ङ स्च स्च्क स्च्न स्च्ब स्च्भ स्च्म स्च्य स्च्र स्च्व स्च्श स्छ स्ज स्ज्ञ स्ज्न स्ज्ब स्ज्र स्ज्ल स्ज्व स्ज्श स्झ स्ञ स्ञ्न स्ञ्ब स्ञ्र स्ञ्ल स्ञ्व स्ट स्ठ स्ड स्ढ स्ण स्त स्थ स्द स्ध स्न स्प स्फ स्ब स्भ स्म स्य स्र स्ल स्ळ स्व स्श स्ष स्स स्ह
ह् ह्क ह्क्ष ह्ख ह्ग ह्घ ह्ङ ह्च ह्छ ह्ज ह्ज्ञ ह्ज्न ह्ज्ब ह्ज्भ ह्ज्म ह्ज्र ह्ज्ल ह्ज्व ब्झ ब्ञ ब्ञ्न ह्ञ्र ह्ठ ह्ठ ह्ड ह्ढ ह्ण ह्ण्म ह्ण्य ह्त ह्थ ह्द ह्ध ह्न ह्प ह्फ ह्ब ह्ब्म ह्ब्य ह्भ ह्म ह्म्च ह्म्ज ह्म्ज्ञ ह्म्ञ ह्म्न ह्म्ब ह्म्र ह्म्ल ह्म्व ह्य ह्य्र ह्र ह्र्म ह्र्य ह्ल ह्ल्म ह्ल्य ह्ळ ह्व ह्व्म ह्व्य ह्श ह्ष ह्स ह्ह


देवनागरी लिपि के गुण[संपादित करें]

देवनागरी के वर्णों के वर्गीकरण की तालिका
  • भारतीय भाषाओं के लिये वर्णों की पूर्णता एवं सम्पन्नता (५२ वर्ण, न बहुत अधिक न बहुत कम)।
  • एक ध्वनि के लिये एक सांकेतिक चिह्न -- जैसा बोलें वैसा लिखें।
  • एक सांकेतिक चिह्न द्वारा केवल एक ध्वनि का निरूपण -- जैसा लिखें वैसा पढ़ें।
उपरोक्त दोनों गुणों के कारण ब्राह्मी लिपि का उपयोग करने वाली सभी भारतीय भाषाएँ 'स्पेलिंग की समस्या' से मुक्त हैं।
  • स्वर और व्यंजन में तर्कसंगत एवं वैज्ञानिक क्रम-विन्यास - देवनागरी के वर्णों का क्रमविन्यास उनके उच्चारण के स्थान (ओष्ठ्य, दन्त्य, तालव्य, मूर्धन्य आदि) को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ण-क्रम के निर्धारण में भाषा-विज्ञान के कई अन्य पहलुओ का भी ध्यान रखा गया है। देवनागरी की वर्णमाला (वास्तव में, ब्राह्मी से उत्पन्न सभी लिपियों की वर्णमालाएँ) एक अत्यन्त तर्कपूर्ण ध्वन्यात्मक क्रम (phonetic order) में व्यवस्थित है। यह क्रम इतना तर्कपूर्ण है कि अन्तरराष्ट्रीय ध्वन्यात्मक संघ (IPA) ने अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला के निर्माण के लिये मामूली परिवर्तनों के साथ इसी क्रम को अंगीकार कर लिया।
  • वर्णों का प्रत्याहार रूप में उपयोग : माहेश्वर सूत्र में देवनागरी वर्णों को एक विशिष्ट क्रम में सजाया गया है। इसमें से किसी वर्ण से आरम्भ करके किसी दूसरे वर्ण तक के वर्णसमूह को दो अक्षर का एक छोटा नाम दे दिया जाता है जिसे 'प्रत्याहार' कहते हैं। प्रत्याहार का प्रयोग करते हुए सन्धि आदि के नियम अत्यन्त सरल और संक्षिप्त ढंग से दिए गये हैं (जैसे, आद् गुणः)
  • मात्राओं की संख्या के आधार पर छन्दों का वर्गीकरण : यह भारतीय लिपियों की अद्भुत विशेषता है कि किसी पद्य के लिखित रूप से मात्राओं और उनके क्रम को गिनकर बताया जा सकता है कि कौन सा छन्द है। रोमन, अरबी एवं अन्य में यह गुण अप्राप्य है।
  • लिपि चिह्नों के नाम और ध्वनि मे कोई अन्तर नहीं (जैसे रोमन में अक्षर का नाम “बी” है और ध्वनि “ब” है)
  • लेखन और मुद्रण मे एकरूपता (रोमन, अरबी और फ़ारसी मे हस्तलिखित और मुद्रित रूप अलग-अलग हैं)
  • देवनागरी, 'स्माल लेटर" और 'कैपिटल लेटर' की अवैज्ञानिक व्यवस्था से मुक्त है।
  • मात्राओं का प्रयोग
के उपर विभिन्न मात्राएं लगाने के बाद का स्वरूप
  • अर्ध-अक्षर के रूप की सुगमता : खड़ी पाई को हटाकर - दायें से बायें क्रम में लिखकर तथा अर्द्ध अक्षर को ऊपर तथा उसके नीचे पूर्ण अक्षर को लिखकर - ऊपर नीचे क्रम में संयुक्ताक्षर बनाने की दो प्रकार की रीति प्रचलित है।
  • अन्य - बायें से दायें, शिरोरेखा, संयुक्ताक्षरों का प्रयोग, अधिकांश वर्णों में एक उर्ध्व-रेखा की प्रधानता, अनेक ध्वनियों को निरूपित करने की क्षमता आदि।[1]
  • भारतवर्ष के साहित्य में कुछ ऐसे रूप विकसित हुए हैं जो दायें-से-बायें अथवा बाये-से-दायें पढ़ने पर समान रहते हैं। उदाहरणस्वरूप केशवदास का एक सवैया लीजिये :
मां सस मोह सजै बन बीन, नवीन बजै सह मोस समा।
मार लतानि बनावति सारि, रिसाति वनाबनि ताल रमा ॥
मानव ही रहि मोरद मोद, दमोदर मोहि रही वनमा।
माल बनी बल केसबदास, सदा बसकेल बनी बलमा ॥
इस सवैया की किसी भी पंक्ति को किसी ओर से भी पढिये, कोई अंतर नही पड़ेगा।
सदा सील तुम सरद के दरस हर तरह खास।
सखा हर तरह सरद के सर सम तुलसीदास॥

देवनागरी पर महापुरुषों के विचार[संपादित करें]

आचार्य विनोबा भावे संसार की अनेक लिपियों के जानकार थे। उनकी स्पष्ट धारणा थी कि देवनागरी लिपि भारत ही नहीं, संसार की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है। अगर भारत की सब भाषाओं के लिए इसका व्यवहार चल पड़े तो सारे भारतीय एक दूसरे के बिल्कुल नजदीक आ जाएंगे। हिंदुस्तान की एकता में देवनागरी लिपि हिंदी से ही अधिक उपयोगी हो सकती है। अनन्त शयनम् अयंगार तो दक्षिण भारतीय भाषाओं के लिए भी देवनागरी की संभावना स्वीकार करते थे। सेठ गोविन्ददास इसे राष्ट्रीय लिपि घोषित करने के पक्ष में थे।

  • (१) हिन्दुस्तान की एकता के लिये हिन्दी भाषा जितना काम देगी, उससे बहुत अधिक काम देवनागरी लिपि दे सकती है।
आचार्य विनोबा भावे
  • (२) देवनागरी किसी भी लिपि की तुलना में अधिक वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित लिपि है।
सर विलियम जोन्स
  • (३) मानव मस्तिष्क से निकली हुई वर्णमालाओं में नागरी सबसे अधिक पूर्ण वर्णमाला है।
जान क्राइस्ट
  • (४) उर्दू लिखने के लिये देवनागरी लिपि अपनाने से उर्दू उत्कर्ष को प्राप्त होगी।
खुशवन्त सिंह
  • (५) The Devanagri alphabet is a splendid monument of phonological accuracy, in the sciences of language.
मोहन लाल विद्यार्थी - Indian Culture Through the Ages, p. 61
  • (६) एक सर्वमान्य लिपि स्वीकार करने से भारत की विभिन्न भाषाओं में जो ज्ञान का भंडार भरा है उसे प्राप्त करने का एक साधारण व्यक्ति को सहज ही अवसर प्राप्त होगा। हमारे लिए यदि कोई सर्व-मान्य लिपि स्वीकार करना संभव है तो वह देवनागरी है।
एम.सी.छागला
  • (७) प्राचीन भारत के महत्तम उपलब्धियों में से एक उसकी विलक्षण वर्णमाला है जिसमें प्रथम स्वर आते हैं और फिर व्यंजन जो सभी उत्पत्ति क्रम के अनुसार अत्यंत वैज्ञानिक ढंग से वर्गीकृत किये गए हैं। इस वर्णमाला का अविचारित रूप से वर्गीकृत तथा अपर्याप्त रोमन वर्णमाला से, जो तीन हजार वर्षों से क्रमशः विकसित हो रही थी, पर्याप्त अंतर है।
ए एल बाशम, "द वंडर दैट वाज इंडिया" के लेखक और इतिहासविद्

भारत के लिये देवनागरी का महत्व[संपादित करें]


विश्वलिपि के रूप में देवनागरी[संपादित करें]

Unbalanced scales.svg
इस लेख की निष्पक्षता विवादित है।
कृपया इसके वार्ता पृष्ठ पर चर्चा देखें।

बौद्ध संस्कृति से प्रभावित क्षेत्र नागरी के लिए नया नहीं है। चीन और जापान चित्रलिपि का व्यवहार करते हैं। इन चित्रों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण भाषा सीखने में बहुत कठिनाई होती है। देववाणी की वाहिका होने के नाते देवनागरी भारत की सीमाओं से बाहर निकलकर चीन और जापान के लिए भी समुचित विकल्प दे सकती है। भारतीय मूल के लोग संसार में जहां-जहां भी रहते हैं, वे देवनागरी से परिचय रखते हैं, विशेषकर मारीशस, सूरीनाम, फिजी, गायना, त्रिनिदाद, टुबैगो आदि के लोग। इस तरह देवनागरी लिपि न केवल भारत के अंदर सारे प्रांतवासियों को प्रेम-बंधन में बांधकर सीमोल्लंघन कर दक्षिण-पूर्व एशिया के पुराने वृहत्तर भारतीय परिवार को भी ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय‘ अनुप्राणित कर सकती है तथा विभिन्न देशों को एक अधिक सुचारू और वैज्ञानिक विकल्प प्रदान कर ‘विश्व नागरी‘ की पदवी का दावा इक्कीसवीं सदी में कर सकती है। उस पर प्रसार लिपिगत साम्राज्यवाद और शोषण का माध्यम न होकर सत्य, अहिंसा, त्याग, संयम जैसे उदात्त मानवमूल्यों का संवाहक होगा, असत्‌ से सत्‌, तमस्‌ से ज्योति तथा मृत्यु से अमरता की दिशा में।

लिपि-विहीन भाषाओं के लिये देवनागरी[संपादित करें]

Unbalanced scales.svg
इस लेख की निष्पक्षता विवादित है।
कृपया इसके वार्ता पृष्ठ पर चर्चा देखें।

दुनिया की कई भाषाओं के लिये देवनागरी सबसे अच्छा विकल्प हो सकती है क्योंकि यह यह बोलने की पूरी आजादी देता है। दुनिया की और किसी भी लिपि मे यह नही हो सकता है। इन्डोनेशिया, विएतनाम, अफ्रीका आदि के लिये तो यही सबसे सही रहेगा। अष्टाध्यायी को देखकर कोई भी समझ सकता है की दुनिया मे इससे अच्छी कोई भी लिपि नहीं है। अग‍र दुनिया पक्षपातरहित हो तो देवनागरी ही दुनिया की सर्वमान्य लिपि होगी क्योंकि यह पूर्णत: वैज्ञानिक है। अंग्रेजी भाषा में वर्तनी (स्पेलिंग) की विकराल समस्या के कारगर समाधान के लिये देवनागरी पर आधारित देवग्रीक लिपि प्रस्तावित की गयी है।

देवनागरी की वैज्ञानिकता[संपादित करें]

विस्तृत लेख देवनागरी की वैज्ञानिकता देखें।

जिस प्रकार भारतीय अंकों को उनकी वैज्ञानिकता के कारण विश्व ने सहर्ष स्वीकार कर लिया वैसे ही देवनागरी भी अपनी वैज्ञानिकता के कारण ही एक दिन विश्वनागरी बनेगी।

देवनागरी के सम्पादित्र व अन्य सॉफ्टवेयर[संपादित करें]

इंटरनेट पर हिन्दी के साधन देखिये।

देवनागरी से अन्य लिपियों में रूपान्तरण[संपादित करें]

  • ITRANS (iTrans) निरूपण, देवनागरी को लैटिन (रोमन) में परिवर्तित करने का आधुनिकतम और अक्षत (lossless) तरीका है। (Online Interface to iTrans)
  • आजकल अनेक कम्प्यूटर प्रोग्राम उपलब्ध हैं जिनकी सहायता से देवनागरी में लिखे पाठ को किसी भी भारतीय लिपि में बदला जा सकता है।
  • कुछ ऐसे भी कम्प्यूटर प्रोग्राम हैं जिनकी सहायता से देवनागरी में लिखे पाठ को लैटिन, अरबी, चीनी, क्रिलिक, आईपीए (IPA) आदि में बदला जा सकता है। (ICU Transform Demo)
  • यूनिकोड के पदार्पण के बाद देवनागरी का रोमनीकरण (romanization) अब अनावश्यक होता जा रहा है। क्योंकि धीरे-धीरे कम्प्यूटर पर देवनागरी को (और अन्य लिपियों को भी) पूर्ण समर्थन मिलने लगा है।

देवनागरी यूनिकोड[संपादित करें]

  0 1 2 3 4 5 6 7 8 9 A B C D E F
U+090x
U+091x
U+092x
U+093x ि
U+094x
U+095x
U+096x
U+097x ॿ

कम्प्यूटर कुंजीपटल पर देवनागरी[संपादित करें]

इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल पर देवनागरी वर्ण (Windows, Solaris, Java)

[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]