आबूगीदा
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आबूगीदा ऐसी लिपि को कहा जाता है जिसमें व्यंजन और स्वर को एक ईकाई में लिखा जाये। उदाहरण के लिए देवनागरी एक आबूगीदा है, क्योंकि "क" के व्यंजन और "ओ" के स्वर को एक ही ईकाई में मिलाकर "को" लिखा जाता है। इसी तरह इथियोपिआ व इरित्रिया की गीइज़ लिपि में "ड" को "ደ" लिखा जाता है और यदि "डी" लिखना हो तो "ई" का स्वर इसी अक्षर में मिलाकर "ዲ" बन जाता है। इसके विपरीत अंग्रेज़ी में प्रयोग होने वाली रोमन लिपि एक आबूगीदा नहीं है, क्योंकि "क" (k) के साथ "ई" (i) जोड़ने पर भी यह दोनों अलग-अलग अक्षर ही रहते हैं, यानि कि "ki"। आबूगीदा गीइज़ भाषा से आया है। ब्राह्मी परिवार की सभी लिपियाँ आबूगीदा हैं।[1]
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सूची
[संपादित करें]- ब्राह्मी परिवार
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- असामी
- बाली
- बतक
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- चकमा
- चम
- देवनागरी
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- गुरुमुखी
- मङ्ग्यान
- जवानी
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- वट्टेऴुत्तु
- ज़नबज़ार वर्ग
- ज़्हाङ्ग - ज़्हुङ्ग लिपि
खरोष्ठी परिवार
मेरिओटिक
ग्येज़ परिवार
- कनाडा ऐबोरजीनी लिपि परिवार
- क्री-ओजिब्वे सिलेबिक्स
- ब्लॅकफुट सिलेबिक्स
- देने सिलेबिक्स
- इनुक्तितुत सिलेबिक्स
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ William Bright (2000:65–66): "A Matter of Typology: Alphasyllabaries and Abugidas". In: Studies in the Linguistic Sciences. Volume 30, Number 1, pages 63–71