नागरी लिपि सुधार समिति

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नागरी लिपि सुधार समिति की स्थापना १९३५ में काका कालेलकर की अध्यक्षता में हुई। उन्होने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी, मराठी तथा गुजराती के लिए एक ही लिपि बनाने की दिशा में कुछ सुझाव दिए।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

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बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]