भारत की विभिन्न भाषाओं की अलग-अलग लिपियाँ इस चित्र में प्रदर्शित हैं। इसमें असमिया/बंगाली लिपि का "क" अक्षर, देवनागरी का "क" अक्षर (जिसका प्रयोग बोडो, हिन्दी, मराठी, नेपाली आदि अनेक भाषाओं में होता है), गुजराती का "ક" अक्षर, गुरुमुखी का "ਕ" अक्षर, कन्नड़ का "ಕ" अक्षर, मलयालम का "ക" अक्षर, मैतेयी का "ꯀ" अक्षर (जो मैतै भाषा में प्रयुक्त होता है जिसे आधिकारिक रूप से मणिपुरी भाषा कहा जाता है), ओड़िया का "କ" अक्षर, फ़ारसी‑अरबी लिपि का "ک" अक्षर (जिसका प्रयोग कश्मीरी, सिन्धी एवं उर्दू में होता है), तमिऴ का "க" अक्षर, तेलुगु का "క" अक्षर तथा सन्ताल (ओल चिकी) का "ᱠ" अक्षर दिखाया गया है। बाएँ से दाएँ क्रम में ऊपरी पंक्ति में कन्नड़, गुजराती, फ़ारसी‑अरबी और तमिल अक्षर हैं; मध्य पंक्ति में मैतै, देवनागरी तथा असमिया/बंगाली अक्षर हैं; तथा निचली पंक्ति में मलयालम, ओड़िया, गुरुमुखी, तेलुगु और ओल चिकी/सन्ताल अक्षर प्रदर्शित हैं।
बंगाली लिपि(बंगाली: বাংলা লিপি) पूर्वी नागरी लिपि का एक परिमार्जित रूप है जिसे बांग्ला भाषा, असमिया या विष्णुप्रिया मणिपुरी लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है। पूर्वी नागरी लिपि का सम्बन्ध ब्राह्मी लिपि के साथ है। आधुनिक बांग्ला लिपि को चार्ल्स विल्किंस द्वारा 1778 में आधार दिया गया, जब उन्होंने इस लिपि के लिए पहली बार टाइपसेट का प्रयोग किया। असमिया एवं मणिपुरी लिखते समय कमोबेश इसी लिपि का प्रयोग थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, र अक्षर (बांग्ला/मणिपुरी: র; असमिया: ৰ ) एवं व (बांग्ला: अनुपलब्ध; असमिया/मणिपुरी: ৱ ) में भाषानुसार अन्तर दिखते हैं।