विसर्ग

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गायत्री मंत्र में तीन बार विसर्ग आया है।

'विसर्ग ( ) महाप्राण सूचक एक स्वर है। ब्राह्मी से उत्पन्न अधिकांश लिपियों में इसके लिये संकेत हैं। उदाहरण के लिये, रामः, प्रातः, अतः, सम्भवतः, आदि में अन्त में विसर्ग आया है।

प्रकार[संपादित करें]

विसर्ग के दो सहस्वनिक होते हैं-

  • (१) जिह्वामूलीय विसर्ग
  • (२) उपधमनीय