फ़िजी

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Matanitu Tu-Vaka-i-koya ko Viti
Fijī Ripablik

फ़िजी द्वीप समूह गणराज्य
ध्वज कुल चिह्न
राष्ट्रवाक्य: Rerevaka na Kalou ka Doka na Tui
ईश्वर से डरो और रानी का सम्मान करो
राष्ट्रगान: गॉड ब्लेस फ़िजी
राजधानी
और सबसे बडा़ नगर
सुवा
18°10′S 178°27′E / 18.167°S 178.45°E / -18.167; 178.45
राजभाषा(एँ) अंग्रेजी, बाउ फ़िजियन और हिन्दुस्तानी
वासीनाम फ़िजी द्वीपवासी, फ़िजियन
सरकार सैनिक नेत्तृत्व के साथ अनिर्वाचित जन सरकार
 -  फ़िजी की सर्वप्रमुख महारानी एलिजाबेथ द्वितीय1
 -  राष्ट्रपति रातु जोसेफ ईलोइलोवातू उल्वीवादू (जोसेफ ईलोइलो)
 -  प्रधानमंत्री कोमोडोर जोसिया फ्रांक बेईनीमारामा
स्वतन्त्रता संयुक्त राजशाही से
 -  दिनांक १० अक्तूबर १९७० 
क्षेत्रफल
 -  कुल १८,२७४ वर्ग किलोमीटर (१५५ वां)
७,०५६ वर्ग मील
 -  जल (%) नगण्य
जनसंख्या
 -  जुलाई २००६ जनगणना ९,०५,९४९ (१५६वां)
सकल घरेलू उत्पाद (पीपीपी) २००५ प्राक्कलन
 -  कुल $५.४४७ करोड़ (१४९ वाँ)
 -  प्रति व्यक्ति $६३७५ (९३ वां)
मानव विकास सूचकांक (२०१३) Straight Line Steady.svg ०.७२४[1]
उच्च · ८८वां
मुद्रा फ़िजी डॉलर (FJD)
समय मण्डल (यू॰टी॰सी॰+१२)
दूरभाष कूट ६७९
इंटरनेट टीएलडी .fj
1. अध्यक्षों के महान समिति मानित.

फ़िजी जो कि आधिकारिक रूप से फ़िजी द्वीप समूह गणराज्य (Fijian : Matanitu Tu-Vaka-i-koya ko Viti) के नाम से जाना जाता है, दक्षिण प्रशान्त महासागर के मेलानेशिया मे एक द्वीप देश है। यह न्यू ज़ीलैण्ड के नॉर्थ आईलैण्ड से करीब २००० किमी उत्तर-पूर्व मे स्थित है। इसके समीपवर्ती पड़ोसी राष्ट्रों मे पश्चिम की ओर वनुआतु, पूर्व में टोंगा और दक्षिण मे तुवालु हैं। १७वीं और १८वीं शताब्दी के दौरान डच एवं अंग्रेजी खोजकर्तओं ने फ़िजी की खोज की थी। १९७० तक फ़िजी एक अंग्रेजी उपनिवेश था। प्रचुर मात्रा मे वन, खनिज एवं जलीय स्रोतों के कारण फ़िजी प्रशान्त महासागर के द्वीपों मे सबसे उन्नत राष्ट्र है। वर्तमान मे पर्यटन एवं चीनी का निर्यात इसके विदेशी मुद्रा के सबसे बड़े स्रोत हैं। यहाँ की मुद्रा फ़िजी डॉलर है।

फ़िजी के अधिकांश द्वीप १५ करोड़ वर्ष पूर्व आरम्भ हुए ज्वालामुखीय गतिविधियों से गठित हुए। इस देश के द्वीपसमूह में कुल ३२२ द्वीप हैं, जिनमें से १०६ स्थायी रूप से बसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ लगभग ५०० क्षुद्र द्वीप हैं जो कुल मिला कर १८,३०० वर्ग किमी के क्षेत्रफल का निर्माण करते हैं। द्वीपसमूह के दो प्रमुख द्वीप विती लेवु और वनुआ लेवु हैं जिन पर देश की लगभग ८,५०,००० आबादी का ८७% निवास करती है।

नामकरण[संपादित करें]

फिजी द्वीप का मुख्य द्वीप विती लेवु के नाम से जाना जाता है और इसी नाम का उच्चारण इनके पड़ोसी द्वीप टोंगा के निवासी " फिसी " के रूप में करते थे जिसके कारण इसका नाम फिजी पड़ा है। यूरोपीय लोगों को फिजीवासियों के बारे मे सर्वप्रथम कैप्टन कुक के महासागरीय अभियानों के दौरान उनके दल के सदस्य रहे लेखको के लेखों के द्वारा पता चला। यह लेखक फिजीवासियों से पहले पहल टोंगा द्वीप पर मिले थे। इन लेखों में फिजी के मूल निवासियों को दुर्जेय योद्धा और क्रूर आदमखोरों के रूप में वर्णित किया गया था साथ ही उन्हें प्रशांत क्षेत्र में श्रेष्ठ वाहिकाओं (पोतों) के निर्माता लेकिन औसत नाविक के रूप मे भी दर्शाया गया है। वे अपने घर को विती कहते थे, लेकिन टोंगाओं ने इसे फिसी कहा और कैप्टन कुक ने जो एक विदेशी थे इनका उच्चारण फिजी किया और अब इन द्वीपों के नाम इसी नाम से जाना जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

फिजी के पहले निवासियों का आगमन यूरोपीय अन्वेषकों से बहुत पहले ही हो गया था जो की सत्राहवें शताब्दी मे फिजी आये थे। मिट्टी के बर्तनों की खुदाई से पता चलता है कि १००० ई.पू के आसपास भी फिजी में निवासी रहा करते थे, हालांकि अभी भी उनके फिजी प्रवास के विषय मे कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। डच अन्वेषक हाबिल टैस्मान सन १६४३ में जब दक्षिणी महाद्वीप की तलाश में निकले थे तब उन्होनें फिजी का दौरा किया था। उन्नीसवीं सदी तक यूरोपीय स्थायी रूप से द्वीप पर नहीं बसे थे।

१८७४ में ब्रिटेन ने इस द्वीप को अपने नियंत्रण मे लेकर इसे अपना एक उपनिवेश बना लिया। ब्रिटिश लोग भारतीय मजदूरों को यहाँ ठेके पर गन्ने के खेतों में काम करने के लिये ले आये। सन १९७० में इस देश को ब्रिटेन ने स्वतंत्रता दी। सन १९८७ में देश का लोकतांत्रिक शासन दो सैन्य विद्रोहों से बाधित हुआ क्योंकि पहले तख्तापलट में ऐसा माना गया की तत्कालीन सरकार मे भारतीय फ़ीजियों का प्रभुत्व था तथा दूसरे में ब्रिटिश राजशाही और गवर्नर जनरल की जगह एक गैर कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हुई। इसके बाद देश का नाम परिवर्तित करके 'फिजी गणराज्य' कर दिया गया (१९९७ में इसे बदलकर फ़िजी द्वीप समूह गणराज्य कर दिया गया)। इस तख्तापलट के कारण भारतीयों ने बडी़ संख्या मे देश छोड़ दिया जिसके परिणामस्वरूप मेलानेशियन्स का बहुमत हो गया।

1990 में नए संविधान के द्वारा राजनीतिक व्यवस्था मे मूल फ़ीजी लोगों के वर्चस्व को स्थापित किया गया। रंगभेद विरोधी समूह (GARD) का गठन एकतरफा थोपे गये संविधान का विरोध करने और 1970 के संविधान की बहाली के लिये किया गया। 1987 के तख्तापलट को अन्जाम देने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल सितिवेनी रेबूका नए संविधान के तहत हुये चुनाव के बाद 1992 में प्रधानमंत्री बने। तीन साल बाद, सितिवेनी रेबूका ने संविधान समीक्षा आयोग की स्थापना की, जिसके फलस्वरूप 1997 में एक नया संविधान अस्तित्व में आया साथ ही इस संविधान को फ़ीजी भारतीय और फ़ीजी स्वदेशी समुदायों के नेताओं का समर्थन भी मिला। फिजी को एक बार फिर से राष्ट्रमंडल के एक राष्ट्र के रूप में सवीकृति मिल गयी।

नई सहस्राब्दी में देश ने फिर ने फिर से एक तख्तापलट देखा। इस तख्तापलट में जॉर्ज स्पीट ने तत्कालीन प्रधान मंत्री महेंद्र चौधरी, की सरकार को उखाड़ फेंका जो 1997 के संविधान के बाद निर्वाचित हुयी थी। कमोडोर फ्रैंक बैनीमरामा ने राष्ट्रपति मारा के इस्तीफे जो संभवतः मजबूर मे दिया गया था के बाद कार्यकारी शक्ति ग्रहण कर लीं। सन 2000 में सुवा की महारानी एलिजाबेथ बैरकों में हुऐ दो सैनिक विद्रोहों ने फिजी को हिला कर रख दिया जब विद्रोही सैनिकों ने शहर में हुड़दंग मचा दिया। उच्च न्यायालय ने संविधान की बहाली का आदेश दिया और, सितंबर 2001 में, लोकतंत्र को बहाल करने के लिए आम चुनाव आयोजित किये गये, जो अंतरिम प्रधानमंत्री लेसीनिया करासे की सोकोसोको दुआवाता नी लेवेनिवानुआ पार्टी ने जीते।

सन 2005 में, बहुत विवादों के बीच, करासे सरकार ने एकता आयोग बनाने का एक प्रस्ताव रखा जिसके अन्तर्गत सन 2000 के तख्तापलट के पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के साथ इसके उत्तरदायी लोगों के लिए माफी की सिफारिश की गयी थी। इस प्रस्ताव का सेना और विशेष रूप से सेना के कमांडर फ्रैंक बैनीमारामा ने पुरजोर विरोध किया। फ्रैंक बैनीमारामा ने आलोचकों के साथ सहमति जताई कि वर्तमान सरकार के समर्थकों जिन्होने तख्तापलट में एक निर्णायक भूमिका निभाई को क्षमा दान देना अनुचित है। उन्होने सरकार पर अपने हमले मई से जुलाई तक लगातार जारी रखे जिसके कारण उनके संबंध सरकार से जो पहले से तनावपूर्ण थे और तनावपूर्ण हो गये। नवम्बर 2006 के अंत और दिसम्बर, 2006 के शुरू में, तख्तापलट फ़ीजी d' état के लिये बैनीमारामा मुख्य रूप से उत्तरदायी था। बैनीमारामा ने अपनी मांगों की सूची करासे सरकार को सोंप दी जिसके बाद करासे सरकार संसद में एक विधेयक लेकर आयी जिसमे 2000 में तख्तापलट के प्रयास मे शामिल लोगों को क्षमादान देने की पेशकश की गयी थी। उस ने करासे को 4 दिसम्बर तक इन माँगों को स्वीकार करने या अपने पद से इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दे दिया। करासे ने मागों को स्वीकार करने या इस्तीफा देने से साफ् इनकार कर दिया। 5 दिसम्बर को राष्ट्रपति रातु जोसेफा इलोइलो, जिन्होने बैनीमारामा से मुलाकात के बाद संसद भंग करने के एक कानूनी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये।

अपने आकार के हिसाब से, फिजी का सशस्त्र बलों का बेडा़ काफी बड़ा है और संयुक्त राष्ट्र के दुनिया के विभिन्न भागों में चल रहे शांति अभियानों मे इसने प्रमुख योगदान दिया है। इसके अलावा, इराक में 2003 के अमेरिकी नेतृत्व वाले आक्रमण के बाद इसके कई भूतपूर्व सैनिक इराक के सुरक्षा क्षेत्र की सेवा मे तैनात हैं।

राजनीति[संपादित करें]

फिजी की राजनीति आम तौर पर एक संसदीय प्रतिनिधि लोकतांत्रिक गणराज्य के दायरे में काम करती है। इसके तहत प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया, और राष्ट्रपति राष्ट्र का मुखिया होता है। देश मे बहुदलीय प्रणाली है। कार्यकारी शक्तियों का प्रयोगाधिकार सरकार के पास है। विधायी शक्तियाँ सरकार और संसद दोनों में निहित हैं। न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका से स्वतंत्र है।

आजादी के बाद से अब तक फिजी मे चार तख्तापलट हो चुके हैं, दो 1987 में, एक 2000 में और एक 2006 के अंत में। 1987 के बाद से सेना या तो शासन मे है या उसका निर्वाचित सरकारों पर पूरा प्रभाव है।

फिजी चार राजनैतिक प्रभागों मे विभाजित है:

इन प्रभागों को आगे १४ जिलों मे बाँटा गया है।

भूगोल[संपादित करें]

फिजी का मानचित्र

फिजी में 322 द्वीप हैं (जिनमें से 106 बसे हुए हैं) इसके अतिरिक्त 522 क्षुद्रद्वीप हैं। द्वीप के दो सबसे महत्वपूर्ण द्वीप हैं विती लेवु और वनुआ लेवु। ये द्वीप पहाड़ी हैं, जिनमे 1300 मीटर (4250 फुट) तक की चोटियां हैं, जो उष्णकटिबंधीय वनों से आच्छादित हैं। राजधानी सुवा विती लेवू मे स्थित है और देश की लगभग तीन चौथाई आबादी का घर है। अन्य महत्वपूर्ण शहरों में शामिल हैं नाड़ी (अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यहाँ स्थित है) और लौतोका (एक बडी़ चीनी मिल और समुद्री-पत्तन यहाँ स्थित हैं)।

वनुआ लेवु के मुख्य शहरों में लाबासा और सावुसावु प्रमुख हैं। अन्य द्वीपों या द्वीप समूहों में शामिल हैं टाबेउनी और कदावु जो क्रमशः तीसरा और चौथा सबसे बड़ा द्वीप हैं इसके अलावा मामानुका समूह (नाड़ी से थोडा़ बाहर) और यसावा समूह लोकप्रिय पर्यटन स्थलों मे हैं, लोमाईविती समूह, सुवा से बाहर है और दूरस्थ लाउ समूहरोटुमा, द्वीपसमूह के उत्तर में कुछ 500 किलोमीटर (310 मील) की दूरी पर स्थित है और इसे फिजी मे एक विशेष प्रशासनिक दर्जा हासिल है। फिजी के निकटतम पड़ोसी टोंगा है। फिजी में उष्णकटिबंधीय जलवायु है और वर्ष भर मौसम गर्म बना रहता है।

अर्थव्यवस्था[संपादित करें]

फिजी मे प्रचुर मात्रा मे वन, खनिज और मतस्य संसाधन हैं जिसके कारण यह् प्रशांत द्वीप क्षेत्र की तुलनात्मक रूप से अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं मे से एक है। फिजी ने 1960 व 1970 के दशक में तेजी से वृद्धि की लेकिन 1980 के दशक की शुरुआत में अर्थव्यवस्था मे ठहराव आ गया, 1987 के तख्तापलट ने तो इसे और मंदा कर दिया। तख्तापलट के बाद के वर्षों में आर्थिक उदारीकरण के चलते कपड़ा उद्योग का विकास बडी़ तेज गति से हुआ है साथ ही चीनी उद्योग से जुडी़ जमीन के पट्टों की अनिश्चितता के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था ने अपनी वृद्धि दर कायम रखी है। गन्ना किसानों के पट्टों की अवधि समाप्त हो जाने से चीनी के उत्पादन में रियायती मूल्य के बावजूद गिरावट आयी है। चीनी के लिए यूरोपीय संघ द्वारा सब्सिडी का प्रावधान किया गया है और सबसे अधिक लाभान्वित होने वालों मे मॉरिशस के बाद फिजी दूसरे स्थान पर है। शहरीकरण और सेवा क्षेत्र के विस्तार ने, हाल के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में योगदान किया है। तेजी से बढ़ रहा चीनी का निर्यात और पर्यटन उद्योग विदेशी मुद्रा के प्रमुख स्रोत हैं। फिजी राजस्व के लिए पर्यटन पर निर्भर ह॥ चीनी प्रसंस्करण सारी औद्योगिक गतिविधियों का एक तिहाई बनता है। लंबे समय की समस्याओं मे कम निवेश और अनिश्चित संपदा अधिकार शामिल हैं। फिजी में राजनीतिक उथलपुथल ने अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है, जो वर्ष 2000 में 2.8% से घटी और 2001 में केवल 1 % की दर से बढ़ी है। पर्यटन क्षेत्र में तेजी से बढोत्तरी हुई है फिर भी यह अभी 2002 के तख्तापलट के पहले के स्तर को छू पाने मे नाकाम रही है। हालाँकि मुद्रास्फीति कम है फिर भी फिजी के रिजर्व बैंक ने ऋण द्वारा वित्तपोषित, अत्यधिक उपभोग के भय के कारण नीति सूचक दर फरवरी 2006 में 1 % से बढा़कर 3.25 % कर दी है। कम ब्याज दरों ने अब तक निर्यात के लिए अधिक निवेश नहीं जुटाया है लेकिन आवास क्षेत्र मे, तेजी से गिर रही वाणिज्यिक बंधक दर के चलते उछाल आया है।

सुवा में 1984 में खोली गयी रिजर्व बैंक की चौदह मंजिला इमारत फिजी की सबसे उँची इमारत है। सुवा का केन्द्रीय वाणिज्यिक केंद्र जो नवंबर 2005 में खोला गया था योजना के मुताबिक सबसे उँची इमारत होनी थी लेकिन अंत में इसके डिजाइन में परिवर्तन कर दिया गया और इसके चलते रिजर्व बैंक अभी भी सबसे उँची इमारत है।

संस्कृति[संपादित करें]

फिजी की समृद्ध संस्कृति स्वदेशी, भारतीय, चीनी और यूरोपीय परंपरा का मिश्रण है। संस्कृति अनेक पहलुओं से मिलकर बनी है, जिनमे सामाजिक व्यवस्था, परंपरा, भाषा, भोजन, वेशभूषा, विश्वास प्रणाली, वास्तुकला, कला, शिल्प, संगीत, नृत्य और खेल आदि शामिल हैं। आबादी का अधिकांश स्वदेशी संस्कृति से प्रेरित है और इसकी पालना वो अपने दिन प्रतिदिन के जीवन में करता है। स्वदेशी संस्कृति पर भारतीय और चीनी संस्कृति के, साथ ही यूरोपीय संस्कृति का भी काफी प्रभाव है। इस सभ्यताओं के मिश्रण ने फिजी की संस्कृति को एक अद्वितीय और राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

भाषा[संपादित करें]

यहाँ अंग्रेजी, फ़ीजी हिन्दी आदि कई भाषाएँ बोली एवं प्रयोग की जाती हैं।

फिजी मे बोली जाने वाली हिन्दी अवधी भाषा का ही स्वरूप है। फिजी मे अवध क्षेत्र का बहुत प्रभाव है, वहाँ रामायण का बोली में भी बहुत प्रभाव है। अवध में प्रयुक्त शब्दावली आज भी ज्यो कि त्यों यंहा प्रचलित है, जैसे सब्जी पेठा/सीताफल को कोहंडा कहा जाता है, पूड़ी को सोहारी, पैर को गोड़ आदि कहा जाता है। इसका मूल कारण वन्हा गिरमिटिया के रूप में पहुंचे भारतीय अवध क्षेत्र के थे। राष्ट्रकवि पंडित कमला प्रसाद मिश्र, हिंदी सेवी व मंत्री स्व. श्री विवेकानंद शर्मा, प्रो॰सतेंदर नंदन आदि सभी की जड़े भारतीय अवध क्षेत्र में है। इनके पूर्वज फैज़ाबाद, सुल्तानपुर, जौनपुर, आदि जनपदों से गए थे। इसी कारण यंहा की भाषा अवधी के रूप में विकसित हुई है और आज स्थानीय प्रभाव के कारण फिजी हिंदी के रूप में प्रचलित है।

फिजी के मूल निवासी पोलिनेशियाई और मेलाशियाई लोगों का मिश्रण हैं, जो सदियों पहले दक्षिण प्रशांत के मूल स्थान से यहाँ आये थे। 1879 से 1916 के बीच ब्रिटिश 61000 मजदूरों को भारत से यहाँ गन्ने के खेतों मे काम करने के लिये यहाँ लाये थे इसके बाद 1920 और 1930 के दशक मे हजारों भारतीय स्वेच्छा से यहां आये। आज यही भारतीय फिजी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। भारतीय फिजियों की जनसंख्या मे तेजी से वृद्धि हुई है।

फिजी के मूल निवासी पूरे देश में रहते हैं, जबकि भारतीय मूल के फिजी नागरिक दोनो प्रमुख द्वीपों के शहरी क्षेत्रों और गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के पास रहते हैं। स्वदेशी मूल के लगभग सभी ईसाई हैं, जिनमे दो तिहाई मेथोडिस्ट है। भारतीय फ़ीजियों में 77 प्रतिशत हिंदू हैं, 16 प्रतिशत मुस्लिम, 6 प्रतिशत ईसाई के साथ कुछ सिख भी हैं।

'द इकोनोमिस्ट' के अनुसार 1977 में 255000 की संख्या के साथ फिजी मूल के नागरिक अल्पसंख्यक हो गये थे। 600000 की कुल जनसंख्या में से लगभग आधे नागरिक भारतीय मूल के थे, जबकि शेष चीनी, यूरोपीय और मिश्रित वंश के हैं।

राष्ट्रीय जनगणना हर दस वर्ष मे आयोजित की जाती है। अंतिम बार इसे 1996 में आयोजित किया गया था, लेकिन 2006 की जनगणना को 2007 तक स्थगित कर दिया गया। वित्त मंत्री रातु जोन कुबुआबोला ने 27 अक्टूबर 2005 को घोषणा की, कि "मंत्रिमंडल ने फैसला लिया है कि जनगणना और आम चुनाव एक ही वर्ष मे कराना देश के हित में नहीं है, क्योंकि लोग चुनावों की ओर ध्यान की वजह से जनगणना अधिकारी से पूर्ण सहयोग नहीं कर पायेंगे"। सांख्यिकी कार्यालय ने उनके इस कथन का समर्थन ये कहते हुये किया कि चुनाव, जनगणना से लोगों का ध्यान हटा देंगे जिसकी वजह से जनगणना का कार्य दुष्कर हो जायेगा।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "2014 Human Development Report Summary". United Nations Development Programme. २०१४. pp. २१-२५. http://hdr.undp.org/sites/default/files/hdr14-summary-en.pdf. अभिगमन तिथि: २७ जुलाई २०१४. 

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]

यह भी देखिए[संपादित करें]