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क
उदाहरण
पूर्वी नागरीक
तिब्बतीक
तमिलक
थाई
मलयालम
सिंहली
अशोकीय ब्राह्मीक
देवनागरीक
सजातीय अक्षर
इब्रानीכ ,ך
यूनानीΚ
लातिनK
सिरिलिकК
जानकारी
ध्वनि/k/
IASTka Ka
ISCII कोडB3 (179)

भारतीय वर्णमालाओं का पहला व्यंजन है, जिसका प्रयोग संस्कृत, हिन्दी और अन्य और हिन्द-आर्य भाषाओं के वर्णमाला से किया जाता है। यह अशोकीय ब्राह्मी अक्षर ka के व्युत्पन्न है।

आर्यभट्ट संख्यापद्धति

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भारतीय संख्यांक के अविष्कार के बाद भी आर्यभट्ट ने देवनागरी अक्षरों का प्रयोग संख्याओं के रूप में किया, जिस प्रकार यूनानियों के पास संख्याओं के लिए अलग-अलग अक्षर थें। क के रूपों के अनेक मूल्य हैं:[1]

  • क = 1 (१)
  • कि = 100 (१००)
  • कु = 10,000 (१० ०००)
  • कृ = 1,000,000 (१० ०० ०००)
  • कॢ = 1×108 (१०)
  • के = 1×1010 (१०१०)
  • कै = 1×1012 (१०१२)
  • को = 1×1014 (१०१४)
  • कौ = 1×1016 (१०१६)

तबले में क, कि या के एक बोल है जिसे मुख्य रूप से दाहिने तबले (दयान) पर बजाया जाता है और यह एक स्वतंत्र वर्ण है, जिसे अलग से अभ्यास किया जाता है। यह दाहिने तबले की सतह पर मध्य भाग में अंगुली के स्पर्श से बजता है।

एतिहासिक क

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क के तीन अलग एतिहासिक रूप हैं: ब्राह्मी (ka), खरोष्ठी (𐨐) और तुषारी (ka या ka)।

ब्राह्मी क

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ब्राह्मी क (ka) के लिखने की अनेक शैलियाँ हैं जो अलग-अलग काल के हैं।[2] इसके सबसे पहले उल्लेख अशोक के अभिलेख में स्वर चिह्न के बिना पाया गया है।

ब्राह्मी क की शैलियाँ
अशोकीय
(तीसरी – पहली शताब्दी ई.पू.)
गिरनार
(~150 ई.पू.)
कुषाण
(~150 – 250)
गुजरात
(~250)
गुप्त
(~350)
अशोकीय ब्राह्मी क
क्काकिकीकुकूकृकॄकॢकॣकेकैकोकौ

तुषारी क

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तुषारी क (ka) ब्राह्मी क से व्युत्पन्न है, और इसका एक अलग रूप (kä) भी है।

तुषारी क
काकिकीकुकूकृकॄकेकैकोकौकःअलग रूप
kä

खरोष्ठी क

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खरोष्ठी क ka अरामी अक्षर काफ़ (k) से व्युत्पन्न है।

  1. Ifrah, Georges (2000). The Universal History of Numbers. From Prehistory to the Invention of the Computer. New York: John Wiley & Sons. pp. 447–450. ISBN 0-471-39340-1.
  2. Evolutionary chart, Journal of the Asiatic Society of Bengal Vol 7, 1838