कुमाऊँनी भाषा
| कुमाउनी | |
|---|---|
| कुमाउँनी | |
| मूल स्थान | भारत |
| क्षेत्र | कुमाऊँ |
| समुदाय | कुमाउनी |
मातृभाषियाँ | 20 लाख+ (2011 जनगणना)[1] |
| देवनागरी | |
| भाषा कोड | |
| ISO 639-3 | kfy |
| ग्लोटोलॉग | kuma1273 |
कुमाउनी भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ क्षेत्र में बोली जाने वाली एक भाषा है। भारत की ३२५ मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है और २६,६०,००० (१९९८) से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है।कुमाउँनी भाषा को सम्मान दिलाने के उद्देश्य से "पर्वतीय राज्य मंच " की तरफ से 1 सितंबर को "[./Https://www.amarujala.com/dehradun/gharwali-and-kumaon-bhasha-diwas-in-uttarakhand-on-1st-and-2nd-september कुमाउनी भाषा दिवस] " मनाने का आह्वान किया गया हैं , क्योंकि इस दिन 1994 में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान कुमाऊ क्षेत्र के खटीमा में कई लोगों ने शहादत दी थी। उत्तराखण्ड के निम्नलिखित जनपदों - अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत, ऊधमसिंह नगर के अतिरिक्त प्रवासी कुमाउनी असम, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब, तथा हिमाचल प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में रहते हैं इसलिए वहां भी उपयोग की जाती है। इसका आईएसओ कोड: kfy है।[2]
लिपि
[संपादित करें]कुमाउनी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। यह एक भ्रान्ति है कि कुमाउनी की कोई लिपि नहीं है तथा इसका कोई लिखित स्वरूप नहीं है। कुमाउनी की वर्तमान लिपि देवनागरी है और इसमें लोक साहित्य की विशिष्ट परंपरा भी उपलब्ध है। यद्यपि उत्तराखण्ड शासन ने इसको राजभाषा की पदवी नहीं दी है।
कुमाउनी का व्याकरण अन्य मध्य पहाड़ी भाषाएँ से बहुत समानताएं रखता है।
कुमाउनी भाषा के प्रकार तथा भेद
[संपादित करें]कुमाउनी भाषा,कुमाऊँ क्षेत्र में विभिन्न रुपांतरणों में बोली जाती है जैसे:-
कुमाउनी भाषा की बोलियाँ
[संपादित करें]- काली कुमांऊँनी, केन्द्रीय कुमांऊँनी।
- उत्तर पूर्वी कुमांऊँनी।
- दक्षिण पूर्वी कुमांऊँनी।
- अस्कोटि।
- भाभरी (रामपुर में)।
- चुगरख्यैली।
- दनपुरिया।
- गंगोला।
- जोहारी
- खसपरजिया
- कुमइयाॅं
- पछाइ (पछे)
- पाली पछांऊॅं की कुमांऊॅंनी
- पश्चिमी कुमाऊँनी
- फल्दकोटि
- रहू चौभैसी
- सिराली (सिरौय्लि)
- सोरयाली
- बैतडा
- डोटियाली
कुमाउनी भाषा का लुप्त होता स्वरूप
[संपादित करें]कुमाउनी भाषा शनै-शनै लगभग लुप्त होने के स्थिति पर है। जिसके कई कारण हैं- पलायन, नगरीकरण, राजभाषा के रूप में मान्यता न मिलना इत्यादि। कुमाउनी जानने वाले लगभग सभी लोग हिन्दी समझ सकते हैं। हिन्दी भाषा के कुमाऊँ में बढ़ते प्रभाव तथा केन्द्रीय शासन द्वारा हिन्दी के आत्याधान के कारण यह भाषा तीव्र गति से लुप्त हो रही है। नगर क्षेत्रों में बहुत कम लोग यह भाषा बोलते हैं। बहुत से कुमाउनी परिवारों में पुरानी दो पीढ़ी के लोग जब नई पीढ़ी के लोगों से कुमांऊँनी में संवाद करते हैं तो उन्हें उत्तर हिन्दी में मिलता है, क्योंकि कुमाऊँनी को औपचारिक रूप से विद्यालयों पढ़ाया नहीं जाता है। युनेस्को ने कुमाउनी भाषा को असुरक्षित भाषाओं की श्रेणी में रखा है, अर्थात् जिसको निरन्तर संरक्षण की आवश्यकता है। Archived 2022-04-02 at the वेबैक मशीन
कुमाऊँ के प्रमुख लेखक व साहित्यकार
[संपादित करें]इन्हें भी देखें
[संपादित करें]बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- कुमाऊँनी-गढ़वाली शब्दकोष
- तैरी सौं, १९९४ रामपुर तिराहा काण्ड पर आधारित एक कुमाऊँनी चलचित्र
- कुमाऊँनी संस्कृति (हिन्दी चिट्ठा)
- फोरम (कुमाऊनी / पहाडी फोरम)
- कुमाऊँनी भाषा और साहित्य
- ऑनलाइन कुमाऊँनी सीखें
- आईएसओ/एथ्नोलॉग भाषा कूटः कुमाऊँनी भाषा
- कुमाऊँनी भाषा के गीत
- कुमाउनी साहित्य के समाचार
- उत्तराखंडी-कुमाउनी लोक भाषाओँ की एकमात्र पत्रिका 'कुमगढ़'
- कुमाउनी कविताओं का ब्लॉग- ऊँचे पहाड़ों से.... जीवन के स्वर
- कुमाउनी कविताओं की पुस्तक-उघड़ी आंखोंक स्वींड़
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- ↑ साँचा:E21
- ↑ Moseley, Christopher, ed. (2010). Atlas of the World’s Languages in Danger. Memory of Peoples (3rd ed.). Paris: UNESCO Publishing. ISBN 978-92-3-104096-2. 13 दिसंबर 2016 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2015-04-11.