कोशली भाषा

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ओड़िया भाषा के पश्चिमी रूप को 'सम्बलपुरी'या सम्बलपुरी कहते हैं। पश्चिम ओडिशा र 11 जिला सांगे छत्तीसगढ़ र 4 जिला थी सम्बलपुरी भाषा ब्यबहार करा जायसी।

सम्बलपुरी सहित्यर प्रारंभिक जुग

सम्बलपुरी र लिखित साहित्य उन्नीसवीं शताब्दीर के उत्तरार्ध तक आरम्भ हेबार ऐतिहासिक प्रमाण मिलसी। अगरु सम्बलपुरी सब्द प्राचीन पत्थर शिलालेख, ताल पतर तम्बा पटा रे मिली थिले बी इ भाषा रे पूरा लेखा उपलब्ध नाइ थाई। पहेला सम्बलपुरी लेखा संबलपुर हितैसिणी साप्ताहिक पत्रिका रे वर्ष 1891 रे हेई थिबर प्रमाण अछे। ई पत्रिका सेतेबेले देवगढ़ रु प्रकाशित हउथिला। इथी कवि ` मधुसुदन' लेखिथिबार कविता प्रकाशित हइथिला :इतार पद थिला __

" "कह गो दुति मुई केन्ता करसिँ गो

नन्दपुओ कान्हा के देखले बड़ा काबा लागसी गो

दिसू थिसि टरटर कालिया

पिंधि थिसि हल्दिया जरजर

धोब फरफर् टे जान बारिर टे बेके उलेई हेसिगो _01

जमुना नएद के गाधी गले बसी थिसि कदम तले देखले धाएंसी सांगे गुडासि सांगे गाधी बससी गो _02

काएं मंतर आएसी ताहाके 

मूसा डीआसी हसी घाएके जहा खाएसि गुरस खिरसा सबु चुरेई खाएसि गो _03

छिना बेले घरके जाई हरदम दके माई माई डांडे बुले पडाके गले खुली बाखली हसी गो _04

ई आड़ू से आड़ू चार पद हेला भडे मधु सूदन पिला कही लेखला राधा कृष्ण हेले हँसा हंसी गो _05

उसके बाद,

2-"जटन ' 1900 रु 1910 भितरे 'भुला मन चौतिसा लेखिथिले।

3-"चईतन दास 1900 रु 1910 भितरे 'टढेई चौतिसा लेखिथिले।

4-"बालाजी मेहेर' 1910 रु 1920 भीतर लेखिथिले

* गुंडीआ 
* गौड़ गमन 
*कुम्भार पसरा 
* सुनारी पसरा 

5-' लक्ष्मण पति"1915 रु 1925 के भीतर लेखिथिले

*अदि बन्दना 
* मनुष बरन 
*माँएझि बरन 
*भुलिआ पसरा 
*करण पसरा
*खररा पसरा
* तेली पसरा 
*सबर पसरा

6-"कपिल महापात्र "1925 रु 1930 भितरे लेखिथिले 'सम्बलपुरी रामायण '।

एंता करी 1891 रु 1947 भितरे 35 झन कवि कुल सम्बलपुरी 64 कविता लेखिथिबार एतिहासिक तथ्य रहिछे। ई समिआ के आमे सम्बलपुरी सहित्यर प्रारंभिक जुग् बलि कही पारमा। संग्रह : भवनीश भोई