कुमाऊँनी भाषा

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कुमाऊँनी
कुमाँऊनी
Kumaoni written in kumaoni language2019.png
देवनागरी में लिखा नाम
बोलने का  स्थान भारत
तिथि / काल 2011 जनगणना
क्षेत्र कुमाऊँ
समुदाय कुमाऊँनी
मातृभाषी वक्ता 20 लाख
भाषा परिवार
लिपि देवनागरी
शारदा लिपि (ऐतिहासिक)
टाकरी लिपि (ऐतिहासिक)
भाषा कोड
आइएसओ 639-3 kfy
Indic script
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'Kumaoni' written in Takri Script

कुमांऊँनी भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ क्षेत्र में बोली जाने वाली एक भाषा है। भारत की ३२५ मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है और २६,६०,००० (१९९८) से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। उत्तराखण्ड के निम्नलिखित जनपदों - अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत, ऊधमसिंह नगर के अतिरिक्त असम, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब, तथा हिमाचल प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में भी बोली जाती है। इसका आईएसओ कोड: kfy है।[1]

लिपि[संपादित करें]

कुमांऊँनी भाषा को वर्तमान में देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। यद्यपि अतीत में कुमाऊंनी भाषा के लिए क्रमशः शारदाटाकरी लिपि का उपयोग होता था, परन्तु आज देवनागरी लिपि ने इनका स्थान ले लिया है। यह एक भ्रान्ति है कि कुमाऊँनी की कोई लिपि नहीं है तथा इसका कोई लिखित स्वरूप नहीं है। कुमाऊँनी की वर्तमान लिपि देवनागरी है और इसमें साहित्य भी उपलब्ध है,यद्यपि उत्तराखण्ड शासन ने इसको राजभाषा की पदवी नहीं दी है।

कुमाऊँनी की व्याकरण अन्य मध्य पहाड़ी भाषाएँ से बहुत समानताएं रखती है। साथ ही, राजस्थानी भाषाएं व गुजराती भी कुछ रूप से मिलतीं है।


कुमांऊँनी भाषा के प्रकार तथा भेद[संपादित करें]

कुमांऊँनी भाषा,कुमाऊँ क्षेत्र में विभिन्न रुपांतरणों में बोली जाती है जैसे:-

कुमांऊँनी भाषा की बोलियाँ[संपादित करें]

  • काली कुमांऊँनी, केन्द्रीय कुमांऊँनी।
  • उत्तर पूर्वी कुमांऊँनी।
  • दक्षिण पूर्वी कुमांऊँनी।
  • अस्कोटि।
  • भाभरी (रामपुर में)।
  • चुगरख्यैली।
  • दनपुरिया।
  • गंगोला।
  • जोहारी
  • खसपरजिया
  • कुमइयाॅं
  • पछाइ (पछे)
  • पाली पछांऊॅं की कुमांऊॅंनी
  • पश्चिमी कुमाऊँनी
  • फल्दकोटि
  • रहू चौभैसी
  • सिराली (सिरौय्लि)
  • सोरयाली
  • बैतडा
  • डोटियाली

कुमाऊँनी भाषा का लुप्त होता स्वरूप[संपादित करें]

कुमांऊँनी भाषा शनै-शनै लगभग लुप्त होने के स्थिति पर है। जिसके कई कारण है। पलायन, नगरीकरण, राजभाषा के रूप में मान्यता न मिलना इत्यादि। कुमांऊँनी जानने वाले लगभग सभी लोग हिन्दी समझ सकते हैं। हिन्दी भाषा के कुमाऊँ में बढ़ते प्रभाव तथा केन्द्रीय शासन द्वारा हिन्दी के आत्याधान के कारण यह भाषा तीव्र गति से लुप्त हो रही है। नगरीय क्षेत्रों में बहुत कम लोग यह भाषा बोलते हैं। बहुत से कुमाऊँनी परिवारों में पुरानी दो पीढ़ी के लोग जब नई पीढ़ी के लोगों से कुमांऊँनी में संवाद करते हैं तो उन्हें उत्तर हिन्दी में मिलता है, क्योंकि कुमाऊँनी को औपचारिक रूप से विद्यालयों पढ़ाया नहीं जाता है। युनेस्को ने कुमाऊँनी भाषा को असुरक्षित भाषाओं की श्रेणी में रखा है, अर्थात् जिसको निरन्तर संरक्षण की आवश्यकता है।[1][मृत कड़ियाँ]

कुमाऊँ के प्रमुख लेखक व साहित्यकार[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  1. Moseley, Christopher, संपा॰ (2010). Atlas of the World’s Languages in Danger. Memory of Peoples (3rd संस्करण). Paris: UNESCO Publishing. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-92-3-104096-2. मूल से 13 दिसंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2015-04-11.