अल्मोड़ा जिला

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अल्मोड़ा ज़िला
Almora district
उत्तराखण्ड का ज़िला
Temple Cluster at Jageshwar.jpg
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Surya Temple2.jpg
Kumoan village(binsar wild life sanctury).jpg
Nanda Devi Peak from Ranikhet.jpg
उत्तराखण्ड में स्थिति
उत्तराखण्ड में स्थिति
देश भारत
राज्यउत्तराखण्ड
मण्डलकुमाऊँ मण्डल
मुख्यालयअल्मोड़ा
तहसील9
क्षेत्रफल
 • कुल3082 किमी2 (1,190 वर्गमील)
जनसंख्या (2011)
 • कुल6,22,506
 • घनत्व200 किमी2 (520 वर्गमील)
भाषा
 • प्रचलितहिन्दी, कुमाऊँनी
जनसांख्यिकी
 • साक्षरता80.47%
 • लिंगानुपात1139
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड263601
दूरभाष कोड+91-5962
वाहन पंजीकरणUK-01
वेबसाइटalmora.nic.in

अल्मोड़ा (Almora) भारत के उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ मण्डल का एक ज़िला है। इसका मुख्यालय अल्मोड़ा है। अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान और ठेठ पहाड़ी सभ्यता व संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है।[1][2]

पृष्ठभूमि[संपादित करें]

अल्मोड़ा जिले का विवरण :

  • कुल जनसँख्या - ६,२२,५०६
  • कुल विकासखण्ड - ११ (हवालबाग, सल्ट, लमगडा, ताकुला, धौलादेवी, भैंसियाछाना, स्याल्दे, चौखुटिया, ताड़ीखेत, द्वाराहाट, भिकियासैण)
  • विधानसभा क्षेत्र - द्वाराहाट, सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर, अल्मोड़ा, जागेश्वर
  • विधानसभा चुनाव २०१७ के अनुसार विधानसभा क्षेत्रों के विधायक-
    • अल्मोड़ा (बारामण्डल) - रघुनाथ सिंह चौहान (भाजपा)
    • सोमेश्वर - रेखा आर्या (भाजपा)
    • सल्ट - महेश जीना (भाजपा)
    • रानीखेत - करन माहरा (कांग्रेस)
    • जागेश्वर - गोविंद सिंह कुंजवाल (कांग्रेस)
    • द्वाराहाट - महेश नेगी (भाजपा)

इतिहास[संपादित करें]

१८१४ के आंग्ल गोरखा युद्ध में विजय के पश्चात १८१६ की सुगौली की संधि के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी ने कुमाऊँ, देहरादून और पूर्व गढ़वाल को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला दिया और पश्‍चिम गढ़वाल राजा सुदर्शन शाह को दे दिया जिसमें उन्होंने टिहरी रियासत की स्थापना की। कुमाऊँ मण्डल तब केवल २ जिलों में विभाजित था, कुमाऊँ तथा तराई, जिनके मुख्यालय क्रमशः अल्मोड़ा तथा काशीपुर नगरों में स्थित थे।[3] कुमाऊँ जिले के अंतर्गत वर्तमान उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, पौड़ी गढ़वाल, चमोली तथा रुद्रप्रयाग जिले के कुछ भाग आते थे, और तराई जिला वर्तमान उधम सिंह नगर जिले के समकक्ष था।

१८३७ में पूर्वी गढ़वाल क्षेत्र को कुमाऊँ जिले से निकालकर अलग जिला घोषित कर दिया गया, और इसका मुख्यालय पौड़ी नगर में रखा गया। नैनीताल तहसील को १८९१ में कुमाऊं जिले से स्थानांतरित कर तराई के साथ मिला दिया गया, और फिर इसके मुख्यालय को काशीपुर से नैनीताल में लाया गया था। १८९१ में ही कुमाऊँ और तराई जिलों का नाम उनके मुख्यालयों के नाम पर क्रमशः अल्मोड़ा तथा नैनीताल रख दिया गया था।

१९६० के दशक में बागेश्वर और चम्पावत जिले नहीं बनें थे और तब ये अल्मोड़ा जिले के ही भाग थे।[4] पिथौरागढ़ जिला २४ फरवरी १९६० को,[5] और बागेश्वर जिला १५ अगस्त १९९७ को अल्मोड़ा जिले से अलग कर बनाया गया था।[6] २०११ में रानीखेत जिले को भी अल्मोड़ा जिले से बनाने की घोषणा हुई थी, परन्तु उस घोषणा को अमल में नहीं लाया गया।[7]

भूगोल[संपादित करें]

१८६० में अल्मोड़ा कस्बा

अल्मोड़ा कस्बा पहाड़ पर घोड़े की काठीनुमा आकार के रिज पर बसा हुआ है। रिज के पूर्वी भाग को तालिफत और पश्चिमी भाग को सेलिफत के नाम से जाना जाता है। यहाँ का स्थानीय बाज़ार रिज की चोटी पर स्थित है जहाँ पर तालिफत और सेलिफत संयुक्त रूप से समाप्त होते हैं। बाज़ार २.०१ किमी लम्बा है और पत्थर की पटियों से से ढका हुआ है। जहाँ पर अभी छावनी है, वह स्थान पहले लालमंडी नाम से जाना जाता था। वर्तमान में जहाँ पर कलक्टरी स्थित है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'मल्ला महल' स्थित था। वर्तमान में जहाँ पर जिला अस्पताल है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'तल्ला महल' हुआ करता था। सिमलखेत नामक एक ग्राम अल्मोड़ा और चमोली की सीमा पर स्थित है। इस ग्राम के लोग कुमाँऊनी और गढ़वाली दोनो भाषाएँ बोल सकते हैं। पहाड़ की चोटी पर एक मंदिर है, भैरव गढ़ी। गोरी नदी अल्मोड़ा जिले से होकर बहती है। अल्मोड़ा में एक प्रसिद्ध नृत्य अकादमी है, डांसीउस - जहाँ बहुत से भारतीय और फ्रांसीसी नर्तकों को प्रक्षिक्षण दिया गया था। इसकी स्थापना उदय शंकर द्वारा १९३८ में की गई थी। अल्मोड़ा नृत्य अकादमी को कस्बे के बाहर रानीधार नामक स्थान पर गृहीत किया गया। इस स्थान पर से हिमालय और पूरे अल्मोड़ा कस्बे का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

"इन पहाड़ों पर, प्रकृति के आतिथ्य के आगे मनुष्य द्वारा कुछ भी किया जाना बहुत छोटा हो जाता है। यहाँ हिमालय की मनमोहक सुंदरता, प्राणपोषक मौसम और आरामदायक हरियाली जो आपके चारों ओर होती है, के बाद किसी और चीज़ की इच्छा नहीं रह जाती। मैं बड़े आश्चर्य के साथ ये सोचता हूँ की क्या विश्व में कोई और ऐसा स्थान है जो यहाँ की दृश्यावली और मौसम की बराबरी भी कर सकता है, इसे पछाड़ना तो दूर की बात है। यहाँ अल्मोड़ा में तीन सप्ताह रहने के बात मैं पहले से अधिक आश्चर्यचकित हूँ की हमारे देश के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते है।" - महात्मा गांधी

प्रशासन[संपादित करें]

जिले के प्रशासनिक मुख्यालय अल्मोड़ा नगर में स्थित हैं। प्रशासनिक कार्यों से जिले को ६ उपखण्डों में बांटा गया है, जो आगे १२ तहसीलों और २ उप-तहसीलों में विभाजित हैं। ये हैं: अल्मोड़ा उपखण्ड (अल्मोड़ा, सोमेश्वर); जैंती उपखण्ड (जैंती, भनोली, लमगड़ा [उप-तहसील]); द्वाराहाट उपखण्ड (द्वाराहाट, चौखुटिया, जालली, बग्वालीपोखर), रानीखेत उपखण्ड (रानीखेत); भिकियासैण उपखण्ड (भिकियासैण, स्याल्दे) और सल्ट उपखण्ड (सल्ट, मछोर [उप-तहसील])। इसके अतिरिक्त, जिले को ११ विकासखंडों में भी बांटा गया है: हवालबाग, चौखुटिया, भैंसियाछाना, द्वाराहाट, सल्ट, भिक्यासैंण, ताड़ीखेत, ताकुला, स्याल्दे, लमगड़ा और धौला देवी। जिले में एक संसदीय क्षेत्र, और ६ उत्तराखण्ड विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं, जिनमें द्वाराहाट, सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर, अल्मोड़ा और जागेश्वर शामिल हैं।

यातायात[संपादित करें]

वायु[संपादित करें]

यहाँ से निकटतम विमानतल पंतनगर (नैनीताल) में है, जिसकी दूरी है, १२७ किमी।

रेल[संपादित करें]

सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन में काठगोदाम है, जो यहाँ से ९० किमी दूर स्थित है, औए वहाँ से दिल्ली, लखनऊ और आगरा के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं। काठगोदाम का स्टेशन भी वहाँ से कुछ दूरी पर स्थित है। काठगोदाम से कुछ मुख्य रेलें हैं:

  • शताब्दी ऐक्स्प्रैस
  • हावड़ा ऐक्स्प्रैस (३०१९/३०२०)
  • रानीखेत ऐक्स्प्रैस (५०१३/५०१४)
  • रामपुर पैसेंजर (१/२ आर॰के॰ पैसेंजर और ३/४ आर॰के॰ पैसेंजर)
  • नैनीताल ऐक्स्प्रैस (५३०८/५३०७)

सड़क[संपादित करें]

अल्मोड़ा सड़क मार्ग द्वारा इस क्षेत्र के प्रमुख केन्द्रों से जुड़ा है। विभिन्न केन्द्रों की दूरियाँ:

  • दिल्ली ३७८ किमी
  • लखनऊ ४६० किमी
  • नैनीताल ६६ किमी (रानीखेत के रास्ते १०३ किमी)
  • काठगोदाम ९० किमी

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Uttarakhand: Land and People," Sharad Singh Negi, MD Publications, 1995
  2. "Development of Uttarakhand: Issues and Perspectives," GS Mehta, APH Publishing, 1999, ISBN 9788176480994
  3. Martin, Robert Montgomery. History of the Possessions of the Honourable East India Company, Volume 1. पृ॰ 107.
  4. Times World Atlas, 1967 Edition, Plate 30.
  5. "कत्यूरी और चंद राजवंश का भी केंद्र रहा पिथौरागढ़". पिथौरागढ़: दैनिक जागरण. २१ अगस्त २०१५. मूल से 21 जनवरी 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि २१ जनवरी २०१८.
  6. "बेहतर भविष्य की शुभकामनाएं, जन्मदिन मुबारक बागेश्वर". बागेश्वर: अमर उजाला. १४ सितम्बर २०१७. मूल से 28 सितंबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 सितम्बर 2017.
  7. "सिर्फ घोषणा बनकर रह गया रानीखेत जिला". रानीखेत: अमर उजाला. २ जून २०१६. मूल से 22 जनवरी 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि २१ जनवरी २०१८.