२०१० हरिद्वार महाकुम्भ

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हरिद्वार महाकुंभ २०१० का प्रतीक-चिह्न

महाकुम्भ भारत का एक प्रमुख उत्सव है जो ज्योतिषियों के अनुसार तब आयोजित किया जाता है जब बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करता है। कुम्भ का अर्थ है घड़ा। यह एक पवित्र हिन्दू उत्सव है। यह भारत में चार स्थानो पर आयोजित किया जाता है: प्रयाग (इलाहाबाद), हरिद्वार, उज्जैन और नासिक

२०१० का कुम्भ मेला हरिद्वार में आयोजित किया जा रहा है। पिछली बार १९९९ में महाकुम्भ का आयोजन यहाँ किया गया था। मकर संक्राति के दिन अर्थात १४ जनवरी, २०१० को इस मेले का शुभारम्भ हो गया है।[1] हरिद्वार में जारी इस मेले में इस बार ७ करोड़ से भी अधिक लोगों के आने का अनुमान है।[2]

पौराणिक आख्यानों के अनुसार समुद्रमंथन के दौरान निकला अमृतकलश १२ स्थानों पर रखा गया था जहां अमृत की बूंदें छलक गई थीं। इन १२ स्थानों में से आठ ब्रह्मांड में माने जाते हैं और चार धरती पर जहां कुंभ लगता है।

हिन्दू धर्म में मान्यता है कि इस मेले में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हरिद्वार महाकुंभ का योग[संपादित करें]

पुराणों आदि प्राचीन ग्रन्थों में उपर्युक्त चारों स्थानों पर महाकुंभ लगने के लिए ग्रहों की विशिष्ट स्थितियाँ बतायी गयी हैं। हरिद्वार के लिए यह इस प्रकार वर्णित है-

पद्मिनीनायके मेषे, कुम्भराशिगते गुरौ। गंगाद्वारे भवेद्योगः कुम्भनाम्ना तदोत्तमः।।[3]

अर्थात् जब सूर्य मेष राशि में हो, बृहस्पति कुंभ राशि में हो, तब गंगाद्वार (हरिद्वार) में कुंभ नाम का उत्तम योग होता है।

उल्लेखनीय है कि बृहस्पति प्रतिवर्ष राशि बदलता है जबकि सूर्य हर महीने राशि बदलता है। तथा २००९ के १९ दिसंबर को यह कुंभ राशि में प्रवेश कर चुका है। सूर्य मेष राशि में १४ अप्रैल २०१० को आयेगा और तभी इस महाकुंभ का प्रमुख स्नान है (१४ अप्रैल को)।

कुम्भ स्नान की तिथियां[संपादित करें]

कुंभ के स्नान पर्व[4]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. हरिद्वार में महाकुंभ शुरु
  2. ७ करोड़ श्रद्धालु? महाकुंभ में नया कीर्तिमान
  3. स्कन्द पुराण
  4. कुंभ 2010, 12 साल का त्यौहार। हिन्दुस्तान लाइव। २८ दिसम्बर २००९

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

स्नान तिथियाँ


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