हल्द्वानी

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हल्द्वानी
—  महानगर  —
हल्द्वानी नगर का दृश्य
हल्द्वानी नगर का दृश्य
निर्देशांक: (निर्देशांक ढूँढें)
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तराखण्ड
महापौर श्री जोगिंदर पाल सिंह रौतेला (बीजेपी)
नगर आयुक्त चन्द्र सिंह मर्तोलिया (आईएएस)
जनसंख्या
घनत्व
530244 "महानगरीय 632095 (२०१८ के अनुसार )
• 8,100/किलोमीटर² (21,000/वर्ग मीटर)
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
44.11 किमी2 (17.03 वर्ग मी) कि.मी²
• 424 मी(1,391 फिट) मीटर
आधिकारिक जालस्थल: http://www.nagarnigamhaldwani.in/

हल्द्वानी/हल्द्वेणी उत्तराखण्ड राज्य में स्थित उत्तर भारत के सबसे बड़े आर्थिक, सांस्कृतिक,शैक्षिक,सामाजिक व औद्योगिक केंद्रों में से एक है। यह अपने उपनगर काठगोदाम के साथ मिलकर हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम बनाता है। हल्द्वानी, कुमाऊं का सबसे बड़ा एवं राज्य की राजधानी देहरादून के बाद उत्तराखण्ड राज्य का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। उत्तराखंड की कई औद्योगिक इकाइयां यहां स्थापित होने के कारण हल्द्वानी राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। इसे "कुमाऊँ का प्रवेश द्वार" या 'कुमाऊं द्वार' भी कहा जाता है। कुमाऊँनी भाषा में इसे "हल्द्वेणी" भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ "हल्दू" (कदम्ब) प्रचुर मात्रा में मिलता था।[1]

इतिहास[संपादित करें]

मुग़ल इतिहासकारों ने इस बात का उल्लेख किया है कि १४वीं शताब्दी में एक स्थानीय शासक, ज्ञान चन्द जो अहीर राजवंश से सम्बंधित था, दिल्ली सल्तनत पधारा और उसे भाभर-तराई तक का क्षेत्र उस समय के सुलतान से भेंट स्वरुप मिला। बाद में मुग़लों द्बारा पहाड़ों पर चढ़ाई करने का प्रयास किया गया, लेकिन क्षेत्र की कठिन पहाड़ी भूमि के कारण वे सफल नहीं हो सके।

सन् १८५६ में सर हेनरी रैम्से ने कुमाऊँ के आयुक्त का पदभार संभाला। १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतंत्रा संग्राम के दौरान इस क्षेत्र पर थोड़े समय के लिये रोहिलखण्ड के विद्रोहियों ने अधिकार कर लिया। तत्पश्चात सर हेनरी रैम्से द्वारा यहाँ मार्शल लॉ लगा दिया गया और १८५८ तक इस क्षेत्र को विद्रोहियों से मुक्त करा लिया गया।

इसके बाद सन् १८८२ में रैम्से ने नैनीताल और काठगोदाम को सड़क मार्ग से जोड़ दिया। सन् १८८३-८४ में बरेली और काठगोदाम के बीच रेलमार्ग बिछाया गया। २४ अप्रैल, १८८४ के दिन पहली रेलगाड़ी लखनऊ से हल्द्वानी पहुंची और बाद में रेलमार्ग काठगोदाम तक बढ़ा दिया गया।

सन् १९०१ में यहाँ की जनसँख्या ६,६२४ थी और सयुंक्त प्रान्त के नैनीताल ज़िले के भाभर क्षेत्र का मुख्यालय हल्द्वानी में ही स्थित था। और साथ ही ये कुमाऊँ मण्डल और नैनीताल ज़िले की शीत कालीन राजधानी भी हुआ करता था। सन् १९०१ में आर्य समाज भवन और १९०२ में सनातन धर्मं सभा का निर्माण किया गया। सन् १८९९ में यहाँ तहसील कार्यालय खोला गया जब इसे नैनीताल ज़िले के चार भागों में से एक भाभर का मुख्यालय बनाया गया और कुल ४ क़स्बों और ५११ ग्रामों के साथ इसकी कुल जनसँख्या ९३,४४५ (१९०१) थी और ये ३,३१३ वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ था। १८९१ तक अलग नैनीताल ज़िले के बनाने से पहले तक ये कुमांऊ ज़िले का भाग था जिसे अब अल्मोड़ा ज़िले के नाम से जाना जाता है।

सन् १९०४ में इसे "अधिसूचित क्षेत्र" की श्रेणी में रखा गया और १९०७ में हल्द्वानी को क़स्बा क्षेत्र घोषित किया गया। हल्द्वानी से ४ किमी दूर दक्षिण में स्थित गोरा पड़ाव नामक क्षेत्र है। १९ वीं सदी के मध्य में यहाँ एक ब्रिटिश कैंप हुआ करता था जिसके नाम पर इस क्षेत्र का नाम पड़ा। "गोरा" शब्द ब्रिटिशों लिए उपयोग में लाया जाने वाला कठबोली शब्द था।

भूगोल[संपादित करें]

हल्द्वानी २९.२२° उ ७९.५२° पू के अक्षांश पर स्थित है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई ४२४ मीटर है। भूवैज्ञानिक रूप से हल्द्वानी एक पीडमोंट (piedmont) ग्रेड पर बसा हुआ है जिसे भाभर कहा जाता है, जहां पहाड़ी नदियाँ भूमिगत होकर गंगा के मैदानी क्षेत्रों में पुनः प्रकट होती हैं। ऐतिहासिक रूप से ये एक स्थानीय व्यापार केंद्र रहा है और कुमाऊँ के पहाड़ी क्षेत्रों और गंगा के मैदानी क्षेत्रों के बीच एक व्यस्त केंद्र भी।

नैनीताल रोड से हल्द्वानी-काठगोदाम और गौला नदी की चित्रमाला।

महानगरीय क्षेत्र[संपादित करें]

हल्द्वानी उत्तराखंड के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित हल्द्वानी महानगरीय क्षेत्र का प्रमुख शहर है। हल्द्वानी-काठगोदाम नगरों के अलावा हल्द्वानी महानगरीय क्षेत्र में ग्यारह कॉलोनियां (दमुआ धुंगा बांदोबस्ती, ब्यूरो, बामोरी तल्ली बंदोबस्ती, अमरावती कॉलोनी, शक्ति विहार, भट्ट कॉलोनी, मानपुर उत्तर, हरिपुर सुखा, गौजजली उत्तर, कुसुमखेड़ा, बिथोरिया सं १, कोर्त, बामोरी मल्ली और बामोरी तल्ली खम) और दो जनगणना नगर (मुखानी और हल्दवानी तल्ली) शामिल हैं।

हल्द्वानी नैनीताल जिले की एक तहसील भी है। हल्द्वानी तहसील नैनीताल जिले के दक्षिणी भाग में स्थित है, और इसकी सीमाएं नैनीताल जिले में नैनीताल, कालाढूंगी, लालकुआँ और धारी तहसीलों के अलावा उधम सिंह नगर जिले में गदरपुर, किच्छा और सितारगंज, और चम्पावत जिले में श्री पूर्णागिरी तहसील से मिलती हैं। तहसील में चार नगर और २०२ गांव शामिल हैं।

जलवायु[संपादित करें]

हल्द्वानी के जलवायु आँकड़ें
माह जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितम्बर अक्टूबर नवम्बर दिसम्बर वर्ष
औसत उच्च तापमान °C (°F) 20
(68)
22.9
(73.2)
28.4
(83.1)
34.3
(93.7)
37
(99)
35.5
(95.9)
31.2
(88.2)
30.4
(86.7)
30.5
(86.9)
29.5
(85.1)
25.2
(77.4)
21.1
(70)
28.83
(83.93)
दैनिक माध्य तापमान °C (°F) 13.9
(57)
16
(61)
21.1
(70)
26.2
(79.2)
29.5
(85.1)
29.6
(85.3)
27.3
(81.1)
26.7
(80.1)
26.4
(79.5)
23.6
(74.5)
18.5
(65.3)
14.7
(58.5)
22.79
(73.05)
औसत निम्न तापमान °C (°F) 7.8
(46)
9.2
(48.6)
13.9
(57)
18.2
(64.8)
22
(72)
23.7
(74.7)
23.4
(74.1)
23.1
(73.6)
22.4
(72.3)
17.7
(63.9)
11.8
(53.2)
8.3
(46.9)
16.79
(62.26)
औसत वर्षा मिमी (inches) 57
(2.24)
33
(1.3)
35
(1.38)
8
(0.31)
40
(1.57)
256
(10.08)
649
(25.55)
587
(23.11)
301
(11.85)
110
(4.33)
5
(0.2)
14
(0.55)
2,095
(82.47)
स्रोत: [2]

समीक्षा[संपादित करें]

हल्द्वानी से ८ किमी उत्तर में रानीबाग़ नामक स्थान है जहाँ हिन्दुओं का पवित्र चित्रशिला नामक श्मशान घाट है। उत्तरायणी नामक मेला प्रतिवर्ष मकर संक्रांति(१३-१४ जनवरी प्रतिवर्ष) के दिन यहाँ लगता है। कुमाऊँनी बोली में इसे घुघुतिया भी कहते हैं।

हल्द्वानी के दक्षिण में पंतनगर विश्वविद्यालय स्थित है जो कृषि अनुसंधान के लिए प्रसिद्द है। पूर्व में गौला नदी बहती है और पश्चिम में लामचुर और कालाढुंगी के उपजाऊ कृषि मैदान है जो विश्व-प्रसिद्द कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में मिलते हैं।

अपने प्रसिद्द पहाड़ी खानपान के अतिरिक्त हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में देखने के लिए बहुत कुछ है जैसे दूर तक फैले धूमिल ग्राम, झुलावदार पर्णपाती वन और नगरीय फैलावों से बाहर खुला क्षेत्र।

कई प्रसिद्ध व्यक्ति इस क्षेत्र से सम्बंधित है जैसे गोविन्द वल्लभ पन्त, नारायण दत्त तिवारी इत्यादि।

जनसांख्यकी[संपादित करें]

सन् २००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम क्षेत्र की कुल जनसँख्या ४,७९,१४० है। कुल जनसँख्या में से ५३% पुरुष और ४७% महिलाएं हैं। हल्द्वानी-काठगोदाम की साक्षरता दर ६९% है, जो राष्ट्रीय औसत ६५% से ऊपर है। पुरुष साक्षरता दर है ७३% और महिला साक्षरता दर है ६५%। हल्द्वानी-काठगोदाम की १४% जनसँख्या ६ वर्ष से ऊपर की है।

नागर प्रशासन[संपादित करें]

नगरपालिका हल्द्वानी काठगोदाम नोटिफाईड संख्या १६४-६६-६४ दिनांक २ फ़रवरी १८८७ द्वारा हल्द्वानी नगरपालिका कमेटी गठित की गयी तथा इसकी प्रथम बैठक १२ फ़रवरी १८९७ को हुई। १८८५ में यहां 'टाउन ऐक्ट' जारी हुआ। नगरपालिका परिषद हल्द्वानी-काठगोदाम को सन १९०४ में नोटिफाइड किया गया। संयुक्त प्रान्त की सरकार की अधिसूचना ३६०१/११-४३९-४० दिनांक २१ सितम्बर १९४२ में नोटिफाइड एरिया से तृतीय श्रेणी १९५६ में द्वितीय श्रेणी तथा उ.प्र. शासन विभाग की अधिसूचना संख्या ११७०९(iii)/XI ए-१९६६ लखनऊ, दिनांक ५ सितम्बर १९६६ के द्वारा १ दिसम्बर १९६६ से प्रथम श्रेणी नगरपालिका घोषित की गयी। उसके उपरांत महानगर क्षेत्र के बढ़ने के साथ ही सन 2011 में हल्द्वानी को नगर निगम का दर्जा दिया गया और इसके साथ देहरादून के बाद हल्द्वानी राज्य की दूसरी सबसे बड़ी नगर निगम बन गई

संस्कृति और जीवन शैली[संपादित करें]

यद्यपि यहाँ के सभी सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं पर कुमाऊँनी लोगों का बोलबाला है, लेकिन बहुत से क्षेत्रों और धर्मों के लोग हल्द्वानी में रहते हैं। यहाँ के खानपान, पहनावे, बोलियों और वास्तुशिल्प में विविधता देखी जा सकती है। दो दशक पहले तक ही ये एक छोटा क़स्बा था, लेकिन बहुत से कारणों से यहाँ पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से नगरीकरण बढ़ा जिसके चलते ये एक स्थानीय व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है और यहाँ कई आधारभूत सुविधाओं में वृद्धि हुई है जैसे सड़क, अस्पताल, विक्रय केन्द्र इत्यादि।

शिक्षण[संपादित करें]

हल्द्वानी उत्तर भारत के कुछ सबसे विकसित शैक्षिक केंद्रों में से एक है हल्द्वानी में ऐसे कई विद्यालय और संस्थान है जो बहुत ऊँचे स्तर की शिक्षा प्रदान करते है और ये उत्तराखण्ड के आवासीय शैक्षिक केंद्रों की तुलना में सस्ते हैं। कुछ प्रमुख विद्यालय है:- सैकरैड हार्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, श्री गुरु तेग बहादुर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नैनी वैली स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, निर्मला कॉन्वेंट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महर्षि विद्या मंदिर, कुईंस पब्लिक स्कूल, संत थेरेसा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, संत पॉल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, आर्यमान विक्रम बिड़ला अध्ययन संस्थान, बीरशिबा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, आम्रपाली संस्थान-लामाचौड़, डी.ए.वी. सेंटेनरी पब्लिक स्कूल, द हेरिटेज स्कूल जो यहाँ के सर्वोत्तम विद्यालयों में से एक है, बिड़ला विद्या मंदिर, दीक्षांत इंटरनेशनल प्री- स्कूल, जी.आई.सी, जी.जी.आई.सी, महात्मा गाँधी इंटर कॉलेज, एम.बी. इंटर कॉलेज और एच.एन. इंटर कॉलेज।

इसके अतिरिक्त निकट के पंतनगर में स्थित गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवँ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जो कृषि अनुसंधान के लिए देश का प्रमुख संस्थान है। चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा के लिए राज्य का सबसे बड़ा व पुराना चिकित्सा संस्थान सुशीला तिवारी मेमोरियल राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान। यहां मौजूद है इसके अतिरिक यहाँ एन.आई.आई.टी केंद्र भी है, जो स्थानीय युवाओं को वैश्विक आई.टी उद्योग में वृत्ति बनाने में सहायता देता है। हल्द्वानी में राज्य का उत्तराखंड मुफ्त विश्वविद्यालय मौजूद है आम्रपाली संस्थान एम बी पी जी कॉलेज महिला डिग्री कॉलेज जय अरिहंत कॉलेज इन सबके अतिरिक्त यहाँ बहुत से लघु-अवधि के लिए आजीविका उन्मुख ट्रेनिंग भी देते है जैसे इज़ीज्ञान, आई.आई.जे.टी, वीटा, आई आई टी, ।आई आई टी (महिला) आदि है हल्द्वानी में सैकड़ों ऐसे इंस्टीयूट है जो विभिन्न विषयों की कोचिंग करवाते है रक्षा के क्षेत्र में भी यहां कई निजी डिफेंस संस्थान मौजूद है जो कई प्रकार की ट्रेनिंग आदि करवाते है इन सब के कारण हल्द्वानी पठन पाठन के क्षेत्र में अत्यंत तेजी से विकसित होता है एक एजुकेशनल हब है

अर्थव्यवस्था[संपादित करें]

सभी महानगरों से सड़क मार्ग और दिल्ली,हावड़ा,लखनऊ,कानपुर और आगरा आदि शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा होने के कारण हल्द्वानी उत्तराखण्ड का एक प्रमुख व्यवसायिक केंद्र है। हल्द्वानी की मंडी ना सिर्फ भारत बल्कि एशिया की सबसे बड़ी फल, सब्ज़ी और अनाज मंडियों में से एक है हल्द्वानी अधिकांश कुमाऊं और गढ़वाल के कुछ भागों के लिए प्रवेश द्वार होने के कारण यह उत्तराखण्ड का प्रमुख राजस्व केंद्र है और अपने लाभप्रद स्थान के आधार पर ये पहाडों के लिए माल पारगमन के लिए एक आधार डिपो के रूप जाना जाता है। हल्द्वानी के आस-पास कई वृहद उद्योग स्थित है हल्द्वानी एवम् रुद्रपुर के बीच पंतनगर में राज्य का विशाल आईटी पार्क सिडकुल स्थित है जहां कई राष्ट्रीय एवम् अन्तर्राष्ट्रीय कंपनियां मौजूद है इसके अतिरिक्त हल्द्वानी के नजदीक लालकुआ एवम् सितारगंज रोड पर चोरगलिया के समीप कई इंडस्ट्रियल एरिया है

हल्द्वानी महानगरीय व उसके आस पास के क्षेत्रों में कई औद्योगिक इकाइयां है जो हल्द्वानी महानगर को महत्वपूर्ण व्यावसायिक,आर्थिक एवम औद्योगिक केंद्र बनाते है !


परिवहन[संपादित करें]

हल्द्वानी नगर के यातायात साधनों में विभिन्न परिवहन प्रणाली स्थापित है मुख्य रूप से शहर में दो मुख्य रेलवे स्टेशन है हल्द्वानी रेलवे स्टेशन नगर के मध्य में स्थित है एवं दूसरा रेलवे स्टेशन शहर के उत्तरी भाग में स्थित उत्तर भारत का अंतिम टर्मिनल काठगोदाम है महानगर के अंदर तीन मुख्य बस टर्मिनल है जिनमे रोडवेज बस स्टेशन जहा से कई अंत राजकीय बसे चोबिसो घंटे चलती है एवं इसके बगल में ही स्थित के.एम.ओ.यू.बस अड्डे से कुमाऊ के पर्वतीय भागो के लिए बसे चलती है! अंत शहरी बसे कालाढूंगी रोड पर स्थित बाजपुर बस अड्डे से चलती है नगर में एक कई सुविधाओं से युक्त आई.एस.बी.टी. निर्माणाधीन है इसके अतिरिक्त एक अधिकृत टैक्सी स्टैंड जो नैनीताल हाईवे पर स्थित है जहां से पर्वतीय क्षेत्रों एवं मैदानी क्षेत्रों के लिए टैक्सियां मिलती है। इसके अतिरिक्त अन्य महानगरों की तुलना में जहां बहुत खर्च पर नगर के अन्तर्गत आवागमन के लिए ऑटो रिक्शा हर समय पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं २८  किमी की दूरी पर हल्द्वानी नगर का पंतनगर हवाई अड्डा स्थित है जहां से दिल्ली एवं देहरादून के लिए नियमित उड़ानों का संचालन होता है


रोडवेज बस स्टेशन[संपादित करें]

उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा संचालित रोडवेज बस स्टेशन हल्द्वानी का मुख्य बस स्टेशन है। हल्द्वानी कोतवाली से कुछ दूरी पर स्थित इस स्टेशन के दो गेट हैं, जहां दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही होती है। यहां से उत्तराखण्ड तथा अन्य राज्यों के लिए अंतर्राज्यीय बस सेवाओं का संचालन होता है। हल्द्वानी से दिल्ली, कानपुर, प्रयागराज , देहरादून, बरेली, मुरादाबाद,लखनऊ, मेरठ, आगरा,अंबाला, लुधियाना,जालंधर,चंडीगढ़,अलीगढ़,हरिद्वार,रुड़की,ऋषिकेश,कुरूक्षेत्र तथा जयपुर समेत कई नगरों के लिए यहां से बस सेवाएं हर समय उपलब्ध रहती हैं। तथा पर्वतीय मार्गो के लिए कई रोडवेज की बसें चलती है जो अल्मोड़ा,पिथौरागढ़,रानीखेत,नैनीताल,गनाई,द्वारहाट,बागेश्वर,मुनस्यारी, कर्णप्रयाग आदि मार्गो पर जाती है नगर के अंतर्गत हल्द्वानी महानगरीय क्षेत्र में सभी सुविधाओं से सुसज्जित एक अंतर्राज्यीय बस अड्डा निर्माणाधीन है

केमू बस स्टेशन[संपादित करें]

केमू बस स्टेशन कुमाऊं मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड (केमू) द्वारा संचालित है। इस स्टेशन से लगभग ३१० बसें जुडी हुई हैं। केमू स्टेशन से अल्मोड़ा, रानीखेत, बागेश्वर तथा पिथौरागढ़ आदि अनेकों पर्वतीय नगरो के लिए निरंतर बस सेवाएं चलती हैं। नगर के केंद्र में स्थित होने के कारण यहां अक्सर अव्यवस्था का माहौल रहता है, जिससे निपटने के लिए इसे निर्माणाधीन आईएसबीटी में शिफ्ट करने की योजना है!

बाजपुर बस अड्डा[संपादित करें]

कालाढूंगी रोड पर लालडांट चौराहे के समीप स्थित यह अंत शहरी बस अड्डा हल्द्वानी को उसके आस पास के नगरो कालाढूंगी,रामनगर,काशीपुर,बाजपुर एवम कोटाबाग से बस परिवहन द्वारा जोड़ता है यहां से प्रत्येक १० से १५ मिनट पर इन शहरों के लिए बसे सुचारू रूप से मिलती है


बस डिपो[संपादित करें]

नगर के अन्तर्गत दो रोडवेज डिपो है जिनमें एक। हल्द्वानी डिपो और दूसरा काठगोदाम डिपो है जिनके द्वारा उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों का संचालन ओर रखरखाव किया जाता है काठगोदाम डिपो में कुमाऊ मंडल का रोडवेज मंडल कार्यालय स्थित है सैकड़ों बसे इन डिपो से कई राजकीय ओर अतः राजकीय मार्गो पर संचालित होती है


यातायात नगर[संपादित करें]

रामपुर रोड एवम् बरेली रोड के मध्य में एक यातायात नगर स्थित है जहा से विभिन्न ट्रकों का संचालन एवम् उनके रखरखाव का बड़े स्तर पर कार्य होता है


हल्द्वानी आईएसबीटी[संपादित करें]

हल्द्वानी में एक आईएसबीटी निर्माणाधीन है। यह आईएसबीटी ८ एकड़ क्षेत्र में फैला है, और द टाइम्स ऑफ इंडिया के एक खबर में इसे 'उत्तर भारत में सबसे बड़ा आईएसबीटी' कहा गया है। आईएसबीटी का निर्माण कार्य २०१४ में शुरू हुआ था, और इसकी औपचारिक आधारशिला २०१६ में रखी गई। लेकिन मई २०१७ में इसके निर्माण पर तब रोक लगा दी गई थी, जब श्रमिकों द्वारा निर्माण स्थल पर बड़ी संख्या में मानव कंकाल पाए गए थे

९ मई २०१७ को हल्द्वानी आईएसबीटी के निर्माण के दौरान ४० मानव कंकाल और ३०० 'कब्र-जैसी संरचनाएं' पाई गई। इन मानव अस्थि अवशेषों के बारे में विशेषज्ञों का मानना था कि ये बरेली के रोहिला सरदारों के हो सकते हैं जो १८५७ में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। एक और मत यह भी था कि ये अवशेष किसी महामारी, मलेरिया या अकाल के दौरान काल कवलित हो गये लोगों के भी हो सकते हैं। लेकिन जांच में पता चला है कि नरकंकाल केवल एक से डेढ़ साल पुराने थे।

इसके बाद आईएसबीटी को यहां से दूसरी जगह बनाने की योजना है उत्तराखंड मुफ्त विश्वविद्यालय के समीप स्थित भूमि पर यह आईएसबीटी बन सकता है हालाकि अभी इसका कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन संभावनाएं जताई जा रहे हैं कि इसी क्षेत्र पर आईएसबीटी का निर्माण होगा

यह बस टर्मिनल पूरी तरह से अंत्याधुनिक एवं उत्तर भारत का सबसे बड़ा बस अड्डा होगा जिसमें हल्द्वानी से विभिन्न स्थानों के लिए बसे चलेगी

टैक्सी स्टैंड[संपादित करें]

हल्द्वानी का टैक्सी स्टेशन भोटियापड़ाव में स्थित है। अन्य क्षेत्रों से उलट यहां टैक्सियां एक निर्धारित रूट पर अलग अलग यात्रियों से भरकर चलती हैं। हल्द्वानी टैक्सी स्टैंड से कुमाऊँ के दूरस्थ क्षेत्रों तक के लिए भी टैक्सियां उपलब्ध रहती हैं। हल्द्वानी-नैनीताल-भीमताल-भवाली-रामगढ़-मुक्तेश्वर; हल्द्वानी-खैरना-रानीखेत-द्वाराहाट, हल्द्वानी-अल्मोड़ा-कौसानी-बागेश्वर; हल्द्वानी-सेराघाट-बेरीनाग-थल-मुन्स्यारी; और हल्द्वानी-चम्पावत-लोहाघाट-पिथौरागढ़-धारचूला सबसे प्रसिद्ध टैक्सी रूट हैं, जहां के लिए टैक्सियां लगभग हर समय उपलब्ध रहती हैं।

पहले यहां से टैक्सियों के संचालन का दायित्व हल्द्वानी टैक्सी यूनियन के ऊपर था। नगर निगम ने टैक्सी स्टैंड के लिए २००७ में अपने एक पार्क को टैक्सी यूनियन को दिया था, जिसके एवज में यूनियन को प्रति टैक्सी १०० रुपये प्रतिमाह निगम को देने थे धीरे-धीरे यूनियन निगम को पैसा देने में आनाकानी करने लगा। १ मार्च २०१८ को टैक्सी यूनियन पदाधिकारियों की छात्रसंघ नेताओं से हुई लड़ाई के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने टैक्सी यूनियन का कार्यालय सीज कर दिया था। इसके बाद १२ मार्च २०१८ को नगर निगम ने टैक्सी स्टैंड को कब्जे में ले लिया। अब यहां से टैक्सियाें का संचालन नगर निगम स्वयं कर रहा है।

रेल यातायात[संपादित करें]

सन् १८८३-८४ में बरेली और काठगोदाम के बीच रेलमार्ग बिछाया गया। ६६ मील लंबा यह रेलमार्ग "रुहेलखंड और कुमाऊँ रेलवे" (अंग्रेज़ी: Rohilkund and Kumaon Railway) द्वारा संचालित एक निजी रेलमार्ग था। रुहेलखंड और कुमाऊँ रेलवे का बाद में ब्रिटिश भारत सरकार ने अधिग्रहण कर लिया, और १ जनवरी १९४३ को "अवध और तिरहुत रेलवे" में इसका विलय कर दिया। १४ अप्रैल १९५२ को अवध तिरहुत रेलवे, असम रेलवे और बॉम्बे, बड़ौदा और मध्य भारत रेलवे के कानपुर-अक्वेंरा खंड को एक साथ मिला कर उत्तर पूर्व रेलवे का गठन किया गया, जो वर्तमान में भारतीय रेलवे के १६ मण्डलों में से एक है!

शहर में मुख्य रूप से दो रेलवे स्टेशन है जिसमें हल्द्वानी रेलवे स्टेशन नगर के मध्य में स्थित है एवं दूसरा शहर के उत्तरी भाग में स्थित उत्तर भारत के अंतिम रेलवे टर्मिनल में से एक काठगोदाम रेलवे स्टेशन है

हल्द्वानी रेलवे स्टेशन[संपादित करें]

हल्द्वानी रेलवे स्टेशन नगर का मुख्य रेलवे स्टेशन है, और हल्द्वानी के बनभूलपुरा में नगर के केंद्र में स्थित है। रेलवे स्टेशन का स्टेशन कोड एच.डी.डब्ल्यू (HDW) है, और यह भारतीय रेलवे के पूर्वोत्तर रेलवे क्षेत्र के इज्जतनगर रेलवे डिवीजन के मुख्यालय से ९९ किमी दूर है। स्टेशन पर 3 प्लेटफार्म हैं और इन पर डीजल इंजन, सिंगल ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का उपयोग करते हैं। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई ४४३ मीटर है। २४ अप्रैल, १८८४ के दिन पहली रेलगाड़ी लखनऊ से हल्द्वानी पहुंची और बाद में रेलमार्ग काठगोदाम तक बढ़ा दिया गया।

काठगोदाम रेलवे स्टेशन[संपादित करें]

काठगोदाम रेलवे स्टेशन ना सिर्फ उत्तराखंड बल्कि भारत का भी एक प्रसिद्ध रेलवे टर्मिनल है यह नगर के केंद्र से ७ किमी उत्तर काठगोदाम में शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। काठगोदाम उत्तर पूर्व रेलवे का अंतिम टर्मिनल है, जो कुमाऊं को दिल्ली, देहरादून, जैसलमेर, कानपुर सेंट्रल,लखनऊ, जम्मूतवी,मुरादाबाद और हावड़ा आदि शहरों से जोड़ता है। इसका स्टेशन कोड केजीएम है, और यहाँ एकल ब्रॉड गेज रेलवे लाइन पर ३ प्लेटफार्म हैं, जो डीजल इंजन का उपयोग करते हैं।

इसके अतिरक्त लालकुआं जंग्स्शन भी हल्द्वानी का एक प्रमुख रेलवे जंगशन है जहां से हल्द्वानी की ट्रेनों की दिशा बदलती है और यह से विभिन्न स्थानों के लिए यात्री ट्रेन बदलते है

हल्द्वानी से विभिन्न स्थानों की दूरी =[संपादित करें]

नैनीताल - 41 किमी

भीमताल - 28 किमी

लालकुआ - 18 किमी

पंतनगर हवाई अड्डा - 33 किमी

जौली ग्रांट हवाई अड्डा - 256 किमी

इंदरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली - 292 किमी

चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लखनऊ - 355 किमी

रुद्रपुर - 33 किमी

रामनगर - 53 किमी

कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान - 53

बाजपुर - 48 किमी

काशीपुर - 79 किमी

किच्छा - 38 किमी

सितारगंज - 49 किमी

टनकपुर - 99 किमी

खटीमा - 75 किमी

नानकमत्ता - 59 किमी

चम्पावत - 172 किमी

अल्मोड़ा - 89 किमी

रानीखेत - 82 किमी

पिथौरागढ़ - 190 किमी

बागेश्वर - 161 किमी

कौसानी - 141 किमी

मुक्तेश्वर - 68 किमी

मुनस्यारी - 285 किमी

दिल्ली - 233 किमी

रामपुर - 77 किमी

मुरादाबाद - 102 किमी

अमरोहा - 147 किमी

नजीमाबाद - 180 किमी

बिजनौर - 169 किमी

मेरठ - 225 किमी

सहारनपुर - 297

बरेली - 100 किमी

लखनऊ - 350 किमी

देहरादून - 272 किमी

हरिद्वार - 219 किमी

ऋषिकेश - 238 किमी

रुड़की - 267 किमी

कोटद्वार - 204 किमी

गाजियाबाद - 246 किमी

गुरुग्राम - 304 किमी

जयपुर - 592 किमी

चंडीगढ़ - 431 किमी

अंबाला - 462 किमी

लुधियाना - 569 किमी

जालंधर - 631 किमी

कानपुर - 368 किमी

प्रयागराज - 549 किमी

अलीगढ़ - 243 किमी


हवाई यातायात[संपादित करें]

पंतनगर हवाई अड्डा[संपादित करें]

पंतनगर विमानक्षेत्र हल्द्वानी का हवाई अड्डा पंतनगर में स्थित है, जो हल्द्वानी नगर से २८ किमी (१७ मील) उत्तर में स्थित है। पंतनगर हवाई अड्डा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा संचालित है, और यहां से दिल्ली और देहरादून के लिए घरेलू उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। इसमें एक ही रनवे है, जो कि ४,५०० फीट (१,४०० मीटर) लंबा है, और टर्बोप्रॉप विमानों को संभालने में सक्षम है। अन्य नगरों के लिए यहां से कई उड़ानें प्रस्तावित है

इसके अतिरिक्त हल्द्वानी के पास के इलाकों में एक सभी सुविधाओं से युक्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रस्तावित है जिसके बनने के बाद हल्द्वानी नगर कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय नगरों के साथ सीधा जुड़ जाएगा

निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली के पालम में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो कि हल्द्वानी से २८२ किलोमीटर (१७५ मील) की दूरी पर है।

यातायात[संपादित करें]

हल्द्वानी-काठगोदाम से गुजरने वाली प्रमुख सड़कों में राष्ट्रीय राजमार्ग १०९, तथा उत्तराखण्ड राज्य राजमार्ग ५, १० और ४० प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त नगर में एक रिंग रोड भी निर्माणाधीन हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग १०९, जिसे नैनीताल रोड, या बरेली-बागेश्वर हाईवे भी कहा जाता है, रुद्रपुर से शुरू होकर पंतनगर, हल्द्वानी, नैनीताल, भवाली, अल्मोड़ा, रानीखेत, द्वाराहाट, चौखुटिया, गैरसैण तथा आदिबद्री होते हुए कर्णप्रयाग तक जाता है। ५०,००० से अधिक वाहन इस राजमार्ग से होकर यात्रा करते हैं। इस सड़क का निर्माण सन् १८८२ में कुमायूं के आयुक्त सर हेनरी रैम्से द्वारा नैनीताल और काठगोदाम को बरेली से जोड़ने के लिए किया गया था। अविभाजित उत्तर प्रदेश में इसे राज्य राजमार्ग ३७ कहा जाता था, और यह बरेली से शुरू होकर बागेश्वर तक जाता था। कुछ समय बाद इसका लालकुआँ से आगे का भाग राष्ट्रीय राजमार्ग ८७ का हिस्सा बन गया, जो रामपुर से कर्णप्रयाग तक जाता था। २०१० में भारत सरकार द्वारा सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के नाम बदल दिए जाने के बाद इसे राष्ट्रीय राजमार्ग १०९ कहा जाने लगा।

उत्तराखण्ड राज्य राजमार्ग ५, जिसे रामपुर रोड भी कहा जाता है, हल्द्वानी को मटकोटा और दिनेशपुर होते हुए गदरपुर से जोड़ता है। उत्तराखण्ड राज्य राजमार्ग १० काठगोदाम से शुरू होता है, और भीमताल, खुटानी, पदमपुर, धानाचूली, पहाड़पानी, शहरफाटक, मौरनौला, देवीधुरा और लोहाघाट होते हुए पंचेश्वर में समाप्त होता है। उत्तराखण्ड राज्य राजमार्ग ४० दो अलग अलग मार्गों के नाम से प्रख्यात है; पहला कालाढूंगी रोड, जो मंगल पड़ाव से शुरू होकर पश्चिम की ओर कालाढूंगी होते हुए रामनगर तक जाता है, और दूसरा चोरगलिया रोड, जो काठगोदाम से शुरू होकर दक्षिण की ओर चोरगलिया होते हुए सितारगंज तक जाता है।

हल्द्वानी में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए लोनिवि ने साल २०१६ में रिंग रोड का प्रस्ताव तैयार किया था। शहर के बाहर चारों ओर बनने वाली रिंग रोड करीब ३५ किलोमीटर फोरलेन बननी है। यह सड़क कालाढूंगी रोड पर लामाचौड़ से शुरू होगी, और वहां से रामपुर रोड पर फुटकुआं से होते मोटाहल्दू/हल्दूचौड़ में नेशनल हाईवे १०९ को पार करके ग्रेटर हल्द्वानी गौलापार में चोरगलिया रोड के बसंतपुर/दानीबंगर में मिलेगी। यहां से काठगोदाम तक चोरगलिया रोड, और फिर काठगोदाम और रानीबाग के बीच में हनुमान मंदिर के करीब से बन रही पीएमजीएसवाई की सड़क से होते हुए ब्यूराखाम गांव के ऊपर से जमरानी कॉलोनी के ऊपर वन क्षेत्र से होकर फतेहपुर में कालाढूंगी रोड पर जुड़ जाएगी।

२०१५ में उत्तराखण्ड की वित्त मंत्री, डा. इंदिरा हृदयेश ने अमर उजाला से बातचीत में कहा था कि "लोगों को जाम से निजात दिलाने के लिए जल्द ही एक रिंग रोड का निर्माण कराया जाएगा"। इसके बाद २६ दिसंबर २०१६ को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने देहरादून में इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। उस समय इसकी लागत ५०० करोड़ रुपये आंकी गयी थी। इसको मंजूरी मिलने के बाद रिंग रोड सर्वे का काम अगस्त २०१७ में शुरू हुआ, और अक्तूबर महीने के पहले हफ्ते में कंपनी ने रिपोर्ट बनाकर लोनिवि को भेजी थी, लेकिन इसमें एक तरफ की सड़क का खाका सही नहीं मिला। इस पर लोनिवि ने दोबारा सर्वे करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद कंपनी ने प्रस्ताव में बदलाव किया। २२ अप्रैल २०१७ को उत्तराखंड के मख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसके लिए ४०० करोड़ रूपये अनुमोदित कर दिए, और फिर नवंबर २०१७ में केंद्र सरकार ने इस परियोजना का आधा खर्च उठाने की घोषणा कर दी। सड़क अभी निर्माणावस्था में है।

खेलकूद[संपादित करें]

नगर के अन्तर्गत विभिन्न क्रीड़ा केंद्र स्तिथ है जहां विभिन्न प्रकार की क्रीड़ा सुविधाएं उपलब्ध है

इंदरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम

नगर के पूर्वी भाग ( ग्रेटर हल्द्वानी ,गोलापार) में गोला नदी के तट पर सम्पूर्ण सुविधाओं से युक्त अन्तर्राष्ट्रीय क्रीड़ा कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम है जिसमें इनडोर एवं आउटडोर दोनों प्रकार के स्टेडियम है अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के साथ इस स्टेडियम को तैयार किया जा रहा है जिसमें कई प्रकार की क्रीड़ा सुविधाएं मिलेंगी इस स्टेडियम की क्षमता लगभग पच्चीस हजार से अधिक व्यक्तियों की है इसके पूरी तरह से बन जाने के बाद इसमें विभिन्न प्रकार के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेलो को करवाने की योजना है

सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम

सिटी स्टेडियम नगर के बीचोबीच स्तिथ है जहां कई राजकीय एवं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगताएं होती रहती है वर्तमान में हल्द्वानी की सभी क्रीड़ा प्रतियोगिता इसी स्टेडियम में संपन्न होती है


एमबीपीजी स्टेडियम

एमबीपीजी स्टेडियम मुख्य रूप से मोतीराम बाबूराम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय का मैदान है जिसमें अधिकतर महाविद्याल से सम्बंधित क्रीड़ा प्रतियोगिताएं या नगर के अन्य कार्यक्रम सम्पन्न होते हैं

इसके अतिरिक्त नगर मे कई बड़े छोटे मैदान है जिनमे कई प्रकार के खेल खेले जाते है एवं कई इनडोर खेलो के लिए भी उचित स्थान है

पर्यटन[संपादित करें]

नगर में घूमने के लिए कई सारे स्थान है जहां जा कर आप अपने रोमांच एवं घूमने की प्रवृति को और ज्यादा बड़ा सकते है

शीतला माता मंदिर

नगर के उत्तर पर्वतीय क्षेत्र काठगोदाम के रानीबाग में स्तिथ शीतला माता मंदिर बहुत प्रसिद्ध है जहां माता शीतला देवी का मंदिर है यहां प्रकृति ने अपनी अनुपम छटा बिखेरी है एवं शांति का वातावरण यहां आने वालों को भाव विभोर कर देता है

अन्तर्राष्ट्रीय चिड़ियाघर एवं सफारी

ग्रेटर हल्द्वानी गोलापर मे निर्माणाधीन अन्तर्राष्ट्रीय चिड़ियाघर अपने आप में पर्यटन का एक वृहद केंद्र होगा इस चिड़ियाघर को कार्बन न्यूट्रल जू के रूप में विकसित किया जा रहा है और वन विभाग की कोशिश है कि इसमें ईंट, सरिया आदि की जगह केवल लकड़ी का ही उपयोग हो। 400 हेक्टेयर में बन रहे इस चिड़ियाघर में रोशनी की व्यवस्था के लिए भी सौर ऊर्जा का ही उपयोग किया जाएगा। चिड़ियाघर अपने आप में बहुत ही आकर्षक और रोमांच से भरा होगा जिसमें पर्यटक सफारी के माध्यम से वृहद स्तर पर वन्य जीव एवं वनस्पतियों को देख सकेंगे

गोला बैराज

हल्द्वानी के पर्यटन आकर्षणों की श्रृंखला में आप गोला बैराज की सैर का प्लान बना सकते हैं। यह बैराज गोला नदी पर बना है, जो हिमालय से निकलकर रामगंगा में मिल जाती है। यह नदी काठगोदाम से होकर भी गुजरती है, जिसके किनारे कई शानदार प्राकृतिक आकर्षण मौजूद हैं। इस नदी पर बना बांध भारी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। अपनी खूबसूरती के कारण यह स्थल एक पिकनिक स्पॉर्ट बन चुका है, जहां वीकेंड पर लोग मौज-मस्ती और सुकून के पर बिताने के लिए आते हैं। यह बांध स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के पर्यटकों के मध्य भी काफी लोकप्रिय है। कुछ अलग अनुभव के लिए आप यहां आ सकते हैं।

कालीचौड़ मंदिर

काठगोदाम के पास बियावान जंगल में स्थित कालीचौड़ मंदिर प्राचीन काल से ऋषि-मुनियों की आराधना और तपस्या का केन्द्र रहा है। हिमालयी भू-भाग में काली के जितने भी प्राचीन शक्तिपीठ व मन्दिर हैं, उन सभी से यह ज्यादा फ़लदायी कहा गया है। कहते हैं कि यहां पर की गयी पूजा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

स्मॉल कनॉट प्लेस

दिल्ली स्थित कनॉट प्लेस की तर्ज़ पर नगर के अंदर एक छोटा कनॉट प्लेस स्थित है जिसे प्राय लोग स्मॉल सीपी के नाम से पुकारते है यहां कई शॉपिंग सेंटर एवं खाने पीने की कई स्टोर स्तिथ है

स्वास्थ्य[संपादित करें]

हल्द्वानी उत्तराखंड के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में से एक है जहां कई प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है यहां कई सार्वजनिक एवं निजी स्वास्थ केंद्र स्तिथ है सुशीला तिवारी राजकीय चिकत्सालय हल्द्वानी ही नहीं अपितु कुमाऊ क्षेत्र का सर्वाधिक प्रसिद्ध अस्पताल है जिसमें कई प्रकार की स्वास्थ सुविधाएं उपलब्ध है एवं यही राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान भी स्थित है इसके अतिरिक्त नगर में सोबन सिंह जिन्ना बेस चिकत्सालय है भी है जहां तमाम चिकित्सा सुविधाएं 24 घंटे मिलती है महिलाओं के लिए एक सुपर स्पेशलिस्ट राजकीय महिला चिकित्सालय भी स्तिथ है इसके अतिरिक्त नगर में कई चिकत्सालय मौजूद है जिनमे बृजलाल हॉस्पिटल,कृष्ण हॉस्पिटल,सेंट्रल हॉस्पिटल,नीलकंठ हॉस्पिटल, बॉम्बे हॉस्पिटल,ओली हॉस्पिटल, साई हॉस्पिटल,विवेकानंद हॉस्पिटल,तिवारी मेटरनिक एवं नर्सिंग होम,, शंकर हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर,संजीवनी हॉस्पिटल, श्री राम हॉस्पिटल,कल्याण हॉस्पिटल,सिटी हॉस्पिटल,निर्वाण हॉस्पिटल आदि प्रमुख है

खानपान[संपादित करें]

कुछ स्थानीय पकवान हैं:-

  • बाल मिठाई
  • भट की झोई (कुमाऊँनी में "चुटकैणी")
  • गाठी
  • गढेरी की सब्ज़ी
  • गौहौत की दाल
  • रस भात
  • झोई भात
  • बथुए का परांठा
  • मंडुए की रोटी
  • कापा भारत
  • दही की झोई
  • पापड़ की सब्ज़ी
  • पीनालू की सब्ज़ी
  • माल्टा (फल)
  • आलू गुटुक
  • चंदा देवी और सलादी का रायता
  • पिनालु गुटुक
  • तिनर
  • लाई का साग
  • काफल (फल)
  • खुमैनी (फल)
  • पुलम (फल)

भविष्य की परियोजनाएँ[संपादित करें]

उत्तराखण्ड का एक प्रमुख नगर होने के कारण यहाँ के लिए कई विकास परियोजनाएं बनायीं गयी है जिसमें स्टेडियम, बस अड्डा, औद्योगिक परिसर जैसी अतिरिक्त आधारभूत संरचनाएं प्रमुख है। पिछले २० वर्षो में तेज़ी से हुए नगरीकरण के चलते यहाँ आधारभूत सुविधाएं चरमराने लगीं है इसके अतिरिक्त हल्द्वानी से गोला नदी के पार गोलापार में ग्रेटर हल्द्वानी निर्माणाधीन है जिसे नए हल्द्वानी शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है ये नगर अपनी "हरे नगर" की उपाधि को बचाए रखने के लिए संघर्षरत है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "एक पेड़ के नाम से जाना जाता है पहाड़ों पर बसा ये खूबसूरत शहर, जानें- इसकी खासियत". Dainik Jagran. अभिगमन तिथि 13 नवम्बर 2018.
  2. "Climate: Haldwani". climate-data.org. अभिगमन तिथि July 4, 2017.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]