पिजिन

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इसे कबूतर के लिए अंग्रेज़ी में प्रयुक्त शब्द Pigeon (पिजिन) न समझा जाए. तत्काल संदेश क्लायंट के लिए देखें Pidgin (सॉफ़्टवेयर).

पिजिन (Pidgin) (उच्चारित/ˈpɪdʒɪn/) एक ऐसी सरल मिश्रित भाषा है, जो ऐसे दो या अधिक समूहों के बीच संचार के साधन के रूप में विकसित होती है जिनके बीच कोई आम भाषा न हो. यह आम तौर पर व्यापार या ऐसी परिस्थितियों में प्रयुक्त होती है, जहां दो समूह अपने देश की भाषा से अलग भाषाओं को बोलते हों (पर जहां समूहों के बीच कोई आम भाषा मौजूद न हो). मूल रूप में, पिजिन (मिश्रित भाषा) भाषाई संचार का एक सरलीकृत साधन है, जो समुदायों के लोगों के बीच तत्काल निर्मित होता है। पिजिन किसी बातचीत करने वाले समुदाय की देशीय भाषा नहीं है, बल्कि द्वितीय भाषा के रूप में सीखी गई भाषा है।[1][2] पिजिन का निर्माण विविध अन्य भाषा और संस्कृतियों के शब्दों, ध्वनियों या संकेत भाषाओं से हो सकता है। आम तौर पर अन्य भाषाओं की तुलना में पिजिन की प्रतिष्ठा कम है।[3]

भाषा के सभी सरलीकृत या "खंडित" रूप (अशिक्षितों की भाषा) पिजिन नहीं हैं। प्रत्येक पिजिन के उपयोग संबंधी मानदंड अलग हैं जिन्हें पिजिन में प्रवीणता हासिल करने के लिए सीखना ज़रूरी है।[4]

शब्द-व्युत्पत्ति[संपादित करें]

शब्द pidgin (पिजिन) के मूल के बारे में अनिश्चितता है। पहली बार pidgin शब्द 1850 में मुद्रित हुआ था और शब्द की व्युत्पत्ति के बारे में अनेक स्रोत मौजूद हैं। उदहारण के लिए:

  • अंग्रेज़ी शब्द business (बिज़नेस) का चीनी उच्चारण.[5]
  • अंग्रेज़ी pigeon (कबूतर), एक पक्षी जिसका उपयोग कभी-कभी संक्षिप्त लिखित संदेश ले जाने के लिए किया जाता था, विशेष रूप से आधुनिक दूरसंचार के विकसित होने से पहले वाले ज़माने में.[6]

पारिभाषिक शब्दावली[संपादित करें]

शब्द pidgin जिसे पहले pigion वर्तनी के साथ भी उच्चरित किया जाता रहा है,[5] जो मूल रूप से चीनी पिजिन अंग्रेज़ी को वर्णित करने के लिए प्रयुक्त होता था, बाद में किसी भी पिजिन (मिश्रित भाषा) को निर्दिष्ट करने के लिए लोकप्रिय हुआ।[7] पिजिन का उपयोग स्थानीय पिजिन (मिश्रित) या क्रियोल (creole) (संकर भाषा) के लिए विशिष्ट नाम के रूप में निर्दिष्ट की जा सकती है, जहां वह बोली जाती है। उदाहरण के लिए, टोक पिसिन (Tok Pisin) नाम अंग्रेज़ी शब्द talk pidgin से व्युत्पन्न है। इसको बोलने वाले आम तौर पर अंग्रेज़ी बोलते समय इसका उल्लेख बस "pidgin" (पिजिन) के रूप में करते हैं।[तथ्य वांछित]

शब्द jargon (ख़ास बोली) का भी उपयोग पिजिन को वर्णित करने के लिए होता है और कुछ पिजिनों के नामों में भी पाया गया है, जैसे कि चिनूक जार्गन (Chinook Jargon). इस संदर्भ में, आजकल भाषाविद jargon (ख़ास बोली) का उपयोग विशेषतः अल्पविकसित प्रकार के पिजिन को निरूपित करने के लिए करते हैं;[8] हालांकि, यह प्रयोग प्रायः दुर्लभ है और शब्द jargon (ख़ास बोली) अक्सर किसी पेशे के विशिष्ट शब्दों को संदर्भित करता है।

पिजिन Tok Pisin (टोक पिसिन) जैसे व्यापार की भाषा के रूप शुरू हो सकते हैं या बन सकते हैं। व्यापारिक भाषाएं अपने आप में अक्सर स्वाहिली, फ़ारसी या अंग्रेज़ी जैसी विकसित भाषाएं हो सकती है।[तथ्य वांछित] व्यापार की भाषाएं "यानीय भाषाओं" की ओर अभिमुख होती हैं, जबकि पिजिन देशी भाषा के रूप में विकसित होती हैं।[तथ्य वांछित]

पिजिन भाषाओं के बीच आम लक्षण[संपादित करें]

चूंकि पिजिन भाषा मौलिक रूप से संचार का सरल रूप है, आम तौर पर जहां तक संभव हो उसका व्याकरण और स्वर-विज्ञान सरल होता है और सामान्यतः इसमें शामिल होते हैं:

  • सरल वाक्य संरचना (जैसे, कोई एम्बेडेड वाक्य आदि नहीं)
  • अक्षर संकेतों की कमी या विलोपन
  • व्यंजन समूहों की कटौती या मध्यागम द्वारा उनका विघटन
  • मूल स्वर, जैसे कि/a, e, i, o, u/
  • स्वरों की अनुपस्थिति, जैसा कि पश्चिम अफ्रीकी और एशियाई भाषाओं में पाए जाते हैं।
  • काल को इंगित करने के लिए अलग शब्दों का उपयोग, जो आम तौर पर क्रिया से पहले होते हैं
  • बहुवचन, अतिशयोक्ति और अन्य शब्दभेद का प्रतिनिधित्व करने के लिए पुनरावृत्ति का प्रयोग जो अवधारणा की वृद्धि को निरूपित करते हैं
  • रूपात्मक-ध्वनिग्रामिकी भिन्नता की कमी

पिजिन विकास[संपादित करें]

पिजिन के निर्माण में आम तौर पर निम्न की आवश्यकता होती है:

  • लंबे समय तक, विभिन्न भाषाई समुदायों के बीच नियमित संपर्क
  • दोनों के बीच संवाद की ज़रूरत
  • एक व्यापक, सुलभ अंतर्भाषा की अनुपस्थिति (या व्यापक प्रवीणता की अनुपस्थिति)

इसके अलावा, कीथ व्हीनोम (साँचा:Harvcoltxt में) सुझाव देते हैं कि पिजिन के निर्माण के लिए तीन भाषाओं की ज़रूरत है, जिसमें एक (उच्चस्तरीय) स्पष्ट रूप से अन्य से प्रभावी हो.

अक्सर यह माना जाता है कि जब पिजिन बोलने वाले माता-पिता की एक पीढ़ी अपने बच्चों को उसे प्रथम भाषा के रूप में सिखाती है, तो पिजिन क्रियोल भाषा बन जाती है। उसके बाद क्रियोल समुदाय की देशी भाषा बनने के लिए वर्तमान भाषाओं के मिश्रण की जगह ले लेती है (जैसे कि सिएरा लियोन में क्रियो और पापुआ न्यू गिनी में टोक पिसिन). तथापि, सभी पिजिन क्रियोल भाषाएं नहीं बनती हैं; इस चरण से पहले ही पिजिन समाप्त हो सकती है (उदा. भूमध्यसागरीय लोक भाषा).

सालिकोको मफ़वेने जैसे अन्य विद्वान तर्क देते हैं कि पिजिन और क्रियोल भिन्न परिस्थितियों में स्वतंत्र रूप से उभरती हैं और ज़रूरी नहीं कि क्रियोल से पहले हमेशा ही पिजिन हो और ना ही पिजिन से क्रियोल विकसित होती हैं। मफ़वेने के अनुसार, पिजिन व्यापार कॉलोनियों के "दैनंदिन पारस्परिक क्रिया के लिए अपनी देशी बोली को संरक्षित करने वाले प्रयोक्ताओं" के बीच उभरी. इस बीच, क्रियोल उपनिवेश कॉलोनियों में विकसित हुई जहां यूरोपीय भाषा बोलने वाले, अक्सर मानक से कम भाषाई स्तर वाले अनुबंधित कर्मचारी, ग़ैर-यूरोपीय दासों के साथ व्यापक रूप से परस्पर बातचीत करते थे, जिसमें ग़ुलामों के ग़ैर-यूरोपीय देशी भाषाओं के कुछ शब्द और विशेषताएं आत्मसात हो जाते थे, जिसके परिणामस्वरूप मूल भाषा का भारी क्रमिक-परिवर्तित संस्करण सामने आ जाता है। ये सेवक और ग़ुलाम, न केवल उच्चस्तरीय भाषा बोलने वाले के साथ संपर्क की ज़रूरत पड़ने पर ही नहीं, बल्कि अपनी दैनंदिन स्थानीय बोली के रूप में क्रियोल का उपयोग करने लगते हैं।[9]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • बास्क-आइसलैंडिक पिजिन
  • बेयरलाचास
  • क्रियोल भाषा
  • विक्रियोलीकरण
  • डेलावेयर भाषाएं#व्युत्पन्न भाषाएं
  • इंगरिश या चिंग्लिश
  • हवाईयन पिजिन
  • अंतर्राष्ट्रीय संकेत
  • जमैकाई क्रियोल
  • आम भाषा
  • अंग्रेज़ी आधारित पिजिनों की सूची
  • भूमध्यसागरीय सामान्य भाषा या साबिर
  • मिश्रित भाषा
  • नाइजीरियाई पिजिन
  • व्यापार अंचल

नोट[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • Bakker, Peter (1994), "Pidgins", in Jacques Arends; Pieter Muysken; Norval Smithh, Pidgins and Creoles: An Introduction, John Benjamins, pp. 26–39 
  • Hymes, Dell (1971), Pidginization and Creolization of Languages, Cambridge University Press, ISBN 0-521-07833-4 
  • McWhorter, John (2002), The Power of Babel: The Natural History of Language, Random House Group, ISBN 0-06-052085-X 
  • Sebba, Mark (1997), Contact Languages: Pidgins and Creoles, MacMillan, ISBN 0-333-63024-6 
  • Thomason, Sarah G.; Kaufman, Terrence (1988), Language contact, creolization, and genetic linguistics, Berkeley: University of California Press, ISBN 0-520-07893-4 
  • Todd, Loreto (1990), Pidgins and Creoles, Routledge, ISBN 0415053110 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]