कुड़माली भाषा

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कुड़मालि
कुरमाली
पंचपरगनिया
बोलने का  स्थान भारत, बांग्लादेश
तिथि / काल 1997
क्षेत्र झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा
समुदाय कुरमी कुड़मी महतो
मातृभाषी वक्ता 310,000
भाषा परिवार
लिपि देवनागरी लिपि,बांग्ला लिपि,उड़िया लिपि
भाषा कोड
आइएसओ 639-3 इनमें से एक:
kyw – Kurmali
tdb – Panchpargania

कुड़माली भाषा झारखण्ड की एक प्रमुख भाषा है। इसे कुरमाली, कुड़मालि भी लिखते और बोलते हैं। यह एक अन्तर-प्रान्तीय भाषा है जिसका विस्तार क्षेत्र "उड़िष्य शिखर, नागपुर, आधा-आधी खड़गपुर" लोकोक्ति से ज्ञात होता है। कुड़मालि के क्षेत्र राजनितिक मानचित्र द्वारा परिसीमित नहीं किया जा सकता। यह केवल छोटानागपुर में ही नहीं, बल्कि उड़ीसा में क्योंझर, मयूरगंज, सुंदरगढ़, पश्चिम बंगाल के अंतर्गत पुरुलिया, मिदनापुर, बंकुरा, मालदा, दिनाजपुर के सीमावर्ती इलाकों, जो बिहार से सटे हैं, एवं छोटानागपुर के राँची, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, सिंहभूम[1][2][3] में बोली जाती है। यह भाषा केवल कुरमी कुड़मी महतो तक ही सीमित नहीं, बल्कि इनके साथ निवास करने वाले अन्य जातियों के भाव-विनियम का भी साधन है। यह मुख्यतः देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, परन्तु इसके साहित्य बांग्ला और उड़िया में भी उपलब्ध है।

कुछ विद्वानों का विचार है कि चर्यापद की भाषा, कुड़माली के सबसे निकट है। [4] व्यापार की बोली के रूप में इसे 'पंचपरगनिया' (बांग्ला : পঞ্চপরগনিয়া) कहा जाता है, जिसका अर्थ ह यह पाँच परगनों में बोली जाती है। इसे टमरिया भी कहते हैं।

कुछ वाक्यांश[संपादित करें]

वाक्यांश अनुवाद हिन्दी अनुवाद
मर नाम अघनु हेकेइक। मेरा नाम अघनु है।
तञ किसन आहिस तुम कैसे हो ?
मञ बेस आहोँ। मैं ठीक हूँ।
किना? क्या?
कन? कौन?
किना लागि क्युं?
किसन? कैसे?
इहां आउएं। यहां आ।
मञ डिड़ा सझाहँ। मैं घर जा रहा हूँ।
मञ खाइलँ। मैने खाया है।
मञ खाइ रहलि। मैने खाया था।
मञ जाम/जाब। मैं जाउंगा।
हामरा दुइअ जाइहँ। हम दोनो जाते हैं।
तञ जाइस। तुम जाते हो।
तञ चिसअहिस। तुम लिख रहे हो।
तञ आवे। तुम आना।
हामे चिसअहि। हम लिख रहे हैं।
हामे चिसल आइहे। हम लिखे हैं।
अंइ आउएइक। वह आता है।
अञ जाइस। वह जा रहा है।
अञ आउअ हेलउ। वह आ रहा था।
अञ खेलतउ। वह खेलेगा।
अञ रटि खाइल आहेइक। वे रोटी खाये हैं।
अखरा गेला वे गयें।
अञ घार डहरतउ। वे घर जायेंगे।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Kudmali is the mother tongue of the Kudmis. पृ॰ 119.
  2. "Ethnologue".
  3. Kudmali Language. पृ॰ 277.
  4. Basu, Sajal (1994). Jharkhand movement: ethnicity and culture of silence – Sajal Basu – Google Books. Retrieved 25 August 2012.
  • कुरमाली साहित्य: विविध सन्दर्भ, लेखक डा. एच.एन. सिंह, प्रकाशक- कुरमाली भाषा परिषद्, राँची
  • कुरमाली लोक गीत: साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन, डा. संतोष कुमारी जैन।
  • कुडमालि फुल-फर आर भाड-आर, कला संस्कृति विकास केंद्र, आसनतालिया, चक्रधरपुर.
  • कुरमालि कृष्ण-काव्य : डॉ० विजय कुमार मुखर्जी
  • कुरमाली लोक साहित्य : डॉ० गीता कुमारी सिंह
  • जनजाति परिचित : लक्ष्मीकांत महतो

इन्हें भी देखें[संपादित करें]