देवघर

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देवघर
—  नगर  —
देवघर is located in Jharkhand
देवघर
देवघर
निर्देशांक : 24°29′N 86°42′E / 24.48°N 86.7°E / 24.48; 86.7निर्देशांक: 24°29′N 86°42′E / 24.48°N 86.7°E / 24.48; 86.7
देश भारत
राज्य झारखण्ड
जिला देवघर
क्षेत्र
 • कुल 2
ऊँचाई 254
जनसंख्या (2011)
 • कुल 203
 • दर्जा झारखण्ड में 5वाँ
 • घनत्व 602
भाषा
 • आधिकारिक हिन्दीसंथाली
समय मण्डल भारतीय मानक समय (यूटीसी +५:३०)
पिन 814112
दूरभाष कोड 00916432
वाहन पंजीकरण JH-15 (जेएच १५)
लिंगानुपात 921 /
जालस्थल babadham.org

देवघर भारत के झारखंड राज्य का एक शहर है। यह शहर हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल है। इस शहर को बाबाधाम नाम से भी जाना जाता है क्योंकि शिव पुराण में देवघर को बारह जोतिर्लिंगों में से एक माना गया है। यहाँ भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर स्थित है। हर सावन में यहाँ लाखों शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है जो देश के विभिन्न हिस्सों सहित विदेशों से भी यहाँ आते हैं। इन भक्तों को काँवरिया कहा जाता है। ये शिव भक्त बिहार में सुल्तानगंज से गंगा नदी से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर देवघर में भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं।

झारखंड कुछ प्रमुख तीर्थस्थानों का केंद्र है जिनका ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इन्हीं में से एक स्थान है देवघर। यह स्थान संथाल परगना के अंतर्गत आता है। देवघर शांति और भाईचारे का प्रतीक है। यह एक प्रसिद्ध हेल्थ रिजॉर्ट है। लेकिन इसकी पहचान हिंदु तीर्थस्थान के रूप में की जाती है। यहां बाबा बैद्यनाथ का ऐतिहासिक मंदिर है जो भारत के बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। माना जाता है कि भगवान शिव को लंका ले जाने के दौरान उनकी स्थापना यहां हुई थी। प्रतिवर्ष श्रावण मास में श्रद्धालु 100 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा करके सुल्तानगंज से पवित्र जल लाते हैं जिससे बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक किया जाता है। देवघर की यह यात्रा बासुकीनाथ के दर्शन के साथ सम्पन्न होती है।

बैद्यनाथ धाम के अलावा भी यहां कई मंदिर और पर्वत हैं जहां दर्शन कर अपनी इच्छापूर्ति की कामना की जा सकती है।

नाम का उद्गम[संपादित करें]

देवघर शब्द का निर्माण देव + घर हुआ है। यहाँ देव का अर्थ देवी-देवताओं से है और घर का अर्थ निवास स्थान से है। देवघर "बैद्यनाथ धाम", "बाबा धाम" आदि नामों से भी जाना जाता है।[1]

स्थिति[संपादित करें]

देवघर उत्तरी अक्षांश 24.48 डिग्री और पूर्वी देशान्तर 86.7 पर स्थित है।[2] इसकी मानक समुद्र तल से ऊँचाई 254 मीटर (833 फीट) है।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

2011 की भारत जनगणना के अनुसार देवघर की जनसंख्या 203,116 है जिसमें से 17.62% बच्चे 6 वर्ष से कम आयु के हैं। इस आबादी का 52% भाग पुरूष हैं एवं 48% महिलाएँ हैं।2011 तक  देवघर की औसत साक्षरता दर 66.34% है जो राष्ट्रीय औसत दर 74.4% से कम है। पुरूष साक्षरता 79.13% और महिला साक्षरता 52.39% है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

बैद्यनाथ मंदिर[संपादित करें]

देवघर में बाबा बैद्यनाथ मन्दिर

बैद्यनाथ मंदिर में स्थापित लिंग भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। पुराणों में भी इसका वर्णन मिलता है। माना जाता है कि रावण चाहता था कि उसकी राजधानी पर शिव का आशीर्वाद बना रहे। इसलिए वह कैलाश पर्वत गया और शिव की अराधना की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने रावण को अपना ज्योतिर्लिग दिया। लेकिन इसके साथ उन्होंने एक शर्त रखी कि रावण अपनी यात्रा बीच में रोक नहीं सकता और इस लिंग को कहीं भी नीच नहीं रखना होगा। यदि लिंग लंका से पहले कहीं भी नीचे रखा गया तो वह सदा के लिए वहीं स्थापित हो जाएगा।

देवगण अपने शत्रु को मिले इस वरदान से घबरा गए और एक योजना के तहत इंद्र ब्राह्मण बनकर आया। इंद्र ने ऐसा बहाना बनाया कि रावण ने यह लिंग उसे सौंप दिया। ब्राह्मण रूपी इंद्र ने यह लिंग देवघर में रख दिया। रावण की लाख कोशिशों के बाद भी यह हिला नहीं। रावण अपनी गलती को सुधारने के लिए रोज यहां आता था और गंगाजल से शिवजी का अभिषेक करता था।

लेकिन ऐतिहासिक रूप से इस मंदिर की स्थापना १५९६ की मानी जाती है जब बैजू नाम के व्यक्ति ने खोए हुए लिंग को ढूंढा था। तब इस मंदिर का नाम बैद्यनाथ पड़ गया। कई लोग इसे कामना लिंग भी मानते हैं। दर्शन का समय: सुबह ४ बजे-दोपहर ३.३० बजे, शाम ६ बजे-रात ९ बजे तक। लेकिन विशेष धार्मिक अवसरों पर समय को बढ़या जा सकता है।

यहाँ पर साबन महिना में बड़ा मेला लगता है मान्यता है कि भगवान शिबजी सावन महिना में यहाँ बिराजते है इस लिये सुलतान से गंगा जल भर कर काबरिया पैदल करीब ९५ की। मी.यात्रा करके यहाँ पहुचते है और भगवान शिव को गंगा जल अर्पित करते है।

मंदिर के मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

बैद्यनाथ का मुख्य मंदिर सबसे पुराना है जिसके आसपास अनेक अन्य मंदिर भी हैं। शिवजी का मंदिर पार्वती जी के मंदिर से जुड़ा हुआ है।

पवित्र यात्रा[संपादित करें]

बैद्यनाथ की यात्रा श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) शुरु होती है। सबसे पहले तीर्थयात्री सुल्तानगढ़ में एकत्र होते हैं जहां वे अपने-अपने पात्रों में पवित्र जल भरते हैं। इसके बाद वे बैद्यनाथ और बासुकीनाथ की ओर बढ़ते हैं। पवित्र जल लेकर जाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह पात्र जिसमें जल है, वह कहीं भी भूमि से न सटे।

बासुकीनाथ मंदिर[संपादित करें]

बासुकीनाथ अपने शिव मंदिर के लिए जाना जाता है। बैद्यनाथ मंदिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक बासुकीनाथ में दर्शन नहीं किए जाते। यह मंदिर देवघर से 42 किलोमीटर दूर जरमुंडी गांव के पास स्थित है। यहां पर स्थानीय कला के विभिन्न रूपों को देखा जा सकता है। इसके इतिहास का संबंध नोनीहाट के घाटवाल से जोड़ा जाता है। बासुकीनाथ मंदिर परिसर में कई अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी हैं।

बैजू मंदिर[संपादित करें]

बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर के पश्चिम में देवघर के मुख्य बाजार में तीन और मंदिर भी हैं। इन्हें बैजू मंदिर के नाम से जाना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण बाबा बैद्यनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी के वंशजों ने करवाया था। प्रत्येक मंदिर में भगवान शिव का लिंग स्थापित है।

आसपास दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

त्रिकुट[संपादित करें]

देवघर से 16 किलोमीटर दूर दुमका रोड पर एक खूबसूरत पर्वत त्रिकूट स्थित है। इस पहाड़ पर बहुत सारी गुफाएं और झरनें हैं। बैद्यनाथ से बासुकीनाथ मंदिर की ओर जाने वाले श्रद्धालु मंदिरों से सजे इस पर्वत पर रुकना पसंद करते हैं।

नौलखा मंदिर[संपादित करें]

देवघर के बाहरी हिस्से में स्थित यह मंदिर अपने वास्तुशिल्प की खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण बालानंद ब्रह्मचारी के एक अनुयायी ने किया था जो शहर से 8 किलोमीटर दूर तपोवन में तपस्या करते थे। तपोवन भी मंदिरों और गुफाओं से सजा एक आकर्षक स्थल है।

नंदन पहाड़[संपादित करें]

इस पर्वत की महत्ता यहां बने मंदिरों के झुंड के कारण है जो विभिन्न भगवानों को समर्पित हैं। पहाड़ की चोटी पर कुंड भी है जहां लोग पिकनिक मनाने आते हैं।

सत्संग आश्रम[संपादित करें]

ठाकुर अनुकूलचंद्र के अनुयायियों के लिए यह स्थान धार्मिक आस्था का प्रतीक है। सर्व धर्म मंदिर के अलावा यहां पर एक संग्रहालय और चिड़ियाघर भी है।

आवागमन[संपादित करें]

  • नजदीकी हवाई अड्डे : राँची, गया, पटना और कोलकाता
  • सड़क मार्ग द्वारा : कोलकाता से 373 कि मी, गिरिडीह से 112 कि मी, पटना से 281 कि मी
  • रेल द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडिह यहाँ से 10 कि॰मी॰ है जो हावड़ा पटना दिल्ली लाइन पर स्थित है। देवघर सड़क मार्ग द्वारा कलकत्ता (373 किलोमीटर), गिरीडीह (112 किलोमीटर), पटना (281 किलोमीटर), दुमका (67 किलोमीटर), मधुपुर (57 किलोमीटर) और शिमुलतला (53 किलोमीटर) से जुड़ा हुआ है।

बस: भागलपुर, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर और गया से देवघर के लिए सीधी और नियमित बस सेवा उपलब्ध है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Sacred Complexes of Deoghar and Rajgir - Sachindra Narayan (b. 1974)
  2. Falling Rain Genomics, Inc - Deoghar

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]