नागरी लिपि

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नागरी लिपि से ही देवनागरी, नंदिनागरी आदि लिपियों का निर्माण हुआ है, इसका पहले प्राकृत और संस्कृत भाषा को लिखने में उपयोग किया जाता था। इस शब्द को कई बार देवनागरी लिपि के लिए भी उपयोग किया जाता है। नागरी लिपि का निर्माण ब्राह्मी लिपि से हुआ है। कुछ जानकारियों से इस बात का पता चला कि यह प्राचीन भारत में पहली से चौथी शताब्दी में निर्मित हुआ और इसका निर्माण गुजरात में किया गया था। सातवीं शताब्दी में यह लिपि आमतौर पर उपयोग की जाती थी और कई शताब्दियों के पश्चात इसके स्थान पर देवनागरी और नंदिनागरी का उपयोग होने लगा।

उत्पत्ति[संपादित करें]