अम्बाजी मंदिर, गुजरात

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अम्बाजी माता मन्दिर
नाम
अन्य नाम: अरासुरी अम्बाजी
मुख्य नाम: अरासुरी अम्बा भवानी मंदिर
तमिल: அம்பாஜீ
बांग्ला: অম্বাজী
स्थान
देश: भारत
राज्य: गुजरात
जिला: बनासकांठा
स्थान: अरासुर, बनासकांठा जिला
ऊंचाई: 61 मी. (200 फुट)
वास्तुकला और संस्कृति
प्रमुख आराध्य: माँ दुर्गा (शक्ति)
स्थापत्य शैली: हिन्दू
इतिहास
निर्माण तिथि:
(वर्तमान संरचना)
चौथी शताब्दी
निर्माता: वल्लभी शासक, सूर्यवंश सम्राट अरुण सेन
मन्दिर बोर्ड:

श्री अरासुरी अम्बाजी माता देवस्थान न्यास, 1963

इसी बोर्ड ने १९७६-८८ में नवीन निर्माण भी करवाया था।
वेबसाइट: http://www.ambajitemple.in/

अम्बाजी माता मन्दिर ( गुजराती:અમ્બાજી માતા મન્દિર) भारत में माँ शक्ति के ५१ शक्तिपीठों में से एक प्रधान पीठ है। यह पालनपुर से लगभग ६५ कि॰मी॰, आबू पर्वत से ४५ कि॰मी॰, आबू रोड से २० किमी, श्री अमीरगढ़ से ४२ कि॰मी॰, कडियाद्रा से ५० कि॰मी॰ दूरी पर गुजरात-राजस्थान सीमा पर अरासुर पर्वत पर स्थित है।

अरासुरी अम्बाजी मन्दिर में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है, केवल पवित्र श्रीयंत्र की पूजा मुख्य आराध्य रूप में की जाती है। इस यंत्र को कोई भी सीधे आंखों से देख नहीं सकता एवं इसकी फ़ोटोग्राफ़ी का भी निषेध है। मां अम्बाजी की मूल पीठस्थल कस्बे में गब्बर पर्वत के शिखर पर है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां तीर्थयात्रा करने वर्ष पर्यन्त आते रहते हैं, विशेषकर पूर्णिमा के दिन। भदर्वी पूर्णिमा के दिन यहाँ बड़ा मेला लगता है।[1] देश भर से भक्तगण यहां मां की पूजा अर्चना हेतु आते हैं, विशेषकर जुलाई माह में। इस समय पूरे अम्बाजी कस्बे को दीपावली की तरह प्रकाश से सजाया जाता है।[2] माना जाता है कि ये मन्दिर लगभग बारह सौ वर्ष से अधिक प्राचीन है।[3] इस मंदिर का शिखर १०३ फ़ीट ऊंचा है और इस पर ३५८ स्वर्ण कलश स्थापित हैं।[3] इस मेले में एक अनुमान के अनुसार २००८ में २५ लाख यात्री पहुंचने की संभावना थी।[4]

इतिहास[संपादित करें]

अम्बाजी मन्दिर का रात्रि दृश्य

अम्बाजी मन्दिर हिन्दुओं की ५१ शक्ति-पीठों में से एक है। देवी की ५१ शक्तिपीठों में से १२ प्रमुख शक्ति पीठ इस प्रकार से हैं:- मां भगवती महाकाली मां शक्ति, उज्जैन, माँ कामाक्षी, कांचीपुरम, माता ब्रह्मरंध्र, श्रीशैलम में, श्री कुमारिका, कन्याकुमारी,महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर, देवी ललिता, प्रयाग, विन्ध्यवासिनी देवी, विन्ध्याचल, विशालाक्षी, वाराणसी, मंगलावती, गया एवं मां सुंदरी, बंगाल में तथा गुह्येश्वरी नेपाल में। गब्बर पर्वत गुजरात एवं राजस्थान की सीमा पर स्थित है। यहां पर पवित्र गुप्त नदी सरस्वती का उद्गम अरासुर पहाड़ी पर प्राचीन पर्वतमाला अरावली के दक्षिण-पश्चिम में समुद्र सतह से 1,600-फुट (490 मी.) की ऊंचाई पर 8.33 कि.मी. (3.22 वर्ग मील) क्षेत्रफ़ल में अम्बाजी शक्तिपीठ स्थित है। यह ५१ शक्तिपीठों में से एक है जहां मां सती का हृदय गिरा था। इसका उल्लेख "तंत्र चूड़ामणि" में भी मिलता है। इस गब्बर पर्वत के शिखर पर देवी का एक छोटा मंदिर स्थित है जिसकी पश्चिमी छोर पर दीवार बनी है। यहां नीचे से ९९९ सीढ़ियों के जीने से पहाड़ी पर चढ़कर पहुंचा जा सकता है। माता श्री अरासुरी अम्बिका के निज मंदिर में श्री बीजयंत्र के सामने एक पवित्र ज्योति अटूट प्रज्ज्वलित रहती है।

इसके अलावा गब्बर पर्वत पर अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं, जैसे सनसेट प्वाइंट, गुफ़ाएं, माताजी के झूले एवं रज्जुमार्ग का सास्ता। हाल की खोज से ज्ञात हुआ है कि अम्बाजी के इस मन्दिर का निर्माण वल्लभी शासक, सूर्यवंश सम्राट अरुण सेन ने चौथी शताब्दी, ईसवी में करवाया था।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]