सहारनपुर

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सहारनपुर
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
महापौर श्री संजीव वालिया
सांसद श्री राघव लाखन पाल
नगर विधायक श्री संजय गर्ग
जनसंख्या ७०३,३४५ (२०११ के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• २६९ मीटर
आधिकारिक जालस्थल: saharanpur.nic.in

निर्देशांक: 29°58′N 77°33′E / 29.97°N 77.55°E / 29.97; 77.55

सहारानपुर से शिवालिक पर्वतों की आरम्भिक श्रेणियाँ दिखती हैं
सहारानपुर के समीप सड़क

सहारनपुर (Saharanpur) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह उस ज़िले का मुख्यालय भी है।[1][2]

इतिहास[संपादित करें]

सहारनपुर की स्थापना 1340 के आसपास हुई और इसका नाम एक दरवेश शाहरून चिश्ती रह• के नाम पर पड़ा। संपूर्ण सहारनपुर जो अब कई ज़िलो में विभाजित कर दिया गया है और कई सिद्ध पुरषों की दरगाहें यहां आकर्षण का मुख्य केंद्र है। जैसे:- सहारनपुर में शाहरुन चिश्ती रह० जिनके नाम पर यह सहारनपुर बसा है। हाजी शाह कमाल और बाबा लाल दास की अध्यात्मिक घनिष्ठता की प्रतीक उनकी समाधियों का पास पास होना और उनकी मित्रता का इतिहास इस ज़िले मै सांप्रदायिक सदभाव का बड़ा कारण है। कलियर मै हज़रत सैय्यदना मख़दूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर और गंगोह में हज़रत शैख अब्दुल कुद्दुस गंगोही (कुतबे आलम) जिन्होंने अलखदास के नाम से हिंदी में काफ़ी कविताएं कहीं हैं। अंबेहटा में पंजाब और हरियाना के मशहूर संत मीरा जी भिख रह० के गुरू शाह अबुल माली रह० रामपुर मनिहारान में शैख इब्राहिम जी बंदगी रह०, शैख़ सालार साहब रह०, ख्वाजा इमाम अली, ख्वाजा तुफैल अली रह० के दरगाहें और देवबंद का दारुल उलूम और दारुल उलूम के असल संस्थापक हाजी आबिद हुसैन और उनके पहले और बाद के बहुत सारे बुजुर्गो कि दरगाहें और बेहट में शाह रूग्नुद्दीन रह० की यादगार और बीच शहर में अंबाला रोड पर स्वामी राम तीर्थ का मंदिर इस शहर की मुख्य शोभा हैं। औद्योगिक द्रष्टि से भी इस शहर के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता ITC जैसी हज़ारों करोड़ रुपयों का उत्पाद शुल्क राष्ट्रीय कोष में अपना योगदान देने वाली ITC, Star paper mill, और कई तरह की छोटी छोटी फैक्ट्रियों के अतिरिक्त लकड़ी पर नक्काशी की दस्तकारियो का मुख्य आधार केंद्र है। सहारनपुर का मज़ाहिर उलूम के नाम से दो मदरसे और देवबंद का दारुल उलूम विश्व के इस्लामिक शिक्षा के मुख्य केंद्रों में से गिने जाते हैं। आध्यात्मिक प्रकाश का भारत के मुख्य केंद्रो में से एक मख़दूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर की दरगाह विश्व भर मैं मशहूर है। मूलतः इसी शहर की शोभा है। इस शहर की तत्कालीन आबादी की शुरुआत हज़रत शाहरून चिश्ती रह० के यहां ठहरने से हुई। इसलिए इसका नाम शाहरूनपुर पड़ा जो बाद में सहारनपुर हो गया। शाहरून चिश्ती रह० के बाद उनके उत्ताधिकारी और दामाद मौलवी इसहाक़ साहब और उनके बाद उनके उतराधिकारी और दामाद शेख सालार साहब जिनका मज़ार उनके अपने बाग़ सलारवाला है जो अब गांधी पार्क के नाम से पहचाना जाता हैं कि संतानों से अध्यात्म और ज्ञान के बहुत सारे स्रोत संसार को सेराब करते रहे और कर रहे है।

उद्योग[संपादित करें]

शहर के उद्योगों में रेलवे, मधुमक्खी पालन, कार्यशालाएं, सूती वस्त्र और चीनी प्रसंस्करण, काग़ज़ ,गत्ता निर्माण,सिगरेट उद्योग और अन्य उद्यम शामिल हैं। यहाँ दफ़्ती और मोटा काग़ज़, कपड़ा बुनने, चमड़े का सामान बनाने और लकड़ी पर नक़्क़ाशी का काम अधिक किया जाता है।

कृषि[संपादित करें]

सहारनपुर कृषि उत्पादों का एक सक्रिय केन्द्र भी है। आसपास के क्षेत्र की प्रमुख फ़सलें आम, गन्ना, गेंहू, चावल और कपास हैं।

शिक्षा[संपादित करें]

शहर में एक केंद्रीय फल शोध संस्थान, राजकीय वानस्पतिक उद्यान एक विमानचालन प्रशिक्षण केन्द्र और कई कई तकनीकी और प्रबंधन संस्थान और महाविद्यालय स्थित है।

परिवहन[संपादित करें]

यह प्रसिद्ध रेलवे स्टेशन है। यहाँ से निकटवर्ती स्थानों हरिद्वार,देहरादून,ऋषिकेश,विकाश नगर, पोंटासाहिब, चंडीगढ़,अंबाला,कुरुक्षेत्र, दिल्ली, यमुनोत्री को सड़कें गई हैं।

जनसंख्या[संपादित करें]

2011 की जनगणना के अनंतिम आंकड़ो के अनुसार सहारनपुर नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या 7,03,345 और सहारनपुर जिले की जनसंख्या कुल 34,64,228 है।

प्रसिद्ध स्थल[संपादित करें]

सहारनपुर में प्राचीन शाकुम्भरी देवी सिद्धपीठ मंदिर, इस्लामिक शिक्षा का केन्द्र देवबन्द दारुल उलूम, देवबंद का मां बाला सुंदरी मंदिर, नगर में भूतेश्वर महादेव मंदिर, कम्पनी बाग आदि प्रसिद्ध स्थल हैं। शकुम्‍भरी देवी मंदिर, सहारनपुर से 40 किमी. की दूरी पर स्थित है जो शहर के शकुम्‍भरी क्षेत्र में आता है। हालांकि, इस मंदिर का कोई ऐतिहासिक और पुरातात्विक उल्‍लेख नहीं है लेकिन सामान्‍य रूप से माना जाता है कि यह मंदिर काफी प्राचीन है। इस मंदिर की मूर्तियां काफी प्राचीन नहीं दिखती हैं और कुछ लोगों का तो मानना है कि इन्‍हे मराठा काल के दौरान स्‍थापित किया गया था जबकि अन्‍य लोगों का मानना है कि आदि शंकराचार्य ने अपनी तपस्‍या को यहीं किया था। इन सभी मतों के अलावा, इस मंदिर में साल भर में लाखों श्रद्धालु आते हैं और दर्शन करते हैं। इस मंदिर में माता की पूजा की जाती है और माना जाता है कि मां शामुम्‍भरी देवी ने महिषासुर महा दैत्‍य को मारा था और लगभग 100 साल तक तपस्‍या की थी जबकि वह महीने में केवल एक बार अंत में शाकाहारी भोजन ग्रहण किया करती थी।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
  2. "Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975