इफको

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इफको या 'इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड' (IFFCO) विश्व का सबसे बड़ा उर्वरक सहकारिता संस्था है। इफको में ४० हजार सहकारिताएँ इसके सदस्य हैं।

3 नवम्बर 1967 को इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) का पंजीकरण एक बहुएकक सहकारी समिति के रूप में किया गया। बहुराज्य सहकारी सोसाइटीज अधिनियम, 1984 व 2002 के अधिनियमन के साथ यह एक बहुराज्य सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत है। यह समिति प्रमुख रूप से उर्वरकों के उत्पादन और विपणन के कार्य में संलग्न है। समिति के उपनियमों में सहकारी समिति के रूप में इफको की गतिविधियों का विस्तृत विवरण दिया गया है।

इतिहास[संपादित करें]

60 के दशक के मध्य तक सहकारी क्षेत्र देश में उपयोग में लाए जाने वाले लगभग 70 प्रतिशत उर्वरकों का वितरण कार्य करता था। सहकारी क्षेत्र के पास उर्वरकों की बिक्री के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा तो था परन्तु अपनी कोई उत्पादन इकाई न होने की वजह से इसे सार्वजनिक/निजी उर्वरक विनिर्माताओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इस बाधा को दूर करने और मांग तथा आपूर्ति के अंतर को कम करने की दृष्टि से एक सहकारी समिति बनाने का निर्णय किया गया, जो किसानों की आवश्यकताआ को पूरा कर सके। अतः देश भर की सहकारी समितियों ने अपने हितों की रक्षा करने के लिए एक सहकारी संस्था, इफको का गठन किया। वर्ष 1967 में मात्र 57 समितियां इफको की सदस्य थीं जो अब बढ़कर 38,155 हो गई है।

इफको का मिशन और लक्ष्य[संपादित करें]

इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) का लक्ष्य है, विसनीय और उच्च गुणता वाले कृषि आदानों की समय से आपूर्ति, पर्यावरण के अनुरूप कृषि सेवाएं उपलब्ध कराके देश के किसानों को समृद्ध बनाना, साथ ही ऐसी अन्य गतिविधियां सम्पन्ऩ करना जो उनके कल्याण के लिए आवश्यक हो।

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इफको एक सहकारी समिति के रूप में अपने दायित्वों का निर्वाह करते हुए अपनी सदस्य सहकारी समितियों और किसान भाइयों के कल्याण से जुड़े हुए व्यापक क्षेत्रों में अनेक गतिविधियां चलाती है। उपयुर्क्त गतिविधियों को इफको उपनियमों में स्पष्ट किया गया है जिसकी संबंद्ध धाराएं निम्नानुसार हैं-

(क) इफको का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों, जैव-उर्वरकों, पैट्रो-रसायनों, औद्योगिक रसायनों की रिफाइनिंग और हाइड्रोकार्बन, उनके आदानों व प्रौद्योगिकी तथा सम्बद्ध उत्पादों/उपोत्पादों का विनिर्माण/उतादन/विकास करना और उनका रूपांतरण, भंडारण, परिवहन तथा विपणन करना, कृषि-उत्पादों, जिनमें गन्ना भी शामिल है, कृषि उत्पादों से बनने वाले उत्पादों व उपोत्पादों, कीटनाशक दवाओं, बीजों, कृषि और वानिकी उपजों, जैव-प्रौद्योगिकी, मत्स्य-पालन, एक्वा- फार्मिग, कृषि मशीनों व औजारों तथा अन्य कृषि आदानों/ उत्पादों का कार्य हाथ में लेना, उनका विनिर्माण करना, उनका रूपांतरण करना, भंडारण करना, परिवहन करना व विपणन करना; और ट्रेडिंग, शिपिंग, परिवहन, संचार व दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, परम्परागत या गैर-परम्परागत स्रोतों से ऊर्जा उत्पन्न करना व उसका वितरण करना, हाउसिंग, रियल इस्टेट, निर्माण, बैंकिंग और बीमा के लिए प्रावधान करना तथा इनसे प्रासंगिक और सहायक कार्यकलापों को हाथ में लेकर अपने सदस्यों की आर्थिक दशा को सुधारने के लिए स्वयं-सेवा और पारस्परिक सहयोग के माध्यम से अपने कार्यकलाप व्यावसायिक, लोकतांत्रिक और स्वायत्त आधार पर निष्पादित करना होगा।

(ख) उपयुर्त्क उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इफको निम्नलिखित कोई एक या एक से अधिक कार्य कर सकती है, जिनका संकेत मात्र किया गया है और यह इसकी अंतिम सीमा नहीं हैः

(1) रासायनिक उर्वरकों और उनसे सम्बद्ध उत्पाद/उपोत्पाद के उत्पादन के लिए एक या एक से अधिक कारखानों की स्थापना करना;

(2) कीटनाशक दवाओं, बीजों, कृषि कार्यों में प्रयुत्क मशीनरी और औजारों तथा कृषि संबंधी अन्य आवश्यक साज-सामान का उत्पादन/प्रोसेसिंग तथा विनिर्माण करने के लिए स्वयं अथवा अन्य सहकारी संस्थाओं/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों अथवा अन्य अभिकरणों के सहयोग से संयुत्क उद्यम के रूप में उत्पादन इकाइयां स्थापित करना या पट्टे पर लेना;

(3) इफको के व्यापार की सुविधा के लिए कारखाने, बस्तियां, सम्पदा, रेल साइडिंग, रेल यार्ड, कुएं, जलाशय और नालियां, पम्प, सफाई करने वाली मशीनें और पाइप लाइन, गाड़ियां, भंडारण स्थान और सभी प्रकार के आवास का अधिग्रहण करना, स्थापित करना, निर्माण करना, उपलब्ध कराना और देख-भाल करना और उनका प्रबन्ध करना;

(4) ऐसी सभी प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन, भंडारण, रख-रखाव, क्रय-विक्रय, मरम्मत, तब्दीली और विनिमय करना, उन्हें किराए पर लेना या देना, उनका निर्यात, आयात करना और व्यापार करना जिनकी इफको के किसी भी व्यापार के प्रयोजन के लिए आवश्यकता है या जिनकी व्यापार में लगे ऐसे किसी व्यत्कि द्वारा सामान्यतः पूर्ति की जाती हो या व्यापार किया जाता हो या इफको के किसी भी व्यापार के संबंध में लाभदायक दिखाई देती हो;

(5) मालगोदाम अधिनियम के अंतर्गत मालगोदाम अभिकरण के रूप में कार्य करना और माल-गोदामों को अपने स्वामित्व में लेना, उर्वरकों तथा अन्य सामान के भंडारण के लिए अपने मालगोदामों का निर्माण करना अथवा मालगोदाम किराये पर लेना;

(6) उर्वरकों व अन्य सामान के भंडारण के लिए स्वयं अथवा अन्य सहकारी संस्थाओं या किन्हीं एजेंसियों के सहयोग से भंडारण इकाइयां स्थापित करना;

(7) सड़क मार्ग से अथवा समुद्री मार्ग से सामग्री के परिवहन के लिए स्वयं अपनी अथवा किसी भारतीय या विदेशी एजेंसी के सहयोग से परिवहन सुविधाओं की व्यवस्था करना;

(8) इफको के कारोबार के लिए भूमि, भवनों, फिक्सचर्स और वाहनों का अधिग्रहण करना, उन्हें पट्टे अथवा किराए पर लेना, उनका विक्रय करना अथवा किराए /पट्टे पर देना;

(9) उर्वरकों और कृषि कार्यों में प्रयुत्क होने वाले आवश्यक सामान के विनिर्माण, उत्पादन तथा विपणन तथा कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सहकारी समितियों का प्रवर्तन करना तथा उनका संयोजन करना;

(10) सहकारी और अन्य संस्थाओं की शेयर-पूंजी में अभिदान करना;

(11) कच्चे माल, सहायक उत्पाद, पैकिंग सामान, तैयार माल, उपोत्पादों और अवशेष पदार्थों के क्रय, उत्पादन, विनिर्माण तथा विपणन के लिए अन्य सहकारी संस्थाओं, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं अन्य एजेंसियों के साथ करार एवं सहयोग-करार करना तथा उनके साथ संयुत्क रूप से उत्पादों के विपणन, उत्पाद-विनिमय के लिए करार करना;

(12) उर्वरक और रसायन संयंत्रों तथा अन्य संयंत्रों के लिए; और उनके उत्पादों के विपणन के लिए मशीनरी और उपस्करों के लिए तथा तकनीकी जानकारी, परामर्श सेवाओं, डिजाइन, इंजीनियरी, निर्माण, संरचना, प्रचालन और रख-रखाव के लिए भारत या विदेशों में स्थित सहकारी या अन्य संस्थाओं से सहयोग प्राप्त करना;

(13) सदस्य समितियों तथा अन्य अभिकरणों को तकनीकी परामर्शदायी एवं अन्य सेवायें प्रदान करना;

(14) कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए सरकार, संस्थाओं और प्राइवेट एजेंसियों से भूमि खरीद कर, अधिग्रहण कर अथवा पट्टे के आधार पर लेकर कृषि फार्मों की स्थापना करना;

(15) कृषकों तथा अन्य व्यत्कियों को कृषि संबंधी आधुनिक और परिष्कृत कृषि तकनीकों तथा मानव संसाधन विकास से संबंधित अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने के लिए संस्थान स्थापित करना;

(16) उर्वरकों तथा कृषि कार्य में प्रयुत्क अन्य आवश्यक सामान, जिनमें इफको का हित निहित है, की बिक्री बढ़ाने के लिए सहकारी समितियों के कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करना एवं उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करना;

(17) कृषि और ग्रामीण विकास के लिए प्रासंगिक एवं सहायक कार्यों को हाथ में लेना;

(18) भारत और विदेशों में शाखा कार्यालयों तथा बिक्री केन्द्रोंें की स्थापना करना;

(19) इफको के व्यवसाय के संबंध में सभी प्रकार के एजेंट के रूप में कार्य करना;

(20) अनुसंधान कार्यक्रम एवं अन्य ऐसे उपयोगी कार्यक्रम हाथ में लेना; जो उद्योग और इफको के विकास के लिए सहायक और अनुरूप हों;

(21) कृषि उत्पादों, रसायनों, कीटनाशक दवाइयों, उपकरणों, कृषि संबंधी औजारों व मशीनों का संसाधन, विपणन, आयात व निर्यात करना;

(22) वन लगाना व वन्य उत्पादों का संसाधन व विपणन करना;

(23) राष्ट्रीय महत्व के अथवा विकास की संभावना वाले उद्योग स्थापित करना;

(24) उपकरणों, औजारों, मशीनों का विनिर्माण व विपणन करना;

(25) बायो-तकनीक पर आधारित उद्योग लगाना;

(26) ग्रामीण व शहरी इलाकों में जमीन-जायदाद खरीदना व कर्मचारियों व सदस्यों के लिए सहकारी आवास की व्यवस्था करना;

(27) ऐसे अन्य कार्य करना, जो इफको के मूल उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए प्रासंगिक और सहायक हों;

(28) सीमेंट, चीनी, पैट्रो-रसायन (हाथ से बने रेशे शामिल हैं), इलैक्ट्रोनिक सामान, उपग्रह, विशेष व मिश्रित इस्पात के विनिर्माण के लिए इकाई/इकाइयों को स्वामित्व में लेना, स्थापित करना तथा उनके उत्पादों की बिक्री का प्रबंध करना;

(29) इफको के लक्ष्यों को विस्तार देने के प्रयोजन के लिए सहायक संस्थाओं को प्रवर्तित करना।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]