बाड़मेर जिला

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बाड़मेर ज़िला
Barmer district
मानचित्र जिसमें बाड़मेर ज़िला Barmer district हाइलाइटेड है
सूचना
राजधानी : बाड़मेर
क्षेत्रफल : 28,387 किमी²
जनसंख्या(2001):
 • घनत्व :
1,00,015
 3.5/किमी²
उपविभागों के नाम: तहसील
उपविभागों की संख्या: 17
मुख्य भाषा(एँ): हिन्दी, राजस्थानी


बाड़मेर के पास रेत के टीले
चौहटन में एक दृश्य
ज़िले की शिल्पकलाएँ प्रसिद्ध हैं - मध्य 20वीं शताब्दी की एक ओढ़नी
बालोतरा का बाज़ार

बाड़मेर ज़िला भारत के राजस्थान राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय बाड़मेर है।[1][2][3] ज़िला मुख्यालय बाड़मेर के अलावा अन्य मुख्य कस्बे बालोतरा, गुड़ामलानी, बायतु, सिवाना, जसोल, चौहटन, धोरीमन्ना और उत्तरलाई हैं। बाड़मेर में एक रिफ़ाइनरी भी प्रस्तावित है।[4]

बाड़मेर के पहले शहीद मंगल सिंह राणावत थे जो कि द्वितीय विश्व युद्ध में वीरता से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए

रेवाडा जैतमाल उनका गॉव है

प्रशासनिक इकाइयां[संपादित करें]

  1. उपखण्ड: * बाड़मेर, * बालोतरा, * गुड़ामालानी, * सिवाना, * बायतु, * शिव, * चौहटन, * धोरीमना, * सेड़वा, * समदड़ी, * रामसर, * सिणधरी
  2. तहसीलें: * बाड़मेर, * सिवाना , * पचपदरा, * गुड़ामालानी, * बायतु, * शिव, * चौहटन, * धोरीमना, * समदड़ी, * रामसर, * सिणधरी, * सेड़वा, * धनाऊ, * गड़रारोड़, * गिड़ा
  3. पंचायत समितियाँ: * बाड़मेर, * सिवाना , * बालोतरा, * गुड़ामालानी, * बायतु, * शिव, * चौहटन, * धोरीमना, * समदड़ी, * रामसर, * सिणधरी, * सेड़वा, * धनाऊ, * गड़रारोड़, * गिड़ा, * कल्याणपुर, * पाटोदी

बाड़मेर (बाड़े र) नाम की व्युत्पत्ति[संपादित करें]

ऐतिहासिक रूप से 'बाड़मेर' जिले का नाम प्रसिद्ध ऐतिहासिक बाहड़ शासक राव (पंवार) परमार या बाहड़ राव परमार (पंवार) के नाम पर पड़ा माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि प्रसिद्ध बाहड़ शासक बाहड़ राव परमार (पंवार) ने 13 वीं सदी में इस बाड़मेर शहर की स्थापना की थी और तभी से यह शहर बाहड़मेर के नाम से जाना जाता है। वास्तव में 'बाहड़मेर' शब्द इसके संस्थापक शासक बाहड़ राव परमार (पंवार) के पहाड़ी किले से व्युत्पन्न है।

भूगोल[संपादित करें]

थार मरुस्थल का एक भाग बाड़मेर जिला, राजस्थान के पश्चिम में स्थित है। जिला उत्तर में जैसलमेर जिले, दक्षिण में जालौर जिले, पूर्व में पाली और जोधपुर जिले तथा पश्चिम में पाकिस्तान से घिरा है। जिले का कुल क्षेत्रफल 28387 वर्ग किमी है। जिला उत्तरी अक्षांश 24,58’ से 26, 32’ और पूर्वी देशान्तर 70, 05’ से 72, 52’ के मध्य स्थित है।

जिले में सबसे लंबी नदी लूणी नदी है। यह जालोर के मध्यम से गुजरकर कच्छ की खाड़ी के समीप की भूमि में ही सोख ली जाती है, और इसकी कुल लंबाई 480 किमी है। विभिन्न ऋतुओं में तापमान में बदलाव काफी अधिक है। गर्मियों में तापमान 51 डिग्री सेल्सियस तक और सर्दियों में यह शून्य डिग्री सेल्सियस (32° फैरनहाइट) तक चला जाता। एक साल में औसत वर्षा केवल 277 मिमी है, और मुख्य रूप से बाड़मेर जिला एक रेगिस्तान है। फिर भी, 16 और 25 अगस्त 2006 के बीच 549 मिमी की चरम वर्षा से आई बाढ़ की वजह से कई लोग मारे गए और भारी नुकसान हुआ।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

विरात्रा माता का मेला[संपादित करें]

चोहटन तहसील से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित विरात्रा में मेला आयोजित किया जाता है। यहाँ साल में तीन बार चैत्र, भाद्रपद तथा माघ में वांकल देवी की पूजा का मेला लगता है। विरात्रा माता की मूर्ति की स्थापना वीर विक्रमादित्य ने की थी। वांकल देवी के पुजारी गहेलड़ा परमार जिनको आदर भाव से भोपा भी कहा जाता है , यहां पर देवी की पूजा करते है। गहेलड़ा( भोपा) पांच गाँवो घोनिया , ढोक , सनाउ , जसाई और परो में निवास करते है। इस स्थान पर मूर्ति लाते हुए विक्रमादित्य ने रात्रि विश्राम किया था।

जसोल[संपादित करें]

एक समय में जसोल मालानी का प्रमुख क्षेत्र था। रावल मल्लीनाथ के नाम पर परगने का नाम मालानी पङा, इस प्राचीन गांव का नाम राठौड़ उपवंश के वंशजों के नाम पर पड़ा। यहां पर स्थित जैन मंदिर और हिंदु मंदिर जसोल के मुख्य आकर्षण हैं। यहां एक चमत्कारिक देवी माता रानी भटीयाणी का मन्दिर है।

वैर माता मंदिर[संपादित करें]

वैर माता मंदिर - यह पहाड़ी के पीछे स्थित हिंदू मंदिर है जो मुख्य चोहटन शहर में है। शहर और मंदिर के बीच की दूरी 4 किमी है। इस मंदिर के पास 100 मीटर से अधिक ऊँची रेत के टीले

बोथिया[संपादित करें]

यह जैसलमेर रोड पर बसा हुआ एक गाँव है.यहाँ पर राजपुरोहित जाति का निवास जिनकी जनजाति भी बोईतिया है यह पुराने वक़्त के जागीरदारों से बसाया गया गाँव है.यहाँ पर ASIA की सबसे बड़ी Open Mine है.यहाँ तेल के बड़े कुएँ भी है जो गुजरात जमानगर से जुड़ते है.साल २००८ के बाद बाड़मेर के लोगों को आय स्रोत तेल उध्योग है यहाँ तेल के कई बड़े बड़े उध्योगपति है जो बाड़मेर मैं समाजसेवी का ऊँचा दर्जा रखते है इनमे शामिल है तनसिंघ चौहान(उध्योगपति ओर समाजसेवी) रामसिंह बोथिया (उध्योगपति,समाजसेवी,बोथिया के सरपंच


H=== हरसाणी === यह बाडमेर-गिराब और शिव-गडरारोड सडक के मिलन स्थल पर एक चोराहे पर आया हुआ है यहाँ एक माल्हण बाई का चमत्कारिक मन्दिर है।

जानसिह की बेरी[संपादित करें]

यह ग्राम शिव-गडरारोड मार्ग पर शिव से ४३ किलोमिटर पर आया हुआ है यहाँ एक सच्चियाय माता क मन्दिर है।

खेड़[संपादित करें]

राठौड़ वंश के संस्थापक राव सिहा और उनके पुत्र ने खेड़ को गुहिल राजपूतों से जीता और यहां राठौड़ों का गढ़ बनाया। रणछोड़जी का विष्णु मंदिर यहां का प्रमुख आकर्षण है। मंदिर के चारों और दीवार बनी है और द्वार पर गरुड़ की प्रतिमा लगी है जिसे देख कर लगता है मानो वे मंदिर की रक्षा कर रहे हों। पास ही ब्रह्मा, भैरव, महादेव और जैन मंदिर भी हैं। जो सैलानियो का मुख्य आकर्षण का केन्द्र है। गुहिल राजपूत यहाँ से भावनगर चले गये और १९४७ तक शासन किया।

मेहलू[संपादित करें]

जिला मुख्यालय से 41 किलोमीटर दूर मेहलू गांव स्थिति है यहां धर्मपुरी जी का मंदिर है तथा यहां विशाल मेला भरता है

Nagnechi Mata Ka Mandir[संपादित करें]

Rathore kul ki kuldevi Nagnechi Mata ka mandir he

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
  2. "Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975
  3. "बाड़मेर जिला के बारे में जानकारी, तथ्य और सभी प्रकार के मानचित्र". भारत का मैप (नक्शा), हिंदी एटलस, इंडिया मैप, Bharat ka Naksha. Dec 12, 2016. अभिगमन तिथि Dec 3, 2017.
  4. Sudhir sharma (2017-10-16). "'बाड़मेर रिफायनरी का नवंबर में किया जाएगा शिलान्यास'– News18 हिंदी". News18 India. अभिगमन तिथि 2017-12-03.