बाड़मेर जिला

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राजस्थान में बाड़मेर जिला

बाड़मेर जिला भारतीय राज्य राजस्थान का एक जिला है। जिले का मुख्यालय बाड़मेर नगर है, जबकि अन्य मुख्य कस्बे बालोतरा, गुड़ामलानी, बायतु, सिवाना, जसोल, चोहटन और धोरीमन्ना हैं।

बाड़मेर (बाहड़मेर) नाम की व्युत्पत्ति[संपादित करें]

ऐतिहासिक रूप से 'बाड़मेर' जिले का नाम प्रसिद्ध ऐतिहासिक बाहड़ शासक राव (पंवार) परमार या बाहड़ राव परमार (पंवार) के नाम पर पड़ा माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि प्रसिद्ध बाहड़ शासक बाहड़ राव परमार (पंवार) ने 13 वीं सदी में इस बाड़मेर शहर की स्थापना की थी और तभी से यह शहर बाहड़मेर के नाम से जाना जाता है। वास्तव में 'बाहड़मेर' शब्द इसके संस्थापक शासक बाहड़ राव परमार (पंवार) के पहाड़ी किले से व्युत्पन्न है।

भूगोल[संपादित करें]

थार मरुस्थल का एक भाग बाड़मेर जिला, राजस्थान के पश्चिम में स्थित है। जिला उत्तर में जैसलमेर जिले, दक्षिण में जालौर जिले, पूर्व में पाली और जोधपुर जिले तथा पश्चिम में पाकिस्तान से घिरा है। जिले का कुल क्षेत्रफल 28387 वर्ग किमी है। जिला उत्तरी अक्षांश 24,58’ से 26, 32’ और पूर्वी देशान्तर 70, 05’ से 72, 52’ के मध्य स्थित है। जिले में सबसे लंबी नदी लूनी है। यह जालोर के माध्यम से गुजर कच्छ की खाड़ी में लंबाई और नाली में 480 किमी दूर है। विभिन्न सत्रों में तापमान में बदलाव के काफी अधिक है। गर्मियों में तापमान 51 डिग्री सेल्सियस के लिए 46 डिग्री सेल्सियस के नाद सुनाई देने लगता। सर्दियों में यह शून्य डिग्री सेल्सियस (41 ° एफ) के लिए चला जाता। एक साल में औसत वर्षा 277 मिमी है, जहां मुख्य रूप से बाड़मेर जिले में एक रेगिस्तान है। हालांकि, 16 और 25 अगस्त 2006 के बीच 549 मिमी बारिश के चरम वर्षा जलमग्न पास के एक शहर कवास और पूरे शहर में बाढ़ की वजह से कई लोग मारे गए और भारी नुकसान छोड़ दिया है। के रूप में कई के रूप में बीस नए झीलों छह से 10 से अधिक वर्ग किलोमीटर के एक क्षेत्र को कवर करने के साथ, का गठन किया। खराब योजना बनाई है और तेजी से शहरीकरण बाढ़ फ्लैश करने के लिए बाड़मेर के जोखिम बढ़ गया है। स्थानीय पारिस्थितिकी और मिट्टी के प्रकार छोटी और लंबी अवधि के नुकसान का कारण बनता है, जो अचानक या अत्यधिक पानी के संचय से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं है। अन्य क्षेत्रों में भी स्थानीय लोगों के जीवन और आजीविका की धमकी दी है, जो 'अदृश्य आपदाओं' के क्रमिक प्रभाव पीड़ित हैं।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

जसोल[संपादित करें]

एक समय में जसोल मालानी का प्रमुख क्षेत्र था। रावल मल्लीनाथ के नाम पर परगने का नाम मालानी पङा, इस प्राचीन गांव का नाम राठौड़ उपवंश के वंशजों के नाम पर पड़ा। यहां पर स्थित जैन मंदिर और हिंदु मंदिर जसोल के मुख्य आकर्षण हैं। यहां एक चमत्कारिक देवी माता रानी भटीयाणी का मन्दिर है।

हरसाणी[संपादित करें]

यह बाडमेर-गिराब और शिव-गडरारोड सडक के मिलन स्थल पर एक चोराहे पर आया हुआ है यहा एक माल्हण बाई का चमत्कारिक मन्दिर है।

जानसिह की बेरी[संपादित करें]

यह ग्राम शिव-गडरारोड मार्ग पर शिव से ४३ किलोमिटर पर आया हुआ है यहा एक सच्चियाय माता क मन्दिर है।

खेड़[संपादित करें]

राठौड़ वंश के संस्थापक राव सिहा और उनके पुत्र ने खेड़ को गुहिल राजपूतों से जीता और यहां राठौड़ों का गढ़ बनाया। रणछोड़जी का विष्णु मंदिर यहां का प्रमुख आकर्षण है। मंदिर के चारों और दीवार बनी है और द्वार पर गरुड़ की प्रतिमा लगी है जिसे देख कर लगता है मानो वे मंदिर की रक्षा कर रहे हों। पास ही ब्रह्मा, भैरव, महादेव और जैन मंदिर भी हैं। जो सैलानियो क मुख्य आकर्स्न का केन्द्र है। गुहिल राजपूत यहा से भावनगर चले गये और १९४७ तक शासन किया।khed par rawal jagmal ka raj tha rawal jagmal ki ek shkha arang me kanasriya rathore niwash krti he .

सन्दर्भ[1][संपादित करें]

kanasriya